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शनिवार, 14 जुलाई 2018

विश्वासयोग्यता



      “हम आपकी नौकरी को समाप्त कर रहे हैं” एक दशक पहले मुझ से कहे गए इन शब्दों को सुनते ही मैं नौकरी के चले जाने के कारण घबरा गई, अन्दर से बुरी तरह से हिल गई। उस समय मैंने स्वयं को बिलकुल बिखरा हुआ अनुभव किया क्योंकि मेरी पहचान कुछ हद तक मेरे संपादक होने के पद के साथ जुड़ी हुई थी। हाल ही में मुझे फिर से वैसा ही दुःख हुआ जब मुझे ज्ञात हुआ कि मेरा बिना किसी की नौकरी करे, स्वतंत्रता से किए जाने वाले कार्य का भी अन्त हो रहा है। परन्तु इस समय, पहले के समान, मैंने अपने आप को बिखरा और अपनी नींव तक हिला हुआ अनुभव नहीं किया, क्योंकि समय के साथ मैंने परमेश्वर की विश्वासयोग्यता को देखा और अनुभव किया है, और मैं जानती हूँ कि वह मेरे शोक को भी आनन्द में परिवर्तित कर सकता है।

      यद्यपि हम एक पतित सँसार में रहते हैं, जहाँ हमें अकसर दुखों और निराशाओं का सामना करना पड़ता है, परन्तु हमें स्मरण रखना चाहिए कि परमेश्वर हमें निराशा से आनन्द में ले जा सकता है, जैसा हम यशायाह द्वारा प्रभु यीशु के आने से संबंधित की गई  भविष्यवाणी में देखते हैं (यशायाह 61:1-3)। जब हम निराश होते हैं, तो प्रभु हमें आशा देता है; जब हमें लगता है कि हम क्षमा नहीं करने पाएँगे, वह हमें क्षमा करने की सामर्थ्य प्रदान करता है। वह हमें सिखाता है कि हमारी पहचान उसमें है, न कि हमारे कार्य में; और वह हमें अनिश्चित भविष्य का सामना करने का साहस देता है। जब हम “राख” का वस्त्र ओढ़ कर बैठे होते हैं, वह अपनी दया में हमें स्तुति का अंगरखा पहना देता है।

      जब हम हानि का सामना कर रहे होते हैं, तब हमें उदासी से भागना नहीं चाहिए, और न ही हमें कडुवा या कठोर बन  जाना चाहिए। जब हम बीते समयों में परमेश्वर की विश्वासयोग्यता के बारे में विचार करते हैं, तो हमें भरोसा होता है कि वह हमारे शोक को नृत्य में बदलने के लिए न केवल सक्षम है, वरन ऐसा करना भी चाहता है। वह हमें इतना अनुग्रह देना चाहता है कि हम इस जीवन में भी और आने वाले जीवन में भी आनद से भरे रहें। - एमी बाउचर पाई


हमारे दुःख के समय से भी परमेश्वर हमें उन्नति प्रदान कर सकता है।

फिर उसने उन से कहा, कि जा कर चिकना चिकना भोजन करो और मीठा मीठा रस पियो, और जिनके लिये कुछ तैयार नहीं हुआ उनके पास बैना भेजो; क्योंकि आज का दिन हमारे प्रभु के लिये पवित्र है; और उदास मत रहो, क्योंकि यहोवा का आनन्द तुम्हारा दृढ़ गढ़ है। - नहेम्याह 8:10

बाइबल पाठ: यशायाह 61:1-4
Isaiah 61:1 प्रभु यहोवा का आत्मा मुझ पर है; क्योंकि यहोवा ने सुसमाचार सुनाने के लिये मेरा अभिषेक किया और मुझे इसलिये भेजा है कि खेदित मन के लोगों को शान्ति दूं; कि बंधुओं के लिये स्वतंत्रता का और कैदियों के लिये छुटकारे का प्रचार करूं;
Isaiah 61:2 कि यहोवा के प्रसन्न रहने के वर्ष का और हमारे परमेश्वर के पलटा लेने के दिन का प्रचार करूं; कि सब विलाप करने वालों को शान्ति दूं
Isaiah 61:3 और सिय्योन के विलाप करने वालों के सिर पर की राख दूर कर के सुन्दर पगड़ी बान्ध दूं, कि उनका विलाप दूर कर के हर्ष का तेल लगाऊं और उनकी उदासी हटाकर यश का ओढ़ना ओढ़ाऊं; जिस से वे धर्म के बांजवृक्ष और यहोवा के लगाए हुए कहलाएं और जिस से उसकी महिमा प्रगट हो।
Isaiah 61:4 तब वे बहुत काल के उजड़े हुए स्थानों को फिर बसाएंगे, पूर्वकाल से पड़े हुए खण्डहरों में वे फिर घर बनाएंगे; उजड़े हुए नगरों को जो पीढ़ी पीढ़ी में उजड़े हुए हों वे फिर नये सिरे से बसाएंगे।
     

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 10-12
  • प्रेरितों 19:1-20



शुक्रवार, 13 जुलाई 2018

जानते हुए



      एक संगीत कार्यक्रम के दौरान, श्रोताओं द्वारा किए गए एक प्रश्न के प्रत्युत्तर में, गायक और गीत-लेखक डेविड विलकॉक्स ने बताया कि वह गीत कैसे लिखता और संगीत-बद्ध करते हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए उन्हें तीन बातों की आवश्यकता होती है: एक शान्त कमरा, एक कोरा कागज़, और एक प्रश्न – “क्या ऐसा कुछ है जिसकी मुझे जानकारी होनी चाहिए?” प्रभु यीशु मसीह का अनुयायी होने के नाते, प्रभु की इच्छा जानने के लिए मुझे यह बहुत उपयुक्त तरीका लगा।

      प्रभु यीशु की सार्वजनिक सेवकाई के दौरान, वे सदा ही परमेश्वर के साथ एकांत में प्रार्थना में समय बिताया करते थे। उनके द्वारा 5000 लोगों को भोजन खिलाए जाने के आश्चर्यकर्म के पश्चात उन्होंने शिष्यों को नाव से गलील की झील के पार जाने को कहा, और उन्होंने स्वयं लोगों की भीड़ को विदा किया (मत्ती 14:22), और फिर, “वह लोगों को विदा कर के, प्रार्थना करने को अलग पहाड़ पर चढ़ गया; और सांझ को वहां अकेला था” (पद 23)।

      यदि प्रभु यीशु ने यह आवश्यक जाना कि उन्हें अपने पिता के साथ एकांत में समय बिताना है, तो फिर परमेश्वर के साथ वार्तालाप करने और अपने मन की बात उससे बाँटने, और उसके निर्देशों का पालन करने का मार्गदर्शन प्राप्त करने के लिए हमें कितना अधिक परमेश्वर पिता के साथ ऐसा समय बिताने की आवश्यकता है। एक शान्त कमरा – अर्थात कोई भी एक ऐसा स्थान जहाँ बिना ध्यान बंटाए हम प्रभु परमेश्वर पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। एक कोरा कागज़ – अर्थात एक खुला और उसकी सुनने वाला मन, और प्रभु से सीखने की लालसा। एक प्रश्न – “क्या ऐसा कुछ है जिसकी मुझे जानकारी होनी चाहिए?” – अर्थात एक समर्पित जीवन, “प्रभु अपनी आत्मा, अपने लिखित वचन और अपने मार्गदर्शन के आश्वासन के द्वारा मुझे से बातचीत कीजिए, मुझे सिखाईये एवं और उन्नत कीजिए।”

      उस संध्या, पिता परमेश्वर के साथ पहाड़ी पर एकांत में बिताए गए समय के पश्चात, बिना किसी भी प्रकार से विचलित हुए, प्रभु यीशु नीचे एक प्रचण्ड तूफ़ान में उतर आए, यह जानते हुए कि पिता परमेश्वर उनसे क्या चाहते हैं कि वे करें (पद 24-27)। - डेविड मैक्कैस्लैंड


परमेश्वर के साथ एकांत में बिताया गया समय ही सामर्थ्य पाने का सबसे उत्तम स्थान है।

प्रभु यहोवा, इस्राएल का पवित्र यों कहता है, लौट आने और शान्त रहने में तुम्हारा उद्धार है; शान्त रहने और भरोसा रखने में तुम्हारी वीरता है। परन्तु तुम ने ऐसा नहीं किया – यशायाह 30:15

बाइबल पाठ: मत्ती 14:22-36
Matthew 14:22 और उसने तुरन्त अपने चेलों को बरबस नाव पर चढ़ाया, कि वे उस से पहिले पार चले जाएं, जब तक कि वह लोगों को विदा करे।
Matthew 14:23 वह लोगों को विदा कर के, प्रार्थना करने को अलग पहाड़ पर चढ़ गया; और सांझ को वहां अकेला था।
Matthew 14:24 उस समय नाव झील के बीच लहरों से डगमगा रही थी, क्योंकि हवा साम्हने की थी।
Matthew 14:25 और वह रात के चौथे पहर झील पर चलते हुए उन के पास आया।
Matthew 14:26 चेले उसको झील पर चलते हुए देखकर घबरा गए! और कहने लगे, वह भूत है; और डर के मारे चिल्ला उठे।
Matthew 14:27 यीशु ने तुरन्त उन से बातें की, और कहा; ढाढ़स बान्‍धो; मैं हूं; डरो मत।
Matthew 14:28 पतरस ने उसको उत्तर दिया, हे प्रभु, यदि तू ही है, तो मुझे अपने पास पानी पर चलकर आने की आज्ञा दे।
Matthew 14:29 उसने कहा, आ: तब पतरस नाव पर से उतरकर यीशु के पास जाने को पानी पर चलने लगा।
Matthew 14:30 पर हवा को देखकर डर गया, और जब डूबने लगा, तो चिल्लाकर कहा; हे प्रभु, मुझे बचा।
Matthew 14:31 यीशु ने तुरन्त हाथ बढ़ाकर उसे थाम लिया, और उस से कहा, हे अल्प-विश्वासी, तू ने क्यों सन्‍देह किया?
Matthew 14:32 जब वे नाव पर चढ़ गए, तो हवा थम गई।
Matthew 14:33 इस पर जो नाव पर थे, उन्होंने उसे दण्‍डवत कर के कहा; सचमुच तू परमेश्वर का पुत्र है।
Matthew 14:34 वे पार उतरकर गन्नेसरत देश में पहुंचे।
Matthew 14:35 और वहां के लोगों ने उसे पहचानकर आस पास के सारे देश में कहला भेजा, और सब बीमारों को उसके पास लाए।
Matthew 14:36 और उस से बिनती करने लगे, कि वह उन्हें अपने वस्‍त्र के आंचल ही को छूने दे: और जितनों ने उसे छूआ, वे चंगे हो गए।
     

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 7-9
  • प्रेरितों 18



गुरुवार, 12 जुलाई 2018

मार्ग



      जीवन का मार्ग बहुधा कठिन होता है; इसलिए यदि हम यह आशा रखकर चलते हैं कि परमेश्वर हमें सरल मार्ग पर ही चलावाएगा, तो जब मार्ग कठिन हो जाएगा तब हम उसे अपनी पीठ दिखाने की परीक्षा में पड़ सकते हैं।

      यदि आपने कभी ऐसा करने का विचार किया है, तो इस्राएल के लोगों के बारे में भी सोचें। सैंकडों वर्षों की बंधुवाई के पश्चात, जब उन्हें मिस्र की गुलामी से स्वतंत्रता मिली, तब उन्होंने कनान देश की ओर कूच किया। परन्तु परमेश्वर ने उन्हें सीधे मार्ग से उनके होने वाले घर को नहीं भेजा, “तब यद्यपि पलिश्तियों के देश में हो कर जो मार्ग जाता है वह छोटा था; तौभी परमेश्वर ...उन को उस मार्ग से नहीं ले गया” (निर्गमन 13:17)। वरन वह उन्हें मरुभूमि के कठिन मार्ग से लेकर गया। अल्पकाल के लिए, परमेश्वर द्वारा ऐसा करने के द्वारा वे युद्धों में पड़ने से बच गए (पद 17), और दीर्घकाल में, कुछ और बड़ी बात उनमें कार्य कर रही थी।

      परमेश्वर ने मरुभूमि के उनके समय का उपयोग अपने लोगों को निर्देश देने और उन्हें परिपक्व बनाने के लिए किया। छोटा और सरल मार्ग उन्हें संकट में डाल देता; लंबे और कठिन मार्ग ने इस्राएल को वाचा के देश में सफल प्रवेश पाने के लिए तैयार किया।

      हमारा परमेश्वर विश्वासयोग्य है, और हम भरोसा रख सकते हैं कि वह सदा ही हमारी देखभाल तथा मार्गदर्शन करेगा, चाहे परिस्थिति कोई भी और कैसी भी क्यों न हो। जिस मार्ग पर वह हमें चला रहा है, हम उसका कारण चाहे न भी समझें, परन्तु हम भरोसा रख सकते हैं कि वह हमें परिपक्व और विश्वास में दृढ़ बनाने के लिए उस मार्ग पर लेकर चला रहा है। - डेव ब्रैनन


परमेश्वर का समय सदा सही होता है – धैर्य के साथ उसकी प्रतीक्षा करें।

व्यवस्था की यह पुस्तक तेरे चित्त से कभी न उतरने पाए, इसी में दिन रात ध्यान दिए रहना, इसलिये कि जो कुछ उस में लिखा है उसके अनुसार करने की तू चौकसी करे; क्योंकि ऐसा ही करने से तेरे सब काम सफल होंगे, और तू प्रभावशाली होगा। क्या मैं ने तुझे आज्ञा नहीं दी? हियाव बान्धकर दृढ़ हो जा; भय न खा, और तेरा मन कच्चा न हो; क्योंकि जहां जहां तू जाएगा वहां वहां तेरा परमेश्वर यहोवा तेरे संग रहेगा। - यहोशू 1:8-9

बाइबल पाठ: निर्गमन 13:17-22
Exodus 13:17 जब फिरौन ने लोगों को जाने की आज्ञा दे दी, तब यद्यपि पलिश्तियों के देश में हो कर जो मार्ग जाता है वह छोटा था; तौभी परमेश्वर यह सोच कर उन को उस मार्ग से नहीं ले गया, कि कहीं ऐसा न हो कि जब ये लोग लड़ाई देखें तब पछताकर मिस्र को लौट आएं।
Exodus 13:18 इसलिये परमेश्वर उन को चक्कर खिलाकर लाल समुद्र के जंगल के मार्ग से ले चला। और इस्राएली पांति बान्धे हुए मिस्र से निकल गए।
Exodus 13:19 और मूसा यूसुफ की हड्डियों को साथ लेता गया; क्योंकि यूसुफ ने इस्राएलियों से यह कहके, कि परमेश्वर निश्चय तुम्हारी सुधि लेगा, उन को इस विषय की दृढ़ शपथ खिलाई थी, कि वे उसकी हड्डियों को अपने साथ यहां से ले जाएंगे।
Exodus 13:20 फिर उन्होंने सुक्कोत से कूच कर के जंगल की छोर पर एताम में डेरा किया।
Exodus 13:21 और यहोवा उन्हें दिन को मार्ग दिखाने के लिये मेघ के खम्भे में, और रात को उजियाला देने के लिये आग के खम्भे में हो कर उनके आगे आगे चला करता था, जिससे वे रात और दिन दोनों में चल सकें।
Exodus 13:22 उसने न तो बादल के खम्भे को दिन में और न आग के खम्भे को रात में लोगों के आगे से हटाया।
     

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 4-6
  • प्रेरितों 17:16-34



बुधवार, 11 जुलाई 2018

संतुष्टि



      मेरी विधवा थी, और स्वास्थ्य संबंधित गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही थी; उसकी पुत्री ने उसे अपने घर के साथ लगे हुए एक वृद्धों के निवास-स्थान में रहने के लिए बुलाया। यद्यपि उस स्थान पर जाने का अर्थ होता अपने मित्रों, और अन्य परिवार जनों को छोड़कर बहुत दूर जाना, परन्तु मेरी ने परमेश्वर के इस प्रावधान के लिए उसका धन्यवाद किया, और आनदित हुई।

      नए स्थान पर रहते हुए छः माह बीतते-बीतते मेरी का आरंभिक आनन्द और संतुष्टि जाने लगे और वह अपने अन्दर कुड़कुड़ाने लगी और उसे संदेह होने लगे कि उसका यहाँ नए स्थान पर आना क्या वास्तव में परमेश्वर की सिद्ध इच्छा के अनुसार था। उसे अपने मसीही विश्वासी मित्रों की कमी खलती थी, और वह नया चर्च जहाँ उसे जाना होता था, उसके अकेले जाने के लिए बहुत दूर था।

      फिर उसने 19वीं शताब्दी के महान मसीही प्रचारक चार्ल्स स्पर्जन की लिखी कुछ बात पढ़ी; स्पर्जन ने लिखा था, “अब संतोष स्वर्ग का एक पुष्प है, और इसे पनपाने के लिए प्रयास और धैर्य आवश्यक है।” स्पर्जन ने आगे लिखा कि “पौलुस कहता है...’मैंने संतुष्ट होना सीखा है’(फिलिप्पियों 4:11), मानो एक समय पर वह संतुष्ट होना नहीं जानता था।”

      मेरी ने निष्कर्ष निकाला कि यदि पौलुस के समान एक समर्पित और दृढ़ मसीही प्रचारक, जो कैदखाने में बन्द था, मित्रों द्वारा अकेला छोड़ दिया गया था, और मृत्यु दण्ड के पूरा किए जाने की प्रतीक्षा कर रहा था, यदि संतुष्ट होना सीख सकता था, तो वो भी सीख सकती है।

      मेरी ने बताया, “मुझे एहसास हुआ कि जब तक मैं संतुष्टि का यह पाठ नहीं सीख लेती, मैं उन बातों का आनन्द नहीं लेने पाऊँगी, जिनकी योजनाएँ परमेश्वर ने मेरे लिए बनाई हैं। इसलिए मैंने अपने कुड़कुड़ाने की गलती को प्रभु परमेश्वर के सामने मान लिया, और उससे अपनी गलती के लिए क्षमा याचना की। संतुष्टि के इस पाठ को सीखने के कुछ ही समय के बाद, हाल ही में सेवा निवृत हुई एक महिला ने मुझ से चाहा के मैं प्रार्थना करने में उसकी सहयोगी बनूँ, और अन्य लोग चर्च ले जाने के लिए मुझे अपने साथ चलने के निमंत्रण देने लगे। एक अंतरंग मित्र के मिलने और आने-जाने में आसानी होने की मेरी आवश्यकताएं अद्भुत रीति से पूरी हो गईं।” – मेरियन स्ट्राउड


परमेश्वर सदा हमारी परिस्थितियों को तो नहीं बदलता है, 
परन्तु वह हमें ही बदल देता है।

पर सन्‍तोष सहित भक्ति बड़ी कमाई है। - 1 तिमुथियुस 6:6

बाइबल पाठ: फिलिप्प्यों 4:10-19
Philippians 4:10 मैं प्रभु में बहुत आनन्‍दित हूं कि अब इतने दिनों के बाद तुम्हारा विचार मेरे विषय में फिर जागृत हुआ है; निश्‍चय तुम्हें आरम्भ में भी इस का विचार था, पर तुम्हें अवसर न मिला।
Philippians 4:11 यह नहीं कि मैं अपनी घटी के कारण यह कहता हूं; क्योंकि मैं ने यह सीखा है कि जिस दशा में हूं, उसी में सन्‍तोष करूं।
Philippians 4:12 मैं दीन होना भी जानता हूं और बढ़ना भी जानता हूं: हर एक बात और सब दशाओं में तृप्‍त होना, भूखा रहना, और बढ़ना-घटना सीखा है।
Philippians 4:13 जो मुझे सामर्थ्य देता है उस में मैं सब कुछ कर सकता हूं।
Philippians 4:14 तौभी तुम ने भला किया, कि मेरे क्‍लेश में मेरे सहभागी हुए।
Philippians 4:15 और हे फिलप्‍पियो, तुम आप भी जानते हो, कि सुसमाचार प्रचार के आरम्भ में जब मैं ने मकिदुनिया से कूच किया तब तुम्हें छोड़ और किसी मण्‍डली ने लेने देने के विषय में मेरी सहयता नहीं की।
Philippians 4:16 इसी प्रकार जब मैं थिस्सलुनीके में था; तब भी तुम ने मेरी घटी पूरी करने के लिये एक बार क्या वरन दो बार कुछ भेजा था।
Philippians 4:17 यह नहीं कि मैं दान चाहता हूं परन्तु मैं ऐसा फल चाहता हूं, जो तुम्हारे लाभ के लिये बढ़ता जाए।
Philippians 4:18 मेरे पास सब कुछ है, वरन बहुतायत से भी है: जो वस्तुएं तुम ने इपफ्रुदीतुस के हाथ से भेजी थीं उन्हें पाकर मैं तृप्‍त हो गया हूं, वह तो सुगन्‍ध और ग्रहण करने के योग्य बलिदान है, जो परमेश्वर को भाता है।
Philippians 4:19 और मेरा परमेश्वर भी अपने उस धन के अनुसार जो महिमा सहित मसीह यीशु में है तुम्हारी हर एक घटी को पूरी करेगा।
     

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 1-3
  • प्रेरितों 17:1-15



मंगलवार, 10 जुलाई 2018

‘ज़बान’



      मेरी दादी मिशनरी बनकर मेक्सिको गईं थीं और उन्हें स्थानीय स्पैनिश भाषा सीखने में बहुत कठिनाई हुई। एक दिन वे बाज़ार खरीददारी करने गईं, उनके साथ सहायता के लिए एक छोटी लड़की भी थी। उन्होंने उस लड़की को खरीदने वाले सामान की सूची दिखाते हुए कहा कि वह दो ‘ज़बानों’ (lenguas) में है, जबकि वे कहना चाहती थीं कि वह दो ‘भाषाओं’ (idiomas) में है। कसाई ने उन दोनों की बातें सुनीं तो उसे लगा कि उन्हें पशु की दो ‘ज़बान’ अर्थात ‘जीभें’ चाहिएं, और उसने वही उन्हें बांधकर दे दीं। दादी को यह बात घर पहुँचने का बाद ही मालूम पड़ी; उन्होंने इससे पहले कभी ‘जीभ’ भोजन के लिए नहीं पकाई थी!

      जब हम कोई दूसरी भाषा सीख रहे होते हैं तो गलतियाँ होना स्वाभाविक है। यही परमेश्वर की प्रेम की भाषा सीखते हुए भी होता है। कभी-कभी हमारा बोलना विरोधाभास वाला होता है, क्योंकि हम प्रभु परमेश्वर की स्तुति भी करते हैं और फिर लोगों के लिए बुरा-भला भी बोलते हैं। हमारा पुराना पापी मनुष्यत्व मसीह यीशु में हमारे नए जीवन का विरोध करता है। हमारे मुँह से जो निकालता है, वह दिखाता है कि अपने शब्दों के विषय हमें परमेश्वर की सहायता की कितनी आवश्यकता है।

      मसीही जीवन अपना लेने के पश्चात हमारी पुरानी ‘ज़बान’ को जाना ही होगा। परमेश्वर के प्रेम की नई भाषा सीखने का एकमात्र तरीका है प्रभु यीशु को अपनी ‘ज़बान’ का भी प्रभु बना लेना। जब परमेश्वर का पवित्र-आत्मा हम में काम करता है तो वह हमें आत्म-संयम भी प्रदान करता है कि हम परमेश्वर पिता को भावते हुए शब्दों का प्रयोग करें। होने दें कि हम हमारे मुँह से निकलने वाले प्रत्येक शब्द को प्रभु को समर्पित रखें; और भजनकार के समान हमारी भी प्रार्थना हो, “हे यहोवा, मेरे मुख का पहरा बैठा, मेरे हाठों के द्वार पर रखवाली कर!” (भजन 141:3)।


होने दें कि जो शब्द आप बोलें वे लोगों को प्रभु यीशु की ओर आकर्षित करें।


अपनी जीभ को बुराई से रोक रख, और अपने मुंह की चौकसी कर कि उस से छल की बात न निकले। - भजन 34:13

बाइबल पाठ: याकूब 3:1-12
James 3:1 हे मेरे भाइयों, तुम में से बहुत उपदेशक न बनें, क्योंकि जानते हो, कि हम उपदेशक और भी दोषी ठहरेंगे।
James 3:2 इसलिये कि हम सब बहुत बार चूक जाते हैं: जो कोई वचन में नहीं चूकता, वही तो सिद्ध मनुष्य है; और सारी देह पर भी लगाम लगा सकता है।
James 3:3 जब हम अपने वश में करने के लिये घोड़ों के मुंह में लगाम लगाते हैं, तो हम उन की सारी देह को भी फेर सकते हैं।
James 3:4 देखो, जहाज भी, यद्यपि ऐसे बड़े होते हैं, और प्रचण्‍ड वायु से चलाए जाते हैं, तौभी एक छोटी सी पतवार के द्वारा मांझी की इच्छा के अनुसार घुमाए जाते हैं।
James 3:5 वैसे ही जीभ भी एक छोटा सा अंग है और बड़ी बड़ी डींगे मारती है: देखो, थोड़ी सी आग से कितने बड़े वन में आग लग जाती है।
James 3:6 जीभ भी एक आग है: जीभ हमारे अंगों में अधर्म का एक लोक है और सारी देह पर कलंक लगाती है, और भवचक्र में आग लगा देती है और नरक कुण्ड की आग से जलती रहती है।
James 3:7 क्योंकि हर प्रकार के बन-पशु, पक्षी, और रेंगने वाले जन्‍तु और जलचर तो मनुष्य जाति के वश में हो सकते हैं और हो भी गए हैं।
James 3:8 पर जीभ को मनुष्यों में से कोई वश में नहीं कर सकता; वह एक ऐसी बला है जो कभी रुकती ही नहीं; वह प्राण नाशक विष से भरी हुई है।
James 3:9 इसी से हम प्रभु और पिता की स्‍तुति करते हैं; और इसी से मनुष्यों को जो परमेश्वर के स्‍वरूप में उत्पन्न हुए हैं श्राप देते हैं।
James 3:10 एक ही मुंह से धन्यवाद और श्राप दोनों निकलते हैं।
James 3:11 हे मेरे भाइयों, ऐसा नहीं होना चाहिए।
James 3:12 क्या सोते के एक ही मुंह से मीठा और खारा जल दोनों निकलते हैं? हे मेरे भाइयों, क्या अंजीर के पेड़ में जैतून, या दाख की लता में अंजीर लग सकते हैं? वैसे ही खारे सोते से मीठा पानी नहीं निकल सकता।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 41-42
  • प्रेरितों 16:22-40



सोमवार, 9 जुलाई 2018

प्रावधान



      इंगलैंण्ड के एक ग्रामीण इलाके के मैदान में मसीही लेखक और व्याख्याकर्ता, जी. के. चेस्टरटन, अपने स्थान से जहाँ वे बैठे हुए थे, वहाँ से एकदम से उठकर खड़े हुए और बहुत ज़ोर से ठहाका मार कर हंसने लगे। उनका ऐसा करना इतना अचानक और प्रबल था कि मैदान की गाएं उनकी ओर देखने लगीं।

      ऐसा करने के कुछ मिनिट पहले चेस्टरटन बहुत दुखी थे। वे बेचैन होकर पहाड़ियों में घूमते फिर रहे थे, रंगीन चौक से खाकी कागज़ पर रेखा चित्र बना रहे थे। परन्तु चित्र बनाते-बनाते वे अचंभित हो गए जब उन्हें ध्यान आया कि उनके पास सफ़ेद रंग का चौक नहीं है, जो उनके विचार से, उनकी चित्रकारी के लिए बहुत आवश्यक था। लेकिन शीघ्र ही वे हँसने लगे, जब उन्हें एहसास हुआ कि उनके नीचे की धरती सफ़ेद चूना-पत्थर की बनी हुई है, जो सफ़ेद चौक के समान ही था। उन्होंने उस चूना-पत्थर का एक टुकड़ा तोड़ा और चित्र बनाना फिर से आरंभ कर दिया।

      जैसे चेस्टरटन ने एहसास किया कि वे “सफ़ेद चौक के असीम भण्डार पर बैठे हुए हैं” हम मसीही विश्वासियों के पास भी परमेश्वर के असीम भौतिक और आत्मिक संसाधनों का खज़ाना है: “क्योंकि उसके ईश्वरीय सामर्थ्य ने सब कुछ जो जीवन और भक्ति से सम्बन्‍ध रखता है, हमें उसी की पहचान के द्वारा दिया है, जिसने हमें अपनी ही महिमा और सद्गुण के अनुसार बुलाया है” (2 पतरस 1:3)।

      हो सकता है कि आपको ऐसा लगे कि भक्ति के लिए आवश्यक किसी महत्वपूर्ण तत्व, जैसे कि विश्वास, अनुग्रह, और बुद्धिमता, की आपके पास कमी है। किन्तु यदि आपके साथ प्रभु यीशु मसीह है, तो आपके पास जो कुछ भी आपके लिए आवश्यक है, वह उपलब्ध है, और बहुतायत से है। मसीह यीशु में होकर आपके पास परमेश्वर पिता के सभी संसाधन उपलब्ध हैं; पिता परमेश्वर ने अपनी संतान के लिए अपने बड़े अनुग्रह मैं सभी प्रावधान कर के दिए हैं। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


परमेश्वर के सामर्थ्य और संसाधनों की कोई सीमा नहीं है।

हे यहोवा के पवित्र लोगो, उसका भय मानो, क्योंकि उसके डरवैयों को किसी बात की घटी नहीं होती! जवान सिंहों तो घटी होती और वे भूखे भी रह जाते हैं; परन्तु यहोवा के खोजियों को किसी भली वस्तु की घटी न होवेगी।  - भजन 34:9-10

बाइबल पाठ: 2 पतरस 1:1-10
2 Peter 1:1 शमौन पतरस की और से जो यीशु मसीह का दास और प्रेरित है, उन लोगों के नाम जिन्होंने हमारे परमेश्वर और उद्धारकर्ता यीशु मसीह की धामिर्कता से हमारा सा बहुमूल्य विश्वास प्राप्त किया है।
2 Peter 1:2 परमेश्वर के और हमारे प्रभु यीशु की पहचान के द्वारा अनुग्रह और शान्‍ति तुम में बहुतायत से बढ़ती जाए।
2 Peter 1:3 क्योंकि उसके ईश्वरीय सामर्थ्य ने सब कुछ जो जीवन और भक्ति से सम्बन्‍ध रखता है, हमें उसी की पहचान के द्वारा दिया है, जिसने हमें अपनी ही महिमा और सद्गुण के अनुसार बुलाया है।
2 Peter 1:4 जिन के द्वारा उसने हमें बहुमूल्य और बहुत ही बड़ी प्रतिज्ञाएं दी हैं: ताकि इन के द्वारा तुम उस सड़ाहट से छूट कर जो संसार में बुरी अभिलाषाओं से होती है, ईश्वरीय स्‍वभाव के समभागी हो जाओ।
2 Peter 1:5 और इसी कारण तुम सब प्रकार का यत्‍न कर के, अपने विश्वास पर सद्गुण, और सद्गुण पर समझ।
2 Peter 1:6 और समझ पर संयम, और संयम पर धीरज, और धीरज पर भक्ति।
2 Peter 1:7 और भक्ति पर भाईचारे की प्रीति, और भाईचारे की प्रीति पर प्रेम बढ़ाते जाओ।
2 Peter 1:8 क्योंकि यदि ये बातें तुम में वर्तमान रहें, और बढ़ती जाएं, तो तुम्हें हमारे प्रभु यीशु मसीह के पहचानने में निकम्मे और निष्‍फल न होने देंगी।
2 Peter 1:9 और जिस में ये बातें नहीं, वह अन्‍धा है, और धुन्‍धला देखता है, और अपने पूर्वकाली पापों से धुल कर शुद्ध होने को भूल बैठा है।
2 Peter 1:10 इस कारण हे भाइयों, अपने बुलाए जाने, और चुन लिये जाने को सिद्ध करने का भली भांति यत्‍न करते जाओ, क्योंकि यदि ऐसा करोगे, तो कभी भी ठोकर न खाओगे।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 38-40
  • प्रेरितों 16:1-21



रविवार, 8 जुलाई 2018

आदर



      जब एक ब्रिटिश विद्वान ने सँसार भर के सभी धर्मों को एक साथ मिलकर विश्वव्यापी एकता के लिए कार्य करने का आवाहन किया तो सभी ने उसे बहुत सराहा। उस विद्वान ने इस बात की ओर ध्यान खींचा कि सभी धर्म ‘सुनहरे नियम’ में विश्वास रखते हैं, और सुझाव दिया कि “हमारे समय का मुख्य उद्देश्य है एक वैश्विक समाज का निर्माण करना जहाँ सभी विचारधाराओं के लोग एक साथ शान्ति और मेल-मिलाप के साथ रह सकें।”

      प्रभु यीशु ने भी उस ‘सुनहरे नियम’ को सिखाया: “इस कारण जो कुछ तुम चाहते हो, कि मनुष्य तुम्हारे साथ करें, तुम भी उन के साथ वैसा ही करो; क्योंकि व्यवस्था और भविष्यद्वक्तओं की शिक्षा यही है” (मत्ती 7:12)। अपने इसी उपदेश में प्रभु ने यह भी कहा, “...अपने बैरियों से प्रेम रखो और अपने सताने वालों के लिये प्रार्थना करो” (मत्ती 5:44)। इन मौलिक आज्ञाओं का पालन करने के द्वारा निश्चय ही शान्ति और मेल-मिलाप को बहुत बढ़ावा मिलगा। सुनहरे नियम को कहने के तुरंत बाद प्रभु ने सचेत रहने की बात भी कही। प्रभु ने अपने अनुयायियों को लुभावनी और आकर्षक बातों के बनाने वालों के प्रति सचेत करते हुए कहा, “झूठे भविष्यद्वक्ताओं से सावधान रहो, जो भेड़ों के भेष में तुम्हारे पास आते हैं, परन्तु अन्दर से फाड़ने वाले भेड़िए हैं” (मत्ती 7:15)।

      औरों के प्रति आदर रखना, तथा सत्य की पहचान करने की क्षमता रखना साथ-साथ ही चलते हैं। यदि हमारे पास सत्य है, तो हमारे पास लोगों को सिखाने योग्य सन्देश भी होगा। परन्तु प्रभु परमेश्वर ने प्रत्येक व्यक्ति को यह स्वतंत्रता दी है कि वह स्वेच्छा से प्रभु को चुने या उसका तिरिस्कार कर दे। हम मसीही विश्वासियों की यह जिम्मेदारी है कि हम प्रभु के विषय सत्य को प्रेम, और नम्रता के साथ दूसरों के सामने प्रस्तुत कर दें और फिर सत्य के उस सन्देश के विषय दूसरों द्वारा किए गए निर्णय का आदर करें, जैसे परमेश्वर उन लोगों के प्रति करता है।

      औरों का आदर करने से ही हम उनके आदर के पात्र बन सकेंगे। और यह आदर तथा विश्वास पाना, प्रभु यीशु के सन्देश, “...मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता” (यूहन्ना 14:6) को लोगों तक पहुँचाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। - टिम गुस्ताफासन


सत्य से प्रेम करें; लोगों से भी प्रेम करें।

क्योंकि ऐसे लोग झूठे प्रेरित, और छल से काम करने वाले, और मसीह के प्रेरितों का रूप धरने वाले हैं। और यह कुछ अचम्भे की बात नहीं क्योंकि शैतान आप भी ज्योतिमर्य स्वर्गदूत का रूप धारण करता है। सो यदि उसके सेवक भी धर्म के सेवकों का सा रूप धरें, तो कुछ बड़ी बात नहीं परन्तु उन का अन्‍त उन के कामों के अनुसार होगा। - 2 कुरिन्थियों 11:13-15

बाइबल पाठ: मत्ती 7:12-23
Matthew 7:12 इस कारण जो कुछ तुम चाहते हो, कि मनुष्य तुम्हारे साथ करें, तुम भी उन के साथ वैसा ही करो; क्योंकि व्यवस्था और भविष्यद्वक्तओं की शिक्षा यही है।
Matthew 7:13 सकेत फाटक से प्रवेश करो, क्योंकि चौड़ा है वह फाटक और चाकल है वह मार्ग जो विनाश को पहुंचाता है; और बहुतेरे हैं जो उस से प्रवेश करते हैं।
Matthew 7:14 क्योंकि सकेत है वह फाटक और सकरा है वह मार्ग जो जीवन को पहुंचाता है, और थोड़े हैं जो उसे पाते हैं।
Matthew 7:15 झूठे भविष्यद्वक्ताओं से सावधान रहो, जो भेड़ों के भेष में तुम्हारे पास आते हैं, परन्तु अन्दर से फाड़ने वाले भेड़िए हैं।
Matthew 7:16 उन के फलों से तुम उन्हें पहचान लोग क्या झाडिय़ों से अंगूर, वा ऊंटकटारों से अंजीर तोड़ते हैं?
Matthew 7:17 इसी प्रकार हर एक अच्छा पेड़ अच्छा फल लाता है और निकम्मा पेड़ बुरा फल लाता है।
Matthew 7:18 अच्छा पेड़ बुरा फल नहीं ला सकता, और न निकम्मा पेड़ अच्छा फल ला सकता है।
Matthew 7:19 जो जो पेड़ अच्छा फल नहीं लाता, वह काटा और आग में डाला जाता है।
Matthew 7:20 सो उन के फलों से तुम उन्हें पहचान लोगे।
Matthew 7:21 जो मुझ से, हे प्रभु, हे प्रभु कहता है, उन में से हर एक स्वर्ग के राज्य में प्रवेश न करेगा, परन्तु वही जो मेरे स्‍वर्गीय पिता की इच्छा पर चलता है।
Matthew 7:22 उस दिन बहुतेरे मुझ से कहेंगे; हे प्रभु, हे प्रभु, क्या हम ने तेरे नाम से भविष्यद्वाणी नहीं की, और तेरे नाम से दुष्टात्माओं को नहीं निकाला, और तेरे नाम से बहुत अचम्भे के काम नहीं किए?
Matthew 7:23 तब मैं उन से खुलकर कह दूंगा कि मैं ने तुम को कभी नहीं जाना, हे कुकर्म करने वालों, मेरे पास से चले जाओ।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 36-37
  • प्रेरितों 15:22-41