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शुक्रवार, 20 अगस्त 2021

परमेश्वर का वचन – बाइबल – और विज्ञान – 8


विज्ञान, विश्व-व्यापी जल-प्रलय तथा जीवाश्म

परमेश्वर के वचन बाइबल की पुस्तकों में परमेश्वर ने हजारों वर्ष पहले अनेकों प्रकार का वैज्ञानिक ज्ञान लिखवा दिया था; और वर्तमान में विज्ञान उन्हीं बातों को अपनी ही खोज और आविष्कारों के द्वारा उजागर कर रहा है, और बाइबल के ज्ञाता दिखाते रहते हैं कि ये बातें परमेश्वर ने पहले से ही साधारण, अशिक्षित, तथा अवैज्ञानिक मनुष्यों की समझ में आने वाली भाषा में लिखवा दी थीं। 


साथ ही परमेश्वर ने यह भी लिखवा दिया था कि लोग बाइबल की बातों को अस्वीकार करेंगे, उनपर अविश्वास करेंगे; इस संदर्भ में बाइबल के कुछ पद देखिए:

2 पतरस 3:3-4 और यह पहिले जान लो, कि अन्‍तिम दिनों में हंसी ठट्ठा करने वाले आएंगे, जो अपनी ही अभिलाषाओं के अनुसार चलेंगे। और कहेंगे, उसके आने की प्रतिज्ञा कहां गई? क्योंकि जब से बाप-दादे सो गए हैं, सब कुछ वैसा ही है, जैसा सृष्‍टि के आरम्भ से था?

यहूदा 1:17-19 पर हे प्रियो, तुम उन बातों को स्मरण रखो; जो हमारे प्रभु यीशु मसीह के प्रेरित पहिले कह चुके हैं। वे तुम से कहा करते थे, कि पिछले दिनों में ऐसे ठट्ठा करने वाले होंगे, जो अपनी अभक्ति के अभिलाषाओं के अनुसार चलेंगे। ये तो वे हैं, जो फूट डालते हैं; ये शारीरिक लोग हैं, जिन में आत्मा नहीं।


न केवल परमेश्वर ने इस उपेक्षा किए जाने के बारे में लिखवाया, वरन ऐसे उदाहरण भी लिखवा दिए जिनको लेकर अविश्वासी लोग उपहास करेंगे। इन उदाहरणों में से एक ऊपर पतरस वाले पदों में दिया गया है प्रभु यीशु मसीह का दूसरा आगमन - जिसके विषय मसीही विश्वासियों में बहुत प्रत्याशा है, किन्तु अविश्वासियों में बहुत संशय और उपहास किया जाता है। इसी प्रकार दो अन्य उदाहरण है बाइबल में दिया गया पृथ्वी की रचना का वर्णन और नूह के समय में मनुष्यों में पाप के अत्यधिक बढ़ जाने से आए विश्व-व्यापी जल प्रलय और पापी मनुष्यों के विनाश का वृतांत। पतरस ने अपनी पत्री में लिखा: “वे तो जान बूझ कर यह भूल गए, कि परमेश्वर के वचन के द्वारा से आकाश प्राचीन काल से वर्तमान है और पृथ्वी भी जल में से बनी और जल में स्थिर है। इन्‍हीं के द्वारा उस युग का जगत जल में डूब कर नाश हो गया” (2 पतरस 3:5-6); और फिर सचेत किया कि जैसे नूह के समय में अविश्वासी और पापी जन जल के द्वारा नाश की गए थे, वैसे ही इस युग में पापी संसार और पापी मनुष्य आग के द्वारा भस्म किए जाएंगे “पर वर्तमान काल के आकाश और पृथ्वी उसी वचन के द्वारा इसलिये रखे हैं, कि जलाए जाएं; और वह भक्तिहीन मनुष्यों के न्याय और नाश होने के दिन तक ऐसे ही रखे रहेंगे” (2 पतरस 3:7)। 


ऐसा नहीं है कि इस विश्व-व्यापी जल प्रलय के प्रमाण नहीं हैं; सारे संसार की सभी सभ्यताओं में इस विश्व-व्यापी जल प्रलय की पौराणिक कथाएं विद्यमान हैं; क्योंकि सारे संसार के लोग नूह के वंशज हैं, जो उस जल प्रलय में से परमेश्वर द्वारा सुरक्षित निकाले गए, और जैसे-जैसे संसार में फैलते चले गए, उस जल प्रलय की घटना की मौखिक स्मृतियाँ भी अपने साथ लेकर गए, जिन में समय के साथ कुछ-कुछ परिवर्तन आए, किन्तु मूल स्वरूप वही है कि जल प्रलय हुआ था, और सारी पृथ्वी पर से कुछ को छोड़ शेष मनुष्य नाश हो गए थे। 


यह केवल पौराणिक बातों में ही नहीं है, किन्तु सारे संसार भर में इस जल प्रलय के प्रमाण जलचर जीव-जंतुओं के जीवाश्मों के रूप में विद्यमान हैं, उन ऊंचे हिमालय और ऐन्डीस जैसी ऊंची पर्वत-श्रंखलाओं पर भी, जिनके जल मगन होने की बात वैज्ञानिक न तो कल्पना करते हैं और न ही स्वीकार करते हैं। इसलिए इन जीवाश्मों के विद्यमान होने प्रमाणों को उजागर नहीं किया जाता है, प्रमुखता नहीं दी जाती है। किन्तु इंटरनेट पर “marine fossils, sea-shells, whale fossils on mountains” खोज करने से इसके विषय में बहुत सी जानकारी मिल सकती है। यद्यपि वैज्ञानिक इन्हें समझाने के भिन्न स्पष्टीकरण देते हैं, जो वास्तविकता से मेल नहीं खाती हैं।   


इसलिए परमेश्वर ने अपने लोगों से यह भी कहा है कि उन्हें सांसारिक बातों को लेकर अधिक वाद-विवाद करने, या उन परमेश्वर विरोधी सांसारिक बातों को अपने जीवनों में अनावश्यक महत्व अथवा वरीयता देने की आवश्यकता नहीं है, “पर मूर्खता के विवादों, और वंशावलियों, और बैर विरोध, और उन झगड़ों से, जो व्यवस्था के विषय में हों बचा रह; क्योंकि वे निष्‍फल और व्यर्थ हैं। किसी पाखंडी को एक दो बार समझा बुझाकर उस से अलग रह। यह जानकर कि ऐसा मनुष्य भटक गया है, और अपने आप को दोषी ठहराकर पाप करता रहता है” (तीतुस 3:9-11)। 


क्योंकि उस ज्ञान के पीछे भागने वाले फिर विश्वास से भटकाए जा सकते हैं “हे तीमुथियुस इस थाती की रखवाली कर और जिस ज्ञान को ज्ञान कहना ही भूल है, उसके अशुद्ध बकवाद और विरोध की बातों से परे रह। कितने इस ज्ञान का अंगीकार कर के, विश्वास से भटक गए हैं।। तुम पर अनुग्रह होता रहे” (1 तीमुथियुस 6:20-21)।  


ऐसा इसलिए है क्योंकि प्रभु यीशु मसीह में संसार के सभी लोगों के लिए सेंत-मेंत में उपलब्ध पापों की क्षमा और उद्धार का सुसमाचार मनुष्यों के ज्ञान और समझ पर नहीं, वरन उनके द्वारा उनमें बसे हुए पापों के एहसास और सच्चे विश्वास द्वारा इस सुसमाचार को स्वीकार करने पर आधारित है, जैसा कि पौलुस प्रेरित ने लगभग दो हज़ार वर्ष पहले लिखा था: “और हे भाइयों, जब मैं परमेश्वर का भेद सुनाता हुआ तुम्हारे पास आया, तो वचन या ज्ञान की उत्तमता के साथ नहीं आया। क्योंकि मैं ने यह ठान लिया था, कि तुम्हारे बीच यीशु मसीह, वरन क्रूस पर चढ़ाए हुए मसीह को छोड़ और किसी बात को न जानूं। और मैं निर्बलता और भय के साथ, और बहुत थरथराता हुआ तुम्हारे साथ रहा। और मेरे वचन, और मेरे प्रचार में ज्ञान की लुभाने वाली बातें नहीं; परन्तु आत्मा और सामर्थ का प्रमाण था। इसलिये कि तुम्हारा विश्वास मनुष्यों के ज्ञान पर नहीं, परन्तु परमेश्वर की सामर्थ पर निर्भर हो” (1 कुरिन्थियों 2:1-5)।


पिछले तीन सप्ताह से हम देखते चले आ रहे हैं कि परमेश्वर के वचन बाइबल को बदनाम करने और झूठा प्रमाणित करने के प्रयास तो बहुत किए गए, किन्तु बाइबल को गलत या झूठा कोई नहीं प्रमाणित कर सका; वरन बाइबल में ही उसके परमेश्वर का अटल और शाश्वत सत्य वचन होने के प्रमाण विद्यमान हैं। आगे भी हम कई और प्रकार के वैज्ञानिक तथ्यों की बाइबल में उपस्थिति, उनके मनुष्यों को ज्ञात होने से भी हजारों वर्ष पहले वहाँ लिखे जाने के संदर्भ में देखेंगे।


उस महान, प्रेमी सृष्टिकर्ता परमेश्वर के प्रति आज आपका विचार और निर्णय क्या है? क्या आप स्वेच्छा और सच्चे मन से, अपने पापों के प्रति सच्चे पश्चाताप के साथ की गई एक छोटी प्रार्थना, “हे प्रभु यीशु, मेरे पापों को क्षमा करें, मुझे अपनी शरण में लेकर पापी संसार और पापी मनुष्यों पर आने वाले न्याय और भयानक विनाश से बचा लें” के द्वारा अपने पृथ्वी के शेष जीवन तथा अनन्तकाल को सुरक्षित करेंगे? साधारण विश्वास की इस प्रार्थना और समर्पण को अवसर देकर देखिए - आप निराश नहीं होंगे। 


बाइबल पाठ: भजन 103:1-7 

भजन 103:1 हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह; और जो कुछ मुझ में है, वह उसके पवित्र नाम को धन्य कहे!

भजन 103:2 हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह, और उसके किसी उपकार को न भूलना।

भजन 103:3 वही तो तेरे सब अधर्म को क्षमा करता, और तेरे सब रोगों को चंगा करता है,

भजन 103:4 वही तो तेरे प्राण को नाश होने से बचा लेता है, और तेरे सिर पर करूणा और दया का मुकुट बान्धता है,

भजन 103:5 वही तो तेरी लालसा को उत्तम पदार्थों से तृप्त करता है, जिस से तेरी जवानी उकाब के समान नई हो जाती है।।

भजन 103:6 यहोवा सब पिसे हुओं के लिये धर्म और न्याय के काम करता है।

भजन 103:7 उसने मूसा को अपनी गति, और इस्राएलियों पर अपने काम प्रगट किए।


एक साल में बाइबल:

  • भजन 105-106
  • 1 कुरिन्थियों 3


गुरुवार, 19 अगस्त 2021

परमेश्वर का वचन – बाइबल – और विज्ञान – 7

 

मनुष्य का स्वास्थ्य - 2  

परमेश्वर ने न केवल मनुष्य के शरीर की रचना में उसे स्वस्थ बनाए रखने के लिए प्रावधान प्रदान किए हैं, किन्तु साथ ही अपने वचन बाइबल की पुस्तकों में अनेकों ऐसे उपाय भी लिखवाए हैं, जिनके पालन के द्वारा मनुष्य स्वस्थ बन रह सकता है। परमेश्वर ने ये निर्देश हज़ारों वर्ष पहले मनुष्यों को दे दिए थे; वर्तमान में चिकित्सा-विज्ञान इनके महत्व और उपयोगिता को पहचान रहा है, तथा पालन करने के लिए कह रहा है। 

परमेश्वर द्वारा स्वास्थ्य संबंधी दिए गए कुछ निर्देश हैं:

परमेश्वर ने लगभग 3500 वर्ष पहले, अपने लोगों से कहा था कि वे शौच के लिए अपनी छावनी के क्षेत्र से बाहर जाएँ, और सपने साथ मल को ढांपने के लिए उपकरण भी ले जाएंछावनी के बाहर तेरे दिशा फिरने का एक स्थान हुआ करे, और वहीं दिशा फिरने को जाया करना; और तेरे पास के हथियारों में एक खनती भी रहे; और जब तू दिशा फिरने को बैठे, तब उस से खोदकर अपने मल को ढांप देना” (व्यवस्थाविवरण 23:12-13)। हम आज जानते हैं कि मल के प्रदूषित पानी या भोजन सामग्री के खाने से, या उससे दूषित मिट्टी के संपर्क में रहने से कितने ही रोग होते हैं। रोगों की रोक-थाम की योजनाओं में पानी और मिट्टी को मल से दूषित होने से रोके रखने के उपाय सबसे प्राथमिक और महत्वपूर्ण होते हैं। कहा जाता है कि प्रथम विश्व-युद्ध होने के समय तक उतने सैनिक युद्ध से नहीं मरे थे, जितने छावनियों में फैलने वाली बीमारियों से मरे, क्योंकि उन्होंने स्वच्छता के इस सिद्धांत का पालन नहीं किया था।

 

परमेश्वर ने अपने वचन में बताया है कि यौन-संबंध पति-पत्नी के मध्य ही उचित और स्वीकार्य हैं। व्यभिचार, अनेकों के साथ यौन-संबंध रखना, समलैंगिक संबंध, आदि सभी शरीर में रोगों और अस्वस्थता उत्पन्न करते हैं (रोमियों 1:27; 1 कुरिन्थियों 6:18)

 

परमेश्वर ने लगभग 3000 वर्ष पहले अपने लोगों को शुद्ध और अशुद्ध जीव-जन्तुओं की सूची दी थी, अशुद्ध पशुओं को भोजन के लिए निषेध किया था (लैव्यव्यवस्था 11; तथा व्यवस्थाविवरण 14 अध्याय)। जिन पशुओं को भोजन के लिए निषिद्ध किया गया था उनमें सूअर सहित कुछ और जानवरफिर सूअर, जो चिरे खुर का होता है परन्तु पागुर नहीं करता, इस कारण वह तुम्हारे लिये अशुद्ध है। तुम न तो इनका मांस खाना, और न इनकी लोथ छूना” (व्यवस्थाविवरण 14:8), और जलाशयों के तले में रहने वाले जल-जंतु, जिनके चोंयेटे और पंख (scales & fins) नहीं होते, सम्मिलित हैं:फिर जितने जल जन्तु हैं उन में से तुम इन्हें खा सकते हों, अर्थात समुद्र वा नदियों के जल जन्तुओं में से जितनों के पंख और चोंयेटे होते हैं उन्हें खा सकते हो। और जलचरी प्राणियों में से जितने जीवधारी बिना पंख और चोंयेटे के समुद्र वा नदियों में रहते हैं वे सब तुम्हारे लिये घृणित हैं। वे तुम्हारे लिये घृणित ठहरें; तुम उनके मांस में से कुछ न खाना, और उनकी लोथों को अशुद्ध जानना। जल में जिस किसी जन्तु के पंख और चोंयेटे नहीं होते वह तुम्हारे लिये अशुद्ध है” (लैव्यव्यवस्था 11:9-12)। ये जीव-जंतु बहुधा तले पर पड़ी गंदगी खाने वाले होते हैं, जिससे मनुष्यों में बीमारियों के प्रवेश करने का खतरा रहता है। आज कई बीमारियाँ जो पहले जंतुओं में ही होती थीं मनुष्यों में घातक बनकर दिखने लगी हैं, क्योंकि परमेश्वर द्वारा दिए गए शुद्ध-अशुद्ध के नियमों का पालन नहीं किया गया।

परमेश्वर ने निर्देश दिए थे कि पीने के लिए स्वच्छ जल का ही प्रयोग करना है, और किसी भी मृतक जन्तु से दूषित बर्तन के भोजन अथवा उसके जल को प्रयोग नहीं करना हैऔर यदि मिट्टी का कोई पात्र हो जिस में इन जन्तुओं में से कोई पड़े, तो उस पात्र में जो कुछ हो वह अशुद्ध ठहरे, और पात्र को तुम तोड़ डालना। उस में जो खाने के योग्य भोजन हो, जिस में पानी का छुआव हों वह सब अशुद्ध ठहरे; फिर यदि ऐसे पात्र में पीने के लिये कुछ हो तो वह भी अशुद्ध ठहरे। और यदि इनकी लोथ में का कुछ तंदूर वा चूल्हे पर पड़े तो वह भी अशुद्ध ठहरे, और तोड़ डाला जाए; क्योंकि वह अशुद्ध हो जाएगा, वह तुम्हारे लिये भी अशुद्ध ठहरे। परन्तु सोता वा तालाब जिस में जल इकट्ठा हो वह तो शुद्ध ही रहे; परन्तु जो कोई इनकी लोथ को छूए वह अशुद्ध ठहरे” (लैव्यव्यवस्था 11:33-36)। वर्तमान में चिकित्सा विज्ञान को मनुष्यों में रोग उत्पन्न करने वाले कीटाणुओं की जानकारी होने के बाद परमेश्वर द्वारा 3000 वर्ष पहले कहे गई इस बात का महत्व समझ में आता है। 

परमेश्वर ने रोगों के इलाज के लिए वनस्पति में भी प्रावधान रखे, और मनुष्यों को उसके विषय बताया (यशायाह 38:21; यहेजकेल 47:12; प्रकाशितवाक्य 22:2): “यशायाह ने कहा था, अंजीरों की एक टिकिया बना कर हिजकिय्याह के फोड़े पर बान्‍धी जाए, तब वह बचेगा” (यशायाह 38:21); “और नदी के दोनों तीरों पर भांति भांति के खाने योग्य फलदाई वृक्ष उपजेंगे, जिनके पत्ते न मुरझाएंगे और उनका फलना भी कभी बन्द न होगा, क्योंकि नदी का जल पवित्र स्थान से निकला है। उन में महीने महीने, नये नये फल लगेंगे। उनके फल तो खाने के, ओर पत्ते औषधि के काम आएंगे” (यहेजकेल 47:12)। इसी प्रकार से जैतून का तेल और दाखरस भी घावों के इलाज में प्रयोग किया जाता था (लूका 10:34)। जैतून का तेल त्वचा को स्वस्थ रखता है, और दाखरस में विद्यमान इथाइल अल्कोहल कीटाणुओं को मारता है। 

परमेश्वर ने 3000 वर्ष पूर्व राजा सुलैमान द्वारा लिखे नीतिवचनों में लिखवा दिया था किमन का आनन्द अच्छी औषधि है, परन्तु मन के टूटने से हड्डियां सूख जाती हैं” (नीतिवचन 17:22); तथामन आनन्दित होने से मुख पर भी प्रसन्नता छा जाती है, परन्तु मन के दु:ख से आत्मा निराश होती है” (नीतिवचन 15:13)। परमेश्वर के वचन में 3000 वर्ष पहले लिखे गए इस तथ्य को चिकित्सा विज्ञान आज समझ और मान रहा है; वर्तमान समय की लोगों को सर्वाधिक ग्रसित करने वाली घातक बीमारियाँ, जैसे बढ़ा हुआ ब्लडप्रेशर, हृदय रोग, डायबटीस, निराशा या डिप्रेशन, आदि अशांत और अस्वस्थ मन के कारण ही शरीर पर प्रभाव डालते हैं; और इनके इलाज के लिए मन के प्रसन्न और संतुष्ट होने से बहुत सहायता मिलती है।

 

जिस परमेश्वर ने हमारे नश्वर शरीरों को, जो एक न एक दिन मर ही जाएंगे, स्वस्थ रखने के लिए इतने प्रावधान किए, निर्देश दिए, उसी ने हमारी कभी न मरने वाली आत्मा को सबसे विनाशकारी और अनन्तकाल के लिए परेशानी उत्पन्न करने वाले पाप के रोग से भी बचाव और स्वस्थ रहने का उपाय दिया है। परमेश्वर ने कहा, “यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है” (1 यूहन्ना 1:9)। वह हमसे केवल इतना चाहता है कि हम अपने पाप मान लें और उन पापों से उसके सम्मुख सच्चे मन से पश्चाताप कर लें। उसके आगे हमें उन पापों से शुद्ध करने और हमें परमेश्वर की दृष्टि और मापदंड के अनुसार धर्मी बनाने की ज़िम्मेदारी और कार्य उसका है। स्वेच्छा और सच्चे मन से की गई केवल एक प्रार्थना, “हे प्रभु यीशु, मैं स्वीकार करता हूँ कि मैंने मन, ध्यान, विचार, और व्यवहार में पाप किया है, और आपने मेरे पापों के निवारण के लिए क्रूस पर अपने आप को बलिदान किया और फिर जीवित हो गए। कृपया मेरे पाप क्षमा करें, मुझे अपनी शरण में लें, और मुझे अपना आज्ञाकारी, समर्पित जन बना लें। मेरे जीवन को अपनी इच्छानुसार परिवर्तित कर दें” - आपको पाप के रोग से मुक्त और स्वस्थ कर के परमेश्वर के राज्य में अनन्तकाल के लिए प्रवेश प्रदान कर देगी। चाहे अविश्वसनीय लगे, किन्तु करके देखिए - सच्चे, समर्पित, आज्ञाकारी, मन से, शांत होकर अपने ही अंदर यह प्रार्थना करने से आपका कुछ नहीं बिगड़ेगा, कोई हानि नहीं होगी; यदि कुछ हुआ तो आपका भला ही होगा - पाप से मुक्ति, उद्धार और आशीषों से भरपूर अनन्त जीवन मिलेगा; फिर क्यों डरना? विश्वास के साथ कदम बढ़ाइए, भला ही मिलेगा, कोई हानि नहीं। 

 

बाइबल पाठ: यशायाह 55:1-13 

यशायाह 55:1 अहो सब प्यासे लोगों, पानी के पास आओ; और जिनके पास रुपया न हो, तुम भी आकर मोल लो और खाओ! दाखमधु और दूध बिन रुपए और बिना दाम ही आकर ले लो।

यशायाह 55:2 जो भोजन वस्तु नहीं है, उसके लिये तुम क्यों रुपया लगाते हो, और, जिस से पेट नहीं भरता उसके लिये क्यों परिश्रम करते हो? मेरी ओर मन लगाकर सुनो, तब उत्तम वस्तुएं खाने पाओगे और चिकनी चिकनी वस्तुएं खाकर सन्तुष्ट हो जाओगे।

यशायाह 55:3 कान लगाओ, और मेरे पास आओ; सुनो, तब तुम जीवित रहोगे; और मैं तुम्हारे साथ सदा की वाचा बान्धूंगा अर्थात दाऊद पर की अटल करुणा की वाचा।

यशायाह 55:4 सुनो, मैं ने उसको राज्य राज्य के लोगों के लिये साक्षी और प्रधान और आज्ञा देने वाला ठहराया है।

यशायाह 55:5 सुन, तू ऐसी जाति को जिसे तू नहीं जानता बुलाएगा, और ऐसी जातियां जो तुझे नहीं जानतीं तेरे पास दौड़ी आएंगी, वे तेरे परमेश्वर यहोवा और इस्राएल के पवित्र के निमित्त यह करेंगी, क्योंकि उसने तुझे शोभायमान किया है।

यशायाह 55:6 जब तक यहोवा मिल सकता है तब तक उसकी खोज में रहो, जब तक वह निकट है तब तक उसे पुकारो;

यशायाह 55:7 दुष्ट अपनी चालचलन और अनर्थकारी अपने सोच विचार छोड़कर यहोवा ही की ओर फिरे, वह उस पर दया करेगा, वह हमारे परमेश्वर की ओर फिरे और वह पूरी रीति से उसको क्षमा करेगा।

यशायाह 55:8 क्योंकि यहोवा कहता है, मेरे विचार और तुम्हारे विचार एक समान नहीं है, न तुम्हारी गति और मेरी गति एक सी है।

यशायाह 55:9 क्योंकि मेरी और तुम्हारी गति में और मेरे और तुम्हारे सोच विचारों में, आकाश और पृथ्वी का अन्तर है।

यशायाह 55:10 जिस प्रकार से वर्षा और हिम आकाश से गिरते हैं और वहां यों ही लौट नहीं जाते, वरन भूमि पर पड़कर उपज उपजाते हैं जिस से बोने वाले को बीज और खाने वाले को रोटी मिलती है,

यशायाह 55:11 उसी प्रकार से मेरा वचन भी होगा जो मेरे मुख से निकलता है; वह व्यर्थ ठहरकर मेरे पास न लौटेगा, परन्तु, जो मेरी इच्छा है उसे वह पूरा करेगा, और जिस काम के लिये मैं ने उसको भेजा है उसे वह सफल करेगा।

यशायाह 55:12 क्योंकि तुम आनन्द के साथ निकलोगे, और शान्ति के साथ पहुंचाए जाओगे; तुम्हारे आगे आगे पहाड़ और पहाडिय़ां गला खोल कर जयजयकार करेंगी, और मैदान के सब वृक्ष आनन्द के मारे ताली बजाएंगे।

यशायाह 55:13 तब भटकटैयों के स्थान पर सनौवर उगेंगे; और बिच्छु पेड़ों के स्थान पर मेंहदी उगेगी; और इस से यहोवा का नाम होगा, जो सदा का चिन्ह होगा और कभी न मिटेगा।

 

एक साल में बाइबल: 

  • भजन 103-104
  • 1 कुरिन्थियों

बुधवार, 18 अगस्त 2021

परमेश्वर का वचन – बाइबल – और विज्ञान – 6

 

मनुष्य का स्वास्थ्य - 1  

       पिछले लेख में हमने देखा था कि मनुष्य परमेश्वर की उत्कृष्ट रचना है, और मनुष्य की रचना के विषय जिन बातों को विज्ञान ने वर्तमान में जानना आरंभ किया है, वे परमेश्वर ने अपने वचन बाइबल में हजारों वर्ष पहले से लिखवा रखी हैं। आज हम मनुष्य के स्वास्थ्य से संबंधित कुछ बातों को देखेंगे, जिन्हें विज्ञान और चिकित्सा-शास्त्र ने वर्तमान में जानना और मानना आरंभ किया है, किन्तु बाइबल की पुस्तकों में उनके बारे में परमेश्वर ने हजारों वर्ष पहले लिखवा दिया था।       

       लगभग 1.5 से 2 सदी पहले चिकित्सा की एक विधि थी बीमार व्यक्ति के शरीर में सेगंदा रक्तनिकाला जाता था, जिसके परिणामस्वरूप बहुत से लोग मर गए, जिनमें से एक अमेरिका के सुप्रसिद्ध राष्ट्रपति जॉर्ज वाशिंगटन भी थे, जिनके इलाज के लिए यह पद्धति अपनाई गई थी। विज्ञान को यह वर्तमान में पता चला कि शरीर में रक्त से ही जीवन है। रक्त ही सारे शरीर में ऑक्सीजन तथा पोशाक तत्वों को पहुंचाता है, बीमारियों से लड़ने वाली और संक्रमण को रोकने और मारने वाली कोशिकाओं का स्त्रोत है, तथा उसका शरीर में उपयुक्त मात्रा में होना कितना आवश्यक है। किन्तु परमेश्वर ने अपने वचन बाइबल में यह आज से लगभग 3400 वर्ष पूर्व ही लिखवा दिया था कि रक्त से ही जीवन है, “क्योंकि शरीर का प्राण लहू में रहता है; और उसको मैं ने तुम लोगों को वेदी पर चढ़ाने के लिये दिया है, कि तुम्हारे प्राणों के लिये प्रायश्चित्त किया जाए; क्योंकि प्राण के कारण लहू ही से प्रायश्चित्त होता है” “क्योंकि शरीर का प्राण जो है वह उसका लहू ही है जो उसके प्राण के साथ एक है; इसी लिये मैं इस्राएलियों से कहता हूं, कि किसी प्रकार के प्राणी के लहू को तुम न खाना, क्योंकि सब प्राणियों का प्राण उनका लहू ही है; जो कोई उसको खाए वह नाश किया जाएगा” (लैव्यव्यवस्था 17:11, 14) 

       परमेश्वर ने अपने चुने हुए लोगों, अब्राहम के वंशजों - यहूदियों के लिए खतने की विधि ठहराई थी, “और आठवें दिन लड़के का खतना किया जाए” (लैव्यव्यवस्था 12:3; साथ ही देखें उत्पत्ति 17:12; लूका 1:59)। यह आज से लगभग 4000 वर्ष पूर्व की बात है। विज्ञान की वर्तमान खोजों से पहले यह कोई नहीं जानता था कि रक्त को बहने से रोकने और रक्त का थक्का जमाने के लिए रक्त में जिस रासायनिक पदार्थ, प्रोथ्रोमबिन की आवश्यकता होती है, वह शिशु के जन्म के आठवें दिन सबसे अधिक मात्रा में रक्त में विद्यमान होता है, और फिर उसके बाद रक्त में उसकी मात्रा कम होने लग जाती है। यह तथ्य चिकित्सा विज्ञान को वर्तमान में पता चला है। किन्तु परमेश्वर जो मनुष्य का रचयिता है, उसने अपनी निर्धारित रचना के अनुसार पहले ही कह दिया था कि खतना आठवें दिन हो, जिससे शिशु का रक्त बहना तुरंत ही रुक सके, कोई हानि न हो।

       चिकित्सा-विज्ञान संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए रोगी को अन्य सभी से अलग रखने की जिस पद्धति पर आज जोर दे रहा है, रोगी से दूरी बनाए रखने की बात कर रहा है, बार-बार निरीक्षण करके यह सुनिश्चित करने की बात कर रहा है कि संक्रमण समाप्त हो गया तथा रोगी निरोग हो गया है, वह बाइबल में लगभग 3400 वर्ष पहले ही लिख दिया गया था कि संभावित संक्रमण वाले व्यक्ति को भी अन्य लोगों से पृथक रखा जाएफिर यहोवा ने मूसा से कहा, इस्राएलियों को आज्ञा दे, कि वे सब कोढिय़ों को, और जितनों के प्रमेह हो, और जितने लोथ के कारण अशुद्ध हों, उन सभों को छावनी से निकाल दें; ऐसों को चाहे पुरुष हों चाहे स्त्री छावनी से निकाल कर बाहर कर दें; कहीं ऐसा न हो कि तुम्हारी छावनी, जिसके बीच मैं निवास करता हूं, उनके कारण अशुद्ध हो जाए। और इस्राएलियों ने वैसा ही किया, अर्थात ऐसे लोगों को छावनी से निकाल कर बाहर कर दिया; जैसा यहोवा ने मूसा से कहा था इस्राएलियों ने वैसा ही किया” (गिनती 5:1-5; देखें लैव्यव्यवस्था 13:45-46) 

 

       जो परमेश्वर मुझे और आपको शारीरिक रीति से स्वस्थ रखना चाहता है, और इसके लिए जिसने पहले से ही अपने वचन में विधि और निर्देश दे रखे हैं, वही प्रेमी परमेश्वर पिता आपके आत्मिक स्वास्थ्य की भी चिंता करता है, और आपको आत्मिक रीति से स्वस्थ देखना चाहता है। संसार के हर व्यक्ति के अंदर पाप का रोग है - व्यक्ति चाहे माने या न माने; इसका एहसास करे अथवा न करे। हर व्यक्ति मन, विचार, व्यवहार से किसी न किसी रूप में परमेश्वर की आज्ञाओं का उल्लंघन करता है, और परमेश्वर की आज्ञा का उल्लंघन ही पाप है। यह पाप का रोग सभी को परमेश्वर से दूर रखता है, इस लोक में भी और परलोक में भी। किन्तु जो इस लोक में परमेश्वर के सामने अपने पापों को मान लेता है, परमेश्वर से उनके लिए क्षमा माँग लेता है, वह इस पाप के संक्रमण से मुक्त हो जाता है, वापस परमेश्वर के साथ संगति में बहाल हो जाता है; इस लोक में भी और परलोक में भी। 

       परमेश्वर प्रभु यीशु से, सच्चे मन, स्वेच्छा, और पाप के बोध के साथ की गई एक छोटी समर्पण की प्रार्थना, “हे प्रभु यीशु मेरे पापों को क्षमा करें, मुझ पापी को ग्रहण करें, और मुझे अपने प्रति समर्पित तथा आज्ञाकारी व्यक्ति बनाएँआपको पाप के रोग से हमेशा के लिए मुक्ति दिला देगा - जो कोई धर्म-कर्म, विधि-विधान-अनुष्ठान कभी नहीं कर सकते हैं। 

       आज प्रभु परमेश्वर आपको पाप के रोग से स्वस्थ होने का निमंत्रण दे रहा है; समय और अवसर रहते उसके इस निमंत्रण को स्वीकार कर लीजिए, और अनन्तकाल के लिए इस घातक रोग से स्वस्थ एवं निरोग हो जाइए। 

 

बाइबल पाठ: इफिसियों 2:1-10

इफिसियों 2:1 और उसने तुम्हें भी जिलाया, जो अपने अपराधों और पापों के कारण मरे हुए थे।

इफिसियों 2:2 जिन में तुम पहिले इस संसार की रीति पर, और आकाश के अधिकार के हाकिम अर्थात उस आत्मा के अनुसार चलते थे, जो अब भी आज्ञा न मानने वालों में कार्य करता है।

इफिसियों 2:3 इन में हम भी सब के सब पहिले अपने शरीर की लालसाओं में दिन बिताते थे, और शरीर, और मन की मनसाएं पूरी करते थे, और और लोगों के समान स्वभाव ही से क्रोध की सन्तान थे।

इफिसियों 2:4 परन्तु परमेश्वर ने जो दया का धनी है; अपने उस बड़े प्रेम के कारण, जिस से उसने हम से प्रेम किया।

इफिसियों 2:5 जब हम अपराधों के कारण मरे हुए थे, तो हमें मसीह के साथ जिलाया; (अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है।)

इफिसियों 2:6 और मसीह यीशु में उसके साथ उठाया, और स्वर्गीय स्थानों में उसके साथ बैठाया।

इफिसियों 2:7 कि वह अपनी उस कृपा से जो मसीह यीशु में हम पर है, आने वाले समयों में अपने अनुग्रह का असीम धन दिखाए।

इफिसियों 2:8 क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है, और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर का दान है।

इफिसियों 2:9 और न कर्मों के कारण, ऐसा न हो कि कोई घमण्ड करे।

इफिसियों 2:10 क्योंकि हम उसके बनाए हुए हैं; और मसीह यीशु में उन भले कामों के लिये सृजे गए जिन्हें परमेश्वर ने पहिले से हमारे करने के लिये तैयार किया।

 

एक साल में बाइबल: 

  • भजन 100-102
  • 1 कुरिन्थियों 1

मंगलवार, 17 अगस्त 2021

परमेश्वर का वचन – बाइबल – और विज्ञान – 5


मनुष्य की रचना

               बाइबल में हर प्रकार की जानकारी परमेश्वर ने लिखवाई है। हम सृष्टि,  अंतरिक्ष,  पृथ्वी से संबंधित बातों को देख चुके हैं। बाइबल की प्रथम पुस्तक,  उत्पत्ति का पहला अध्याय, परमेश्वर के द्वारा समस्त सृष्टि की रचना किए जाने का वृतांत है। उत्पत्ति के आरंभिक अध्यायों से हम देखते हैं कि मनुष्य परमेश्वर की सबसे उत्कृष्ट रचना है। अन्य सभी की सृष्टि परमेश्वर ने कहने के द्वारा,  अपने शब्द या वचन की सामर्थ्य से की - परमेश्वर ने कहा और वह वैसा ही हो गया। किन्तु मनुष्य को परमेश्वर ने अपने हाथों से, अपने ही स्वरूप में सृजा; उसमें जीवन डालने के लिए परमेश्वर ने अपनी ही श्वास डाली,  और उसके लिए ही अदन की वाटिका लगाई, जहाँ परमेश्वर उस के साथ संगति करता था,  और फिर अपने ही हाथों से पहले मनुष्य आदम के लिए एक सहायक बनाया (उत्पत्ति 1:26-28; 2:8, 15, 18; 3:8)। परमेश्वर ने पृथक मनुष्य की नर और मादा स्वरूप में सृष्टि की, और उन्हें आशीष देकर कहा कि वे सारी पृथ्वी में फैल जाएं, उसे अपनी अधीनता में ले लें। 

               क्रमिक विकासवाद (Evolution) के पास इसका कोई उत्तर नहीं है कि क्यों और कैसे विभिन्न जीव-जंतुओं और वनस्पतियों आदि में प्रजनन और जाति को बढ़ाने के विभिन्न तरीके आए। जंतुओं और वनस्पतियों की विभिन्न प्रजातियों में ऐसे कितने ही उदाहरण हैं जिनमें नर और मादा का भेद नहीं है; वे अपने एक ही स्वरूप से अपने समान अगली पीढ़ी उत्पन्न करते हैं। कई पौधों की प्रजातियों में एक ही पौधे में नर और मादा फूल अलग-अलग होते हैं - एक ही डाली या एक ही पौधे में दोनों प्रकार के फूल, तथा अन्य प्रजातियों में एक ही फूल में दोनों नर और मादा अंश,  और उनके बीज से फिर एक नया पौधा उत्पन्न हो जाता है। यदि प्रजाति का ज़ारी रहना बिना नर-मादा के भिन्न होने से संभव है, और हो रहा है, तो फिर यह नर और मादा स्वरूप क्यों और कैसे विकसित हुए - क्रमिक विकासवाद के पास इसका कोई उत्तर नहीं है। किन्तु उपरोक्त बाइबल के हवाले स्पष्ट बताते हैं कि परमेश्वर ने आरंभ से ही मनुष्य को नर और मादा की भिन्नता के साथ,  अलग-अलग दायित्वों के निर्वाह के लिए उत्पन्न किया (देखिए उत्पत्ति 2:24; मरकुस 10:6-8) 

               विज्ञान ने मनुष्य के शरीर की रचना और कार्य विधि की जटिलता और उसके अद्भुत होने को अपने नए उपकरणों के द्वारा पहचानना आरंभ किया है; किन्तु परमेश्वर ने अपने भक्त राजा दाऊद, जिसका जन्म 1085 ईस्वी पूर्व में हुआ था, के द्वारा लिखे गए एक भजन में इस तथ्य को आज से लगभग 2800 से भी अधिक वर्ष पूर्व लिखवा दिया था, “मैं तेरा धन्यवाद करूंगा, इसलिये कि मैं भयानक और अद्भुत रीति से रचा गया हूं। तेरे काम तो आश्चर्य के हैं, और मैं इसे भली भांति जानता हूं” (भजन 139:14 ) 

               इसी प्रकार मनुष्य के जीवन और स्वास्थ्य के बारे में भी बहुत सी बातें हैं, जिन्हें विज्ञान ने अब पहचाना और माना है, किन्तु परमेश्वर ने अपने वचन बाइबल की पुस्तकों में उन्हें हजारों वर्षों से लिखवा रखा है। 

 

मनुष्य और मनुष्य के जीवन से संबंधित तथ्यों के कुछ उदाहरण देखते हैं:

               आज से लगभग 2000 वर्ष पूर्व, पौलुस प्रेरित ने अपने एक सुसमाचार प्रचार में कहा था, “उसने एक ही मूल से मनुष्यों की सब जातियां सारी पृथ्वी पर रहने के लिये बनाईं हैं; और उन के ठहराए हुए समय, और निवास के सिवानों को इसलिये बान्धा है” (प्रेरितों 17:26); और उत्पत्ति की पुस्तक जो आज से लगभग 3400 वर्ष पूर्व लिखी गई,  उसके 5 अध्याय में आदम और हव्वा से उत्पन्न होने वाली संतानों के नाम और उनकी संक्षिप्त वंशावली दी गई है - अर्थात सारी मानवजाति उस एक ही मूल, आदि पुरुष, आदम की संतान हैं। वैज्ञानिकों ने जब मनुष्य के डीएनए के अध्ययन किए,  तो उन्हें मनुष्य की रचना और इतिहास के बारे में कई अद्भुत बातें पता चलीं। 1995 में 38 विभिन्न जातियों के वंशों के डीएनए के अध्ययन के द्वारा यह सामने आया कि चाहे वे आज विभिन्न और पृथक जातियाँ हैं,  किन्तु मूल में वे सभी एक ही मूल पुरुष से निकलकर आए हैं! यह बात बाइबल में हजारों वर्ष पहले लिखी गई बात के पूर्णतः अनुरूप है।

               वैज्ञानिकों में असमंजस है कि गर्भ-धारण होने से कितने समय बाद भ्रूण को जीवित कहा जा सकता है। किन्तु बाइबल बताती है कि भ्रूण के गर्भ में आने के समय,  उसके आरंभ से ही वह एक जीवित प्राणी है, जिसके विषय परमेश्वर ने योजना बना रखी है, उद्देश्य निर्धारित किया हुआ हैगर्भ में रचने से पहिले ही मैं ने तुझ पर चित्त लगाया, और उत्पन्न होने से पहिले ही मैं ने तुझे अभिषेक किया; मैं ने तुझे जातियों का भविष्यद्वक्ता ठहराया” (यिर्मयाह 1:5); अर्थात परमेश्वर की दृष्टि में वह आरंभ से ही एक जीवित व्यक्ति है, जो कुछ समय के बाद मनुष्य के स्वरूप में दिखने लगेगा, जन्म लेगा, और फिर बड़ा होकर परमेश्वर के उद्देश्यों को पूरा करेगा। आज विज्ञान भी यह जानता और मानता है कि उस भ्रूण के गर्भ में स्थापित होने के समय, जब वह एक ही कोशिका (cell) दिखाई देता है, तब भी उस एक कोशिका में वही जीवन होता है जो उसके गर्भ से बाहर जन्म लेने के समय होता है, और उस एक कोशिका में विद्यमान डीएनए में वह संपूर्ण जानकारी विद्यमान होती है जिसके द्वारा वह भ्रूण एक कोशिका से बढ़कर मनुष्य रूप में जन्म लेता, और बढ़ता है, कार्य करता है। 

              

               जिस परमेश्वर ने आपको और मुझे अपने स्वरूप में, अद्भुत रीति से रचा है, अपनी श्वास से हमें जीवन दिया है, जो आज दिन तक हमारी देखभाल करता आ रहा है, और हमें अपनी पृथ्वी और प्रकृति के संसाधनों का प्रयोग खुले दिल से करने दे रहा है, वह हम में से प्रत्येक को, हमारे मनों की भावनाओं और विचारों को, हमारी भीतरी-बाहरी वास्तविक दशा को, हमारे मन, विचार, शरीर में किए गए हर पाप को जानता है। चाहे हम उसे स्वीकार करें या न करें; उसके आज्ञाकारी बनें अथवा न बनें; वह हम से बहुत प्रेम भी रखता है, हमारी चिंता भी करता है। वह चाहता है कि उसका रचा हुआ प्रत्येक जन, जिस भी दशा में वह है, वैसा ही उसके पास आ जाए, उस से मेल-मिलाप कर ले, जिससे परमेश्वर उसे पापों से स्वच्छ और शुद्ध करे, तथा शैतान द्वारा बहकाए जाकर अनन्त-विनाश में डाल देने से बचा सके। उसने इस मेल-मिलाप का मार्ग प्रभु यीशु मसीह में होकर तैयार किया और उपलब्ध करवाया है। वह अपेक्षा रखता है कि हम उसकी सृष्टि और अपनी रचना द्वारा उसके अस्तित्व को पहचानें और स्वेच्छा से समय रहते उसके पास आ जाएं, उसे समर्पित और उसकी आज्ञाकारिता का जीवन व्यतीत करें, और उसकी आशीषों की भरपूरी का आनन्द प्राप्त करें। सच्चे मन और स्वेच्छा से की गई आपकी एक छोटी सी प्रार्थना, “हे प्रभु यीशु मैं स्वीकार करता हूँ कि मैं पापी हूँ, और आपने मेरे पापों के लिए क्रूस पर अपना बलिदान दिया है। कृपया मेरे पाप क्षमा करें, मुझे स्वीकार करें, अपनी शरण में लेकर मुझे अपना आज्ञाकारी जन बनाएंआपको अनन्त विनाश से अनन्त जीवन और स्वर्गीय आशीषों में लाकर खड़ा कर देगी। क्या आप आज, अभी यह निर्णय लेंगे? आपको अद्भुत रीति से रचने वाला आपका सृष्टिकर्ता परमेश्वर उसके पक्ष में किए गए आपके निर्णय की लालसा रखे हुए प्रतीक्षा कर रहा है! 

 

बाइबल पाठ: भजन 139:1-4, 13-18, 23-24 

भजन 139:1 हे यहोवा, तू ने मुझे जांच कर जान लिया है।

भजन 139:2 तू मेरा उठना बैठना जानता है; और मेरे विचारों को दूर ही से समझ लेता है।

भजन 139:3 मेरे चलने और लेटने की तू भली भांति छानबीन करता है, और मेरी पूरी चालचलन का भेद जानता है।

भजन 139:4 हे यहोवा, मेरे मुंह में ऐसी कोई बात नहीं जिसे तू पूरी रीति से न जानता हो।

भजन 139:13 मेरे मन का स्वामी तो तू है; तू ने मुझे माता के गर्भ में रचा।

भजन 139:14 मैं तेरा धन्यवाद करूंगा, इसलिये कि मैं भयानक और अद्भुत रीति से रचा गया हूं। तेरे काम तो आश्चर्य के हैं, और मैं इसे भली भांति जानता हूं।

भजन 139:15 जब मैं गुप्त में बनाया जाता, और पृथ्वी के नीचे स्थानों में रचा जाता था, तब मेरी हड्डियां तुझ से छिपी न थीं।

भजन 139:16 तेरी आंखों ने मेरे बेडौल तत्व को देखा; और मेरे सब अंग जो दिन दिन बनते जाते थे वे रचे जाने से पहिले तेरी पुस्तक में लिखे हुए थे।

भजन 139:17 और मेरे लिये तो हे ईश्वर, तेरे विचार क्या ही बहुमूल्य हैं! उनकी संख्या का जोड़ कैसा बड़ा है।

भजन 139:18 यदि मैं उन को गिनता तो वे बालू के किनकों से भी अधिक ठहरते। जब मैं जाग उठता हूं, तब भी तेरे संग रहता हूं।

भजन 139:23 हे ईश्वर, मुझे जांच कर जान ले! मुझे परख कर मेरी चिन्ताओं को जान ले!

भजन 139:24 और देख कि मुझ में कोई बुरी चाल है कि नहीं, और अनन्त के मार्ग में मेरी अगुवाई कर!

 

एक साल में बाइबल: 

  • भजन 97-99
  • रोमियों 16