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मंगलवार, 12 मई 2020

समय



     हाल ही में सीरिया से आई एक महिला, रीमा, अपनी सीमित अंग्रेज़ी और हाथ के संकेतों के द्वारा अपने शिक्षक को समझाने का प्रयास कर रही थी की वह क्यों दुखी थी। उस की आँखों से आँसू बह रहे थे, और उसने अपने हाथ में उस के द्वारा बनाए गए भोजन से भरी एक तश्तरी उठा रखी थी, जिस पर रखा भोजन बहुत आकर्षक लग रहा था। उसने रोते हुए कहा, “एक आदमी”, और फिर मुंह से दरवाज़ा खुलने की आवाज़ निकालते हुए हाथ के संकेत से तेज़ी से अन्दर आने और फिर तुरंत ही वापस बाहर निकल जाने को दिखाया। उस के शिक्षक ने समझ लिया कि वह क्या कहना चाह रही थी और क्यों दुखी थी। उन के निकट के चर्च से कई लोगों के उन के घर आकर, उस के परिवार से मिलना था; और साथ ही वे लोग अपने समुदाय में उन के स्वागत के लिए कुछ उपहार भी देने वाले थे। परन्तु अंततः केवल एक ही आदमी आया, वह भी तेज़ी से अन्दर आया, उस ने अपने उपहार को वहां रखा, और तुरंत ही मुड़कर वापस बाहर चला गया। उस ने केवल एक औपचारिकता का निर्वाह किया, जब कि रीमा और उस का परिवार, जो अपने आप को अकेला अनुभव कर रहे थे, और स्थानीय लोगों के साथ सहभागिता चाहते थे, आशा कर रहे थे कि वे चर्च के लोगों के साथ नए मित्र बनाएंगे, उन के साथ भोजन करेंगे।

     परमेश्वर के वचन बाइबल में हम प्रभु यीशु के लिए देखते हैं कि वे लोगों के साथ समय बिताया करते थे। वे भोजन के लिए निमंत्रणों को स्वीकार करते थे और लोगों के साथ बैठ कर भोजन किया करते थे, लोगों की भीड़ को सिखाया करते थे, और लोगों के साथ व्यक्तिगत रीति से भी समय बिताया करते थे। प्रभु ने अपने आप को एक आदमी के घर में आमंत्रित भी कर लिया; नाटे कद का ज़क्कई जब उन्हें देखने के लिए एक पेड़ पर चढ़ गया, तो प्रभु ने उसी पेड़ के नीचे रुक कर ऊपर उस की ओर देखा और उस से कहा कि वह तुरंत नीचे उतर आए क्योंकि प्रभु उस के घर में जा कर उस के साथ भोजन करना चाहता था (लूका 19:1-9)। और प्रभु के द्वारा उसे इस प्रकार समय देने से ज़क्कई का जीवन सदा के लिए बदला गया।

     हमारे अन्य दायित्वों के कारण हो सकता है कि हमें सदा ही समय उपलब्ध न हो सके; परन्तु जब भी हो, तो यह हमारे लिए एक अद्भुत आदर और विशेषाधिकार की बात है कि हम औरों के साथ बैठें, उन्हें प्रोत्साहित करें और उन के द्वारा प्रोत्साहित हों, और समय देने के द्वारा प्रभु को लोगों के जीवन बदलते हुए देखें। - ऐनी सेटास

औरों को जो सबसे उत्तम उपहार आप दे सकते हैं, हो सकता है कि वह आपका समय हो।

अवसर को बहुमूल्य समझ कर बाहर वालों के साथ बुद्धिमानी से बर्ताव करो। तुम्हारा वचन सदा अनुग्रह सहित और सलोना हो, कि तुम्हें हर मनुष्य को उचित रीति से उत्तर देना आ जाए। - कुलुस्सियों 4:5-6

बाइबल पाठ: लूका 19:1-10
लूका 19:1 वह यरीहो में प्रवेश कर के जा रहा था।
लूका 19:2 और देखो, ज़क्कई नाम एक मनुष्य था जो चुंगी लेने वालों का सरदार और धनी था।
लूका 19:3 वह यीशु को देखना चाहता था कि वह कौन सा है परन्तु भीड़ के कारण देख न सकता था। क्योंकि वह नाटा था।
लूका 19:4 तब उस को देखने के लिये वह आगे दौड़ कर एक गूलर के पेड़ पर चढ़ गया, क्योंकि वह उसी मार्ग से जाने वाला था।
लूका 19:5 जब यीशु उस जगह पहुंचा, तो ऊपर दृष्टि कर के उस से कहा; हे ज़क्कई झट उतर आ; क्योंकि आज मुझे तेरे घर में रहना अवश्य है।
लूका 19:6 वह तुरन्त उतर कर आनन्द से उसे अपने घर को ले गया।
लूका 19:7 यह देख कर सब लोगे कुड़कुड़ा कर कहने लगे, वह तो एक पापी मनुष्य के यहां जा उतरा है।
लूका 19:8 ज़क्कई ने खड़े हो कर प्रभु से कहा; हे प्रभु, देख मैं अपनी आधी सम्पत्ति कंगालों को देता हूं, और यदि किसी का कुछ भी अन्याय कर के ले लिया है तो उसे चौगुना फेर देता हूं।
लूका 19:9 तब यीशु ने उस से कहा; आज इस घर में उद्धार आया है, इसलिये कि यह भी इब्राहीम का एक पुत्र है।
लूका 19:10 क्योंकि मनुष्य का पुत्र खोए हुओं को ढूंढ़ने और उन का उद्धार करने आया है।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजाओं 15-16
  • यूहन्ना 3:1-18



सोमवार, 11 मई 2020

शान्ति



     मेरे शरीर में लम्बे समय से उठते रहने वाले दर्दों के साथ संघर्ष करते हुए मैं उन्हें सहन कर पाने के लिए परमेश्वर पर भरोसा बनाए रखती हूं। उन पीड़ाओं के कारण आने वाली छोटी सी परेशानी भी शत्रु का बड़ा हमला प्रतीत हो सकती है। एक समस्या मुझ पर दाहिनी ओर से हमला करती है, तो दूसरी मुझे पीछे से धक्का देती है, और तीसरी समस्या सीधे मेरी नाक पर मुक्का मारती है। ऐसे समयों में जब मेरे अपने शरीर में बल नहीं रहता है और तुरंत आराम देने वाला कोई भी समाधान मुझे नहीं मिल पाता है, तो मन करता है कि इन सब से बच कर कहीं भाग जाऊँ और छिप जाऊँ। परन्तु क्योंकि मैं अपने दर्द से कहीं भाग नहीं सकती हूँ, न अपनी परिस्थितियों को बदल सकती हूँ, और न अपनी भावनाओं को अनदेखा कर सकती हूँ, मैं धीरे-धीरे अपनी समस्याओं से हो कर निकल पाने के लिए परमेश्वर पर ही भरोसा रखना सीखती जा रही हूँ।

     जब भी मुझे प्रोत्साहन, आराम, और साहस की आवश्यकता होती है, मैं परमेश्वर के वचन बाइबल में से भजनकारों द्वारा लिखे भजनों को पढ़ती हूँ, उन पर मनन करती हूँ; उन भजनों के लिखने वालों ने भी अपनी परिस्थितियों, परेशानियों, और उन से संबंधित अपनी भावनाओं को बड़ी ईमानदारी के साथ परमेश्वर के सामने खुलकर बयान किया है। मेरे प्रिय भजनों में से एक है दाऊद का भजन जो उसने तब लिखा था जब वह अपने पुत्र अबशालोम से बच कर भाग रहा था, जो उसे मार कर उस के राज्य को हथियाना चाहता था। यद्यपि दाऊद अपनी दुखदायी परिस्थिति से व्यथित था (भजन 3:1-2), किन्तु फिर भी उसका भरोसा परमेश्वर की सुरक्षा पर था और उसे आशा थी कि वह उस की प्रार्थनाओं का उत्तर देगा (पद 3-4)। राजा दाऊद इस बात को लेकर परेशान या भयभीत नहीं हुआ कि आगे उस का क्या होगा, क्योंकि उसका विश्वास था कि परमेश्वर उस की रक्षा करेगा और उसे बचाए रखेगा (पद 5-8)।

     शारीरिक और भावनात्मक पीड़ा अत्यंत क्रूर शत्रुओं के समान प्रतीत हो सकती है, और हमें हार मान कर बैठ जाने के लिए उकसा सकती है। या जब हम थक जाते हैं, और हमें अपने संघर्ष का कोई अंत दिखाई नहीं देता है, हम में यह भावना जागृत कर सकती है कि हम कहीं भाग कर चले जाएं। परन्तु ऐसे में भी हमें दाऊद के समान ही परमेश्वर पर भरोसा बनाए रखना चाहिए, कि वह हमें थामे रहेगा, और हमारे साथ उस की लगातार बनी रहने वाली उपस्थिति में, अपने प्रेम में, हमें आराम देगा, हमें शान्ति प्रदान करेगा। - होकिटिल डिक्सन

हमारी हर परेशानी और परीक्षा में परमेश्वर हमें थामे रहता है 
और अपनी शान्ति प्रदान करता है।

और उसने मुझ से कहा, मेरा अनुग्रह तेरे लिये बहुत है; क्योंकि मेरी सामर्थ निर्बलता में सिद्ध होती है; इसलिये मैं बड़े आनन्द से अपनी निर्बलताओं पर घमण्‍ड करूंगा, कि मसीह की सामर्थ मुझ पर छाया करती रहे। इस कारण मैं मसीह के लिये निर्बलताओं, और निन्‍दाओं में, और दरिद्रता में, और उपद्रवों में, और संकटों में, प्रसन्न हूं; क्योंकि जब मैं निर्बल होता हूं, तभी बलवन्‍त होता हूं। - 2 कुरिन्थियों 12:9-10

बाइबल पाठ: भजन संहिता 3
भजन संहिता 3:1 हे यहोवा मेरे सताने वाले कितने बढ़ गए हैं! वह जो मेरे विरुद्ध उठते हैं बहुत हैं।
भजन संहिता 3:2 बहुत से मेरे प्राण के विषय में कहते हैं, कि उसका बचाव परमेश्वर की ओर से नहीं हो सकता।
भजन संहिता 3:3 परन्तु हे यहोवा, तू तो मेरे चारों ओर मेरी ढ़ाल है, तू मेरी महिमा और मेरे मस्तिष्क का ऊंचा करने वाला है।
भजन संहिता 3:4 मैं ऊंचे शब्द से यहोवा को पुकारता हूं, और वह अपने पवित्र पर्वत पर से मुझे उत्तर देता है।
भजन संहिता 3:5 मैं लेटकर सो गया; फिर जाग उठा, क्योंकि यहोवा मुझे सम्हालता है।
भजन संहिता 3:6 मैं उन दस हजार मनुष्यों से नहीं डरता, जो मेरे विरुद्ध चारों ओर पांति बान्धे खड़े हैं।
भजन संहिता 3:7 उठ, हे यहोवा! हे मेरे परमेश्वर मुझे बचा ले! क्योंकि तू ने मेरे सब शत्रुओं के जबड़ों पर मारा है और तू ने दुष्टों के दांत तोड़ डाले हैं।
भजन संहिता 3:8 उद्धार यहोवा ही की ओर से होता है; हे यहोवा तेरी आशीष तेरी प्रजा पर हो।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजाओं 13-14
  • यूहन्ना 2



रविवार, 10 मई 2020

दृष्टि



     एमी कार्माईकल (1867-1951) भारत में अनाथ लड़कियों को देवदासी बनाए जाने से बचाने और उन्हें नया जीवन देने के लिए सुविख्यात हैं। इस कठिन और थका देने वाले कार्य के मध्य में उनके पास कुछ समय ऐसे होते थे जिन्हें उन्होंने अपनी पुस्तक, ‘गोल्ड बाय मून्लाईट’ में “दर्शन के पल” कहा है। उन्होंने लिखा, “किसी व्यस्त दिन के मध्य में, हमें दूर स्थित एक देश की एक झलक दी जाती है और हम उस झलक भर को देख कर मार्ग में ही स्तब्ध खड़े रह जाते हैं।”

     परमेश्वर के वचन बाइबल में यशायाह भविष्यद्वक्ता ने एक ऐसे समय के विषय लिखा जब परमेश्वर के बलवाई लोग वापस उस की ओर मुड़ेंगे, “तू अपनी आंखों से राजा को उसकी शोभा सहित देखेगा; और लम्बे चौड़े देश पर दृष्टि करेगा” (यशायाह 33:17)। इस दूर स्थित देश को देखना, अपनी वर्तमान परिस्थितियों से ऊपर उठ कर अनन्त का दृष्टिकोण प्राप्त करना है। हमारी कठिनाईयों के समयों में परमेश्वर हमें हमारे जीवनों को उस के दृष्टिकोण से देखने और आशा रखने के लिए सक्षम करता है, “क्योंकि यहोवा हमारा न्यायी, यहोवा हमारा हाकिम, यहोवा हमारा राजा है; वही हमारा उद्धार करेगा” (पद 22)।

     हर दिन, हम चुन सकते हैं कि निराश हो कर नीचे देखेंगे, या अपनी आँखें उस दूर स्थित देश की ओर, उस प्रभु परमेश्वर की ओर जो हमारा “महाप्रतापी यहोवा” (पद 21) है लगाएंगे।

     एमी कार्माईकल ने भारत में पचासे से भी अधिक वर्ष व्यतीत किए, उन युवतियों और जवान स्त्रियों की सहायता करने के लिए जिन्हें इसकी बहुत आवश्यकता थी। वह यह कैसे कर सकीं? उनका मन्त्र था, प्रति दिन अपनी दृष्टि प्रभु यीशु पर लगाए रखें और अपना जीवन उनकी देखभाल के सुपुर्द कर दें। यही हम भी कर सकते हैं – सदा, हर बात के लिए ,अपनी दृष्टि प्रभु यीशु पर लगाए रखो। - डेविड सी. मैक्कैसलैंड

अपनी दृष्टि और ध्यान प्रभु यीशु पर केन्द्रित रखो।

उठ, प्रकाशमान हो; क्योंकि तेरा प्रकाश आ गया है, और यहोवा का तेज तेरे ऊपर उदय हुआ है। देख, पृथ्वी पर तो अन्धियारा और राज्य राज्य के लोगों पर घोर अन्धकार छाया हुआ है; परन्तु तेरे ऊपर यहोवा उदय होगा, और उसका तेज तुझ पर प्रगट होगा। - यशायाह 60:1-2

बाइबल पाठ: यशायाह 33:17-22
यशायाह 33:17 तू अपनी आंखों से राजा को उसकी शोभा सहित देखेगा; और लम्बे चौड़े देश पर दृष्टि करेगा।
यशायाह 33:18 तू भय के दिनों को स्मरण करेगा: लेखा लेने वाला और कर तौल कर लेने वाला कहां रहा? गुम्मटों का गिनने वाला कहां रहा?
यशायाह 33:19 जिनकी कठिन भाषा तू नहीं समझता, और जिनकी लड़खड़ाती जीभ की बात तू नहीं बूझ सकता उन निर्दय लोगों को तू फिर न देखेगा।
यशायाह 33:20 हमारे पर्व के नगर सिय्योन पर दृष्टि कर! तू अपनी आंखों से यरूशेलम को देखेगा, वह विश्राम का स्थान, और ऐसा तम्बू है जो कभी गिराया नहीं जाएगा, जिसका कोई खूंटा कभी उखाड़ा न जाएगा, और न कोई रस्सी कभी टूटेगी।
यशायाह 33:21 वहां महाप्रतापी यहोवा हमारे लिये रहेगा, वह बहुत बड़ी बड़ी नदियों और नहरों का स्थान होगा, जिस में डाँडवाली नाव न चलेगी और न शोभायमान जहाज उस में हो कर जाएगा।
यशायाह 33:22 क्योंकि यहोवा हमारा न्यायी, यहोवा हमारा हाकिम, यहोवा हमारा राजा है; वही हमारा उद्धार करेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजाओं 10-12
  • यूहन्ना 1:29-51



शनिवार, 9 मई 2020

शब्द



     वह किसी भी अन्य नदी को पार कर लेने के समान साधारण बात नहीं थी। कानून के अनुसार, कोई भी रोमी सेनापति अपने अस्त्रों से लैस सैनिकों को लेकर रोम में प्रवेश नहीं कर सकता था। इसलिए जब सन 49 ईसा पूर्व में जूलियस सीज़र ने सेना की तेरहवीं टुकड़ी के साथ इटली की रुबिकौन नदी को पार कर के रोम में प्रवेश किया, तो यह राजद्रोह था। सीज़र के इस निर्णय के परिणाम बदले नहीं जा सकते थे, और रोम वर्षों के गृह-युद्ध में चला गया, जब तक कि अंततः रोम का वह सबसे महान सेनापति वहां का पूर्ण शासक नहीं बन गया। “रुबिकौन को पार करना” एक मुहावरा बन गया जिसे आज भी किसी ऐसी सीमा को पार करने के लिए प्रयोग किया जाता है जहां से वापस लौट पाना संभव न हो।

     कभी-कभी हम अपने शब्दों, अपनी वाणी में संबंधों के किसी रुबिकौन को पर कर जाते हैं। एक बार कहे गए शब्द फिर वापस नहीं किए जा सकते हैं। उन से या तो किसी को सहायता और शान्ति मिलती है, या फिर उन से होने वाली हानि सीज़र के द्वारा रोम में प्रवेश करने के समान फिर पलटी नहीं जा सकती है। परमेश्वर के वचन बाइबल में याकूब ने हमारे शब्दों को बारे में एक और शब्द-चित्र दिया; उसने लिखा, “जीभ भी एक आग है: जीभ हमारे अंगों में अधर्म का एक लोक है और सारी देह पर कलंक लगाती है, और भवचक्र में आग लगा देती है और नरक कुण्ड की आग से जलती रहती है” (याकूब 3:6)।

     जब हमें लगता है कि हमने किसी के साथ अपने वार्तालाप में कोई रुबिकौन पार कर लिया है, तो हमें उन से और परमेश्वर से उस के लिए क्षमा माँग लेनी चाहिए (मत्ती 5:23-24; 1 यूहन्ना 1:9)। लेकिन इस से भी अधिक अच्छा है परमेश्वर के आत्मा में प्रतिदिन विश्राम करना, और पौलुस की सलाह, “तुम्हारा वचन सदा अनुग्रह सहित और सलोना हो, कि तुम्हें हर मनुष्य को उचित रीति से उत्तर देना आ जाए” (कुलुस्सियों 4:6) का पालन करना। इस से न केवल हमारे शब्द हमारे प्रभु परमेश्वर को आदर प्रदान करेंगे, वरन साथ ही में हमारे आस-पास और साथ के लोगों को भी उभारेंगे, उन्हें प्रोत्साहित करेंगे। - बिल क्राउडर

जब भी हमारे शब्द हथियार बनाते हैं, तो हानि हमारे संबंधों की ही होती है।

कोमल उत्तर सुनने से जलजलाहट ठण्डी होती है, परन्तु कटुवचन से क्रोध धधक उठता है। - नीतिवचन 15:1

बाइबल पाठ: याकूब 3:1-12
याकूब 3:1 हे मेरे भाइयों, तुम में से बहुत उपदेशक न बनें, क्योंकि जानते हो, कि हम उपदेशक और भी दोषी ठहरेंगे।
याकूब 3:2 इसलिये कि हम सब बहुत बार चूक जाते हैं: जो कोई वचन में नहीं चूकता, वही तो सिद्ध मनुष्य है; और सारी देह पर भी लगाम लगा सकता है।
याकूब 3:3 जब हम अपने वश में करने के लिये घोड़ों के मुंह में लगाम लगाते हैं, तो हम उन की सारी देह को भी फेर सकते हैं।
याकूब 3:4 देखो, जहाज भी, यद्यपि ऐसे बड़े होते हैं, और प्रचण्‍ड वायु से चलाए जाते हैं, तौभी एक छोटी सी पतवार के द्वारा मांझी की इच्छा के अनुसार घुमाए जाते हैं।
याकूब 3:5 वैसे ही जीभ भी एक छोटा सा अंग है और बड़ी बड़ी डींगे मारती है: देखो, थोड़ी सी आग से कितने बड़े वन में आग लग जाती है।
याकूब 3:6 जीभ भी एक आग है: जीभ हमारे अंगों में अधर्म का एक लोक है और सारी देह पर कलंक लगाती है, और भवचक्र में आग लगा देती है और नरक कुण्ड की आग से जलती रहती है।
याकूब 3:7 क्योंकि हर प्रकार के बन-पशु, पक्षी, और रेंगने वाले जन्तु और जलचर तो मनुष्य जाति के वश में हो सकते हैं और हो भी गए हैं।
याकूब 3:8 पर जीभ को मनुष्यों में से कोई वश में नहीं कर सकता; वह एक ऐसी बला है जो कभी रुकती ही नहीं; वह प्राण नाशक विष से भरी हुई है।
याकूब 3:9 इसी से हम प्रभु और पिता की स्‍तुति करते हैं; और इसी से मनुष्यों को जो परमेश्वर के स्‍वरूप में उत्पन्न हुए हैं श्राप देते हैं।
याकूब 3:10 एक ही मुंह से धन्यवाद और श्राप दोनों निकलते हैं।
याकूब 3:11 हे मेरे भाइयों, ऐसा नहीं होना चाहिए।
याकूब 3:12 क्या सोते के एक ही मुंह से मीठा और खारा जल दोनों निकलते हैं? हे मेरे भाइयों, क्या अंजीर के पेड़ में जैतून, या दाख की लता में अंजीर लग सकते हैं? वैसे ही खारे सोते से मीठा पानी नहीं निकल सकता।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजाओं 7-9
  • यूहन्ना 1:1-28



शुक्रवार, 8 मई 2020

मार्गदर्शन



     अगस्त 2015 में, जब मैं अपने घर से कुछ घंटे की यात्रा की दूरी पर स्थित विश्वविद्यालय में दाखिला लेकर अपने अध्ययन को जारी रखने की तैयारी कर रही थी, तब मुझे यह भी एहसास हुआ कि संभव है कि वहां अपना अध्ययन पूरा कर लेने के बाद मैं लौट कर घर न आऊँ, वरन कहीं और ही चली जाऊं। इस से मेरे मन में तेज़ी से विचार उठाने लगे: “मैं अपने परिवार, अपने घर, अपने चर्च, को कैसे छोड़ने पाऊँगी? यदि इसके बाद परमेश्वर मुझे और कहीं जाकर काम करने को कहे, किसी दूसरे राज्य, या देश में, तब क्या होगा?”

     जैसे परमेश्वर के वचन बाइबल में, मूसा घबराया था, जब परमेश्वर ने उसे इस्राएलियों को मिस्र से निकाल कर लाने के लिए कहा था (निर्गमन 3:10), मुझे भी घबराहट हो रही थी। मैं अपने आराम के स्थल को छोड़ना नहीं चाहती थी। हाँ, बाद में मूसा ने परमेश्वर की बात मानी और उसके कहे के अनुसार किया, किन्तु पहले प्रश्न उठाने, और फिर किसी और को भेजने के लिए कहने के बाद ही ऐसा किया (निर्गमन 3:11-13; 4:13)।

     मूसा के उदाहरण से हम देखते हैं कि हमें क्या नहीं करना चाहिए, जब हमें परमेश्वर की बुलाहट का स्पष्ट आभास होता है। इसके स्थान पर हमें, वैसे करना चाहिए जैसे शिष्यों ने  किया था, जब प्रभु यीशु ने उन्हें अपने पीछे हो लेने के लिए बुलाया; वे सब कुछ छोड़ कर उसके पीछे हो लिए (मत्ती 4:20-22; लूका 5:28)। घबराना स्वाभाविक है, परन्तु हम परमेश्वर की योजनाओं पर भरोसा कर सकते हैं।

     आज भी, घर से इतनी दूर रहना कठिन तो लगता है। परन्तु, जैसे-जैसे मैं परमेश्वर की इच्छा को निरंतर खोजती रहती हूँ, वह मेरे लिए मार्ग खोलता रहता है, जिससे मैं आश्वस्त रहती हूँ कि मैं वहां हूँ जहां वह चाहता है कि मैं हूँ।

     जब हमें हमारे आराम के स्थल में से निकाल कर बाहर लाया जाता है, तो हम या तो मूसा के समान हिचकिचाते हुए जा सकते हैं, या शिष्यों के समान प्रसन्नता से – जो प्रभु के साथ चलते रहे, जहां भी वह गया। कभी-कभी ऐसा करने का अर्थ होता है अपने आराम के जीवन को छोड़ना, और सैकड़ों या हज़ारों मील दूर किसी नए स्थान पर जा कर रहना। किन्तु यह चाहे कितना भी कठिन लगे, परमेश्वर के मार्गदर्शन में चलते रहना सदा ही लाभप्रद होता है। - जूली श्वौब

परमेश्वर ने हमें आराम के जीवन के लिए नहीं बुलाया गया है।

मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि तुम्हें मुझ में शान्‍ति मिले; संसार में तुम्हें क्‍लेश होता है, परन्तु ढाढ़स बांधो, मैं ने संसार को जीत लिया है। - यूहन्ना 16:33

बाइबल पाठ: निर्गमन 3:7-14
निर्गमन 3:7 फिर यहोवा ने कहा, मैं ने अपनी प्रजा के लोग जो मिस्र में हैं उनके दु:ख को निश्चय देखा है, और उनकी जो चिल्लाहट परिश्रम कराने वालों के कारण होती है उसको भी मैं ने सुना है, और उनकी पीड़ा पर मैं ने चित्त लगाया है ;
निर्गमन 3:8 इसलिये अब मैं उतर आया हूं कि उन्हें मिस्रियों के वश से छुड़ाऊं, और उस देश से निकाल कर एक अच्छे और बड़े देश में जिस में दूध और मधु की धारा बहती है, अर्थात कनानी, हित्ती, एमोरी, परिज्जी, हिव्वी, और यबूसी लोगों के स्थान में पहुंचाऊं।
निर्गमन 3:9 सो अब सुन, इस्राएलियों की चिल्लाहट मुझे सुनाई पड़ी है, और मिस्रियों का उन पर अन्धेर करना भी मुझे दिखाई पड़ा है,
निर्गमन 3:10 इसलिये आ, मैं तुझे फिरौन के पास भेजता हूं कि तू मेरी इस्राएली प्रजा को मिस्र से निकाल ले आए।
निर्गमन 3:11 तब मूसा ने परमेश्वर से कहा, मैं कौन हूं जो फिरौन के पास जाऊं, और इस्राएलियों को मिस्र से निकाल ले आऊं?
निर्गमन 3:12 उसने कहा, निश्चय मैं तेरे संग रहूंगा; और इस बात का कि तेरा भेजने वाला मैं हूं, तेरे लिये यह चिन्ह होगा कि जब तू उन लोगों को मिस्र से निकाल चुके तब तुम इसी पहाड़ पर परमेश्वर की उपासना करोगे।
निर्गमन 3:13 मूसा ने परमेश्वर से कहा, जब मैं इस्राएलियों के पास जा कर उन से यह कहूं, कि तुम्हारे पितरों के परमेश्वर ने मुझे तुम्हारे पास भेजा है, तब यदि वे मुझ से पूछें, कि उसका क्या नाम है? तब मैं उन को क्या बताऊं?
निर्गमन 3:14 परमेश्वर ने मूसा से कहा, मैं जो हूं सो हूं। फिर उसने कहा, तू इस्राएलियों से यह कहना, कि जिसका नाम मैं हूं है उसी ने मुझे तुम्हारे पास भेजा है।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजाओं 4-6
  • लूका 24:36-53



गुरुवार, 7 मई 2020

रचना



     लाइगौन स्टीवेंस को पर्वतारोहण अच्छा लगता था, और वह अपने भाई, निक, के साथ पर्वतारोहण के लिए जाया करती थी। वे दोनों अनुभवी पर्वतारोही थे, और उन्होंने उत्तरी अमेरिका के सबसे ऊंचे शिखर पर भी विजय प्राप्त की थी। फिर एक दिन, जनवरी 2008 में, वे कोलराडो के एक पहाड़ पर हिमस्खलन का शिकार हो गए, जिसमें निक तो चोटिल हुआ, किन्तु बीस वर्षीय लाइगौन की मृत्यु हो गई। बाद में निक को अपनी बहन के एक झोले में उसके द्वारा लिखी जाने वाली दैनिक डायरी मिली, और उसे पढ़कर निक को बहुत सान्तवना मिली। वह डायरी परमेश्वर के प्रति प्रार्थनाओं, धन्यवाद, स्तुति, और मनन से भरी हुई थी, जैसा कि उसके एक लेख से प्रगट होता है: “मैं एक कलाकृति हूँ, जिस पर परमेश्वर के हस्ताक्षर हैं। परन्तु उसका काम अभी पूरा नहीं हुआ है; वास्तव में यह तो आरंभ ही है...। मुझ पर परमेश्वर की उँगलियों के निशान हैं। कभी भी मेरे समान कोई दूसरा मनुष्य नहीं होगा...। इस जीवन में मेरे द्वारा किए जाने के लिए कुछ तय किया गया है, और उस कार्य को कोई अन्य नहीं कर सकता है।”

     यद्यपि लाइगौन अब इस संसार में शारीरिक रूप में विद्यमान नहीं है, परन्तु उसकी डायरी और उसके जीवन आज भी उन्हें प्रोत्साहित करते और चुनौती देते हैं, जिन्हें वह पीछे छोड़ गई है।

     क्योंकि हम परमेश्वर के स्वरूप में रचे गए हैं (उत्पत्ति 1:27), इसलिए प्रत्येक मनुष्य परमेश्वर द्वारा हस्ताक्षरित एक कलाकृति है, जैसे कि परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने इफिसुस की मसीही मण्डली के लोगों को लिखा: “क्योंकि हम उसके बनाए हुए हैं; और मसीह यीशु में उन भले कामों के लिये सृजे गए जिन्हें परमेश्वर ने पहिले से हमारे करने के लिये तैयार किया” (इफिसियों 2:10)।

       हम सभी परमेश्वर की अद्भुत और अद्वितीय रचना हैं, जिन्हें परमेश्वर अपने समय, अपनी विधि के अनुसार, औरों की सहायता करने के लिए उपयोग करता रहता है। - डेनिस फिशर

प्रत्येक व्यक्ति परमेश्वर की अनुपम कारीगरी की अद्वितीय अभिव्यक्ति है।

तब परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया, अपने ही स्वरूप के अनुसार परमेश्वर ने उसको उत्पन्न किया, नर और नारी कर के उसने मनुष्यों की सृष्टि की। - उत्पत्ति 1:27

बाइबल पाठ: इफिसियों 2:1-10
इफिसियों 2:1 और उसने तुम्हें भी जिलाया, जो अपने अपराधों और पापों के कारण मरे हुए थे।
इफिसियों 2:2 जिन में तुम पहिले इस संसार की रीति पर, और आकाश के अधिकार के हाकिम अर्थात उस आत्मा के अनुसार चलते थे, जो अब भी आज्ञा न मानने वालों में कार्य करता है।
इफिसियों 2:3 इन में हम भी सब के सब पहिले अपने शरीर की लालसाओं में दिन बिताते थे, और शरीर, और मन की मनसाएं पूरी करते थे, और और लोगों के समान स्‍वभाव ही से क्रोध की सन्तान थे।
इफिसियों 2:4 परन्तु परमेश्वर ने जो दया का धनी है; अपने उस बड़े प्रेम के कारण, जिस से उसने हम से प्रेम किया।
इफिसियों 2:5 जब हम अपराधों के कारण मरे हुए थे, तो हमें मसीह के साथ जिलाया; (अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है।)
इफिसियों 2:6 और मसीह यीशु में उसके साथ उठाया, और स्‍वर्गीय स्थानों में उसके साथ बैठाया।
इफिसियों 2:7 कि वह अपनी उस कृपा से जो मसीह यीशु में हम पर है, आने वाले समयों में अपने अनुग्रह का असीम धन दिखाए।
इफिसियों 2:8 क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है, और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर का दान है।
इफिसियों 2:9 और न कर्मों के कारण, ऐसा न हो कि कोई घमण्‍ड करे।
इफिसियों 2:10 क्योंकि हम उसके बनाए हुए हैं; और मसीह यीशु में उन भले कामों के लिये सृजे गए जिन्हें परमेश्वर ने पहिले से हमारे करने के लिये तैयार किया।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजाओं 1-3
  • लूका 24:1-35



बुधवार, 6 मई 2020

प्रतिज्ञा



     मेरे एक मित्र और उसके भाई ने, अपने बचपन में, अपनी बहन को आश्वस्त किया कि यदि वह वास्तव में ‘विश्वास’ करेगी, तो छाते में इतनी सामर्थ्य है कि उसे ऊपर थामे रखे। उनकी बात पर विश्वास करके, उनकी बहन छाता लिए हुए छत से कूद गई, जिस से उसके सिर पर कुछ चोट आई, और वह कुछ समय के लिए बेसुध भी हो गई।

     परमेश्वर ने जो भी प्रतिज्ञा की है, वह उसे अवश्य ही पूरा भी करेगा। परन्तु हमें यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि हम जब भी उस से उसकी किसी प्रतिज्ञा के पूरे किए जाने को मांगते हैं, हम वास्तव में उसके वास्तविक वचन के आधार पर ऐसा कर रहे हैं। क्योंकि, तब ही हमें यह आश्वासन है कि परमेश्वर हमें वह देगा, या हमारे लिए वह करेगा, जो उसकी प्रतिज्ञा है। अपने आप में, ‘विश्वास’ में कोई सामर्थ्य नहीं है; वह तब ही कार्यकारी होता है जब वह परमेश्वर की किसी स्पष्ट और खरी प्रतिज्ञा पर आधारित हो। इसके अतिरिक्त किसी भी अन्य बात पर ‘विश्वास’ रखना, मात्र कल्पना करना है।

     इसका एक स्पष्ट उदाहरण है प्रभु द्वारा यूहन्ना 15:7-8 में की गई प्रतिज्ञा: “यदि तुम मुझ में बने रहो, और मेरी बातें तुम में बनी रहें तो जो चाहो मांगो और वह तुम्हारे लिये हो जाएगा। मेरे पिता की महिमा इसी से होती है, कि तुम बहुत सा फल लाओ, तब ही तुम मेरे चेले ठहरोगे।” ये पद यह प्रतिज्ञा नहीं हैं कि जो भी हम कह देंगे परमेश्वर उसे पूरा कर देगा। वरन यह इस बात के लिए परमेश्वर की प्रतिज्ञा है कि वह हमारे व्यक्तिगत रीति से धर्मी होने की प्रत्येक लालसा – जिसे पौलुस “आत्मा के फल कहता है (गलातियों 5:22-23)” का प्रत्युत्तर देगा। यदि हम पवित्रता के भूखे और प्यासे होंगे, और परमेश्वर से उसे मांगेंगे, तो वह हमें उसके विषय संतुष्ट भी करेगा। इसमें कुछ समय अवश्य लगेगा, क्योंकि आत्मिक बढ़ोतरी में भी, शारीरिक बढ़ोतरी के समान ही, समय लगता है। इसलिए हताश हो कर माँगना छोड़ न दें; परमेश्वर से निवेदन करते रहें कि वह आपको पवित्र बनाए। उसके समय, उसकी विधि, और उसकी गति के अनुसार, वह यह आपके लिए कर देगा। परमेश्वर ऐसी कोई प्रतिज्ञा नहीं करता है जिसे वह पूरा न करे। - डेविड एच. रोपर

हमारा परमेश्वर प्रतिज्ञा निभाने वाला परमेश्वर है।

पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, मेल, धीरज, और कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं; ऐसे ऐसे कामों के विरोध में कोई भी व्यवस्था नहीं। - गलातियों 5:22-23

बाइबल पाठ: यूहन्ना 15:5-8
यूहन्ना 15:5 मैं दाखलता हूं: तुम डालियां हो; जो मुझ में बना रहता है, और मैं उस में, वह बहुत फल फलता है, क्योंकि मुझ से अलग हो कर तुम कुछ भी नहीं कर सकते।
यूहन्ना 15:6 यदि कोई मुझ में बना न रहे, तो वह डाली के समान फेंक दिया जाता, और सूख जाता है; और लोग उन्हें बटोरकर आग में झोंक देते हैं, और वे जल जाती हैं।
यूहन्ना 15:7 यदि तुम मुझ में बने रहो, और मेरी बातें तुम में बनी रहें तो जो चाहो मांगो और वह तुम्हारे लिये हो जाएगा।
यूहन्ना 15:8 मेरे पिता की महिमा इसी से होती है, कि तुम बहुत सा फल लाओ, तब ही तुम मेरे चेले ठहरोगे।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 राजाओं 21-22
  • लूका 23:26-56