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शुक्रवार, 1 सितंबर 2017

आयु


   दाँतों के रोगों की चिकित्सा संबंधी अपनी लैब में 50 वर्ष कार्य करने के पश्चात डेव बाउमैन ने सेवा-विवृत होकर आराम का जीवन बिताने का निर्णय लिया। मधुमेह और हृदय के रोग के लिए हुए ऑपरेशन ने उसके इस निर्णय को और पक्का कर दिया। परन्तु जब उसने अफ्रीका में स्थित सूडान देश से आए शरणार्थियों के बारे में सुना, जिन्हें सहायता की बहुत आवश्यकता थी, उसने एक जीवन बदल देने वाला निर्णय लिया। उसने उनमें से पाँच का आर्थिक संरक्षक बनना स्वीकार कर लिया।

   जैसे जैसे डेव उन सूडानी जवानों के बारे में और अधिक जानता गया, उसे ज्ञात हुआ कि वे कभी किसी डॉक्टर या दन्त चिकित्सक के पास जाने ही नहीं पाए थे। फिर एक दिन किसी ने चर्च में परमेश्वर के वचन बाइबल के एक पद का उल्लेख किया: "इसलिये यदि एक अंग दु:ख पाता है, तो सब अंग उसके साथ दु:ख पाते हैं; और यदि एक अंग की बड़ाई होती है, तो उसके साथ सब अंग आनन्द मनाते हैं" (1 कुरिन्थियों 12:26)। यह पद उसके मन में गूँजता ही रहा। सूडानी मसीही विश्वासी दुःख उठा रहे थे, उन्हें चिकित्सा सहायता की आवश्यकता थी, और डेव को आभास हुआ कि परमेश्वर उसे इसके बारे कुछ करने को प्रोत्साहित कर रहा है। परन्तु क्या?

   अपनी आयु और खराब स्वास्थ्य के बावजूद, डेव ने सूडान में एक चिकित्सालय बनाने की संभावना के बारे में खोज-बीन करनी आरंभ कर दी। धीरे-धीरे परमेश्वर लोगों और संसाधनों को जोड़ता चला गया, और फिर 2008 में मेमोरियल मसीही अस्पताल ने अपने द्वार मरीज़ों के लिए खोल दिए। तब से सैंकड़ों बीमार और घायल लोगों का वहाँ इलाज हो चुका है।

   मेमोरियल मसीही अस्पताल वहाँ इस तथ्य की गवाही के रूप में खड़ा है कि जब लोग दुःखी होते हैं तो परमेश्वर उनकी चिंता करता है; और अधिकांशतः परमेश्वर मेरे और आपके जैसे सामान्य लोगों में होकर सहायता कार्य को करता है - चाहे हमारी आयु कितनी भी हो, चाहे हम यह सोच बैठे हों कि अब मेरा कार्यकारी जीवन पूरा हो चुका है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


जब लोग दुःखी होते हैं, परमेश्वर देखभाल करता है।

धर्मी लोग खजूर के समान फूले फलेंगे, और लबानोन के देवदार के समान बढ़ते रहेंगे। वे यहोवा के भवन में रोपे जा कर, हमारे परमेश्वर के आंगनों में फूले फलेंगे। वे पुराने होने पर भी फलते रहेंगे, और रस भरे और लहलहाते रहेंगे, जिस से यह प्रगट हो, कि यहोवा सीधा है; वह मेरी चट्टान है, और उस में कुटिलता कुछ भी नहीं। - भजन 92:12-15

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 12:12-26
1 Corinthians 12:12 क्योंकि जिस प्रकार देह तो एक है और उसके अंग बहुत से हैं, और उस एक देह के सब अंग, बहुत होने पर भी सब मिलकर एक ही देह हैं, उसी प्रकार मसीह भी है। 
1 Corinthians 12:13 क्योंकि हम सब ने क्या यहूदी हो, क्या युनानी, क्या दास, क्या स्‍वतंत्र एक ही आत्मा के द्वारा एक देह होने के लिये बपतिस्मा लिया, और हम सब को एक ही आत्मा पिलाया गया। 
1 Corinthians 12:14 इसलिये कि देह में एक ही अंग नहीं, परन्तु बहुत से हैं। 
1 Corinthians 12:15 यदि पांव कहे कि मैं हाथ नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्या वह इस कारण देह का नहीं? 
1 Corinthians 12:16 और यदि कान कहे; कि मैं आंख नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्या वह इस कारण देह का नहीं? 
1 Corinthians 12:17 यदि सारी देह आंख ही होती तो सुनना कहां से होता? यदि सारी देह कान ही होती तो सूंघना कहां होता? 
1 Corinthians 12:18 परन्तु सचमुच परमेश्वर ने अंगो को अपनी इच्छा के अनुसार एक एक कर के देह में रखा है। 
1 Corinthians 12:19 यदि वे सब एक ही अंग होते, तो देह कहां होती? 
1 Corinthians 12:20 परन्तु अब अंग तो बहुत से हैं, परन्तु देह एक ही है। 
1 Corinthians 12:21 आंख हाथ से नहीं कह सकती, कि मुझे तेरा प्रयोजन नहीं, और न सिर पांवों से कह सकता है, कि मुझे तुम्हारा प्रयोजन नहीं। 
1 Corinthians 12:22 परन्तु देह के वे अंग जो औरों से निर्बल दिख पड़ते हैं, बहुत ही आवश्यक हैं। 
1 Corinthians 12:23 और देह के जिन अंगो को हम आदर के योग्य नहीं समझते हैं उन्‍ही को हम अधिक आदर देते हैं; और हमारे शोभाहीन अंग और भी बहुत शोभायमान हो जाते हैं। 
1 Corinthians 12:24 फिर भी हमारे शोभायमान अंगो को इस का प्रयोजन नहीं, परन्तु परमेश्वर ने देह को ऐसा बना दिया है, कि जिस अंग को घटी थी उसी को और भी बहुत आदर हो। 
1 Corinthians 12:25 ताकि देह में फूट न पड़े, परन्तु अंग एक दूसरे की बराबर चिन्‍ता करें। 
1 Corinthians 12:26 इसलिये यदि एक अंग दु:ख पाता है, तो सब अंग उसके साथ दु:ख पाते हैं; और यदि एक अंग की बड़ाई होती है, तो उसके साथ सब अंग आनन्द मनाते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 135-136
  • 1 कुरिन्थियों 12


गुरुवार, 31 अगस्त 2017

विलंब


   कई वर्षों से मैं अपने चचेरे भाई के साथ हमारे जीवनों में पापों की क्षमा और उद्धारकर्ता की आवश्यकता के बारे में बात किया करता था। जब हाल ही में वह मुझ से मिलने आया तो मैंने एक बार फिर उससे आग्रह किया कि वह मसीह यीशु को ग्रहण कर ले; तुरंत ही उसका प्रत्युत्तर था: "मैं यीशु को ग्रहण करना और चर्च आना तो चाहता हूँ, परन्तु अभी नहीं। मैं अन्य धर्मों को मानने वालों के मध्य रहता हूँ। जब तक किसी नए स्थान पर जाकर न बस जऊँ, मैं अपने मसीही विश्वास को भली-भांति निभा नहीं पाऊँगा।" उसने संभावित सताव, उपहास, और साथियों से आने वाले दबाव का हवाला देकर अपना निर्णय टालने को उचित ठहराना चाहा।

   उसके ये सब भय सही थे, परन्तु मैंने उसे आश्वस्त किया कि चाहे कोई भी परिस्थिति क्यों न आ जाए, प्रभु यीशु उसे कभी अकेला नहीं छोड़ेगा। मैंने उसे प्रोत्साहित किया कि वह निर्णय लेने में विलंब न करे, वरन प्रभु परमेश्वर पर भरोसा करे कि वह उसकी सहायता करेगा, उसे सुरक्षा प्रदान करेगा। मेरे भाई ने टालना बन्द करके प्रभु यीशु से पापों की क्षमा की बात को स्वीकार किया, अपना जीवन उसे समर्पित करके प्रभु को अपना निज उद्धारकर्ता स्वीकार कर लिया।

   जब प्रभु यीशु ने लोगों को अपने पीछे हो लेने के लिए आमंत्रित किया, तब उन लोगों ने भी निर्णय टालने के लिए बहाने बनाए - संसार की बातों और ज़िम्मेदारियों में व्यस्त होने के (लूका 9:59-62)। जो उत्तर प्रभु यीशु ने तब उन लोगों को दिया था (पद 60-62) वह आज हम सब से भी आग्रह करता है कि जीवन के सबसे महत्वपूर्ण और अनन्तकाल का प्रभाव रखने वाले इस निर्णय को लेने में विलंब न करें। हमारी आत्माओं के उद्धार से महत्वपूर्ण और कोई विषय नहीं है।

   क्या आज आप परमेश्वर की वाणी को आपको पापों की क्षमा तथा उद्धार पाने के लिए बुलाते हुए सुन रहे हैं - तो विलंब कदापि न करें; जब तक अवसर है समय का सदुपयोग करें और अपना अनन्तकाल सुरक्षित कर लें: "क्योंकि वह तो कहता है, कि अपनी प्रसन्नता के समय मैं ने तेरी सुन ली, और उद्धार के दिन मैं ने तेरी सहायता की: देखो, अभी वह प्रसन्नता का समय है; देखो, अभी उद्धार का दिन है" (2 कुरिन्थियों 6:2)। - लॉरेंस दरमानी

आज ही उद्धार का दिन है।

वरन जिस दिन तक आज का दिन कहा जाता है, हर दिन एक दूसरे को समझाते रहो, ऐसा न हो, कि तुम में से कोई जन पाप के छल में आकर कठोर हो जाए। - इब्रानियों 3:13

बाइबल पाठ: लूका 9:57-62
Luke 9:57 जब वे मार्ग में चले जाते थे, तो किसी न उस से कहा, जहां जहां तू जाएगा, मैं तेरे पीछे हो लूंगा। 
Luke 9:58 यीशु ने उस से कहा, लोमडिय़ों के भट और आकाश के पक्षियों के बसेरे होते हैं, पर मनुष्य के पुत्र को सिर धरने की भी जगह नहीं। 
Luke 9:59 उसने दूसरे से कहा, मेरे पीछे हो ले; उसने कहा; हे प्रभु, मुझे पहिले जाने दे कि अपने पिता को गाड़ दूं। 
Luke 9:60 उसने उस से कहा, मरे हुओं को अपने मुरदे गाड़ने दे, पर तू जा कर परमेश्वर के राज्य की कथा सुना। 
Luke 9:61 एक और ने भी कहा; हे प्रभु, मैं तेरे पीछे हो लूंगा; पर पहिले मुझे जाने दे कि अपने घर के लोगों से विदा हो आऊं। 
Luke 9:62 यीशु ने उस से कहा; जो कोई अपना हाथ हल पर रखकर पीछे देखता है, वह परमेश्वर के राज्य के योग्य नहीं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 132-134
  • 1 कुरिन्थियों 11:17-34


बुधवार, 30 अगस्त 2017

सत्यापित


   मुझे और मेरे मित्रों को ईमेल के द्वारा एक सूचना प्राप्त हुई - एक घातक मकड़ा अमेरिका में आ गया है और लोगों को मार रहा है। उस सूचना में, उसे सच्चा जताने के लिए, कई वैज्ञानिक संज्ञाएं और जीवन की वास्तविक परिस्थितियाँ भी दी गईं थीं, जिससे सूचना सच्ची लग रही थी। परन्तु जब मैंने उस सूचना की पुष्टि के लिए इंटरनैट पर कुछ भरोसे मंद वेबसाईट्स पर खोज की तो पता चला कि वह सच्ची नहीं थी, इंटरनैट पर फैलाए जाने वाले धोखों में से एक थी। यह सच्चाई एक विश्वासयोग्य स्त्रोत से पुष्टि के द्वारा ही स्पष्ट हो पाई।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं कि प्रथम ईसवीं में, मकिदूनिया के कुछ मसीही विश्वासियों ने भी जो प्रचार वे सुन रहे थे, उसे सत्यापित करने के महत्व को समझा, जिसके लिए बाइबल में उनकी प्रशंसा की गई: "ये लोग तो थिस्सलुनीके के यहूदियों से भले थे और उन्होंने बड़ी लालसा से वचन ग्रहण किया, और प्रति दिन पवित्र शास्‍त्रों में ढूंढ़ते रहे कि ये बातें यों ही हैं, कि नहीं" (प्रेरितों 17:11)। बेरिया में रहने वाले वे विश्वासी प्रेरित पौलुस से प्रभु का सन्देश सुनते थे, परन्तु साथ ही वे जाकर उस सन्देश को परमेश्वर के वचन के तब उपलब्ध पुराने नियम खण्ड से सत्यापित भी करते थे। संभवतः पौलुस उन्हें बता रहा था कि पुराने नियम में यह लिखा गया है कि मसीहा दुःख उठाएगा और लोगों के पापों के लिए मारा जाएगा। परन्तु वे स्वयं मूल स्त्रोत से आश्वस्त हो जाना चाहते थे कि जो कहा जा रहा है वह सत्य है।

   जब कभी भी हम ऐसे आत्मिक विचारों या शिक्षाओं को सुनें जो हमें विचलित करें या अटपटी लगें, तो हमें सचेत हो जाना चाहिए। हमें स्वयं पवित्र-शास्त्र से खोजना चाहिए, भरोसेमंद स्त्रोतों से पता करना चाहिए, उसके विषय सही निर्णय करने के लिए प्रार्थना में प्रभु यीशु से बुद्धिमता माँगनी चाहिए। प्रत्येक आत्मिक शिक्षा को सत्यापित करके, तब ही उसे ग्रहण करना चाहिए। - डेव ब्रैनन

परमेश्वर का सत्य हर प्रकार की जाँच में खरा ही उतरेगा।

सब बातों को परखो: जो अच्छी है उसे पकड़े रहो। - 1 थिस्सलुनीकियों 5:21

बाइबल पाठ: प्रेरितों 17:10-13, 1 यूहन्ना 4:1-6
Acts 17:10 भाइयों ने तुरन्त रात ही रात पौलुस और सीलास को बिरीया में भेज दिया: और वे वहां पहुंचकर यहूदियों के आराधनालय में गए। 
Acts 17:11 ये लोग तो थिस्सलुनीके के यहूदियों से भले थे और उन्होंने बड़ी लालसा से वचन ग्रहण किया, और प्रति दिन पवित्र शास्‍त्रों में ढूंढ़ते रहे कि ये बातें यों ही हैं, कि नहीं। 
Acts 17:12 सो उन में से बहुतों ने, और यूनानी कुलीन स्‍त्रियों में से, और पुरूषों में से बहुतेरों ने विश्वास किया। 
Acts 17:13 किन्‍तु जब थिस्सलुनीके के यहूदी जान गए, कि पौलुस बिरीया में भी परमेश्वर का वचन सुनाता है, तो वहां भी आकर लोगों को उकसाने और हलचल मचाने लगे। 

1 John 4:1 हे प्रियों, हर एक आत्मा की प्रतीति न करो: वरन आत्माओं को परखो, कि वे परमेश्वर की ओर से हैं कि नहीं; क्योंकि बहुत से झूठे भविष्यद्वक्ता जगत में निकल खड़े हुए हैं। 
1 John 4:2 परमेश्वर का आत्मा तुम इसी रीति से पहचान सकते हो, कि जो कोई आत्मा मान लेती है, कि यीशु मसीह शरीर में हो कर आया है वह परमेश्वर की ओर से है। 
1 John 4:3 और जो कोई आत्मा यीशु को नहीं मानती, वह परमेश्वर की ओर से नहीं; और वही तो मसीह के विरोधी की आत्मा है; जिस की चर्चा तुम सुन चुके हो, कि वह आने वाला है: और अब भी जगत में है। 
1 John 4:4 हे बालको, तुम परमेश्वर के हो: और तुम ने उन पर जय पाई है; क्योंकि जो तुम में है, वह उस से जो संसार में है, बड़ा है। 
1 John 4:5 वे संसार के हैं, इस कारण वे संसार की बातें बोलते हैं, और संसार उन की सुनता है। 
1 John 4:6 हम परमेश्वर के हैं: जो परमेश्वर को जानता है, वह हमारी सुनता है; जो परमेश्वर को नहीं जानता वह हमारी नहीं सुनता; इसी प्रकार हम सत्य की आत्मा और भ्रम की आत्मा को पहचान लेते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 129-131
  • 1 कुरिन्थियों 11:1-16


मंगलवार, 29 अगस्त 2017

चलना


   मेरी बेटी चलना सीख रही है। मुझे उसे पकड़े रहना पड़ता है, और वह मेरी ऊँगली को दृढ़ता से थामे रहती है, क्योंकि वह अभी भी अपने आप से चलने में अस्थिर है। उसे गिरने का भय रहता है, परन्तु उसे संभालने और स्थिर रखने के लिए मैं उसके साथ बनी रहती हूँ। मेरी सहायता से चलते हुए उसकी आँखों में उत्साह, उल्लास और सुरक्षा की चमक होती है। परन्तु कभी-कभी जब मैं उसे कुछ खतरनाक रास्तों पर नहीं चलने देती हूँ तो वह रोने लगती है; उसे अभी यह समझ नहीं है कि उसे उन रास्तों पर जाने से रोक कर मैं उसकी रक्षा कर रही हूँ, उसे हानि में पड़ने से बचा रही हूँ।

   मेरी छोटी बेटी के समान, हमें भी बहुधा हमारे आत्मिक चाल-चलन में हमारा ध्यान रखने, हमारा मार्गदर्शन करने और हमें स्थिर बनाए रखने के लिए किसी बड़े और सामर्थी की आवश्यकता होती है। हम मसीही विश्वासियों के साथ हमारा प्रभु परमेश्वर है, जो हमारा, हम जो उसकी आत्मिक सन्तान हैं, सदा ध्यान रखता है, हमें चलने में सहायक होता है, हमारे कदमों को सही ओर ले जाता है, हमारा मार्गदर्श्न करता है, और गलत राहों से बचा कर रखता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल का एक नायक, राजा दाऊद, जीवन में परमेश्वर की देखभाल और सहायता की आवश्यकता को भली-भांति जानता था। अपने द्वारा लिखे भजनों में से एक, भजन 18 में दाऊद वर्णन करता है कि कैसे परमेश्वर हमारी सहायता और मार्गदर्शन करता है जब हम किसी परेशानी में पड़कर भटकने लगते हैं (पद 32)। परमेश्वर हमारे पैरों को हरिणियों के समान, जो बिना फिसले ऊँचे स्थानों पर चढ़ जाती हैं, स्थिर करता है (पद 33); और यदि हम फिसल भी जाएं तो भी वह हमें थाम लेने के लिए हमारे साथ बना रहता है (पद 35)।
   
   हम चाहे नए मसीही विश्वासी हों जो आत्मिक जीवन में कदम बढ़ाना अभी सीख ही रहे हैं, या हम अपने विश्वास के जीवन में आगे बढ़ चुके हों, हम सबको प्रभु परमेश्वर के थामे रखने और सही दिशा देने वाले हाथों की आवश्यकता बनी रहती है; और हमारा प्रभु हमारे सहारे और सहायता के लिए सदा हमारे साथ-साथ चलता रहता है। - कीला ओकोआ


मेरे जीवन मार्ग के हर कदम पर परमेश्वर मुझ पर ध्यान बनाए रखता है।

क्योंकि वह तो मुझे विपत्ति के दिन में अपने मण्डप में छिपा रखेगा; अपने तम्बू के गुप्त स्थान में वह मुझे छिपा लेगा, और चट्टान पर चढ़ाएगा। - भजन 27:5

बाइबल पाठ: भजन 18:30-36
Psalms 18:30 ईश्वर का मार्ग सच्चाई; यहोवा का वचन ताया हुआ है; वह अपने सब शरणागतों की ढाल है।
Psalms 18:31 यहोवा को छोड़ क्या कोई ईश्वर है? हमारे परमेश्वर को छोड़ क्या और कोई चट्टान है? 
Psalms 18:32 यह वही ईश्वर है, जो सामर्थ से मेरा कटिबन्ध बान्धता है, और मेरे मार्ग को सिद्ध करता है। 
Psalms 18:33 वही मेरे पैरों को हरिणियों के पैरों के समान बनाता है, और मुझे मेरे ऊंचे स्थानों पर खड़ा करता है। 
Psalms 18:34 वह मेरे हाथों को युद्ध करना सिखाता है, इसलिये मेरी बाहों से पीतल का धनुष झुक जाता है। 
Psalms 18:35 तू ने मुझ को अपने बचाव की ढाल दी है, तू अपने दाहिने हाथ से मुझे सम्भाले हुए है, और मेरी नम्रता ने महत्व दिया है। 
Psalms 18:36 तू ने मेरे पैरों के लिये स्थान चौड़ा कर दिया, और मेरे पैर नहीं फिसले।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 126-128
  • 1 कुरिन्थियों 10:19-33


सोमवार, 28 अगस्त 2017

नायक


   हाल ही में प्रकाशित हुई एक पुस्तक अमेरिका के इतिहास के एक छोटे भाग में लाए गए कल्पना के कार्य के बारे में बताती है। इस पुस्तक में पुराने पश्चिमी अमेरिका में बन्दूकों और गोलियों के सहारे जीवन जीने वाले नायकों, व्याट एर्प और डॉक हॉलिडे को वास्तविक जीवन में नाकारा और नासमझ बताया गया है। नैशनल पब्लिक रेडियो को दिए गए एक साक्षात्कार में पुस्तक के लेखक ने वास्तविक एर्प के बारे में कहा, "उसने अपने सारे जीवन भर कुछ भी उल्लेखनीय, कभी भी नहीं किया।" लेकिन अनेकों उपन्यासों और हॉलिवुड की कई फिल्मों में उसे एक नायक के समान प्रस्तुत किया गया है। परन्तु विश्वासयोग्य एतिहासिक वृतांत बताते हैं कि वह नायक कदापि नहीं था।

   इसकी तुलना में, परमेश्वर के वचन बाइबल में ऐसे अनेकों लोगों का वर्णन है जिनके जीवन में कमियाँ और त्रुटियाँ थीं, परन्तु फिर भी वे परमेश्वर की सहायता और मार्ग्दर्शन से वास्तविक नायक बन गए। उनका विश्वास जीवते सच्चे प्रभु परमेश्वर पर था, जो कमज़ोर और त्रुटियुक्त लोगों को लेता है और अपने अद्भुत उद्देश्यों के लिए उन्हें सामर्थी तथा अनुसरणीय नायक बना देता है।

   बाइबल के एक महान नायक मूसा को ही लीजिए। जब हम मूसा के बारे में सोचते हैं तो अकसर हम यह ध्यान नहीं कर पाते हैं कि वह एक हत्यारा था और परमेश्वर द्वारा दी जा रही ज़िम्मेदारी को स्वीकार करने का कतई इच्छुक नहीं था। उसने इस्त्राएलियों के व्यवहार से खिसिया कर परमेश्वर को ताना भी मारा था, "...तू अपने दास से यह बुरा व्यवहार क्यों करता है? और क्या कारण है कि मैं ने तेरी दृष्टि में अनुग्रह नहीं पाया, कि तू ने इन सब लोगों का भार मुझ पर डाला है? क्या ये सब लोग मेरे ही कोख में पड़े थे? क्या मैं ही ने उन को उत्पन्न किया, जो तू मुझ से कहता है, कि जैसे पिता दूध पीते बालक को अपनी गोद में उठाए उठाए फिरता है, वैसे ही मैं इन लोगों को अपनी गोद में उठा कर उस देश में ले जाऊं, जिसके देने की शपथ तू ने उनके पूर्वजों से खाई है?" (गिनती 11:11-12)। साधारण मनुष्यों की सी प्रवृत्ति मूसा में विद्यमान तो थी; परन्तु नए नियम में इब्रानियों नामक पुस्तक हमें उसके विषय स्मरण दिलाती है, "मूसा तो उसके सारे घर में सेवक के समान विश्वास योग्य रहा, कि जिन बातों का वर्णन होने वाला था, उन की गवाही दे" (इब्रानियों 3:5)।

   जो नायक होते हैं, वे अपने जीवनों द्वारा उस सच्चे तथा वास्तव में अनुसरणीय नायक प्रभु यीशु की ओर लोगों को प्रेरित करते हैं जो कभी किसी को निराश नहीं करता है। - टिम गस्टाफसन


किसी ऐसे को ढूँढ़ रहे हैं जो आपको कभी निराश न करे; तो प्रभु यीशु को देखें।

हे भाइयो, अपने बुलाए जाने को तो सोचो, कि न शरीर के अनुसार बहुत ज्ञानवान, और न बहुत सामर्थी, और न बहुत कुलीन बुलाए गए। परन्तु परमेश्वर ने जगत के मूर्खों को चुन लिया है, कि ज्ञान वालों को लज्ज़ित करे; और परमेश्वर ने जगत के निर्बलों को चुन लिया है, कि बलवानों को लज्ज़ित करे। और परमेश्वर ने जगत के नीचों और तुच्‍छों को, वरन जो हैं भी नहीं उन को भी चुन लिया, कि उन्हें जो हैं, व्यर्थ ठहराए। - 1 कुरिन्थियों 1:26-28

बाइबल पाठ: इब्रानियों 3:1-6
Hebrews 3:1 सो हे पवित्र भाइयों तुम जो स्‍वर्गीय बुलाहट में भागी हो, उस प्रेरित और महायाजक यीशु पर जिसे हम अंगीकार करते हैं ध्यान करो। 
Hebrews 3:2 जो अपने नियुक्त करने वाले के लिये विश्वास योग्य था, जैसा मूसा भी उसके सारे घर में था। 
Hebrews 3:3 क्योंकि वह मूसा से इतना बढ़ कर महिमा के योग्य समझा गया है, जितना कि घर का बनाने वाला घर से बढ़ कर आदर रखता है। 
Hebrews 3:4 क्योंकि हर एक घर का कोई न कोई बनाने वाला होता है, पर जिसने सब कुछ बनाया वह परमेश्वर है। 
Hebrews 3:5 मूसा तो उसके सारे घर में सेवक के समान विश्वास योग्य रहा, कि जिन बातों का वर्णन होने वाला था, उन की गवाही दे। 
Hebrews 3: पर मसीह पुत्र के समान उसके घर का अधिकारी है, और उसका घर हम हैं, यदि हम साहस पर, और अपनी आशा के घमण्‍ड पर अन्‍त तक दृढ़ता से स्थिर रहें।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 123-125
  • 1 कुरिन्थियों 10:1-18


रविवार, 27 अगस्त 2017

नित्यक्रम


   ब्रिटिश संग्रहालय में प्रदर्शित एक गेंद-घड़ी को देखकर मुझे नित्यक्रम के हानिकारक परिणामों को समझने में सहायता मिली। वहाँ एक तिर्छी रखी हुई स्टील की थाली में बने खांचों में स्टील से बनी एक छोटी गेंद लुडकती हुई एक छोर से दूसरे छोर तक जाती और दूसरे छोर पर पहुँचकर एक लीवर को दबा देती। इससे वह स्टील की थाली विपरीत दिशा में झुक जाती, घड़ी की सूईंयाँ आगे बढ़ जाती, और गेंद वापस पहले छोअ की ओर लुढ़क कर इसी प्रक्रिया को फिर से कर देती। प्रति वर्ष वह स्टील की गेंद इस प्रकार आगे-पीछे लुड़कने के कारण 2,500 मील का सफर तय करती थी परन्तु पहुँचती कहीं नहीं थी।

   यदि हम अपने जीवनों और कार्यों में कोई उद्देश्य नहीं देख पाते हैं तो हमारे लिए अपनी दिनचर्या में फंसे हुए होना अनुभव करना सरल है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस की लालसा थी कि वह मसीह यीशु के सुसमाचार को व्यापक रीति से फैलाए: "इसलिये मैं तो इसी रीति से दौड़ता हूं, परन्तु बेठिकाने नहीं, मैं भी इसी रीति से मुक्कों से लड़ता हूं, परन्तु उस के समान नहीं जो हवा पीटता हुआ लड़ता है" (1 कुरिन्थियों 9:26)। कुछ भी नित्यक्रम बनने से उबा देने वाला बन सकता है, वह चाहे यात्रा, प्रचार, शिक्षा, विशेषकर कैद में होना, इत्यादि कुछ भी हो। परन्तु पौलुस का विश्वास था कि वह हर परिस्थिति में अपने प्रभु परमेश्वर की सेवा कर सकता है।

   जब हम उसमें कोई उद्देश्य नहीं देखने पाते हैं तो नित्यक्रम हानिकारक बन जाता है। परन्तु पौलुस का दर्शन उसकी सीमित कर देने वाली परिस्थितियों से भी परे था, क्योंकि वह मसीही विश्वास की दौड़ में था और जब तक कि दौड़ पूरी न हो वह रुकना नहीं जानता था। पौलुस ने प्रभु यीशु को अपने जीवन की हर बात, हर परिस्थिति में सम्मिलित कर लेने के द्वारा जीवन के नित्यक्रम में उद्देश्य और अर्थ पाया। पौलुस के समान आज हम भी प्रभु यीशु के साथ अपने जीवनों को सार्थक और उद्देश्यपूर्ण बना सकते हैं। - डेविड मैक्कैसलैंड


प्रभु यीशु हमारे नित्यक्रम को उसके लिए उपयोगी सेवकाई बना सकते हैं।

यह मतलब नहीं, कि मैं पा चुका हूं, या सिद्ध हो चुका हूं: पर उस पदार्थ को पकड़ने के लिये दौड़ा चला जाता हूं, जिस के लिये मसीह यीशु ने मुझे पकड़ा था। हे भाइयों, मेरी भावना यह नहीं कि मैं पकड़ चुका हूं: परन्तु केवल यह एक काम करता हूं, कि जो बातें पीछे रह गई हैं उन को भूल कर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ। निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह इनाम पाऊं, जिस के लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है। - फिलिप्पियों 3:12-14

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 9:19-27
1 Corinthians 9:19 क्योंकि सब से स्‍वतंत्र होने पर भी मैं ने अपने आप को सब का दास बना दिया है; कि अधिक लोगों को खींच लाऊं। 
1 Corinthians 9:20 मैं यहूदियों के लिये यहूदी बना कि यहूदियों को खींच लाऊं, जो लोग व्यवस्था के आधीन हैं उन के लिये मैं व्यवस्था के आधीन न होने पर भी व्यवस्था के आधीन बना, कि उन्हें जो व्यवस्था के आधीन हैं, खींच लाऊं। 
1 Corinthians 9:21 व्यवस्थाहीनों के लिये मैं (जो परमेश्वर की व्यवस्था से हीन नहीं, परन्तु मसीह की व्यवस्था के आधीन हूं) व्यवस्थाहीन सा बना, कि व्यवस्थाहीनों को खींच लाऊं। 
1 Corinthians 9:22 मैं निर्बलों के लिये निर्बल सा बना, कि निर्बलों को खींच लाऊं, मैं सब मनुष्यों के लिये सब कुछ बना हूं, कि किसी न किसी रीति से कई एक का उद्धार कराऊं। 
1 Corinthians 9:23 और मैं सब कुछ सुसमाचार के लिये करता हूं, कि औरों के साथ उसका भागी हो जाऊं। 
1 Corinthians 9:24 क्या तुम नहीं जानते, कि दौड़ में तो दौड़ते सब ही हैं, परन्तु इनाम एक ही ले जाता है तुम वैसे ही दौड़ो, कि जीतो। 
1 Corinthians 9:25 और हर एक पहलवान सब प्रकार का संयम करता है, वे तो एक मुरझाने वाले मुकुट को पाने के लिये यह सब करते हैं, परन्तु हम तो उस मुकुट के लिये करते हैं, जो मुरझाने का नहीं। 
1 Corinthians 9:26 इसलिये मैं तो इसी रीति से दौड़ता हूं, परन्तु बेठिकाने नहीं, मैं भी इसी रीति से मुक्कों से लड़ता हूं, परन्तु उस के समान नहीं जो हवा पीटता हुआ लड़ता है। 
1 Corinthians 9:27 परन्तु मैं अपनी देह को मारता कूटता, और वश में लाता हूं; ऐसा न हो कि औरों को प्रचार कर के, मैं आप ही किसी रीति से निकम्मा ठहरूं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 120-122
  • 1 कुरिन्थियों 9


शनिवार, 26 अगस्त 2017

शब्द


   नेल्सन मैन्डेला, जिन्होंने दक्षिणी अफ्रीका की रंग-भेद करने वाली शासन व्यवस्था का विरोध किया था, और जिन्हें अपने इस विरोध के कारण लगभग 3 दशक तक कैद में रहना पड़ा था, शब्दों की सामर्थ्य को जानते थे। आज उनके शब्द उध्दत किए जाते हैं, परन्तु जब वे कैद में थे तो शासन के प्रतिघात के भय के कारण उनके शब्द उध्दत नहीं किए जाते थे। अपने मुक्त किए जाने के एक दशक के बाद उन्होंने कहा: "शब्दों को हलके में प्रयोग करना मेरा व्यवहार नहीं है। यदि कैद के 27 वर्षों ने हमारे साथ कुछ किया है तो वह यह कि अकेलेपन की खामोशी से हम शब्दों की बहुमूल्यता को समझें, और यह जानें कि लोगों के जीने और मरने पर वास्तव में शब्दों का कैसा प्रभाव पड़ता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के पुराने नियम खण्ड में नीतिवचन नामक पुस्तक के अधिकांश नीतिवचनों के लेखक राजा सुलेमान ने शब्दों की सामर्थ्य के बारे में लिखा, "जीभ के वश में मृत्यु और जीवन दोनों होते हैं" (नीतिवचन 18:21)। शब्दों में सकारात्मक या नकरात्मक परिणाम देने की सामर्थ्य होती है (पद 20)। उनसे मिलने वाले प्रोत्साहन, उनकी ईमानदारी में जीवन देने की सामर्थ्य है, या फिर झूठ और कानाफूसी द्वारा कुचलने और घात करने की सामर्थ्य है। हम कैसे सुनिश्चित कर सकते हैं कि हम सकारात्मक परिणाम लाने वाले भले शब्द ही प्रयोग करेंगे? एकमात्र तरीका है कि अपने मन की यत्न के साथ बुराई से रक्षा करें: "सब से अधिक अपने मन की रक्षा कर; क्योंकि जीवन का मूल स्रोत वही है" (नीतिवचन 4:23)।

   केवल प्रभु यीशु मसीह ही है जो हमारे जीवन में बुराई के उदगम स्थल हमारे हृदयों को परिवर्तित कर सकता है, जिससे हमारे शब्द वास्तव में भले हों; परिस्थिति के अनुसार ईमानदार, शांत, उचित और उपयोगी हों। - मार्विन विलियम्स


हमारे शब्दों में निर्माण करने या ढा देने की सामर्थ्य है।

फिर उस[यीशु] ने कहा; जो मनुष्य में से निकलता है, वही मनुष्य को अशुद्ध करता है। क्योंकि भीतर से अर्थात मनुष्य के मन से, बुरी बुरी चिन्‍ता, व्यभिचार। चोरी, हत्या, पर स्त्रीगमन, लोभ, दुष्‍टता, छल, लुचपन, कुदृष्‍टि, निन्‍दा, अभिमान, और मूर्खता निकलती हैं। ये सब बुरी बातें भीतर ही से निकलती हैं और मनुष्य को अशुद्ध करती हैं। - मरकुस 7:20-23

बाइबल पाठ: नीतिवचन 18:1-8, 20-21
Proverbs 18:1 जो औरों से अलग हो जाता है, वह अपनी ही इच्छा पूरी करने के लिये ऐसा करता है, 
Proverbs 18:2 और सब प्रकार की खरी बुद्धि से बैर करता है। मूर्ख का मन समझ की बातों में नहीं लगता, वह केवल अपने मन की बात प्रगट करना चाहता है। 
Proverbs 18:3 जहां दुष्ट आता, वहां अपमान भी आता है; और निन्दित काम के साथ नामधराई होती है। 
Proverbs 18:4 मनुष्य के मुंह के वचन गहिरा जल, वा उमण्डने वाली नदी वा बुद्धि के सोते हैं। 
Proverbs 18:5 दुष्ट का पक्ष करना, और धर्मी का हक मारना, अच्छा नहीं है। 
Proverbs 18:6 बात बढ़ाने से मूर्ख मुकद्दमा खड़ा करता है, और अपने को मार खाने के योग्य दिखाता है। 
Proverbs 18:7 मूर्ख का विनाश उस की बातों से होता है, और उसके वचन उस के प्राण के लिये फन्दे होते हैं। 
Proverbs 18:8 कानाफूसी करने वाले के वचन स्वादिष्ट भोजन के समान लगते हैं; वे पेट में पच जाते हैं। 
Proverbs 18:20 मनुष्य का पेट मुंह की बातों के फल से भरता है; और बोलने से जो कुछ प्राप्त होता है उस से वह तृप्त होता है। 
Proverbs 18:21 जीभ के वश में मृत्यु और जीवन दोनों होते हैं, और जो उसे काम में लाना जानता है वह उसका फल भोगेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 119:89-176
  • 1 कुरिन्थियों 8