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मंगलवार, 17 जनवरी 2017

छोड़ दिया


 किशोरावस्था में अपना ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करके अपनी जेब में बटुआ रखना आरंभ करने के पश्चात हमारे पुत्र के संबंध में हमें अनेकों लोगों से फोन आने लगे - जो उसके द्वारा अपना बटुआ यहाँ-वहाँ भूल जाने या छोड़ देने के पश्चात बटुआ ले जाने के लिए होते थे। हमें बारंबार उसे सचेत करना पड़ा कि वह अपने बटुए का ध्यान रखे और उसे ऐसे ही कहीं भी नहीं छोड़ दिया करे।

   लेकिन अपनी चीज़ें छोड़ देना सदा ही बुरा नहीं होता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में यूहन्ना 4 में हम एक स्त्री के बारे में पढ़ते हैं जो कुएं पर पानी भरने आई थी। उसी कुएं पर प्रभु यीशु भी बैठे थे; उनसे उस स्त्री के वार्तालाप के पश्चात, उस स्त्री का उद्देश्य बिलकुल बदल गया और वह पानी भरने के अपने बरतन को वहीं छोड़कर वापस नगर को लौट गई ताकि जो बातें प्रभु यीशु ने उससे कहीं उन्हें लोगों को बता सके (पद 28-29)। प्रभु यीशु के बारे में बताने के उत्साह के सामने पानी की उसकी शारीरिक आवश्यकता फीकी पड़ गई।

   प्रभु यीशु की सेवकाई के आरंभ में, झील के तट पर काम करते हुए पतरस और अन्द्रियास उन्हें मिले, और प्रभु ने उन्हें अपने पीछे हो लेने के लिए बुलाया। वे दोनों तुरंत अपने मछली पकड़ने के जाल, जो उनके जीविका कमाने के साधन थे, छोड़कर प्रभु यीशु के पीछे हो लिए (मत्ती 4:18-20)। इसी प्रकार जब प्रभु यीशु ने उन्हें बुलाया तो यूहन्ना और याकूब भी अपने जाल, नाव और पिता को छोड़कर प्रभु यीशु के पीछे हो लिए (पद 21-22)।

   प्रभु यीशु मसीह के पीछे हो लेने के हमारे नए जीवन में हमें कई बातों, कई चीज़ों को पीछे छोड़ना हो सकता है, जिनमें से कई ऐसी भी हैं जिनसे स्थायी संतुष्टि प्राप्त नहीं होती है। जिनकी कभी हमें तीव्र लालसा रहती थी, प्रभु यीशु से मिलने वाले जीवन जल और उसकी तृप्ति के सामने वे बातें व्यर्थ हो जाती हैं, उन्हें छोड़ देना कोई घाटे का सौदा नहीं रह जाता। - सिंडी हैस कैस्पर

प्रभु यीशु ने हमारे प्रति अपना प्रेम हमारे लिए अपने प्राण बलिदान करके दिखाया; 
आज, उसके प्रति हम अपना प्रेम उसके लिए जीवन व्यतीत करके दिखाते हैं।

इसलिये तुम चिन्‍ता कर के यह न कहना, कि हम क्या खाएंगे, या क्या पीएंगे, या क्या पहिनेंगे? क्योंकि अन्यजाति इन सब वस्‍तुओं की खोज में रहते हैं, और तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता जानता है, कि तुम्हें ये सब वस्तुएं चाहिए। इसलिये पहिले तुम उसे राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्तुएं भी तुम्हें मिल जाएंगी। - मत्ती 6:31-33

बाइबल पाठ: यूहन्ना 4:6-14; 24-30
John 4:6 और याकूब का कूआं भी वहीं था; सो यीशु मार्ग का थका हुआ उस कूएं पर यों ही बैठ गया, और यह बात छठे घण्टे के लगभग हुई। 
John 4:7 इतने में एक सामरी स्त्री जल भरने को आई: यीशु ने उस से कहा, मुझे पानी पिला। 
John 4:8 क्योंकि उसके चेले तो नगर में भोजन मोल लेने को गए थे। 
John 4:9 उस सामरी स्त्री ने उस से कहा, तू यहूदी हो कर मुझ सामरी स्त्री से पानी क्यों मांगता है? (क्योंकि यहूदी सामरियों के साथ किसी प्रकार का व्यवहार नहीं रखते)। 
John 4:10 यीशु ने उत्तर दिया, यदि तू परमेश्वर के वरदान को जानती, और यह भी जानती कि वह कौन है जो तुझ से कहता है; मुझे पानी पिला तो तू उस से मांगती, और वह तुझे जीवन का जल देता। 
John 4:11 स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, तेरे पास जल भरने को तो कुछ है भी नहीं, और कूआं गहिरा है: तो फिर वह जीवन का जल तेरे पास कहां से आया? 
John 4:12 क्या तू हमारे पिता याकूब से बड़ा है, जिसने हमें यह कूआं दिया; और आप ही अपने सन्तान, और अपने ढोरों समेत उस में से पीया? 
John 4:13 यीशु ने उसको उत्तर दिया, कि जो कोई यह जल पीएगा वह फिर प्यासा होगा। 
John 4:14 परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्तकाल तक प्यासा न होगा: वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा। 
John 4:24 परमेश्वर आत्मा है, और अवश्य है कि उसके भजन करने वाले आत्मा और सच्चाई से भजन करें। 
John 4:25 स्त्री ने उस से कहा, मैं जानती हूं कि मसीह जो ख्रीस्‍तुस कहलाता है, आनेवाला है; जब वह आएगा, तो हमें सब बातें बता देगा। 
John 4:26 यीशु ने उस से कहा, मैं जो तुझ से बोल रहा हूं, वही हूं।
John 4:27 इतने में उसके चेले आ गए, और अचंभा करने लगे, कि वह स्त्री से बातें कर रहा है; तौभी किसी ने न कहा, कि तू क्या चाहता है? या किस लिये उस से बातें करता है। 
John 4:28 तब स्त्री अपना घड़ा छोड़कर नगर में चली गई, और लोगों से कहने लगी। 
John 4:29 आओ, एक मनुष्य को देखो, जिसने सब कुछ जो मैं ने किया मुझे बता दिया: कहीं यह तो मसीह नहीं है? 
John 4:30 सो वे नगर से निकलकर उसके पास आने लगे।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 41-42
  • मत्ती 12:1-23


सोमवार, 16 जनवरी 2017

विवश


   जॉन ल्युइस, जो अमेरिका की राष्ट्रीय सभा के सदस्य हैं, उस समय 23 वर्ष के थे जब उन्होंने डा० मार्टिन लूथर किंग के 1963 के एतिहासिक मानवाधिकार अभियान "मार्च ऑन वॉशिंगटन" में भाग लिया। अब उस घटना के अर्ध-शताब्दी पश्चात, जब पत्रकार बिल मौयेर्स ने ल्युइस से पूछा कि उस समय डा० किंग के द्वारा दिए गए प्रसिद्ध भाषण, "आई हैव ए ड्रीम" का उन पर क्या प्रभाव हुआ, तो श्री. ल्युइस ने उत्तर दिया, "आप उन्हें सुनने के पश्चात बिना प्रभावित हुए वापस पहले जैसे कार्य पर नहीं जा सकते थे। आप कुछ करने, किसी कार्य में लगने के लिए विवश हो गए। आपको आगे बढ़ना था, आपको जाकर इस बात का समाचार फैलाना ही था।"

   प्रभु यीशु के संपर्क में आने वाले अनेकों लोगों के साथ भी यही होता है; एक बार प्रभु यीशु को सुन लेने के बाद, वे उसके विषय में तटस्थ नहीं रह पाते, वे कुछ निर्णय लेने और कार्य करने के लिए विवश अनुभव करते हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में यूहन्ना 7:25-46 में प्रभु यीशु के प्रति दो भिन्न प्रतिक्रियाएं दिखाई गई हैं। जबकि उसकी बातें सुनकर "बहुत से लोगों ने उस पर विश्वास किया" (पद 31), उस समय के धर्म के अगुवों ने उसे शान्त कर देने के लिए प्रभु को पकड़ने के लिए सिपाहियों को भेजा (पद 32)। जब प्रभु यीशु लोगों से कह रहे थे, "...यदि कोई प्यासा हो तो मेरे पास आकर पीए। जो मुझ पर विश्वास करेगा, जैसा पवित्र शास्त्र में आया है उसके हृदय में से जीवन के जल की नदियां बह निकलेंगी" (पद 37-38) तब संभवतः वे सिपाही वहाँ थे और प्रभु की बात सुन रहे थे, और वे सिपाही प्रभु यीशु को गिरफ्तार किए बिना ही लौट गए। जब उन सिपाहियों से पूछा गया कि वे प्रभु यीशु को बन्दी बना कर क्यों नहीं लाए (पद 45), तो उनका उत्तर था "किसी मनुष्य ने कभी ऐसी बातें नहीं कीं" (पद 46)।

   प्रभु यीशु के वचन हमें विवश करते हैं कि हम उसके बारे में अपने जीवनों में कोई निर्णय लें, अपने सामान्य कार्यों से ऊपर उठकर उसके लिए कुछ करें, आगे बढ़ें और उसके सुसमाचार को औरों तक पहुँचाएं। - डेविड मैक्कैसलैंड


क्रूस पर प्रभु यीशु का बलिदान मेरे पापों से छुटकारे का 
और उसके प्रति मेरे समर्पण एवं आज्ञाकारिता का कारण है।

शमौन पतरस ने उसको उत्तर दिया, कि हे प्रभु हम किस के पास जाएं? अनन्त जीवन की बातें तो तेरे ही पास हैं। और हम ने विश्वास किया, और जान गए हैं, कि परमेश्वर का पवित्र जन तू ही है। - यूहन्ना 6:68-69

बाइबल पाठ: यूहन्ना 7:31-46
John 7:31 और भीड़ में से बहुतेरों ने उस पर विश्वास किया, और कहने लगे, कि मसीह जब आएगा, तो क्या इस से अधिक आश्चर्यकर्म दिखाएगा जो इस ने दिखाए? 
John 7:32 फरीसियों ने लोगों को उसके विषय में ये बातें चुपके चुपके करते सुना; और महायाजकों और फरीसियों ने उसके पकड़ने को सिपाही भेजे। 
John 7:33 इस पर यीशु ने कहा, मैं थोड़ी देर तक और तुम्हारे साथ हूं; तब अपने भेजने वाले के पास चला जाऊंगा। 
John 7:34 तुम मुझे ढूंढ़ोगे, परन्तु नहीं पाओगे और जहां मैं हूं, वहां तुम नहीं आ सकते। 
John 7:35 यहूदियों ने आपस में कहा, यह कहां जाएगा, कि हम इसे न पाएंगे: क्या वह उन के पास जाएगा, जो यूनानियों में तित्तर बित्तर हो कर रहते हैं, और यूनानियों को भी उपदेश देगा? 
John 7:36 यह क्या बात है जो उसने कही, कि तुम मुझे ढूंढ़ोगे, परन्तु न पाओगे: और जहां मैं हूं, वहां तुम नहीं आ सकते? 
John 7:37 फिर पर्व के अंतिम दिन, जो मुख्य दिन है, यीशु खड़ा हुआ और पुकार कर कहा, यदि कोई प्यासा हो तो मेरे पास आकर पीए। 
John 7:38 जो मुझ पर विश्वास करेगा, जैसा पवित्र शास्त्र में आया है उसके हृदय में से जीवन के जल की नदियां बह निकलेंगी। 
John 7:39 उसने यह वचन उस आत्मा के विषय में कहा, जिसे उस पर विश्वास करने वाले पाने पर थे; क्योंकि आत्मा अब तक न उतरा था; क्योंकि यीशु अब तक अपनी महिमा को न पहुंचा था। 
John 7:40 तब भीड़ में से किसी किसी ने ये बातें सुन कर कहा, सचमुच यही वह भविष्यद्वक्ता है। 
John 7:41 औरों ने कहा; यह मसीह है, परन्तु किसी ने कहा; क्यों? क्‍या मसीह गलील से आएगा? 
John 7:42 क्या पवित्र शास्त्र में यह नहीं आया, कि मसीह दाऊद के वंश से और बैतलहम गांव से आएगा जहां दाऊद रहता था? 
John 7:43 सो उसके कारण लोगों में फूट पड़ी। 
John 7:44 उन में से कितने उसे पकड़ना चाहते थे, परन्तु किसी ने उस पर हाथ न डाला।
John 7:45 तब सिपाही महायाजकों और फरीसियों के पास आए, और उन्होंने उन से कहा, तुम उसे क्यों नहीं लाए? 
John 7:46 सिपाहियों ने उत्तर दिया, कि किसी मनुष्य ने कभी ऐसी बातें नहीं कीं।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 39-40
  • मत्ती 11


रविवार, 15 जनवरी 2017

विश्राम-स्थल



   न्यू-यॉर्क में भूमिगत रेल में हुए एक साधारण से भलाई के कार्य का समाचार विश्व-भर में फैल गया और सराहा गया। एक जवान पुरुष, अपने साथ बैठे एक वृद्ध यात्री के कंधे पर सिर रखकर सो गया। जब किसी ने उसे उठाने का प्रयास करना चाहा तो उस वृद्ध ने मना करते हुए कहा, "उसका दिन बड़ा थकाने वाला रहा होगा, उसे सोने दो; हम सबने यह अनुभव किया है" और लगभग एक घंटे तक उस वृद्ध यात्री ने उस थके हुए जवान को अपने कंधे पर सिर रखकर सोते रहने दिया जब तक कि उसके उतरने का स्थान नहीं आ गया, और तब उसने बड़े धीरे से उस जवान के सिर को अपने कंधे पर से हटाया। इस दौरान एक अन्य यात्री ने इसकी फोटो खींच कर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दी, और तुरंत ही वह सब जगह फैल गई, सराही गई।

   उस वृद्ध की वह भलाई हम सबके अन्दर की इच्छा को दर्शाती है - परमेश्वर के हृदय को प्रतिबिंबित करने वाली दया का अनुभव प्राप्त होना। इस दया को हम प्रभु यीशु मसीह में सजीव देखते हैं; एक बार जब प्रभु के चेलों ने छोटे बच्चों से होने वाले शोर और परेशानी से उन्हें बचाने के लिए बच्चों को प्रभु के पास आने से रोकने का प्रयास किया तो प्रभु ने चेलों से कहा कि वे बच्चों को उनके पास आने दें; प्रभु ने बच्चों को गोद में लिया, उन्हें आशीष दी (मरकुस 10:16), और साथ ही उन बच्चों में होकर हम सबके लिए यह शिक्षा भी रखी कि हम व्यसकों में भी, उन बच्चों के समान ही, प्रभु के प्रति प्रेम और विश्वास होना चाहिए (पद 13-16)।

   प्रभु यीशु हमें आश्वस्त करता है कि उसमें हम सभी सुरक्षित हैं; हम चाहे जागते हों या सो रहे हों, हम उस का सहारा ले सकते हैं, उस पर अपने जीवनों को टिका सकते हैं; जब हम जीवन की परिस्थितियों से थकित होते हैं, तो वह हमारे लिए सर्वोत्तम विश्राम-स्थल होता है। - मार्ट डीहॉन

परमेश्वर से बढ़कर सुरक्षित विश्राम-स्थल कोई अन्य नहीं है।

इसलिये परमेश्वर के बलवन्‍त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए। और अपनी सारी चिन्‍ता उसी पर डाल दो, क्योंकि उसको तुम्हारा ध्यान है। - 1 पतरस 5:6-7

बाइबल पाठ: मरकुस 10:13-16
Mark 10:13 फिर लोग बालकों को उसके पास लाने लगे, कि वह उन पर हाथ रखे, पर चेलों ने उन को डांटा। 
Mark 10:14 यीशु ने यह देख क्रुध हो कर उन से कहा, बालकों को मेरे पास आने दो और उन्हें मना न करो, क्योंकि परमेश्वर का राज्य ऐसों ही का है। 
Mark 10:15 मैं तुम से सच कहता हूं, कि जो कोई परमेश्वर के राज्य को बालक की नाईं ग्रहण न करे, वह उस में कभी प्रवेश करने न पाएगा। 
Mark 10:16 और उसने उन्हें गोद में लिया, और उन पर हाथ रखकर उन्हें आशीष दी।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 36-38
  • मत्ती 10:21-42


शनिवार, 14 जनवरी 2017

योग्य तथा लाभदायक


   हमारे 9 वर्षीय पुत्र रॉबर्ट ने अपनी पेन्सिल फेंकते हुए निराशा के साथ कहा, "मैं यह नहीं कर सकता; यह बहुत कठिन है!" रॉबर्ट को डिस्लेक्सिया है, जिसके कारण अक्षरों का ज्ञान, अर्थात उन्हें पढ़ना, लिखना और समझना बहुत कठिन हो जाता है; और रॉबर्ट प्रयास करते-करते निराश हो चुका था। उसकी इस निराशा एवं परेशानी का एक समाधान निकाला गया, परन्तु वह कठिन था; उसके साथ हमें भी प्रतिदिन संध्या को, बिना किसी भी अपवाद के, 20 मिनिट तक पढ़ना और अक्षरों की वर्तनी का अभ्यास करना होगा। कभी-कभी हमारा मन भी यह करने को कदापि तैयार नहीं होता था, और कभी उसकी धीमी प्रगति के कारण हमें भी निराशा होती थी। परन्तु हम रॉबर्ट को उसकी शारीरिक आयु के अनुसार पढ़ने-लिखने वाला बनाने के लिए दृढ़-संकल्प थे, इसलिए हमारे प्रयास ज़ारी रहे।

   हमारे इन प्रयासों के 2  1/2 वर्ष के पश्चात, सारे संघर्ष और आँसु योग्य और लाभप्रद लगने लगे - रॉबर्ट ने पढ़ना, लिखना और वर्तनी, तथा हमने धैर्य रख कर प्रयास करते रहना सीख लिया।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के एक प्रमुख पात्र - प्रेरित पौलुस को परमेश्वर ने प्रभु यीशु मसीह में पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार के प्रचार के लिए नियुक्त किया था, उन लोगों के बीच में जिन्होंने कभी यह नहीं सुना था; और ऐसा करने के अपने लक्ष्य को पूरा करने के प्रयासों में पौलुस को हर प्रकार की कठिनाई एवं परेशानी सहनी पड़ी। ऐसा करते हुए उसे सताया गया, मारा-पीटा गया, बन्दी बनाया गया, गलत समझा गया और उसे मृत्यु के जोखिम भी उठाने पड़े (2 कुरिन्थियों 11:23-27)। लेकिन सुसमाचार सुनने तथा उसपर विश्वास करने और मानने से लोगों के जीवनों में आने वाले परिवर्तन तथा आनन्द को देखना उस के लिए उन सभी विपरीत परिस्थितियों को योग्य बना देता था।

   यदि आज आपको लगता है कि परमेश्वर ने आपको जिस कार्य के लिए बुलाया है वह बहुत कठिन है, तो स्मरण रखिए कि इस कठिन और असंभव प्रतीत होने वाली यात्रा में अद्भुत आनन्द और बहुमूल्य आत्मिक पाठ छुपे हुए हैं, जो आपको अभी चाहे ना दिखाई पड़ें, परन्तु जैसे जैसे आप अपने लक्ष्य की ओर बढ़ेंगे, परमेश्वर उन्हें आपको दिखाता और देता जाएगा; और वह आनन्द तथा संबंधित पाठ इस सब को योग्य तथा लाभदायक बना देंगे। - मेरियन स्ट्राउड


केवल लक्ष्य ही नहीं, वरन उसका मार्ग भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

क्योंकि अब मैं अर्घ की नाईं उंडेला जाता हूं, और मेरे कूच का समय आ पहुंचा है। मैं अच्छी कुश्‍ती लड़ चुका हूं मैं ने अपनी दौड़ पूरी कर ली है, मैं ने विश्वास की रखवाली की है। भविष्य में मेरे लिये धर्म का वह मुकुट रखा हुआ है, जिसे प्रभु, जो धर्मी, और न्यायी है, मुझे उस दिन देगा और मुझे ही नहीं, वरन उन सब को भी, जो उसके प्रगट होने को प्रिय जानते हैं। - 2 तिमुथियुस 4:6-8

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 11:22-33
2 Corinthians 11:22 क्या वे ही इब्रानी हैं? मैं भी हूं: क्या वे ही इस्त्राएली हैं? मैं भी हूँ: क्या वे ही इब्राहीम के वंश के हैं ?मैं भी हूं: क्या वे ही मसीह के सेवक हैं? 
2 Corinthians 11:23 (मैं पागल की नाईं कहता हूं) मैं उन से बढ़कर हूं! अधिक परिश्रम करने में; बार बार कैद होने में; कोड़े खाने में; बार बार मृत्यु के जोखिमों में। 
2 Corinthians 11:24 पांच बार मैं ने यहूदियों के हाथ से उन्‍तालीस उन्‍तालीस कोड़े खाए। 
2 Corinthians 11:25 तीन बार मैं ने बेंतें खाईं; एक बार पत्थरवाह किया गया; तीन बार जहाज जिन पर मैं चढ़ा था, टूट गए; एक रात दिन मैं ने समुद्र में काटा। 
2 Corinthians 11:26 मैं बार बार यात्राओं में; नदियों के जोखिमों में; डाकुओं के जोखिमों में; अपने जाति वालों से जोखिमों में; अन्यजातियों से जोखिमों में; नगरों में के जोखिमों में; जंगल के जोखिमों में; समुद्र के जोखिमों में; झूठे भाइयों के बीच जोखिमों में; 
2 Corinthians 11:27 परिश्रम और कष्‍ट में; बार बार जागते रहने में; भूख-प्यास में; बार बार उपवास करने में; जाड़े में; उघाड़े रहने में। 
2 Corinthians 11:28 और और बातों को छोड़कर जिन का वर्णन मैं नहीं करता सब कलीसियाओं की चिन्‍ता प्रति दिन मुझे दबाती है। 
2 Corinthians 11:29 किस की निर्बलता से मैं निर्बल नहीं होता? किस के ठोकर खाने से मेरा जी नहीं दुखता? 
2 Corinthians 11:30 यदि घमण्ड करना अवश्य है, तो मैं अपनी निर्बलता की बातों पर करूंगा। 
2 Corinthians 11:31 प्रभु यीशु का परमेश्वर और पिता जो सदा धन्य है, जानता है, कि मैं झूठ नहीं बोलता। 
2 Corinthians 11:32 दमिश्क में अरितास राजा की ओर से जो हाकिम था, उसने मेरे पकड़ने को दमिश्कियों के नगर पर पहरा बैठा रखा था। 
2 Corinthians 11:33 और मैं टोकरे में खिड़की से हो कर भीत पर से उतारा गया, और उसके हाथ से बच निकला।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 33-35
  • मत्ती 10:1-20


शुक्रवार, 13 जनवरी 2017

विश्राम


   मैं नहीं जानता कि परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार आसप किस निराशाजनक स्थिति में आ गया था जब उसने भजन 77 लिखा; लेकिन मैंने वैसे ही विलाप सुने भी हैं और करे भी हैं। मेरी युवा पुत्री की आकस्मिक मृत्यु को लगभग बारह वर्ष हुए हैं, इस दौरान अनेकों ऐसे लोगों ने जिन्होंने किसी प्रीय जन के जाने के दुःख को अनुभव किया है, मेरे साथ अपने दुःख भरे अनुभवों को बाँटा है। उन लोगों के विलाप में भी, आसप के विलाप के समान ही:
परमेश्वर की दोहाई देना (पद 1); आकाश की ओर खाली हाथों को फैलाना (पद 2); हताश कर देने वाली परिस्थितियों के कारण परमेश्वर के विषय परेशान करने वाले विचारों का सामना करना (पद 3); वर्णन से बाहर परेशानी उठाना (पद 4); त्याग दिए जाने, या अकेले छोड़ दिए जाने की भावना से आतंकित होना (पद 7); की गई प्रतिज्ञाओं को ना निभाने, तथा करुणा, दया, अनुकंपा आदि का अभाव होने के भय (पद 8) सम्मिलित थे।

   लेकिन आसप के लिए पद 10 से एक परिवर्तन आता है, जब वह परमेश्वर के महान कार्यों को स्मरण करना आरंभ करता है। उसके विचार परमेश्वर के प्रेम की ओर मुड़ते हैं; जो परमेश्वर ने किया है उनकी यादों की ओर जाते हैं। प्राचीन समय में परमेश्वर के द्वारा किए गए अद्भुत कार्यों, उसकी सदा बनी रहने वाली विश्वासयोग्यता, दया और करुणा की ओर जाते हैं। वह परमेश्वर की सृष्टि और सृष्टि में विदित उसकी महानता, उसकी सामर्थ पर और उसके द्वारा हमारे छुटकारे के कार्य पर विचार केंद्रित करता है; और इन सब बातों के द्वारा उसका दृष्टिकोण परिवर्तित हो जाता है।

   इस जीवन में हताशा वास्तविक है, और उस से संबंधित प्रश्नों के उत्तर सरलता से नहीं आते। लेकिन, जब हम परमेश्वर की महिमा, वैभव और गौरव, सामर्थ तथा महान एवं वर्णन से बाहर प्रेम पर विचार करते हैं, तो अभिभूत कर देने वाले उस अन्धकार में भी जीवन की ज्योति स्पष्ट चमकती हुई दिखाई देती है, हताशा बैठ जाती है। अपने कठिन समय में, आसप के समान ही, हमें भी परमेश्वर के गुणों और कार्यों पर मनन करना चाहिए, विशेषकर प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास लाने से मिलने वाले सेंत-मेंत उद्धार पर; और यह हमें पुनः उसके प्रेम और संगति में विश्राम प्रदान कर देगा। - डेव ब्रैनन

बीते समय में परमेश्वर की विश्वासयोग्यता एवं सहायता को स्मरण करने से 
हम आज की परिस्थितियों में विश्राम पा सकते हैं।

तू सम्मति देता हुआ, मेरी अगुवाई करेगा, और तब मेरी महिमा कर के मुझ को अपने पास रखेगा। - भजन 73:24

बाइबल पाठ: भजन 77:1-15
Psalms 77:1 मैं परमेश्वर की दोहाई चिल्ला चिल्लाकर दूंगा, मैं परमेश्वर की दोहाई दूंगा, और वह मेरी ओर कान लगाएगा। 
Psalms 77:2 संकट के दिन मैं प्रभु की खोज में लगा रहा; रात को मेरा हाथ फैला रहा, और ढीला न हुआ, मुझ में शांति आई ही नहीं। 
Psalms 77:3 मैं परमेश्वर का स्मरण कर कर के करहाता हूं; मैं चिन्ता करते करते मूर्छित हो चला हूं। (सेला) 
Psalms 77:4 तू मुझे झपक्की लगने नहीं देता; मैं ऐसा घबराया हूं कि मेरे मुंह से बात नहीं निकलती।
Psalms 77:5 मैंने प्राचीन काल के दिनों को, और युग युग के वर्षों को सोचा है। 
Psalms 77:6 मैं रात के समय अपने गीत को स्मरण करता; और मन में ध्यान करता हूं, और मन में भली भांति विचार करता हूं: 
Psalms 77:7 क्या प्रभु युग युग के लिये छोड़ देगा; और फिर कभी प्रसन्न न होगा? 
Psalms 77:8 क्या उसकी करूणा सदा के लिये जाती रही? क्या उसका वचन पीढ़ी पीढ़ी के लिये निष्फल हो गया है? 
Psalms 77:9 क्या ईश्वर अनुग्रह करना भूल गया? क्या उसने क्रोध कर के अपनी सब दया को रोक रखा है? (सेला) 
Psalms 77:10 मैने कहा यह तो मेरी दुर्बलता ही है, परन्तु मैं परमप्रधान के दाहिने हाथ के वर्षों को विचारता हूं।
Psalms 77:11 मैं याह के बड़े कामों की चर्चा करूंगा; निश्चय मैं तेरे प्राचीन काल वाले अद्भुत कामों को स्मरण करूंगा। 
Psalms 77:12 मैं तेरे सब कामों पर ध्यान करूंगा, और तेरे बड़े कामों को सोचूंगा। 
Psalms 77:13 हे परमेश्वर तेरी गति पवित्रता की है। कौन सा देवता परमेश्वर के तुल्य बड़ा है? 
Psalms 77:14 अद्भुत काम करने वाला ईश्वर तू ही है, तू ने अपने देश देश के लोगों पर अपनी शक्ति प्रगट की है। 
Psalms 77:15 तू ने अपने भुजबल से अपनी प्रजा, याकूब और यूसुफ के वंश को छुड़ा लिया है। (सेला)

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 31-32
  • मत्ती 9:18-38


गुरुवार, 12 जनवरी 2017

कथा-वाचक


   अमेरिका के गृह-युद्ध (1861-1865) के बाद के वर्षों में मेजर जनरल ल्यु वॉलेस न्यू-मेक्सिको इलाके के; जो अभी तक अन्य संयुक्त राज्यों के साथ जोड़ा नहीं गया था, राज्यपाल थे। उस इलाके में उनके कार्य ने उन्हें उस समय के उन जाने-माने चरित्रों के साथ संपर्क करवाया, जिनके किस्सों को आज हम अमेरिका के ’वाइल्ड वेस्ट’ (प्रशासनिक नियंत्रण-विहीन पश्चिमी क्षेत्र) की कहानियों, कुछ सच्ची और अनेकों काल्पनिक, में पढ़ते हैं; जैसे कि ’बिल्ली द किड’ और ’शेरिफ़ पैट गैरट’। इसी समय में वॉलेस ने अपना सुप्रसिद्ध उपन्यास, ’बेन-हर: ए टेल ऑफ़ क्राईस्ट’ भी लिखा, जिसे उन्नीसवीं सदी की सबसे प्रभावशाली मसीही पुस्तक कहा गया है।

   गृह-युद्ध और ’वाइल्ड वेस्ट’ के समय की हिंसा में वॉलेस ने पाप का मानव जाति पर बहुत बुरा और भयानक प्रभाव देखा था। अपने जीवन काल के अनुभवों से ल्यु वॉलेस ने समझा कि केवल मसीह यीशु ही में पापों से मुक्ति और परमेश्वर के साथ मिल-मिलाप की सामर्थ है, और अपने लिखे लोक प्रीय उपन्यास में इस बात को दिखाया और समझाया।

   मसीह यीशु के अनुयायी के लिए, जीवन का सबसे उत्कृष्ट पल वह होता है जब, "उसी ने हमें अन्धकार के वश से छुड़ाकर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया। जिस में हमें छुटकारा अर्थात पापों की क्षमा प्राप्त होती है" (कुलुस्सियों 1:13-14)। यह क्षमा और छुटकारा पा लेने के पश्चात हम परमेश्वर द्वारा हमारे जीवन में किए गए इस अद्भुत कार्य के गवाह, उस कार्य से जीवन में आए परिवर्तन की कहानी को औरों को बताने वाले ’कथा-वाचक’ हो जाते हैं। - रैंडी किलगोर


मसीह यीशु द्वारा आपके जीवन में लाए परिवर्तन की कहानी, 
पाप से परेशान संसार को आप को अवश्य सुनानी चाहिए।

और वे मेम्ने के लोहू के कारण, और अपनी गवाही के वचन के कारण, उस पर जयवन्‍त हुए, और उन्होंने अपने प्राणों को प्रिय न जाना, यहां तक कि मृत्यु भी सह ली। - प्रकाशितवाक्य 12:11

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों 1:13-23
Colossians 1:13 उसी ने हमें अन्धकार के वश से छुड़ाकर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया। 
Colossians 1:14 जिस में हमें छुटकारा अर्थात पापों की क्षमा प्राप्त होती है। 
Colossians 1:15 वह तो अदृश्य परमेश्वर का प्रतिरूप और सारी सृष्‍टि में पहिलौठा है। 
Colossians 1:16 क्योंकि उसी में सारी वस्‍तुओं की सृष्‍टि हुई, स्वर्ग की हो अथवा पृथ्वी की, देखी या अनदेखी, क्या सिंहासन, क्या प्रभुतांए, क्या प्रधानताएं, क्या अधिकार, सारी वस्तुएं उसी के द्वारा और उसी के लिये सृजी गई हैं। 
Colossians 1:17 और वही सब वस्‍तुओं में प्रथम है, और सब वस्तुएं उसी में स्थिर रहती हैं।
Colossians 1:18 और वही देह, अर्थात कलीसिया का सिर है; वही आदि है और मरे हुओं में से जी उठने वालों में पहिलौठा कि सब बातों में वही प्रधान ठहरे। 
Colossians 1:19 क्योंकि पिता की प्रसन्नता इसी में है कि उस में सारी परिपूर्णता वास करे। 
Colossians 1:20 और उसके क्रूस पर बहे हुए लोहू के द्वारा मेल मिलाप कर के, सब वस्‍तुओं का उसी के द्वारा से अपने साथ मेल कर ले चाहे वे पृथ्वी पर की हों, चाहे स्वर्ग में की। 
Colossians 1:21 और उसने अब उसकी शारीरिक देह में मृत्यु के द्वारा तुम्हारा भी मेल कर लिया जो पहिले निकाले हुए थे और बुरे कामों के कारण मन से बैरी थे। 
Colossians 1:22 ताकि तुम्हें अपने सम्मुख पवित्र और निष्‍कलंक, और निर्दोष बनाकर उपस्थित करे। 
Colossians 1:23 यदि तुम विश्वास की नेव पर दृढ़ बने रहो, और उस सुसमाचार की आशा को जिसे तुम ने सुना है न छोड़ो, जिस का प्रचार आकाश के नीचे की सारी सृष्‍टि में किया गया; और जिस का मैं पौलुस सेवक बना।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 29-30
  • मत्ती 9:1-17


बुधवार, 11 जनवरी 2017

भय


   गुफाओं में रहने वाले प्राचीन लोगों को लेकर बनाए गए एक चलचित्र में, ग्रग क्रूड नामक एक परिवार का मुख्या यह मान कर रहता है कि उसकी गुफा के बाहर और कोई सुरक्षित स्थान नहीं है; रात के समय वे सब एक साथ सिमट कर रहते हैं जिससे ग्रग उन्हें सुरक्षा प्रदान कर सके। ग्रग चाहता है कि उसकी युवा पुत्री इधर-उधर घूमने और नई चीज़ें देखने की अपनी प्रवृत्ति बदल ले क्योंकि इस से खतरा ही हो सकता है। अपने परिवार से ग्रग का कहना है, "सदा भयभीत रहो।"

   प्रभु यीशु ने अपने चेलों से सदा ही कहा कि वे भयभीत नहीं हों। यह बात प्रभु ने शिमोन से कही (लूका 5:10) जब प्रभु ने उसे अपने पीछे हो लेने के लिए बुलाया। जब अराधनालय का सरदार, याईर, अपनी मरणासन पुत्री के जीवन की माँग लेकर प्रभु यीशु के पास आया तो प्रभु ने उसे भी इन्हीं शब्दों के साथ आश्वस्त किया (लूका 8:50)।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में लूका द्वारा लिखित प्रभु यीशु के जीवन-वृतान्त में लूका 12 अध्याय में प्रभु ने अपने चेलों को सिखाया कि कैसे परमेश्वर उनकी चिंता एवं देख-भाल करता है, इसलिए उन्हें भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है (लूका 12:7)। मृतकों में से अपने पुनरुत्थान के बाद कब्र पर आई हुई स्त्रियों से भी उसने यही कहा, "मत डरो! (मत्ती 28:10)।

   भयभीत होना एक सर्वव्यापी भावना है। हम अपने प्रीय जनों को लेकर चिंतित होते हैं; अपनी आवश्यकताओं तथा अज्ञात भविष्य के लिए आशंकित होते हैं। संसार की दुविधाओं, परिस्थितियों और परेशानियों में हम कैसे विश्वास में बने रहना तथा भयभीत ना होना सीख सकते हैं? प्रभु परमेश्वर ने स्वयं ही हमें इसका आधार दिया है, जिससे हम उस पर अपना भरोसा बनाए रख सकें: "तुम्हारा स्‍वभाव लोभरहित हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। इसलिये हम बेधड़क हो कर कहते हैं, कि प्रभु, मेरा सहायक है; मैं न डरूंगा; मनुष्य मेरा क्या कर सकता है" (इब्रानियों 13:5-6)। - ऐनी सेटास


परमेश्वर का प्रेम हमें हर एक भय की कैद से स्वतंत्र करता है।

इसलिये जब कि लड़के मांस और लोहू के भागी हैं, तो वह आप भी उन के समान उन का सहभागी हो गया; ताकि मृत्यु के द्वारा उसे जिसे मृत्यु पर शक्ति मिली थी, अर्थात शैतान को निकम्मा कर दे। और जितने मृत्यु के भय के मारे जीवन भर दासत्‍व में फंसे थे, उन्हें छुड़ा ले। - इब्रानियों 2:14-15

बाइबल पाठ: लूका 12:4-7, 12:22-32
Luke 12:4 परन्तु मैं तुम से जो मेरे मित्र हो कहता हूं, कि जो शरीर को घात करते हैं परन्तु उसके पीछे और कुछ नहीं कर सकते उन से मत डरो। 
Luke 12:5 मैं तुम्हें चिताता हूं कि तुम्हें किस से डरना चाहिए, घात करने के बाद जिस को नरक में डालने का अधिकार है, उसी से डरो: वरन मैं तुम से कहता हूं उसी से डरो। 
Luke 12:6 क्या दो पैसे की पांच गौरैयां नहीं बिकतीं? तौभी परमेश्वर उन में से एक को भी नहीं भूलता। 
Luke 12:7 वरन तुम्हारे सिर के सब बाल भी गिने हुए हैं, सो डरो नहीं, तुम बहुत गौरैयों से बढ़कर हो। 
Luke 12:22 फिर उसने अपने चेलों से कहा; इसलिये मैं तुम से कहता हूं, अपने प्राण की चिन्‍ता न करो, कि हम क्या खाएंगे; न अपने शरीर की कि क्या पहिनेंगे। 
Luke 12:23 क्योंकि भोजन से प्राण, और वस्‍त्र से शरीर बढ़कर है। 
Luke 12:24 कौवों पर ध्यान दो; वे न बोते हैं, न काटते; न उन के भण्‍डार और न खत्ता होता है; तौभी परमेश्वर उन्हें पालता है; तुम्हारा मूल्य पक्षियों से कहीं अधिक है। 
Luke 12:25 तुम में से ऐसा कौन है, जो चिन्‍ता करने से अपनी अवस्था में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है? 
Luke 12:26 इसलिये यदि तुम सब से छोटा काम भी नहीं कर सकते, तो और बातों के लिये क्यों चिन्‍ता करते हो? 
Luke 12:27 सोसनों के पेड़ों पर ध्यान करो कि वे कैसे बढ़ते हैं; वे न परिश्रम करते, न कातते हैं: तौभी मैं तुम से कहता हूं, कि सुलैमान भी, अपने सारे वैभव में, उन में से किसी एक के समान वस्‍त्र पहने हुए न था। 
Luke 12:28 इसलिये यदि परमेश्वर मैदान की घास को जो आज है, और कल भाड़ में झोंकी जाएगी, ऐसा पहिनाता है; तो हे अल्प विश्वासियों, वह तुम्हें क्यों न पहिनाएगा? 
Luke 12:29 और तुम इस बात की खोज में न रहो, कि क्या खाएंगे और क्या पीएँगे, और न सन्‍देह करो। 
Luke 12:30 क्योंकि संसार की जातियां इन सब वस्‍तुओं की खोज में रहती हैं: और तुम्हारा पिता जानता है, कि तुम्हें इन वस्‍तुओं की आवश्यकता है। 
Luke 12:31 परन्तु उसके राज्य की खोज में रहो, तो ये वस्‍तुऐं भी तुम्हें मिल जाएंगी। 
Luke 12:32 हे छोटे झुण्ड, मत डर; क्योंकि तुम्हारे पिता को यह भाया है, कि तुम्हें राज्य दे।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 27-28
  • मत्ती 8:18-34