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मंगलवार, 9 फ़रवरी 2021

पहचान

 

          मिक इन्कपेन द्वारा लिखित छोटे बच्चों की एक कहानी में एक फटेहाल, धूल से भरा हुआ रूई से भरकर बना हुआ नरम खिलौना अपने आप से पूछता है, ‘मैं कौन हूँ?’ वह गोदाम के एक धूल भरे कोने में पड़ा हुआ है, घर के लोग स्थान बदल रहे हैं, और सामान बाँध कर ले जाने वाले लोग उसे ‘कुछ नहीं कहते हैं। उसे लगता ही कि यही उसका नाम है – ‘कुछ नहीं!

          फिर और खिलौनों के साथ उसका सामना होता है, और इससे उसके अन्दर कुछ यादें ताज़ा होती हैं। उसे यह ध्यान आता है कि उसकी मूँछें, पूँछ, और शरीर पर धारियां हुआ करती थीं। फिर उसकी मुलाक़ात गली की एक बिल्ली से होती है, जो उसे उसके घर तक पहुँचाती है, और ‘कुछ नहीं को याद हो आता है कि वह वास्तव में कौन है – टोबी नामक खिलौने की एक बिल्ली। घर पहुँचने पर उसका मालिक बड़े प्यार से उसे फिर से ठीक करता है, साफ़ करके उसके नए कान, पूँछ, मूँछें बनाकर लगाता है, उसकी धारियां बनाता है; उसकी वास्तविक पहचान उसे वापस मिल जाती है।

          मैं जब भी इस कहानी को पढ़ती हूँ, तो मैं अपनी पहचान के बारे में विचार करती हूँ – मैं कौन हूँ? परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित यूहन्ना मसीही विश्वासियों को लिखते समय उन्हें याद दिलाता है कि परमेश्वर ने हमें अपनी संतान कहा है (1 यूहन्ना 3:1)। आज हम अपनी इस पहचान को ठीक से समझ नहीं पाते हैं, परन्तु एक समय आएगा, जब हम प्रभु यीशु मसीह को देखेंगे, और तब हम उसके समान होंगे (पद 2)। उस बिल्ली टोबी के समान ही, हम लोग भी जो पाप द्वारा बिगाड़ दिए गए थे, हमारे बिगड़े हुए स्वरूप से ठीक करके हमारी सही पहचान में फिर से बना दिए जाएँगे।

          आज हम अपनी इस पहचाना को आंशिक रीति से ही समझ पाते हैं और यह जानने पाते है कि हम सभी मसीही विश्वासियों में परमेश्वर की एक छवि है। परन्तु जब हम प्रभू यीशु मसीह के साथ होंगे, तब हम अपनी उस वास्तविक पहचान में होंगे जो परमेश्वर ने हमारे लिए निर्धारित की है; हम फिर से बहाल और नए कर दिए जाएँगे। - एमी पीटरसन

 

हे प्रभु परमेश्वर, हमें पाप से बचाने और संवारने के लिए आपका बहुत धन्यवाद।


परन्तु जब हम सब के उघाड़े चेहरे से प्रभु का प्रताप इस प्रकार प्रगट होता है, जिस प्रकार दर्पण में, तो प्रभु के द्वारा जो आत्मा है, हम उसी तेजस्वी रूप में अंश अंश कर के बदलते जाते हैं। - 2 कुरिन्थियों 3:18

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 2:28-3:3

1 यूहन्ना 2:28 निदान, हे बालकों, उस में बने रहो; कि जब वह प्रगट हो, तो हमें हियाव हो, और हम उसके आने पर उसके सामने लज्जित न हों।

1 यूहन्ना 2:29 यदि तुम जानते हो, कि वह धार्मिक है, तो यह भी जानते हो, कि जो कोई धर्म का काम करता है, वह उस से जन्मा है।

1 यूहन्ना 3:1 देखो पिता ने हम से कैसा प्रेम किया है, कि हम परमेश्वर की सन्तान कहलाएं, और हम हैं भी: इस कारण संसार हमें नहीं जानता, क्योंकि उसने उसे भी नहीं जाना।

1 यूहन्ना 3:2 हे प्रियो, अभी हम परमेश्वर की सन्तान हैं, और अब तक यह प्रगट नहीं हुआ, कि हम क्या कुछ होंगे! इतना जानते हैं, कि जब वह प्रगट होगा तो हम भी उसके समान होंगे, क्योंकि उसको वैसा ही देखेंगे जैसा वह है।

1 यूहन्ना 3:3 और जो कोई उस पर यह आशा रखता है, वह अपने आप को वैसा ही पवित्र करता है, जैसा वह पवित्र है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • लैव्यव्यवस्था 6-7 
  • मत्ती 25:1-30

सोमवार, 8 फ़रवरी 2021

प्रेम और शान्ति

 

          मैं हमेशा इससे आश्चर्यचकित होती हूँ कि कैसे हमारे सबसे अधिक दुःख की घड़ी में भी शान्ति – अद्भुत, शक्तिशाली, समझ से बाहर शान्ति (फिलिप्पियों 4:7) – किसी-न-किसी रीति से हमारे हृदयों को भर सकती है। मैंने हाल ही में इस अपने दिवंगत पिता की स्मृति में रखी गई सभा के समय अनुभव किया। सभा के बाद हमारे जानकारों, मित्रों, और रिश्तेदारों की लम्बी कतार में लोग हमें सांत्वना देते हुए आगे बढ़ते जा रहे थे; उनमें अपने हाई स्कूल के दिनों  के एक अच्छे मित्र को भी देखकर मुझे बहुत राहत अनुभव हुई। उसने बिना कुछ भी कहे मुझे एक लम्बे आलिंगन में ले लिया। शांत रहते हुए भी इस दुःख के समय में मेरे प्रति उसकी समझ ने मुझे शान्ति से भर दिया। उस कठिन दिन में शान्ति अनुभव करने का वह मेरा पहला अवसर था; जो एक शक्तिशाली याद दिलाना भी था कि मैं इस संसार में उतनी अकेली नहीं हूँ, जितना मुझे लग रहा था; मुझसे प्रेम करने वाले लोग भी हैं।

          जैसे कि परमेश्वर के वचन बाइबल में दाऊद ने भजन 16 में ब्यान किया है, परमेश्वर हमारे जीवनों में जो शान्ति और आनन्द ले कर आता है वह, अपने कठिन समयों में हमारे द्वारा भावनाओं को दबाकर संवेदनहीन होने के प्रयास से नहीं आता है। वरन, यह एक उपहार के समान है जिसे हम तब अनुभव करते हैं जब हम अपने भले परमेश्वर की शरण में चले जाते हैं (पद 1-2)।

          किसी प्रिय जन की मृत्यु से होने वाली दुखद पीड़ा को हम अपने आप को कुछ अन्य बातों में व्यस्त करने के द्वारा, उस दुःख से अपना ध्यान बंटाने के द्वारा, कम करने के प्रयास कर सकते हैं, यह विचार रखते हुए कि इन ‘पराए देवताओं की ओर ध्यान लगाने से हमारे दुःख का निवारण हो जाएगा। किन्तु ऐसे में हमें देर-सवेर यह एहसास हो ही जाता है कि दुःख से ध्यान बंटाने के द्वारा हमारा दुःख और अधिक बढ़ता ही है (पद 4)।

          या फिर, हम परमेश्वर की ओर मुड़ सकते हैं, इस भरोसे के साथ कि चाहे हमें समझ न भी आए, लेकिन जो जीवन उसने हमें दिया है, वह – इन दुखों के होते हुए भी – भला और मनोहर है (पद 6-8)। और तब हम उसकी प्रेम भरी बाँहों में अपने आप को समर्पित करके आश्वस्त हो सकते हैं कि हमारे दुखों में भी वह हमें एक ऐसी शान्ति और आनन्द में लेकर चल सकता है जिसे मृत्यु भी कभी कम नहीं कर सकती है (पद 11)। - मोनिका ब्रैंड्स

 

प्रभु परमेश्वर हमारे दुखों में भी हमें अपनी बाँहों में उठाए रहता है।


वह हमारे सब क्लेशों में शान्ति देता है; ताकि हम उस शान्ति के कारण जो परमेश्वर हमें देता है, उन्हें भी शान्ति दे सकें, जो किसी प्रकार के क्लेश में हों। - 2 कुरिन्थियों 1:4

बाइबल पाठ: भजन 16

भजन संहिता 16:1 हे ईश्वर मेरी रक्षा कर, क्योंकि मैं तेरा ही शरणागत हूं।

भजन संहिता 16:2 मैं ने परमेश्वर से कहा है, कि तू ही मेरा प्रभु है; तेरे सिवा मेरी भलाई कहीं नहीं।

भजन संहिता 16:3 पृथ्वी पर जो पवित्र लोग हैं, वे ही आदर के योग्य हैं, और उन्हीं से मैं प्रसन्न रहता हूं।

भजन संहिता 16:4 जो पराए देवता के पीछे भागते हैं उनका दु:ख बढ़ जाएगा; मैं उनके लहू वाले अर्घ नहीं चढ़ाऊँगा और उनका नाम अपने ओठों से नहीं लूंगा।

भजन संहिता 16:5 यहोवा मेरा भाग और मेरे कटोरे का हिस्सा है; मेरे बाट को तू स्थिर रखता है।

भजन संहिता 16:6 मेरे लिये माप की डोरी मनभावने स्थान में पड़ी, और मेरा भाग मनभावना है।

भजन संहिता 16:7 मैं यहोवा को धन्य कहता हूं, क्योंकि उसने मुझे सम्मत्ति दी है; वरन मेरा मन भी रात में मुझे शिक्षा देता है।

भजन संहिता 16:8 मैं ने यहोवा को निरन्तर अपने सम्मुख रखा है: इसलिये कि वह मेरे दाहिने हाथ रहता है मैं कभी न डगमगाऊंगा।

भजन संहिता 16:9 इस कारण मेरा हृदय आनन्दित और मेरी आत्मा मगन हुई; मेरा शरीर भी चैन से रहेगा।

भजन संहिता 16:10 क्योंकि तू मेरे प्राण को अधोलोक में न छोड़ेगा, न अपने पवित्र भक्त को सड़ने देगा।

भजन संहिता 16:11 तू मुझे जीवन का रास्ता दिखाएगा; तेरे निकट आनन्द की भरपूरी है, तेरे दाहिने हाथ में सुख सर्वदा बना रहता है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • लैव्यव्यवस्था 4-5 
  • मत्ती 24:29-51

रविवार, 7 फ़रवरी 2021

भले कार्य

 

          हम विदेश में भ्रमण कर रहे थे, और हमारी यह यात्रा अभी तक अच्छी नहीं रही थी। कई बार लोग हम पर चिल्लाए, हमें धोखे दिए गए, और हम से वस्तुओं की अनुचित कीमत ली गई। अब हम एक मार्ग में थे, कि एक हट्टा-कट्टा अजनबी व्यक्ति हमारे ओर बढ़ा; हमें डर लगा कि अब फिर से हम से कोई अनुचित व्यवहार किया जाएगा और हम घबरा गए। लेकिन हम चकित हुए जब उस व्यक्ति ने बड़ी नम्रता और शालीनता से हमें वह स्थान बताया जहाँ से उसके शहर का सबसे अच्छा दृश्य दिखाई देता थी, फिर उसने हमें एक चॉकलेट दी, और मुसकुराता हुआ अपने मार्ग चला गया। उसके इस छोटे से काम ने हमारे दिन को अच्छा बना दिया, और हमारे पूरी यात्रा को बचा लिया। हम कृतज्ञ भी हुए – उस व्यक्ति के भी, तथा परमेश्वर के भी, जिसने हमें प्रसन्न कर दिया।

          क्या था जिसने उस व्यक्ति को हमारी ओर, दो अजनबियों की ओर, आकर्षित किया? क्या वह सारे दिन जेब में चॉकलेट लिए हुए घूम रहा था कि किसी को उससे प्रसन्न कर सके? यह बड़ी अचरज की बात है कि कैसे एक छोटा सा कार्य भी किसी के चेहरे पर बहुत बड़ी सी मुसकुराहट ला सकता है, और संभवतः किसी को जगत के उद्धारकर्ता की ओर आकर्षित कर सकता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम मसीहियों को भले कार्य करने के लिए जोर देकर कहा गया है (याकूब 2:17, 24)। यदि यह करना हमें चुनौतीपूर्ण लगता है, तो हमारे साथ प्रभु परमेश्वर का आश्वासन है कि न केवल वह हमें उन्हें करने की सामर्थ्य भी प्रदान करेगा, वरन उसने पहले से वे भले कार्य हमारे लिए ठहरा भी रखे हैं (इफिसियों 2:10)!

          हो सकता है कि परमेश्वर ने ठहराया हुआ हो कि हमारी मुलाक़ात, यूँ ही, किसी ऐसे व्यक्ति के साथ हो जाए जिसे कुछ प्रोत्साहन के शब्दों की आवश्यकता है, या जिसे किसी ऐसी सहायता की आवश्यकता है जो हम उसे दे सकते हैं। हमें तो बस परमेश्वर के आज्ञाकारी होकर उस कार्य को करने के लिए आगे बढ़ना है। - लेस्ली कोह

 

प्रभु पर भरोसा रखते हुए सहायता कार्यों के लिए आगे बढ़ते रहिए।


वैसे ही विश्वास भी, यदि कर्म सहित न हो तो अपने स्वभाव में मरा हुआ है। - याकूब 2:17

बाइबल पाठ: इफिसियों 2:1-10

इफिसियों 2:1 और उसने तुम्हें भी जिलाया, जो अपने अपराधों और पापों के कारण मरे हुए थे।

इफिसियों 2:2 जिन में तुम पहिले इस संसार की रीति पर, और आकाश के अधिकार के हाकिम अर्थात उस आत्मा के अनुसार चलते थे, जो अब भी आज्ञा न मानने वालों में कार्य करता है।

इफिसियों 2:3 इन में हम भी सब के सब पहिले अपने शरीर की लालसाओं में दिन बिताते थे, और शरीर, और मन की मनसाएं पूरी करते थे, और और लोगों के समान स्वभाव ही से क्रोध की सन्तान थे।

इफिसियों 2:4 परन्तु परमेश्वर ने जो दया का धनी है; अपने उस बड़े प्रेम के कारण, जिस से उसने हम से प्रेम किया।

इफिसियों 2:5 जब हम अपराधों के कारण मरे हुए थे, तो हमें मसीह के साथ जिलाया; (अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है।)

इफिसियों 2:6 और मसीह यीशु में उसके साथ उठाया, और स्वर्गीय स्थानों में उसके साथ बैठाया।

इफिसियों 2:7 कि वह अपनी उस कृपा से जो मसीह यीशु में हम पर है, आने वाले समयों में अपने अनुग्रह का असीम धन दिखाए।

इफिसियों 2:8 क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है, और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर का दान है।

इफिसियों 2:9 और न कर्मों के कारण, ऐसा न हो कि कोई घमण्ड करे।

इफिसियों 2:10 क्योंकि हम उसके बनाए हुए हैं; और मसीह यीशु में उन भले कामों के लिये सृजे गए जिन्हें परमेश्वर ने पहिले से हमारे करने के लिये तैयार किया।

 

एक साल में बाइबल: 

  • लैव्यव्यवस्था 1-3 
  • मत्ती 24:1-28

शनिवार, 6 फ़रवरी 2021

गवाही

 

          प्रभु यीशु से मेरी मुलाक़ात होने से पहले, निकट संबंधों को लेकर मैं बहुत गहरी चोट खा चुकी थी, इसलिए और चोट पहुँचने के डर से मैं किसी के साथ घनिष्ठ नहीं होती थी। ऐलन से मेरे विवाह से पूर्व, मेरी माँ ही मेरी सबसे घनिष्ठ मित्र रही थीं। सात वर्ष के बाद, और लगभग तलाक की कगार पर खड़े हुए, मैं अपने छोटे से बेटे, ज़ेवियर, को लिए हुए एक चर्च सभा में गई। मैं जाकर चर्च से बाहर निकलने वाले दरवाज़े के पास बैठ गई, किसी पर भरोसा करने से डरती थी, किन्तु मुझे सहायता लेने की भी बहुत इच्छा थी।

          मैं प्रभु की धन्यवादी हूँ कि कुछ मसीही विश्वासियों ने मेरी ओर सहायता का हाथ बढ़ाया, हमारे परिवार के लिए प्रार्थना की, और मुझे सिखाया कि कैसे प्रार्थना और बाइबल अध्ययन के द्वारा मैं परमेश्वर के साथ संबंध में आ सकती हूँ, उसकी निकटता में बढ़ सकती हूँ। समय के साथ प्रभु यीशु और उसके अनुयायियों के प्रेम ने मेरे जीवन को बदल दिया।

          उस चर्च सभा में जाने के दो वर्ष के बाद, मैंने, ऐलन ने, और मेरे बेटे, ज़ेवियर ने बपतिस्मा लेने का आग्रह किया। इसके कुछ समय के बाद, हमारी एक साप्ताहिक बातचीत के दौरान, मेरी माँ ने कहा, “तुम बदल गई हो; मुझे भी यीशु के बारे में बताओ।” कुछ महीनों के बाद उन्होंने भी प्रभु यीशु को अपना उद्धारकर्ता स्वीकार कर लिया।

          प्रभु यीशु मसीह जीवन बदल देते हैं, जैसे कि परमेश्वर के वचन बाइबल में हम शाऊल (पौलुस का पहला नाम) के बारे में देखते हैं जो कि आरंभिक मसीही मण्डलियों का सबसे कठोर सताने वाला था, जब तक कि उसकी मुलाक़ात प्रभु यीशु से नहीं हुई (प्रेरितों 9:1-5)। उस मुलाक़ात के बाद, कुछ लोगों ने पौलुस की मसीह यीशु के बारे में सीखने में सहायता की (पद 17, 19), और उसके इस प्रबल परिवर्तन ने उसके द्वारा पवित्र आत्मा की सामर्थ्य से दी जानी वाले शिक्षाओं को और भी अधिक विश्वसनीय बना दिया (पद 20-22)।

          हो सकता है कि प्रभु यीशु के साथ हमारी पहली व्यक्तिगत मुलाक़ात उतनी नाटकीय न हो जितनी शाऊल (पौलुस) की थी, और हमारे जीवन में बदलाव उसके समान तीव्र गति से तथा प्रबल न हों। लेकिन फिर भी जब लोग देखेंगे कि मसीह यीशु का प्रेम हमें किस प्रकार से बदलता जा रहा है, तो इससे हमें अपने उद्धार और बदले हुए जीवन तथा उद्धारकर्ता प्रभु यीशु के विषय गवाही देने के अवसर भी मिलेंगे, जो औरों के जीवनों में भी बदलाव ला सकेंगे। - सोहचील डिक्सन

 

मसीह यीशु द्वारा बदले गए जीवन को, उस बदलाव की गवाही देते रहना चाहिए।


मैं तो पहिले निन्दा करने वाला, और सताने वाला, और अन्धेर करने वाला था; तौभी मुझ पर दया हुई, क्योंकि मैं ने अविश्वास की दशा में बिन समझे बूझे, ये काम किए थे। - 1 तीमुथियुस 1:13

बाइबल पाठ: प्रेरितों 9:1-22

प्रेरितों 9:1 और शाऊल जो अब तक प्रभु के चेलों को धमकाने और घात करने की धुन में था, महायाजक के पास गया।

प्रेरितों 9:2 और उस से दमिश्क की आराधनालयों के नाम पर इस अभिप्राय की चिट्ठियां मांगी, कि क्या पुरुष, क्या स्त्री, जिन्हें वह इस पंथ पर पाए उन्हें बान्ध कर यरूशलेम में ले आए।

प्रेरितों 9:3 परन्तु चलते चलते जब वह दमिश्क के निकट पहुंचा, तो एकाएक आकाश से उसके चारों ओर ज्योति चमकी।

प्रेरितों 9:4 और वह भूमि पर गिर पड़ा, और यह शब्द सुना, कि हे शाऊल, हे शाऊल, तू मुझे क्यों सताता है?

प्रेरितों 9:5 उसने पूछा; हे प्रभु, तू कौन है? उसने कहा; मैं यीशु हूं; जिसे तू सताता है।

प्रेरितों 9:6 परन्तु अब उठ कर नगर में जा, और जो कुछ करना है, वह तुझ से कहा जाएगा।

प्रेरितों 9:7 जो मनुष्य उसके साथ थे, वे चुपचाप रह गए; क्योंकि शब्द तो सुनते थे, परन्तु किसी को दखते न थे।

प्रेरितों 9:8 तब शाऊल भूमि पर से उठा, परन्तु जब आँखें खोलीं तो उसे कुछ दिखाई न दिया और वे उसका हाथ पकड़ के दमिश्क में ले गए।

प्रेरितों 9:9 और वह तीन दिन तक न देख सका, और न खाया और न पीया।

प्रेरितों 9:10 दमिश्क में हनन्याह नाम एक चेला था, उस से प्रभु ने दर्शन में कहा, हे हनन्याह! उसने कहा; हां प्रभु।

प्रेरितों 9:11 तब प्रभु ने उस से कहा, उठ कर उस गली में जा जो सीधी कहलाती है, और यहूदा के घर में शाऊल नाम एक तारसी को पूछ ले; क्योंकि देख, वह प्रार्थना कर रहा है।

प्रेरितों 9:12 और उसने हनन्याह नाम एक पुरुष को भीतर आते, और अपने ऊपर आते देखा है; ताकि फिर से दृष्टि पाए।

प्रेरितों 9:13 हनन्याह ने उत्तर दिया, कि हे प्रभु, मैं ने इस मनुष्य के विषय में बहुतों से सुना है, कि इस ने यरूशलेम में तेरे पवित्र लोगों के साथ बड़ी बड़ी बुराइयां की हैं।

प्रेरितों 9:14 और यहां भी इस को महायाजकों की ओर से अधिकार मिला है, कि जो लोग तेरा नाम लेते हैं, उन सब को बान्ध ले।

प्रेरितों 9:15 परन्तु प्रभु ने उस से कहा, कि तू चला जा; क्योंकि यह, तो अन्यजातियों और राजाओं, और इस्राएलियों के सामने मेरा नाम प्रगट करने के लिये मेरा चुना हुआ पात्र है।

प्रेरितों 9:16 और मैं उसे बताऊंगा, कि मेरे नाम के लिये उसे कैसा कैसा दुख उठाना पड़ेगा।

प्रेरितों 9:17 तब हनन्याह उठ कर उस घर में गया, और उस पर अपना हाथ रखकर कहा, हे भाई शाऊल, प्रभु, अर्थात यीशु, जो उस रास्ते में, जिस से तू आया तुझे दिखाई दिया था, उसी ने मुझे भेजा है, कि तू फिर दृष्टि पाए और पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हो जाए।

प्रेरितों 9:18 और तुरन्त उस की आंखों से छिलके से गिरे, और वह देखने लगा और उठ कर बपतिस्मा लिया; फिर भोजन कर के बल पाया।

प्रेरितों 9:19 और वह कई दिन उन चेलों के साथ रहा जो दमिश्क में थे।

प्रेरितों 9:20 और वह तुरन्त आराधनालयों में यीशु का प्रचार करने लगा, कि वह परमेश्वर का पुत्र है।

प्रेरितों 9:21 और सब सुनने वाले चकित हो कर कहने लगे; क्या यह वही व्यक्ति नहीं है जो यरूशलेम में उन्हें जो इस नाम को लेते थे नाश करता था, और यहां भी इसी लिये आया था, कि उन्हें बान्ध कर महायाजकों के पास ले आए?

प्रेरितों 9:22 परन्तु शाऊल और भी सामर्थी होता गया, और इस बात का प्रमाण दे देकर कि मसीह यही है, दमिश्क के रहने वाले यहूदियों का मुंह बन्द करता रहा।

 

एक साल में बाइबल: 

  • निर्गमन 39-40 
  • मत्ती 23:23-39