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रविवार, 9 सितंबर 2018

प्रेम



      जैसे-जैसे प्रभु यीशु का प्रिय शिष्य यूहन्ना वृद्ध होता गया, उसकी शिक्षाएँ अधिकाधिक सीमित होती गईं, और उसकी शिक्षाओं का केंद्रबिंदु परमेश्वर का प्रेम ही हो गया, जैसा परमेश्वर के वचन बाइबल में उसकी लिखी तीनों पत्रियों में हम देखते हैं। अपनी पुस्तक Knowing the Truth of God’s Love में  पीटर क्रीफ्ट एक पुरानी किंवदंती के हवाले से लिखते हैं कि यूहन्ना का एक शिष्य उसके पास शिकायत के भाव से आया और बोला, “आप किसी और बात के बारे में बात क्यों नहीं करते हैं?” यूहन्ना ने उत्तर दिया, “क्योंकि और कुछ है ही नहीं!”

      अवश्य ही प्रभु यीशु के उद्देश्य और सन्देश का मर्म परमेश्वर का प्रेम ही है। यूहन्ना ने अपने लिखे सुसमाचार में लिखा, “क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए” (यूहन्ना 3:16)।

      प्रेरित पौलुस हमें बताता है कि हमारे जीवन जीने एवं व्यवहार का केन्द्र परमेश्वर का प्रेम ही है, और वह हमें स्मरण करवाता है कि, “क्योंकि मैं निश्चय जानता हूं, कि न मृत्यु, न जीवन, न स्वर्गदूत, न प्रधानताएं, न वर्तमान, न भविष्य, न सामर्थ, न ऊंचाई, न गहिराई और न कोई और सृष्टि, हमें परमेश्वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी” (रोमियों 8:38-39)।

      परमेश्वर का प्रेम इतना सामर्थी, उपलब्ध और स्थिरता प्रदान करने वाला है कि हम पूरे भरोसे के साथ प्रत्येक दिन में प्रवेश कर सकते हैं इस जानकारी के साथ के सभी भली बातें उसके हाथों से मिलने वाले उपहार हैं, और सभी चुनौतियों का हम उसकी सामर्थ्य द्वारा सामना कर सकते हैं। सारे जीवन में, जो सबसे महत्वपूर्ण बात है वह है प्रेम। - बिल क्राउडर


जब अन्य सभी कुछ गिर चुकता है, परमेश्वर का प्रेम फिर भी स्थिर खड़ा रहता है।

पर अब विश्वास, आशा, प्रेम थे तीनों स्थाई है, पर इन में सब से बड़ा प्रेम है। - 1 कुरिन्थियों 13:13

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 4:7-19
1 John 4:7 हे प्रियों, हम आपस में प्रेम रखें; क्योंकि प्रेम परमेश्वर से है: और जो कोई प्रेम करता है, वह परमेश्वर से जन्मा है; और परमेश्वर को जानता है।
1 John 4:8 जो प्रेम नहीं रखता, वह परमेश्वर को नहीं जानता है, क्योंकि परमेश्वर प्रेम है।
1 John 4:9 जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, वह इस से प्रगट हुआ, कि परमेश्वर ने अपने एकलौते पुत्र को जगत में भेजा है, कि हम उसके द्वारा जीवन पाएं।
1 John 4:10 प्रेम इस में नहीं कि हम ने परमेश्वर से प्रेम किया; पर इस में है, कि उसने हम से प्रेम किया; और हमारे पापों के प्रायश्‍चित्त के लिये अपने पुत्र को भेजा।
1 John 4:11 हे प्रियो, जब परमेश्वर ने हम से ऐसा प्रेम किया, तो हम को भी आपस में प्रेम रखना चाहिए।
1 John 4:12 परमेश्वर को कभी किसी ने नहीं देखा; यदि हम आपस में प्रेम रखें, तो परमेश्वर हम में बना रहता है; और उसका प्रेम हम में सिद्ध हो गया है।
1 John 4:13 इसी से हम जानते हैं, कि हम उस में बने रहते हैं, और वह हम में; क्योंकि उसने अपने आत्मा में से हमें दिया है।
1 John 4:14 और हम ने देख भी लिया और गवाही देते हैं, कि पिता ने पुत्र को जगत का उद्धारकर्ता कर के भेजा है।
1 John 4:15 जो कोई यह मान लेता है, कि यीशु परमेश्वर का पुत्र है: परमेश्वर उस में बना रहता है, और वह परमेश्वर में।
1 John 4:16 और जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, उसको हम जान गए, और हमें उस की प्रतीति है; परमेश्वर प्रेम है: जो प्रेम में बना रहता है, वह परमेश्वर में बना रहता है; और परमेश्वर उस में बना रहता है।
1 John 4:17 इसी से प्रेम हम में सिद्ध हुआ, कि हमें न्याय के दिन हियाव हो; क्योंकि जैसा वह है, वैसे ही संसार में हम भी हैं।
1 John 4:18 प्रेम में भय नहीं होता, वरन सिद्ध प्रेम भय को दूर कर देता है, क्योंकि भय से कष्‍ट होता है, और जो भय करता है, वह प्रेम में सिद्ध नहीं हुआ।
1 John 4:19 हम इसलिये प्रेम करते हैं, कि पहिले उसने हम से प्रेम किया।


एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 6-7
  • 2 कुरिन्थियों 2



शनिवार, 8 सितंबर 2018

स्त्रोत



      मैं 18 वर्ष की थी जब मुझे मेरी पहली पूर्णकालिक नौकरी मिली, और मैंने पैसे बचाने के अनुशासन के बारे में एक महत्वपूर्ण शिक्षा सीखी। मैं काम करती रही और पैसे बचाती रही, जब तक कि मेरे पास स्कूल की एक वर्ष की फीस चुकाने के लिए पैसे एकत्रित नहीं हो गए। तभी मेरी माँ को अचानक ही ऑपरेशन के लिए ले जाना पड़ा, और मुझे एहसास हुआ कि मेरे पास बैंक में उनके इलाज के लायक पैसे हैं। मेरी माँ के प्रति मेरा प्रेम, मेरे भविष्य के लिए मेरी योजनाओं से बढ़कर था।

      ऐसे में इलाज़बेथ इलियट द्वारा उनकी पुस्तक Passion and Purity में लिखे गए ये शब्द मेरे लिए और भी अधिक अर्थपूर्ण हो गए: “यदि हमें जो दिया गया है, हम उसे कस कर पकड़ लेते हैं और समयानुसार उसे छोड़ने को तैयार नहीं होते हैं, या उसका वैसा प्रयोग नहीं करते हैं जैसा हमें देने वाला चाहता है कि हम करें, तो हम अपनी आत्मा की उन्नति में बाधा डालते हैं। यहाँ यह गलती करना बहुत सरल रहता है कि हम यह कहें कि ‘क्योंकि यह मुझे परमेश्वर से मिला है इसलिए यह मेरा ही है; मैं इसके साथ जैसा चाहे वैसा कर सकता हूँ।’ जी नहीं! सत्य यह है कि वह हमारे पास इसलिए है जिससे हम उसके लिए उस देने वाले स्त्रोत का धन्यवाद करें, और उस वस्तु को पुनः उसे ही समर्पित कर दें,...वह दे देने के लिए मेरा है।”

      उस समय मुझे एहसास हुआ कि मेरी नौकरी, और पैसे बचाने का मेरा वह अनुशासन मुझे परमेश्वर से मिले उपहार थे! मैं अपने परिवार को उदारता से दे सकी क्योंकि मैं जानती थी कि परमेश्वर किसी और रीति से मुझे स्कूल की पढ़ाई करवा देगा, और उसने ऐसा ही किया भी।

      आज परमेश्वर कैसे चाहता है कि हम दाऊद की प्रार्थना, “मैं क्या हूँ? और मेरी प्रजा क्या है? कि हम को इस रीति से अपनी इच्छा से तुझे भेंट देने की शक्ति मिले? तुझी से तो सब कुछ मिलता है, और हम ने तेरे हाथ से पाकर तुझे दिया है” (1 इतिहास 29:14) को अपने जीवनों में  लागू करें; यह जानते और मानते हुए कि परमेश्वर ही हमारी सभी आवाश्यकताओं की पूर्ति का स्त्रोत है। - कीला ओकोआ


सब कुछ परमेश्वर का, और परमेश्वर से ही है।

क्योंकि उस की ओर से, और उसी के द्वारा, और उसी के लिये सब कुछ है: उस की महिमा युगानुयुग होती रहे: आमीन। - रोमियों 11:36

बाइबल पाठ: 1 इतिहास 29:14
1 Chronicles 29:14 मैं क्या हूँ? और मेरी प्रजा क्या है? कि हम को इस रीति से अपनी इच्छा से तुझे भेंट देने की शक्ति मिले? तुझी से तो सब कुछ मिलता है, और हम ने तेरे हाथ से पाकर तुझे दिया है।
1 Chronicles 29:15 तेरी दृष्टि में हम तो अपने सब पुरखाओं के समान पराए और परदेशी हैं; पृथ्वी पर हमारे दिन छाया के समान बीते जाते हैं, और हमारा कुछ ठिकाना नहीं।
1 Chronicles 29:16 हे हमारे परमेश्वर यहोवा! वह जो बड़ा संचय हम ने तेरे पवित्र नाम का एक भवन बनाने के लिये किया है, वह तेरे ही हाथ से हमे मिला था, और सब तेरा ही है।
1 Chronicles 29:17 और हे मेरे परमेश्वर! मैं जानता हूँ कि तू मन को जांचता है और सिधाई से प्रसन्न रहता है; मैं ने तो यह सब कुछ मन की सिधाई और अपनी इच्छा से दिया है; और अब मैं ने आनन्द से देखा है, कि तेरी प्रजा के लोग जो यहां उपस्थित हैं, वह अपनी इच्छा से तेरे लिये भेंट देते हैं।
1 Chronicles 29:18 हे यहोवा! हे हमारे पुरखा इब्राहीम, इसहाक और इस्राएल के परमेश्वर! अपनी प्रजा के मन के विचारों में यह बात बनाए रख और उनके मन अपनी ओर लगाए रख।
1 Chronicles 29:19 और मेरे पुत्र सुलैमान का मन ऐसा खरा कर दे कि वह तेरी आज्ञाओं चितौनियों और विधियों को मानता रहे और यह सब कुछ करे, और उस भवन को बनाए, जिसकी तैयारी मैं ने की है।


एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 3-5
  • 2 कुरिन्थियों 1



शुक्रवार, 7 सितंबर 2018

संभव



      जब सोशल मीडिया पर उसके मित्र बिना विचारे अपमानजनक बातें कहते हैं, तब शार्लेट नम्र किन्तु दृढ़ असहमति के साथ उन्हें उत्तर देती है। वह सबकी गरिमा की इज्ज़त करती है, और उसके शब्द सदा ही सकारात्मक होते हैं। कुछ वर्ष पहले वह फेसबुक पर एक ऐसे पुरुष की मित्र बनी जिसे मसीहियों के प्रति बहुत रोष था। उसने शार्लेट की दुर्लभ ईमानदारी और नम्रता की सराहना की। समय के साथ उसका रोष घटता चला गया। तभी शार्लेट चोटिल हो जाने के कारण घर के बाहर जा पाने में असमर्थ हो गई, और अपनी असमर्थता पर झल्लाने लगी। लगभग इसी समय में फेसबुक वाले उसके उस मित्र का भी देहांत हो गया। उस मित्र की बहन के पास से शार्लेट के पास यह सन्देश आया “[आपकी गवाही के कारण] मैं जानती हूँ कि वह अब उसके प्रति परमेश्वर के संपूर्ण और अविरल प्रेम का आनन्द ले रहा है।”

      जिस सप्ताह में उन्हें पकड़वाया तथा मारा जाना था, बैतनिय्याह की मरियम ने मसीह यीशु पर बहुमूल्य इत्र उंडेला (यूहन्ना 12:3; मरकुस 14:3)। जो लोग उस समय वहाँ उपस्थित थे, उनमें से कुछ विस्मित हो गए, परन्तु प्रभु यीशु ने उसकी सराहना की, और कहा, “उसे छोड़ दो; उसे क्यों सताते हो? उसने तो मेरे साथ भलाई की है। जो कुछ वह कर सकी, उसने किया; उसने मेरे गाड़े जाने की तैयारी में पहिले से मेरी देह पर इत्र मला है” (मरकुस 14:6, 8)।

      मसीह यीशु की इस बात के लिए सराहना कि उस स्त्री से जो संभव हुआ उसने किया, दबाव हटा देने के लिए पर्याप्त हैं। हमारा सँसार भी पाप और कष्ट से टूटे और दुखित लोगों से भरा पड़ा है। परन्तु जो हम नहीं कर सकते हैं, हमें उस बारे में चिन्तित होने की आवश्यकता नहीं है। मरियम ने, शार्लेट ने, वह किया जो उनके लिए संभव था; हम भी ऐसा ही कर सकते हैं। हमारे उसे यथासंभव प्रयास का परिणाम, हमारे प्रभु परमेश्वर के हाथों में है। - टिम गुस्ताफ्सन


अपने कर्तव्य का पूरी निष्ठा से पालन करें; शेष प्रभु के हाथों में छोड़ दें। - हेनरी वाडस्वर्थ लौन्गफेलो

जिसने मुझे भेजा है; हमें उसके काम दिन ही दिन में करना अवश्य है: वह रात आनेवाली है जिस में कोई काम नहीं कर सकता। - यूहन्ना 9:4

बाइबल पाठ: मरकुस 14:3-9
Mark 14:3 जब वह बैतनिय्याह में शमौन कोढ़ी के घर भोजन करने बैठा हुआ था तब एक स्त्री संगमरमर के पात्र में जटामांसी का बहुमूल्य शुद्ध इत्र ले कर आई; और पात्र तोड़ कर इत्र को उसके सिर पर उण्‍डेला।
Mark 14:4 परन्तु कोई कोई अपने मन में रिसयाकर कहने लगे, इस इत्र को क्यों सत्यनाश किया गया?
Mark 14:5 क्योंकि यह इत्र तो तीन सौ दीनार से अधिक मूल्य में बेचकर कंगालों को बांटा जा सकता था, ओर वे उसको झिड़कने लगे।
Mark 14:6 यीशु ने कहा; उसे छोड़ दो; उसे क्यों सताते हो? उसने तो मेरे साथ भलाई की है।
Mark 14:7 कंगाल तुम्हारे साथ सदा रहते हैं: और तुम जब चाहो तब उन से भलाई कर सकते हो; पर मैं तुम्हारे साथ सदा न रहूंगा।
Mark 14:8 जो कुछ वह कर सकी, उसने किया; उसने मेरे गाड़े जाने की तैयारी में पहिले से मेरी देह पर इत्र मला है।
Mark 14:9 मैं तुम से सच कहता हूं, कि सारे जगत में जहां कहीं सुसमाचार प्रचार किया जाएगा, वहां उसके इस काम की चर्चा भी उसके स्मरण में की जाएगी।


एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 1-2
  • 1 कुरिन्थियों 16



गुरुवार, 6 सितंबर 2018

अनुग्रह



      स्कूल से अपना परिक्षा परिणाम ला कर मुझे दिखाते समय मेरे बेटे की आँखें उत्साह से चमक रही थीं। परिक्षा गणित की थी और उसने 100 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे, तथा उसे इस उपलब्धि के लिए एक बड़ा सा लाल सितारा भी परीक्षाफल पर लगाकर दिया गया था। उसने अपनी इस परीक्षा के विषय बताते हुए कहा कि उसे अभी तीन प्रश्नों का उत्तर देना शेष था, जब समय समाप्त हो गया। मैंने विस्मित होकर उससे पूछा, तो फिर उसे पूरे अंक कैसे मिल गए? उसने कहा कि “शिक्षिका ने मुझ पर अनुग्रह किया; उसने मुझे प्रश्न पूरे करने दिए यद्यपि मेरा समय समाप्त हो गया था।”
      मैंने इस अवसर का लाभ उठाकर अपने बेटे के साथ परमेश्वर के हम मनुष्यों के प्रति किए गए अनुग्रह के बारे में चर्चा की। मैंने उसे ध्यान करवाया कि परमेश्वर ने प्रभु यीशु मसीह में होकर हमें उससे कहीं बढ़कर दिया है, जिसके हम योग्य हैं। वास्तव में हम अपने पापों के कारण, परमेश्वर की पवित्रता और न्याय के समक्ष, दण्ड के, मृत्यु के, योग्य थे (रोमियों 6:23)। परन्तु, “परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा” (5:8)। हम मनुष्य तो सर्वथा अयोग्य थे, परन्तु प्रभु यीशु ने, जो पवित्र और निष्पाप था, सभी मनुष्यों के सभी पापों को अपने ऊपर ले लिया और सबके बदले में उन पापों के दण्ड, उस मृत्यु को सह लिया। इसलिए अब जो भी उसके इस बलिदान को स्वीकार करता है, प्रभु से अपने पापों की क्षमा माँगता है, अपना जीवन स्वेच्छा से प्रभु को समर्पित करता है, उसे पापों के दण्ड से क्षमा मिल जाती है, उसे अब उन पापों के दण्ड को सहने की आवश्यकता नहीं रह जाती है। इस कारण अब प्रभु यीशु मसीह के विश्वासियों के लिए, प्रभु के साथ स्वर्ग में अनन्त जीवन की आशीष रखी है।

      अनन्त जीवन परमेश्वर से मिलने वाला उपहार है, जिसे हम किसी रीति से अपने कर्मों द्वारा कमा नहीं सकते हैं, बस हमारे प्रति उसके प्रेम और अनुग्रह के अन्तर्गत उससे प्राप्त कर सकते हैं। हम, प्रभु यीशु मसीह पर लाए गए विश्वास के द्वारा, परमेश्वर के अनुग्रह के अन्तर्गत, पापों के मृत्यु दण्ड में जाने से बचाए जाते हैं। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट

अनुग्रह और दया कमाई नहीं जातीं, परमेश्वर से उपहार स्वरूप प्राप्त की जाती हैं।

क्योंकि पाप की मजदूरी तो मृत्यु है, परन्तु परमेश्वर का वरदान हमारे प्रभु मसीह यीशु में अनन्त जीवन है। - रोमियों 6:23

बाइबल पाठ: रोमियों 5:6-15
Romans 5:6 क्योंकि जब हम निर्बल ही थे, तो मसीह ठीक समय पर भक्तिहीनों के लिये मरा।
Romans 5:7 किसी धर्मी जन के लिये कोई मरे, यह तो र्दुलभ है, परन्तु क्या जाने किसी भले मनुष्य के लिये कोई मरने का भी साहस करे।
Romans 5:8 परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा।
Romans 5:9 सो जब कि हम, अब उसके लोहू के कारण धर्मी ठहरे, तो उसके द्वारा क्रोध से क्यों न बचेंगे?
Romans 5:10 क्योंकि बैरी होने की दशा में तो उसके पुत्र की मृत्यु के द्वारा हमारा मेल परमेश्वर के साथ हुआ फिर मेल हो जाने पर उसके जीवन के कारण हम उद्धार क्यों न पाएंगे?
Romans 5:11 और केवल यही नहीं, परन्तु हम अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा जिस के द्वारा हमारा मेल हुआ है, परमेश्वर के विषय में घमण्ड भी करते हैं।
Romans 5:12 इसलिये जैसा एक मनुष्य के द्वारा पाप जगत में आया, और पाप के द्वारा मृत्यु आई, और इस रीति से मृत्यु सब मनुष्यों में फैल गई, इसलिये कि सब ने पाप किया।
Romans 5:13 क्योंकि व्यवस्था के दिए जाने तक पाप जगत में तो था, परन्तु जहां व्यवस्था नहीं, वहां पाप गिना नहीं जाता।
Romans 5:14 तौभी आदम से ले कर मूसा तक मृत्यु ने उन लोगों पर भी राज्य किया, जिन्हों ने उस आदम के अपराध के समान जो उस आने वाले का चिन्ह है, पाप न किया।
Romans 5:15 पर जैसा अपराध की दशा है, वैसी अनुग्रह के वरदान की नहीं, क्योंकि जब एक मनुष्य के अपराध से बहुत लोग मरे, तो परमेश्वर का अनुग्रह और उसका जो दान एक मनुष्य के, अर्थात यीशु मसीह के अनुग्रह से हुआ बहुतेरे लागों पर अवश्य ही अधिकाई से हुआ।


एक साल में बाइबल: 
  • भजन 148-150
  • 1 कुरिन्थियों 15:29-58



बुधवार, 5 सितंबर 2018

क्षणिक



      हम एटलांटिक सिटी में सागर के किनारे के मार्ग पर टहल रहे थे कि एक छोटा लड़का दौड़ता हुआ आया और हम पर साबुन के पानी के बुलबुलों की बौछार करता हुआ चला गया। उस कठिन दिन में यह मेरे तथा मेरे पति, कार्ल, के लिए एक हल्का और आनंदायक क्षण था। हम इस शहर में कार्ल की बहन और बहनोई से मिलने आए थे जो दोनों ही अस्वस्थ थे, बहनोई तो अस्पताल में भर्ती था। जब हम उन परिस्थितियों से हटकर बाहर टहलने निकले, तब हम अपने परिवार की आवश्यकताओं तथा परेशानियों को लेकर थोड़ा अभिभूतित थे।

      और तभी वे बुलबुले हम पर आ गए, एक छोटे लडके द्वारा ऐसे ही उड़ा दिए गए बुलबुले – परन्तु मेरे लिए उनका विशेष महत्व था। मुझे साबुन के पानी के बुलबुले उड़ाना बहुत पसन्द है, और मैं अपने दफतर में भी एक बोतल में बुलबुले बनाने का पानी और सामान रखती हूँ; और जब कभी कठिन परिस्थितियों से निकलती हूँ तो अपने आप को हल्का करने के लिए मैं बुलबुले उड़ाती हूँ।

      उस दिन उन बुलबुलों और विशाल एटलांटिक सागर ने मुझे स्मरण करवाया कि मैं किस पर भरोसा कर सकती हूँ: परमेश्वर पर जो सदा मेरे साथ रहता है। वह बहुत सामर्थी है; वह सदा देखभाल करता रहता है; और वह हमारे छोटे से छोटे अनुभव को भी हमें यह स्मरण करवाने के लिए प्रयोग कर सकता है कि हमारे साथ हमारी कठिनाइयों और परिस्थितियों में भी बनी रहने वाली उसकी उपस्थिति अनुग्रह के विशाल सागर के समान है।

      एक ऐसा दिन भी आएगा जब हमारी ये कठिनाइयाँ और परेशानियां, अनन्तकाल की तुलना में उन बुलबुलों के समान क्षणिक और महत्वहीन लगेंगी, क्योंकि परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि , “और हम तो देखी हुई वस्‍तुओं को नहीं परन्तु अनदेखी वस्‍तुओं को देखते रहते हैं, क्योंकि देखी हुई वस्तुएं थोड़े ही दिन की हैं, परन्तु अनदेखी वस्तुएं सदा बनी रहती हैं” (2 कुरिन्थियों 4:18)। - ऐनी सेटास


परीक्षाओं की मरुभूमि में प्रभु यीशु हमें अनुग्रह का सागर उपलब्ध करवाता है।

क्योंकि हम रूप को देखकर नहीं, पर विश्वास से चलते हैं। - 2 कुरिन्थियों 5:7

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 4:7-18
2 Corinthians 4:7 परन्तु हमारे पास यह धन मिट्ठी के बरतनों में रखा है, कि यह असीम सामर्थ हमारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर ही की ओर से ठहरे।
2 Corinthians 4:8 हम चारों ओर से क्‍लेश तो भोगते हैं, पर संकट में नहीं पड़ते; निरूपाय तो हैं, पर निराश नहीं होते।
2 Corinthians 4:9 सताए तो जाते हैं; पर त्यागे नहीं जाते; गिराए तो जाते हैं, पर नाश नहीं होते।
2 Corinthians 4:10 हम यीशु की मृत्यु को अपनी देह में हर समय लिये फिरते हैं; कि यीशु का जीवन भी हमारी देह में प्रगट हो।
2 Corinthians 4:11 क्योंकि हम जीते जी सर्वदा यीशु के कारण मृत्यु के हाथ में सौंपे जाते हैं कि यीशु का जीवन भी हमारे मरनहार शरीर में प्रगट हो।
2 Corinthians 4:12 सो मृत्यु तो हम पर प्रभाव डालती है और जीवन तुम पर।
2 Corinthians 4:13 और इसलिये कि हम में वही विश्वास की आत्मा है, (जिस के विषय मे लिखा है, कि मैं ने विश्वास किया, इसलिये मैं बोला) सो हम भी विश्वास करते हैं, इसी लिये बोलते हैं।
2 Corinthians 4:14 क्योंकि हम जानते हैं, जिसने प्रभु यीशु को जिलाया, वही हमें भी यीशु में भागी जानकर जिलाएगा, और तुम्हारे साथ अपने साम्हने उपस्थित करेगा।
2 Corinthians 4:15 क्योंकि सब वस्तुएं तुम्हारे लिये हैं, ताकि अनुग्रह बहुतों के द्वारा अधिक हो कर परमेश्वर की महिमा के लिये धन्यवाद भी बढ़ाए।
2 Corinthians 4:16 इसलिये हम हियाव नहीं छोड़ते; यद्यपि हमारा बाहरी मनुष्यत्‍व नाश भी होता जाता है, तौभी हमारा भीतरी मनुष्यत्‍व दिन प्रतिदिन नया होता जाता है।
2 Corinthians 4:17 क्योंकि हमारा पल भर का हल्का सा क्‍लेश हमारे लिये बहुत ही महत्‍वपूर्ण और अनन्त महिमा उत्पन्न करता जाता है।
2 Corinthians 4:18 और हम तो देखी हुई वस्‍तुओं को नहीं परन्तु अनदेखी वस्‍तुओं को देखते रहते हैं, क्योंकि देखी हुई वस्तुएं थोड़े ही दिन की हैं, परन्तु अनदेखी वस्तुएं सदा बनी रहती हैं।


एक साल में बाइबल: 
  • भजन 146-147
  • 1 कुरिन्थियों 15:1-28



मंगलवार, 4 सितंबर 2018

आज्ञाकारिता


      मुझे एक भूमिगत पानी की टंकी की आवश्यकता थी, और मुझे यह भी बिलकुल स्पष्ट पता था कि मुझे वह कैसे बनी हुई चाहिए। इसलिए मैंने मिस्त्री को अपनी आवश्यकतानुसार उस टंकी को बनाने के लिए बिलकुल स्पष्ट निर्देश दिए। मैंने जब अगले दिन जाकर देखा कि काम कैसा चल रहा है तो मुझे देख कर क्रोध आया कि मिस्त्री ने मेरे कहे के अनुसार नहीं किया था, उसने योजना को बदल दिया था, इससे वे प्रभाव भी नहीं होने पाते जो मैं उस टंकी के द्वारा चाहता था। मेरे निर्देशों का पालन न करने के लिए जो बहाने वह मुझे सुना रहा था वे उसकी अनाज्ञाकारिता के समान ही खिसियाने वाले थे।

      मैं बैठकर उसे फिर से टंकी को दोबारा बनाते हुए देखने लगा, और मेरी खिसियाहट तथा क्रोध के धीरे-धीरे शान्त होने के साथ ही मुझे अपने दोष का भी बोध होने लगा, कि मैंने भी परमेश्वर की अनाज्ञाकारिता कितनी ही बार की है, और कितनी ही बार अपने जीवन में उसके निर्देशों का पालन न करने के कारण उसके काम को फिर से दोबारा से करना पड़ा है।

      प्राचीन इस्त्राएलियों के समान, जो अकसर परमेश्वर के निर्देशों की आज्ञाकारिता न करने के दोषी रहते थे, हम भी अकसर अपने ही मार्ग पर चलते रहते हैं। किन्तु उसकी आज्ञाकारिता ही परमेश्वर के साथ प्रगाढ़ संबंध बनाने का मार्ग है। जैसा परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखा है, मूसा ने इस्त्राएलियों से कहा था, “इसलिये तुम अपने परमेश्वर यहोवा की आज्ञा के अनुसार करने में चौकसी करना; न तो दाहिने मुड़ना और न बांए। जिस मार्ग में चलने की आज्ञा तुम्हारे परमेश्वर यहोवा ने तुम को दी है उस सारे मार्ग पर चलते रहो, कि तुम जीवित रहो, और तुम्हारा भला हो, और जिस देश के तुम अधिकारी होगे उस में तुम बहुत दिनों के लिये बने रहो” (व्यवस्थाविवरण 5:32-33)। मूसा के सदियों बाद, प्रभु यीशु ने भी अपने शिष्यों से कहा कि वे उसपर भरोसा, और परस्पर प्रेम बनाए रखें।

      हमारे मनों का यह समर्पण और इसके साथ उसके प्रति पूर्ण आज्ञाकारिता ही है जो हमारे लिए भला ही उत्पन्न करती है। हम मसीही विश्वासियों के अन्दर निवास करने वाला परमेश्वर का आत्मा हमारी सहायता करता है कि हम परमेश्वर के आज्ञाकारी बने रहें, और स्मरण रखें कि “क्योंकि परमेश्वर ही है, जिस न अपनी सुइच्‍छा निमित्त तुम्हारे मन में इच्छा और काम, दोनों बातों के करने का प्रभाव डाला है” (फिलिप्पियों 2:13)। - लॉरेंस दरमानी


हम परमेश्वर के जितना निकट चलेंगे, 
उसके मार्गदर्शन को उतनी स्पष्टता से अनुभव करेंगे।

शमूएल ने कहा, क्या यहोवा होमबलियों, और मेलबलियों से उतना प्रसन्न होता है, जितना कि अपनी बात के माने जाने से प्रसन्न होता है? सुन मानना तो बलि चढ़ाने और कान लगाना मेढ़ों की चर्बी से उत्तम है। - 1 शमूएल 15:22

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण 5: 28-33
Deuteronomy 5:28 जब तुम मुझ से ये बातें कह रहे थे तब यहोवा ने तुम्हारी बातें सुनीं; तब उसने मुझ से कहा, कि इन लोगों ने जो जो बातें तुझ से कही हैं मैं ने सुनी हैं; इन्होंने जो कुछ कहा वह ठीक ही कहा।
Deuteronomy 5:29 भला होता कि उनका मन सदैव ऐसा ही बना रहे, कि वे मेरा भय मानते हुए मेरी सब आज्ञाओं पर चलते रहें, जिस से उनकी और उनके वंश की सदैव भलाई होती रहे!
Deuteronomy 5:30 इसलिये तू जा कर उन से कह दे, कि अपने अपने डेरों को लौट जाओ।
Deuteronomy 5:31 परन्तु तू यहीं मेरे पास खड़ा रह, और मैं वे सारी आज्ञाएं और विधियां और नियम जिन्हें तुझे उन को सिखाना होगा तुझ से कहूंगा, जिस से वे उन्हें उस देश में जिसका अधिकार मैं उन्हें देने पर हूं मानें।
Deuteronomy 5:32 इसलिये तुम अपने परमेश्वर यहोवा की आज्ञा के अनुसार करने में चौकसी करना; न तो दाहिने मुड़ना और न बांए।
Deuteronomy 5:33 जिस मार्ग में चलने की आज्ञा तुम्हारे परमेश्वर यहोवा ने तुम को दी है उस सारे मार्ग पर चलते रहो, कि तुम जीवित रहो, और तुम्हारा भला हो, और जिस देश के तुम अधिकारी होगे उस में तुम बहुत दिनों के लिये बने रहो।


एक साल में बाइबल: 
  • भजन 143-145
  • 1 कुरिन्थियों 14:21-40


सोमवार, 3 सितंबर 2018

नकल



      बच्चों को सिखा रहे पास्टर ने  उसके चारों ओर एकत्रित हुए बच्चों से कहा के वे एक खेल खेलेंगे जिसका नाम है “नकल”; पास्टर ने बच्चों को समझाया, “मैं कोई नाम लूंगा, और तुम्हें उस नाम वाली वस्तु के अनुसार उसकी नकल करके दिखानी होगी। क्या तुम तैयार हो?” पास्टर ने पहला नाम लिया, मुर्गी! बच्चों ने अपनी बाहों से पंख फड़फड़ाने, मुँह से कुड़कुड़ाने की नकल उतारी। फिर आया हाथी, उसके बाद फुटबॉल का खिलाड़ी, और फिर नर्तकी । अन्त में पास्टर ने नाम लिया यीशु ; अधिकांश बच्चे सकपका गए, फिर एक छः वर्षीय बच्चे ने खड़े होकर, चहरे पर बड़ी सी मुस्कराहट के साथ, स्वागत में अपनी बाहें फैला दीं। सभी लोगों ने ताली बजाकर उसकी प्रशंसा की।

      हम कितनी सरलता से यह भूल जाते हैं कि हमारी बुलाहट प्रतिदिन के जीवन में मसीह यीशु के समान बनने की है। “इसलिये प्रिय, बालकों की नाईं परमेश्वर के सदृश बनो। और प्रेम में चलो; जैसे मसीह ने भी तुम से प्रेम किया; और हमारे लिये अपने आप को सुखदायक सुगन्‍ध के लिये परमेश्वर के आगे भेंट कर के बलिदान कर दिया” (इफिसियों 5:1-2)।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने थिस्सलूनिकिया के मसीही विश्वासियों की सराहना की, क्योंकि कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने अपने मसीही विश्वास का व्यावाहारिक प्रदर्शन किया था। पौलुस ने लिखा, “और तुम बड़े क्‍लेश में पवित्र आत्मा के आनन्द के साथ वचन को मान कर हमारी और प्रभु की सी चाल चलने लगे। यहां तक कि मकिदुनिया और अखया के सब विश्वासियों के लिये तुम आदर्श बने” (1 थिस्सलुनीकियों 1:6-7)।

      यह हमारे अन्दर प्रभु यीशु का जीवन ही है जो हमें प्रोत्साहित एवँ योग्य करता है कि हम इस सँसार में प्रभु के समान चलें, और सारे सँसार के समस्त लोगों के लिए परमेश्वर के प्रेम के सुसमाचार को बताएँ, सबके स्वागत के लिए अपनी बाहों को खुला रखें। - डेविड मैक्कैस्लैंड


प्रभु यीशु की बाहें स्वागत में सदा खुली रहती हैं।

प्रभु यीशु ने कहा: “क्योंकि मैं ने तुम्हें नमूना दिखा दिया है, कि जैसा मैं ने तुम्हारे साथ किया है, तुम भी वैसा ही किया करो।” - यूहन्ना 13:15

बाइबल पाठ: 1 थिस्सलुनीकियों 1:1-10
1 Thessalonians 1:1 पौलुस और सिलवानुस और तीमुथियुस की ओर से थिस्‍सलुनिकियों की कलीसिया के नाम जो परमेश्वर पिता और प्रभु यीशु मसीह में है। अनुग्रह और शान्‍ति तुम्हें मिलती रहे।
1 Thessalonians 1:2 हम अपनी प्रार्थनाओं में तुम्हें स्मरण करते और सदा तुम सब के विषय में परमेश्वर का धन्यवाद करते हैं।
1 Thessalonians 1:3 और अपने परमेश्वर और पिता के साम्हने तुम्हारे विश्वास के काम, और प्रेम का परिश्रम, और हमारे प्रभु यीशु मसीह में आशा की धीरता को लगातार स्मरण करते हैं।
1 Thessalonians 1:4 और हे भाइयो, परमेश्वर के प्रिय लोगों हम जानतें हैं, कि तुम चुने हुए हो।
1 Thessalonians 1:5 क्योंकि हमारा सुसमाचार तुम्हारे पास न केवल वचन मात्र ही में वरन सामर्थ और पवित्र आत्मा, और बड़े निश्‍चय के साथ पहुंचा है; जैसा तुम जानते हो, कि हम तुम्हारे लिये तुम में कैसे बन गए थे।
1 Thessalonians 1:6 और तुम बड़े क्‍लेश में पवित्र आत्मा के आनन्द के साथ वचन को मान कर हमारी और प्रभु की सी चाल चलने लगे।
1 Thessalonians 1:7 यहां तक कि मकिदुनिया और अखया के सब विश्वासियों के लिये तुम आदर्श बने।
1 Thessalonians 1:8 क्योंकि तुम्हारे यहां से न केवल मकिदुनिया और अखया में प्रभु का वचन सुनाया गया, पर तुम्हारे विश्वास की जो परमेश्वर पर है, हर जगह ऐसी चर्चा फैल गई है, कि हमें कहने की आवश्यकता ही नहीं।
1 Thessalonians 1:9 क्योंकि वे आप ही हमारे विषय में बताते हैं कि तुम्हारे पास हमारा आना कैसा हुआ; और तुम कैसे मूरतों से परमेश्वर की ओर फिरे ताकि जीवते और सच्चे परमेश्वर की सेवा करो।
1 Thessalonians 1:10 और उसके पुत्र के स्वर्ग पर से आने की बाट जोहते रहो जिसे उसने मरे हुओं में से जिलाया, अर्थात यीशु की, जो हमें आने वाले प्रकोप से बचाता है।


एक साल में बाइबल: 
  • भजन 140-142
  • 1 कुरिन्थियों 14:1-20