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मंगलवार, 26 मार्च 2019

जाँचना



      दक्षिणपूर्व एशिया के एक क्षेत्र में उत्तरी अमेरिका का एक शिक्षक अतिथि बनकर गया, जहाँ उस अतिथि शिक्षक ने एक महत्वपूर्ण सबक सीखा। अमेरिका से आए उस शिक्षक ने अपनी कक्षा को बहु-विकल्प प्रश्न-पत्र दिया, और उसे देख कर अचम्भा हुआ कि बहुत से विद्यार्थियों ने कई प्रशों को अनुत्तरित छोड़ रखा था। प्रश्न-पत्र को जाँचने के पश्चात विद्यार्थियों को वापस करते समय उसने उन्हें सुझाव दिया कि अगली बार अनुत्तरित छोड़ने की बजाए उन्हें अनुमान लगा कर उत्तर पर चिन्ह लगा देना चाहिए। यह सुनकर अचंभित होकर एक विद्यार्थी ने पूछा, “ऐसे में यदि गलती से मेरे अनुमान द्वारा कोई उत्तर सही हो जाए तो इससे क्या मैं यह नहीं जताऊँगा कि मुझे उत्तर आता है, जबकि वास्तव में मुझे उत्तर आता ही नहीं है?” शिक्षक और विद्यार्थी के दृष्टिकोण और कार्यविधि बहुत फर्क थे।

      नए नियम के दिनों में, जब यहूदी और गैर-यहूदी लोग परिवर्तित होकर मसीही हो रहे थे, तो उनके व्यक्तिगत दृष्टिकोण भी बहुत भिन्न थे। कुछ ही समय में उनमें मतभेद होने लग गए, भिन्न बातों पर, जैसे कि, आराधना का कौन सा दिन होना चाहिए, या, मसीही विश्वासी को क्या खाने या पीने की स्वतंत्रता है, आदि। पौलुस प्रेरित ने आग्रह किया कि वे एक महत्वपूर्ण बात का ध्यान रखें: कोई भी किसी अन्य के हृदय को जानने या जाँचने की स्थिति में नहीं है।

      अन्य मसीही विश्वासियों के साथ सामंजस्य बनाए रखने के लिए, परमेश्वर चाहता है कि हम इस बात का ध्यान रखें कि हम सभी अपने-अपने जीवन और कार्यों के लिए व्यक्तिगत रीति से उसके प्रति उत्तरदायी हैं; और केवल वह ही है जो हमारे हृदयों के भाव को जाँचता है (रोमियों 14:4-7)। - मार्ट डीहान

 औरों को जाँचने में धीमा किन्तु स्वयँ को जाँचने में त्वरित रहें।

हे मेरे प्रिय भाइयो, यह बात तुम जानते हो: इसलिये हर एक मनुष्य सुनने के लिये तत्‍पर और बोलने में धीरा और क्रोध में धीमा हो। - याकूब 1:19



बाइबल पाठ: रोमियों 14:1-12
Romans 14:1 जो विश्वास में निर्बल है, उसे अपनी संगति में ले लो; परन्तु उसकी शंकाओं पर विवाद करने के लिये नहीं।
Romans 14:2 क्योंकि एक को विश्वास है, कि सब कुछ खाना उचित है, परन्तु जो विश्वास में निर्बल है, वह साग पात ही खाता है।
Romans 14:3 और खानेवाला न-खाने वाले को तुच्छ न जाने, और न-खानेवाला खाने वाले पर दोष न लगाए; क्योंकि परमेश्वर ने उसे ग्रहण किया है।
Romans 14:4 तू कौन है जो दूसरे के सेवक पर दोष लगाता है? उसका स्थिर रहना या गिर जाना उसके स्वामी ही से सम्बन्ध रखता है, वरन वह स्थिर ही कर दिया जाएगा; क्योंकि प्रभु उसे स्थिर रख सकता है।
Romans 14:5 कोई तो एक दिन को दूसरे से बढ़कर जानता है, और कोई सब दिन एक सा जानता है: हर एक अपने ही मन में निश्चय कर ले।
Romans 14:6 जो किसी दिन को मानता है, वह प्रभु के लिये मानता है: जो खाता है, वह प्रभु के लिये खाता है, क्योंकि वह परमेश्वर का धन्यवाद करता है, और जो नहीं खाता, वह प्रभु के लिये नहीं खाता और परमेश्वर का धन्यवाद करता है।
Romans 14:7 क्योंकि हम में से न तो कोई अपने लिये जीता है, और न कोई अपने लिये मरता है।
Romans 14:8 क्योंकि यदि हम जीवित हैं, तो प्रभु के लिये जीवित हैं; और यदि मरते हैं, तो प्रभु के लिये मरते हैं; सो हम जीएं या मरें, हम प्रभु ही के हैं।
Romans 14:9 क्योंकि मसीह इसी लिये मरा और जी भी उठा कि वह मरे हुओं और जीवतों, दोनों का प्रभु हो।
Romans 14:10 तू अपने भाई पर क्यों दोष लगाता है? या तू फिर क्यों अपने भाई को तुच्छ जानता है? हम सब के सब परमेश्वर के न्याय सिंहासन के साम्हने खड़े होंगे।
Romans 14:11 क्योंकि लिखा है, कि प्रभु कहता है, मेरे जीवन की सौगन्ध कि हर एक घुटना मेरे साम्हने टिकेगा, और हर एक जीभ परमेश्वर को अंगीकार करेगी।
Romans 14:12 सो हम में से हर एक परमेश्वर को अपना अपना लेखा देगा।

एक साल में बाइबल:  
  • यहोशू 22-24
  • लूका 3



सोमवार, 25 मार्च 2019

कार्य



      
    परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि राजा दाऊद ने मंदिर को बनाने की पूरी तैयारी की, उसके लिए आवश्यक सारा सामान जुटाया (1 इतिहास 28:11-19) परन्तु यरूशलेम में जो पहला मंदिर बनाया गया वह दाऊद द्वारा नहीं वरन उसके पुत्र सुलेमान द्वारा हुआ, और वह सुलेमान का मंदिर जाना गया। क्योंकि परमेश्वर ने दाऊद से कहा, “मेरे निवास के लिये तू घर बनवाने न पाएगा” (1 इतिहास 17:4); परमेश्वर ने दाऊद को नहीं वरन सुलेमान को मंदिर बनवाने के लिए चुना था।

      परमेश्वर द्वारा उसे मंदिर बनवाने से रोके जाने के प्रति दाऊद की प्रतिक्रिया अनुकरणीय थी। उसने इस बात पर ध्यान केंद्रित करने की बजाए कि वह क्या कुछ नहीं कर सका, उसने अपना ध्यान इस बात पर अलगाया कि परमेश्वर क्या कुछ कर सकता है (पद 16-25)। दाऊद ने एक धन्यवादी मन बनाए रखा, और जो कुछ और भी वह कर सकता था, वह सब किया। उसने इस कार्य में सुलेमान की सहायता के लिए योग्य लोगों को भी खड़ा किया (देखें 1 इतिहास 22)।

      बाइबल टीकाकार जे. जी. मैक्कोन्विल ने इस संदर्भ में लिखा, “बहुधा यह हो सकता है कि जो कार्य हम मसीही सेवकाई में करना चाहते हैं, उस कार्य के लिए हम पूर्णतः योग्य न हों, और वह कार्य परमेश्वर द्वारा हमारे लिए निर्धारित कार्य न हो। हो सकता है, जैसे दाऊद के साथ हुआ, हमारी सेवकाई केवल तैयारी करने की हो, जिसका आगे चल कर प्रयोग किसी अन्य अति भव्य योजना की पूर्ति के लिए किया जाए।”

      दाऊद की इच्छा अपनी नहीं, परमेश्वर की महिमा करना था। उसने परमेश्वर के मंदिर के निर्माण के लिए विश्वासयोग्यता के साथ वह सब कुछ किया जो कुछ वह कर सकता था। उसने अपने बाद आकर उस कार्य को पूरा करने वाले के लिए एक अच्छी तैयारी की, जिससे उस कार्य करने वाले को कोई कमी न रहे।

      इसी प्रकार से आज हम भी उन कार्यों को स्वीकार करें जो परमेश्वर ने हमारे करने के लिए रखें हैं, और उन्हें पूर्ण विश्वासयोग्यता के साथ करके अपनी सेवकाई को परमेश्वर के प्रति धन्यवादी मन के साथ पूरा करें; यह स्मरण रखते हुए कि हमारा परमेश्वर कुछ बहुत ही भव्य कार्य करने जा रहा है। - पो फैंग चिया


हो सकता है कि परमेश्वर की योजना के उद्देश्य गुप्त हों, किन्तु उसकी योजनाए निरुद्देश्य नहीं हैं।

जो काम तुझे मिले उसे अपनी शक्ति भर करना, क्योंकि अधोलोक में जहां तू जाने वाला है, न काम न युक्ति न ज्ञान और न बुद्धि है। - सभोपदेशक 9:10

बाइबल पाठ: 1 इतिहास 17:1-4, 16-25
 1 Chronicles 17:1 जब दाऊद अपने भवन में रहने लगा, तब दाऊद ने नातान नबी से कहा, देख, मैं तो देवदारु के बने हुए घर में रहता हूँ, परन्तु यहोवा की वाचा का सन्दूक तम्बू में रहता है।
1 Chronicles 17:2 नातान ने दाऊद से कहा, जो कुछ तेरे मन में हो उसे कर, क्योंकि परमेश्वर तेरे संग है।
1 Chronicles 17:3 उसी दिन रात को परमेश्वर का यह वचन नातान के पास पहुंचा, जा कर मेरे दास दाऊद से कह,
1 Chronicles 17:4 यहोवा यों कहता है, कि मेरे निवास के लिये तू घर बनवाने न पाएगा।
1 Chronicles 17:16 तब दाऊद राजा भीतर जा कर यहोवा के सम्मुख बैठा, और कहने लगा, हे यहोवा परमेश्वर! मैं क्या हूँ? और मेरा घराना क्या है? कि तू ने मुझे यहां तक पहुंचाया है?
1 Chronicles 17:17 और हे परमेश्वर! यह तेरी दृष्टि में छोटी सी बात हुई, क्योंकि तू ने अपने दास के घराने के विषय भविष्य के बहुत दिनों तक की चर्चा की है, और हे यहोवा परमेश्वर! तू ने मुझे ऊंचे पद का मनुष्य सा जाना है।
1 Chronicles 17:18 जो महिमा तेरे दास पर दिखाई गई है, उसके विषय दाऊद तुझ से और क्या कह सकता है? तू तो अपने दास को जानता है।
1 Chronicles 17:19 हे यहोवा! तू ने अपने दास के निमित्त और अपने मन के अनुसार यह बड़ा काम किया है, कि तेरा दास उसको जान ले।
1 Chronicles 17:20 हे यहोवा! जो कुछ हम ने अपने कानों से सुना है, उसके अनुसार तेरे तुल्य कोई नहीं, और न तुझे छोड़ और कोई परमेश्वर है।
1 Chronicles 17:21 फिर तेरी प्रजा इस्राएल के भी तुल्य कौन है? वह तो पृथ्वी भर में एक ही जाति है, उसे परमेश्वर ने जा कर अपनी निज प्रजा करने को छुड़ाया, इसलिये कि तू बड़े और डरावने काम कर के अपना नाम करे, और अपनी प्रजा के साम्हने से जो तू ने मिस्र से छुड़ा ली थी, जाति जाति के लोगों को निकाल दे।
1 Chronicles 17:22 क्योंकि तू ने अपनी प्रजा इस्राएल को अपनी सदा की प्रजा होने के लिये ठहराया, और हे यहोवा! तू आप उसका परमेश्वर ठहरा।
1 Chronicles 17:23 इसलिये, अब हे यहोवा, तू ने जो वचन अपने दास के और उसके घराने के विषय दिया है, वह सदैव अटल रहे, और अपने वचन के अनुसार ही कर।
1 Chronicles 17:24 और तेरा नाम सदैव अटल रहे, और यह कह कर तेरी बड़ाई सदा की जाए, कि सेनाओं का यहोवा इस्राएल का परमेश्वर है, वरन वह इस्राएल ही के लिये परमेश्वर है, और तेरा दास दाऊद का घराना तेरे साम्हने स्थिर रहे।
1 Chronicles 17:25 क्योंकि हे मेरे परमेश्वर, तू ने यह कह कर अपने दास पर प्रगट किया है कि मैं तेरा घर बनाए रखूंगा, इस कारण तेरे दास को तेरे सम्मुख प्रार्थना करने का हियाव हुआ है।

एक साल में बाइबल:  
  • यहोशू 19-21
  • लूका 2:25-52



रविवार, 24 मार्च 2019

चेहरा



      मेरा चार वर्षीय पुत्र बहुत बातूनी है और सदा प्रश्नों से भरा रहता है। मुझे उससे बातें करना अच्छा लगता है, परन्तु उसमें एक आपत्तिजनक आदत आती जा रही है – वह अपनी पीठ मेरी ओर करके भी मुझ से बोलता रहता है, जिससे मुझे अकसर उससे कहना पड़ता है, “मुझे तुम्हारी बात सुनाई नहीं दे रही है, कृपया मेरी ओर मुँह करके बोलो।”

      कभी-कभी मुझे लगता है कि परमेश्वर भी हम से यही कहना चाहता है – इसलिए नहीं कि उसे हमारी बात सुनाई नहीं देती है, परन्तु हमारी प्रवृत्ति हो सकती है कि उसकी ओर ध्यान किए बिना ही हम उससे कुछ-कुछ कहते चले जाएँ। हम उससे प्रार्थनाएं तो करते हैं, किन्तु हम अपने ही प्रश्नों और अपने ही बारे में सोचने में उलझे हुए रहते हैं, और उसके चरित्र की जिससे हम प्रार्थना कर रहे हैं बिलकुल अनदेखी कर देते हैं। मेरे पुत्र के समान हम प्रश्न तो पूछते हैं, किन्तु जिससे हम बात कर रहे हैं, उसकी ओर ध्यान नहीं लगाते हैं।

      हमारी अनेकों चिंताओं का समाधान हमारे यह स्मरण रखने से ही हो जाता है कि परमेश्वर कौन है और उसने हमारे लिए क्या कुछ किया है। केवल उसपर और उसके प्रेमी, क्षमाशील, अनुग्रहकारी इत्यादि होने, तथा समस्त सृष्टि पर सार्वभौमिक प्रभुत्व रखने आदि गुणों पर पुनः अपना ध्यान केंद्रित करने के द्वारा हम शान्ति और सांत्वना पा सकते हैं।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार ने कहा कि हमें परमेश्वर के चहरे को निरंतर निहारते रहना और उसके कार्यों का बखान करते रहना चाहिए (भजन 105:4-5)। जब दाऊद ने आराधना और प्रार्थना के लिए अगुवाई करने वालों को नियुक्त किया, तो उसने लोगों को प्रोत्साहित किया कि वे परमेश्वर के चरित्र और गुणों का बखान करें और बीते समय में उसके विश्वासयोग्य होने की बातों को अपनी संतानों को सुनाएं (1 इतिहास 16:8-27)।

      जब हम अपनी दृष्टि परमेश्वर के सुन्दर और मनोहर चेहरे की ओर लगाते हैं, तो अनुत्तरित प्रश्नों के मध्य भी हम उससे हमें संभाले रखने वाली सामर्थ्य और शान्ति को पाते हैं। - एमी पीटर्सन


परमेश्वर के चेहरे को निहारने से हम विश्वास में बलवन्त बनते हैं।

यहोवा और उसकी सामर्थ्य को खोजो, उसके दर्शन के लगातार खोजी बने रहो! उसके किए हुए आश्चर्यकर्म स्मरण करो, उसके चमत्कार और निर्णय स्मरण करो! – भजन 105:4

बाइबल पाठ: 1 इतिहास 16:8-27
1 Chronicles 16:8 यहोवा का धन्यवाद करो, उस से प्रार्थना करो; देश देश में उसके कामों का प्रचार करो।
1 Chronicles 16:9 उसका गीत गाओ, उसका भजन करो, उसके सब आश्चर्य-कर्मों का ध्यान करो।
1 Chronicles 16:10 उसके पवित्र नाम पर घमंड करो; यहोवा के खोजियों का हृदय आनन्दित हो।
1 Chronicles 16:11 यहोवा और उसकी सामर्थ्य की खोज करो; उसके दर्शन के लिये लगातार खोज करो।
1 Chronicles 16:12 उसके किए हुए आश्चर्यकर्म, उसके चमत्कार और न्यायवचन स्मरण करो।
1 Chronicles 16:13 हे उसके दास इस्राएल के वंश, हे याकूब की सन्तान तुम जो उसके चुने हुए हो!
1 Chronicles 16:14 वही हमारा परमेश्वर यहोवा है, उसके न्याय के काम पृथ्वी भर में होते हैं।
1 Chronicles 16:15 उसकी वाचा को सदा स्मरण रखो, यह वही वचन है जो उसने हज़ार पीढिय़ों के  लिये ठहरा दिया।
1 Chronicles 16:16 वह वाचा उसने इब्राहीम के साथ बान्धी, उौर उसी के विषय उसने इसहाक से शपथ खाई,
1 Chronicles 16:17 और उसी को उसने याकूब के लिये विधि कर के और इस्राएल के लिये सदा की वाचा बान्ध कर यह कह कर दृढ़ किया, कि
1 Chronicles 16:18 मैं कनान देश तुझी को दूंगा, वह बांट में तुम्हारा निज भाग होगा।
1 Chronicles 16:19 उस समय तो तुम गिनती में थोड़े थे, वरन बहुत ही थोड़े और उस देश में परदेशी थे।
1 Chronicles 16:20 और वे एक जाति से दूसरी जाति में, और एक राज्य से दूसरे में फिरते तो रहे,
1 Chronicles 16:21 परन्तु उसने किसी मनुष्य को उन पर अन्धेर करने न दिया; और वह राजाओं को उनके निमित्त यह धमकी देता था, कि
1 Chronicles 16:22 मेरे अभिषिक्तों को मत छुओ, और न मेरे नबियों की हानि करो।
1 Chronicles 16:23 हे समस्त पृथ्वी के लोगो यहोवा का गीत गाओ। प्रतिदिन उसके किए हुए उद्धार का शुभ समाचार सुनाते रहो।
1 Chronicles 16:24 अन्यजातियों में उसकी महिमा का, और देश देश के लोगों में उसके आश्चर्य-कर्मों का वर्णन करो।
1 Chronicles 16:25 क्योंकि यहोवा महान और स्तुति के अति योग्य है, वह तो सब देवताओं से अधिक भययोग्य है।
1 Chronicles 16:26 क्योंकि देश देश के सब देवता मूतिर्यां ही हैं; परन्तु यहोवा ही ने स्वर्ग को बनाया है।
1 Chronicles 16:27 उसके चारों ओर वैभव और ऐश्वर्य है; उसके स्थान में सामर्थ्य और आनन्द है।

एक साल में बाइबल:  
  • यहोशू 16-18
  • लूका 2:1-24



शनिवार, 23 मार्च 2019

शान्ति



      मेरी सहेली ने मुझे उसकी चार दिन की बच्ची को गोदी ले लेने का सैभाग्य प्रदान किया। किन्तु उस बच्ची को गोदी में उठा लेने के कुछ ही समय बाद वह बच्ची बेचैन होने लगी। मैंने उसे अपने से और चिपटा लिया, मेरा गाल उसके सर को छू रहा था, और मैं उसे हलके से हिलाते हुए गुनगुनाने लगी जिससे वह शान्त हो जाए किन्तु ऐसा नहीं हुआ। अपने मातृत्व के डेढ़ दशक के अनुभव का संपूर्ण प्रयोग करने के बावजूद मैं उस बच्ची को शान्त नहीं कर पाई, वह और अधिक बेचैन होती चली गई, जब तक कि मैंने उसे वापस उसकी माँ की गोदी में नहीं दे दिया। मेरे ऐसा करते ही वह तुरंत शान्त हो गई, उसका रोना बन्द हो गया, उसका शरीर ढीला पड़ गया, उसने पहचान लिया कि वह फिर से उसके भरोसेमंद सुरक्षा के स्थान में लौट आई है। मेरी सहेली को भी पता था कि उसे अपनी बच्ची को कैसे पकड़ना और सहलाना है जिससे उसकी बेचैनी दूर हो सके।

      परमेश्वर भी अपने बच्चों की देखभाल एक माँ के समान करता है: कोमलता, विश्वासयोग्यता, और शान्ति प्रदान करने में सदा प्रयासरत रहने के साथ। यदि हम थकित या चिन्तित होते हैं तो वह हमें प्रेम के साथ अपनी बाहों में उठाकर हमें अपनी शान्ति और सुरक्षा का एहसास करवाता है। वह हमें बहुत निकटता से जानता और समझता है क्योंकि वह हमारा सृष्टिकर्ता तथा स्वर्गीय पिता है। उसके हम से वायदा है: “जिसका मन तुझ में धीरज धरे हुए हैं, उसकी तू पूर्ण शान्ति के साथ रक्षा करता है, क्योंकि वह तुझ पर भरोसा रखता है” (यशायाह 26:3)।

      जब इस सँसार के बोझ और परेशानियां हमें अभिभूतित करते हैं, तब हम इस बात में सांत्वना और शान्ति पा सकते हैं कि हमारा स्वर्गीय पिता हमारी रक्षा करता है,हमारे लिए संघर्ष करता है, और प्रेमी पिता के समान हमें संभालता है। - कर्स्टन होम्बर्ग


परमेश्वर की शान्ति हमें पूर्ण आराम देती है।

मैं, मैं ही तेरा शान्तिदाता हूं; तू कौन है जो मरने वाले मनुष्य से, और घास के समान मुर्झाने वाले आदमी से डरता है – यशायाह 51:12

बाइबल पाठ: यशायाह 66:12-16
Isaiah 66:12 क्योंकि यहोवा यों कहता है, देखो, मैं उसकी ओर शान्ति को नदी के समान, और अन्यजातियों के धन को नदी की बाढ़ के समान बहा दूंगा; और तुम उस से पीओगे, तुम उसकी गोद में उठाए जाओगे और उसके घुटनों पर कुदाए जाओगे।
Isaiah 66:13 जिस प्रकार माता अपने पुत्र को शान्ति देती है, वैस ही मैं भी तुम्हें शान्ति दुंगा; तुम को यरूशलेम ही में शान्ति मिलेगी।
Isaiah 66:14 तुम यह देखोगे और प्रफुल्लित होगे; तुम्हारी हड्डियां घास के समान हरी भरी होंगी; और यहोवा का हाथ उसके दासों के लिये प्रगट होगा, और, उसके शत्रुओं के ऊपर उसका क्रोध भड़केगा।
Isaiah 66:15 क्योंकि देखो, यहोवा आग के साथ आएगा, और उसके रथ बवण्डर के समान होंगे, जिस से वह अपने क्रोध को जलजलाहट के साथ और अपनी चितौनी को भस्म करने वाली आग की लपट में प्रगट करे।
Isaiah 66:16 क्योंकि यहोवा सब प्राणियों का न्याय आग से और अपनी तलवार से करेगा; और यहोवा के मारे हुए बहुत होंगे।

एक साल में बाइबल:  
  • यहोशू 13-15
  • लूका 1:57-80



शुक्रवार, 22 मार्च 2019

याद



      चीन में स्थित एक भूतपूर्व जापानी बन्दी शिविर के प्रांगण में एक स्मृति का पत्थर खड़ा है, जहाँ 1945 में एक व्यक्ति का देहांत हुआ था। उस स्मृति-चिन्ह पर लिखा है, “एरिक लिड्डल का जन्म तियांजिन प्रांत में स्कॉटलैंड से आए माता-पिता के घर में 1902 में हुआ। उसके जीवन का चरमोत्कर्ष 1924 के ओलिम्पिक खेलों में 400 मीटर की दौड़ में स्वर्ण-पदक जीतना था। उसके बाद वह लौट कर चीन के तियानजिन में आ गए और शिक्षक का कार्य करते रहे। उनका सारा जीवन युवाओं को मनुष्यों की भलाई करते रहने के लिए प्रोत्साहित करते रहने में व्यतीत हुआ।”

      बहुत से लोगों की दृष्टि में एरिक लिड्डल की सबसे उच्च उपलब्धि खेल के मैदान में थी। परन्तु उन्हें चीन, जहाँ उनका जन्म हुआ और जिस देश से वे प्रेम करते थे, के तियानजिन में युवकों के उत्थान के लिए भी जाना जाता है।

      मूसा को परमेश्वर के वचन बाइबल के विश्वास के अध्याय, इब्रानियों 11 में, एक ऐसे व्यक्ति के रूप में याद किया गया है जिसने परमेश्वर के लोगों के साथ गिने जाने को मिस्र की दौलत और शोहरत से अधिक मूल्यवान समझा। और परमेश्वर ने उसे अपने लोगों को मिस्र के दासत्व से निकालकर लाने और उन्हें वाचा की भूमि, कनान, तक पहुँचाने के योग्य जाना।

      हम किस बात के लिए याद किए जाएँगे? क्या अपनी शैक्षिक उपलब्धियों के लिए, या कार्य स्थल में प्राप्त की गई पदवी और स्तर के लिए, अथवा हमें प्राप्त होने वाली आर्थिक सफलता के लिए? ये सभी हमें सँसार में पहचान तो दिलवा सकती हैं, किन्तु हमारी वास्तविक और स्थाई याद, जो हमारे बाद भी बनी रहेगी, हमारे द्वारा शान्ति से लोगों के जीवनों को सुधारने-संवारने के लिए किए गए कार्यों के द्वारा ही होगी। - सी. पी. हिया


परमेश्वर के प्रति विश्वासयोग्यता ही सच्ची सफलता है।

और विश्वास बिना उसे प्रसन्न करना अनहोना है, क्योंकि परमेश्वर के पास आने वाले को विश्वास करना चाहिए, कि वह है; और अपने खोजने वालों को प्रतिफल देता है। - इब्रानियों 11:6

बाइबल पाठ: इब्रानियों 11:23-29
Hebrews 11:23 विश्वास ही से मूसा के माता पिता ने उसको, उत्पन्न होने के बाद तीन महीने तक छिपा रखा; क्योंकि उन्होंने देखा, कि बालक सुन्‍दर है, और वे राजा की आज्ञा से न डरे।
Hebrews 11:24 विश्वास ही से मूसा ने सयाना हो कर फिरौन की बेटी का पुत्र कहलाने से इन्कार किया।
Hebrews 11:25 इसलिये कि उसे पाप में थोड़े दिन के सुख भोगने से परमेश्वर के लोगों के साथ दुख भोगना और उत्तम लगा।
Hebrews 11:26 और मसीह के कारण निन्‍दित होने को मिस्र के भण्‍डार से बड़ा धन समझा: क्योंकि उस की आंखे फल पाने की ओर लगी थीं।
Hebrews 11:27 विश्वास ही से राजा के क्रोध से न डर कर उसने मिस्र को छोड़ दिया, क्योंकि वह अनदेखे को मानों देखता हुआ दृढ़ रहा।
Hebrews 11:28 विश्वास ही से उसने फसह और लोहू छिड़कने की विधि मानी, कि पहिलौठों का नाश करने वाला इस्त्राएलियों पर हाथ न डाले।
Hebrews 11:29 विश्वास ही से वे लाल समुद्र के पार ऐसे उतर गए, जैसे सूखी भूमि पर से; और जब मिस्रियों ने वैसा ही करना चाहा, तो सब डूब मरे।

एक साल में बाइबल:  
  • यहोशू 10-12
  • लूका 1:39-56



गुरुवार, 21 मार्च 2019

समर्पण



      मुझे कार्य से कुछ अवकाश लेने की इच्छा हुई, इसलिए मैं निकट के एक उद्यान में टहलने के लिए चली गई। टहलते हुए मार्ग के किनारे मिट्टी से झांकती हुई कुछ हरियाली ने मेरा ध्यान आकर्षति किया। मिट्टी में से जीवन की कुछ कोपलें बाहर निकल रही थीं, जो कुछ ही सप्ताह में सुन्दर डैफोडिल फूलों से भर जाएँगी, जो कि बसंत ऋतु और आते ग्रीष्म काल का संकेत हैं, और इसका भी कि हमने एक और शरद ऋतु पार कर ली थी!

      परमेश्वर के वचन बाइबल में जब हम होशे की पुस्तक को पढ़ते हैं, तो उसके कुछ भाग कभी समाप्त न होने वाली शरद ऋतु के समान प्रतीत हो सकते हैं। क्योंकि परमेश्वर ने अपने इस नबी को एक अपरिहार्य कार्य दिया था – एक दुराचारी तथा विश्वासघाती स्त्री से विवाह करे, जो कि परमेश्वर और उसके लोगों इस्राएल के बीच के संबंध का सूचक था (होशे 1:1-2)। होशे की पत्नि गोमेर ने विवाह के वचनों को तोड़ा और अपने पुराने व्यवहार में लौट गई, किन्तु होशे ने फिर भी उसे वापस बुलाया, इस आशा के साथ कि वह उससे पूर्ण समर्पण के साथ प्रेम करेगी (3:1-3)। इसी प्रकार से परमेश्वर भी चाहता है कि हम उससे ऐसे बल और समर्पण के साथ प्रेम करें जो प्रातः की ओस के समान थोड़े समय में गायब न हो जाए।

      परमेश्वर के प्रति हमारा संबंध कैसा है? क्या हम केवल कठिनाईयों के समयों में ही उसे खोजते हैं, उससे अपनी परेशानियों के समाधान ढूँढते हैं, परन्तु जब आनन्द और उत्सव के समय होते हैं तो उसकी अवहेलना करते हैं? उन इस्राएलियों के समान जो शीघ्र ही अपने आस-पास के लोगों की मूर्तिपूजा को अपना लेते थे और परमेश्वर से दूर हो जाते थे, क्या हम भी अपने समय की मूर्तियों, जैसे कि व्यस्तता, सांसारिक सफलता, समाज और लोगों के प्रभाव आदि में खो जाते हैं और परमेश्वर से दूर हो जाते हैं?

      आज अपने आप को परमेश्वर के प्रति पुनः समर्पित करें; उस परमेश्वर के प्रति जो हम से सदा प्रेम करता है और सदा हर रीति से हमारी भलाई, हमारा उद्धार ही चाहता है। - एमी बाउचर पाई


यद्यपि हम परमेश्वर के प्रति विश्वासघाती हो सकते है, वह हमसे कभी दूर नहीं होता है।

क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए। परमेश्वर ने अपने पुत्र को जगत में इसलिये नहीं भेजा, कि जगत पर दंड की आज्ञा दे परन्तु इसलिये कि जगत उसके द्वारा उद्धार पाए। - यूहन्ना 3:16-17

बाइबल पाठ: होशे 6:1-4
Hosea 6:1 चलो, हम यहोवा की ओर फिरें; क्योंकि उसी ने फाड़ा, और वही चंगा भी करेगा; उसी ने मारा, और वही हमारे घावों पर पट्टी बान्धेगा।
Hosea 6:2 दो दिन के बाद वह हम को जिलाएगा; और तीसरे दिन वह हम को उठा कर खड़ा करेगा; तब हम उसके सम्मुख जीवित रहेंगे।
Hosea 6:3 आओ, हम ज्ञान ढूंढ़े, वरन यहोवा का ज्ञान प्राप्त करने के लिये यत्न भी करें; क्योंकि यहोवा का प्रगट होना भोर का सा निश्चित है; वह वर्षा के समान हमारे ऊपर आएगा, वरन बरसात के अन्त की वर्षा के समान जिस से भूमि सिंचती है।
Hosea 6:4 हे एप्रैम, मैं तुझ से क्या करूं? हे यहूदा, मैं तुझ से क्या करूं? तुम्हारा स्नेह तो भोर के मेघ के समान, और सवेरे उड़ जाने वाली ओस के समान है।

एक साल में बाइबल:  
  • यहोशू 7-9
  • लूका 1:21-38



बुधवार, 20 मार्च 2019

विश्राम



      मेरा ध्यान उस प्रमुख समाचार की ओर गया: “धावकों के लिए विश्राम दिन भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।” अमेरिका के पहाड़ों पर दौड़ने वाले दल के भूतपूर्व सदस्य, टॉमी मैन्निंग द्वारा लिखे गए उस लेख में लेखक ने एक ऐसे सिद्धान्त पर बल दिया था, समर्पित खिलाड़ी जिसकी कभी-कभी उपेक्षा करते हैं – व्यायाम के पश्चात शरीर को फिर से बल प्राप्ति के लिए विश्राम की आवश्यकता होती है। मैन्निंग ने लिखा, “शरीर की रचना और संचालन के दृष्टिकोण से, प्रशिक्षण में सीखे और अर्जित किए गए परिवर्तन विश्राम के समय में ही शरीर में उन उपयोगी परिवर्तनों को लाने पाते हैं। इसका अर्थ है कि विश्राम भी परिश्रम के समान ही उपयोगी है।”

      यही सिद्धान्त हमारे मसीही विश्वास के जीवन में भी उतना ही सत्य है। हतोत्साहित होने और थक कर शिथिल पड़ जाने से बच कर रहने के लिए विश्राम के नियमित समय आवश्यक हैं, परिश्रम और विश्राम में एक संतुलन बनाए रखना चाहिए। पृथ्वी पर अपनी सेवकाई के समय में प्रभु यीशु ने इस आत्मिक संतुलन को बनाए रखने के अवसरों का उपयोग किया, उसके समय पर होने वाली अत्याधिक मांगों के बावजूद।

      जब प्रभु के शिष्य प्रचार और चंगाई के थका देने वाले कठिन कार्य को कर के लौटे तो प्रभु ने उनसे कहा कि “तुम आप अलग किसी जंगली स्थान में आकर थोड़ा विश्राम करो; क्योंकि बहुत लोग आते जाते थे, और उन्हें खाने का अवसर भी नहीं मिलता था” (मरकुस 6:31)। परन्तु एक बड़ी भीड़ उनके पीछे आ गई, और वे विश्राम न कर सके, तो प्रभु यीशु ने उस भीड़ को परमेश्वर के राज्य के विषय सिखाया और पाँच रोटी तथा दो मछली से उस भीड़ को भोजन करवाया (पद 32-44)। जब भीड़ चली गई, तो यीशु “उन्हें विदा कर के पहाड़ पर प्रार्थना करने को गया” (पद 46)।

      यदि हमारे जीवन केवल हमारे कार्य तथा सेवकाई ही से व्यस्त रहते हैं, तो शीघ्र ही हम अपने कार्यों में कम प्रभावी होते चले जाएँगे। प्रभु यीशु हमें आमंत्रित करता है कि हम नियमित कुछ समय उसके साथ प्रार्थना और विश्राम में बिताने के लिए निकाला करें, जिससे थक कर शिथिल और निष्क्रीय होने से बचे रह सकें। - डेविड मैक्कैस्लैंड


मसीही विश्वास और सेवकाई के हमारे जीवनों में विश्राम भी सेवकाई के कार्य जितना महत्वपूर्ण है।

और भोर को दिन निकलने से बहुत पहिले, वह उठ कर निकला, और एक जंगली स्थान में गया और वहां प्रार्थना करने लगा। - मरकुस 1:35

बाइबल पाठ: मरकुस 6:30-46
Mark 6:30 प्रेरितों ने यीशु के पास इकट्ठे हो कर, जो कुछ उन्होंने किया, और सिखाया था, सब उसको बता दिया।
Mark 6:31 उसने उन से कहा; तुम आप अलग किसी जंगली स्थान में आकर थोड़ा विश्राम करो; क्योंकि बहुत लोग आते जाते थे, और उन्हें खाने का अवसर भी नहीं मिलता था।
Mark 6:32 इसलिये वे नाव पर चढ़कर, सुनसान जगह में अलग चले गए।
Mark 6:33 और बहुतों ने उन्हें जाते देखकर पहिचान लिया, और सब नगरों से इकट्ठे हो कर वहां पैदल दौड़े और उन से पहिले जा पहुंचे।
Mark 6:34 उसने निकलकर बड़ी भीड़ देखी, और उन पर तरस खाया, क्योंकि वे उन भेड़ों के समान थे, जिन का कोई रखवाला न हो; और वह उन्हें बहुत सी बातें सिखाने लगा।
Mark 6:35 जब दिन बहुत ढल गया, तो उसके चेले उसके पास आकर कहने लगे; यह सुनसान जगह है, और दिन बहुत ढल गया है।
Mark 6:36 उन्हें विदा कर, कि चारों ओर के गांवों और बस्‍तियों में जा कर, अपने लिये कुछ खाने को मोल लें।
Mark 6:37 उसने उन्हें उत्तर दिया; कि तुम ही उन्हें खाने को दो: उन्हों ने उस से कहा; क्या हम सौ दीनार की रोटियां मोल लें, और उन्हें खिलाएं?
Mark 6:38 उसने उन से कहा; जा कर देखो तुम्हारे पास कितनी रोटियां हैं? उन्होंने मालूम कर के कहा; पांच और दो मछली भी।
Mark 6:39 तब उसने उन्हें आज्ञा दी, कि सब को हरी घास पर पांति पांति से बैठा दो।
Mark 6:40 वे सौ सौ और पचास पचास कर के पांति पांति बैठ गए।
Mark 6:41 और उसने उन पांच रोटियों को और दो मछिलयों को लिया, और स्वर्ग की ओर देखकर धन्यवाद किया और रोटियां तोड़ तोड़ कर चेलों को देता गया, कि वे लोगों को परोसें, और वे दो मछिलयां भी उन सब में बांट दीं।
Mark 6:42 और सब खाकर तृप्‍त हो गए।
Mark 6:43 और उन्होंने टुकडों से बारह टोकिरयां भर कर उठाई, और कुछ मछिलयों से भी।
Mark 6:44 जिन्हों ने रोटियां खाईं, वे पांच हजार पुरूष थे।
Mark 6:45 तब उसने तुरन्त अपने चेलों को बरबस नाव पर चढाया, कि वे उस से पहिले उस पार बैतसैदा को चले जांए, जब तक कि वह लोगों को विदा करे।
Mark 6:46 और उन्हें विदा कर के पहाड़ पर प्रार्थना करने को गया।

एक साल में बाइबल:  
  • यहोशू 4-6
  • लूका 1:1-20