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शुक्रवार, 24 नवंबर 2017

मीरास


   संभव है कि आपने उस छोटे लड़के का वीडियो देखा है जिसे पता चलता है कि उसे एक छोटी बहन मिलने वाली है, और वह निराश होकर कहता है, "बस सदा लड़कियाँ, लड़कियाँ, और लड़कियाँ ही होता है।" यह मानवीय अपेक्षाओं की एक दिलचस्प झलक तो है, परन्तु निराशा में कुछ भी हास्यसपद नहीं होता है। निराशा हमारे संसार में भरी पड़ी है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल का एक घटनाक्रम है जिसमें निराशा भरी हुई है। याकूब ने अपने मामा और स्वामी की बेटी राहेल से विवाह करने हेतु, उसके लिए सात वर्ष तक कार्य करना स्वीकार कर लिया। परन्तु ऐसा करने के पश्चात, राहेल के पिता ने राहेल के स्थान पर उसकी बड़ी बहन लीआ: का धोखे से याकूब के साथ विवाह कर दिया, और याकूब को यह बात अगले दिन प्रातः पता चली। हम याकूब की निराशा की ओर तो ध्यान केंद्रित करते हैं, परन्तु ज़रा लीआ: के बारे में भी तो विचार करें - उसे कैसा लगा होगा! जब उसे उस व्यक्ति से विवाह करने के लिए बाध्य किया गया जो न तो उसे साथ रखना चाहता था और न ही उससे प्रेम करता था, तो लीया की कितनी आशाएं और विवाहित जीवन से संबंधित उसके कितने सपने धाराशायी हो गए होंगे।

   बाइबल में भजन 37:4 में लिखा है, "यहोवा को अपने सुख का मूल जान, और वह तेरे मनोरथों को पूरा करेगा।" क्या हम यह मान कर चलें कि परमेश्वर का भय मानने वाले लोग कभी निराश नहीं होते हैं? ऐसा नहीं है; यह भजन स्पष्ट दिखाता है कि भजनकार ने अपने चारों ओर निराशाओं को देखा था। परन्तु उसने दीर्घकालीन दृष्टिकोण अपनाया, और आगे कहा, "यहोवा के साम्हने चुपचाप रह, और धीरज से उसका आसरा रख" (पद 7)। उसका निष्कर्ष था, "परन्तु नम्र लोग पृथ्वी के अधिकारी होंगे" (पद 11)।

   याकूब की कहानी में हम देखते हैं कि अन्ततः याकूब ने लीआ: को अधिक आदर दिया, और उसे अब्राहम, सारा, इसहाक और रिबका के संग पारिवारिक कब्रगाह में दफनाया (उत्पत्ति 49:31)। हम यह भी देखते हैं कि आगे चलकर लीआ: - जिसे लगता था कि उससे कोई प्रेम नहीं करता है, उसी की सन्तानों के वंश में से परमेश्वर ने सारे जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह को संसार में भेजा। प्रभु यीशु जो न्याय बहाल करता है, आशा को पुनःस्थापित करता है, और हमारे सोच से भी कहीं बढ़कर एक मीरास हमें देता है। - टिम गुस्टाफसन


प्रभु यीशु ही एकमात्र ऐसा मित्र है जो कभी निराश नहीं करता है।

यहोवा की बाट जोहता रह, और उसके मार्ग पर बना रह, और वह तुझे बढ़ाकर पृथ्वी का अधिकारी कर देगा; जब दुष्ट काट डाले जाएंगे, तब तू देखेगा। - भजन 37:34

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 29:13-30
Genesis 29:13 अपने भानजे याकूब का समाचार पाते ही लाबान उस से भेंट करने को दौड़ा, और उसको गले लगाकर चूमा, फिर अपने घर ले आया। और याकूब ने लाबान से अपना सब वृत्तान्त वर्णन किया। 
Genesis 29:14 तब लाबान ने याकूब से कहा, तू तो सचमुच मेरी हड्डी और मांस है। सो याकूब एक महीना भर उसके साथ रहा। 
Genesis 29:15 तब लाबान ने याकूब से कहा, भाईबन्धु होने के कारण तुझ से सेंतमेंत सेवा कराना मुझे उचित नहीं है, सो कह मैं तुझे सेवा के बदले क्या दूं? 
Genesis 29:16 लाबान के दो बेटियां थी, जिन में से बड़ी का नाम लिआ: और छोटी का राहेल था। 
Genesis 29:17 लिआ: के तो धुन्धली आंखे थी, पर राहेल रूपवती और सुन्दर थी। 
Genesis 29:18 सो याकूब ने, जो राहेल से प्रीति रखता था, कहा, मैं तेरी छोटी बेटी राहेल के लिये सात बरस तेरी सेवा करूंगा। 
Genesis 29:19 लाबान ने कहा, उसे पराए पुरूष को देने से तुझ को देना उत्तम होगा; सो मेरे पास रह। 
Genesis 29:20 सो याकूब ने राहेल के लिये सात बरस सेवा की; और वे उसको राहेल की प्रीति के कारण थोड़े ही दिनों के बराबर जान पड़े। 
Genesis 29:21 तब याकूब ने लाबान से कहा, मेरी पत्नी मुझे दे, और मैं उसके पास जाऊंगा, क्योंकि मेरा समय पूरा हो गया है। 
Genesis 29:22 सो लाबान ने उस स्थान के सब मनुष्यों को बुला कर इकट्ठा किया, और उनकी जेवनार की। 
Genesis 29:23 सांझ के समय वह अपनी बेटी लिआ: को याकूब के पास ले गया, और वह उसके पास गया। 
Genesis 29:24 और लाबान ने अपनी बेटी लिआ: को उसकी दासी होने के लिये अपनी दासी जिल्पा दी। 
Genesis 29:25 भोर को मालूम हुआ कि यह तो लिआः है, सो उसने लाबान से कहा यह तू ने मुझ से क्या किया है? मैं ने तेरे साथ रहकर जो तेरी सेवा की, सो क्या राहेल के लिये नहीं की? फिर तू ने मुझ से क्यों ऐसा छल किया है? 
Genesis 29:26 लाबान ने कहा, हमारे यहां ऐसी रीति नहीं, कि जेठी से पहिले दूसरी का विवाह कर दें। 
Genesis 29:27 इसका सप्ताह तो पूरा कर; फिर दूसरी भी तुझे उस सेवा के लिये मिलेगी जो तू मेरे साथ रह कर और सात वर्ष तक करेगा। 
Genesis 29:28 सो याकूब ने ऐसा ही किया, और लिआ: के सप्ताह को पूरा किया; तब लाबान ने उसे अपनी बेटी राहेल को भी दिया, कि वह उसकी पत्नी हो। 
Genesis 29:29 और लाबान ने अपनी बेटी राहेल की दासी होने के लिये अपनी दासी बिल्हा को दिया। 
Genesis 29:30 तब याकूब राहेल के पास भी गया, और उसकी प्रीति लिआ: से अधिक उसी पर हुई, और उसने लाबान के साथ रहकर सात वर्ष और उसकी सेवा की।

एक साल में बाइबल: 

  • यहेजकेल 22-23
  • 1 पतरस 1


गुरुवार, 23 नवंबर 2017

खामोशी


   मेरे एक मित्र ने कहा, छिछले नदी-नाले सबसे अधिक शोर करते हैं, जो कि एक सुप्रसिद्ध कहावत, "गहरे जल निश्चल होते हैं" का विलोम था। उसके कहने का तात्पर्य था कि जो लोग सबसे अधिक शोर करने वाले होते हैं उनके पास कहने के लिए कुछ खास नहीं होता है। इस समस्या का एक पहलु और भी है, कि बहुत बोलने वाले ठीक से सुनते भी नहीं हैं। मुझे साईमन और गारफ़न्कल के एक गीत, Sounds of Silence में कही गई बात स्मरण आती है, लोग बिना ध्यान दिए सुनते हैं। वे कहे जा रहे शब्दों को कानों से तो सुनते हैं, परन्तु अपने विचारों को शान्त कर के वास्तव में ध्यान से मन से नहीं सुनते हैं। हमारे लिए भला होगा यदि हम हम शान्त हो कर ध्यान से मन से सुनना आरंभ कर दें।

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि "...चुप रहने का समय, और बोलने का भी समय है" (सभोपदेशक 3:7)। अच्छी खामोशी, सुनने वाली खामोशी, नम्रता की खामोशी होती है। ऐसी खामोशी से सही सुना जाता है, बात को सही समझा जाता है, और फिर सही बात कही जाती है। नीतिवचन का लेखक लिखता है, "मनुष्य के मन की युक्ति अथाह तो है, तौभी समझ वाला मनुष्य उसको निकाल लेता है" (नीतिवचन 20:5)। बात की तह तक पहुँचने के लिए बहुत ध्यान से शान्त होकर सुनना अनिवार्य होता है।

   जब हम औरों की सुनते हैं, तो साथ ही हमें परमेश्वर की भी सुनने और जो वह कहता है उस पर ध्यान देने की भी आवश्यकता है। मैं उस घटना के बारे में सोचता हूँ जब फरिसी व्यभिचार में पकड़ी गई एक स्त्री को प्रभु के पास ले कर आए और उस स्त्री के विरुद्ध आरोपों तथा निन्दा की झड़ी लगाए हुए बोले जा रहे थे; परन्तु प्रभु खामोश होकर अपनी ऊँगली से मिट्टी पर कुछ लिख रहा था (देखिए यूहन्ना 8:1-11)। प्रभु क्या कर रहा था? मेरा सुझाव है कि वह परमेश्वर पिता की आवाज़ को सुन रहा होगा कि इस क्रुद्ध भीड़ को क्या उत्तर दिया जाए, और इस प्रिय स्त्री से क्या कहा जाए? प्रभु का अपनी खामोशी द्वारा दिया गया उत्तर आज भी संसार भर में गूँज रहा है, लोगों से बातें कर रहा है। - डेविड रोपर


समयानुसार खामोशी बहुत शब्दों से अधिक अर्थपूर्ण हो सकती है।

जहां बहुत बातें होती हैं, वहां अपराध भी होता है, परन्तु जो अपने मुंह को बन्द रखता है वह बुद्धि से काम करता है। - नीतिवचन 10:19

बाइबल पाठ: सभोपदेशक 5:1-7
Ecclesiastes 5:1 जब तू परमेश्वर के भवन में जाए, तब सावधानी से चलना; सुनने के लिये समीप जाना, मूर्खों के बलिदान चढ़ाने से अच्छा है; क्योंकि वे नहीं जानते कि बुरा करते हैं। 
Ecclesiastes 5:2 बातें करने में उतावली न करना, और न अपने मन से कोई बात उतावली से परमेश्वर के साम्हने निकालना, क्योंकि परमेश्वर स्वर्ग में हैं और तू पृथ्वी पर है; इसलिये तेरे वचन थोड़े ही हों।
Ecclesiastes 5:3 क्योंकि जैसे कार्य की अधिकता के कारण स्वप्न देखा जाता है, वैसे ही बहुत सी बातों का बोलने वाला मूर्ख ठहरता है। 
Ecclesiastes 5:4 जब तू परमेश्वर के लिये मन्नत माने, तब उसके पूरा करने में विलम्ब न करना; क्यांकि वह मूर्खों से प्रसन्न नहीं होता। जो मन्नत तू ने मानी हो उसे पूरी करना। 
Ecclesiastes 5:5 मन्नत मान कर पूरी न करने से मन्नत का न मानना ही अच्छा है। 
Ecclesiastes 5:6 कोई वचन कहकर अपने को पाप में ने फंसाना, और न ईश्वर के दूत के साम्हने कहना कि यह भूल से हुआ; परमेश्वर क्यों तेरा बोल सुन कर अप्रसन्न हो, और तेरे हाथ के कार्यों को नष्ट करे? 
Ecclesiastes 5:7 क्योंकि स्वप्नों की अधिकता से व्यर्थ बातों की बहुतायत होती है: परन्तु तू परमेश्वर को भय मानना।

एक साल में बाइबल: 

  • यहेजकेल 20-21
  • याकूब 5


बुधवार, 22 नवंबर 2017

मुख्य बात


   हमारे शहर में एक उत्सव के दौरान की जा रही आतिशबाज़ी को देखते समय मेरा ध्यान बार-बार बंट रहा था। मुख्य समारोह के दोनों ओर, बीच-बीच में छोटी आतिश्बाज़ी होने लगती थी, जिससे मेरा ध्यान मुख्य आतिश्बाज़ी से बंट जाता था। वे छोटी वाली आतिशबाज़ियाँ अच्छी तो थीं, परन्तु उन्हें देखने के कारण मैं हमारे ऊपर हो रही मुख्य आतिशबाज़ी के कुछ अंश देखने से रह जाती थी।

   कई बार अच्छी बातें हमें और बेहतर बातों से अलग कर देती हैं। यही मार्था के साथ भी हुआ, जिसके बारे में परमेश्वर के वचन बाइबल के ने नियम में लूका 10:38-42 में दिया गया है। जब प्रभु यीशु और उनके चेले बैतनियाह गाँव में पहुँचे, तो मार्था ने अपने घर में उनका स्वागत किया। अच्छी मेज़बान होने के नाते वह अपने मेहमानों के लिए भोजन बनाने में लग गई, इसलिए हमें मार्था के प्रति सख्त रवैया नहीं रखना चाहिए।

   जब मार्था ने प्रभु यीशु से शिकायत की, कि उसकी बहन मरियम उनकी देखभाल कार्यों को करने में उसका हाथ नहीं बंटा रही है, तो प्रभु यीशु ने मरियम के चुनाव - प्रभु के चरणों पर बैठ कर उसके वचन को सुनने का समर्थन किया। परन्तु इससे प्रभु का यह तात्पर्य नहीं था कि मरियम अपनी बहन मार्था से अधिक आत्मिक या धर्मी है। एक अन्य अवसर पर प्रतीत होता है कि मार्था ने मरियम की अपेक्षा प्रभु पर अधिक भरोसा रखा था (यूहन्ना 11:19-20)। न ही प्रभु मार्था के उनके शारीरिक आवश्यकताओं के प्रति चिंतित होने की आलोचना कर रहा था। वरन जो बात प्रभु मार्था पर प्रगट करना चाहता था वह थी कि जीवन की व्यस्तता में भी मुख्य बात प्रभु के साथ समय बिताना, उसके साथ बैठना ही है। - ऐनी सेटास


प्रभु यीशु को हमारी संगति की लालसा रहती है।

एक वर मैं ने यहोवा से मांगा है, उसी के यत्न में लगा रहूंगा; कि मैं जीवन भर यहोवा के भवन में रहने पाऊं, जिस से यहोवा की मनोहरता पर दृष्टि लगाए रहूं, और उसके मन्दिर में ध्यान किया करूं। - भजन 27:4 

बाइबल पाठ: लूका 10:38-42
Luke 10:38 फिर जब वे जा रहे थे, तो वह एक गांव में गया, और मार्था नाम एक स्त्री ने उसे अपने घर में उतारा।
Luke 10:39 और मरियम नाम उस की एक बहिन थी; वह प्रभु के पांवों के पास बैठकर उसका वचन सुनती थी। 
Luke 10:40 पर मार्था सेवा करते करते घबरा गई और उसके पास आकर कहने लगी; हे प्रभु, क्या तुझे कुछ भी सोच नहीं कि मेरी बहिन ने मुझे सेवा करने के लिये अकेली ही छोड़ दिया है? सो उस से कह, कि मेरी सहायता करे। 
Luke 10:41 प्रभु ने उसे उत्तर दिया, मार्था, हे मार्था; तू बहुत बातों के लिये चिन्‍ता करती और घबराती है। 
Luke 10:42 परन्तु एक बात अवश्य है, और उस उत्तम भाग को मरियम ने चुन लिया है: जो उस से छीना न जाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 18-19
  • याकूब 4


मंगलवार, 21 नवंबर 2017

महान पुरुस्कार


   प्रयास के प्रत्येक क्षेत्र में कोई न कोई पुरुस्कार ऐसा होता है जिसे उस क्षेत्र के लिए पहचान तथा सफलता का सर्वोच्च पुरुस्कार माना जाता है, जैसे कि ओलंपिक खेल स्पर्धाओं में मिलने वाला स्वर्ण पदक, गायिकी के लिए दिया जाने वाला ग्रैमी पुरुस्कार, सिनेमा के क्षेत्र में ऐकेडमी पुरुस्कार, वैज्ञानिक तथा अन्य क्षेत्रों की उपलब्धियों के लिए नोबेल पुरुस्कार, आदि। ये सभी पुरुस्कार महत्वपूर्ण हैं। परन्तु एक सबसे महान पुरुस्कार है, और उसे कोई भी प्राप्त कर सकता है।

   प्रेरित पौलुस प्रथम ईसवीं में होने वाली खेल स्पर्धाओं के लिए खिलाड़ियों द्वारा पुरुस्कार जीतने के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा देने के बारे में भली-भांति जानता था। इस बात को ध्यान में रखते हुए, उसने फिलिप्पी के मसीही विश्वासियों को लिखी गई पत्री में लिखा: "परन्तु जो जो बातें मेरे लाभ की थीं, उन्‍हीं को मैं ने मसीह के कारण हानि समझ लिया है" (फिलिप्पियों 3:7)। क्यों? क्योंकि उसके हृदय ने एक नया उद्देश्य स्वीकार किया था: "मैं उसको और उसके मृत्युंजय की सामर्थ को, और उसके साथ दुखों में सहभागी हाने के मर्म को जानूँ, और उस की मृत्यु की समानता को प्राप्त करूं" (पद 10)। इसलिए, पौलुस ने कहा, "...उस पदार्थ को पकड़ने के लिये दौड़ा चला जाता हूं, जिस के लिये मसीह यीशु ने मुझे पकड़ा था" (पद 12)। अपनी इस दौड़ को भली-भांति पूरा कर लेने का पुरुस्कार उसके लिए धार्मिकता का मुकुट था (2 तिमुथियुस 4:8)।

   हम में से प्रत्येक उस पुरुस्कार को पाने के लिए प्रयास कर सकता है, यह जानते हुए कि ऐसा करने से हम प्रभु का आदर करते हैं। प्रतिदिन अपने दैनिक कार्यों को प्रभु की महिमा के लिए करते रहने से हम उस महान पुरुस्कार की ओर बढ़ते जाते हैं - उस स्वर्गीय पुरुस्कार की ओर जिसके लिए परमेश्वर, मसीह यीशु में होकर हमें बुलाता है। - डेविड मैक्कैसलैंड


मसीह के लिए जो कुछ भी इस जीवन में किया जाता है, 
उसका पुरुस्कार आने वाले जीवन में अवश्य मिलेगा।

भविष्य में मेरे लिये धर्म का वह मुकुट रखा हुआ है, जिसे प्रभु, जो धर्मी, और न्यायी है, मुझे उस दिन देगा और मुझे ही नहीं, वरन उन सब को भी, जो उसके प्रगट होने को प्रिय जानते हैं। - 2 तिमुथियुस 4:8

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 3:7-14
Philippians 3:7 परन्तु जो जो बातें मेरे लाभ की थीं, उन्‍हीं को मैं ने मसीह के कारण हानि समझ लिया है। 
Philippians 3:8 वरन मैं अपने प्रभु मसीह यीशु की पहिचान की उत्तमता के कारण सब बातों को हानि समझता हूं: जिस के कारण मैं ने सब वस्‍तुओं की हानि उठाई, और उन्हें कूड़ा समझता हूं, जिस से मैं मसीह को प्राप्त करूं। 
Philippians 3:9 और उस में पाया जाऊं; न कि अपनी उस धामिर्कता के साथ, जो व्यवस्था से है, वरन उस धामिर्कता के साथ जो मसीह पर विश्वास करने के कारण है, और परमेश्वर की ओर से विश्वास करने पर मिलती है। 
Philippians 3:10 और मैं उसको और उसके मृत्युंजय की सामर्थ को, और उसके साथ दुखों में सहभागी हाने के मर्म को जानूँ, और उस की मृत्यु की समानता को प्राप्त करूं। 
Philippians 3:11 ताकि मैं किसी भी रीति से मरे हुओं में से जी उठने के पद तक पहुंचूं। 
Philippians 3:12 यह मतलब नहीं, कि मैं पा चुका हूं, या सिद्ध हो चुका हूं: पर उस पदार्थ को पकड़ने के लिये दौड़ा चला जाता हूं, जिस के लिये मसीह यीशु ने मुझे पकड़ा था। 
Philippians 3:13 हे भाइयों, मेरी भावना यह नहीं कि मैं पकड़ चुका हूं: परन्तु केवल यह एक काम करता हूं, कि जो बातें पीछे रह गई हैं उन को भूल कर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ। 
Philippians 3:14 निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह इनाम पाऊं, जिस के लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 16-17
  • याकूब 3


सोमवार, 20 नवंबर 2017

प्रमुख उद्देश्य


   कई बातों के लिए साथ के लोगों से आने वाला दबाव हमारे दैनिक जीवन का एक भाग है। कभी-कभी हम अपने निर्णय इस आधार पर लेते हैं कि लोग क्या सोचेंगे या कहेंगे, न कि इस बात पर कि हमारे परमेश्वर को क्या पसन्द आता है, क्योंकि हमें चिंता रहती है कि यदि हम उनके अनुसार नहीं चले तो फिर लोग हम पर टिप्पणी करेंगे या हमारा मज़ाक उड़ाएंगे।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने अपने साथ के लोगों से प्रभु यीशु में अपने विश्वास के प्रति काफ़ी दबाव झेला। यहूदी धर्म से मसीही विश्वास में आने वाले कुछ विश्वासी मानते थे कि वास्तव में उद्धार प्राप्त करने के लिए अन्यजातियों से मसीही विश्वास में आए लोगों को खतना करवा लेना चाहिए (गलातियों 1:7; देखें 6:12-15)। परन्तु पौलुस अपने निर्णय पर दृढ़ बना रहा और प्रचार करता रहा कि उद्धार केवल परमेश्वर के अनुग्रह के द्वारा मसीह यीशु पर लाए गए विश्वास मात्र ही से है; इसमें और किसी कार्य का कोई स्थान नहीं है। उसके इस प्रचार के लिए उस पर स्वयं ही अपने आप को प्रेरित बना लेने का आरोप लगाया गया। उस पर यह आरोप भी लगाया गया कि प्रेरितों ने कभी उसके द्वारा प्रचार किए जाने वाले सुसमाचार के स्वरूप का अनुमोदन नहीं किया था (2:1-10)।

   इस दबाव के होते हुए भी, पौलुस इस बात को लेकर बिलकुल स्पष्ट था कि वह किस की सेवा कर रहा है - मसीह यीशु की। उसके लिए मनुष्यों का नहीं, वरन परमेश्वर के अनुमोदन का स्थान सर्वोपरि था (गलातियों 1:10)। उसने अपने लिए यह लक्ष्य निर्धारित किया हुआ था कि वह मनुष्यों से नहीं वरन परमेश्वर की स्वीकृति से कार्य करेगा।

   इसी प्रकार हम मसीही विश्वासी भी मसीह के सेवक हैं। लोग चाहे हमें आदर दें अथवा हम से घृणा करें, हमारी निंदा करें या प्रशंसा, हमारा उद्देश्य परमेश्वर की सेवा करना है। एक दिन हम में से प्रत्येक को परमेश्वर के सामने अपने जीवन का, अपनी इस सेवकाई का हिसाब देना होगा (रोमियों 14:12)।

   इसका यह अर्थ नहीं है कि हमें लोगों की बात की कदापि कोई चिंता नहीं करनी चाहिए; परन्तु यह कि अन्ततः हमारा मुख्य उद्देश्य होना चाहिए कि हम परमेश्वर को भावते रहने वाले बनें। हम सभी अन्त में अपने विषय यही सुनना चाहेंगे, "धन्य हे अच्‍छे और विश्वासयोग्य दास" (मत्ती 25:23)। इसके लिए मनुष्यों को नहीं वरन परमेश्वर को प्रसन्न करना अपने जीवन का प्रमुख उद्देश्य बना लें। - जेमी फर्नान्डेज़ गर्रिदो


सदैव यीशु का अनुसरण करते रहें।

सो हम में से हर एक परमेश्वर को अपना अपना लेखा देगा। - रोमियों 14:12

बाइबल पाठ: गलातियों 1:6-10
Galatians 1:6 मुझे आश्चर्य होता है, कि जिसने तुम्हें मसीह के अनुग्रह से बुलाया उस से तुम इतनी जल्दी फिर कर और ही प्रकार के सुसमाचार की ओर झुकने लगे। 
Galatians 1:7 परन्तु वह दूसरा सुसमाचार है ही नहीं: पर बात यह है, कि कितने ऐसे हैं, जो तुम्हें घबरा देते, और मसीह के सुसमाचार को बिगाड़ना चाहते हैं। 
Galatians 1:8 परन्तु यदि हम या स्वर्ग से कोई दूत भी उस सुसमाचार को छोड़ जो हम ने तुम को सुनाया है, कोई और सुसमाचार तुम्हें सुनाए, तो श्रापित हो। 
Galatians 1:9 जैसा हम पहिले कह चुके हैं, वैसा ही मैं अब फिर कहता हूं, कि उस सुसमाचार को छोड़ जिसे तुम ने ग्रहण किया है, यदि कोई और सुसमाचार सुनाता है, तो श्रापित हो। अब मैं क्या मनुष्यों को मनाता हूं या परमेश्वर को? क्या मैं मनुष्यों को प्रसन्न करना चाहता हूं? 
Galatians 1:10 यदि मैं अब तक मनुष्यों को ही प्रसन्न करता रहता, तो मसीह का दास न होता।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 14-15
  • याकूब 2


रविवार, 19 नवंबर 2017

निर्देष


   जब वस्तुओं को जोड़ कर बनाना होता है, वे चाहे इलैक्ट्रौनिक हों या अन्य कोई, तो मेरे और मेरे पुत्र स्टीव की कार्य विधि बहुत भिन्न है। स्टीव को यांत्रिक रीति से कार्य करना अच्छा लगता है; इसलिए मैं अभी उस वस्तु को जोड़ने और बनाने के निर्देषों को पढकर समझने का प्रयास ही कर रहा होता हूँ, कि इतने में वह निर्देषों को पढ़े बिना ही उसे लगभग आधा बना चुका होता है। कभी-कभी हम निर्देषों को जाने बिना या उन का पालन किए बिना ही काम चला सकते हैं। परन्तु यदि हमें एक ऐसा जीवन बनाना है जो परमेश्वर की भलाई और बुद्धिमता को दिखाता है तो परमेश्वर के वचन बाइबल में दिए गए उसके निर्देषों की अवहेलना कर के हम ऐसा कदापि नहीं कर सकते हैं।

   इस तथ्य का एक अच्छा उदाहरण बाबुल की बन्धुआई से लौट कर आने वाले इस्त्राएली हैं। अपनी मातृभूमि में लौट कर आने के पश्चात वे परमेश्वर की उपासना को पुनः स्थापित करने के प्रयास करने लगे; और इसके लिए उन्होंने "...कमर बान्ध कर इस्राएल के परमेश्वर की वेदी को बनाया कि उस पर होमबलि चढ़ाएं, जैसे कि परमेश्वर के भक्त मूसा की व्यवस्था में लिखा है" (एज़्रा 3:2)। सही प्रकार से वेदी बनाने और परमेश्वर द्वारा लैव्यवस्था 23:33-43 में दी गई विधि के अनुसार झोंपड़ियों का पर्व मनाने में उन्होंने वैसा ही किया जैसा परमेश्वर ने अपने वचन में निर्दिष्ट किया था।

   प्रभु यीशु मसीह ने भी अपने अनुयायियों को कुछ निर्देष दिए हैं। प्रभु ने कहा, "...तू परमेश्वर अपने प्रभु से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख"; और "...तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख" (मत्ती 22:37, 39)। जब हम प्रभु यीशु पर विश्वास लाते हैं और उसका अनुसरण करने का निर्णय लेते हैं, अपने जीवन उसे समर्पित करते हैं, तो वह सही रीति से जीवन जीने के लिए हमारा मार्गदर्शन भी करता है। वह हमारा सृष्टिकर्ता है और हमें तथा हमारे बारे में, हम से कहीं अधिक अच्छी रीति से जानता है; उसे हम से अधिक अच्छे से पता है कि जीवन को भली-भांति जीने के लिए हमें क्या करना चाहिए और क्या नहीं; हमारे लिए क्या उपयुक्त एवं उचित है और क्या नहीं। इसलिए जब हम मसीह यीशु को अपना प्रभु मान लेते हैं तो उसके निर्देशों के अनुसार जीवन व्यतीत करने में ही हमारी भलाई है। - डेव ब्रैनन


यदि हम चाहते हैं कि परमेश्वर हमारी अगुवाई करे, 
तो हमें उसका अनुसरण करने के लिए तैयार रहना चाहिए।

जब तुम मेरा कहना नहीं मानते, तो क्यों मुझे हे प्रभु, हे प्रभु, कहते हो? - लूका 6:46

बाइबल पाठ: एज़्रा 3:1-6
Ezra 3:1 जब सातवां महीना आया, और इस्राएली अपने अपने नगर में बस गए, तो लोग यरूशलेम में एक मन हो कर इकट्ठे हुए। 
Ezra 3:2 तब योसादाक के पुत्र येशू ने अपने भाई याजकों समेत और शालतीएल के पुत्र जरूब्बाबेल ने अपने भाइयों समेत कमर बान्ध कर इस्राएल के परमेश्वर की वेदी को बनाया कि उस पर होमबलि चढ़ाएं, जैसे कि परमेश्वर के भक्त मूसा की व्यवस्था में लिखा है। 
Ezra 3:3 तब उन्होंने वेदी को उसके स्थान पर खड़ा किया क्योंकि उन्हें उस ओर के देशों के लोगों का भय रहा, और वे उस पर यहोवा के लिये होमबलि अर्थात प्रतिदिन सबेरे और सांझ के होमबलि चढ़ाने लगे। 
Ezra 3:4 और उन्होंने झोंपडिय़ों के पर्व को माना, जैसे कि लिखा है, और प्रतिदिन के होमबलि एक एक दिन की गिनती और नियम के अनुसार चढ़ाए। 
Ezra 3:5 और उसके बाद नित्य होमबलि और नये नये चान्द और यहोवा के पवित्र किए हुए सब नियत पर्वों के बलि और अपनी अपनी इच्छा से यहोवा के लिये सब स्वेच्छाबलि हर एक के लिये बलि चढ़ाए। 
Ezra 3:6 सातवें महीने के पहिले दिन से वे यहोवा को होमबलि चढ़ाने लगे। परन्तु यहोवा के मन्दिर की नेव तब तक न डाली गई थी।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 11-13
  • याकूब 1


शनिवार, 18 नवंबर 2017

प्रतिबिंबित


   ऊँचे और सीधे खड़े पहाड़ों की तलहटी में स्थित होने तथा उत्तरी ध्रुव के निकट की अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण नॉर्वे देश के रजूकान शहर में अक्तुबर से मार्च तक सूर्य की सीधी रौशनी पहुँचने नहीं पाती है। उस शहर को रौशन करने के लिए रजूकान शहर के लोगों ने पहाड़ों पर विशाल दर्पण लगाए जो सूर्य के प्रकाश को शहर में प्रतिबिंबित करते हैं; क्योंकि ये दर्पण आकाश में सूरज की स्थिति के साथ-साथ घूमते रहते हैं इसलिए सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक वे शहर में लगातार रौशनी को बनाए रखते हैं।

   मैं मसीही जीवन को भी इसी प्रकार से देखता हूँ। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु ने कहा कि उसके अनुयायी "जगत की ज्योति हैं" (मत्ती 5:14); और यूहन्ना ने लिखा कि मसीह यीशु ही वह सच्ची ज्योति है जो "अन्धकार में चमकती है" (यूहन्ना 1:5)। प्रभु यीशु ने अपने अनुयायियों को आमंत्रित किया कि, "तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के साम्हने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें" (मत्ती 5:16)। यह प्रभु की ओर से आवाहन है कि हम जो उसके लोग हैं, घृणा का प्रत्युत्तर प्रेम से दें, परेशानी में धैर्य दिखाएं, और संघर्षों में शान्ति को प्रदर्शित करें। प्रेरित पौलुस हमें स्मरण करवाता है कि, "क्योंकि तुम तो पहले अन्धकार थे परन्तु अब प्रभु में ज्योति हो, सो ज्योति की सन्तान के समान चलो" (इफिसियों 5:8)।

   प्रभु यीशु ने यह भी कहा कि, "...जगत की ज्योति मैं हूं; जो मेरे पीछे हो लेगा, वह अन्धकार में न चलेगा, परन्तु जीवन की ज्योति पाएगा" (यूहन्ना 8:12)। हमारी ज्योति परमेश्वर के पुत्र हमारे प्रभु यीशु से है; हम उसकी ज्योति को संसार में प्रतिबिंबित करते हैं। जैसे कि यदि सूर्य न हो तो रजूकान के उन विशाल दर्पणों को प्रतिबिंबित करने के लिए कोई ज्योति नहीं मिलेगी, उसी प्रकार यदि हम में प्रभु यीशु का वास न हो तो हम भी संसार को कोई ज्योति प्रतिबिंबित नहीं करने पाएंगे। - लॉरेंस दरमानी


प्रभु की ज्योति को प्रतिबिंबित करें और उसके लिए चमकें।

और ज्योति अन्धकार में चमकती है; और अन्धकार ने उसे ग्रहण न किया। - यूहन्ना 1:5

बाइबल पाठ: मत्ती 5:14-16
Matthew 5:14 तुम जगत की ज्योति हो; जो नगर पहाड़ पर बसा हुआ है वह छिप नहीं सकता। 
Matthew 5:15 और लोग दिया जलाकर पैमाने के नीचे नहीं परन्तु दीवट पर रखते हैं, तब उस से घर के सब लोगों को प्रकाश पहुंचता है। 
Matthew 5:16 उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के साम्हने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 8-10
  • इब्रानियों 13