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रविवार, 17 नवंबर 2019

सेवा



      मैरिलिन कई सप्ताहों से बीमार पड़ी थी, और उसके इस कठिन समय में बहुत से लोग उसके सहायक और उसे प्रोत्साहित करते रहने वाले रहे थे। उसे चिंता रहने लगी – “मैं इन सभी की इस दयालुता को कैसे चुका पाऊँगी?” फिर एक दिन उसने एक लिखित प्रार्थना के शब्दों को पढ़ा, “प्रार्थना करें कि लोग नम्र हो सकें, जिससे न केवल वे औरों की सेवा करने वाले बनें, वरन औरों से सेवा स्वीकार भी कर सकें।” मैरिलिन को तुरंत यह बोध हुआ कि उसे कोई हिसाब चुकाने की चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं थी। उसे बस उसकी सहायता करने वालों के प्रति धन्यवादी बने रहना था, और दूसरों को सेवा करने के आनन्द को लेने देना था।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में, फिलिप्पियों 4 अध्याय में, प्रेरित पौलुस ने अपनी कृतज्ञता व्यक्त की, उन सभी के प्रति, जो उसके क्लेशों में उसके सहभागी बने थे (पद 18)। वह सुसमाचार प्रचार और मसीही शिक्षाएं देने के कार्य को करते समय अपनी देखरेख किए जाने  के लिए लोगों पर निर्भर था। वह यह समझता था कि उसे दिए जाने वाले उपहार और भेंटें, लोगों के परमेश्वर के प्रति प्रेम की अभिव्यक्ति थे: “मेरे पास सब कुछ है, वरन बहुतायत से भी है: जो वस्तुएं तुम ने इपफ्रुदीतुस के हाथ से भेजी थीं उन्हें पाकर मैं तृप्‍त हो गया हूं, वह तो सुगन्‍ध और ग्रहण करने के योग्य बलिदान है, जो परमेश्वर को भाता है” (पद 18)।

      किसी से कुछ स्वीकार कर लेना सरल नहीं है, विशेषकर तब जब आप स्वयं ही लोगों की सहायता करने के लिए देने में अग्रणीय रहे हों। परन्तु, जब हम किसी आवश्यकता में हों, तब नम्रता के साथ हम परमेश्वर की ओर से, लोगों से मिलने वाली सहायता को स्वीकार करने वाले बनें, जो विभिन्न स्वरूपों में हमें प्राप्त हो सकती है।

      पौलुस ने लिखा, “और मेरा परमेश्वर भी अपने उस धन के अनुसार जो महिमा सहित मसीह यीशु में है तुम्हारी हर एक घटी को पूरी करेगा” (पद 19)। उसने यह बात अपने संघर्षों के जीवन के अनुभवों से सीखी थी। परमेश्वर विश्वासयोग्य है, और हमारे लिए उसके प्रावधानों की कोई सीमा नहीं है; वह औरों की हमारी सेवा के द्वारा भी हमारे लिए उपलब्ध करवा सकता है। - सिंडी हैस कैस्पर

औरों से प्रेम प्राप्त करें; औरों को प्रेम दें; इसे दोहराते रहें!

क्‍लेश की बड़ी परीक्षा में उन के बड़े आनन्द और भारी कंगालपन के बढ़ जाने से उन की उदारता बहुत बढ़ गई। और उनके विषय में मेरी यह गवाही है, कि उन्होंने अपनी सामर्थ भर वरन सामर्थ से भी बाहर मन से दिया। - 2 कुरिन्थियों 8:2-3

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 4:10-19
Philippians 4:10 मैं प्रभु में बहुत आनन्‍दित हूं कि अब इतने दिनों के बाद तुम्हारा विचार मेरे विषय में फिर जागृत हुआ है; निश्‍चय तुम्हें आरम्भ में भी इस का विचार था, पर तुम्हें अवसर न मिला।
Philippians 4:11 यह नहीं कि मैं अपनी घटी के कारण यह कहता हूं; क्योंकि मैं ने यह सीखा है कि जिस दशा में हूं, उसी में सन्‍तोष करूं।
Philippians 4:12 मैं दीन होना भी जानता हूं और बढ़ना भी जानता हूं: हर एक बात और सब दशाओं में तृप्‍त होना, भूखा रहना, और बढ़ना-घटना सीखा है।
Philippians 4:13 जो मुझे सामर्थ देता है उस में मैं सब कुछ कर सकता हूं।
Philippians 4:14 तौभी तुम ने भला किया, कि मेरे क्‍लेश में मेरे सहभागी हुए।
Philippians 4:15 और हे फिलप्‍पियो, तुम आप भी जानते हो, कि सुसमाचार प्रचार के आरम्भ में जब मैं ने मकिदुनिया से कूच किया तब तुम्हें छोड़ और किसी मण्‍डली ने लेने देने के विषय में मेरी सहयता नहीं की।
Philippians 4:16 इसी प्रकार जब मैं थिस्सलुनीके में था; तब भी तुम ने मेरी घटी पूरी करने के लिये एक बार क्या वरन दो बार कुछ भेजा था।
Philippians 4:17 यह नहीं कि मैं दान चाहता हूं परन्तु मैं ऐसा फल चाहता हूं, जो तुम्हारे लाभ के लिये बढ़ता जाए।
Philippians 4:18 मेरे पास सब कुछ है, वरन बहुतायत से भी है: जो वस्तुएं तुम ने इपफ्रुदीतुस के हाथ से भेजी थीं उन्हें पाकर मैं तृप्‍त हो गया हूं, वह तो सुगन्‍ध और ग्रहण करने के योग्य बलिदान है, जो परमेश्वर को भाता है।
Philippians 4:19 और मेरा परमेश्वर भी अपने उस धन के अनुसार जो महिमा सहित मसीह यीशु में है तुम्हारी हर एक घटी को पूरी करेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 5-7
  • इब्रानियों 12



शनिवार, 16 नवंबर 2019

उपथिति में



      सत्रहवीं शताब्दी के सुविख्यात मठ निवासी, ब्रदर लौरेंस, अपने मठ के लोगों के लिए रसोईए का कार्य करते थे; अपने काम को आरंभ करने से पहले वे प्रार्थना में परमेश्वर से कहते, “हे मेरे परमेश्वर...मुझ पर अपना अनुग्रह करें की मैं आपकी उपस्थिति में बना रहूँ। मेरे समस्त परिश्रम में मेरी सहायत करें। मेरी सभी लालसाओं को अपके लिए लालसा बना दीजिए।” वे काम करते समय, परमेश्वर से बातें करते रहते थे, उसकी अगुवाई को सुनते रहते थे, और अपने सभी कार्यों को परमेश्वर को समर्पित करते रहते थे। वे जब सर्वाधिक व्यस्त भी होते थे, तब भी, शान्ति के थोड़े से समय का भी उपयोग परमेश्वर से उसका अनुग्रह माँगने के लिए लगाते थे। चाहे जो भी हो रहा हो, वो अपने सृष्टिकर्ता के प्रेम के खोजी रहते थे और उसकी निकटता के अनुभव में बने रहते थे।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 89 कहता है कि हम सब के सृष्टिकर्ता के प्रति, जो सभी महासागरों पर अधिकार रखता है, और जिसकी आराधना सवर्गदूतों की सेनाएं करती रहती हैं, हमारा उचित प्रत्युत्तर यही है की हम अपने जीवन उसकी ओर उठाएं – समस्त जीवन। जब हम यह समझने लगते हैं कि परमेश्वर कौन है, तो हम जहां भी हों, जिस भी स्थिति में हों, परमेश्वर की आराधना में आनन्द के साथ सम्मिलित होने की पुकार को सुनना आरंभ कर देते हैं (पद 15-16)।

      चाहे हम किसी दुकान में या फिर किसी हवाई अड्डे पर पंक्ति में खड़े हों, या किसी फोन को होल्ड पर लिए उत्तर आने की प्रतीक्षा में पल गिन रहे हों, हम सभी के जीवनों में ऐसे समय आते हैं जब हम खिन्न हो कर खिसिया सकते हैं। परन्तु यही समय वह समय भी हो सकते हैं जब हम उन्हें वह अवसर देखें जिनमें हम परमेश्वर की ज्योति की उपस्थिति में चलना सीखने के लिए लगा सकते हैं (पद 15)।

      हमारे जीवनों के व्यर्थ किए गए पल, जब हम प्रतीक्षा कर रहे हों, या अस्वस्थ पड़े हों, या विचार कर रहे हों की अब आगे क्या करना चाहिए, आदि, सभी अवसर हैं जिनमें हम अपने जीवनों को परमेश्वर की उपस्थिति में जीने के लिए, उसकी निकटता में बढ़ने के लिए लगा सकते हैं। - हैरोल्ड माइरा, अतिथि लेखक

प्रत्येक पल परमेश्वर की उपस्थिति में जिया जा सकता है।

तुम्हारा स्‍वभाव लोभरिहत हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। - इब्रानियों 13:5

बाइबल पाठ: भजन 89:1-17
Psalms 89:1 मैं यहोवा की सारी करूणा के विषय सदा गाता रहूंगा; मैं तेरी सच्चाई पीढ़ी पीढ़ी तक जताता रहूंगा।
Psalms 89:2 क्योंकि मैं ने कहा है, तेरी करूणा सदा बनी रहेगी, तू स्वर्ग में अपनी सच्चाई को स्थिर रखेगा।
Psalms 89:3 मैं ने अपने चुने हुए से वाचा बान्धी है, मैं ने अपने दास दाऊद से शपथ खाई है,
Psalms 89:4 कि मैं तेरे वंश को सदा स्थिर रखूंगा; और तेरी राजगद्दी को पीढ़ी पीढ़ी तक बनाए रखूंगा।
Psalms 89:5 हे यहोवा, स्वर्ग में तेरे अद्भुत काम की, और पवित्रों की सभा में तेरी सच्चाई की प्रशंसा होगी।
Psalms 89:6 क्योंकि आकाश मण्डल में यहोवा के तुल्य कौन ठहरेगा? बलवन्तों के पुत्रों में से कौन है जिसके साथ यहोवा की उपमा दी जाएगी?
Psalms 89:7 ईश्वर पवित्रों की गोष्ठी में अत्यन्त प्रतिष्ठा के योग्य, और अपने चारों ओर सब रहने वालों से अधिक भय योग्य है।
Psalms 89:8 हे सेनाओं के परमेश्वर यहोवा, हे याह, तेरे तुल्य कौन सामर्थी है? तेरी सच्चाई तो तेरे चारों ओर है!
Psalms 89:9 समुद्र के गर्व को तू ही तोड़ता है; जब उसके तरंग उठते हैं, तब तू उन को शान्त कर देता है।
Psalms 89:10 तू ने रहब को घात किए हुए के समान कुचल डाला, और अपने शत्रुओं को अपने बाहुबल से तितर बितर किया है।
Psalms 89:11 आकाश तेरा है, पृथ्वी भी तेरी है; जगत और जो कुछ उस में है, उसे तू ही ने स्थिर किया है।
Psalms 89:12 उत्तर और दक्खिन को तू ही ने सिरजा; ताबोर और हेर्मोन तेरे नाम का जयजयकार करते हैं।
Psalms 89:13 तेरी भुजा बलवन्त है; तेरा हाथ शक्तिमान और तेरा दहिना हाथ प्रबल है।
Psalms 89:14 तेरे सिंहासन का मूल, धर्म और न्याय है; करूणा और सच्चाई तेरे आगे आगे चलती है।
Psalms 89:15 क्या ही धन्य है वह समाज जो आनन्द के ललकार को पहिचानता है; हे यहोवा, वे लोग तेरे मुख के प्रकाश में चलते हैं,
Psalms 89:16 वे तेरे नाम के हेतु दिन भर मगन रहते हैं, और तेरे धर्म के कारण महान हो जाते हैं।
Psalms 89:17 क्योंकि तू उनके बल की शोभा है, और अपनी प्रसन्नता से हमारे सींग को ऊंचा करेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 3-4
  • इब्रानियों 11:20-40



शुक्रवार, 15 नवंबर 2019

उपहार



      प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान, अक्तूबर 1915 में, ओस्वौल्ड चैम्बर्स मिस्र की राजधानी, काहिरा के निकट स्थित जैतोउन शिविर में, जो राष्ट्रमंडल देशों की सेनाओं के सैनिक प्रशिक्षण के लिए था, YMCA की ओर से ब्रिटिश सैनिकों के लिए पादरी की सेवकाई करने के लिए आए। जब उन्होंने सप्ताह भर की रात्रि धार्मिक सभा की घोषणा की तो 400 लोग उनके प्रवचन को, जिसका शीर्षक था, “प्रार्थना की क्या उपयोगिता है” आए। बाद में वे जब व्यक्तिगत रीति से उन लोगों से बातचीत करते थे, जिनमें वे भी थे जो उस युद्ध में परमेश्वर को ढूँढ़ रहे थे, तो वे बहुधा परमेश्वर के वचन बाइबल से लूका 11:13, “सो जब तुम बुरे हो कर अपने लड़के-बालों को अच्छी वस्‍तुएं देना जानते हो, तो स्‍वर्गीय पिता अपने मांगने वालों को पवित्र आत्मा क्यों न देगा” को बताते थे।

      अपने पुत्र प्रभु यीशु मसीह में होकर, संसार के सभी लोगों के लिए, परमेश्वर का मुफ्त उपहार है पापों से क्षमा, अनंतकालीन आशा, और पवित्र आत्मा में होकर उसकी हमारे साथ सदा बनी रहने वाली उपस्थिति। प्रभु ने हम से वायदा किया है, “क्योंकि जो कोई मांगता है, उसे मिलता है; और जो ढूंढ़ता है, वह पाता है; और जो खटखटाता है, उसके लिये खोला जाएगा” (पद 10)।

      ओस्वौल्ड चैम्बर्स का, 15 नवम्बर 1917 को अचानक ही, उनके अपेंडिक्स के फट जाने के कारण देहांत हो गया। उनके आदर में, एक सैनिक ने संगमरमर के पत्थर पर बनी हुई खुली हुई बाइबल, जिसपर लूका 11:13 लिखा हुआ था, खरीदी और उनकी कब्र के निकट रख दी।

      तो स्‍वर्गीय पिता अपने मांगने वालों को पवित्र आत्मा क्यों न देगा” परमेश्वर की हमारे साथ लगातार बनी रहने वाली उपस्थिति का यह उपहार, उसके प्रत्येक विश्वासी के लिए मुफ्त और सहजता से उपलब्ध है। - डेविड मैक्कैस्लैंड

परमेश्वर द्वारा हमें प्रदान किया गया पवित्र आत्मा का उपहार, 
उसके वरदानों सहित सभी मसीही विश्वासियों के लिए उपलब्ध है।

और उसी में तुम पर भी जब तुम ने सत्य का वचन सुना, जो तुम्हारे उद्धार का सुसमाचार है, और जिस पर तुम ने विश्वास किया, प्रतिज्ञा किए हुए पवित्र आत्मा की छाप लगी। - इफिसियों 1:13

बाइबल पाठ: लूका 11:5 – 13
Luke 11:5 और उसने उन से कहा, तुम में से कौन है कि उसका एक मित्र हो, और वह आधी रात को उसके पास आकर उस से कहे, कि हे मित्र; मुझे तीन रोटियां दे।
Luke 11:6 क्योंकि एक यात्री मित्र मेरे पास आया है, और उसके आगे रखने के लिये मेरे पास कुछ नहीं है।
Luke 11:7 और वह भीतर से उत्तर दे, कि मुझे दुख न दे; अब तो द्वार बन्‍द है, और मेरे बालक मेरे पास बिछौने पर हैं, इसलिये मैं उठ कर तुझे दे नहीं सकता
Luke 11:8 मैं तुम से कहता हूं, यदि उसका मित्र होने पर भी उसे उठ कर न दे, तौभी उसके लज्ज़ा छोड़कर मांगने के कारण उसे जितनी आवश्यकता हो उतनी उठ कर देगा।
Luke 11:9 और मैं तुम से कहता हूं; कि मांगो, तो तुम्हें दिया जाएगा; ढूंढ़ों तो तुम पाओगे; खटखटाओ, तो तुम्हारे लिये खोला जाएगा।
Luke 11:10 क्योंकि जो कोई मांगता है, उसे मिलता है; और जो ढूंढ़ता है, वह पाता है; और जो खटखटाता है, उसके लिये खोला जाएगा।
Luke 11:11 तुम में से ऐसा कौन पिता होगा, कि जब उसका पुत्र रोटी मांगे, तो उसे पत्थर दे: या मछली मांगे, तो मछली के बदले उसे सांप दे?
Luke 11:12 या अण्‍डा मांगे तो उसे बिच्‍छू दे?
Luke 11:13 सो जब तुम बुरे हो कर अपने लड़के-बालों को अच्छी वस्‍तुएं देना जानते हो, तो स्‍वर्गीय पिता अपने मांगने वालों को पवित्र आत्मा क्यों न देगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 1-2
  • इब्रानियों 11:1-19



गुरुवार, 14 नवंबर 2019

महान प्रेम



      हाल ही में हम ने अपनी 22 महीने की पोती, मोरियाह को एक रात के लिए अपने घर अपने साथ रखा; उस अकेली को, बिना उसके बड़े भाईयों के। हमने, जो उसे खेलना अच्छा लगता था, उसके साथ मिलकर खेला; बिना किसी अन्य पर कोई ध्यान या प्रेम की अभिव्यक्ति को विभाजित किए, उस पर ही सप्रेम बहुत ध्यान लगाया। अगले दिन उसे उसके घर छोड़ने के पश्चात, हमने विदा ली और दरवाज़े से बाहर निकलने के लिए आगे बढ़े; हमें बाहर जाता देख, मोरियाह ने भी बिना कुछ कहे, तुरंत अपना बैग उठाया, जो अभी भी दरवाज़े के पास ही रखा था, और हमारे साथ आने के लिए हमारे पीछे हो ली।

      उसकी यह छवि अभी भी मेरी स्मृति में अंकित है: मोरियाह, अपनी चड्डी और दो अलग-अलग प्रकार की सैंडिल पहने हुए, बैग उठाए, दादा–दादी के साथ फिर से जाने के लिए तैयार। जब भी मुझे यह स्मरण आता है, मैं मुस्कुराने लगती हूँ। वह हमारे साथ जाने के लिए इसलिए तत्पर थी क्योंकि उसे उसके प्रति अविभाजित प्रेम और देखभाल पाने की इच्छा थी।

      यद्यपि वह अभी अपनी भावनाएं व्यक्त नहीं कर सकती है, हमारी पोती को प्रेम और महत्त्व की अनुभूति हुई थी। एक प्रकार से मोरियाह के प्रति हमारा प्रेम, हमारे, उसके बच्चों, के प्रति परमेश्वर के प्रेम का एक छोटा सा नमूना है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित यूहन्ना ने लिखा, “देखो पिता ने हम से कैसा प्रेम किया है, कि हम परमेश्वर की सन्तान कहलाएं, और हम हैं भी” (1 यूहन्ना 3:1)।

      जब हम प्रभु यीशु मसीह पर अपना निज उद्धारकर्ता होने के लिए विश्वास लाते हैं, तो हम अपने प्रभु परमेश्वर की संतान हो जाते हैं, और उसके उस उदार प्रेम को, जो उसने क्रूस पर हमारे लिए अपने जीवन के बलिदान के द्वारा प्रदर्शित किया, समझना आरंभ कर देते हैं (पद 16)। फिर हमारी इच्छा अपनी कथनी और करनी के द्वारा उसे प्रसन्न करने की हो जाते है। उसके प्रति हमारे, और हमारे प्रति उसके उस महान प्रेम के कारण, हम उसके साथ समय बिताने के लिए उत्सुक्त रहते हैं। - एलिसन कीडा

पिता परमेश्वर का प्रेम हमारे प्रति कितना महान है!

परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं। -  यूहन्ना 1:12-13

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 3:1-8
1 John 3:1 देखो पिता ने हम से कैसा प्रेम किया है, कि हम परमेश्वर की सन्तान कहलाएं, और हम हैं भी: इस कारण संसार हमें नहीं जानता, क्योंकि उसने उसे भी नहीं जाना।
1 John 3:2 हे प्रियों, अभी हम परमेश्वर की सन्तान हैं, और अब तक यह प्रगट नहीं हुआ, कि हम क्या कुछ होंगे! इतना जानते हैं, कि जब वह प्रगट होगा तो हम भी उसके समान होंगे, क्योंकि उसको वैसा ही देखेंगे जैसा वह है।
1 John 3:3 और जो कोई उस पर यह आशा रखता है, वह अपने आप को वैसा ही पवित्र करता है, जैसा वह पवित्र है।
1 John 3:4 जो कोई पाप करता है, वह व्यवस्था का विरोध करता है; और पाप तो व्यवस्था का विरोध है।
1 John 3:5 और तुम जानते हो, कि वह इसलिये प्रगट हुआ, कि पापों को हर ले जाए; और उसके स्‍वभाव में पाप नहीं।
1 John 3:6 जो कोई उस में बना रहता है, वह पाप नहीं करता: जो कोई पाप करता है, उसने न तो उसे देखा है, और न उसको जाना है।
1 John 3:7 हे बालकों, किसी के भरमाने में न आना; जो धर्म के काम करता है, वही उस के समान धर्मी है।
1 John 3:8 जो कोई पाप करता है, वह शैतान की ओर से है, क्योंकि शैतान आरम्भ ही से पाप करता आया है: परमेश्वर का पुत्र इसलिये प्रगट हुआ, कि शैतान के कामों को नाश करे।

एक साल में बाइबल: 
  • विलापगीत 3-5
  • इब्रानियों 10:19-39



बुधवार, 13 नवंबर 2019

उदारता



      शेरिल के लिए यह बड़े अचरज की बात थी। वह दूकान से घर तक पिज़्ज़ा लेकर जाने का कार्य करती थी, और अब वह जहां पिज़्ज़ा देने आई थी वह कोई घर नहीं था, वरन एक चर्च था। इस बात को लेकर चकराई हुई वह पिज़्ज़ा लेकर जब चर्च के अन्दर पहुंची, तो चर्च के पास्टर ने उसका स्वागत किया, और उससे पूछा, “क्या यह कहना उचित होगा कि जीवन तुम्हारे लिए कठिन है?” शेरिल ने पास्टर की बात से सहमति जताई। तब पास्टर ने चर्च के लोगों द्वारा दान के पैसों से भरी दो थालियाँ बाहर निकालीं, और शेरिल के थैले में बख्शीश के तौर पर उन्हें उंडेल कर खाली कर दिया; वे 750 डौलर से अधिक की रकम थी। शेरिल को यह पता नहीं था, परन्तु पिज़्ज़ा मंगाने से पहले पास्टर ने पिज़्ज़ा की दूकान पर यह कहा था की वे अपने सबसे अधिक आर्थिक तंगी में चल रहे पिज़्ज़ा लाने वाले को भेजें। उस उदार उपहार से शेरिल भौंचक्की रह गई; अब वह अपने कुछ क़र्ज़ चुका सकती थी।

      जब यरूशलेम के आरंभिक मसीहियों ने निर्धनता का सामना किया, तो चर्च के लोगों ने उनकी सहायता के लिए अपने हाथों को आगे बढ़ाया। यद्यपि उन्हें स्वयं सहायता की आवश्यकता थी, फिर भी मकिदूनिया के चर्च ने उदारता से दान दिया, ऐसा करना अपना सौभाग्य समझते हुए (2 कुरिन्थियों 8:1-4)। पौलुस ने उनकी इस उदारता के उदाहरण को कोरिंथ के चर्च के सामने रखा, जिससे कि उस समय वे, और आज हम, इस उदारता के उदाहरण का अनुसरण करें। जब हम अपनी बहुतायत को औरों की आवश्यकता की पूर्ति के लिए प्रयोग करते हैं, हम प्रभु यीशु के स्वभाव को प्रतिबिंबित करते हैं, जिसने हमारे लिए अपने आप को शून्य कर लिया।

      उस दिन शेरिल ने अपने अन्य सभी ग्राहकों को उसके प्रति हुई इस उदारता के विषय बताया, और इस उदाहरण का अनुसरण करते हुए, उसे उस दिन औरों से जितनी बख्शीश मिली, उसे उसने अन्य ज़रूरतमंदों को दे दिया। उदारता के एक उदाहरण को कई बार दोहराया गया, और प्रभु यीशु की महिमा हुई। - शेरेडियन वोयेसे

हमारी उदारता आवश्यकताओं की पूर्ति करती है, जिससे प्रभु परमेश्वर की महिमा होती है।

उदार प्राणी हृष्ट पुष्ट हो जाता है, और जो औरों की खेती सींचता है, उसकी भी सींची जाएगी। - नीतिवचन 11:25

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 8:1-9
2 Corinthians 8:1 अब हे भाइयों, हम तुम्हें परमेश्वर के उस अनुग्रह का समाचार देते हैं, जो मकिदुनिया की कलीसियाओं पर हुआ है।
2 Corinthians 8:2 कि क्‍लेश की बड़ी परीक्षा में उन के बड़े आनन्द और भारी कंगालपन के बढ़ जाने से उन की उदारता बहुत बढ़ गई।
2 Corinthians 8:3 और उनके विषय में मेरी यह गवाही है, कि उन्होंने अपनी सामर्थ भर वरन सामर्थ से भी बाहर मन से दिया।
2 Corinthians 8:4 और इस दान में और पवित्र लोगों की सेवा में भागी होने के अनुग्रह के विषय में हम से बार बार बहुत बिनती की।
2 Corinthians 8:5 और जैसी हम ने आशा की थी, वैसी ही नहीं, वरन उन्होंने प्रभु को, फिर परमेश्वर की इच्छा से हम को भी अपने तईं दे दिया।
2 Corinthians 8:6 इसलिये हम ने तितुस को समझाया, कि जैसा उसने पहिले आरम्भ किया था, वैसा ही तुम्हारे बीच में इस दान के काम को पूरा भी कर ले।
2 Corinthians 8:7 सो जैसे हर बात में अर्थात विश्वास, वचन, ज्ञान और सब प्रकार के यत्‍न में, और उस प्रेम में, जो हम से रखते हो, बढ़ते जाते हो, वैसे ही इस दान के काम में भी बढ़ते जाओ।
2 Corinthians 8:8 मैं आज्ञा की रीति पर तो नहीं, परन्तु औरों के उत्‍साह से तुम्हारे प्रेम की सच्चाई को परखने के लिये कहता हूं।
2 Corinthians 8:9 तुम हमारे प्रभु यीशु मसीह का अनुग्रह जानते हो, कि वह धनी हो कर भी तुम्हारे लिये कंगाल बन गया ताकि उसके कंगाल हो जाने से तुम धनी हो जाओ।

एक साल में बाइबल: 
  • विलापगीत 1-2
  • इब्रानियों 10:1-18



मंगलवार, 12 नवंबर 2019

उपहार



      हाल ही में मेरे पति ने अपना महत्वपूर्ण जन्मदिन मनाया, ऐसा जिसके अंत में शून्य आता है। इस महत्वपूर्ण अवसर पर उन्हें सम्मान देने के सबसे उत्तम तरीके के बारे में मैंने बहुत विचार किया। मैंने अपने विचारों के बारे में अपने बच्चों के साथ भी चर्चा की, जिससे मैं सर्वोत्तम विचार पर पहुँच सकूँ। मैं चाहती थी कि हमारा उत्सव उनके जीवन के उस नए दशक के महत्व को दिखाए और इसे भी कि हमारे परिवार के लिए वे कितने महत्वपूर्ण हैं। मैं चाहती थी कि हमारा उन्हें दिया जाने वाला उपहार उनके जीवन के इस महत्वपूर्ण अवसर के महत्त्व के अनुरूप हो।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में राजा सुलैमान भी परमेश्वर को एक बहुत महान भेंट अर्पित करना चाहता था, जो किसी भी अन्य भेंट से बढ़कर हो। उसकी इच्छा थी कि जो मंदिर वह बनवा रहा था वह उसमें परमेश्वर की उपस्थिति के योग्य हो। उस मंदिर के निर्माण में लगने वाले सामान के लिए उसने सोर के राजा को सन्देश भेजा। अपने सन्देश में सुलैमान ने बताया की मंदिर भव्य होगा क्योंकि “हमारा परमेश्वर सब देवताओं में महान है” (2 इतिहास 2:5)। उसने यह माना की परमेश्वर की महानता और भलाई उस सब से कहीं अधिक बढ़कर है जो मनुष्य अपने हाथों से बना कर दे सकता है, परन्तु फिर भी परमेश्वर के प्रति अपने प्रेम और भक्ति के अंतर्गत उसने मंदिर बनाने के कार्य को आरंभ कर दिया।

      निःसंदेह हमारा परमेश्वर सब देवताओं में महान है। उसने हमारे जीवनों में अद्भुत कार्य किए हैं, जिससे हमारे हृदय उसे प्रेम के बहुमूल्य उपहार अर्पित करने के लिए प्रेरित होते हैं, चाहे उनका भौतिक मूल्य जो भी हो। सुलैमान जानता था कि उसके उपहार की कीमत कभी भी परमेश्वर के तुल्य नहीं हो सकेगी, परन्तु फिर भी उसने आनन्द के साथ अपने उपहार को परमेश्वर के सम्मुख अर्पित किया; परमेश्वर की आज्ञाकारिता में बने रहकर हम भी ऐसा ही कर सकते हैं। - कर्स्टिन होल्म्बर्ग

परमेश्वर को जो सबसे मूल्यवान उपहार हम अर्पित कर सकते हैं, 
वह उसके प्रति सप्रेम आज्ञाकारिता है।

शमूएल ने कहा, क्या यहोवा होमबलियों, और मेलबलियों से उतना प्रसन्न होता है, जितना कि अपनी बात के माने जाने से प्रसन्न होता है? सुन मानना तो बलि चढ़ाने और कान लगाना मेढ़ों की चर्बी से उत्तम है। - 1 शमूएल 15:22

बाइबल पाठ: 2 इतिहास 2:1-10
2 Chronicles 2:1 और सुलैमान ने यहोवा के नाम का एक भवन और अपना राजभवन बनाने का विचार किया।
2 Chronicles 2:2 इसलिये सुलैमान ने सत्तर हजार बोझिये और अस्सी हजार पहाड़ से पत्थर काटने वाले और वृक्ष काटने वाले, और इन पर तीन हजार छ: सौ मुखिये गिनती कर के ठहराए।
2 Chronicles 2:3 तब सुलैमान ने सोर के राजा हूराम के पास कहला भेजा, कि जैसा तू ने मेरे पिता दाऊद से बर्त्ताव किया, अर्थात उसके रहने का भवन बनाने को देवदार भेजे थे, वैसा ही अब मुझ से भी बर्त्ताव कर।
2 Chronicles 2:4 देख, मैं अपने परमेश्वर यहोवा के नाम का एक भवन बनाने पर हूँ, कि उसे उसके लिये पवित्र करूं और उसके सम्मुख सुगन्धित धूप जलाऊं, और नित्य भेंट की रोटी उस में रखी जाए; और प्रतिदिन सबेरे और सांझ को, और विश्राम और नये चांद के दिनों में और हमारे परमेश्वर यहोवा के सब नियत पर्ब्बों में होमबलि चढ़ाया जाए। इस्राएल के लिये ऐसी ही सदा की विधि है।
2 Chronicles 2:5 और जो भवन मैं बनाने पर हूं, वह महान होगा; क्योंकि हमारा परमेश्वर सब देवताओं में महान है।
2 Chronicles 2:6 परन्तु किस की इतनी शक्ति है, कि उसके लिये भवन बनाए, वह तो स्वर्ग में वरन सब से ऊंचे स्वर्ग में भी नहीं समाता? मैं क्या हूँ कि उसके साम्हने धूप जलाने को छोड़ और किसी मनसा से उसका भवन बनाऊं?
2 Chronicles 2:7 सो अब तू मेरे पास एक ऐसा मनुष्य भेज दे, जो सोने, चान्दी, पीतल, लोहे और बैंजनी, लाल और नीले कपड़े की कारीगरी में निपुण हो और नक्काशी भी जानता हो, कि वह मेरे पिता दाऊद के ठहराए हुए निपुण मनुष्यों के साथ हो कर जो मेरे पास यहूदा और यरूशलेम में रहते हैं, काम करे।
2 Chronicles 2:8 फिर लबानोन से मेरे पास देवदार, सनोवर और चंदन की लकड़ी भेजना, क्योंकि मैं जानता हूँ कि तेरे दास लबानोन में वृक्ष काटना जानते हैं, और तेरे दासों के संग मेरे दास भी रहकर,
2 Chronicles 2:9 मेरे लिये बहुत सी लकड़ी तैयार करेंगे, क्योंकि जो भवन मैं बनाना चाहता हूँ, वह बड़ा और अचम्भे के योग्य होगा।
2 Chronicles 2:10 और तेरे दास जो लकड़ी काटेंगे, उन को मैं बीस हजार कोर कूटा हुआ गेहूं, बीस हजार कोर जव, बीस हजार बत दाखमधु और बीस हजार बत तेल दूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 51-52
  • इब्रानियों 9



सोमवार, 11 नवंबर 2019

दृश्य



      सन 1968 के अपोलो 8 अन्तरिक्ष अभियान के एस्ट्रोनौट, बिल सैंडर्स ने चन्द्रमा की परिक्रमा करते हुए निकट से उन्हें दिखाई देने वाली चन्द्रमा की सतह का विवरण दिया। उन्होंने उसे “अनिष्ट क्षितिज का दर्शन...एक फीका और बेस्वाद दिखने वाला स्थान” बताया। इसके बाद यान के अन्तरिक्ष यात्रियों ने बारी-बारी से परमेश्वर के वचन बाइबल के आरंभिक भाग, उत्पत्ति 1:1-10 को धरती से उन्हें देख रहे लोगों को पढ़ कर सुनाया। यान के कमांडर फ्रैंक बोरमैन ने पद 10 “और परमेश्वर ने देखा की अच्छा है” को पढ़ने के बाद समाप्त करते हुए कहा, “अच्छी धरती पर रहने वाले आप सभी पर परमेश्वर की आशीष हो।”

      बाइबल का आरंभिक अध्याय दो तथ्यों पर बल देता है:
      सृष्टि परमेश्वर की रचना है – वाक्यांश, “और परमेश्वर ने कहा...” सारे अध्याय में व्याप्त है, बारम्बार दोहराया गया है। यह समस्त भव्य संसार, जिसमें हम रहते हैं, परमेश्वर का रचनात्मक कार्य है। बाइबल में इसके बाद आने वाली प्रत्येक बात उत्पत्ति अध्याय 1 के इस सन्देश की पुनःपुष्टि करती है। समस्त इतिहास के पीछे, परमेश्वर विद्यमान है।

      सृष्टि अच्छी है – एक अन्य वाक्य जो पहले वाले के साथ इस पूरे अध्याय में चलता रहता है, है: “और परमेश्वर ने देखा की अच्छा है।” सृष्टि के उस प्रारंभिक पल के बाद से आज तक के समय में बहुत कुछ बदल गया है। उत्पत्ति 1 संसार का उस दशा में वर्णन करती है जिसमें परमेश्वर ने उसे रचा था और उसे रखना चाहा था, पाप द्वारा उसे बिगाड़ दिए जाने से पहले। जो भी सुन्दरता हम आज प्रकृति, संसार और सृष्टि में देखते हैं, वह उस भव्य सुन्दरता की, जिसमें इनकी रचना की गयी थी, एक फीकी से छाया मात्र है।

      अपोलो 8 के अन्तरिक्ष यात्रियों ने पृथ्वी को एक अकली लटकी हुई चमकीली गेंद के समान देखा, जो बहुत सुन्दर किन्तु नाज़ुक दिख रही थी। वह दृश्य उत्पत्ति वाले दृश्य के समान का दृश्य था। - फिलिप यैंसी

आदि में परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की। - उत्पत्ति 1:1

आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है; और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है। - भजन 19:1

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 1:1-10
Genesis 1:1 आदि में परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की।
Genesis 1:2 और पृथ्वी बेडौल और सुनसान पड़ी थी; और गहरे जल के ऊपर अन्धियारा था: तथा परमेश्वर का आत्मा जल के ऊपर मण्डलाता था।
Genesis 1:3 तब परमेश्वर ने कहा, उजियाला हो: तो उजियाला हो गया।
Genesis 1:4 और परमेश्वर ने उजियाले को देखा कि अच्छा है; और परमेश्वर ने उजियाले को अन्धियारे से अलग किया।
Genesis 1:5 और परमेश्वर ने उजियाले को दिन और अन्धियारे को रात कहा। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार पहिला दिन हो गया।
Genesis 1:6 फिर परमेश्वर ने कहा, जल के बीच एक ऐसा अन्तर हो कि जल दो भाग हो जाए।
Genesis 1:7 तब परमेश्वर ने एक अन्तर कर के उसके नीचे के जल और उसके ऊपर के जल को अलग अलग किया; और वैसा ही हो गया।
Genesis 1:8 और परमेश्वर ने उस अन्तर को आकाश कहा। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार दूसरा दिन हो गया।
Genesis 1:9 फिर परमेश्वर ने कहा, आकाश के नीचे का जल एक स्थान में इकट्ठा हो जाए और सूखी भूमि दिखाई दे; और वैसा ही हो गया।
Genesis 1:10 और परमेश्वर ने सूखी भूमि को पृथ्वी कहा; तथा जो जल इकट्ठा हुआ उसको उसने समुद्र कहा: और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 50
  • इब्रानियों 8