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मंगलवार, 7 नवंबर 2017

नाम


   एक चर्च समुदाय ने अपनी सभा को संबोधित करने के लिए एक उपदेशक को आमंत्रित किया। सभा के अगुवे ने उपदेशक से कहा, "परमेश्वर के बारे में बातें कीजिए; परन्तु यीशु का उल्लेख मत कीजिए।" उस उपदेशक ने पूछा, "ऐसा क्यों?" तो अगुवे ने उत्तर दिया, "हमारे कुछ प्रमुख सदस्य यीशु के विषय कुछ परेशानी अनुभव करते हैं। आप बस परमेश्वर कहिए, और सब ठीक रहेगा।" लेकिन ऐसे निर्देषों को स्वीकार करना उस उपदेशक के लिए समस्या थी; उसने कहा, "यीशु के बिना मेरे पास कोई सन्देश नहीं है।"

   मसीही विश्वासियों की मण्डली के प्रारंभिक दिनों में प्रभु यीशु के अनुयायियों के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ। स्थानीय धार्मिक अगुवों ने एकत्रित होकर योजना बनाई और प्रभु यीशु के शिष्यों को धमका कर कहा कि वे यीशु के नाम से प्रचार न करें (प्रेरितों 4:17)। परन्तु वे शिष्य इस बात से सहमत नहीं हुए; उन्होंने प्रत्युत्तर में कहा, "यह तो हम से हो नहीं सकता, कि जो हम ने देखा और सुना है, वह न कहें" (प्रेरितों 4:20)। यह दावा करना कि हम परमेश्वर में तो विश्वास करते हैं, परन्तु उसके पुत्र प्रभु यीशु पर नहीं, परस्पर विरोधाभासी है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु ने अपने तथा परमेश्वर पिता के बीच के संबंध के बारे में स्पष्ट कहा, "मैं और पिता एक हैं" (यूहन्ना 10:30)। इसीलिए प्रभु आगे कह सके, "तुम्हारा मन व्याकुल न हो, तुम परमेश्वर पर विश्वास रखते हो मुझ पर भी विश्वास रखो" (यूहन्ना 14:1)। पौलुस जानता था कि प्रभु यीशु परमेश्वर का स्वरूप और उसके तुल्य है (फिलिप्पियों 2:6)।

   हमें प्रभु यीशु के नाम से लजाने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि "किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं; क्योंकि स्वर्ग के नीचे मनुष्यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया, जिस के द्वारा हम उद्धार पा सकें" (प्रेरितों 4:12)। लॉरेंस दरमानी


यीशु का नाम हमारे विश्वास और आशा का आधार है।

जिसने परमेश्वर के स्‍वरूप में हो कर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्तु न समझा। - फिलिप्पियों 2:6

बाइबल पाठ: प्रेरितों 4:5-20
Acts 4:5 दूसरे दिन ऐसा हुआ कि उन के सरदार और पुरिनये और शास्त्री। 
Acts 4:6 और महायाजक हन्ना और कैफा और यूहन्ना और सिकन्‍दर और जितने महायाजक के घराने के थे, सब यरूशलेम में इकट्ठे हुए। 
Acts 4:7 और उन्हें बीच में खड़ा कर के पूछने लगे, कि तुम ने यह काम किस सामर्थ से और किस नाम से किया है? 
Acts 4:8 तब पतरस ने पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हो कर उन से कहा। 
Acts 4:9 हे लोगों के सरदारों और पुरनियों, इस दुर्बल मनुष्य के साथ जो भलाई की गई है, यदि आज हम से उसके विषय में पूछ पाछ की जाती है, कि वह क्योंकर अच्छा हुआ। 
Acts 4:10 तो तुम सब और सारे इस्त्राएली लोग जान लें कि यीशु मसीह नासरी के नाम से जिसे तुम ने क्रूस पर चढ़ाया, और परमेश्वर ने मरे हुओं में से जिलाया, यह मनुष्य तुम्हारे साम्हने भला चंगा खड़ा है। 
Acts 4:11 यह वही पत्थर है जिसे तुम राजमिस्त्रियों ने तुच्‍छ जाना और वह कोने के सिरे का पत्थर हो गया। 
Acts 4:12 और किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं; क्योंकि स्वर्ग के नीचे मनुष्यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया, जिस के द्वारा हम उद्धार पा सकें।
Acts 4:13 जब उन्होंने पतरस और यूहन्ना का हियाव देखा, ओर यह जाना कि ये अनपढ़ और साधारण मनुष्य हैं, तो अचम्भा किया; फिर उन को पहचाना, कि ये यीशु के साथ रहे हैं। 
Acts 4:14 और उस मनुष्य को जो अच्छा हुआ था, उन के साथ खड़े देखकर, वे विरोध में कुछ न कह सके। 
Acts 4:15 परन्तु उन्हें सभा के बाहर जाने की आज्ञा देकर, वे आपस में विचार करने लगे, 
Acts 4:16 कि हम इन मनुष्यों के साथ क्या करें? क्योंकि यरूशलेम के सब रहने वालों पर प्रगट है, कि इन के द्वारा एक प्रसिद्ध चिन्ह दिखाया गया है; और हम उसका इन्कार नहीं कर सकते। 
Acts 4:17 परन्तु इसलिये कि यह बात लोगों में और अधिक फैल न जाए, हम उन्हें धमकाएं, कि वे इस नाम से फिर किसी मनुष्य से बातें न करें। 
Acts 4:18 तब उन्हें बुलाया और चितौनी देकर यह कहा, कि यीशु के नाम से कुछ भी न बोलना और न सिखलाना। 
Acts 4:19 परन्तु पतरस और यूहन्ना ने उन को उत्तर दिया, कि तुम ही न्याय करो, कि क्या यह परमेश्वर के निकट भला है, कि हम परमेश्वर की बात से बढ़कर तुम्हारी बात मानें। 
Acts 4:20 क्योंकि यह तो हम से हो नहीं सकता, कि जो हम ने देखा और सुना है, वह न कहें।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 40-42
  • इब्रानियों 4


सोमवार, 6 नवंबर 2017

अनुसरण


   जब भूतपूर्व बास्केटबॉल खिलाड़ी डेविड वुड्स स्पैनिश बास्केटबॉल कप के फ़ाईनल के मैच खेल रहा था तब मैं उसके साथ था। एक बार खेल से पहले उसने परमेश्वर के वचन बाइबल से भजन 144:1 पढ़ा: "धन्य है यहोवा, जो मेरी चट्टान है, वह मेरे हाथों को लड़ने, और युद्ध करने के लिये तैयार करता है"; फिर मेरी ओर मुड़कर मुझसे कहा, "आपने देखा? ऐसा लगता है मानो परमेश्वर ने यह पद मेरे ही लिए लिखा है! वह मेरे हाथों को बास्केटबॉल पकड़ने और ऊँगलियों को उसे सही दिशा में फेंकने के लिए प्रशिक्षित और तैयार करता है।" डेविड का विश्वास था कि परमेश्वर ने उसे बास्केटबॉल खेलने के लिए बुलाया है, और उसने यह सीखा कि परमेश्वर हमें, जैसे भी हम हैं वैसा ही लेकर, उस सेवकाई के लिए तैयार करता है जिसे वह हम से लेना चाहता है।

   हम बड़ी सरलता से अपने आप को परमेश्वर के कार्यों के लिए अयोग्य कहकर, यह समझकर कि हमारे पास परमेश्वर को उसके कार्यों के लिए देने के लिए कुछ नहीं है, उसकी सेवकाई से पीछे हट सकते हैं। जब परमेश्वर ने मूसा को दर्शन दिए और उसे कार्य सौंपा कि वह इस्त्राएलियों को बताए कि परमेश्वर उसके द्वारा इस्त्राएलियों को मिस्त्र के दासत्व से छुड़ाएगा (निर्गमन 3:16-17), तो मूसा ने अपने आप को इस कार्य के लिए अनुप्युक्त समझा। मूसा ने प्रभु से कहा, "हे मेरे प्रभु, मैं बोलने में निपुण नहीं, न तो पहिले था, और न जब से तू अपने दास से बातें करने लगा; मैं तो मुंह और जीभ का भद्दा हूं" (निर्गमन 4:10)। मूसा को बोलने में कुछ दिक्कत होती थी, और वह वापस मिस्त्र के राजा फिरौन के पास जाने को लेकर भयभीत भी था, परन्तु परमेश्वर ने उसकी अयोग्यता और भय का अपनी योग्यता और अपनी सामर्थ्य से निवारण कर दिया। परमेश्वर ने तब मूसा से कहा, "अब जा, मैं तेरे मुख के संग हो कर जो तुझे कहना होगा वह तुझे सिखलाता जाऊंगा" (निर्गमन 4:12)।

   परमेश्वर बस हम से इतना चाहता है कि हम उस पर भरोसा रखें और उसकी योजनाओं को पूरा करने के लिए उसका अनुसरण करते रहें। शेष सब कुछ वह संभाल लेगा। जब हम उसपर भरोसा रखकर, उसका अनुसरण करते हैं, तो उसके सामर्थी हाथों में न केवल हम स्वयं आशीषित होते हैं, वरन औरों के लिए भी आशीष का कारण बन जाते हैं। - जेम्स फर्नैन्डिज़ गारिदो


जब परमेश्वर किसी कार्य के लिए बुलाता है 
तो उसके लिए आवश्यक सामर्थ्य और संसाधन भी दे देता है।

यहोवा ने अब्राम से कहा, अपने देश, और अपनी जन्मभूमि, और अपने पिता के घर को छोड़कर उस देश में चला जा जो मैं तुझे दिखाऊंगा। और मैं तुझ से एक बड़ी जाति बनाऊंगा, और तुझे आशीष दूंगा, और तेरा नाम बड़ा करूंगा, और तू आशीष का मूल होगा। और जो तुझे आशीर्वाद दें, उन्हें मैं आशीष दूंगा; और जो तुझे कोसे, उसे मैं शाप दूंगा; और भूमण्डल के सारे कुल तेरे द्वारा आशीष पाएंगे। उत्पत्ति 12:1-3

बाइबल पाठ: निर्गमन 4:10-17
Exodus 4:10 मूसा ने यहोवा से कहा, हे मेरे प्रभु, मैं बोलने में निपुण नहीं, न तो पहिले था, और न जब से तू अपने दास से बातें करने लगा; मैं तो मुंह और जीभ का भद्दा हूं। 
Exodus 4:11 यहोवा ने उस से कहा, मनुष्य का मुंह किस ने बनाया है? और मनुष्य को गूंगा, वा बहिरा, वा देखने वाला, वा अन्धा, मुझ यहोवा को छोड़ कौन बनाता है? 
Exodus 4:12 अब जा, मैं तेरे मुख के संग हो कर जो तुझे कहना होगा वह तुझे सिखलाता जाऊंगा। 
Exodus 4:13 उसने कहा, हे मेरे प्रभु, जिस को तू चाहे उसी के हाथ से भेज। 
Exodus 4:14 तब यहोवा का कोप मूसा पर भड़का और उसने कहा, क्या तेरा भाई लेवीय हारून नहीं है? मुझे तो निश्चय है कि वह बोलने में निपुण है, और वह तेरी भेंट के लिये निकला भी आता है, और तुझे देखकर मन में आनन्दित होगा। 
Exodus 4:15 इसलिये तू उसे ये बातें सिखाना; और मैं उसके मुख के संग और तेरे मुख के संग हो कर जो कुछ तुम्हें करना होगा वह तुम को सिखलाता जाऊंगा। 
Exodus 4:16 और वह तेरी ओर से लोगों से बातें किया करेगा; वह तेरे लिये मुंह और तू उसके लिये परमेश्वर ठहरेगा। 
Exodus 4:17 और तू इस लाठी को हाथ में लिये जा, और इसी से इन चिन्हों को दिखाना।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 37-39
  • इब्रानियों 3


रविवार, 5 नवंबर 2017

क्रोध


   शायद उस दिन मेरे पड़ौसियों को समझ नहीं आ रहा होगा कि शरद ऋतु की उस प्रातः मुझे देखकर वे मेरे बारे में क्या सोचें। मैं हाथ में बेलचा पकड़े हुए घर के अन्दर आने के रास्ते के किनारे, नाले के कोने के नीचे जमी हुई बर्फ को तोड़ने का प्रयास कर रही थी, और बेलचे के हर प्रहार के साथ क्रोधावेश के साथ प्रार्थनाएं करती जा रही थी, जो एक ही बात को लेकर थीं: "बस बहुत हो गया; मुझमें अब और करने की शक्ति नहीं है।" मुझे घर की देखभाल करनी होती है और मेरे पास करने के लिए कार्यों की लंबी सूचि रहती है, और अब यह जमी हुई बर्फ भी मेरे कार्यों की सूचि को बढ़ा रही थी, मेरे सीमित समय में दख़ल दे रही थी। मेरा वह क्रोधावेश झूठ के एक पुल्लिन्दे पर आधारित था - "मेरे साथ इससे बेहतर व्यवहार होना चाहिए; आखिरकर, केवल परमेश्वर पर निर्भर रहना अपर्याप्त है; किसी को मेरी परवाह नहीं है।"

   जब हम अपने क्रोध के साथ चिपके रहने का निर्णय लेते हैं, तब हम कड़ुवाहट के फन्दे में फंस जाते हैं, और फिर आगे नहीं बढ़ पाते हैं। क्रोध का एकमात्र उपाय है सत्य; सत्य को स्मरण करना और उसके आगे समर्पित रहना। सत्य यह है कि परमेश्वर हमें वह नहीं देता है जो वास्तव में हमें मिलना चाहिए; वरन वह हमपर अनुग्रह करता है, हमें अपनी दया का पात्र बनाता है, "क्योंकि हे प्रभु, तू भला और क्षमा करने वाला है, और जितने तुझे पुकारते हैं उन सभों के लिये तू अति करूणामय है" (भजन 86:5)। सत्य यह है कि उसकी सामर्थ्य हमारी प्रत्येक आवश्यकता की पूर्ति के लिए पर्यापत है; हमें चाहे जैसा भी प्रतीत हो, परमेश्वर हमारे लिए पर्याप्त से भी बढ़कर है।

   परन्तु इससे पहले कि हम इस आश्वासन को थामने पाएं, हमें थोड़ा पीछे हटकर, अपने प्रयासों के बेलचे को नीचे रखकर, हमारी ओर दया और अनुग्रह में बढ़े हुए प्रभु यीशु के हाथ को थामना होगा। हमारा प्रभु परमेश्वर हमारे क्रोधावेश को सुनने और सहने, और अपने समय तथा योजनानुसार हमें आगे ले चलने के लिए महान और विश्वासयोग्य है। - शैली बीच


अनुग्रह: परमेश्वर से वह पाना हम जिसके कदापि योग्य नहीं है; 
दया: वह नहीं पाना हम जिसके सर्वथा योग्य हैं।

मूर्ख अपने सारे मन की बात खोल देता है, परन्तु बुद्धिमान अपने मन को रोकता, और शान्त कर देता है। - नीतिवचन 29:11

बाइबल पाठ: भजन 86:1-13
Psalms 86:1 हे यहोवा कान लगा कर मेरी सुन ले, क्योंकि मैं दीन और दरिद्र हूं। 
Psalms 86:2 मेरे प्राण की रक्षा कर, क्योंकि मैं भक्त हूं; तू मेरा परमेश्वर है, इसलिये अपने दास का, जिसका भरोसा तुझ पर है, उद्धार कर। 
Psalms 86:3 हे प्रभु मुझ पर अनुग्रह कर, क्योंकि मैं तुझी को लगातार पुकारता रहता हूं। 
Psalms 86:4 अपने दास के मन को आनन्दित कर, क्योंकि हे प्रभु, मैं अपना मन तेरी ही ओर लगाता हूं। 
Psalms 86:5 क्योंकि हे प्रभु, तू भला और क्षमा करने वाला है, और जितने तुझे पुकारते हैं उन सभों के लिये तू अति करूणामय है। 
Psalms 86:6 हे यहोवा मेरी प्रार्थना की ओर कान लगा, और मेरे गिड़गिड़ाने को ध्यान से सुन। 
Psalms 86:7 संकट के दिन मैं तुझ को पुकारूंगा, क्योंकि तू मेरी सुन लेगा।
Psalms 86:8 हे प्रभु देवताओं में से कोई भी तेरे तुल्य नहीं, और न किसी के काम तेरे कामों के बराबर हैं। 
Psalms 86:9 हे प्रभु जितनी जातियों को तू ने बनाया है, सब आकर तेरे साम्हने दण्डवत करेंगी, और तेरे नाम की महिमा करेंगी। 
Psalms 86:10 क्योंकि तू महान और आश्चर्य कर्म करने वाला है, केवल तू ही परमेश्वर है। 
Psalms 86:11 हे यहोवा अपना मार्ग मुझे दिखा, तब मैं तेरे सत्य मार्ग पर चलूंगा, मुझ को एक चित्त कर कि मैं तेरे नाम का भय मानूं। 
Psalms 86:12 हे प्रभु हे मेरे परमेश्वर मैं अपने सम्पूर्ण मन से तेरा धन्यवाद करूंगा, और तेरे नाम की महिमा सदा करता रहूंगा। 
Psalms 86:13 क्योंकि तेरी करूणा मेरे ऊपर बड़ी है; और तू ने मुझ को अधोलोक की तह में जाने से बचा लिया है।

एक साल में बाइबल: 

  • यिर्मयाह 34-36
  • इब्रानियों 2


शनिवार, 4 नवंबर 2017

ईर्ष्या


   सन 2014 में, कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय की एक शोधकर्ता ने खिलौने के कुत्ते के द्वारा दिखाया कि पशु भी ईर्ष्या रख सकते हैं। प्रोफ़ेस्सर क्रिस्टीन हैरिस ने कुछ कुत्तों के स्वामियों से कहा कि वे अपने पालतु कुत्तों की उपस्थिति में एक खेलने वाले कुत्ते से प्रेम दिखाएं। उन्होंने पाया कि ऐसा करने पर तीन चौथाई कुत्तों ने किसी न किसी रूप में ईर्ष्या दिखाई। कुछ कुत्तों ने अपनी ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए अपने मालिकों को स्पर्श किया या हलका सा धक्का दिया। कुछ ने अपने स्वामी और उस खिलौने के बीच में आने का प्रयास किया। कुछ ने तो उस खिलौने के कुत्ते पर भौंकने या उसको काटने का प्रयास भी किया।

   कुत्तों में ईर्ष्या होना अच्छा लगता है; परन्तु मनुष्यों में ईर्ष्या के परिणाम कुछ कम प्रशंसनीय होते हैं। परन्तु फिर भी परमेश्वर के वचन बाइबल के प्रमुख पात्रों में से, मूसा और पौलुस हमें स्मरण दिलाते हैं कि एक और भी ईर्ष्या है - वह जो हमारे प्रति परमेश्वर के हृदय की भावनाओं को प्रतिबिंबित करती है।

   पौलुस ने कुरिन्थुस में मसीही विश्वासियों की मण्डली को लिखी अपनी पत्री में कहा, "मैं तुम्हारे विषय मे ईश्वरीय धुन लगाए रहता हूं" (2 कुरिन्थियों 11:2)। उसे चिंता थी कि उनके "मन उस सीधाई और पवित्रता से जो मसीह के साथ होनी चाहिए कहीं भ्रष्‍ट न किए जाएं" (2 कुरिन्थियों 11:3)। यह वह ईर्ष्या है जो परमेश्वर के हृदय की उस भावना को दिखाती है जिसके विषय परमेश्वर ने मूसा से अपनी दस आज्ञाएं देते हुए, अन्य देवी-देवताओं की उपासना करने के विषय में कहा, "तू उन को दण्डवत न करना, और न उनकी उपासना करना; क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर यहोवा जलन रखने वाला ईश्वर हूं, और जो मुझ से बैर रखते है, उनके बेटों, पोतों, और परपोतों को भी पितरों का दण्ड दिया करता हूं" (निर्गमन 20:5)।

   परमेश्वर की ईर्ष्या हमारे स्वार्थी प्रेम के समान या किसी दुर्भावना से नहीं है। उसका हृदय उसके लोगों के प्रति, जो उसकी सृष्टि हैं और जिन्होंने उसपर किए गए विश्वास द्वारा उद्धार पाया है, परमेश्वर की सुरक्षा की प्रवृत्ति को प्रगट करता है - कहीं वे बहक कर या किसी गलत धारण मेम पड़कर किसी हाने में न पड़ जाएं। उसकी "ईर्ष्या", उसके लोगों के प्रति उसकी सुरक्षा भावना, उन्हें हानि से बचाए रखने का प्रगटिकरण है। उसने हमें बनाया है, हमें पापों से छुड़ाया है, जिससे कि हम सदा उसमें आनन्दित रह सकें। हम इससे अधिक उस परमेश्वर से, जो हमारी खुशी, सुरक्षा और भलाई के लिए इतना समर्पित है, इतनी "ईर्ष्या" रखता है, और क्या माँग सकते हैं? - मार्ट डीहॉन


परमेश्वर हम में से प्रत्येक से इतना प्रेम करता है, 
मानो प्रेम करने के लिए बस हम ही एकमात्र उसके पास हैं। - औगस्टीन

क्योंकि तुम्हें किसी दूसरे को ईश्वर कर के दण्डवत करने की आज्ञा नहीं, क्योंकि यहोवा जिसका नाम जलनशील है, वह जल उठने वाला ईश्वर है ही - निर्गमन 34:14

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 11:1-4
2 Corinthians 11:1 यदि तुम मेरी थोड़ी मूर्खता सह लेते तो क्या ही भला होता; हां, मेरी सह भी लेते हो। 
2 Corinthians 11:2 क्योंकि मैं तुम्हारे विषय में ईश्वरीय धुन लगाए रहता हूं, इसलिये कि मैं ने एक ही पुरूष से तुम्हारी बात लगाई है, कि तुम्हें पवित्र कुंवारी के समान मसीह को सौंप दूं। 
2 Corinthians 11:3 परन्तु मैं डरता हूं कि जैसे सांप ने अपनी चतुराई से हव्‍वा को बहकाया, वैसे ही तुम्हारे मन उस सीधाई और पवित्रता से जो मसीह के साथ होनी चाहिए कहीं भ्रष्‍ट न किए जाएं। 
2 Corinthians 11:4 यदि कोई तुम्हारे पास आकर, किसी दूसरे यीशु को प्रचार करे, जिस का प्रचार हम ने नहीं किया: या कोई और आत्मा तुम्हें मिले; जो पहिले न मिला था; या और कोई सुसमाचार जिसे तुम ने पहिले न माना था, तो तुम्हारा सहना ठीक होता।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 32-33
  • इब्रानियों 1


शुक्रवार, 3 नवंबर 2017

साधारण कार्य


   मैंने जिस हाई-स्कूल में पढ़ाई की थी, वहाँ चार वर्ष तक लैटिन भाषा सीखना अनिवार्य था। उस भाषा को सीखने के लिए जिस अनुशासन की आवश्यकता होती थी, मैं उसकी कीमत आज समझता हूँ; परन्तु तब हमारे लिए वह मात्र रट्टा लगाना होता था। हमारी अध्यापिका बारंबार दोहराने और अभ्यास करवाने में विश्वास करती थीं। दिन में अनेकों बार वह हमसे कहती थीं, "दोहराना सीखने की जननी है", और प्रत्युत्तर में हम दबी आवाज़ में बुदबुदाते, "दोहराना निर्थक होता है"।

   लेकिन आज मैं आभास करता हूँ कि जीवन अधिकांशतः दोहराना ही है - बारंबार उन्हीं नीरस, उदासीन और फीकी बातों को करते रहना। डेनमार्क के दार्शनिक सोरेन कर्क्गार्ड ने कहा, "दोहराना रोटी के समान सामान्य किंतु आवश्यक है; लेकिन ऐसी रोटी, अन्ततः जिससे आशीष मिलती है।"

   यह प्रत्येक कर्तव्य को लेकर, वह चाहे कितना भी सामान्य, नगण्य या नीरस हो, उस पर परमेश्वर कि आशीष माँगकर, उस कार्य को परमेश्वर के उद्देश्यों के अनुसार, उस की महिमा के लिए पूरा करना है। ऐसा करने के द्वारा हम जीवन के अरुचिकर कार्यों को भी पावन कार्य बना देते हैं, जिनके परिणाम चाहे दिखाई न भी दें किंतु अनन्तकाल तक प्रभावी होते हैं।

   कवि गेराड मैनली हौपकिन्स ने कहा, "प्रार्थना में हाथों को उठाना परमेश्वर को महिमा देता है, परन्तु हाथों में अपने कार्य करने के लिए उपकरण लिया हुआ व्यक्ति, पोंछा लगाने के लिए पोंछे के पानी की बाल्टी और कपड़ा लिए हुए महिला भी परमेश्वर को महिमा देते हैं। परमेश्वर इतना महान है कि यदि आप देना चाहें तो सभी बातों से उसे महिमा दे सकते हैं।"

   हम जो कुछ भी करते हैं, यदि वह प्रभु परमेश्वर की महिमा के लिए किया जाए, तो आप को आश्चर्य होगा उस आनन्द और सार्थकता से जो हम साधारण से कार्य से भी प्राप्त कर सकते हैं। - डेविड रोपर


इच्छा रखने वाली आत्मा 
कर्तव्य पूरा करने की नीरसता को भी प्रेम का कार्य बना देती है।

सो तुम चाहे खाओ, चाहे पीओ, चाहे जो कुछ करो, सब कुछ परमेश्वर की महीमा के लिये करो। - 1 कुरिन्थियों 10:31

बाइबल पाठ: इफिसियों 6:5-9; कुलुस्सियों 3:22-25
Ephesians 6:5 हे दासो, जो लोग शरीर के अनुसार तुम्हारे स्‍वामी हैं, अपने मन की सीधाई से डरते, और कांपते हुए, जैसे मसीह की, वैसे ही उन की भी आज्ञा मानो। 
Ephesians 6:6 और मनुष्यों को प्रसन्न करने वालों के समान दिखाने के लिये सेवा न करो, पर मसीह के दासों के समान मन से परमेश्वर की इच्छा पर चलो। 
Ephesians 6:7 और उस सेवा को मनुष्यों की नहीं, परन्तु प्रभु की जानकर सुइच्‍छा से करो। 
Ephesians 6:8 क्योंकि तुम जानते हो, कि जो कोई जैसा अच्छा काम करेगा, चाहे दास हो, चाहे स्‍वतंत्र; प्रभु से वैसा ही पाएगा। 
Ephesians 6:9 और हे स्‍वामियों, तुम भी धमकियां छोड़कर उन के साथ वैसा ही व्यवहार करो, क्योंकि जानते हो, कि उन का और तुम्हारा दोनों का स्‍वामी स्वर्ग में है, और वह किसी का पक्ष नहीं करता।

Colossians 3:22 हे सेवकों, जो शरीर के अनुसार तुम्हारे स्‍वामी हैं, सब बातों में उन की आज्ञा का पालन करो, मनुष्यों को प्रसन्न करने वालों के समान दिखाने के लिये नहीं, परन्तु मन की सीधाई और परमेश्वर के भय से। 
Colossians 3:23 और जो कुछ तुम करते हो, तन मन से करो, यह समझ कर कि मनुष्यों के लिये नहीं परन्तु प्रभु के लिये करते हो। 
Colossians 3:24 क्योंकि तुम जानते हो कि तुम्हें इस के बदले प्रभु से मीरास मिलेगी: तुम प्रभु मसीह की सेवा करते हो। 
Colossians 3:25 क्योंकि जो बुरा करता है, वह अपनी बुराई का फल पाएगा; वहां किसी का पक्षपात नहीं।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 30-31
  • फिलेमोन


गुरुवार, 2 नवंबर 2017

बुद्धिमता


   मेरी भांजी के पति ने हाल ही में एक सोशल नेटवर्क साईट पर लिखा, "मैं इन्टरनैट पर और बहुत कुछ कहता, यदि यह धीमी आवाज़ मुझे ऐसा करने के लिए मना नहीं करती। प्रभु यीशु का अनुयायी होने के नाते, आप को लगता होगा कि यह धीमी आवाज़ पवित्र आत्मा की है; किंतु यह है नहीं। यह आवाज़ मेरी पत्नि की है!"

   इसे पढ़कर आने वाली मुस्कान के साथ एक बुद्धिमता का विचार भी आता है - विवेकी मित्र से मिली चेतावनी, परमेश्वर की बुद्धिमता से मिला निर्देष भी हो सकती है। परमेश्वर के वचन बाइबल में, सभोपदेशक नामक पुस्तक में लिखा है, "बुद्धिमानों के वचन जो धीमे धीमे कहे जाते हैं वे मूर्खों के बीच प्रभुता करने वाले के चिल्ला चिल्लाकर कहने से अधिक सुने जाते हैं" (सभोपदेशक 9:17)।

   पवित्र-शास्त्र हमें सचेत करता है कि हम अपनी नज़रों में बुद्धिमान या घमण्डी ना बने (नीतिवचन 3:5-7; यशायाह 5:21; रोमियों 12:16)। दूसरे शब्दों में, हम यह मान कर न चलें कि हमारे पास सब बातों के लिए सभी उत्तर उपलब्ध हैं। नीतिवचन में लिखा है, "सम्मति को सुन ले, और शिक्षा को ग्रहण कर, कि तू अन्तकाल में बुद्धिमान ठहरे" (नीतिवचन 19:20)। वह चाहे मित्र हो, या जीवन-साथी, या कोई सहकर्मी अथवा पादरी, परमेश्वर हमें और भी अधिक अपनी बुद्धिमता प्रदान करने के लिए किसी को भी उपयोग कर सकता है।

   नीतिवचन में एक अन्य स्थान पर लिखा है, "समझ वाले के मन में बुद्धि वास किए रहती है, परन्तु मूर्खों के अन्त:काल में जो कुछ है वह प्रगट हो जाता है" (नीतिवचन 14:33)। एक दूसरे की बात सुनना और एक दूसरे से सीखना परमेश्वर की पवित्र-आत्मा से मिलने वाली बुद्धिमता को पहचानने और सीखने का एक तरीका है। - सिंडी हैस कैस्पर


सच्ची बुद्धिमता का आरंभ और अन्त प्रभु परमेश्वर ही है।

तू अपनी समझ का सहारा न लेना, वरन सम्पूर्ण मन से यहोवा पर भरोसा रखना। उसी को स्मरण कर के सब काम करना, तब वह तेरे लिये सीधा मार्ग निकालेगा। अपनी दृष्टि में बुद्धिमान न होना; यहोवा का भय मानना, और बुराई से अलग रहना। - नीतिवचन 3:5-7

बाइबल पाठ: सभोपदेशक 9:13-18
Ecclesiastes 9:13 मैं ने सूर्य के नीचे इस प्रकार की बुद्धि की बात भी देखी है, जो मुझे बड़ी जान पड़ी। 
Ecclesiastes 9:14 एक छोटा सा नगर था, जिस में थोड़े ही लोग थे; और किसी बड़े राजा ने उस पर चढ़ाई कर के उसे घेर लिया, और उसके विरुद्ध बड़ी मोर्चेबन्दी कर दी। 
Ecclesiastes 9:15 परन्तु उस में एक दरिद्र बुद्धिमान पुरूष पाया गया, और उसने उस नगर को अपनी  बुद्धि के द्वारा बचाया। तौभी किसी ने उस दरिद्र का स्मरण न रखा। 
Ecclesiastes 9:16 तब मैं ने कहा, यद्यपि दरिद्र की बुद्धि तुच्छ समझी जाती है और उसका वचन कोई नहीं सुनता तौभी पराक्रम से बुद्धि उत्तम है। 
Ecclesiastes 9:17 बुद्धिमानों के वचन जो धीमे धीमे कहे जाते हैं वे मूर्खों के बीच प्रभुता करने वाले के चिल्ला चिल्लाकर कहने से अधिक सुने जाते हैं। 
Ecclesiastes 9:18 लड़ाई के हथियारों से बुद्धि उत्तम है, परन्तु एक पापी बहुत भलाई नाश करता है।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 27-29
  • तीतुस 3


बुधवार, 1 नवंबर 2017

जल


   जैसे ही डेव म्यूलर ने नीचे की ओर झुक कर नल का हत्था घुमाया, नल के मूँह से स्वच्छ पानी निकलकर नीचे रखी नीली बाल्टी में गिरने लगा; और उसके आस-पास खड़े लोग उत्साहित होकर हर्ष से तालियाँ बजाने लगे। उन लोगों ने जीवन में पहली बार अपने इलाके में स्वच्छ जल बहते हुए देखा था। अफ्रीका के केन्या देश के इन लोगों में उस स्वच्छ जल के कारण बड़ा परिवर्तन आने वाला था। डेव और उनकी पत्नि जॉय ने उन लोगों की आवश्यकता - स्वच्छ जल को उन लोगों तक पहुँचाने के लिए बहुत मेहनत की थी। परन्तु उनकी यह मेहनत केवल नल से बहने वाले जल तक ही सीमित नहीं थी। डेव और जॉय न केवल पृथ्वी से निकलने वाले जल के बारे में वरन साथ ही अनन्त जीवन के जल के सोते, प्रभु यीशु मसीह के बारे में भी उन लोगों को बताते हैं।

   लगभग दो हज़ार वर्ष पूर्व यीशु नाम का एक मनुष्य सामारिया के एक कुएँ के निकट अपनी शारीरिक आवश्यकताओं के लिए उस कुएँ से जल लेने आई हुई एक स्त्री से बात कर रहा था। प्रभु यीशु ने उस स्त्री को बताया कि उसे कुएँ के उस जल के अतिरिक्त आत्मिक जीवन और स्वास्थ्य के लिए जीवन-जल की भी अत्याधिक आवश्यकता है।

   उस समय से इतिहास आगे बढ़ गया है, और मानवता अधिक आधुनिक हो गई है, परन्तु दो बातें अभी भी वैसी ही बनी हुई हैं जैसी तब थीं - हमें अपने शारीरिक जीवनों के लिए अभी भी स्वच्छ जल की उतनी ही आवश्यकता है, और आत्मिक जीवन के लिए प्रभु यीशु से मिलने वाले जीवन जल की अनिवार्यता है। क्योंकि हम आत्मिक रीति से अपने पापों के कारण मरे हुए हैं, इसलिए यदि इस शरीर में रहते हुए हम आत्मिक जीवन प्राप्त नहीं करेंगे तो शरीर छोड़ने के उपरांत पापों में मृतक दशा में ही अनन्त काल के लिए नर्क में चले जाएंगे।

   जल हमारे अस्तित्व - शारीरिक एवं आत्मिक दोनो ही के लिए, अनिवार्य है। क्या आपने जगत के उद्धारकर्ता तथा जीवन जल के एकमात्र स्त्रोत प्रभु यीशु से वह जीवन जल प्राप्त कर लिया है? - डेव ब्रैनन


हमारी आत्मिक प्यास को बुझाने के लिए 
केवल प्रभु यीशु के पास ही जीवन जल उपलब्ध है।

क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए। परमेश्वर ने अपने पुत्र को जगत में इसलिये नहीं भेजा, कि जगत पर दंड की आज्ञा दे परन्तु इसलिये कि जगत उसके द्वारा उद्धार पाए। - यूहन्ना 3:16-17

बाइबल पाठ: यूहन्ना 4:1-15
John 4:1 फिर जब प्रभु को मालूम हुआ, कि फरीसियों ने सुना है, कि यीशु यूहन्ना से अधिक चेले बनाता, और उन्हें बपतिस्मा देता है। 
John 4:2 (यद्यपि यीशु आप नहीं वरन उसके चेले बपतिस्मा देते थे)। 
John 4:3 तब यहूदिया को छोड़कर फिर गलील को चला गया। 
John 4:4 और उसको सामरिया से हो कर जाना अवश्य था। 
John 4:5 सो वह सूखार नाम सामरिया के एक नगर तक आया, जो उस भूमि के पास है, जिसे याकूब ने अपने पुत्र यूसुफ को दिया था। 
John 4:6 और याकूब का कूआं भी वहीं था; सो यीशु मार्ग का थका हुआ उस कूएं पर यों ही बैठ गया, और यह बात छठे घण्टे के लगभग हुई। 
John 4:7 इतने में एक सामरी स्त्री जल भरने को आई: यीशु ने उस से कहा, मुझे पानी पिला। 
John 4:8 क्योंकि उसके चेले तो नगर में भोजन मोल लेने को गए थे। 
John 4:9 उस सामरी स्त्री ने उस से कहा, तू यहूदी हो कर मुझ सामरी स्त्री से पानी क्यों मांगता है? (क्योंकि यहूदी सामरियों के साथ किसी प्रकार का व्यवहार नहीं रखते)। 
John 4:10 यीशु ने उत्तर दिया, यदि तू परमेश्वर के वरदान को जानती, और यह भी जानती कि वह कौन है जो तुझ से कहता है; मुझे पानी पिला तो तू उस से मांगती, और वह तुझे जीवन का जल देता। 
John 4:11 स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, तेरे पास जल भरने को तो कुछ है भी नहीं, और कूआं गहिरा है: तो फिर वह जीवन का जल तेरे पास कहां से आया? 
John 4:12 क्या तू हमारे पिता याकूब से बड़ा है, जिसने हमें यह कूआं दिया; और आप ही अपने सन्तान, और अपने ढोरों समेत उस में से पीया? 
John 4:13 यीशु ने उसको उत्तर दिया, कि जो कोई यह जल पीएगा वह फिर प्यासा होगा। 
John 4:14 परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्तकाल तक प्यासा न होगा: वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा। 
John 4:15 स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, वह जल मुझे दे ताकि मैं प्यासी न होऊं और न जल भरने को इतनी दूर आऊं।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 24-26
  • तीतुस 2