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रविवार, 17 जून 2018

अब्बा, पिता



      पिताओं के दिवस को मनाने के उपलक्ष्य में दिए जाने वाले एक कार्ड पर कार्टून बना हुआ था – एक पिता अपने एक हाथ से अपने आगे घास काटने की मशीन को धक्का दे रहा था, तथा साथ ही दूसरे हाथ से अपने पीछे बच्चों को घुमाने वाली एक गाड़ी को भी खींच रहा था, जिसमें उसकी तीन वर्षीय पुत्री बैठी हुई थी, और अपने पिता के साथ घर के लॉन की सैर से आनन्दित हो रही थी। ऐसा करना बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प तो नहीं है, परन्तु कौन कहता है कि पिता एक साथ कई कार्यों को नहीं कर सकते हैं।

      बचपन में यदि आपके पिता अच्छे थे, तो ऊपर दिए गए वर्णन से अनेकों अच्छी यादें उभर सकती हैं। परन्तु अनेकों लोगों के लिए “पिता” का ध्यान एक अपूर्ण विचार है। यदि हमारे बचपन में ही हमारे पिता हमें छोड़ कर चले जाएँ, अथवा उनकी मृत्यु हो जाए, या हम उनके व्यवहार से दुखित रहें, तो फिर प्रेरणा के लिए हम किस की ओर मुड़ेंगे?

      परमेश्वर के वचन बाइबल के एक प्रमुख पात्र, दाऊद, के जीवन में, पिता के रूप में कुछ कमियां अवश्य थीं, परन्तु दाऊद निश्चय ही परमेश्वर के पिता होने स्वभाव को भली-भांति समझता था। दाऊद ने परमेश्वर के विषय में लिखा, “परमेश्वर अपने पवित्र धाम में, अनाथों का पिता और विधवाओं का न्यायी है। परमेश्वर अनाथों का घर बसाता है; और बन्धुओं को छुड़ाकर भाग्यवान करता है; परन्तु हठीलों को सूखी भूमि पर रहना पड़ता है” (भजन 68:5-6)। प्रेरित पौलुस ने इसी विचार को और विस्तृत किया, और छोटे बच्चों द्वारा पिता के लिए प्रयुक्त किए जाने वाले शब्द “अब्बा” का प्रयोग करते हुए लिखा “क्योंकि तुम को दासत्व की आत्मा नहीं मिली, कि फिर भयभीत हो परन्तु लेपालकपन की आत्मा मिली है, जिस से हम हे अब्बा, हे पिता कह कर पुकारते हैं” (रोमियों 8:15)। यह वही शब्द है जिसे प्रभु यीशु मसीह ने भी प्रयोग किया था, जब वह क्रूस पर चढ़ाए जाने के लिए अपने एक शिष्य द्वारा धोखे से पकड़वाए जाने से पहले, अत्यंत दुखी होकर परमेश्वर से प्रार्थना कर रहा था (मरकुस 14:36)।

      हम मसीही विश्वासियों के लिए यह कैसा अद्धभुत विशेषाधिकार है कि हम इसी अंतरंग शब्द के प्रयोग के साथ प्रार्थना में परमेश्वर के सम्मुख आ सकते हैं। हमारा अब्बा अपने परिवार में प्रत्येक उस व्यक्ति का स्वागत करता है, जो पापों से पश्चाताप और प्रभु यीशु में विश्वास तथा समर्पण के साथ उसकी ओर मुड़ता है। - टिम गुस्ताफसन


एक अच्छा पिता, स्वर्गीय पिता का प्रेम दर्शाता है।

सो तुम इस रीति से प्रार्थना किया करो; “हे हमारे पिता, तू जो स्वर्ग में है; तेरा नाम पवित्र माना जाए।” - मत्ती 6:9

बाइबल पाठ: रोमियों 8:12-17
Romans 8:12 सो हे भाइयो, हम शरीर के कर्जदार नहीं, ताकि शरीर के अनुसार दिन काटें।
Romans 8:13 क्योंकि यदि तुम शरीर के अनुसार दिन काटोगे, तो मरोगे, यदि आत्मा से देह की क्रीयाओं को मारोगे, तो जीवित रहोगे।
Romans 8:14 इसलिये कि जितने लोग परमेश्वर के आत्मा के चलाए चलते हैं, वे ही परमेश्वर के पुत्र हैं।
Romans 8:15 क्योंकि तुम को दासत्व की आत्मा नहीं मिली, कि फिर भयभीत हो परन्तु लेपालकपन की आत्मा मिली है, जिस से हम हे अब्बा, हे पिता कह कर पुकारते हैं।
Romans 8:16 आत्मा आप ही हमारी आत्मा के साथ गवाही देता है, कि हम परमेश्वर की सन्तान हैं।
Romans 8:17 और यदि सन्तान हैं, तो वारिस भी, वरन परमेश्वर के वारिस और मसीह के संगी वारिस हैं, जब कि हम उसके साथ दुख उठाएं कि उसके साथ महिमा भी पाएं।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • नहेम्याह 7-9
  • प्रेरितों 3



शनिवार, 16 जून 2018

निर्देश और विधि



   हमारे घर में, “विधि” मेरे लिए बड़ी खिसियाहट का, और मेरे परिवार जनों के लिए बड़े परिहास का विषय रही है। हमारी शादी के आरंभिक समय में मैं घर के मरम्मत के छोटे-मोटे कार्य करने के प्रयास करता था – परन्तु परिणाम उलटे ही होते थे, मरम्मत की गई वस्तुएँ ठीक कार्य नहीं करती थीं, वरन और कुछ को ख़राब ही कर देती थीं। हमारे बच्चे होने के बाद भी मेरी ये विफलताएं जारी रहीं; बच्चों के टूटे हुए “साधारण” से खिलौने जोड़ने में भी कुछ ठीक नहीं होता था। मेरी मुख्य समस्या थी कि मैं उन कार्यों और मरम्मत के लिए मिलने वाले निर्देशों का पालन नहीं करता था, अपनी ही सोच और विधि द्वारा सब कुछ करने का प्रयास करता था।

   धीरे-धीरे मैं ने सीख लिया कि मुझे निर्देशों का सटीक पालन करना पड़ेगा, और दी गई विधि के अनुसार ही कार्य को करना पड़ेगा। मैंने पाया कि ऐसा करने से मेरे कार्य सही और सफल होते थे। परन्तु जितना अधिक यह ठीक चलता था, उतना अधिक मुझे अपने पर भरोसा होने लगता था, और मैं फिर से अपनी ही विधि अपनाने लग जाता था, जिसके परिणाम फिर से बुरे निकलने लगते थे।

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि प्राचीन इस्राएली भी इसी प्रवृत्ति के साथ संघर्ष करते थे। वे परमेश्वर द्वारा दिए गए निर्देशों को भुलाकर अपने इलाके के अन्यजाति लोगों के समान बाल तथा अन्य देवी-देवताओं की उपासना में पड़ा जाते थे (न्यायियों 2:12)। उनके इस अपनी ही उपासना-विधि को अपनाने के घातक परिणाम होते थे, और वे परेशानियों में पड़े रहते थे जब तक कि परमेश्वर उन्हें उस परेशानी से छुड़ा नहीं लेता था। ऐसा करने के लिए परमेश्वर उनमें से न्यायी खड़े करता था, जो परमेश्वर के निर्देशों और विधि के अनुसार कार्य करके इस्राएलियों को वापस परमेश्वर की ओर लेकर आते थे (2:18)। परन्तु कुछ ही समय के बाद वे फिर से परमेश्वर के निर्देशों को भुलाकर, अपनी ही विधि अपना कर जीवन व्यतीत करने लगते थे।

   परमेश्वर ने उसके प्रति हमारे प्रेम को बनाए रखने के लिए अनेकों निर्देश दिए हैं, और उनके पीछे उसके अपने कारण हैं। उसके ये निर्देश उसके जीवते वचन बाइबल में मिलते हैं, जिससे हमें जीवन और भक्ति से संबंधित सभी बातों की सही शिक्षाएँ मिलती हैं। परमेश्वर की जीवित उपस्थिति के एहसास में प्रतिदिन बने रहने के द्वारा ही हम अपने जीवनों को अपनी ही विधि के अनुसार चलाने के प्रलोभन से बचे रह सकते हैं। - रैंडी किल्गोर


हमारा सबसे बड़ा विशेषाधिकार है परमेश्वर की उपस्थिति का आनन्द लेना।

क्योंकि उसके ईश्वरीय सामर्थ ने सब कुछ जो जीवन और भक्ति से सम्बन्‍ध रखता है, हमें उसी की पहचान के द्वारा दिया है, जिसने हमें अपनी ही महिमा और सद्गुण के अनुसार बुलाया है। - 2 पतरस 1:3

बाइबल पाठ: न्यायियों 2:7-19
Judges 2:7 और यहोशू के जीवन भर, और उन वृद्ध लोगों के जीवन भर जो यहोशू के मरने के बाद जीवित रहे और देख चुके थे कि यहोवा ने इस्राएल के लिये कैसे कैसे बड़े काम किए हैं, इस्राएली लोग यहोवा की सेवा करते रहे।
Judges 2:8 निदान यहोवा का दास नून का पुत्र यहोशू एक सौ दस वर्ष का हो कर मर गया।
Judges 2:9 और उसको तिम्नथेरेस में जो एप्रैम के पहाड़ी देश में गाश नाम पहाड़ की उत्तर अलंग पर है, उसी के भाग में मिट्टी दी गई।
Judges 2:10 और उस पीढ़ी के सब लोग भी अपने अपने पितरों में मिल गए; तब उसके बाद जो दूसरी पीढ़ी हुई उसके लोग न तो यहोवा को जानते थे और न उस काम को जो उसने इस्राएल के लिये किया था।
Judges 2:11 इसलिये इस्राएली वह करने लगे जो यहोवा की दृष्टि में बुरा है, और बाल नाम देवताओं की उपासना करने लगे;
Judges 2:12 वे अपने पूर्वजों के परमेश्वर यहोवा को, जो उन्हें मिस्र देश से निकाल लाया था, त्यागकर पराये देवताओं की उपासना करने लगे, और उन्हें दण्डवत किया; और यहोवा को रिस दिलाई।
Judges 2:13 वे यहोवा को त्याग कर के बाल देवताओं और अशतोरेत देवियों की उपासना करने लगे।
Judges 2:14 इसलिये यहोवा का कोप इस्राएलियों पर भड़क उठा, और उसने उन को लुटेरों के हाथ में कर दिया जो उन्हें लूटने लगे; और उसने उन को चारों ओर के शत्रुओं के आधीन कर दिया; और वे फिर अपने शत्रुओं के साम्हने ठहर न सके।
Judges 2:15 जहां कहीं वे बाहर जाते वहां यहोवा का हाथ उनकी बुराई में लगा रहता था, जैसे यहोवा ने उन से कहा था, वरन यहोवा ने शपथ खाई थी; इस प्रकार से बड़े संकट में पड़ गए।
Judges 2:16 तौभी यहोवा उनके लिये न्यायी ठहराता था जो उन्हें लूटने वाले के हाथ से छुड़ाते थे।
Judges 2:17 परन्तु वे अपने न्यायियों की भी नहीं मानते थे; वरन व्यभिचारिन के समान पराये देवताओं के पीछे चलते और उन्हें दण्डवत करते थे; उनके पूर्वज जो यहोवा की आज्ञाएं मानते थे, उनकी उस लीक को उन्होंने शीघ्र ही छोड़ दिया, और उनके अनुसार न किया।
Judges 2:18 और जब जब यहोवा उनके लिये न्यायी को ठहराता तब तब वह उस न्यायी के संग रहकर उसके जीवन भर उन्हें शत्रुओं के हाथ से छुड़ाता था; क्योंकि यहोवा उनका कराहना जो अन्धेर और उपद्रव करने वालों के कारण होता था सुनकर दु:खी था।
Judges 2:19 परन्तु जब न्यायी मर जाता, तब वे फिर पराये देवताओं के पीछे चलकर उनकी उपासना करते, और उन्हें दण्डवत कर के अपने पुरखाओं से अधिक बिगड़ जाते थे; और अपने बुरे कामों और हठीली चाल को नहीं छोड़ते थे।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • नहेम्याह 4-6
  • प्रेरितों 2:22-47



शुक्रवार, 15 जून 2018

भाषा



   अपने उत्तरी लंडन के इलाके में टहलते हुए मैं अनेकों भाषाओं में होते हुए वार्तालापों के स्वर सुन सकती हूँ। वहाँ रहने वाले भिन्न-भिन्न देशों के लोग अपनी-अपनी भाषाओं में वार्तालाप करते हैं, और चाहे मैं उनकी भाषा और वार्तालाप को समझ नहीं सकती हूँ, फिर भी इस विविधता में मुझे स्वर्ग की एक झलक दिखाई देती है। मैं कभी-कभी मनन करती हूँ कि पिन्तेकुस्त के दिन कैसा अद्भुत रहा होगा जब अनेकों देशों से आए हुए लोगों ने प्रभु यीशु के अनुयायियों द्वारा किए गए प्रचार को सुन और समझ लिया।

   परमेश्वर का वचन बाइबल बताती है कि उस दिन यहूदी तीर्थयात्री यरूशलेम में कटनी का पर्व मनाने के लिए एकत्रित हुए थे। उसी दिन पवित्र-आत्मा प्रभु यीशु के अनुयायियों पर उतरा और जब उन्होंने प्रचार करना आरंभ किया तो सुनने वाले उनकी बात को अपनी ही भाषा में समझ सके (प्रेरितों 2:5-6)। कैसा अद्भुत आश्चर्यकर्म कि अनेकों देशों से आए ये परदेशी परमेश्वर की प्रशंसा को अपनी ही भाषा में समझ सके, और उनमें से बहुतेरे प्रभु यीशु मसीह के बारे में जानने के लिए प्रोत्साहित हो सके।

   हो सकता है कि हम अनेकों भाषाएं बोलते या समझते नहीं हों, परन्तु हम मसीही विश्वासी यह जानते हैं कि हमारे अन्दर निवास करने वाला पवित्र-आत्मा हमें लोगों के साथ संपर्क करने के लिए सक्षम करता है। हम परमेश्वर के उद्देश्यों को पूरा करने, उसके स्वर्गीय राज्य की बढ़ोतरी के लिए, उसके उपयोगी पात्र हैं। आज किस प्रकार से हम, पवित्र-आत्मा की सहायता एवँ सामर्थ्य द्वारा, हम से भिन्न किसी अन्य व्यक्ति के पास प्रभु यीशु का सुसमाचार पहुँचा सकते हैं? – एमी बाउचर पाई


प्रेम ऐसी भाषा है जिसे सब समझते हैं।

यदि मैं मनुष्यों, और सवर्गदूतों की बोलियां बोलूं, और प्रेम न रखूं, तो मैं ठनठनाता हुआ पीतल, और झंझनाती हुई झांझ हूं। - 1 कुरिन्थियों 13:1

बाइबल पाठ: प्रेरितों 2:1-12
Acts 2:1 जब पिन्‍तेकुस का दिन आया, तो वे सब एक जगह इकट्ठे थे।
Acts 2:2 और एकाएक आकाश से बड़ी आंधी की सी सनसनाहट का शब्द हुआ, और उस से सारा घर जहां वे बैठे थे, गूंज गया।
Acts 2:3 और उन्हें आग की सी जीभें फटती हुई दिखाई दीं; और उन में से हर एक पर आ ठहरीं।
Acts 2:4 और वे सब पवित्र आत्मा से भर गए, और जिस प्रकार आत्मा ने उन्हें बोलने की सामर्थ दी, वे अन्य अन्य भाषा बोलने लगे।।
Acts 2:5 और आकाश के नीचे की हर एक जाति में से भक्त यहूदी यरूशलेम में रहते थे।
Acts 2:6 जब वह शब्द हुआ तो भीड़ लग गई और लोग घबरा गए, क्योंकि हर एक को यही सुनाईं देता था, कि ये मेरी ही भाषा में बोल रहे हैं।
Acts 2:7 और वे सब चकित और अचम्भित हो कर कहने लगे; देखो, ये जो बोल रहे हैं क्या सब गलीली नहीं?
Acts 2:8 तो फिर क्यों हम में से हर एक अपनी अपनी जन्म भूमि की भाषा सुनता है?
Acts 2:9 हम जो पारथी और मेदी और एलामी लोग और मिसुपुतामिया और यहूदिया और कप्‍पदूकिया और पुन्‍तुस और आसिया।
Acts 2:10 और फ्रूगिया और पमफूलिया और मिसर और लिबूआ देश जो कुरेने के आस पास है, इन सब देशों के रहने वाले और रोमी प्रवासी, क्या यहूदी क्या यहूदी मत धारण करने वाले, क्रेती और अरबी भी हैं।
Acts 2:11 परन्तु अपनी अपनी भाषा में उन से परमेश्वर के बड़े बड़े कामों की चर्चा सुनते हैं।
Acts 2:12 और वे सब चकित हुए, और घबराकर एक दूसरे से कहने लगे कि यह क्या हुआ चाहता है?
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • नहेम्याह 1-3
  • प्रेरितों 2:1-21



गुरुवार, 14 जून 2018

धन्यवादी


   औरों की गवाहियाँ सुनना कि कैसे परमेश्वर ने उनके जीवनों में अद्भुत कार्य किए हैं, हमारे लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। हम प्रार्थनाओं के उत्तर में हुए कार्यों के लिए आनन्दित हो सकते हैं, किन्तु साथ ही यह विचार भी रख सकते हैं कि परमेश्वर ने हाल ही में हमारे लिए कुछ अद्भुत क्यों नहीं किया है?

   यह सोच रखना सरल है कि यदि परमेश्वर हमारे पास भी उन अद्भुत रीतियों से आता जैसे वह अब्राहम के पास आया करता था, तो हम भी परमेश्वर के और अधिक प्रभावी तथा वफादार सेवक होते। लेकिन यदि हम परमेश्वर के वचन बाइबल में ध्यान से देखें तो पाएँगे कि परमेश्वर अब्राहम के पास 12 से 14 वर्षों के अन्तराल में ही आया करता था, और अब्राहम की अधिकांश जीवन यात्रा सामान्य सी ही थी (देखिए उत्पत्ति 12:1-4; 15:1-6; 16-17:12)।

   अधिकाँशतः परमेश्वर का कार्य जीवन की सामान्य बातों के द्वारा और उसके सामने आए बिना ही होता है। वह हर परिस्थिति में हमारा ध्यान रखता है, हमें हमारी सामर्थ्य से बाहर परिक्षा में पड़ने से बचाए रखता है और परीक्षाओं से निकलने के मार्ग भी बनाकर देता रहता है (1 कुरिन्थियों 10:13)। प्रतिदिन, प्रतिपल परमेश्वर हमें शैतान के घातक हमलों से बचाता रहता है, अन्यथा हम पूर्णतयाः असफल हो गए होते। और जब शैतान के प्रलोभन और परीक्षाएं हम पर आते हैं, तब परमेश्वर हमारे निकास के मार्ग बनाकर देता है, जिससे हम उनसे बच कर निकल सकें।

   आज रात सोने से पहले परमेश्वर का धन्यवाद करें कि आज दिन भर के जीवन की सामान्य प्रतीत होने वाले बातों में उसने कैसे अद्भुत रीति से हमारे लिए कितने ही कार्य किए हैं। इसलिए यह लालसा करते रहने के स्थान पर कि परमेश्वर हमारे लिए कुछ अद्भुत कर दे, हमें उसका धन्यवादी रहना चाहिए उन सभी बातों के लिए जो वह आज तक हमारे जीवनों में करता आया है। - जो स्टोवैल


परमेश्वर अदृश्य रहता है किन्तु सदा प्रत्येक परिस्थिति को
 अपने नियंत्रण में बनाए रखता है, “साधारण” दिनों में भी।

तुम किसी ऐसी परीक्षा में नहीं पड़े, जो मनुष्य के सहने से बाहर है: और परमेश्वर सच्चा है: वह तुम्हें सामर्थ्य से बाहर परीक्षा में न पड़ने देगा, वरन परीक्षा के साथ निकास भी करेगा; कि तुम सह सको। - 1 कुरिन्थियों 10:13

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 12:1-4; 17:1-2
Genesis 12:1 यहोवा ने अब्राम से कहा, अपने देश, और अपनी जन्मभूमि, और अपने पिता के घर को छोड़कर उस देश में चला जा जो मैं तुझे दिखाऊंगा।
Genesis 12:2 और मैं तुझ से एक बड़ी जाति बनाऊंगा, और तुझे आशीष दूंगा, और तेरा नाम बड़ा करूंगा, और तू आशीष का मूल होगा।
Genesis 12:3 और जो तुझे आशीर्वाद दें, उन्हें मैं आशीष दूंगा; और जो तुझे कोसे, उसे मैं शाप दूंगा; और भूमण्डल के सारे कुल तेरे द्वारा आशीष पाएंगे।
Genesis 12:4 यहोवा के इस वचन के अनुसार अब्राम चला; और लूत भी उसके संग चला; और जब अब्राम हारान देश से निकला उस समय वह पचहत्तर वर्ष का था।
Genesis 17:1 जब अब्राम निन्नानवे वर्ष का हो गया, तब यहोवा ने उसको दर्शन देकर कहा मैं सर्वशक्तिमान ईश्वर हूं; मेरी उपस्थिति में चल और सिद्ध होता जा।
Genesis 17:2 और मैं तेरे साथ वाचा बान्धूंगा, और तेरे वंश को अत्यन्त ही बढ़ाऊंगा।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • एज्रा 9-10
  • प्रेरितों 1


बुधवार, 13 जून 2018

शब्द



   एक सभा में बोलने के लिए जब रेबेक्का मंच पर खड़ी हुई तो ख़राब माइक्रोफोन तथा धवनी प्रणाली के कारण, उसका बोला हुआ पहल वाक्य ही सभास्थल में गूंजने लगा। उसके लिए यह कुछ परेशान कर देने वाली बात थी कि उसी के शब्द उसके पास लौट कर आ रहे थे, और उसे अपने आप को अपने शब्दों को गूंजते हुए सुनने को नज़रंदाज़ करने के लिए संयोजित करना पड़ा।

   कल्पना कीजिए कि आप जो भी शब्द बोलें वो गूंजते हुए आपके पास बारंबार लौट कर आएँ। “मैं तुमसे प्रेम करता हूँ”; “गलती मेरी थी”; “प्रभु परमेश्वर आपका बहुत धन्यवाद”; “मैं आपके लिए प्रार्थना कर रहा हूँ” आदि शब्दों को बारंबार सुनते रहना तो अच्छा लगता है; परन्तु हमारे द्वारा कहे गए सभी शब्द भले, या नम्र, या दयालु नहीं होते हैं। उन क्रोध और आवेश में कहे गए शब्दों के विषय क्या कहें, जिन्हें कोई एक बार भी सुनना नहीं चाहता है, बारंबार सुनने की तो बात ही दूर की है। ऐसे शब्द वो होते हैं जिन्हें हम बहुधा वापस ले लेना चाहते हैं, परन्तु ले नहीं पाते हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार दाऊद के समान, हमें भी प्रार्थना करनी चाहिए कि परमेश्वर हमारे शब्दों को नियंत्रित करे। दाऊद ने प्रार्थना की, “हे यहोवा, मेरे मुख का पहरा बैठा, मेरे होठों के द्वार पर रखवाली कर” (भजन 141:3)। हमें धन्यवादी होना चाहिए कि परमेश्वर ऐसा करना भी चाहता है। वह हमारी सहायता कर सकता है कि हम क्या बोलें, और हमारे होंठों की रखवाली भी कर सकता है।

   जब हम जो कहते हैं उसपर ध्यान देंगे, अपने शब्दों के लिए प्रार्थना करेंगे, तो परमेश्वर धैर्य के साथ हमें सिखाएगा और हमें आत्म-संयम के लिए सामर्थ्य भी प्रदान करेगा। सबसे उत्तम बात है कि यदि हम असफल भी हो जाएँ तो भी वह हमें क्षमा करने तथा हमारे सहायता करने के लिए सदा तैयार रहता है। - ऐनी सेटास


आत्म-संयम का महत्वपूर्ण भाग है अपने होंठों पर नियंत्रण करना।

यदि कोई अपने आप को भक्त समझे, और अपनी जीभ पर लगाम न दे, पर अपने हृदय को धोखा दे, तो उस की भक्ति व्यर्थ है। - याकूब 1:26

बाइबल पाठ: भजन 141
Psalms 141:1 हे यहोवा, मैं ने तुझे पुकारा है; मेरे लिये फुर्ती कर! जब मैं तुझ को पुकारूं, तब मेरी ओर कान लगा!
Psalms 141:2 मेरी प्रार्थना तेरे साम्हने सुगन्ध धूप, और मेरा हाथ फैलाना, संध्या काल का अन्नबलि ठहरे!
Psalms 141:3 हे यहोवा, मेरे मुख का पहरा बैठा, मेरे होठों के द्वार पर रखवाली कर!
Psalms 141:4 मेरा मन किसी बुरी बात की ओर फिरने न दे; मैं अनर्थकारी पुरूषों के संग, दुष्ट कामों में न लगूं, और मैं उनके स्वादिष्ट भोजन वस्तुओं में से कुछ न खाऊं!
Psalms 141:5 धर्मी मुझ को मारे तो यह कृपा मानी जाएगी, और वह मुझे ताड़ना दे, तो यह मेरे सिर पर का तेल ठहरेगा; मेरा सिर उस से इन्कार न करेगा।। लोगों के बुरे काम करने पर भी मैं प्रार्थना में लवलीन रहूंगा।
Psalms 141:6 जब उनके न्यायी चट्टान के पास गिराए गए, तब उन्होंने मेरे वचन सुन लिये; क्योंकि वे मधुर हैं।
Psalms 141:7 जैसे भूमि में हल चलने से ढेले फूटते हैं, वैसे ही हमारी हडि्डयां अधोलोक के मुंह पर छितराई हुई हैं।
Psalms 141:8 परन्तु हे यहोवा, प्रभु, मेरी आंखे तेरी ही ओर लगी हैं; मैं तेरा शरणागत हूं; तू मेरे प्राण जाने न दे!
Psalms 141:9 मुझे उस फन्दे से, जो उन्होंने मेरे लिये लगाया है, और अनर्थकारियों के जाल से मेरी रक्षा कर!
Psalms 141:10 दुष्ट लोग अपने जालों में आप ही फंसें, और मैं बच निकलूं।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • एज्रा 6-8
  • यूहन्ना 21



मंगलवार, 12 जून 2018

भावनाएं



   पिछले वर्ष एक सम्मलेन के समय मैं अपने कुछ मित्रों से मिली, जिनसे मैं बहुत लंबे समय से नहीं मिली थी। मिलने और साथ होने के आनन्द में हम सब बहुत प्रसन्न हुए, एक साथ हँसे; परन्तु एक दूसरे को देखकर हम रोए भी इस एहसास के कारण कि हमने एक-दूसरे के आभाव को कितना महसूस किया था।

   अपने साथ होने के समय के अंतिम दिन में हमने एक साथ प्रभु-भोज में भाग लिया, जो और आनन्द तथा आंसुओं का समय था! हम परमेश्वर के उस महान अनुग्रह के लिए आनन्दित थे जिसके अन्तर्गत उसने हमें पापों की क्षमा और अनन्त जीवन  दिया था, तथा अपने मित्रों के साथ बिताए गए ये खुशी के दिन भी। परन्तु हमें यह आनन्द और अनन्त जीवन देने के लिए जो कीमत प्रभु यीशु को चुकानी पड़ी थी उसे स्मरण कर के मेरे आँसू भी निकल पड़े थे।

   मैंने परमेश्वर के वचन बाइबल में एज्रा याजक और यरूशलेम के उस अद्भुत दिन के बारे में विचार किया। निर्वासित लोग बाबुल की बन्धुआई से निकलकर यरूशलेम लौट कर आए थे, और परमेश्वर के मंदिर के पुनर्निर्माण हेतु मंदिर की नेव डाली ही थी। तब लोगों ने आनन्द के कारण स्तुति-गीत गाए, परन्तु कुछ वृद्ध याजक रोने लगे (एज्रा 3:10-12) – वे या तो बन्धुआई में जाने के समय ध्वस्त करके लूट लिए गए सुलेमान के मंदिर और उसके वैभव को याद कर रहे थे, या फिर अपने पापों को स्मरण करके दुखी हो रहे थे जिनके कारण उन्हें बन्धुआई में जाना पड़ा था। इस्राएली गा भी रहे थे और रो भी रहे थे, और इस सब की मिली-जुली आवाज़ दूर तक सुनाई दे रही थी (पद 13)।

   कभी-कभी जब हम परमेश्वर को काम करते देखते हैं तो हम कई प्रकार की भावनाओं का अनुभव करते हैं – परमेश्वर के अद्भुत आश्चर्यजनक कार्यों को देखकर आनन्द और अपने पापों तथा उन पापों के कारण जो बलिदान प्रभु यीशु मसीह को देना पड़ा, उसे स्मरण कर के शोक और दुःख। उन इस्राएलियों के समान ही हमारी भावनाएँ भी प्रभु परमेश्वर के प्रति हमारे प्रेम और आराधना की अभिव्यक्ति, और दूसरों के सामने एक गवाही हो जाएँ। - कीला ओकोआ


परमेश्वर की प्रशंसा, हमारे आनन्द और आँसुओं, दोनों ही से हो सकती है।

परन्तु जितने तुझ पर भरोसा रखते हैं वे सब आनन्द करें, वे सर्वदा ऊंचे स्वर से गाते रहें; क्योंकि तू उनकी रक्षा करता है, और जो तेरे नाम के प्रेमी हैं तुझ में प्रफुल्लित हों। - भजन 5:11

बाइबल पाठ: एज्रा 3:7-13
Ezra 3:7 तब उन्होंने पत्थर गढ़ने वालों और कारीगरों को रुपया, और सीदोनी और सोरी लोगों को खाने-पीने की वस्तुएं और तेल दिया, कि वे फारस के राजा कुस्रू के पत्र के अनुसार देवदार की लकड़ी लबानोन से जापा के पास के समुद्र में पहुंचाएं।
Ezra 3:8 उनके परमेश्वर के भवन में, जो यरूशलेम में है, आने के दूसरे वर्ष के दूसरे महीने में, शालतीएल के पुत्र जरुब्बाबेल ने और योसादाक के पुत्र येशू ने और उनके और भाइयों ने जो याजक और लेवीय थे, और जितने बन्धुआई से यरूशलेम में आए थे उन्होंने भी काम को आरम्भ किया, और बीस वर्ष अथवा उस से अधिक अवस्था के लेवियों को यहोवा के भवन का काम चलाने के लिये नियुक्त किया।
Ezra 3:9 तो येशू और उसके बेटे और भाई और कदमीएल और उसके बेटे, जो यहूदा की सन्तान थे, और हेनादाद की सन्तान और उनके बेटे परमेश्वर के भवन में कारीगरों का काम चलाने को खड़े हुए।
Ezra 3:10 और जब राजों ने यहोवा के मन्दिर की नेव डाली तब अपने वस्त्र पहिने हुए, और तुरहियां लिये हुए याजक, और झांझ लिये हुए आसाप के वंश के लेवीय इसलिये नियुक्त किए गए कि इस्राएलियों के राजा दाऊद की चलाई हुई रीति के अनुसार यहोवा की स्तुति करें।
Ezra 3:11 सो वे यह गा गाकर यहोवा की स्तुति और धन्यवाद करने लगे, कि वह भला है, और उसकी करुणा इस्राएल पर सदैव बनी है। और जब वे यहोवा की स्तुति करने लगे तब सब लोगों ने यह जान कर कि यहोवा के भवन की नेव अब पड़ रही है, ऊंचे शब्द से जयजयकार किया।
Ezra 3:12 परन्तु बहुतेरे याजक और लेवीय और पूर्वजों के घरानों के मुख्य पुरुष, अर्थात वे बूढ़े जिन्होंने पहिला भवन देखा था, जब इस भवन की नेव उनकी आंखों के साम्हने पड़ी तब फूट फूटकर रोने लगे, और बहुतेरे आनन्द के मारे ऊंचे शब्द से जयजयकार कर रहे थे।
Ezra 3:13 इसलिये लोग, आनन्द के जयजयकार का शब्द, लोगों के रोने के शब्द से अलग पहिचान न सके, क्योंकि लोग ऊंचे शब्द से जयजयकार कर रहे थे, और वह शब्द दूर तक सुनाई देता था।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • एज्रा 3-5
  • यूहन्ना 20



सोमवार, 11 जून 2018

अनुग्रह



   वर्षों तक मैं परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु मसीह द्वारा दिए गए पहाड़ी सन्देश (मत्ती 5-7) को मानवीय व्यवहार का एक ऐसा मानक मानता था जिसे संभवतः कोई पूरा नहीं कर सकता था। मैंने कैसे उसके सही अर्थ को नज़रंदाज़ कर दिया? प्रभु यीशु ने यह सन्देश हमें कुण्ठित करने के लिए नहीं वरन हमें परमेश्वर के बारे में बताने के लिए कहे थे।

   हमें क्यों अपने शत्रुओं से प्रेम रखना है? क्योंकि हमारा दयालु पिता अपने सूर्य को बुरे और भले दोनों पर उदय करता है। हमें स्वर्ग में अपने खजाने क्यों एकत्रित करने चाहिएँ? क्योंकि वह परमेश्वर पिता का निवास है और वह हमें बहुतायत से पुरुस्कृत करेगा। हम क्यों निश्चिंत और निर्भय होकर जीवन व्यतीत करें? क्योंकि जो परमेश्वर जंगली सोसनों को वस्त्र पहनाता है और मैदान की घास की भी देखभाल करता है, उसी ने हमारी भी देखभाल करने का वायदा किया है। हमें प्रार्थना क्यों करनी चाहिए? यदि सांसारिक पिता अपने बच्चों को रोटी और मछली देते हैं, तो स्वर्गीय पिता माँगने वालों को उत्तम वस्तुएँ क्यों नहीं देगा?

   प्रभु यीशु ने पहाड़ी सन्देश (मत्ती 5-7) न केवल परमेश्वर के आदर्शों को, जिन तक पहुँचने के प्रयासों को हमें कभी छोड़ना नहीं चाहिए, दिखाने के लिए दिया था; वरन इसलिए भी कि हम समझ सकें कि उन आदर्शों तक हम कभी भी अपने प्रयासों और अपनी सामर्थ्य के द्वारा नहीं पहुँच सकते हैं; इसके लिए हमें प्रभु परमेश्वर की सहायता की आवश्यकता होगी ही।

   परमेश्वर के सामने हम सभी एक ही स्तर पर खड़े हैं: हत्यारे, आवेशपूर्ण, व्यभिचारी, वासनापूर्ण, चोर, लालची, इत्यादि। हम सभी अपने वास्तविक हाल को लेकर परेशान हैं – जो परमेश्वर को सही रीति से जानने की इच्छा रखने वाले के लिए उपयुक्त दशा है। हम जो परमेश्वर के परिशुद्ध आदर्श के मानक से गिरे हुए हैं, हमारे पास परमेश्वर के अनुग्रह की सुरक्षा में जाने के अतिरिक्त और कोई मार्ग नहीं है। उसका अनुग्रह ही हमें बचाता है, बहाल करता है। - फिलिप येन्सी



केवल परमेश्वर ही पापी आत्मा को अनुग्रह की श्रेष्ठ कृति में परिवर्तित कर सकता है।

परन्तु परमेश्वर ने जो दया का धनी है; अपने उस बड़े प्रेम के कारण, जिस से उसने हम से प्रेम किया। जब हम अपराधों के कारण मरे हुए थे, तो हमें मसीह के साथ जिलाया; (अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है।) – इफिसियों 2:4-5

बाइबल पाठ: मत्ती 5:43-48
Matthew 5:43 तुम सुन चुके हो, कि कहा गया था; कि अपने पड़ोसी से प्रेम रखना, और अपने बैरी से बैर।
Matthew 5:44 परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि अपने बैरियों से प्रेम रखो और अपने सताने वालों के लिये प्रार्थना करो।
Matthew 5:45 जिस से तुम अपने स्‍वर्गीय पिता की सन्तान ठहरोगे क्योंकि वह भलों और बुरों दोनों पर अपना सूर्य उदय करता है, और धर्मियों और अधर्मियों दोनों पर मेंह बरसाता है।
Matthew 5:46 क्योंकि यदि तुम अपने प्रेम रखने वालों ही से प्रेम रखो, तो तुम्हारे लिये क्या फल होगा? क्या महसूल लेने वाले भी ऐसा ही नहीं करते?
Matthew 5:47 और यदि तुम केवल अपने भाइयों ही को नमस्‍कार करो, तो कौन सा बड़ा काम करते हो? क्या अन्यजाति भी ऐसा नहीं करते?
Matthew 5:48 इसलिये चाहिये कि तुम सिद्ध बनो, जैसा तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता सिद्ध है।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • एज्रा 1-2
  • यूहन्ना 19:23-42