ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

शनिवार, 13 जनवरी 2018

द्वार


   इटली के कलाकार लोरेंज़ो घिब्रटी (1378-1455) ने इटली के फ्लोरेंस में बपतिस्मा देने के कक्ष के पीतल के द्वारों पर प्रभु यीशु के जीवन के चित्रों को बनाने में वर्षों लगाए। पीतल में नक्काशी कर के बनाए गए ये चित्र इतने मार्मिक हैं कि प्रसिद्ध कलाकार माइकलएंजेलो ने उन द्वारों को ‘स्वर्ग के द्वार’ कहा। कलाकृतियों के खजाने के रूप में वे चित्र दर्शकों का स्वागत सुसमाचार की कहानियों के साथ करते हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु द्वारा कही गई अनेकों बातें दर्ज हैं। प्रभु यीशु ने कहा, “द्वार मैं हूं: यदि कोई मेरे द्वारा भीतर प्रवेश करे तो उद्धार पाएगा...” (यूहन्ना 10:9)। अपने क्रूस पर चढ़ाए जाने से पहले की रात को उन्होंने अपने शिष्यों से कहा, “...मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता” (यूहन्ना 14:6)। क्रूस पर चढ़ाए जाने के कुछ ही घंटों में प्रभु ने उनके साथ क्रूस पर चढ़ाए गए एक अपराधी से कहा “...आज ही तू मेरे साथ स्वर्गलोक में होगा” (लूका 23:43)।

   प्रभु यीशु के मृतकों में से पुनरुत्थान और स्वर्गारोहण के कुछ ही सप्ताह पश्चात उनके शिष्य, प्रेरित पतरस ने, निर्भीकता के साथ प्रभु को क्रूस देने वालों से कहा, “और किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं; क्योंकि स्वर्ग के नीचे मनुष्यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया, जिस के द्वारा हम उद्धार पा सकें” (प्रेरितों 4:12)। कुछ वर्षों के बाद प्रेरित पौलुस ने अपनी एक पत्री में लिखा कि मनुष्यों और परमेश्वर के मध्य एक ही बिचवई है, अर्थात मसीह यीशु जो मनुष्य है (1 तिमुथियुस 2:5)।

   स्वर्ग का द्वार प्रभु यीशु मसीह ही है; जो भी उस पर विश्वास लाता है, उससे अपने पापों की क्षमा माँगकर अपना जीवन उसे समर्पित करता है, उसे प्रभु उद्धार तथा अनन्त जीवन का दान देता है। स्वर्ग का द्वार, प्रभु यीशु मसीह आज आपको आमंत्रित कर रहा है; जब तक द्वार खुला है, अवसर है, उसका सदुपयोग कीजिए और अनन्त जीवन के द्वार, प्रभु यीशु मसीह में लाए गए विश्वास द्वारा स्वर्ग में प्रवेश कीजिए। - डेनिस फिशर


प्रभु यीशु ने हमें अनन्त जीवन देने के लिए क्रूस पर अपना बलिदान दिया।

क्योंकि परमेश्वर एक ही है: और परमेश्वर और मनुष्यों के बीच में भी एक ही बिचवई है, अर्थात मसीह यीशु जो मनुष्य है। - 1 तिमुथियुस 2:5

बाइबल पाठ: यूहन्ना 10:1-9
John 10:1 मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि जो कोई द्वार से भेड़शाला में प्रवेश नहीं करता, परन्तु और किसी ओर से चढ़ जाता है, वह चोर और डाकू है।
John 10:2 परन्तु जो द्वार से भीतर प्रवेश करता है वह भेड़ों का चरवाहा है।
John 10:3 उसके लिये द्वारपाल द्वार खोल देता है, और भेंड़ें उसका शब्द सुनती हैं, और वह अपनी भेड़ों को नाम ले ले कर बुलाता है और बाहर ले जाता है।
John 10:4 और जब वह अपनी सब भेड़ों को बाहर निकाल चुकता है, तो उन के आगे आगे चलता है, और भेड़ें उसके पीछे पीछे हो लेती हैं; क्योंकि वे उसका शब्द पहचानती हैं।
John 10:5 परन्तु वे पराये के पीछे नहीं जाएंगी, परन्तु उस से भागेंगी, क्योंकि वे परायों का शब्द नहीं पहचानती।
John 10:6 यीशु ने उन से यह दृष्‍टान्‍त कहा, परन्तु वे न समझे कि ये क्या बातें हैं जो वह हम से कहता है।
John 10:7 तब यीशु ने उन से फिर कहा, मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि भेड़ों का द्वार मैं हूं।
John 10:8 जितने मुझ से पहिले आए; वे सब चोर और डाकू हैं परन्तु भेड़ों ने उन की न सुनी।
John 10:9 द्वार मैं हूं: यदि कोई मेरे द्वारा भीतर प्रवेश करे तो उद्धार पाएगा और भीतर बाहर आया जाया करेगा और चारा पाएगा।


एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 31-32
  • मत्ती 9:18-38



शुक्रवार, 12 जनवरी 2018

थामें रहें


   मेरा एक मित्र, बड़ी रोचक बातें कहता रहता है; जैसे कि  - “अच्छी कॉफी बनाने के लिए अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती है।” यदि कोई अपने बूते से बाहर किसी बात में फंस जाए तो वह कहता है, “जो कुछ तुम्हारे पास है उसे थामे रहो!” – कहने का तात्पर्य है कि “सहायता आ रही है, थामे रहो!”

   परमेश्वर के वचन बाइबल की अंतिम पुस्तक प्रकाशितवाक्य में हम एशिया की सात मण्डलियों को लिखे गए पत्रों को देखते हैं (अध्याय 2-3)। ये परमेश्वर द्वारा उन मसीही मण्डलियों को दिए गए सन्देश हैं। इन संदेशों में प्रोत्साहन, डाँट, और चुनौती हैं; और ये आज भी हम से वैसे ही बातें करते हैं जैसे कि तब प्रथम-शताब्दी की मण्डली से। इन सात संदेशों में हम दो बार लिखा पाते हैं “जो तुम्हारे पास है उसको...थामे रहो।” प्रभु ने थुआतीरा की मण्डली से कहा: “जो तुम्हारे पास है उसको मेरे आने तक थामे रहो” (2:25); और फिलदिलफिया की मण्डली से कहा, “मैं शीघ्र ही आनेवाला हूं; जो कुछ तेरे पास है, उसे थामें रह, कि कोई तेरा मुकुट छीन न ले” (3:11)। बहुत परीक्षाओं और विरोध में भी वे मसीही विश्वासी अपने विश्वास में दृढ़ बने रहे, परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं को थामे रहे।

   जब हमारी परिस्थितियाँ कठिन हों, और आनन्द से अधिक दुःख हों, तब प्रभु यीशु हम से कहते हैं, “जो कुछ तुम्हारे पास है उसे थामे रहो; सहायता आ रही है!” प्रभु के इस आश्वासन और प्रतिज्ञा के साथ हम अपने मसीही विश्वास में दृढ़ बने रह सकते हैं, प्रभु परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं को भरोसे के साथ थामे रह सकते हैं। - डेविड मैक्कैसलैंड


मसीह यीशु की लौट कर आने की प्रतिज्ञा, 
हमें विश्वास में दृढ़ बने रहने का आह्वान करती है।

धन्य है वह जो इस भविष्यद्वाणी के वचन को पढ़ता है, और वे जो सुनते हैं और इस में लिखी हुई बातों को मानते हैं, क्योंकि समय निकट आया है। - प्रकाशितवाक्य 1:3

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य 3:7-13
Revelation 3:7 और फिलेदिलफिया की कलीसिया के दूत को यह लिख, कि, जो पवित्र और सत्य है, और जो दाऊद की कुंजी रखता है, जिस के खोले हुए को कोई बन्‍द नहीं कर सकता और बन्‍द किए हुए को कोई खोल नहीं सकता, वह यह कहता है, कि।
Revelation 3:8 मैं तेरे कामों को जानता हूं, (देख, मैं ने तेरे साम्हने एक द्वार खोल रखा है, जिसे कोई बन्‍द नहीं कर सकता) कि तेरी सामर्थ्य थोड़ी सी है, और तू ने मेरे वचन का पालन किया है और मेरे नाम का इन्कार नहीं किया।
Revelation 3:9 देख, मैं शैतान के उन सभा वालों को तेरे वश में कर दूंगा जो यहूदी बन बैठे हैं, पर हैं नहीं, वरन झूठ बोलते हैं देख, मैं ऐसा करूंगा, कि वे आ कर तेरे चरणों में दण्‍डवत करेंगे, और यह जान लेंगे, कि मैं ने तुझ से प्रेम रखा है।
Revelation 3:10 तू ने मेरे धीरज के वचन को थामा है, इसलिये मैं भी तुझे परीक्षा के उस समय बचा रखूंगा, जो पृथ्वी पर रहने वालों के परखने के लिये सारे संसार पर आने वाला है।
Revelation 3:11 मैं शीघ्र ही आने वाला हूं; जो कुछ तेरे पास है, उसे थामें रह, कि कोई तेरा मुकुट छीन न ले।
Revelation 3:12 जो जय पाए, उस मैं अपने परमेश्वर के मन्दिर में एक खंभा बनाऊंगा; और वह फिर कभी बाहर न निकलेगा; और मैं अपने परमेश्वर का नाम, और अपने परमेश्वर के नगर, अर्थात नये यरूशलेम का नाम, जो मेरे परमेश्वर के पास से स्वर्ग पर से उतरने वाला है और अपना नया नाम उस पर लिखूंगा।
Revelation 3:13 जिस के कान हों, वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है।


एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 29-30
  • मत्ती 9:1-17


गुरुवार, 11 जनवरी 2018

बहुमूल्य


   मेरी सास की मृत्यु के पश्चात, मेरी पत्नि और मैंने उनके घर की एक अलमारी में रखे एक पैसे के सिक्कों से भरा एक डिब्बा पाया। उन्हें सिक्के जमा करने का शौक नहीं था; परन्तु वे उस समय की थीं जब ये सिक्के प्रचलित थे, और उन्होंने उपयोग के लिए कुछ एकत्रित कर लिए थे। उनमें से कुछ सिक्के बहुत अच्छी हालत में हैं; और अन्य इतने अच्छे हाल में नहीं हैं, उनका आकार बिगड़ गया है और वे भद्दे हो गए हैं। कुछ इतने घिस गए हैं और धुंधले पड़ गए हैं कि उन पर छपे हुए को कठिनाई से ही देखा जा सकता है। यद्यपि आजकल एक पैसे की कोई कीमत नहीं है, और अधिकांश लोग उन्हें बेकार समझते हैं, परन्तु अपने समय में उस एक सिक्के से एक अखबार खरीदा जा सकता था; और, वे चाहे घिसे और बिगड़े हुए ही क्यों न हों, फिर भी सिक्के संग्रह करने वाले आज भी उनमें कुछ कीमत पाते हैं।

   संभव है कि आप अपने आप को भद्दा, घिसा हुआ, पुराना, या अनुपयोगी समझते हों; परन्तु परमेश्वर आप में फिर भी कुछ मूल्यवान देखता है। इस सृष्टि के सृष्टिकर्ता को आपकी आवश्यकता है – आपके मस्तिष्क, या शरीर, या कपड़ों, या उपलब्धियों, या व्यक्तित्व, अथवा आपकी अन्य किसी वस्तु के लिए नहीं, वरन इसलिए क्योंकि आप एकमात्र हैं, आपके जैसा कोई और है ही नहीं! वह आपको अपना बनाने के लिए किसी भी सीमा तक जा सकता है, आपके लिए कोई भी कीमत चुका सकता है “क्योंकि दाम देकर मोल लिये गए हो, इसलिये अपनी देह के द्वारा परमेश्वर की महिमा करो” (1 कुरिन्थियों 6:20)।

   वास्तविकता यही है कि उसने ऐसा कर भी दिया है। वह स्वर्ग छोड़ कर पृथ्वी पर आ गया, और आपके उद्धार के लिए अपने आप को क्रूस पर बलिदान कर दिया (रोमियों 5:6, 8-9)। उसका यह अपने आप को बलिदान करने के लिए स्वर्ग की महिमा को छोड़ कर आना, आपके प्रति उसके प्रेम का, उसकी दृष्टि में आपकी कीमत का सूचक है। आप उसकी दृष्टि में बहुमूल्य हैं; वह आप से बहुत प्रेम करता है। - डेविड रोपर


प्रभु यीशु का बलिदान, आपके लिए परमेश्वर के प्रेम का सूचक है।

क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए। - यूहन्ना 3:16

बाइबल पाठ: रोमियों 5:6-11
Romans 5:6 क्योंकि जब हम निर्बल ही थे, तो मसीह ठीक समय पर भक्तिहीनों के लिये मरा।
Romans 5:7 किसी धर्मी जन के लिये कोई मरे, यह तो र्दुलभ है, परन्तु क्या जाने किसी भले मनुष्य के लिये कोई मरने का भी हियाव करे।
Romans 5:8 परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा।
Romans 5:9 सो जब कि हम, अब उसके लोहू के कारण धर्मी ठहरे, तो उसके द्वारा क्रोध से क्यों न बचेंगे?
Romans 5:10 क्योंकि बैरी होने की दशा में तो उसके पुत्र की मृत्यु के द्वारा हमारा मेल परमेश्वर के साथ हुआ फिर मेल हो जाने पर उसके जीवन के कारण हम उद्धार क्यों न पाएंगे?
Romans 5:11 और केवल यही नहीं, परन्तु हम अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा जिस के द्वारा हमारा मेल हुआ है, परमेश्वर के विषय में घमण्ड भी करते हैं।


एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 27-28
  • मत्ती 8:18-34



बुधवार, 10 जनवरी 2018

शरणस्थान


   मार्च 2014 में, मेरे मूल-निवास स्थान में जनजातीय संघर्ष आरंभ हो गया, और मेरे पिता के घराने को, अन्य शरणार्थियों के साथ, उस इलाके की राजधानी शहर में शरण लेनी पड़ी। सँसार के इतिहास में अनेकों बार, अनेकों स्थानों पर जब लोगों ने अपने आप को असुरक्षित अनुभव किया है तो वे अन्य स्थानों पर सुरक्षा और कुछ बेहतर ढूँढते हुए गए हैं।

   मैं अपने लोगों से मिलने गया, और उनके साथ बातचीत कर रहा था, मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल में, यहोशू 20:1-9 में उल्लेखित शरण नगरों का ध्यान आया। ये वे निर्धारित सुरक्षित स्थान थे जहाँ पर “बदला लेने वाले सम्बन्धियों” से बचकर, जब तक कि उसका न्याय नहीं हो जाता था, वह व्यक्ति जिसने गलती से हत्या कर दी हो, शरण ले सकता था (पद 3)।

   आज भी लोग शरण स्थान खोजते  हैं, परन्तु भिन्न कारणों से। चाहे इन शरणस्थानों की आज भी आवश्यकता है, और इनमें लोगों को भोजन और रहने का स्थान मिल जाता है, परन्तु ये स्थान शरणार्थियों और भगोड़ों की सभी आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं कर सकते हैं – यह तो केवल प्रभु परमेश्वर में ही संभव हो पाता है। जो परमेश्वर के साथ चलते हैं, वे उसमें सच्चा और सबसे सुरक्षित शरणस्थान पाते हैं। जब प्रभु ने प्राचीन इस्त्राएल को देश-निकाला दिया, तो उनके संबंध में प्रभु ने कहा, “परन्तु तू उन से कह, प्रभु यहोवा यों कहता है कि मैं ने तुम को दूर दूर की जातियों में बसाया और देश देश में तितर-बितर कर दिया तो है, तौभी जिन देशों में तुम आए हुए हो, उन में मैं स्वयं तुम्हारे लिये थोड़े दिन तक पवित्र स्थान ठहरूंगा” (यहेजकेल 11:16)।

   हम भजनकार के साथ प्रभु से पूरे भरोसे के साथ कह सकते हैं, “तू मेरे छिपने का स्थान है; तू संकट से मेरी रक्षा करेगा; तू मुझे चारों ओर से छुटकारे के गीतों से घेर लेगा” (भजन 32:7)। - लौरेंस दर्मानी


जो परमेश्वर के हाथों में सुरक्षित हैं, उन्हें कुछ हिला नहीं सकता है।

यहोवा का नाम दृढ़ गढ़ है; धर्मी उस में भाग कर सब दुर्घटनाओं से बचता है। - नीतिवचन 18:10

बाइबल पाठ: यहोशू 20:1-9
Joshua 20:1 फिर यहोवा ने यहोशू से कहा,
Joshua 20:2 इस्राएलियों से यह कह, कि मैं ने मूसा के द्वारा तुम से शरण नगरों की जो चर्चा की थी उसके अनुसार उन को ठहरा लो,
Joshua 20:3 जिस से जो कोई भूल से बिना जाने किसी को मार डाले, वह उन में से किसी में भाग जाए; इसलिये वे नगर खून के पलटा लेने वाले से बचने के लिये तुम्हारे शरणस्थान ठहरें।
Joshua 20:4 वह उन नगरों में से किसी को भाग जाए, और उस नगर के फाटक में से खड़ा हो कर उसके पुरनियों को अपना मुकद्दमा कह सुनाए; और वे उसको अपने नगर में अपने पास टिका लें, और उसे कोई स्थान दें, जिस में वह उनके साथ रहे।
Joshua 20:5 और यदि खून का पलटा लेने वाला उसका पीछा करे, तो वे यह जानकर कि उसने अपने पड़ोसी को बिना जाने, और पहिले उस से बिना बैर रखे मारा, उस खूनी को उसके हाथ में न दें।
Joshua 20:6 और जब तक वह मण्डली के साम्हने न्याय के लिये खड़ा न हो, और जब तक उन दिनों का महायाजक न मर जाए, तब तक वह उसी नगर में रहे; उसके बाद वह खूनी अपने नगर को लौटकर जिस से वह भाग आया हो अपने घर में फिर रहने पाए।
Joshua 20:7 और उन्होंने नप्ताली के पहाड़ी देश में गलील के केदेश को, और एप्रैम के पहाड़ी देश में शकेम को, और यहूदा के पहाड़ी देश में किर्य्यतर्बा को, (जो हेब्रोन भी कहलाता है) पवित्र ठहराया।
Joshua 20:8 और यरीहो के पास के यरदन के पूर्व की ओर उन्होंने रूबेन के गोत्र के भाग में बसेरे को, जो जंगल में चौरस भूमि पर बसा हुआ है, और गाद के गोत्र के भाग में गिलाद के रमोत को, और मनश्शे के गोत्र के भाग में बाशान के गालान को ठहराया।
Joshua 20:9 सारे इस्राएलियों के लिये, और उन के बीच रहने वाले परदेशियों के लिये भी, जो नगर इस मनसा से ठहराए गए कि जो कोई किसी प्राणी को भूल से मार डाले वह उन में से किसी में भाग जाए, और जब तक न्याय के लिये मण्डली के साम्हने खड़ा न हो, तब तक खून का पलटा लेने वाला उसे मार डालने न पाए, वे यह ही हैं।


एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 25-26
  • मत्ती 8:1-17



मंगलवार, 9 जनवरी 2018

उद्धार के सोते


   जब लोग धरती के अन्दर गहरे कुएँ या छेद बनाते हैं तो वे पानी निकालने, तेल निकालने, या फिर धरती के भीतरी भाग के नमूने निकालने के लिए ऐसा करते हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में हम यशायाह 12 में पाते हैं कि परमेश्वर ने अपने लोगों से, जो आत्मिक एवं भौगोलिक मरूभूमी में रह रहे थे, चाहा कि वे उसके “उद्धार के सोतों” को खोजें। यशायाह भविष्यद्वक्ता ने परमेश्वर से मिलने वाले उद्धार को तरोताज़गी प्रदान करने वाले सर्वोत्तम जल के समान बताया। बहुत वर्षों तक परमेश्वर के विमुख चलने के कारण, यहूदा अब बंधुवाई में जाने वाला था, क्योंकि परमेश्वर ने विदेशी आक्रमणकारियों को उनपर हमला करने और उन्हें तित्तर-बित्तर करने की अनुमति दे दी थी। परन्तु, यशायाह भविष्यद्वक्ता ने कहा, कुछ बचे हुए लोग अपने इस निवास-स्थान को लौटकर आएँगे, जो परमेश्वर की ओर से चिन्ह होगा कि उसके प्रति विमुख तथा अनाज्ञाकारी होने के बावजूद, परमेश्वर फिर भी उनके साथ बना रहा है (यशायाह 11:11-12)।

   यशायाह 12 एक स्तुति गीत है, जो परमेश्वर की उसकी भलाई और विश्वासयोग्यता, विशेषकर उद्धार देने की विश्वासयोग्यता के लिए है। यशायाह ने लोगों को प्रोत्साहित किया कि परमेश्वर के उद्धार के सोतों की गहराईयों में वे परमेश्वर के अनुग्रह, सामर्थ्य, और आनन्द के ‘शीतल जल’ को अनुभव करेंगे (पद 1-3)। इस ‘शीतल जल’ से फिर वे हृदयों की तरोताज़गी तथा सामर्थ्य पाएँगे जिससे उनके हृदयों से परमेश्वर के प्रति स्तुति तथा कृतज्ञता प्रवाहित होगी (पद 4-6)।

   परमेश्वर चाहता है कि हम सभी, अपने पापों के अंगीकार और उनसे पश्चाताप के द्वारा, उसके उद्धार के सोतों में पाए जाने वाले सुखदायी ‘शीतल जल’ का व्यक्तिगत अनुभव करें। - मारविन विलियम्स


परमेश्वर के उद्धार के सोते कभी सूखते नहीं हैं।

उस समय प्रभु अपना हाथ दूसरी बार बढ़ा कर बचे हुओं को, जो उसकी प्रजा के रह गए हैं, अश्शूर से, मिस्र से, पत्रोस से, कूश से, एलाम से, शिनार से, हमात से, और समुद्र के द्वीपों से मोल ले कर छुड़ाएगा। वह अन्यजातियों के लिये झण्डा खड़ा कर के इस्राएल के सब निकाले हुओं को, और यहूदा के सब बिखरे हुओं को पृथ्वी की चारों दिशाओं से इकट्ठा करेगा। - यशायाह 11:11-12

बाइबल पाठ: यशायाह 12
Isaiah 12:1 उस दिन तू कहेगा, हे यहोवा, मैं तेरा धन्यवाद करता हूं, क्योंकि यद्यिप तू मुझ पर क्रोधित हुआ था, परन्तु अब तेरा क्रोध शान्त हुआ, और तू ने मुझे शान्ति दी है।
Isaiah 12:2 परमेश्वर मेरा उद्धार है, मैं भरोसा रखूंगा और न थरथराऊंगा; क्योंकि प्रभु यहोवा मेरा बल और मेरे भजन का विषय है, और वह मेरा उद्धारकर्ता हो गया है।
Isaiah 12:3 तुम आनन्द पूर्वक उद्धार के सोतों से जल भरोगे।
Isaiah 12:4 और उस दिन तुम कहोगे, यहोवा की स्तुति करो, उस से प्रार्थना करो; सब जातियों में उसके बड़े कामों का प्रचार करो, और कहो कि उसका नाम महान है।
Isaiah 12:5 यहोवा का भजन गाओ, क्योंकि उसने प्रतापमय काम किए हैं, इसे सारी पृथ्वी पर प्रगट करो।
Isaiah 12:6 हे सिय्योन में बसने वाली तू जयजयकार कर और ऊंचे स्वर से गा, क्योंकि इस्राएल का पवित्र तुझ में महान है।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 23-24
  • मत्ती 7



सोमवार, 8 जनवरी 2018

परिपूर्ण और संतोषजनक


   जब मैं युवा था, तो अपनी बात मनवाने के लिए मैं बहुधा दलील दिया दिया करता था, “परन्तु और सब भी तो कर रहे हैं,” और मुझे लगता था कि इस तर्क के सहारे मैं अपनी बात मनवा लूँगा। परन्तु मेरे माता-पिता मेरी बात मानने के लिए कभी इस तर्क के आगे नहीं झुके, यदि उन्हें लगा कि जो मैं कह अथवा चाह रहा हूँ वह असुरक्षित, अनुचित या मूर्खतापूर्ण है, मैं उस बात के लिए चाहे जितना अधीर और जोर देने वाला रहा हूँ, उन्होंने उसे कभी स्वीकार नहीं किया।

   जैसे जैसे हम बड़े होते जाते हैं, अपनी बात मनवाने या अपनी इच्छा पूरी करने के लिए हम अपने तर्कों और बहानों के खजाने में और नए तर्क तथा बहाने जोड़ते चले जाते हैं: “इससे किसी को कोई हानि नहीं होगी”, “यह गैरकानूनी नहीं है”, “पहले उसने मेरे साथ ऐसा किया”, “उसे पता नहीं चलेगा” आदि कितने ही ऐसे बहाने और तर्क हैं जिनके सहारे हम अपनी बात को ऊपर रखना चाहते हैं, पूरा होता हुआ देखना चाहते हैं। इन सभी और ऐसे ही अन्य सभी तर्कों के पीछे भावना होती है कि जो मैं चाहता हूँ, वही सबसे महत्वपूर्ण तथा सबसे अधिक आवश्यक है।

   अंततः यही त्रुटिपूर्ण सोच, परमेश्वर के संबंध में हमारे विचारों और विश्वास का आधार भी बन जाती है। एक झूठ जिसे हम बहुधा मानना चुन लेते हैं, है – सृष्टि का केन्द्र परमेश्वर नहीं वरन हम हैं। हमें लगने लगता है कि जब हम सँसार को अपनी इच्छाओं और पसन्द के अनुसार पुनःव्यवस्थित कर लेंगे तब हम प्रसन्न और निश्चिन्त हो जाएँगे। यह झूठ हमें युक्तिसंगत प्रतीत होता है क्योंकि यह हमें वह अपनी लालसाओं को पा लेने का शीघ्र और सरल उपाय लगता है। इस तर्क का आधार यह विचार है: “परमेश्वर प्रेम है; वह मुझे प्रसन्न देखना चाहता है; इसलिए जिस बात से मुझे प्रसन्नता मिलती है, वह उचित तथा परमेश्वर को स्वीकार भी होगी।” किंतु इस विचार के आधीन होकर कार्य करना अंततः प्रसन्नता और संतोष नहीं, दुःख ही लाता है।

   प्रभु यीशु ने उन लोगों से, जिन्होंने उस पर विश्वास करने का दावा किया, कहा कि वह सत्य ही है जो उन्हें वास्तव में स्वतंत्र करेगा (यूहन्ना 8:31-32)। परन्तु प्रभु ने सचेत भी किया: “मैं तुम से सच सच कहता हूं कि जो कोई पाप करता है, वह पाप का दास है” (पद 34)। सबसे उत्तम प्रसन्नता उस स्वतंत्रता से मिलती है जिसे हम इस सत्य ग्रहण कर लेने पर पाते हैं कि परिपूर्ण और संतोषजनक जीवन का आधार तथा मार्ग प्रभु यीशु मसीह ही है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


सच्चे सुख और प्रसन्नता के लिए कोई छोटा मार्ग नहीं है।

तुम मुझ में बने रहो, और मैं तुम में: जैसे डाली यदि दाखलता में बनी न रहे, तो अपने आप से नहीं फल सकती, वैसे ही तुम भी यदि मुझ में बने न रहो तो नहीं फल सकते। मैं दाखलता हूं: तुम डालियां हो; जो मुझ में बना रहता है, और मैं उस में, वह बहुत फल फलता है, क्योंकि मुझ से अलग हो कर तुम कुछ भी नहीं कर सकते। - यूहन्ना 15:4-5

बाइबल पाठ: यूहन्ना 8:31-38
John 8:31 तब यीशु ने उन यहूदियों से जिन्हों ने उन की प्रतीति की थी, कहा, यदि तुम मेरे वचन में बने रहोगे, तो सचमुच मेरे चेले ठहरोगे।
John 8:32 और सत्य को जानोगे, और सत्य तुम्हें स्‍वतंत्र करेगा।
John 8:33 उन्होंने उसको उत्तर दिया; कि हम तो इब्राहीम के वंश से हैं और कभी किसी के दास नहीं हुए; फिर तू क्योंकर कहता है, कि तुम स्‍वतंत्र हो जाओगे?
John 8:34 यीशु ने उन को उत्तर दिया; मैं तुम से सच सच कहता हूं कि जो कोई पाप करता है, वह पाप का दास है।
John 8:35 और दास सदा घर में नहीं रहता; पुत्र सदा रहता है।
John 8:36 सो यदि पुत्र तुम्हें स्‍वतंत्र करेगा, तो सचमुच तुम स्‍वतंत्र हो जाओगे।
John 8:37 मैं जानता हूं कि तुम इब्राहीम के वंश से हो; तौभी मेरा वचन तुम्हारे हृदय में जगह नहीं पाता, इसलिये तुम मुझे मार डालना चाहते हो।
John 8:38 मैं वही कहता हूं, जो अपने पिता के यहां देखा है; और तुम वही करते रहते हो जो तुमने अपने पिता से सुना है।


एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 20-22
  • मत्ती 6:19-34


रविवार, 7 जनवरी 2018

अनुग्रह


   मेरा घर एक बड़े पहाड़ की जड़ में स्थित घाटी में एक पानी के नाले कि किनारे पर है। जब शरद ऋतु के बाद बर्फ पिघलती है, या जब कभी भारी बारिश होती है, वह नाला नदी का रूप ले लेता है। उसके पानी में इतनी गहराई और वेग हो जाता है कि लोग उसमें डूब चुके हैं। एक दिन मैं उस नाले के उद्गम को देखने निकल पड़ा। नाले के किनारे से होते हुए पहाड़ के ऊपर चढ़ने पर मुझे पता चला कि उस नाले का पानी पहाड़ के ऊपर स्थित एक बर्फ से ढके मैदान से आ रहा था। उस मैदान से बर्फ पिघल कर छोटी-छोटी नालियों से नीचे की ओर बहना आरंभ करती है, और ये नालियां एक-दूसरे के साथ मिलकर फिर वह नाला बना देती हैं जो मेरे घर के पास से बहता है।

   इससे मुझे प्रार्थना के बारे में विचार आया कि अधिकांशतः हम प्रार्थना संबंधी प्रवाह को गलत ओर करते हैं। हम नीचे, अपनी चिंताओं से, ऊपर परमेश्वर की ओर जाना चाहते हैं। हम परमेश्वर को अपनी बातों, आवश्यकताओं और चिंताओं के बारे में ऐसे बताते हैं, जैसे कि परमेश्वर को उनके बारे में कुछ पता ही नहीं है। हम परमेश्वर से ऐसे विनती करते हैं, मानो किसी रीति से परमेश्वर के मन को बदल देंगे, ईश्वरीय अनिच्छा को परिवर्तित कर देंगे। क्या हमें ऊपर, जहाँ से परमेश्वर के अनुग्रह का प्रवाह आरंभ होता है, वहाँ से ही आरंभ नहीं करना चाहिए?

   जब हम अपना दृष्टिकोण बदलते हैं तो हमें एहसास होता है कि परमेश्वर पहले से ही हमारी चिंताओं और आवश्यकताओं से अवगत है, और उनके लिए कार्यरत है। हमारा स्वर्गीय पिता जानता है कि हमें किस बात की आवश्यकता है (मत्ती 6:8)।

   जल के समान, ईश्वरीय अनुग्रह भी ऊपर से नीचे की ओर प्रवाहित होता है। हमें परमेश्वर के साथ आरंभ कर के उससे पूछना चाहिए कि पृथ्वी पर उसके कार्य में हम क्या भूमिका निभा सकते हैं। प्रार्थना के इस नए आरंभ बिंदु के साथ हमारा परिप्रेक्ष्य बदल जाता है। हम अपने चारों ओर प्रकृति में एक महान कलाकार की कलाकृतियों को देखने लगते हैं। हम मनुष्यों को देखते हैं और परमेश्वर की छवि में बने अनन्त नियति वाले व्यक्तियों को पाते हैं। इस बदले हुए दृष्टिकोण के कारण परमेश्वर के प्रति कृतज्ञता, धन्यवाद और स्तुति स्वतः ही हमारे हृदयों से निकलने लगते हैं; हम चिंता करने वाले नहीं वरन आराधना करने वाले बन जाते हैं। - फिलिप यैन्सी


प्रार्थना परमेश्वर के प्रावधानों को हमारी आवश्यकताओं के साथ मिला देती है।

इसलिये तुम चिन्‍ता कर के यह न कहना, कि हम क्या खाएंगे, या क्या पीएंगे, या क्या पहिनेंगे? क्योंकि अन्यजाति इन सब वस्‍तुओं की खोज में रहते हैं, और तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता जानता है, कि तुम्हें ये सब वस्तुएं चाहिए। इसलिये पहिले तुम उसे राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्तुएं भी तुम्हें मिल जाएंगी। – मत्ती-6:31-33

बाइबल पाठ: मत्ती 6:5-13
Matthew 6:5 और जब तू प्रार्थना करे, तो कपटियों के समान न हो क्योंकि लोगों को दिखाने के लिये सभाओं में और सड़कों के मोड़ों पर खड़े हो कर प्रार्थना करना उन को अच्छा लगता है; मैं तुम से सच कहता हूं, कि वे अपना प्रतिफल पा चुके।
Matthew 6:6 परन्तु जब तू प्रार्थना करे, तो अपनी कोठरी में जा; और द्वार बन्‍द कर के अपने पिता से जो गुप्‍त में है प्रार्थना कर; और तब तेरा पिता जो गुप्‍त में देखता है, तुझे प्रतिफल देगा।
Matthew 6:7 प्रार्थना करते समय अन्यजातियों के समान बक बक न करो; क्योंकि वे समझते हैं कि उनके बहुत बोलने से उन की सुनी जाएगी।
Matthew 6:8 सो तुम उन के समान न बनो, क्योंकि तुम्हारा पिता तुम्हारे मांगने से पहिले ही जानता है, कि तुम्हारी क्या क्या आवश्यक्ता है।
Matthew 6:9 सो तुम इस रीति से प्रार्थना किया करो; “हे हमारे पिता, तू जो स्वर्ग में है; तेरा नाम पवित्र माना जाए।
Matthew 6:10 तेरा राज्य आए; तेरी इच्छा जैसी स्वर्ग में पूरी होती है, वैसे पृथ्वी पर भी हो।
Matthew 6:11 हमारी दिन भर की रोटी आज हमें दे।
Matthew 6:12 और जिस प्रकार हम ने अपने अपराधियों को क्षमा किया है, वैसे ही तू भी हमारे अपराधों को क्षमा कर।
Matthew 6:13 और हमें परीक्षा में न ला, परन्तु बुराई से बचा; क्योंकि राज्य और पराक्रम और महिमा सदा तेरे ही हैं।आमीन।


एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 18-19
  • मत्ती 6:1-18