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शनिवार, 20 फ़रवरी 2021

शब्द

 

          सभी चार वर्ष के बच्चों के समान रूबी को भी भागना, गाना, नाचना और खेलना अच्छा लगता था। लेकिन जब वह घुटनों में दर्द बताने लगी, तो उसके माता-पिता उसे जाँच करवाने के लिए ले गए। जाँच के परिणाम चौंका देने वाले थे – चौथे स्तर तक पहुँचा हुआ कैंसर; रूबी जोखिम में थी। उसे शीघ्र ही इलाज के लिए अस्पताल में भरती करवाया गया। इलाज के लिए उसके अस्पताल में रहने की अवधि लम्बी होती ही गई, और क्रिसमस के समय तक पहुँच गई, जो कि घर से दूर रहने के लिए एक कठिन समय होता है। रूबी के इलाज में लगी एक नर्स को एक विचार आया, और उसने रूबी के कमरे के सामने डाक रखने वाला एक डिब्बा लगा दिया, जिसमें परिवार जन रूबी के लिए पत्र लिख कर डाल सकते थे; पत्र जिनमें रूबी के लिए प्रार्थनाएँ और प्रोत्साहन के शब्द लिखे होते थे। फिर यह बात फेसबुक पर भी निवेदन में चली गई, और तब मित्रों तथा अन्य लोगों, यहाँ तक कि अजनबियों से भी रूबी के लिए इतनी डाक आने लगी कि सब, यहाँ तक कि स्वयं रूबी भी चकित रह गई। हर पत्र के साथ रूबी थोड़ी और प्रोत्साहित होती, और उसे कुल मिलाकर 100,000 से भी अधिक पत्र मिले; और अन्ततः वह घर जाने पाई।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में कुलुस्से के मसीही विश्वासियों को प्रेरित पौलुस ने भी एक पत्र लिखा – कागज़ पर लिखे गए कुछ शब्द – शब्द जो तब उन्हें, और आज हमें, मसीही जीवन में फलवन्त होने, मसीही ज्ञान, समझ, सामर्थ्य, सहनशीलता, और धैर्य में बढ़ते जाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं (पद 10-11)। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि उन मसीही विश्वासियों के लिए पौलुस द्वारा लिखे गए ये शब्द कितनी अच्छी औषधि थे। इतना भर भी जानना कि कोई उनके लिए निरंतर प्रार्थना करता है, उन्हें मसीह यीशु में लाए गए विश्वास में स्थिर बने रहने के लिए प्रोत्साहित करता रहा।

          प्रोत्साहन के शब्द आवश्यकता में पड़े लोगों के लिए बहुत सहायक हो सकते हैं। - जॉन ब्लेज़

 

प्रोत्साहित करें, प्रार्थना करें, मसीही विश्वासियों को उभारें और विश्वास में बढ़ने में सहायक बनें।


इसी लिये हम सदा तुम्हारे निमित्त प्रार्थना भी करते हैं, कि हमारा परमेश्वर तुम्हें इस बुलाहट के योग्य समझे, और भलाई की हर एक इच्छा, और विश्वास के हर एक काम को सामर्थ्य सहित पूरा करे। - 2 थिस्स्लुनीकियों 1:11

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों 1:9-12

कुलुस्सियों 1:9 इसी लिये जिस दिन से यह सुना है, हम भी तुम्हारे लिये यह प्रार्थना करने और बिनती करने से नहीं चूकते कि तुम सारे आत्मिक ज्ञान और समझ सहित परमेश्वर की इच्छा की पहचान में परिपूर्ण हो जाओ।

कुलुस्सियों 1:10 ताकि तुम्हारा चाल-चलन प्रभु के योग्य हो, और वह सब प्रकार से प्रसन्न हो, और तुम में हर प्रकार के भले कामों का फल लगे, और परमेश्वर की पहचान में बढ़ते जाओ।

कुलुस्सियों 1:11 और उस की महिमा की शक्ति के अनुसार सब प्रकार की सामर्थ्य से बलवन्‍त होते जाओ, यहां तक कि आनन्द के साथ हर प्रकार से धीरज और सहनशीलता दिखा सको।

कुलुस्सियों 1:12 और पिता का धन्यवाद करते रहो, जिसने हमें इस योग्य बनाया कि ज्योति में पवित्र लोगों के साथ मीरास में संभागी हों।

 

एक साल में बाइबल: 

  • लैव्यव्यवस्था 26-27
  • मरकुस 2

शुक्रवार, 19 फ़रवरी 2021

सीखो और बढ़ो

 

          मेरे एक मित्र ने मुझे, अपने जीवन और अनुभवों के आधार पर, एक बहुत उपयोगी और बुद्धिमत्तापूर्ण सलाह दी। अपने व्यावसायिक जीवन के आरंभिक वर्षों में, जब मेरा मित्र, आलोचना तथा प्रशंसा, दोनों ही से व्यवहार करना सीखने में संघर्ष कर रहा था, तो उसे लगा कि परमेश्वर उससे कह रहा ही कि वह दोनों ही को पीछे छोड़ते हुए आगे ही बढ़ता जाए। जो बात उसने सीखी, उसका सार यही था कि वह आलोचना और प्रशंसा से जो भी सीख सकता है, उसे सीख कर, दोनों ही को पीछे छोड़ दे, और परमेश्वर के अनुग्रह में दीन होकर आगे बढ़ता जाए।

          आलोचना और प्रशंसा, दोनों ही हमारे अन्दर प्रबल भावनाएँ जगाते हैं, और यदि इन दोनों ही प्रकार की भावनाओं को नियंत्रण में नहीं रखा गया, तो ये या तो हमें अत्यधिक आत्म-ग्लानि में अथवा अत्यधिक घमण्ड में ले जाएँगी। परमेश्वर के वचन बाइबल में, नीतिवचन की पुस्तक में हम औरों को प्रोत्साहित करने तथा उन्हें बुद्धिमत्तापूर्ण सलाह देने के लाभ के बारे में पढ़ते हैं: “अच्छे समाचार से हड्डियां पुष्ट होती हैं ... जो शिक्षा को सुनी-अनसुनी करता, वह अपने प्राण को तुच्छ जानता है, परन्तु जो डांट को सुनता, वह बुद्धि प्राप्त करता है” (15:30, 32)।

          यदि हमें किसी से फटकार सुननी पड़ रही है, तो हम यह ठान लें कि हम उस से अपने अन्दर उचित सुधार लाएँगे। नीतिवचन में लिखा है,जो जीवनदायी डांट कान लगा कर सुनता है, वह बुद्धिमानों के संग ठिकाना पाता है” (पद 31)। और यदि हमें प्रशंसा के शब्दों से आशीषित किया जा रहा है, तो हम उन से तरोताजा होकर कृतज्ञ भी हो जाएँ। जब हम परमेश्वर के साथ नम्रता पूर्वक चलते हैं, तो वह हमें आलोचना और प्रशंसा, दोनों ही से सीखने वाला बना सकता है। और फिर परमेश्वर के मार्गदर्शन में हम उन्हें वहीं छोड़कर और आगे बढ़ते जा सकते हैं (पद 33)। - रूथ ओ-रियली-स्मिथ

 

आलोचना अथवा प्रशंसा पर रुक कर न बैठें, वरन उन्हें सीढ़ी बनाकर और आगे बढ़ जाएँ।


इसलिये परमेश्वर के बलवन्‍त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए। - 1 पतरस 5:6

बाइबल पाठ: नीतिवचन 15:30-33

नीतिवचन 15:30 आंखों की चमक से मन को आनन्द होता है, और अच्छे समाचार से हड्डियां पुष्ट होती हैं।

नीतिवचन 15:31 जो जीवनदायी डांट कान लगा कर सुनता है, वह बुद्धिमानों के संग ठिकाना पाता है।

नीतिवचन 15:32 जो शिक्षा को सुनी-अनसुनी करता, वह अपने प्राण को तुच्छ जानता है, परन्तु जो डांट को सुनता, वह बुद्धि प्राप्त करता है।

नीतिवचन 15:33 यहोवा के भय मानने से शिक्षा प्राप्त होती है, और महिमा से पहिले नम्रता होती है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • लैव्यव्यवस्था 25
  • मरकुस 1:23-45

गुरुवार, 18 फ़रवरी 2021

बदलना

 

          जब मेरे मित्र डेविड की पत्नी को एलज़हाइमर रोग हुआ, जिससे रोगी की स्मरण शक्ति क्षीण होते-होते, जाती रहती है और शरीर भी दुर्बल होता चला जाता है, तो इससे जो बदलाव उस मित्र को अपने जीवन में करने पड़े, उनके कारण वह बहुत कटु हो गया। अपनी पत्नी की देखभाल करने के लिए उसे अपने काम से, समय से पहले ही, सेवा-निवृत्ति लेनी पड़ी। उसने मुझे बताया, “मैं परमेश्वर से बहुत क्रुद्ध हुआ; किन्तु मैंने इसके बारे में जितनी अधिक प्रार्थनाएँ कीं, परमेश्वर ने मुझे उतना अधिक दिखाया कि मेरे मन के वास्तविक दशा क्या है और कैसे मैं अपने विवाहित जीवन के अधिकांश समय में स्वार्थी रहा हूँ।” उसकी आँखें भर आईं जब उसने कहा, “उसे अस्वस्थ हुए अब दस वर्ष हो गए हैं, परन्तु परमेश्वर ने मेरी सहायता की है कि मैं एक भिन्न दृष्टिकोण से जीवन को देखूँ। अब मैं उसके लिए जो कुछ भी करता हूँ वह उसके तथा हमारे प्रभु यीशु के प्रति प्रेम के कारण करता हूँ। उसकी देखभाल करना मेरे जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य हो गया है।”

          कभी-कभी परमेश्वर हमारी प्रार्थनाओं का उत्तर हमें वह देने के स्थान पर, जो हम माँग रहे हैं, हमें बदलने के लिए चुनौती देने के द्वारा करता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि जब नीनवे को क्षमा कर देने के कारण योना नबी परमेश्वर से क्रुद्ध हुआ, तो परमेश्वर ने उसे तेज़ धूप से बचाने के लिए एक पौधे को उगाया (योना 4:6); और फिर उसे सुखा भी दिया। जब योना इसके लिए कुड़कुड़ाया, तो परमेश्वर ने उससे पूछा, “क्या तेरा इस पौधे के लिए कुड़कुड़ाना सही है?” (पद 7-9)। योना ने, जो केवल अपने ही ऊपर ध्यान केन्द्रित किए हुआ था, खिसियाहट में होकर कहा, कि उसका दृष्टिकोण सही है। लेकिन परमेश्वर ने उसे दृष्टिकोण बदलने तथा औरों के बारे में भी ध्यान करने के लिए कहा।

          परमेश्वर, हमें सिखाने और बढ़ाने के लिए, हमारी प्रार्थनाओं को कभी-कभी अनपेक्षित तरीकों से काम में लाता है। जब वह ऐसा करे, तो यह ऐसा बदलाव है जिसे हमें खुले हृदय के साथ स्वीकार करना चाहिए, क्योंकि वह अपने प्रेम में होकर हमें और बेहतर बनाना चाहता है, हमें बदलना चाहता है। - जेम्स बैंक्स

 

जब हम परमेश्वर के साथ समय बिताते हैं, वह हमें बढ़ाता और बदलता है।


वह तो और भी अनुग्रह देता है; इस कारण यह लिखा है, “परमेश्‍वर अभिमानियों का विरोध करता है, पर दीनों पर अनुग्रह करता है।” - याकूब 4:6

बाइबल पाठ: योना 4

योना 4:1 यह बात योना को बहुत ही बुरी लगी, और उसका क्रोध भड़का।

योना 4:2 और उसने यहोवा से यह कह कर प्रार्थना की, हे यहोवा जब मैं अपने देश में था, तब क्या मैं यही बात न कहता था? इसी कारण मैं ने तेरी आज्ञा सुनते ही तर्शीश को भाग जाने के लिये फुर्ती की; क्योंकि मैं जानता था कि तू अनुग्रहकारी और दयालु परमेश्वर है, विलम्ब से कोप करने वाला करुणा-निधान है, और दु:ख देने से प्रसन्न नहीं होता।

योना 4:3 सो अब हे यहोवा, मेरा प्राण ले ले; क्योंकि मेरे लिये जीवित रहने से मरना ही भला है।

योना 4:4 यहोवा ने कहा, तेरा जो क्रोध भड़का है, क्या वह उचित है?

योना 4:5 इस पर योना उस नगर से निकल कर, उसकी पूरब ओर बैठ गया; और वहां एक छप्पर बना कर उसकी छाया में बैठा हुआ यह देखने लगा कि नगर को क्या होगा?

योना 4:6 तब यहोवा परमेश्वर ने एक रेंड़ का पेड़ लगा कर ऐसा बढ़ाया कि योना के सिर पर छाया हो, जिस से उसका दु:ख दूर हो। योना उस रेंड़ के पेड़ के कारण बहुत ही आनन्दित हुआ।

योना 4:7 बिहान को जब पौ फटने लगी, तब परमेश्वर ने एक कीड़े को भेजा, जिसने रेंड़ का पेड़ ऐसा काटा कि वह सूख गया।

योना 4:8 जब सूर्य उगा, तब परमेश्वर ने पुरवाई बहा कर लू चलाई, और घाम योना के सिर पर ऐसा लगा कि वह मूर्च्छा खाने लगा; और उसने यह कह कर मृत्यु मांगी, मेरे लिये जीवित रहने से मरना ही अच्छा है।

योना 4:9 परमेश्वर ने योना से कहा, तेरा क्रोध, जो रेंड़ के पेड़ के कारण भड़का है, क्या वह उचित है? उसने कहा, हां, मेरा जो क्रोध भड़का है वह अच्छा ही है, वरन क्रोध के मारे मरना भी अच्छा होता।

योना 4:10 तब यहोवा ने कहा, जिस रेंड़ के पेड़ के लिये तू ने कुछ परिश्रम नहीं किया, न उसको बढ़ाया, जो एक ही रात में हुआ, और एक ही रात में नाश भी हुआ; उस पर तू ने तरस खाई है।

योना 4:11 फिर यह बड़ा नगर नीनवे, जिस में एक लाख बीस हजार से अधिक मनुष्य हैं, जो अपने दाहिने बाएं हाथों का भेद नहीं पहचानते, और बहुत घरेलू पशु भी उस में रहते हैं, तो क्या मैं उस पर तरस न खाऊं?

 

एक साल में बाइबल: 

  • लैव्यव्यवस्था 23-24
  • मरकुस 1:1-22

बुधवार, 17 फ़रवरी 2021

प्रोत्साहन

 

          हमारे घर के निकट एक फिटनेस सेंटर है जहाँ लोग अपने शारीरिक स्वास्थ्य और सामर्थ्य को बेहतर करने के लिए आते हैं। जब भी मैं उस सेंटर में जाता हूँ, मैं प्रोत्साहित होता हूँ। वहाँ लगे हुए पोस्टर हमें स्मरण दिलाते हैं कि हम एक-दूसरे को जाँचें नहीं, परन्तु ऐसे शब्द और कार्य करें जिससे एक दूसरे को बेहतर होने में सहायता और प्रोत्साहन मिले।

            आत्मिक जीवन में जैसा व्यवहार होना चाहिए, यह उस बात की कितनी अच्छी तस्वीर है। कभी-कभी हम जो आत्मिक जीवन में सुधरने या बढ़ने के प्रयास कर रहे हैं, हमें ऐसा लग सकता है कि हम किसी अन्य व्यक्ति के समान आत्मिक रीति से उन्नत अथवा मसीह यीशु के साथ चलने में उसके समान योग्य नहीं हैं।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने हमें यह साफ़ और सीधा सुझाव दिया है “एक दूसरे को शान्ति दो और एक दूसरे की उन्नति का कारण बनो” (1 थिस्सलुनीकियों 5:11)। साथ ही उसने रोम के मसीही विश्वासियों को यह भी लिखा,हम में से हर एक अपने पड़ोसी को उसकी भलाई के लिये प्रसन्न करे कि उसकी उन्नति हो” (रोमियों 15:2)। यह ध्यान रखते हुए कि हमारा परमेश्वर पिता हमारे प्रति इतना प्रेमी तथा अनुग्रहकारी है, हम भी औरों को परमेश्वर का अनुग्रह दिखाएँ और प्रोत्साहन करने वाले कार्यों तथा बातों से उन्हें उभारें।

          जब हम “एक दूसरे को ग्रहण” (पद 7) करते हैं, तो साथ ही हम अपनी आत्मिक परिपक्वता के लिए, जो पवित्र आत्मा का कार्य है, परमेश्वर पर भरोसा भी बनाए रखें और उसके आज्ञाकारी बने रहें। परमेश्वर की आज्ञाकारिता में प्रति दिन चलते हुए हम अपने मसीही भाई-बहनों के मसीही विश्वास में बढ़ते जाने के लिए प्रोत्साहन का वातावरण बनाए रखें। - डेव ब्रैनन

 

प्रोत्साहन का एक शब्द, सफलता के लिए आगे बढ़ते रहने, 

या हार कर छोड़ देने का फर्क उत्पन्न कर सकता है।


अतः आगे को हम एक दूसरे पर दोष न लगाएँ, पर तुम यह ठान लो कि कोई अपने भाई के सामने ठेस या ठोकर खाने का कारण न रखे। - रोमियों 14:13

बाइबल पाठ: रोमियों 15:1-7

रोमियों 15:1 अतः हम बलवानों को चाहिए कि निर्बलों की निर्बलताओं को सहें, न कि अपने आप को प्रसन्न करें।

रोमियों 15:2 हम में से हर एक अपने पड़ोसी को उसकी भलाई के लिये प्रसन्न करे कि उसकी उन्नति हो।

रोमियों 15:3 क्योंकि मसीह ने अपने आप को प्रसन्न नहीं किया, पर जैसा लिखा है : “तेरे निन्दकों की निन्दा मुझ पर आ पड़ी।” 

रोमियों 15:4 जितनी बातें पहले से लिखी गईं, वे हमारी ही शिक्षा के लिये लिखी गईं हैं कि हम धीरज और पवित्र शास्त्र के प्रोत्साहन द्वारा आशा रखें।

रोमियों 15:5 धीरज और शान्ति का दाता परमेश्वर तुम्हें यह वरदान दे कि मसीह यीशु के अनुसार आपस में एक मन रहो।

रोमियों 15:6 ताकि तुम एक मन और एक स्वर में हमारे प्रभु यीशु मसीह के पिता परमेश्वर की स्तुति करो। 

रोमियों 15:7 इसलिये, जैसा मसीह ने परमेश्वर की महिमा के लिये तुम्हें ग्रहण किया है, वैसे ही तुम भी एक दूसरे को ग्रहण करो।

 

एक साल में बाइबल: 

  • लैव्यव्यवस्था 21-22
  • मत्ती 28

मंगलवार, 16 फ़रवरी 2021

कृपा

 

          काम से वापस घर लौटने पर मेरी माँ ने मुझसे कहा, “एस्तेरा, हमारी सहेली हैलन ने तुम्हारे लिए एक उपहार भेजा है।” बचपन में हमारे पास कुछ अधिक वस्तुएँ नहीं थीं, इसलिए डाक के द्वारा उपहार पाना, दोबारा क्रिसमस मनाने के समान था। इस अद्भुत महिला के द्वारा किए गए कृपा के इस कार्य ने मुझे उसमें होकर परमेश्वर के द्वारा प्रेम किया हुआ, स्मरण रखा हुआ, और मूल्यवान समझा हुआ महसूस करवाया।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में, जिन गरीब विधवाओं के लिए तबीता (दोरकास) ने वस्त्र बनाए थे, उन्होंने भी ऐसा ही अनुभव किया होगा। दोरकास प्रभु यीशु की अनुयायी थी, याफा में रहती थी, और समाज में अपने भले कार्यों के लिए जानी जाती थी। उसके लिए बाइबल में लिखा है कि “याफा में तबीता अर्थात दोरकास नाम एक विश्वासिनी रहती थी, वह बहुतेरे भले भले काम और दान किया करती थी” (प्रेरितों 9:36)। वह बीमार होकर मर गई थी। उस समय पतरस प्रेरित पास के एक नगर में आया हुआ था, इसलिए दो मसीही विश्वासी गए और उससे विनती की, कि वह याफा आए।

          जब पतरस याफा आया, तो दोरकास ने जिन विधवाओं की सहायता की थी, उन्होंने पतरस को उसकी कृपा के प्रमाण पतरस को दिखाए – “जो कुरते और कपड़े दोरकास ने उन के साथ रहते हुए बनाए थे, दिखाने लगीं” (पद 39)। हम यह तो नहीं जानते कि उन्होंने पतरस से कुछ करने के लिए कहा या नहीं, परन्तु पवित्र आत्मा की अगुवाई में पतरस ने प्रार्थना की और परमेश्वर ने दोरकास को फिर से जीवित कर दिया। परमेश्वर की इस कृपा का परिणाम था कि “यह बात सारे याफा में फैल गई: और बहुतेरों ने प्रभु पर विश्वास किया” (पद 42)।

          क्या हम अपने आस-पास के लोगों के प्रति कृपालु होते हैं? लोगों के प्रति हमारे कृपा का परिणाम उनका परमेश्वर की ओर मुड़ना हो सकता है। - एस्तेरा पिरोसका एस्कोबार

 

परमेश्वर की कृपा के जीवित उदाहरण बनें 

– आपके चेहरे में कृपा, आँखों में कृपा, मुस्कराहट में कृपा हो। - मदर टेरेसा


परमेश्वर ने किस रीति से यीशु नासरी को पवित्र आत्मा और सामर्थ्य से अभिषेक किया: वह भलाई करता, और सब को जो शैतान के सताए हुए थे, अच्छा करता फिरा; क्योंकि परमेश्वर उसके साथ था। - प्रेरितों 10:38

बाइबल पाठ: प्रेरितों 9:32-42

प्रेरितों 9:32 और ऐसा हुआ कि पतरस हर जगह फिरता हुआ, उन पवित्र लोगों के पास भी पहुंचा, जो लुद्दा में रहते थे।

प्रेरितों 9:33 वहां उसे ऐनियास नाम झोले का मारा हुआ एक मनुष्य मिला, जो आठ वर्ष से खाट पर पड़ा था।

प्रेरितों 9:34 पतरस ने उस से कहा; हे ऐनियास! यीशु मसीह तुझे चंगा करता है; उठ, अपना बिछौना बिछा; तब वह तुरन्त उठ खड़ हुआ।

प्रेरितों 9:35 और लुद्दा और शारोन के सब रहने वाले उसे देखकर प्रभु की ओर फिरे।

प्रेरितों 9:36 याफा में तबीता अर्थात दोरकास नाम एक विश्वासिनी रहती थी, वह बहुतेरे भले भले काम और दान किया करती थी।

प्रेरितों 9:37 उन्‍हीं दिनों में वह बीमार हो कर मर गई; और उन्होंने उसे नहला कर अटारी पर रख दिया।

प्रेरितों 9:38 और इसलिये कि लुद्दा याफा के निकट था, चेलों ने यह सुनकर कि पतरस वहां है दो मनुष्य भेज कर उसने बिनती की कि हमारे पास आने में देर न कर।

प्रेरितों 9:39 तब पतरस उठ कर उन के साथ हो लिया, और जब पहुंच गया, तो वे उसे उस अटारी पर ले गए; और सब विधवाएं रोती हुई उसके पास आ खड़ी हुई: और जो कुरते और कपड़े दोरकास ने उन के साथ रहते हुए बनाए थे, दिखाने लगीं।

प्रेरितों 9:40 तब पतरस ने सब को बाहर कर दिया, और घुटने टेककर प्रार्थना की; और लोथ की ओर देखकर कहा; हे तबीता उठ: तब उसने अपनी आंखें खोल दी; और पतरस को देखकर उठ बैठी।

प्रेरितों 9:41 उसने हाथ देकर उसे उठाया और पवित्र लोगों और विधवाओं को बुलाकर उसे जीवित और जागृत दिखा दिया।

प्रेरितों 9:42 यह बात सारे याफा में फैल गई: और बहुतेरों ने प्रभु पर विश्वास किया।

 

एक साल में बाइबल: 

  • लैव्यव्यवस्था 19-20
  • मत्ती 27:51-66

सोमवार, 15 फ़रवरी 2021

विश्राम

 

          अन्ततः सत्रह वर्षीय रैंडी गार्डनर ने वह कर दिया जो उसने ग्यारह दिन और पच्चीस मिनिट तक नहीं किया था – वह पड़कर सो गया। उसका प्रयास था कि वह गिन्निस बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में किसी भी मनुष्य के सबसे अधिक समय तक लगातार जागते रहने के कीर्तिमान को अपने नाम कर ले। जागते रहने के लिए वह कभी कुछ सॉफ्ट-ड्रिंक्स पीता, कभी बास्केटबॉल खेलता, या अन्य किसी बात में अपने आप को व्यस्त करता, और इस प्रकार डेढ़ सप्ताह तक रैंडी नींद को भगाता रहा; अन्ततः उसके थक कर सो जाने के समय तक उसके स्वाद, सूंघने, और सुनने के शक्ति बहुत गड़बड़ा गई थी। दशकों बाद, उसे बारंबार नींद न आने की बीमारी के प्रबल समयों का सामना भी करना पड़ा। उसने वह कीर्तिमान तो अपने नाम कर लिया, लेकिन एक प्रकट बात की पुष्टि भी कर दी – उचित मात्र और सही समय पर विश्राम भी मनुष्य के लिए आवश्यक है।

          हम में से बहुतेरे हैं जो रात में अच्छे विश्राम को पाने के लिए संघर्ष करते हैं। रैंडी ने तो जान-बूझकर अपने आप को सो जाने से रोके रखा, परन्तु कई बार, अनेकों कारणों से, हम सोना चाहते हुए भी ठीक से सोने नहीं पाते हैं; हमारी अनेकों बातों के लिए चिन्ताएँ, जैसे कि हमें अभी क्या कुछ करना शेष है; दूसरे लोग हम से जो अपेक्षाएँ रखते हैं उन पर पूरा उतरने के प्रयास, जीवन की तीव्र गति के अनुसार औरों के साथ स्पर्धा में अथक चलते रहने के प्रयास, आदि, हमें अपने भय और चिंताओं को छोड़कर शांत होकर विश्राम करने से रोके रखते हैं।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार लिखता है “यदि घर को यहोवा न बनाए, तो उसके बनाने वालों को परिश्रम व्यर्थ होगा” (भजन 127:1)। हमारा अपने आप को थका देने वाले प्रयास करते रहना, हमारा सारा परिश्रम व्यर्थ है, जब तक कि हम परमेश्वर की इच्छा के अनुसार कार्य न करें; क्योंकि वह हम से हमारी सभी आवश्यकताओं के अनुसार हमें सब कुछ प्रदान करने का वायदा करता है – उचित विश्राम भी (पद 2)। परमेश्वर का यह वायदा उसके सभी बच्चों से है। वह कहता है कि हम अपने बोझ और चिताएँ उस पर डाल दें, और उसमें विश्राम लें। - विन्न कोलियर

 

परमेश्वर पर भरोसा रखने से हम चिंता से मुक्त विश्राम में आ सकते हैं।


हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। - मत्ती 11:28

बाइबल पाठ: भजन 127:1-2

भजन 127:1 यदि घर को यहोवा न बनाए, तो उसके बनाने वालों को परिश्रम व्यर्थ होगा। यदि नगर की रक्षा यहोवा न करे, तो रखवाले का जागना व्यर्थ ही होगा।

भजन 127:2 तुम जो सवेरे उठते और देर कर के विश्राम करते और दु:ख भरी रोटी खाते हो, यह सब तुम्हारे लिये व्यर्थ ही है; क्योंकि वह अपने प्रियों को यों ही नींद दान करता है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • लैव्यव्यवस्था 17-18
  • मत्ती 27:27-50

रविवार, 14 फ़रवरी 2021

पहचान

 

          मैं हवाई जहाज़ में चढ़ने के लिए कतार में खड़ी थी, किसी ने पीछे से मेरा कंधा थपथपाया; मैंने जब पीछे मुड़कर देखा तो एक महिला ने बहुत गर्म-जोशी से मेरा अभिनंदन किया, और पूछा, “एलिसा, क्या तुम ने मुझे पहचाना? मैं जोएन हूँ!” मेरा मस्तिष्क उन विभिन्न ‘जोएन को याद करने लगा जिन से मेरी जानकारी रही थी, लेकिन उसके चेहरे से किसी का मेल नहीं कर पा रही थी। मेरी दुविधा को भांपते हुए, जोएन ने मेरी सहायता की, उसने कहा, “हम हाई-स्कूल में साथ हुआ करते थे।” इससे तुरंत कुछ स्मृतियाँ ध्यान में आई, और जैसे ही सन्दर्भ स्पष्ट हो गया, तो मैं उसे पहचान भी गई।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु की मृत्यु के बाद, तीसरे दिन भोर के समय मरियम मगदलीनी प्रभु की कब्र पर गई, और उसने पाया कि कब्र पर से पत्थर लुढ़का हुआ है, और प्रभु की देह वहाँ नहीं है (यूहन्ना 20:1-2)। तब वह भागकर प्रभु के शिष्यों के पास गई, और पतरस तथा यूहन्ना उसके साथ आए और उन्होंने भी देखा देखा कि कब्र खाली है, अचम्भा किया और वापस लौट गए (पद 3-10)। किन्तु शोक में मरियम वहीं कब्र के पास ही बनी रही (पद 11)। जब वहाँ पर प्रभु यीशु उसके पास आए तो उसने नहीं पहचाना कि वह प्रभु है (पद 14), वरन उसने उन्हें वहाँ का माली समझा (पद 15)।

          वह प्रभु यीशु को क्यों नहीं पहचान पाई? क्या प्रभु के पुनरुत्थान के बाद उनकी देह इतनी बदल गई थी कि उन्हें पहचान पाना कठिन था? या, क्या उसके शोक ने उसे पहचान पाने से अंधा कर दिया था? या, जैसे मेरे साथ हुआ था, उसी प्रकार से वहाँ पर तब प्रभु यीशु “सन्दर्भ के अनुसार” नहीं थे – उन्हें बगीचे में जीवित नहीं, कब्र में मृतक अवस्था में होना चाहिए था; और इस अनपेक्षित स्थिति के कारण मरियम ने उन्हें अपेक्षा के सन्दर्भ के अनुसार माली समझ लिया! जैसे ही सन्दर्भ सही हुआ, मरियम ने प्रभु को पहचान लिया, जैसे मैं अपनी पुरानी सहेली को सन्दर्भ के सही होने के द्वारा पहचान पाई थी।

          आज हमारे प्रार्थना करने, बाइबल पढ़ने, या किसी अन्य बात में जब प्रभु हमारे पास आता है, तो क्या हम उसे पहचानने पाते हैं? वह हमें कभी अकेला नहीं छोड़ता है, वह सदा हमारे साथ बना रहता है। - एलिसा मॉर्गन

 

प्रभु यीशु को सदा अपने साथ बना हुआ समझें, अनपेक्षित स्थानों और समयों में भी!


मैं तुम्हें अनाथ न छोडूंगा, मैं तुम्हारे पास आता हूं। - यूहन्ना 14:18

बाइबल पाठ: यूहन्ना 20:13-18

यूहन्ना 20:13 उन्होंने उस से कहा, हे नारी, तू क्यों रोती है? उसने उन से कहा, वे मेरे प्रभु को उठा ले गए और मैं नहीं जानती कि उसे कहां रखा है।

यूहन्ना 20:14 यह कहकर वह पीछे फिरी और यीशु को खड़े देखा और न पहचाना कि यह यीशु है।

यूहन्ना 20:15 यीशु ने उस से कहा, हे नारी तू क्यों रोती है? किस को ढूंढ़ती है? उसने माली समझकर उस से कहा, हे महाराज, यदि तू ने उसे उठा लिया है तो मुझ से कह कि उसे कहां रखा है और मैं उसे ले जाऊंगी।

यूहन्ना 20:16 यीशु ने उस से कहा, मरियम! उसने पीछे फिरकर उस से इब्रानी में कहा, रब्‍बूनी अर्थात हे गुरु।

यूहन्ना 20:17 यीशु ने उस से कहा, मुझे मत छू क्योंकि मैं अब तक पिता के पास ऊपर नहीं गया, परन्तु मेरे भाइयों के पास जा कर उन से कह दे, कि मैं अपने पिता, और तुम्हारे पिता, और अपने परमेश्वर और तुम्हारे परमेश्वर के पास ऊपर जाता हूं।

यूहन्ना 20:18 मरियम मगदलीनी ने जा कर चेलों को बताया, कि मैं ने प्रभु को देखा और उसने मुझ से ये बातें कहीं।

 

एक साल में बाइबल: 

  • लैव्यव्यवस्था 15-16
  • मत्ती 27:1-26