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गुरुवार, 18 मार्च 2021

आनन्द

 

          जब भी मेरी मित्र मेरी फोन कॉल को ले पाने में किसी भी कारण से असमर्थ होती थी, उसकी वोइस मेल रिकॉडिंग मशीन मुझे उसके लिए सन्देश रिकार्ड कर के छोड़ देने के लिए कहती थी, और अपनी बात का अन्त प्रसन्नता के सन्देश, “आपका दिन अच्छा बीते” कहकर करती थी। मैं उस मशीन द्वारा कही गई बात पर मनन कर रही थी, और मुझे ध्यान आया कि यह हमारे हाथ में नहीं है कि हम अपने हर दिन को अच्छा बना सकें – कभी-कभी कुछ परिस्थितियाँ वास्तव में बहुत दुःख देने वाली होती हैं। परन्तु यदि मैं दिन भर की बातों और कार्यों का ध्यान से पुनः अवलोकन करूँ, तो मुझे अपने दिन में कुछ न कुछ मनोहर या अच्छा लगने वाला मिल सकता है, चाहे परिस्थितियाँ भली हों अथवा बुरी।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में हबक्कूक नबी कठिन परिस्थितियों से होकर निकल रहा था। परमेश्वर ने उसे आने वाले वो दिन दिखाए थे जब उनकी निरंतर अनाज्ञाकारिता और पाप के कारण सब बर्बाद हो जाएगा, न फसल और न पशु – जिन पर परमेश्वर के लोग निर्भर करते थे, फलदायी रहेंगे (3:17)। आने वाली कठिन परिस्थितियों को झेल पाने के लिए केवल आशावादी होने भर से ही काम नहीं चलेगा। इस्राएल अत्यधिक निर्धनता की स्थिति से होकर निकलेगा, जो कलेजे को कंपा देने, होंठ थरथरा देने, टाँगों को कंपकंपा देने वाली होगी (पद 16)।

          लेकिन ऐसा होते हुए भी, हबक्कूक ने कहा कि वह यहोवा के कारण आनन्दित और मगन रहेगा (पद 18)। उसने अपनी आशा परमेश्वर ही को बनाया, जो कठिन स्थानों में भी चलते रहने की सामर्थ्य प्रदान करता है (पद 19)।

          कभी-कभी हम गहरे दुःख और कठिनाइयों के समयों में से होकर निकलते हैं, और जीवन बहुत अभिभूत करने वाला लग सकता है। किन्तु हमने चाहे जो खो दिया हो, या बहुत लालसा रखने के बाद भी कुछ ऐसा ही जिसे हम प्राप्त न कर सके हों, फिर भी हबक्कूक के समान, हम भी प्रेमी पिता परमेश्वर के साथ अपने संबंध को लेकर आनन्दित हो सकते हैं। चाहे हमें ऐसा लगे कि अब हमारे पास कुछ नहीं बचा है, तब भी हमारे पास यह दृढ़ आशा है कि हमारा पिता परमेश्वर न तो हमें अकेला और असहाय छोड़ेगा और न कभी हमें त्यागेगा (इब्रानियों 13:5)। वही हमें हर परिस्थिति में उपलब्ध करवाता है (यशायाह 61:2, 3), वही हमारे आनन्द का कारण है। - कर्स्टन होल्मबर्ग

 

हे प्रभु, मेरी परिस्थितियाँ चाहे कैसी भी हों, मैं आप में सदा आनन्दित रह सकूँ।


कि यहोवा के प्रसन्न रहने के वर्ष का और हमारे परमेश्वर के पलटा लेने के दिन का प्रचार करूं; कि सब विलाप करने वालों को शान्ति दूँ और सिय्योन के विलाप करने वालों के सिर पर की राख दूर कर के सुन्दर पगड़ी बान्ध दूं, कि उनका विलाप दूर कर के हर्ष का तेल लगाऊं और उनकी उदासी हटाकर यश का ओढ़ना ओढ़ाऊं; जिस से वे धर्म के बांज वृक्ष और यहोवा के लगाए हुए कहलाएं और जिस से उसकी महिमा प्रगट हो। - यशायाह 61:2, 3

बाइबल पाठ: हबक्कूक 3:13-19

हबक्कूक 3:13 तू अपनी प्रजा के उद्धार के लिये निकला, हां, अपने अभिषिक्त के संग हो कर उद्धार के लिये निकला। तू ने दुष्ट के घर के सिर को घायल कर के उसे गले से नींव तक नंगा कर दिया।

हबक्कूक 3:14 तू ने उसके योद्धाओं के सिरों को उसी की बरछी  से छेदा है, वे मुझ को तितर-बितर करने के लिये बवंडर की आंधी के समान आए, और दीन लोगों को घात लगा कर मार डालने की आशा से आनन्दित थे।

हबक्कूक 3:15 तू अपने घोड़ों पर सवार हो कर समुद्र से हां, जलप्रलय से पार हो गया।

हबक्कूक 3:16 यह सब सुनते ही मेरा कलेजा कांप उठा, मेरे ओंठ थरथराने लगे; मेरी हड्डियां सड़ने लगीं, और मैं खड़े खड़े कांपने लगा। मैं शान्ति से उस दिन की बाट जोहता रहूंगा जब दल बांध कर प्रजा चढ़ाई करे।

हबक्कूक 3:17 क्योंकि चाहे अंजीर के वृक्षों में फूल न लगें, और न दाखलताओं में फल लगें, जलपाई  के वृक्ष से केवल धोखा पाया जाए और खेतों में अन्न न उपजे, भेड़शालाओं में भेड़-बकरियां न रहें, और न थानों में गाय बैल हों,

हबक्कूक 3:18 तौभी मैं यहोवा के कारण आनन्दित और मगन रहूंगा, और अपने उद्धारकर्ता परमेश्वर के द्वारा अति प्रसन्न रहूंगा।

हबक्कूक 3:19 यहोवा परमेश्वर मेरा बलमूल है, वह मेरे पांव हरिणों के समान बना देता है, वह मुझ को मेरे ऊंचे स्थानों पर चलाता है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • व्यवस्थाविवरण 32-34
  • मरकुस 15:26-47

बुधवार, 17 मार्च 2021

साहस

 

          यद्यपि अधिकांश जर्मन चर्च अधिकारियों ने हिटलर के आगे घुटने टेक दिए थे, धर्म-विज्ञानी और पास्टर, मार्टिन निमोलर, उन थोड़े से साहसी लोगों में से थे जिन्होंने नात्ज़ी बुराई का सामना किया। मैंने एक घटना पढ़ी थी, कि कैसे 1970 में कुछ वृद्ध दिखने वाले जर्मन लोगों का एक समूह एक बड़े से होटल के सामने खड़ा था, और उनमें से एक जन, जो कुछ जवान प्रतीत हो रहा था, वह उनके सामान के साथ दौड़-धूप कर रहा था। किसी ने पूछा कि वह समूह किन लोगों का था, और वह जवान दिखने वाला व्यक्ति कौन था? तो उत्तर मिला कि वह जर्मन पास्टरों का समूह था, और दौड़-धूप करने वाला व्यक्ति अस्सी वर्षीय मार्टिन निमोलर था, जो अभी भी जवान था क्योंकि वह डरता नहीं था।

          निमोलर में कोई अलौकिक वस्तु नहीं थी जिसके कारण वह डर का सामना कर सकता था; यह उस पर परमेश्वर के अनुग्रह के कारण था। एक समय ऐसा था जब निमोलर भी यहूदियों के प्रति बैर रखता था; परन्तु उसने पश्चाताप किया और परमेश्वर ने उसे उद्धार दिया, और सत्य बोलने तथा जीने की सामर्थ्य प्रदान की।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में, मूसा ने इस्राएलियों को प्रोत्साहित किया कि वे डर का सामना करें और परमेश्वर के सत्य का निर्वाह करें। जब वे इस्राएली यह जानकर कि उनका अगुवा शीघ्र ही उन से ले लिया जाएगा भयभीत होने लगे तो मूसा ने उन से कहा: “तू हियाव बान्ध और दृढ़ हो, उन से न डर और न भयभीत हो; क्योंकि तेरे संग चलने वाला तेरा परमेश्वर यहोवा है; वह तुझ को धोखा न देगा और न छोड़ेगा” (व्यवस्थाविवरण 31:6)। उन्हें अनिश्चित भविष्य को लेकर भयभीत होने की कोई आवश्यकता नहीं थी, क्योंकि परमेश्वर उनके साथ था, इसलिए वे भविष्य का सामना साहस के साथ निडर होकर कर सकते थे।

          आज आपके जीवन में चाहे जो भी कठिनाई, जो भी अन्धकार क्यों न हो, कोई बात क्यों न हो जो आपको आतंकित कर रही है, परमेश्वर सदा आपके साथ है। परमेश्वर के अनुग्रह और सामर्थ्य से आप हर परिस्थिति का सफलतापूर्वक सामना कर सकते हैं, क्योंकि वह आपको न तो कभी छोड़ेगा और न कभी त्यागेगा। साहस के साथ, निडर होकर परमेश्वर के मार्गों पर चलते रहें, और वह आपको सफलतापूर्वक लिए चलेगा।

 

निडर होने का यह अर्थ नहीं है कि हमें डर नहीं लगता है; 

वरन यह कि हम उस डर के आगे झुकते नहीं हैं।


इतना हो कि तू हियाव बान्धकर और बहुत दृढ़ हो कर जो व्यवस्था मेरे दास मूसा ने तुझे दी है उन सब के अनुसार करने में चौकसी करना; और उस से न तो दाहिने मुड़ना और न बाएं, तब जहां जहां तू जाएगा वहां वहां तेरा काम सफल होगा। व्यवस्था की यह पुस्तक तेरे चित्त से कभी न उतरने पाए, इसी में दिन रात ध्यान दिए रहना, इसलिये कि जो कुछ उस में लिखा है उसके अनुसार करने की तू चौकसी करे; क्योंकि ऐसा ही करने से तेरे सब काम सफल होंगे, और तू प्रभावशाली होगा। - यहोशू 1:7-8

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण 31:1-8

व्यवस्थाविवरण 31:1 और मूसा ने जा कर यह बातें सब इस्राएलियों को सुनाईं।

व्यवस्थाविवरण 31:2 और उसने उन से यह भी कहा, कि आज मैं एक सौ बीस वर्ष का हूं; और अब मैं चल फिर नहीं सकता; क्योंकि यहोवा ने मुझ से कहा है, कि तू इस यरदन पार नहीं जाने पाएगा।

व्यवस्थाविवरण 31:3 तेरे आगे पार जाने वाला तेरा परमेश्वर यहोवा ही है; वह उन जातियों को तेरे सामने से नष्ट करेगा, और तू उनके देश का अधिकारी होगा; और यहोवा के वचन के अनुसार यहोशू तेरे आगे आगे पार जाएगा।

व्यवस्थाविवरण 31:4 और जिस प्रकार यहोवा ने एमोरियों के राजा सीहोन और ओग और उनके देश को नष्ट किया है, उसी प्रकार वह उन सब जातियों से भी करेगा।

व्यवस्थाविवरण 31:5 और जब यहोवा उन को तुम से हरवा देगा, तब तुम उन सारी आज्ञाओं के अनुसार उन से करना जो मैं ने तुम को सुनाईं हैं।

व्यवस्थाविवरण 31:6 तू हियाव बान्ध और दृढ़ हो, उन से न डर और न भयभीत हो; क्योंकि तेरे संग चलने वाला तेरा परमेश्वर यहोवा है; वह तुझ को धोखा न देगा और न छोड़ेगा।

व्यवस्थाविवरण 31:7 तब मूसा ने यहोशू को बुलाकर सब इस्राएलियों के सम्मुख कहा, कि तू हियाव बान्ध और दृढ़ हो जा; क्योंकि इन लोगों के संग उस देश में जिसे यहोवा ने इनके पूर्वजों से शपथ खाकर देने को कहा था तू जाएगा; और तू इन को उसका अधिकारी कर देगा।

व्यवस्थाविवरण 31:8 और तेरे आगे आगे चलने वाला यहोवा है; वह तेरे संग रहेगा, और न तो तुझे धोखा देगा और न छोड़ देगा; इसलिये मत डर और तेरा मन कच्चा न हो।

 

एक साल में बाइबल: 

  • व्यवस्थाविवरण 30-31
  • मरकुस 15:1-25 

मंगलवार, 16 मार्च 2021

चिह्न

 

          आयोवा विश्वविद्यालय की बास्केटबॉल टीम का प्रतिष्ठित खिलाड़ी, जॉर्डन बोहानन, अपनी टीम के इतिहास में एक नया कीर्तिमान बनाने की कगार पर था, लेकिन उसने जानबूझकर बॉल को सही नहीं फेंका और उसके स्कूल का पच्चीस वर्ष पुराना कीर्तिमान बना रहा। उसने यह क्यों किया? वर्ष 1993 में आयोवा के क्रिस स्ट्रीट ने एक के बाद एक चौंतीस बार फ्री थ्रो में बॉल सही फेंक कर कीर्तिमान बनाया और उसके कुछ ही दिन के बाद एक कार दुर्घटना में उसकी मृत्यु हो गई। जॉर्डन ने अपनी प्रतिष्ठा के स्थान पर क्रिस की इस स्मृति को बनाए रखने को चुना, और उसके द्वारा स्थापित इस कीर्तिमान को नहीं तोड़ा।

          जॉर्डन ने अपनी उन्नति से अधिक महत्वपूर्ण बात पर ध्यान दिया। हम परमेश्वर के वचन बाइबल में युवा योद्धा दाऊद में भी यही भावना देखते हैं। दाऊद राजा शाऊल और शत्रु फिलिस्तियों की सेनाओं से जान बचा कर एक गुफा में अपने साथियों, जो उसकी ‘सेना भी थे, के साथ छुपा हुआ था। वहाँ उसके मन में अपने घर के स्थान बैतलहम के कुएँ का पानी पीने की तीव्र इच्छा हुई, लेकिन खतरनाक पलिस्तीनी लोग उसके चारों ओर बसे हुए थे (2 शमूएल 23:14-15)।

          हतप्रभ कर देने वाले बहादुरी दिखाते हुए उसके तीन साथियों ने पलिस्तियों का सामना किया, उनसे बच कर निकल गए, कुएँ से पानी लिया और दाऊद के पास ले आए। किन्तु दाऊद उसे पीने के लिए अपने आप को तैयार न कर सका,और कहा, हे यहोवा, मुझ से ऐसा काम दूर रहे। क्या मैं उन मनुष्यों का लहू पीऊं जो अपने प्राणों पर खेल कर गए थे? इसलिये उसने उस पानी को पीने से इनकार किया” (2 शमूएल 23:17)।

          ऐसे संसार में जो अकसर उन्हें आदर देता है जो वह सब कुछ छीन और हथिया लेते है, जो वो ले सकते हैं, प्रेम और बलिदान के ऐसे कार्य कितने शक्तिशाली, और प्रोत्साहन देने वाली स्मृतियाँ हो सकते हैं! इस प्रकार के कार्य केवल एक चिह्न ही नहीं हैं; उनका महत्व चिह्न होने से कहीं बढ़कर है। - टिम गुस्ताफ्सन

 

हे पिता परमेश्वर मुझे औरों की आवश्यकताओं का ध्यान रखने वाला बनाएँ।


हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्ता करे। - फिलिप्पियों 2:4

बाइबल पाठ: 2 शमूएल 23:13-17

2 शमूएल 23:13 फिर तीसों मुख्य सरदारों में से तीन जन कटनी के दिनों में दाऊद के पास अदुल्लाम नाम गुफा में आए, और पलिश्तियों का दल रपाईम नाम तराई में छावनी किए हुए था।

2 शमूएल 23:14 उस समय दाऊद गढ़ में था; और उस समय पलिश्तियों की चौकी बेतलेहेम में थी।

2 शमूएल 23:15 तब दाऊद ने बड़ी अभिलाषा के साथ कहा, कौन मुझे बेतलेहेम के फाटक के पास के कुएं का पानी पिलाएगा?

2 शमूएल 23:16 तो वे तीनों वीर पलिश्तियों की छावनी में टूट पड़े, और बेतलेहेम के फाटक के कुंए से पानी भर के दाऊद के पास ले आए। परन्तु उसने पीने से इनकार किया, और यहोवा के सामने अर्घ कर के उण्डेला,

2 शमूएल 23:17 और कहा, हे यहोवा, मुझ से ऐसा काम दूर रहे। क्या मैं उन मनुष्यों का लहू पीऊं जो अपने प्राणों पर खेल कर गए थे? इसलिये उसने उस पानी को पीने से इनकार किया। इन तीन वीरों ने तो ये ही काम किए।

 

एक साल में बाइबल: 

  • व्यवस्थाविवरण 28-29
  • मरकुस 14:54-72 

सोमवार, 15 मार्च 2021

सामर्थ्य

 

          व्यावसायिक जगत में काम करने के कारण मुझे अवसर मिला कि अनेकों कुशल और सूझ-बूझ वाले लोगों के साथ बातचीत और कार्य करूं, उनसे संपर्क रखूँ। लेकिन एक परियोजना पर काम करने का अनुभव कुछ भिन्न ही था। उस परियोजना का संचालक बाहर स्थान पर रहता था, और हमारी उससे बातचीत फोन के द्वारा होती थी, साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट उसे फोन के द्वारा दी जाती थी। हमने चाहे जितना भी कार्य किया हो, कितनी भी अच्छी प्रगति हुई हो, यह मैनेजर हमेशा ही हमारे कार्य की कटु आलोचना करता था, और हर बार हमारे कार्य को कम बता कर, और अधिक कार्य करने के लिए कहता था। उसकी ये बातें सुनते-सुनते मैं निरुत्साहित होने लगा और उससे बात करने में संकोच करने लगा। कभी-कभी तो मैं काम छोड़ देना चाहता था।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में संभव है कि मूसा को भी कुछ ऐसा ही लगा होगा जब अन्धकार वाली विपत्ति के समय वह फिरौन से मिला होगा। परमेश्वर ने मिस्र पर इससे पहले आठ विपत्तियाँ भेजी थीं, और अब इस नौवीं विपत्ति में पड़ने से फिरौन ने आप खो दिया, और उसने क्रोध में मूसा से कहा,मेरे सामने से चला जा; और सचेत रह; मुझे अपना मुख फिर न दिखाना; क्योंकि जिस दिन तू मुझे मुंह दिखलाए उसी दिन तू मारा जाएगा” (निर्गमन 10:28)।

          उसकी इस धमकी के बावजूद, परमेश्वर ने मूसा ही को इस्राएलियों को मिस्र और फिरौन की अधीनता से छुड़ाने के लिए प्रयोग किया, “विश्वास ही से राजा के क्रोध से न डर कर उसने मिस्र को छोड़ दिया, क्योंकि वह अनदेखे को मानो देखता हुआ दृढ़ रहा” (इब्रानियों 11:27)। मूसा फिरौन का सामना करके उस पर विजय इसलिए प्राप्त कर सका क्योंकि उसे पूरा भरोसा था कि परमेश्वर छुटकारे की अपनी प्रतिज्ञा को पूरा करेगा (निर्गमन 3:17)।

          आज हम इस प्रतिज्ञा पर भरोसा रख सकते हैं कि हर परिस्थिति में परमेश्वर हमारे साथ है, अपनी पवित्र आत्मा के द्वारा हमें सहारा दिए हुए है। वह हमारी सहायता करता है कि हम धमकियों और दबाव का प्रतिरोध कर सकें, उनकी कोई अनुचित प्रतिक्रिया न दें। ऐसा करने के लिए वह हमें अलौकिक सामर्थ्य, प्रेम, और आत्मा-नियंत्रण प्रदान करता है (2 तिमुथियुस 1:7)। हम मसीही विश्वासियों में निवास करने वाला परमेश्वर पवित्र आत्मा हमें अपने कार्यों को करते रहने और परमेश्वर के मार्गदर्शन में चलते रहने का साहस और सामर्थ्य प्रदान करता है। - जेनिफर बेनसन शुल्टज़

 

प्रभु मेरी सहायता करें कि मैं हर बात के लिए आपकी ओर देखता रहूं, 

आपसे मार्गदर्शन और सामर्थ्य प्राप्त करता रहूं।


क्योंकि परमेश्वर ने हमें भय की नहीं पर सामर्थ्य, और प्रेम, और संयम की आत्मा दी है। - 2 तीमुथियुस 1:7

बाइबल पाठ: निर्गमन 10:21-29

निर्गमन 10:21 फिर यहोवा ने मूसा से कहा, अपना हाथ आकाश की ओर बढ़ा कि मिस्र देश के ऊपर अन्धकार छा जाए, ऐसा अन्धकार कि टटोला जा सके।

निर्गमन 10:22 तब मूसा ने अपना हाथ आकाश की ओर बढ़ाया, और सारे मिस्र देश में तीन दिन तक घोर अन्धकार छाया रहा।

निर्गमन 10:23 तीन दिन तक न तो किसी ने किसी को देखा, और न कोई अपने स्थान से उठा; परन्तु सारे इस्राएलियों के घरों में उजियाला रहा।

निर्गमन 10:24 तब फिरौन ने मूसा को बुलवाकर कहा, तुम लोग जाओ, यहोवा की उपासना करो; अपने बालकों को भी संग ले जाओ; केवल अपनी भेड़-बकरी और गाय-बैल को छोड़ जाओ।

निर्गमन 10:25 मूसा ने कहा, तुझ को हमारे हाथ मेलबलि और होमबलि के पशु भी देने पड़ेंगे, जिन्हें हम अपने परमेश्वर यहोवा के लिये चढ़ाएं।

निर्गमन 10:26 इसलिये हमारे पशु भी हमारे संग जाएंगे, उनका एक खुर तक न रह जाएगा, क्योंकि उन्हीं में से हम को अपने परमेश्वर यहोवा की उपासना का सामान लेना होगा, और हम जब तक वहां न पहुंचें तब तक नहीं जानते कि क्या क्या ले कर यहोवा की उपासना करनी होगी।

निर्गमन 10:27 पर यहोवा ने फिरौन का मन हठीला कर दिया, जिस से उसने उन्हें जाने न दिया।

निर्गमन 10:28 तब फिरौन ने उस से कहा, मेरे सामने से चला जा; और सचेत रह; मुझे अपना मुख फिर न दिखाना; क्योंकि जिस दिन तू मुझे मुंह दिखलाए उसी दिन तू मारा जाएगा।

निर्गमन 10:29 मूसा ने कहा, कि तू ने ठीक कहा है; मैं तेरे मुंह को फिर कभी न देखूंगा।

 

एक साल में बाइबल: 

  • व्यवस्थाविवरण 26-27
  • मरकुस 14:27-53

रविवार, 14 मार्च 2021

पहचान

 

          एक टीवी कार्यक्रम में जवान लोगों ने, किशोरों के जीवन को बेहतर समझने के लिए, स्कूल के किशोर छात्रों की भूमिका निभाई। उन्होंने पाया कि किशोरों द्वारा अपनी पहचान के मूल्यांकन में सोशल मीडिया का बहुत बड़ा स्थान है। कार्यक्रम में भाग लेने वाले एक व्यक्ति ने कहा “छात्रों द्वारा स्वयं का मूल्यांकन सोशल मीडिया के साथ जुड़ा हुआ है, और इस पर निर्भर करता है कि उनके द्वारा पोस्ट की गई किसी फोटो को कितने लोग पसंद करते हैं।” औरों के द्वारा पसंद किए जाने की इस आवश्यकता के कारण युवा इंटरनेट पर कई प्रकार के विचित्र व्यवहार करने लगते हैं।

          औरों के द्वारा स्वीकार किए जाने की लालसा मनुष्य में सदा से ही रही है। परमेश्वर के वचन बाइबल में, उत्पत्ति 29 में याकूब की पत्नी, लिआः अपने पति का प्रेम पाने की चाह रखती थी, जो स्वाभाविक भी है। उसकी यह लालसा उसके तीन पुत्रों के नामों में झलकती है – वे तीनों नाम उसके अकेलेपन को दिखाते हैं (पद 31 – 34)। परन्तु, दुःख की बात है कि याकूब से उसको वह प्रेम नहीं मिला जिसकी उसको लालसा थी।

          उसके चौथे पुत्र के जन्म के बाद, लिआः अपने पति के स्थान पर, परमेश्वर की ओर मुड़ी, और अपने पुत्र का नाम यहूदा, जिसका अर्थ होता है “स्तुति,” रखा (पद 35)। लगता है कि अन्ततः लिआः ने अपने महत्व को परमेश्वर में प्राप्त करने का निर्णय ले लिया। वह परमेश्वर द्वारा बनाई गई मनुष्यों के उद्धार की योजना का भाग बन गई, प्रभु यीशु मसीह दाऊद के वंश से आया, और दाऊद यहूदा के वंश से था।

          हम अपने महत्व को अनेकों रीतियों से प्राप्त करने के प्रयास कर सकते हैं, परन्तु हमारी वास्तविक पहचान प्रभु यीशु मसीह ही में है, जिस में होकर हम परमेश्वर की संतान और मसीह के संगी वारिस, तथा वो लोग जो स्वर्गीय पिता परमेश्वर के साथ अनन्तकाल तक निवास करेंगे, बनते हैं। जैसा प्रेरित पौलुस ने लिखा,वरन मैं अपने प्रभु मसीह यीशु की पहचान की उत्तमता के कारण सब बातों को हानि समझता हूं: जिस के कारण मैं ने सब वस्तुओं की हानि उठाई, और उन्हें कूड़ा समझता हूं, जिस से मैं मसीह को प्राप्त करूं” (फिलिप्पियों 3:8)। - पीटर चिन

 

हम हमारी वास्तविक पहचान अपने प्रभु परमेश्वर में पाते हैं, अन्य मनुष्यों से नहीं।


और यदि सन्तान हैं, तो वारिस भी, वरन परमेश्वर के वारिस और मसीह के संगी वारिस हैं, जब कि हम उसके साथ दुख उठाएं कि उसके साथ महिमा भी पाएँ। - रोमियों 8:17

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 29:31-35

उत्पत्ति 29:31 जब यहोवा ने देखा, कि लिआः अप्रिय हुई, तब उसने उसकी कोख खोली, पर राहेल बांझ रही।

उत्पत्ति 29:32 सो लिआः गर्भवती हुई, और उसके एक पुत्र उत्पन्न हुआ, और उसने यह कहकर उसका नाम रूबेन रखा, कि यहोवा ने मेरे दु:ख पर दृष्टि की है: सो अब मेरा पति मुझ से प्रीति रखेगा।

उत्पत्ति 29:33 फिर वह गर्भवती हुई और उसके एक पुत्र उत्पन्न हुआ; और उसने यह कहा कि यह सुन के, कि मैं अप्रिय हूं यहोवा ने मुझे यह भी पुत्र दिया: इसलिये उसने उसका नाम शिमोन रखा।

उत्पत्ति 29:34 फिर वह गर्भवती हुई और उसके एक पुत्र उत्पन्न हुआ; और उसने कहा, अब की बार तो मेरा पति मुझ से मिल जाएगा, क्योंकि उस से मेरे तीन पुत्र उत्पन्न हुए: इसलिये उसका नाम लेवीय रखा गया।

उत्पत्ति 29:35 और फिर वह गर्भवती हुई और उसके एक और पुत्र उत्पन्न हुआ; और उसने कहा, अब की बार तो मैं यहोवा का धन्यवाद करूंगी, इसलिये उसने उसका नाम यहूदा रखा; तब उसकी कोख बन्द हो गई।

 

एक साल में बाइबल: 

  • व्यवस्थाविवरण 23-25
  • मरकुस 13:21-37

शनिवार, 13 मार्च 2021

समझ

 

          वर्ष 1989 से बेघर और असहाय लोगों की सहायता करने वाली ‘गुड़ वर्क्स नामक एक संस्था के कार्यकारी निर्देशक, कीयथ वस्सरमैन ने हर साल कुछ दिन ‘बेघर होकर रहने का निर्णय लिया है, और रहते हैं। जिन लोगों की सेवा में उनकी संस्था लगी हुई है, उनकी समस्याओं और परिस्थितियों की समझ को जानते और समझते रहने के लिए वे सड़कों और गलियों में जाकर बेघर लोगों के साथ रहते हैं, और उनके हालात की समझा-बूझ लेते हैं।

          मैं सोचती हूँ कि कीयथ वस्सरमैन द्वारा किया जाने वाला यह कार्य, उनकी यह सोच, क्या वही नहीं है जो प्रभु यीशु ने हमारे लिए अपनाई है। वे सृष्टिकर्ता परमेश्वर हैं, किन्तु हम मनुष्यों के उद्धार के लिए वे एक शिशु बनकर संसार में आए, शिशु के समान असहाय और दुर्बल होकर रहे, साधारण मनुष्य के समान सब कुछ देखते और सहते हुए बड़े हुए, और वह सब कुछ स्वयं भी अनुभव किया जिसका एक साधारण मनुष्य सामान्यतः करना पड़ता है। और फिर अन्ततः, वे अपने ही शिष्य द्वारा धोखे से पकड़वाए गए और मनुष्यों के हाथों मारे भी गए, ताकि हम परमेश्वर के साथ संबंध में आने का अनुभव कर सकें।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में इब्रानियों को लिखी पत्री का लेखक कहता है कि,इसलिये जब कि लड़के मांस और लहू के भागी हैं, तो वह आप भी उन के समान उन का सहभागी हो गया; ताकि मृत्यु के द्वारा उसे जिसे मृत्यु पर शक्ति मिली थी, अर्थात शैतान को निकम्मा कर दे” (इब्रानियों 2:14)। यद्यपि प्रभु यीशु स्‍वर्गदूतों के भी सृष्टिकर्ता हैं (पद 9), फिर भी उन्होंने अपने आप को उन से भी छोटा कर लिया। यद्यपि वे अमर हैं, फिर भी उन्होंने अपने आप को नश्वर मनुष्य बना लिया और मृत्यु को सह लिया। यद्यपि वे सर्व-सामर्थी परमेश्वर हैं, फिर भी उन्होंने हमारे लिए हर प्रकार का दुःख सहा। उन्होंने यह सब क्यों किया? ताकि जब हम किसी परीक्षा या प्रलोभन या परेशानी से होकर निकलें तो वे हमारी सहायता कर सकें, और हमारा मेल-मिलाप परमेश्वर के साथ करवा सकें (आयतें 17-18)।

          हम, हमारे प्रति उनके इस प्रेम को समझ सकें; यह ध्यान में रखते हुए कि उन्हें हमारी परिस्थितियों और अनुभवों की समझ है; और हमारी आवश्यकताओं की समझ रखते हुए ही उन्होंने हमारे लिए पापों से छुटकारे का मार्ग बना कर दिया है। - एस्तेरा पिरोसका एस्कोबार

 

हे प्रभु यीशु, आपके जीवन, बलिदान, और पुनरुत्थान के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।


जैसा मसीह यीशु का स्वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्वभाव हो। जिसने परमेश्वर के स्वरूप में हो कर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्तु न समझा। वरन अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया। - फिलिप्पियों 2:5-7

बाइबल पाठ: इब्रानियों 2:9-18

इब्रानियों 2:9 पर हम यीशु को जो स्‍वर्गदूतों से कुछ ही कम किया गया था, मृत्यु का दुख उठाने के कारण महिमा और आदर का मुकुट पहने हुए देखते हैं; ताकि परमेश्वर के अनुग्रह से हर एक मनुष्य के लिये मृत्यु का स्वाद चखे।

इब्रानियों 2:10 क्योंकि जिस के लिये सब कुछ है, और जिस के द्वारा सब कुछ है, उसे यही अच्छा लगा कि जब वह बहुत से पुत्रों को महिमा में पहुंचाए, तो उन के उद्धार के कर्ता को दुख उठाने के द्वारा सिद्ध करे।

इब्रानियों 2:11 क्योंकि पवित्र करने वाला और जो पवित्र किए जाते हैं, सब एक ही मूल से हैं: इसी कारण वह उन्हें भाई कहने से नहीं लजाता।

इब्रानियों 2:12 पर कहता है, कि मैं तेरा नाम अपने भाइयों को सुनाऊंगा, सभा के बीच में मैं तेरा भजन गाऊंगा।

इब्रानियों 2:13 और फिर यह, कि मैं उस पर भरोसा रखूंगा; और फिर यह कि देख, मैं उन लड़कों सहित जिसे परमेश्वर ने मुझे दिए।

इब्रानियों 2:14 इसलिये जब कि लड़के मांस और लहू के भागी हैं, तो वह आप भी उन के समान उन का सहभागी हो गया; ताकि मृत्यु के द्वारा उसे जिसे मृत्यु पर शक्ति मिली थी, अर्थात शैतान को निकम्मा कर दे।

इब्रानियों 2:15 और जितने मृत्यु के भय के मारे जीवन भर दासत्व में फंसे थे, उन्हें छुड़ा ले।

इब्रानियों 2:16 क्योंकि वह तो स्‍वर्गदूतों को नहीं वरन इब्राहीम के वंश को संभालता है।

इब्रानियों 2:17 इस कारण उसको चाहिए था, कि सब बातों में अपने भाइयों के समान बने; जिस से वह उन बातों में जो परमेश्वर से सम्बन्ध रखती हैं, एक दयालु और विश्वास योग्य महायाजक बने ताकि लोगों के पापों के लिये प्रायश्चित्त करे।

इब्रानियों 2:18 क्योंकि जब उसने परीक्षा की दशा में दुख उठाया, तो वह उन की भी सहायता कर सकता है, जिन की परीक्षा होती है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • व्यवस्थाविवरण 20-22
  • मरकुस 13:21-37

शुक्रवार, 12 मार्च 2021

निर्देश

 

          मुझे पहले ही देर हो चुकी थी; परन्तु मेरे सामने सड़क पर रखी संकेत पट्टिका पर लिखा था “देरी हो जाने की संभावना है” और वहाँ से आगे गाड़ियां धीरे चल रही थीं; मैंने खिसिया कर प्रतिक्रिया दी, अरे! क्या यह कोई मज़ाक हो रहा है? लेकिन मुझे फिर हँसी आ गई। मेरी अपेक्षा थी कि सभी कार्य मेरी आदर्श समय-सारणी के अनुसार होते रहेंगे; मैंने यह बात सोची ही नहीं थी कि मेरे मार्ग में कही सड़क की मरम्मत होने की आवश्यकता होगी, जिससे यातायात फिर धीमा हो जाएगा, और समय अधिक लगेगा।

          यदि इसी बात को आत्मिक स्तर पर देखा जाए, हम में से बहुत कम ऐसे होते हैं जो अपने जीवन में किसी ऐसी समस्या की संभावना रखते हुए योजनाएँ बनाते हैं, जिन के कारण हमें धीमा होना या मार्ग बदलना या रुकना पड़ सकता है। किन्तु फिर भी जब मैं पीछे मुड़कर जीवन को देखता हूँ, तो अनेकों बार ऐसा हुआ है कि परिस्थितियों ने मुझे किसी भिन्न मार्ग पर चलने की ओर पुनः निर्देशित किया है; आगे बढ़ने में देरी उत्पन्न की है।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में राजा सुलैमान ने मेरे समान कभी “देरी हो जाने की संभावना है” वाली संकेत पट्टिका का सामना नहीं किया। किन्तु नीतिवचन 16 अध्याय में वह हमारी अपनी योजनाओं की तुलना परमेश्वर के मार्गदर्शन के साथ करता है। इस अध्याय के पहले पद को हम अपने शब्दों में कुछ इस प्रकार से भी कह सकते हैं, “नश्वर मनुष्य बहुत बड़ी-बड़ी योजनाएँ बनाते हैं; परन्तु अंतिम निर्णय परमेश्वर ही का होता है।” इसी विचार को सुलैमान ने फिर से पद 9 में इस प्रकार व्यक्त किया, जिसे हम अपने ही शब्दों में यूँ कह सकते हैं, “हम अपने मार्ग निर्धारित करते हैं ... परन्तु प्रभु  ही हमारे कदमों को सही दिशा देता है।” अर्थात, आगे क्या होना है, इसके विषय हमारे अपने विचार तो हो सकते हैं, परन्तु संभव है कि परमेश्वर की योजना कुछ और हो।

          इस आत्मिक सत्य को हम कैसे नजरंदाज कर देते हैं? हम अपनी योजनाएँ बनाने लगते हैं, और परमेश्वर से उसकी योजनाओं के बारे में पूछना भूल जाते हैं। और फिर जब मेरी योजनाओं और मार्गों में बाधाएँ आती हैं, विलम्ब होते हैं, तब हम खिसियाते हैं, परेशान होते हैं।

          परन्तु चिंता करने के स्थान पर हम, जैसा सुलैमान ने सिखाया है, परमेश्वर पर भरोसा बनाए रखें, विश्वास रखें कि वह कदम-कदम करके हमारा मार्गदर्शन करेगा। हमें प्रार्थना पूर्वक उसके खोजी बने रहने, उसके उत्तर की प्रतीक्षा करते रहने, और उसके मार्गदर्शन की बाट जोहनी है। हमारी भलाई के लिए वही हमें सही मार्ग पर सही रीति से, अपने समय और योजनाओं के अनुसार लिए चलेगा। - एडम होल्ज़

 

चिंता के स्थान पर भरोसे को अपना लें; परमेश्वर आपका मार्गदर्शन करता रहेगा।


तू अपनी समझ का सहारा न लेना, वरन सम्पूर्ण मन से यहोवा पर भरोसा रखना। उसी को स्मरण कर के सब काम करना, तब वह तेरे लिये सीधा मार्ग निकालेगा। - नीतिवचन 3:5-6

बाइबल पाठ: नीतिवचन 16:1-9

नीतिवचन 16:1 मन की युक्ति मनुष्य के वश में रहती है, परन्तु मुंह से कहना यहोवा की ओर से होता है।

नीतिवचन 16:2 मनुष्य का सारा चाल चलन अपनी दृष्टि में पवित्र ठहरता है, परन्तु यहोवा मन को तौलता है।

नीतिवचन 16:3 अपने कामों को यहोवा पर डाल दे, इस से तेरी कल्पनाएं सिद्ध होंगी।

नीतिवचन 16:4 यहोवा ने सब वस्तुएं विशेष उद्देश्य के लिये बनाईं हैं, वरन दुष्ट को भी विपत्ति भोगने के लिये बनाया है।

नीतिवचन 16:5 सब मन के घमण्डियों से यहोवा घृणा करता है; मैं दृढ़ता से कहता हूं, ऐसे लोग निर्दोष न ठहरेंगे।

नीतिवचन 16:6 अधर्म का प्रायश्चित कृपा और सच्चाई से होता है; और यहोवा के भय मानने के द्वारा मनुष्य बुराई करने से बच जाते हैं।

नीतिवचन 16:7 जब किसी का चाल चलन यहोवा को भावता है, तब वह उसके शत्रुओं का भी उस से मेल कराता है।

नीतिवचन 16:8 अन्याय के बड़े लाभ से, न्याय से थोड़ा ही प्राप्त करना उत्तम है।

नीतिवचन 16:9 मनुष्य मन में अपने मार्ग पर विचार करता है, परन्तु यहोवा ही उसके पैरों को स्थिर करता है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • व्यवस्थाविवरण 17-19
  • मरकुस 13:1-20