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शनिवार, 9 जून 2018

महत्वपूर्ण



   दो जन अपने व्यवासायिक दौरे और उसके परिणामों की समीक्षा करने के लिए बैठे। एक ने कहा कि उसे लगता है कि दौरा सफल रहा क्योंकि उनके व्यावासायिक संपर्कों के द्वारा कुछ नए और सार्थक संबंध बनने आरंभ हुए थे। दूसरे ने कहा, “संबंध तो ठीक हैं, परन्तु सबसे महत्वपूर्ण बात होती है विक्रय करना।” स्पष्टतया, दोनों के बहुत भिन्न दृष्टिकोण थे।

   हम चाहे व्यवसाय में हों, या परिवार में, या चर्च में, दूसरों को इस दृष्टिकोण से देखना कि वे हमारे लिए कैसे उपयोगी हो सकते हैं, बहुत सरल होता है। हम लोगों की कीमत का आँकलन, हमारे लिए उनकी उपयोगिता के आधार पर करते हैं, न कि इस पर कि यीशु के नाम में हम उनकी क्या और कितनी सेवा कर सकते हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में फिलिप्पियों की मसीही मण्डली को लिखी अपनी पत्री में, प्रेरित पौलुस ने लिखा, “विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो। हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्‍ता करे” (फिलिप्पियों 2:3-4)।

   हमें लोगों को अपने लाभ के लिए प्रयोग नहीं करना है। क्योंकि हमारा परमेश्वर पिता सभी से प्रेम करता है, और हम अपने पिता परमेश्वर से प्रेम करते हैं, इसलिए यह हमारा कर्तव्य है कि हम दूसरों से भी प्रेम करें। परमेश्वर का प्रेम सबसे महान प्रेम है; और उस प्रेम को अपने जीवनों से प्रदर्शित करना हम मसीहियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण कार्य है। - बिल क्राउडर


औरों की आवश्यकताओं को अपनी आवश्यकताओं से आगे रखने से आनन्द मिलता है।

भाईचारे के प्रेम से एक दूसरे पर दया रखो; परस्पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो। - रोमियों 12:10

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 2:1-11
Philippians 2:1 सो यदि मसीह में कुछ शान्‍ति और प्रेम से ढाढ़स और आत्मा की सहभागिता, और कुछ करूणा और दया है।
Philippians 2:2 तो मेरा यह आनन्द पूरा करो कि एक मन रहो और एक ही प्रेम, एक ही चित्त, और एक ही मनसा रखो।
Philippians 2:3 विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो।
Philippians 2:4 हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्‍ता करे।
Philippians 2:5 जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो।
Philippians 2:6 जिसने परमेश्वर के स्‍वरूप में हो कर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्तु न समझा।
Philippians 2:7 वरन अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्‍वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया।
Philippians 2:8 और मनुष्य के रूप में प्रगट हो कर अपने आप को दीन किया, और यहां तक आज्ञाकारी रहा, कि मृत्यु, हां, क्रूस की मृत्यु भी सह ली।
Philippians 2:9 इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्ठ है।
Philippians 2:10 कि जो स्वर्ग में और पृथ्वी पर और जो पृथ्वी के नीचे है; वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें।
Philippians 2:11 और परमेश्वर पिता की महिमा के लिये हर एक जीभ अंगीकार कर ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 32-33
  • यूहन्ना 18:19-40



शुक्रवार, 8 जून 2018

बेहतर



   एक छोटे बच्चे के घर के बाहर साइरन बजने की आवाज़ आने लगी। क्योंकि वह उस आवाज़ से अपरिचित था, इसलिए उसने अपनी माँ से उसके बारे में पूछा। उसकी माँ ने उसे समझाया कि वह लोगों को आने वाले खतरनाक तूफ़ान से सचेत करने के लिए था; यदि लोग तूफ़ान से बचने के लिए सुरक्षित स्थानों में चले नहीं जाएँगे तो उनकी जान जोखिम में होगी और वे तूफ़ान से मर भी सकते हैं। तो बच्चे ने पूछा, “माँ तो यह बुरा क्यों है? यदि हमें मर जाएँगे तो क्या हम प्रभु यीशु से नहीं मिलेंगे?”

   छोटे बच्चे मरना क्या होता है अकसर समझ नहीं पाते हैं। परन्तु परमेश्वर के वचन बाइबल के एक प्रमुख पात्र, पौलुस प्रेरित ने भी, जीवन का लंबा अनुभव होने के बावजूद, अपने विषय कुछ ऐसा ही लिखा: “क्योंकि मैं दोनों के बीच अधर में लटका हूं; जी तो चाहता है कि कूच कर के मसीह के पास जा रहूं, क्योंकि यह बहुत ही अच्छा है” (फिलिप्पियों 1:23)। उसने जब यह लिखा उस समय वह घर में नज़रबंद था, परन्तु उसका यह कथन किसी निराशा के कारण नहीं था। वह तो आनन्दित था क्योंकि उसका परेशानी और पीड़ा सहना सुसमाचार के प्रसार का कारण हो रहा था (पद 12-14)।

   तो फिर पौलुस क्यों जीवन और मृत्यु की इच्छा के मध्य अधर में था? क्योंकि जीवित रहने का अर्थ था “फलवन्त परिश्रम”; परन्तु यदि वह मर जाता तो उसे पता था कि वह प्रभु यीशु के साथ एक विशेष निकटता के सुखदायक अनुभव में पहुंच जाएगा। हम मसीही विश्वासियों के लिए यह तय है कि शरीर से अनुपस्थित होते ही हम प्रभु यीशु के सम्मुख उपस्थित हो जाएँगे (2 कुरिन्थियों 5:6-8)।

   जो लोग प्रभु यीशु मसीह की मृत्यु और पुनरुत्थान के बचाने वाले सामर्थ्य में विश्वास रखते हैं, वे सदा प्रभु के साथ ही रहेंगे। ऐसा कहा गया है कि “जो कुछ स्वर्ग में अन्त होता है,वह सब भला है।” इसलिए हम मसीही विश्वासी, चाहे जीएँ या मरें, हमारे लिए तो बेहतर ही है, जैसा पौलुस ने कहा है: “क्योंकि मेरे लिये जीवित रहना मसीह है, और मर जाना लाभ है” (फिलिप्पियों 1:21)।


प्रभु यीशु की मृत्यु और पुनारुथान में लाया गया विश्वास, 
उसके साथ अनन्त जीवन के आश्वासन को लाता है।

इसलिये हम ढाढ़स बान्‍धे रहते हैं, और देह से अलग हो कर प्रभु के साथ रहना और भी उत्तम समझते हैं। - 2 कुरिन्थियों 5:8

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 1:12-26
Philippians 1:12 हे भाइयों, मैं चाहता हूं, कि तुम यह जान लो, कि मुझ पर जो बीता है, उस से सुसमाचार ही की बढ़ती हुई है।
Philippians 1:13 यहां तक कि कैसरी राज्य की सारी पलटन और शेष सब लोगों में यह प्रगट हो गया है कि मैं मसीह के लिये कैद हूं।
Philippians 1:14 और प्रभु में जो भाई हैं, उन में से बहुधा मेरे कैद होने के कारण, हियाव बान्‍ध कर, परमेश्वर का वचन निधड़क सुनाने का और भी हियाव करते हैं।
Philippians 1:15 कितने तो डाह और झगड़े के कारण मसीह का प्रचार करते हैं और कितने भली मनसा से।
Philippians 1:16 कई एक तो यह जान कर कि मैं सुसमाचार के लिये उत्तर देने को ठहराया गया हूं प्रेम से प्रचार करते हैं।
Philippians 1:17 और कई एक तो सीधाई से नहीं पर विरोध से मसीह की कथा सुनाते हैं, यह समझ कर कि मेरी कैद में मेरे लिये क्‍लेश उत्पन्न करें।
Philippians 1:18 सो क्या हुआ? केवल यह, कि हर प्रकार से चाहे बहाने से, चाहे सच्चाई से, मसीह की कथा सुनाई जाती है, और मैं इस से आनन्‍दित हूं, और आनन्‍दित रहूंगा भी।
Philippians 1:19 क्योंकि मैं जानता हूं, कि तुम्हारी बिनती के द्वारा, और यीशु मसीह की आत्मा के दान के द्वारा इस का प्रतिफल मेरा उद्धार होगा।
Philippians 1:20 मैं तो यही हादिर्क लालसा और आशा रखता हूं, कि मैं किसी बात में लज्ज़ित न होऊं, पर जैसे मेरे प्रबल साहस के कारण मसीह की बड़ाई मेरी देह के द्वारा सदा होती रही है, वैसा ही अब भी हो चाहे मैं जीवित रहूं या मर जाऊं।
Philippians 1:21 क्योंकि मेरे लिये जीवित रहना मसीह है, और मर जाना लाभ है।
Philippians 1:22 पर यदि शरीर में जीवित रहना ही मेरे काम के लिये लाभदायक है तो मैं नहीं जानता, कि किस को चुनूं।
Philippians 1:23 क्योंकि मैं दोनों के बीच अधर में लटका हूं; जी तो चाहता है कि कूच कर के मसीह के पास जा रहूं, क्योंकि यह बहुत ही अच्छा है।
Philippians 1:24 परन्तु शरीर में रहना तुम्हारे कारण और भी आवश्यक है।
Philippians 1:25 और इसलिये कि मुझे इस का भरोसा है सो मैं जानता हूं कि मैं जीवित रहूंगा, वरन तुम सब के साथ रहूंगा जिस से तुम विश्वास में दृढ़ होते जाओ और उस में आनन्‍दित रहो।
Philippians 1:26 और जो घमण्‍ड तुम मेरे विषय में करते हो, वह मेरे फिर तुम्हारे पास आने से मसीह यीशु में अधिक बढ़ जाए।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 30-31
  • यूहन्ना 18:1-18



गुरुवार, 7 जून 2018

नया और पूर्ण



   दूसरे विश्व-युद्ध के दिनों में मेरे पिताजी ने अमेरिका की सेना में रहते हुए दक्षिणी प्रशांत सागरीय क्षेत्र में कार्य किया। उन दिनों में पिताजी धर्म के प्रत्येक विचार को यह कहकर कि, “मुझे किसी बैसाखी की आवश्यकता नहीं है” एक ओर कर देते थे। परन्तु वह दिन आना तय था जब धर्म के प्रति उनका यह रवैया सदा के लिए बदल जाना था। हमारी माताजी की, अपने तीसरी सन्तान को जन्म देने के लिए, प्रसव-पीड़ा आरंभ हो गई थी, और मैं तथा मेरा भाई इस उत्सुकता के साथ कि शीघ्र ही हम अपने नए भाई अथवा बहन को देखेंगे, रात को सोने के लिए अपने बिस्तरों में गए। अगले दिन प्रातः उठकर हमने उत्साहपूर्वक अपने पिताजी से पूछा कि भाई आया या बहन, तो उन्होंने कहा, “वह बेटी थी, किन्तु मृत पैदा हुई थी।” हम सब अपने परिवार की इस क्षति के लिए मिलकर रोने लग गए।

   वह पहला अवसर थी जब पिताजी अपने टूटे हृदय को लेकर प्रार्थना में प्रभु यीशु के पास गए। उस पल उन्हें परमेश्वर की ओर से एक अद्भुत शान्ति और सांत्वना का आभास हुआ, चाहे उनकी बेटी की उस क्षति की सारे जीवन भर भरपाई नहीं होने पाएगी। शीघ्र ही वे परमेश्वर के वचन बाइबल के अध्ययन में रुचि लेने लग गए, और निरंतर प्रभु के पास, जो उनके टूटे हृदय को चंगा कर रहा था, प्रार्थना में जाते रहते थे। समय के साथ प्रभु यीशु में उनका विश्वास और दृढ़ होता चला गया; वे प्रभु यीशु के दृढ़ अनुयायी हो गए और अपने चर्च में एक अगुवे तथा बाइबल-शिक्षक भी बन गए।

   प्रभु यीशु पर विश्वास करना, अपना जीवन उन्हें समर्पित करना, कमज़ोर व्यक्तियों के लिए बैसाखी का सहारा लेना नहीं है। प्रभु तो नए जीवन का स्त्रोत है! हम जब टूटे हुए होते हैं, और सच्चे मन तथा समर्पण के साथ उसके पास आते है तो वह हमें नया और पूर्ण बना सकता है (भजन 119:75)। - डेनिस फिशर


टूटा हुआ हृदय, प्रभु परमेश्वर से परिपूर्णता ला सकता है।

मैं जिन जिन से प्रीति रखता हूं, उन सब को उलाहना और ताड़ना देता हूं, इसलिये सरगर्म हो, और मन फिरा। - प्रकाशितवाक्य 3:19

बाइबल पाठ: भजन 119:71-75
Psalms 119:71 मुझे जो दु:ख हुआ वह मेरे लिये भला ही हुआ है, जिस से मैं तेरी विधियों को सीख सकूं।
Psalms 119:72 तेरी दी हुई व्यवस्था मेरे लिये हजारों रूपयों और मुहरों से भी उत्तम है।
Psalms 119:73 तेरे हाथों से मैं बनाया और रचा गया हूं; मुझे समझ दे कि मैं तेरी आज्ञाओं को सीखूं।
Psalms 119:74 तेरे डरवैये मुझे देख कर आनन्दित होंगे, क्योंकि मैं ने तेरे वचन पर आशा लगाई है।
Psalms 119:75 हे यहोवा, मैं जान गया कि तेरे नियम धर्ममय हैं, और तू ने अपने सच्चाई के अनुसार मुझे दु:ख दिया है।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 25-27
  • यूहन्ना 16



बुधवार, 6 जून 2018

महिमा



   रोमी साम्राज्य की महिमा ने प्रभु यीशु के जन्म के लिए एक व्यापक पृष्ठभूमि उपलब्ध करवाई। रोम के पहले सम्राट कैसर अगुस्तुस ने सन 27 ईसा पूर्व में 200 वर्ष पुराने गृह-युद्ध को समाप्त किया और क्षतिग्रस्त इलाकों में स्मारक, मंदिर, रंगशालाएं और सरकारी कार्य के लिए भवन बनवाना आरंभ किया। रोमी इतिहासकार प्लिनी द एल्डर के अनुसार “सँसार भर में किसी ने भी कहीं भी इतनी सुन्दर इमारतें नहीं देखी होंगी।”

   परन्तु अपनी सुंदरता के बावजूद, उस ‘चिरस्थाई’ नगर और साम्राज्य के इतिहास में क्रूरता भरी हुई थी जो रोम के पतन तक जारी रही। हज़ारों दासों, परदेशियों, क्रांतिकारियों, और सेना के भगोड़े सिपाहियों को सड़क के किनारे खम्बे गाड़ कर क्रूस पर चढ़ा दिया गया, जिससे सबके लिए चेतावनी रहे कि कोई रोमी साम्राज्य की सामर्थ्य को चुनौती नहीं दे सकता है।

   यह कैसी विडंबना है कि प्रभु यीशु का क्रूस पर चढ़ाया जाना एक ऐसी महिमा के प्रकट होने का कारण बन गया जिसके सामने रोम की महिमा और गौरव एक ढलती शाम की क्षणिक सुन्दरता से अधिक नहीं थी। किसने यह सोचा होगा कि क्रूस के सार्वजनिक श्राप और पीड़ा में हम परमेश्वर के प्रेम, उसकी उपस्थिति, और उसके अनन्त स्वर्गीय साम्राज्य की महिमा को देखने पाएँगे।

   किसने यह पूर्वानुमान लगाया होगा कि सारा स्वर्ग और पृथ्वी एक दिन साथ मिलकर गाएँगे, “वे ऊंचे शब्द से कहते थे, कि वध किया हुआ मेम्ना ही सामर्थ, और धन, और ज्ञान, और शक्ति, और आदर, और महिमा, और धन्यवाद के योग्य है” (प्रकाशितवाक्य 5:12)। - मार्ट डीहॉन


जो मेमना मारा गया था, वही आज जीवता प्रभु है।

...उसने यीशु को अपनी ओर आते देखकर कहा, देखो, यह परमेश्वर का मेम्ना है, जो जगत के पाप उठा ले जाता है। - यूहन्ना 1:29

बाइबल पाठ: यूहन्ना 17:1-5
John 17:1 यीशु ने ये बातें कहीं और अपनी आंखे आकाश की ओर उठा कर कहा, हे पिता, वह घड़ी आ पहुंची, अपने पुत्र की महिमा कर, कि पुत्र भी तेरी महिमा करे।
John 17:2 क्योंकि तू ने उसको सब प्राणियों पर अधिकार दिया, कि जिन्हें तू ने उसको दिया है, उन सब को वह अनन्त जीवन दे।
John 17:3 और अनन्त जीवन यह है, कि वे तुझ अद्वैत सच्चे परमेश्वर को और यीशु मसीह को, जिसे तू ने भेजा है, जाने।
John 17:4 जो काम तू ने मुझे करने को दिया था, उसे पूरा कर के मैं ने पृथ्वी पर तेरी महिमा की है।
John 17:5 और अब, हे पिता, तू अपने साथ मेरी महिमा उस महिमा से कर जो जगत के होने से पहिले, मेरी तेरे साथ थी।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 23-24
  • यूहन्ना 15



सोमवार, 4 जून 2018

उद्देश्य



   पश्चिमी टेक्सस में, एक गर्म दिन में, मेरी भांजी ने एक महिला को सड़क के किनारे खड़े हुए देखा, उसके हाथ में एक पटिया थी जिसपर कुछ लिखा हुआ था। मेरी भांजी ने गाड़ी निकट लाकर, चलती हुई गाड़ी में से देखना चाहा कि उस पटिया पर क्या लिखा हुआ था, यह समझते हुए कि वहाँ भोजन अथवा आर्थिक सहायता देने के लिए कुछ लिखा होगा। परन्तु उस पटिया पर लिखे शब्दों को पढ़कर मेरी भांजी चकित रह गई; उस पर लिखा था, “आपका एक उद्देश्य है।”

   परमेश्वर ने हम सब को एक उद्देश्य के साथ सृजा है। प्रमुखतः वह उद्देश्य है उसे महिमा देना, और ऐसा करने का एक तरीका है औरों की सहायता करना (1 पतरस 4:10-11)।

   छोटे बच्चों की माँ का उद्देश्य उनकी बहती हुई नाक साफ़ करना और उन्हें प्रभु यीशु के बारे में बताना हो सकता है। किसी उबाऊ कार्य में लगे हुए कर्मी के लिए यह उद्देश्य उस कार्य को भी पूरी निष्ठा के साथ यह मानते हुए करना कि वह मनुष्य के लिए नहीं वरन प्रभु के लिए (कुलुस्सियों 3:23-24) कार्य कर रहा है हो सकता है। किसी वृद्ध महिला के लिए, जिसकी अब दृष्टि बहुत क्षीण हो चुकी है, यह उद्देश्य अपने बच्चों तथा नाती-पोतों के लिए प्रार्थना करना और उन पर प्रभु के बारे में प्रभाव डालना हो सकता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 139 में लिखा है “तेरी आंखों ने मेरे बेडौल तत्व को देखा; और मेरे सब अंग जो दिन दिन बनते जाते थे वे रचे जाने से पहिले तेरी पुस्तक में लिखे हुए थे” (पद 16), तथा यह कि “मैं तेरा धन्यवाद करूंगा, इसलिये कि मैं भयानक और अद्भुत रीति से रचा गया हूं। तेरे काम तो आश्चर्य के हैं, और मैं इसे भली भांति जानता हूं” (पद 14) जिससे अपने सृष्टिकर्ता को महिमा दे सकूँ।
   स्मरण रखें: आपका एक उद्देश्य है। - सिंडी हैस कैस्पर


चाहे सब कुछ निरर्थक भी लगे, 
परन्तु परमेश्वर के पास आपके जीवन के लिए उद्देश्य है।

क्योंकि हम उसके बनाए हुए हैं; और मसीह यीशु में उन भले कामों के लिये सृजे गए जिन्हें परमेश्वर ने पहिले से हमारे करने के लिये तैयार किया। - इफिसियों 2:10

बाइबल पाठ: 1 पतरस 4:7-11
1 Peter 4:7 सब बातों का अन्‍त तुरन्त होने वाला है; इसलिये संयमी हो कर प्रार्थना के लिये सचेत रहो।
1 Peter 4:8 और सब में श्रेष्ठ बात यह है कि एक दूसरे से अधिक प्रेम रखो; क्योंकि प्रेम अनेक पापों को ढांप देता है।
1 Peter 4:9 बिना कुड़कुड़ाए एक दूसरे की पहुनाई करो।
1 Peter 4:10 जिस को जो वरदान मिला है, वह उसे परमेश्वर के नाना प्रकार के अनुग्रह के भले भण्‍डारियों के समान एक दूसरे की सेवा में लगाए।
1 Peter 4:11 यदि कोई बोले, तो ऐसा बोले, मानों परमेश्वर का वचन है; यदि कोई सेवा करे; तो उस शक्ति से करे जो परमेश्वर देता है; जिस से सब बातों में यीशु मसीह के द्वारा, परमेश्वर की महिमा प्रगट हो: महिमा और साम्राज्य युगानुयुग उसी की है। आमीन।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 21-22
  • यूहन्ना 14



रविवार, 3 जून 2018

प्रतिज्ञा



   वह एक अच्छा दिन था, धूप खिली हुई थी, और मैं पार्क में टहल रहा था, परन्तु मैं अपनी आत्मा में थका हुआ और निढाल था। कोई एक बात नहीं थी जो मुझे दबाए हुई थी – लगता था कि सब कुछ ही मुझे दबा रहा है। मैं वहाँ लगी एक बेंच पर बैठने के लिए रुका; और मेरा ध्यान उस बेंच पर लगी एक पटिया पर गया, जिस पर लिखा था “एक वफादार पति, पिता, भाई, और मित्र” की प्रेम भरी यादगार में। साथ ही उस पटिया पर परमेश्वर के वचन बाइबल में से एक पद भी लिखा हुआ था, “परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों के समान उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे” (यशायाह 40:31)।

   ये जाने-पहचाने शब्द मेरे लिए मानों प्रभु की ओर से व्यक्तिगत रीति से स्पर्ष के रूप में आए। थकान – चाहे शारीरिक हो, या भावनात्मक, या आत्मिक – हम सब पर आती है। यशायाह हमें स्मरण दिलाता है कि चाहे हम थकित हो जाएँ, प्रभु हमारा अनन्त परमेश्वर, समस्त पृथ्वी का रचियता, कभी नहीं थकता है (पद 28), और मैं यह कितनी सरलता से भूल गया कि “वह थके हुए को बल देता है और शक्तिहीन को बहुत सामर्थ देता है” (पद 29)।

   आज आपकी दिनचर्या के लिए कैसा है? यदि परमेश्वर की आपके साथ बनी हुई उपस्थिति और आपको उससे मिलने वाली सामर्थ्य के बारे में, थकान ने भुला दिया है, तो क्यों न थोड़ा थम कर उसकी प्रतिज्ञा को स्मरण करें कि “परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों के समान उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे” (पद 31)। प्रभु की इस प्रतिज्ञा पर अभी, इसी समय मनन करें, उससे आश्वस्त हों। - डेविड मैक्कैस्लैंड


जब जीवन के संघर्ष आपको थका दें, तब प्रभु परमेश्वर से सामर्थ्य प्राप्त करें।

मत डर, क्योंकि मैं तेरे संग हूं, इधर उधर मत ताक, क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर हूं; मैं तुझे दृढ़ करूंगा और तेरी सहायता करूंगा, अपने धर्ममय दाहिने हाथ से मैं तुझे सम्हाले रहूंगा। - यशायाह 41:10

बाइबल पाठ: यशायाह 40:27-31
Isaiah 40:27 हे याकूब, तू क्यों कहता है, हे इस्राएल तू क्यों बोलता है, मेरा मार्ग यहोवा से छिपा हुआ है, मेरा परमेश्वर मेरे न्याय की कुछ चिन्ता नहीं करता?
Isaiah 40:28 क्या तुम नहीं जानते? क्या तुम ने नहीं सुना? यहोवा जो सनातन परमेश्वर और पृथ्वी भर का सिरजनहार है, वह न थकता, न श्रमित होता है, उसकी बुद्धि अगम है।
Isaiah 40:29 वह थके हुए को बल देता है और शक्तिहीन को बहुत सामर्थ देता है।
Isaiah 40:30 तरूण तो थकते और श्रमित हो जाते हैं, और जवान ठोकर खाकर गिरते हैं;
Isaiah 40:31 परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों के समान उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 19-20
  • यूहन्ना 13:21-38



शनिवार, 2 जून 2018

भरोसा


   जबसे उसने मुझे यह बताया थी कि वह माँ बनने वाली है, मैं अपनी सहेली के लिए बहुत प्रसन्न थी! हम दोनों ने साथ-साथ मिलकर बच्चे के जन्म होने तक दिनों की गिनती की थी। परन्तु जब प्रसव के समय बच्चे को दिमागी क्षति हुई तो मेरा हृदय टूट गया, और मुझे समझ नहीं आ रहा था कि कैसे प्रार्थना करूँ। मैं बस इतना जानती थी कि मुझे किस से प्रार्थना करनी है – अपने पिता परमेश्वर से, क्योंकि जब हम उसे पुकारते हैं तब वह हमारी सुनता है।

   मैं जानती थी कि परमेश्वर आश्चर्यकर्म कर सकता है। उसने याईर की बेटी को मुर्दों में से जिलाया था (लूका 8:49-55) और ऐसा करते समय उसने उस लड़की के शरीर से उस रोग को भी चँगा किया था जिस के कारण उसकी मृत्यु हुई थी। इसलिए मैं ने प्रार्थना की कि वह मेरी सहेली के बच्चे को भी चंगाई प्रदान करे।

   परन्तु यदि परमेश्वर चंगाई न दे तो? मैं सोच में थी। चंगाई देने के लिए वह सक्षम तो है। क्या वह परवाह भी करता है? मुझे क्रूस पर प्रभु यीशु द्वारा उठाए गए दुःख और पीड़ा का स्मरण आया, और उसका स्पष्टीकरण कि “परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा” (रोमियों 5:8)। फिर मुझे अय्यूब के प्रश्न स्मरण आए और कैसे उसने अपने आस-पास की सृष्टि में परमेश्वर की बुद्धिमता को देखना सीखा था (अय्यूब 38-39)।

   धीरे-धीरे मुझे एहसास हुआ कि परमेश्वर कैसे हमारे जीवनों की बारीकियों में हमें अपने निकट बुलाता है। परमेश्वर के अनुग्रह में, मैंने और मेरी सहेली ने साथ-साथ यह सीखा कि प्रभु को पुकारना और उस पर भरोसा रखना क्या होता है – चाहे परिणाम जो कुछ भी हो। - पो फैंग चिया


जब जीवन आपको नीचे धकेल दे, 
तब आप प्रार्थना करने की सर्वोत्तम स्थिति में होते हैं।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: इब्रानियों 4:14-16
Hebrews 4:14 सो जब हमारा ऐसा बड़ा महायाजक है, जो स्‍वर्गों से हो कर गया है, अर्थात परमेश्वर का पुत्र यीशु; तो आओ, हम अपने अंगीकार को दृढ़ता से थामें रहे।
Hebrews 4:15 क्योंकि हमारा ऐसा महायाजक नहीं, जो हमारी निर्बलताओं में हमारे साथ दुखी न हो सके; वरन वह सब बातों में हमारे समान परखा तो गया, तौभी निष्‍पाप निकला।
Hebrews 4:16 इसलिये आओ, हम अनुग्रह के सिंहासन के निकट हियाव बान्‍धकर चलें, कि हम पर दया हो, और वह अनुग्रह पाएं, जो आवश्यकता के समय हमारी सहायता करे।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 17-18
  • यूहन्ना 13:1-20