ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

शनिवार, 27 नवंबर 2021

मसीही सेवकाई, पवित्र आत्मा, और बपतिस्मा - 4


बपतिस्मा - पवित्र आत्मा का बपतिस्मा - 2

पिछले लेख में हमने देखा कि वाक्यांशपवित्र आत्मा का बपतिस्माबाइबल में कहीं नहीं दिया गया है, जहाँ भी लिखा है, वहाँ  “पवित्र आत्मा से बपतिस्मालिखा है, और इन छोटे से शब्दों के हेर-फेर से कही गई बात के अर्थ में बहुत अंतर आ जाता है; फिर बाइबल की बात प्रभु की न रहकर मनुष्य की बात बन जाती है। बहुधा, इसपवित्र आत्मा का बपतिस्माके विषय को लेकर लोगों में यह धारणा दी जाती है कि यह बपतिस्मा पाना पवित्र आत्मा पाने से पृथक, एक अतिरिक्त (extra) अनुभव है, जो मसीही विश्वासी को सामान्य से और अधिक सक्षम करता है, उसे परमेश्वर के लिए और अधिक उपयोगी और सामर्थी बनाता है। इसलिए जो प्रभु के लिए उपयोगी होना चाहता है, या आश्चर्यकर्म तथा सामर्थ्य के कार्य करना चाहता है, उसे प्रभु से यह अनुभव प्राप्त करना चाहिए, इसके लिए प्रयास और प्रार्थना करनी चाहिए। जबकि सत्य यह है कि बाइबल में ऐसी कोई शिक्षा कहीं पर भी नहीं दी गई है। ध्यान करें, न तो उन 3000 प्रथम विश्वासियों से, जिन्होंने पतरस के प्रचार पर विश्वास के द्वारा उद्धार पाया यह बात कही गई, और न ही पौलुस, या पतरस, या अन्य किसी प्रेरित अथवा प्रचारक के द्वारा कभी भी कहीं भी अपने विषय में कहा गया कि उस प्रचारक या सेवक ने एक अतिरिक्तपवित्र आत्मा का बपतिस्मापाया था, जिसके फलस्वरूप वह और अधिक सामर्थी होकर प्रभु के लिए उपयोगी हो सका। इन सेवकों के लिए लिखा है कि इन्होंने कुछ विशेष कार्यपवित्र आत्मा से भरकरकिए - किन्तु यह कहीं नहीं लिखा है कि ऐसा उनके द्वारापवित्र आत्मा का बपतिस्मा लेने के कारण हुआ। साथ ही एक ही सेवक के एक से अधिक बार पवित्र आत्मा से भर जाने के लिए भी लिखा है। हम पवित्र आत्मा से भरकर कार्य करने के विषय में आगे के अध्ययन में देखेंगे।    

       प्रेरितों 1:5 का वाक्य, प्रभु द्वारा वहाँ पर पद 4 में कही जा रही बात का ही ज़ारी रखा जाना है, और प्रभु की बात में कोई चकराने वाली बात (confusion) नहीं है। प्रभु ने सीधे और साफ शब्दों में पद 4 की प्रतिज्ञा - उन शिष्यों के द्वारा पवित्र आत्मा को प्राप्त करना, को ही पद 5 में पवित्र आत्मा का बपतिस्मा पाना कहा है, जिसकी पुष्टि फिर पद 8 में प्रभु की बात से हो जाती है। साथ ही पतरस ने भी कुरनेलियुस के घर में जब अन्यजातियों को प्रचार किया, और उन्होंने उद्धार पाया, पवित्र आत्मा उन पर उतरा, तब भी पतरस ने प्रेरितों 1:5 की बात के अनुसार ही उसे भी, अर्थात प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास करने से तुरंत ही पवित्र आत्मा प्राप्त कर लेने को ही पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाना कहा (प्रेरितों 11:16) 

       न ही प्रभु ने प्रेरितों 1:5 पर अथवा किसी अन्य स्थान पर शिष्यों से यह कहा किपवित्र आत्मा की सामर्थ्य प्राप्त कर लेने के बाद, फिर और प्रयास तथा प्रार्थना करना कि तुम्हें पवित्र आत्मा से भी बपतिस्मा मिल जाए; उसके लिए यत्न करते रहना, जिससे तुम और भी अधिक सामर्थी होकर सेवकाई कर सको – जबकि ऐसा करना उनकी आने वाली विषय-व्यापी सेवकाई के लिए बहुत महत्वपूर्ण था, किन्तु अपनी महान आज्ञा में अथवा कहीं और कभी भी प्रभु ने शिष्यों से इसके विषय कोई बात नहीं कही। अर्थात, उन शिष्यों को पवित्र आत्मा से यह बपतिस्मा या अपनी विश्व-व्यापी सेवकाई के लिए उपयुक्त सामर्थ्य पाने के लिए अपनी ओर से और कुछ भी नहीं करना था; कोई प्रतीक्षा नहीं, कोई प्रयास नहीं, कोई प्रार्थना नहीं, कोई अतिरिक्त बपतिस्मा नहीं। जो होना था वह प्रभु के द्वारा स्वतः ही किया जाना था; यह उनके किसी कार्य के परिणाम स्वरूप नहीं होना था। इस पद में ऐसा कोई संकेत भी नहीं है जिससे यह आभास हो कि पवित्र आत्मा प्राप्त करना और पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाना कोई दो पृथक कार्य अथवा अनुभव हैं, क्योंकि यह स्पष्ट है कि पद 4 और 5 में एक ही बात को दो विभिन्न प्रकार से व्यक्त किया गया है। 

       जैसे हम पहले भी देख चुके हैं, पवित्र आत्मा कोई वस्तु नहीं है जिसे विभाजित करके टुकड़ों में या अंश-अंश करके दिया जा सके। वह ईश्वरीय व्यक्तित्व है, और जब भी, जिसे भी दिया जाता है, उसमें वह अपनी संपूर्णता में ही वास करता है, टुकड़ों में नहीं (यूहन्ना 3:34); और एक बार आने के बाद वह सर्वदा साथ रहता है (यूहन्ना 14:16)। तो यदि प्रेरितों 1:4 की प्रतिज्ञा के अनुसार शिष्यों को पवित्र आत्मा एक बार मिल जाना था, जो फिर उनके साथ सर्वदा बना रहता, तो फिर प्रेरितों 1:5 में कहा गया पवित्र आत्मा का बपतिस्मा यदि कोई अलग अनुभव है, तो फिर अब इस तथाकथितपवित्र आत्मा का बपतिस्माके द्वारा और क्या भिन्न, या अधिक, या अतिरिक्त, दिया जाना शेष है? क्योंकि मसीही विश्वासी को पहले से ही, विश्वास करने पर तुरंत ही, पवित्र आत्मा उसकी संपूर्णता में सर्वदा के लिए दे दिया गया है; तो फिर सेवकाई के लिए और क्या देना रह गया है?

       यदि आप मसीही विश्वासी हैं तो यह आपके लिए अनिवार्य है कि आप परमेश्वर पवित्र आत्मा के विषय वचन में दी गई शिक्षाओं को गंभीरता से सीखें, समझें और उनका पालन करें; और सत्य को जान तथा समझ कर ही उचित और उपयुक्त व्यवहार करें, सही शिक्षाओं का प्रचार करें। किसी के भी द्वारा प्रभु, परमेश्वर, पवित्र आत्मा के नाम से प्रचार की गई हर बात को 1 थिस्सलुनीकियों 5:21 तथा प्रेरितों 17:11 के अनुसार जाँच-परख कर, यह स्थापित कर लेने के बाद कि उस शिक्षा का प्रभु यीशु द्वारा सुसमाचारों में प्रचार किया गया है; प्रेरितों के काम में प्रभु के उस प्रचार का निर्वाह किया गया है; और पत्रियों में उस प्रचार तथा कार्य के विषय शिक्षा दी गई है, तब ही उसे स्वीकार करें तथा उसका पालन करें, उसे औरों को सिखाएं या बताएं। आपको अपनी हर बात का हिसाब प्रभु को देना होगा (मत्ती 12:36-37)। जब वचन आपके हाथ में है, वचन को सिखाने के लिए पवित्र आत्मा आपके साथ है, तो फिर बिना जाँचे और परखे गलत शिक्षाओं में फँस जाने, तथा मनुष्यों और उनके समुदायों और उनकी गलत शिक्षाओं को आदर देते रहने के लिए, उन गलत शिक्षाओं में बने रहने के लिए क्या आप प्रभु परमेश्वर को कोई उत्तर दे सकेंगे?

यदि आपने प्रभु की शिष्यता को अभी तक स्वीकार नहीं किया है, तो अपने अनन्त जीवन और स्वर्गीय आशीषों को सुनिश्चित करने के लिए अभी प्रभु यीशु के पक्ष में अपना निर्णय कर लीजिए। जहाँ प्रभु की आज्ञाकारिता है, उसके वचन की बातों का आदर और पालन है, वहाँ प्रभु की आशीष और सुरक्षा भी है। प्रभु यीशु से अपने पापों के लिए क्षमा माँगकर, स्वेच्छा से तथा सच्चे मन से अपने आप को उसकी अधीनता में समर्पित कर दीजिए - उद्धार और स्वर्गीय जीवन का यही एकमात्र मार्ग है। आपको स्वेच्छा और सच्चे मन से प्रभु यीशु मसीह से केवल एक छोटी प्रार्थना करनी है, और साथ ही अपना जीवन उसे पूर्णतः समर्पित करना है। आप यह प्रार्थना और समर्पण कुछ इस प्रकार से भी कर सकते हैं, “प्रभु यीशु मैं आपका धन्यवाद करता हूँ कि आपने मेरे पापों की क्षमा और समाधान के लिए उन पापों को अपने ऊपर लिया, उनके कारण मेरे स्थान पर क्रूस की मृत्यु सही, गाड़े गए, और मेरे उद्धार के लिए आप तीसरे दिन जी भी उठे, और आज जीवित प्रभु परमेश्वर हैं। कृपया मेरे पापों को क्षमा करें, मुझे अपनी शरण में लें, और मुझे अपना शिष्य बना लें। मैं अपना जीवन आप के हाथों में समर्पित करता हूँ।सच्चे और समर्पित मन से की गई आपकी एक प्रार्थना आपके वर्तमान तथा भविष्य को, इस लोक के और परलोक के जीवन को, अनन्तकाल के लिए स्वर्गीय एवं आशीषित बना देगी।

 

एक साल में बाइबल पढ़ें:

  • यहेजकेल 30-32  
  • 1 पतरस 4 

शुक्रवार, 26 नवंबर 2021

मसीही सेवकाई, पवित्र आत्मा, और बपतिस्मा - 3


बपतिस्मा - पवित्र आत्मा का बपतिस्मा -

पिछले लेखों में बपतिस्मे शब्द के अर्थ और उससे संबंधित कुछ महत्वपूर्ण बातों के बारे में बाइबल में दी गई शिक्षाओं को उनकी वास्तविकता में देखने के बाद, प्रभु यीशु द्वारा कही गई बात को लेकर दी रहीपवित्र आत्मा का बपतिस्मासे संबंधित गलत शिक्षा और उससे संबंधित बातों को देखते हैं। पवित्र आत्मा का बपतिस्मा पाने को लेकर बहुत सी ऐसी शिक्षाएं और विचार मसीही समाज और विश्वासियों में फैली हुई हैं और फैलाई भी जा रही हैं, जो बाइबल की शिक्षाओं के अनुसार नहीं हैं। ये शिक्षाएं किस प्रकार से शक्कर में लपेटे हुए कड़वे और घातक ज़हर के समान हैं, जो विश्वासियों के विश्वास और सेवकाई की बहुत हानि करते हैं, उन्हें सत्य के मार्ग से भटका कर, गलत धारणाओं और निष्फल कार्यों की ओर ले जाते हैं, इसे हम आगे चलकर देखेंगे प्रभु यीशु ने प्रेरितों 1:4 में जो बात कही, कि पवित्र आत्मा प्राप्त होने तक (पद 8) शिष्य यरूशलेम में यह होने की प्रतीक्षा करते रहें, उसी विचार को आगे बढ़ाते हुए, प्रभु ने अपने शिष्यों कहा क्योंकि यूहन्ना ने तो पानी में बपतिस्मा दिया है परन्तु थोड़े दिनों के बाद तुम पवित्रात्मा से बपतिस्मा पाओगे” (प्रेरितों 1:5)। प्रभु की कही बात को, वचन में लिखे हुए उनके ही शब्दों के प्रयोग के साथ ध्यान से देखें और विचारें; प्रभु ने शिष्यों से कहा कि थोड़े ही दिनों में वे पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाएंगे (कानहीं; not ‘of’, but ‘with’)। प्रभु यीशु नेपवित्र आत्मा का बपतिस्मापाने की बात नहीं कही, वरनपवित्र आत्मा से बपतिस्मापाने की बात कही।  

पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाना, प्रभु की बात का पूरा होना है; जबकि पवित्र आत्मा का बपतिस्मा पाना, पानी से बपतिस्मे के अतिरिक्त एक अन्य, एक भिन्न बपतिस्मे की बात करना है। अर्थात पानी से एक बपतिस्मे के लिए प्रभु ने कहा है; और इन लोगों की शिक्षा के अनुसार एक दूसरा और भिन्न बपतिस्मा पवित्र आत्मा का होता है, जो हम पहले देख चुके हैं कि वचन के अनुसार सही नहीं है। पूरे नए नियम में कहीं पर भीपवित्र आत्मा का बपतिस्माकहीं प्रयोग नहीं किया गया है। जहाँ भी प्रयोग हुआ है, “पवित्र आत्मा से बपतिस्माप्रयोग हुआ है। एक छोटे से शब्द का अनुचित प्रयोग, बात के सारे अर्थ को बदल देता है; “सेका अर्थ होता है वह माध्यम जो बपतिस्मा देने के लिए प्रयोग होगा - जैसा हम पिछले लेख में मत्ती 3:11 के संदर्भ में देखा था जहाँपानी से”, “पवित्र आत्मा और आग सेबपतिस्मे दिए जाने की बात की गई है। इसकी तुलना में, ‘काकहने का अर्थ किसी के अधिकार या आज्ञा को दिखना होता है, अथवा किसी अन्य से अलग होकर उस दूसरे जन का हो जाना संकेत करता है। इसलिए बपतिस्मे के संदर्भ मेंकासे अर्थ बनता है बपतिस्मा किसके अधिकार या आज्ञा के अनुसार होगा।प्रभु यीशु का बपतिस्माकहने का अर्थ है वह बपतिस्मा जो प्रभु यीशु के कहे के अनुसार या उसकी आज्ञाकारिता के अनुसार दिया गया; जबकिपवित्र आत्मा का बपतिस्माका अर्थ है वह बपतिस्मा जो पवित्र आत्मा के कहे के अनुसार या उसके अधिकार से दिया गया। 

कुछ संबंधित बाइबल के पदों के द्वारासेऔरकाके अर्थ की भिन्नता को समझते हैं:

  • मत्ती 3:11 मैं तो पानी से तुम्हें मन फिराव का बपतिस्मा देता हूं, परन्तु जो मेरे बाद आने वाला है, वह मुझ से शक्तिशाली है; मैं उस की जूती उठाने के योग्य नहीं, वह तुम्हें पवित्र आत्मा और आग से बपतिस्मा देगा। (पानी, पवित्र आत्मा और आगसेअर्थात इन माध्यमों से; और मन फिरावका”; अर्थात मन फिराव की आज्ञा या अधिकार के पालन के अन्तर्गत)
  • मरकुस 1:8 मैं ने तो तुम्हें पानी से बपतिस्मा दिया है पर वह तुम्हें पवित्र आत्मा से बपतिस्मा देगा।
  • लूका 3:16 तो यूहन्ना ने उन सब से उत्तर में कहा: कि मैं तो तुम्हें पानी से बपतिस्मा देता हूं, परन्तु वह आने वाला है, जो मुझ से शक्तिमान है; मैं तो इस योग्य भी नहीं, कि उसके जूतों का बन्ध खोल सकूं, वह तुम्हें पवित्र आत्मा और आग से बपतिस्मा देगा।
  • यूहन्ना 1:33 और मैं तो उसे पहचानता नहीं था, परन्तु जिसने मुझे जल से बपतिस्मा देने को भेजा, उसी ने मुझ से कहा, कि जिस पर तू आत्मा को उतरते और ठहरते देखे; वही पवित्र आत्मा से बपतिस्मा देनेवाला है।
  • प्रेरितों के काम 11:16 तब मुझे प्रभु का वह वचन स्मरण आया; जो उसने कहा; कि यूहन्ना ने तो पानी से बपतिस्मा दिया, परन्तु तुम पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाओगे।
  • प्रेरितों के काम 18:25 उसने प्रभु के मार्ग की शिक्षा पाई थी, और मन लगाकर यीशु के विषय में ठीक ठीक सुनाता, और सिखाता था, परन्तु वह केवल यूहन्ना के बपतिस्मा की बात जानता था। (यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले की आज्ञा या अधिकार के अन्तर्गत दिया गया बपतिस्मा)
  • 1 कुरिन्थियों 1:12 मेरा कहना यह है, कि तुम में से कोई तो अपने आप को पौलुस का, कोई अपुल्लोस का, कोई कैफा का, कोई मसीह का कहता है। (इन विभिन्न उल्लेखित लोगों में से एक के अधिकार या आज्ञाकारिता में रहने वाला)
  • 1 कुरिन्थियों 10:2 और सब ने बादल में, और समुद्र में, मूसा का बपतिस्मा लिया। (मूसा की आज्ञाकारिता या अधिकार के अन्तर्गत लिया गया बपतिस्मा)
  • रोमियों 6:3 क्या तुम नहीं जानते, कि हम जितनों ने मसीह यीशु का बपतिस्मा लिया तो उस की मृत्यु का बपतिस्मा लिया (प्रभु यीशु की आज्ञाकारिता या अधिकार के अन्तर्गत लिया गया बपतिस्मा)

    ध्यान कीजिए कि हर स्थान पर वाक्यांशपवित्र आत्मा से बपतिस्माका प्रयोग किया गया है, अर्थात, पानी के समान ही पवित्र आत्मा वह माध्यम होगा जिसके द्वारा बपतिस्मा मिलेगा, यानि कि जिसमें डुबोया जाएगाजबकि वचन में कहीं पर भीपवित्र आत्मा का बपतिस्मावाक्यांश प्रयोग नहीं हुआ है। हम देख चुके हैं कि परमेश्वर पवित्र आत्मा केवल वही बताता, स्मरण करवाता, और सिखाता है जो प्रभु यीशु बता और सिखा चुका है; वह अपनी ओर से कुछ नहीं कहता या करता है (यूहन्ना 16:13, 14)। इसलिएपवित्र आत्मा का बपतिस्माकहना, प्रभु यीशु द्वारा बताई गई पवित्र आत्मा की सेवकाई में विरोधाभास (contradiction) उत्पन्न करना होगा। और परमेश्वर पवित्र आत्मा अपनी ओर से या अपने अधिकार से कुछ भी नया कभी नहीं करेगा, नहीं सिखाएगा, नहीं बताएगा। 

यदि आप मसीही विश्वासी हैं तो यह आपके लिए अनिवार्य है कि आप परमेश्वर पवित्र आत्मा के विषय वचन में दी गई शिक्षाओं को गंभीरता से सीखें, समझें और उनका पालन करें; और सत्य को जान तथा समझ कर ही उचित और उपयुक्त व्यवहार करें, सही शिक्षाओं का प्रचार करें। किसी के भी द्वारा प्रभु, परमेश्वर, पवित्र आत्मा के नाम से प्रचार की गई हर बात को 1 थिस्सलुनीकियों 5:21 तथा प्रेरितों 17:11 के अनुसार जाँच-परख कर, यह स्थापित कर लेने के बाद कि उस शिक्षा का प्रभु यीशु द्वारा सुसमाचारों में प्रचार किया गया है; प्रेरितों के काम में प्रभु के उस प्रचार का निर्वाह किया गया है; और पत्रियों में उस प्रचार तथा कार्य के विषय शिक्षा दी गई है, तब ही उसे स्वीकार करें तथा उसका पालन करें, उसे औरों को सिखाएं या बताएं। आपको अपनी हर बात का हिसाब प्रभु को देना होगा (मत्ती 12:36-37)। जब वचन आपके हाथ में है, वचन को सिखाने के लिए पवित्र आत्मा आपके साथ है, तो फिर बिना जाँचे और परखे गलत शिक्षाओं में फँस जाने, तथा मनुष्यों और उनके समुदायों और उनकी गलत शिक्षाओं को आदर देते रहने के लिए, उन गलत शिक्षाओं में बने रहने के लिए क्या आप प्रभु परमेश्वर को कोई उत्तर दे सकेंगे?

यदि आपने प्रभु की शिष्यता को अभी तक स्वीकार नहीं किया है, तो अपने अनन्त जीवन और स्वर्गीय आशीषों को सुनिश्चित करने के लिए अभी प्रभु यीशु के पक्ष में अपना निर्णय कर लीजिए। जहाँ प्रभु की आज्ञाकारिता है, उसके वचन की बातों का आदर और पालन है, वहाँ प्रभु की आशीष और सुरक्षा भी है। प्रभु यीशु से अपने पापों के लिए क्षमा माँगकर, स्वेच्छा से तथा सच्चे मन से अपने आप को उसकी अधीनता में समर्पित कर दीजिए - उद्धार और स्वर्गीय जीवन का यही एकमात्र मार्ग है। आपको स्वेच्छा और सच्चे मन से प्रभु यीशु मसीह से केवल एक छोटी प्रार्थना करनी है, और साथ ही अपना जीवन उसे पूर्णतः समर्पित करना है। आप यह प्रार्थना और समर्पण कुछ इस प्रकार से भी कर सकते हैं, “प्रभु यीशु मैं आपका धन्यवाद करता हूँ कि आपने मेरे पापों की क्षमा और समाधान के लिए उन पापों को अपने ऊपर लिया, उनके कारण मेरे स्थान पर क्रूस की मृत्यु सही, गाड़े गए, और मेरे उद्धार के लिए आप तीसरे दिन जी भी उठे, और आज जीवित प्रभु परमेश्वर हैं। कृपया मेरे पापों को क्षमा करें, मुझे अपनी शरण में लें, और मुझे अपना शिष्य बना लें। मैं अपना जीवन आप के हाथों में समर्पित करता हूँ।सच्चे और समर्पित मन से की गई आपकी एक प्रार्थना आपके वर्तमान तथा भविष्य को, इस लोक के और परलोक के जीवन को, अनन्तकाल के लिए स्वर्गीय एवं आशीषित बना देगी।

 

एक साल में बाइबल पढ़ें:

  • यहेजकेल 30-32  
  • 1 पतरस

गुरुवार, 25 नवंबर 2021

मसीही सेवकाई, पवित्र आत्मा, और बपतिस्मा - 2


बपतिस्मा - अर्थ तथा संबंधित बातें - 2  

       पिछले लेख में हमने बपतिस्मे के अर्थ और उससे संबंधित बातों को देखना आरंभ किया था। परमेश्वर पवित्र आत्मा से संबंधित गलत शिक्षाओं का प्रचार और प्रसार करने वाले, मसीही सेवकाई में उपयोगी एवं प्रभावी होने के लिएपवित्र आत्मा का बपतिस्मापाने पर भी बहुत बल देते हैं। इसी संदर्भ में हमने देखा था किबपतिस्माशब्द का अर्थ क्या है तथा बाइबल की शिक्षाओं के अनुसार बपतिस्मा केवल एक ही है, पानी से दिया गया डूब का बपतिस्मा। यह देखने से पहले कि फिर यहपवित्र आत्मा का बपतिस्माक्या है जिसके विषय बाइबल के आधार पर इतनी बातें की जाती हैं हम बपतिस्मे से संबंधित दो और बातें आज स्पष्ट कर लेते हैं, जो आगे चलकर इस विषय को समझने में हमारी सहायक होंगी। 

आग और पानी का बपतिस्मा:

            मत्ती 3:11 में यूहन्ना द्वारा कही गई बातवह तुम्हें पवित्र आत्मा और आग से बपतिस्मा देगाको लेकर भी गलत शिक्षाएं और व्याख्या दी जाती है कि पवित्र आत्मा का बपतिस्मा, आग का बपतिस्मा है। किन्तु वाक्य स्पष्ट है; यूहन्ना यह नहीं कह रहा है किवह तुम्हें पवित्र आत्मा अर्थात आग से बपतिस्मा देगा”; वरन उसने कहा कि वह तुम्हें पवित्र आत्मा और आग से बपतिस्मा देगा” - यानि कि प्रभु के पास दो वस्तुओं से दिए जाने वाले बपतिस्मे हैं - एक तो पवित्र आत्मा से दूसरा आग से। किन्तु जिन्होंने प्रभु यीशु को स्वीकार कर लिया, उस पर विश्वास कर लिया, अर्थात उद्धार पा लिया, उन्हें स्वतः ही, विश्वास करते ही तुरंत पवित्र आत्मा मिल जाएगा, अर्थात पवित्र आत्मा से बपतिस्मा मिल जाएगा। जिन्होंने प्रभु को स्वीकार नहीं किया, उद्धार नहीं पाया, फिर वे अनन्त कल के लिए नरक की आग की झील में डुबोए जाएंगे - उनके लिए फिर प्रभु के पास आग से बपतिस्मा अर्थात कभी न बुझने वाली आग की झील में डाल दिया जाना है (प्रकाशितवाक्य 19:20; 20:10, 14-15)। तो हर एक व्यक्ति को प्रभु के हाथों एक न एक बपतिस्मा, अर्थात एक न एक में डाला जाना मिलेगा - या तो पवित्र आत्मा से; अन्यथा आग से साथ ही एक अन्य पद पर भी ध्यान कीजिए: प्रेरितों 2:3 में लिखा है, “और उन्हें आग की सी जीभें फटती हुई दिखाई दीं; और उन में से हर एक पर आ ठहरीं”; किन्तु इस घटना - आग की जीभों का आकर प्रभु के शिष्यों पर ठहर जाना और फिर उन्हें पवित्र आत्मा की सामर्थ्य प्राप्त, को न तो यहाँ पर और न ही कभी कहीं अन्य किसी स्थान परपवित्र आत्मा की आग से बपतिस्माकहा गया। जब कि यदि पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाना और आग से बपतिस्मा पाना एक ही होते, तो यह सबसे उपयुक्त अवसर एवं घटना होती इस बात को दिखाने और प्रमाणित करने के लिए; क्योंकि पवित्र आत्मा आग के समान उन लोगों के ऊपर आकर ठहरा था और फिर वे सब लोग पवित्र आत्मा से भर गए थे। किन्तु वचन में इस घटना को यह दिखाने के लिए प्रयोग नहीं किया गया है।

क्या उद्धार के लिए बपतिस्मा आवश्यक है?

उद्धार किसी भी कर्म से नहीं है (इफिसियों 2:5, 8-9), बपतिस्मे से भी नहीं। क्रूस पर पश्चाताप करने वाला डाकू ने कौन सा बपतिस्मा लिया, किन्तु वह स्वर्ग गया। अनेकों लोग जीवन के अंतिम पलों में उद्धार पाते हैं, या विश्वास करने के बाद बपतिस्मा नहीं लेने पाते हैं, क्या वे इसलिए नाश हो जाएंगे क्योंकि पश्चाताप और विश्वास तो किया किन्तु एक रस्म पूरी नहीं की? इस वास्तविकता की बारीकी को समझना आवश्यक है कि उद्धार बपतिस्मे से नहीं है; वरन उद्धार पाए हुओं के लिए बपतिस्मा है। जैसा कि मत्ती 28:19-20 में प्रभु द्वारा दिए गए क्रम से प्रकट है - पहले शिष्य बनाओ; जो शिष्य बने फिर उसे बपतिस्मा दो और उसे प्रभु की बातें सिखाओ। प्रभु द्वारा दिए गए इसी क्रम का निर्वाह प्रेरितों 2 अध्याय में, पतरस के पहले प्रचार में भी हुआ है, पहले लोगों ने पापों का अंगीकार और पश्चाताप किया, और फिर जिन्होंने प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास किया और उसे उद्धारकर्ता ग्रहण किया, उन्हें बपतिस्मा दिया गया; और यही क्रम सारे नए नियम में दोहराया गया है। इससे यह भी स्पष्ट है कि बपतिस्मा बच्चों या शिशुओं के लिए नहीं है, केवल उनके लिए है जिन्होंने प्रभु यीशु को उद्धारकर्ता स्वीकार किया और उसके शिष्य हो गए हैं। 

यहाँ पर अकसर प्रेरितों 2:38 का गलत प्रयोग यह कहकर किया जाता है कि इस पद में लिखा हैतुम में से हर एक अपने अपने पापों की क्षमा के लिये यीशु मसीह के नाम से बपतिस्मा लेअर्थात पापों की क्षमा बपतिस्मे के द्वारा है। किन्तु यह इस वाक्य की गलत समझ है; यहाँ यह अर्थ नहीं है कि पापों की क्षमा प्राप्त करने के लिए बपतिस्मा ले - अन्यथा क्रूस पर पश्चाताप करने वाले डाकू को पापों के क्षमा नहीं मिली। वरन प्रेरितों 2:38 के इस वाक्य का सही अर्थ है किअपने पापों की क्षमा प्राप्त कर लेने की बपतिस्मे के द्वारा साक्षी दो। इस वाक्य में लिखे गए शब्दों के क्रम के कारण इसका अर्थ भिन्न प्रतीत होता है, किन्तु है नहीं। इसे एक उदाहरण से समझते हैं; डॉक्टर बहुधा सफेद कोट पहने और साथ में स्टेथोस्कोप रखते हैं। मान लीजिए डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी कर लेने के पश्चात, उन्हें डॉक्टरी की डिग्री देते समय यदि उनसे, प्रेरितों 2:38 के उपरोक्त वाक्य के समान एक वाक्य द्वारा यह कहा जाए, “तुम में से हर एक अपने प्रशिक्षण के लिए सफेद कोट और स्टेथोस्कोप लेतो क्या इसका यह अर्थ है कि सफेद कोट और स्टेथोस्कोप रखने से वे डॉक्टर हो जाएंगे; या यह कि अब जब तुम डॉक्टर हो गए हो, डॉक्टरी का प्रशिक्षण प्राप्त कर लिया है, तो उसका प्रत्यक्ष चिह्न, सफेद कोट और स्टेथोस्कोप साथ रखो? उस गलत शिक्षा और धारणा से बाहर निकाल कर जब व्यावहारिक जीवन की सामान्य सोच एवं अर्थ के साथ उस वाक्य को देखते हैं तो उसका वह अर्थ प्रकट हो जाता है जो लगभग दो हज़ार वर्ष पूर्व पतरस द्वारा इस वाक्य को कहे जाने पर लोगों ने समझा था। उद्धार बपतिस्मे से नहीं है; द्धार पाए हुओं के लिए बपतिस्मा है। प्रेरितों 2:38 को और विस्तार से देखने तथा समझने के लिए आप इन लिंक्स का भी प्रयोग कर सकते हैं:

अँग्रेज़ी में: (https://www.gotquestions.org/Hindi/Hindi-baptism-acts-2-38.html)

हिन्दी में: (https://www.gotquestions.org/baptism-Acts-2-38.html)

 

यदि आप मसीही विश्वासी हैं तो यह आपके लिए अनिवार्य है कि आप परमेश्वर पवित्र आत्मा के विषय वचन में दी गई शिक्षाओं को गंभीरता से सीखें, समझें और उनका पालन करें; और सत्य को जान तथा समझ कर ही उचित और उपयुक्त व्यवहार करें, सही शिक्षाओं का प्रचार करें। किसी के भी द्वारा प्रभु, परमेश्वर, पवित्र आत्मा के नाम से प्रचार की गई हर बात को 1 थिस्सलुनीकियों 5:21 तथा प्रेरितों 17:11 के अनुसार जाँच-परख कर, यह स्थापित कर लेने के बाद कि उस शिक्षा का प्रभु यीशु द्वारा सुसमाचारों में प्रचार किया गया है; प्रेरितों के काम में प्रभु के उस प्रचार का निर्वाह किया गया है; और पत्रियों में उस प्रचार तथा कार्य के विषय शिक्षा दी गई है, तब ही उसे स्वीकार करें तथा उसका पालन करें, उसे औरों को सिखाएं या बताएं। आपको अपनी हर बात का हिसाब प्रभु को देना होगा (मत्ती 12:36-37)। जब वचन आपके हाथ में है, वचन को सिखाने के लिए पवित्र आत्मा आपके साथ है, तो फिर बिना जाँचे और परखे गलत शिक्षाओं में फँस जाने, तथा मनुष्यों और उनके समुदायों और उनकी गलत शिक्षाओं को आदर देते रहने के लिए, उन गलत शिक्षाओं में बने रहने के लिए क्या आप प्रभु परमेश्वर को कोई उत्तर दे सकेंगे?

यदि आपने प्रभु की शिष्यता को अभी तक स्वीकार नहीं किया है, तो अपने अनन्त जीवन और स्वर्गीय आशीषों को सुनिश्चित करने के लिए अभी प्रभु यीशु के पक्ष में अपना निर्णय कर लीजिए। जहाँ प्रभु की आज्ञाकारिता है, उसके वचन की बातों का आदर और पालन है, वहाँ प्रभु की आशीष और सुरक्षा भी है। प्रभु यीशु से अपने पापों के लिए क्षमा माँगकर, स्वेच्छा से तथा सच्चे मन से अपने आप को उसकी अधीनता में समर्पित कर दीजिए - उद्धार और स्वर्गीय जीवन का यही एकमात्र मार्ग है। आपको स्वेच्छा और सच्चे मन से प्रभु यीशु मसीह से केवल एक छोटी प्रार्थना करनी है, और साथ ही अपना जीवन उसे पूर्णतः समर्पित करना है। आप यह प्रार्थना और समर्पण कुछ इस प्रकार से भी कर सकते हैं, “प्रभु यीशु मैं आपका धन्यवाद करता हूँ कि आपने मेरे पापों की क्षमा और समाधान के लिए उन पापों को अपने ऊपर लिया, उनके कारण मेरे स्थान पर क्रूस की मृत्यु सही, गाड़े गए, और मेरे उद्धार के लिए आप तीसरे दिन जी भी उठे, और आज जीवित प्रभु परमेश्वर हैं। कृपया मेरे पापों को क्षमा करें, मुझे अपनी शरण में लें, और मुझे अपना शिष्य बना लें। मैं अपना जीवन आप के हाथों में समर्पित करता हूँ।सच्चे और समर्पित मन से की गई आपकी एक प्रार्थना आपके वर्तमान तथा भविष्य को, इस लोक के और परलोक के जीवन को, अनन्तकाल के लिए स्वर्गीय एवं आशीषित बना देगी।

 

एक साल में बाइबल पढ़ें:

  • यहेजकेल 24-26  
  • 1 पतरस 2

बुधवार, 24 नवंबर 2021

मसीही सेवकाई, पवित्र आत्मा, और बपतिस्मा - 1


बपतिस्मा - अर्थ तथा संबंधित बातें - 1  

मसीही सेवकाई में परमेश्वर पवित्र आत्मा की भूमिका और सामर्थ्य के संबंध में भ्रामक, अनुचित, और बाइबल के बाहर की तथा बाइबल की शिक्षाओं से भिन्न बातों की गलत शिक्षाओं को देने वाले लोग ऐसी ही एक और गलत शिक्षा की बात पर बहुत जोर देते हैं, उसका बहुत उत्तेजना के साथ प्रचार करते हैं। उनकी यह गलत शिक्षा की बात है पवित्र आत्मा का बपतिस्मा। उनका कहना रहता है कि मसीही विश्वासी के पवित्र आत्मा प्राप्त कर लेने के बाद, प्रभु की सेवकाई के लिए उचित सामर्थ्य पवित्र आत्मा का बपतिस्मा प्राप्त करने से ही मिल सकती है। इसलिए जो भी प्रभु के लिए उपयोगी होना चाहता है, उसे यह पवित्र आत्मा का बपतिस्मा प्राप्त करने के लिए लालसा और प्रयास करने चाहिएं। इन लोगों की अधिकांश अन्य शिक्षाओं एवं धारणाओं के समान, इनकी इस शिक्षा का भी बाइबल से कोई आधार अथवा समर्थन नहीं है। यह केवल कुछ पदों को उनकी बनाई धारणा के अनुसार अर्थ देने और दुरुपयोग करने के द्वारा कही जाने वाली बात है, और परमेश्वर के वचन से जिसका विश्लेषण करने पर उसकी वास्तविकता और खोखलापन सामने आ जाता है। किन्तु बाइबलपवित्र आत्मा का बपतिस्मा” के बारे में क्या कहती है, उसे जानने और समझने से पहले यह जानना और समझना आवश्यक है कि बपतिस्मा और उससे संबंधित बातें क्या हैं। आज से हम इन्हीं का अध्ययन आरंभ करेंगे, और कुछ मूल बातों को समझने के बाद फिर पवित्र आत्मा का बपतिस्मा पर आएँगे।

बपतिस्मा शब्द का अर्थ : 

बपतिस्मा शब्द, यूनानी भाषा के शब्दबैपटिज़ो (Baptizo)” से आया है। मूल यूनानी भाषा में इस शब्द का अर्थ होता हैडुबो देनायाअंदर कर देना”, याअंदर-बाहर से पूर्णतः भिगो देना। दैनिक बातों में इस यूनानी भाषा के शब्द का प्रयोग किसी तरल पदार्थ, जैसे कि पानी, में से उसका कुछ भाग निकालने, या उस पदार्थ में किसी वस्तु को डुबो/पूर्णतः भिगो देने के लिए किया जाता है। जैसे यदि हम आज अपनी हिन्दी भाषा के संदर्भ में से कहें, तो कुएं में से बाल्टी भरकर पानी निकालने के लिए कहा जाएगाबाल्टी को कुएं में बैपटिज़ो करके भर लो 

हमारी वर्तमान चर्चा के संदर्भ में, “बैपटिज़ोके इस शब्दार्थ के आधार पर, प्रभु यीशु द्वारा यह कहने किक्योंकि यूहन्ना ने तो पानी में बपतिस्मा दिया है परन्तु थोड़े दिनों के बाद तुम पवित्रात्मा से बपतिस्मा पाओगे” (प्रेरितों 1:5) में यूहन्ना के पानी में बपतिस्मा देने का अभिप्राय हुआ, पानी में डुबो कर बपतिस्मा देना। प्रभु जब यहाँ शिष्यों से कह रहा है किथोड़े दिनों में तुम पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाओगेतो इससे प्रभु की कही बात की यही समझ आती है किथोड़े दिनों में तुम पवित्र आत्मा में डुबो दिए जाओगे; या पवित्र आत्मा तुम्हें अंदर-बाहर पूर्णतः भिगो देगा, अपने में समो लेगा।

यद्यपि बाइबल में कहीं पर भीबपतिस्मा देनेकी क्रिया को दिखाने के लिए पानी मेंडुबो देनाअनुवाद नहीं किया गया है, किन्तु जहाँ भी बपतिस्मा देने का उल्लेख आया है, वहीं पर साथ ही संकेत पानी में डुबोने का भी आया है। साथ ही, बाइबल में कहीं पर भी पानी के छिड़कने के द्वारा बपतिस्मा देने, या बच्चों को बपतिस्मा देने का उल्लेख अथवा उदाहरण नहीं है। बपतिस्मा हमेशा ही वयस्कों को, उनके द्वारा अपने पापों से पश्चाताप करने के बाद स्वेच्छा से उसे लेने के लिए आगे आने पर ही दिया गया है। पानी में बपतिस्मा दिए जाने से संबंधित बाइबल के कुछ पदों को देखिए:

  • मत्ती 3:6 - लोगों ने स्वयं अपने पापों को मानकर, आगे आकर यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले से यरदन नदी में बपतिस्मा लिया। 
  • मत्ती 3:16 - प्रभु यीशु पानी में से ऊपर आया। 
  • यूहन्ना 3:23 - यूहन्ना बहुत जल के स्थान पर बपतिस्मा देता था। 
  • प्रेरितों 8:36-39 - खोजे ने जल का स्थान देखा और बपतिस्मा लेने की इच्छा व्यक्त की (पद 36), छिड़काव के लायक पानी तो उसके पास भी होगा, किन्तु डुबोए जाने के योग्य नहीं।  पद 38 - खोजा और फिलिप्पुस जल में उतर पड़े; पद 39, वे जल में से निकल कर ऊपर आए। 

 

प्रकट और स्पष्ट है कि सभी स्थानों पर अभिप्राय पानी में जाने और पानी से बाहर आने, तथा अधिक जल के स्थान जैसे कि नदी, या तालाब, या किसी अन्य अंदर उतर कर डुबकी लेने लायक गहरे जलाशय के प्रयोग करने का है। किसी कुएं में से पानी लेकर या छोटे नाले के जल में से कुछ पानी लेकर बपतिस्मा देने का संपूर्ण बाइबल में कहीं कोई उल्लेख नहीं है। अर्थात बपतिस्मा, जैसा कि उस यूनानी शब्द का अर्थ है, डुबो कर ही दिया जाता था। 

कितने प्रकार के बपतिस्मे?

इफिसियों 4:5 में लिखा हैएक ही प्रभु है, एक ही विश्वास, एक ही बपतिस्मा”; पवित्र आत्मा की अगुवाई से पौलुस ने बिलकुल स्पष्ट और बल देकर लिखा है कि बपतिस्मा एक ही है। यदि पवित्र आत्मा का बपतिस्मा कोई पृथक अनुभव या क्रिया होती है, तो फिर पवित्र आत्मा द्वारा लिखवाया गया यह वचन झूठा हो जाता है, बाइबल में विरोधाभास या गलती हो जाती है - क्योंकि तब एक बपतिस्मा पानी का हुआ - जो प्रभु यीशु ने भी लिया, और जिसे देने की आज्ञा भी दी (मत्ती 28:19); और पवित्र आत्मा का बपतिस्मा फिर गिनती में दूसरा हुआ। किन्तु बाइबल तो बड़ी दृढ़ता से एक ही बपतिस्मे की बात करती है। अब क्योंकि पानी का बपतिस्मा तो स्थापित है, इसलिए या तो पवित्र आत्मा का बपतिस्मा है ही नहीं; अथवा इफिसियों 4:5 में गलत लिखा गया है; जिसका तात्पर्य हुआ कि पवित्र आत्मा द्वारा लिखवाए गए परमेश्वर के वचन बाइबल में गलतियाँ हैं!

इस संदर्भ में इब्रानियों 6:2 में प्रयुक्त बहुवचनबपतिस्मोंको लेकर असमंजस नहीं होना चाहिए। इन पदों के संदर्भ को देखिए; इब्रानियों 6:1-3 मसीह की शिक्षाओं के बारे में बात कर रहा है (देखिए इब्रानियों 5:12; इब्रानियों 6:1); और इफिसियों 4:5 तब तथा आज की व्यवहारिक क्रिया, यानि कि बपतिस्मा लिए/दिए जाने की बात कर रहा है। इब्रानियों 6:2 के बहुवचन को 1 कुरिन्थियों 10:2 (मूसा का बपतिस्मा) और रोमियों 6:3 (प्रभु यीशु का बपतिस्मा) के आधार पर देखना और समझना चाहिए - शिक्षा के रूप में, पुराने नियम में बपतिस्मे का एक उदाहरण इस्राएलियों का लाल सागर में जाना और ऊपर बादल द्वारा ढाँपा हुआ होना - उनका जल से ढँके हुए होना था। और नए नियम के उदाहरण, यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले के द्वारा दिए जाने वाले बपतिस्मे (मत्ती 3:5-6, 11), जिनमें प्रभु का बपतिस्मा (मत्ती 3:13-16) भी था, और प्रभु के शिष्यों द्वारा दिए गए बपतिस्मे (यूहन्ना 4:2); ये सब भी पानी में ही दिए गए डूब के बपतिस्मे थे - जिन्हें प्रभु ने आगे भी अपने भावी शिष्यों को देते रहने के लिए कहा (मत्ती 28:19), और जिसके लिए रोमियों 6:3 मेंमसीह का बपतिस्मालिखा गया है। तो शिक्षा के दृष्टिकोण से, पुराने और नए नियम से, एक ही पदार्थ - पानी से ही, किन्तु दो प्रकार से दिए गए डूब के बपतिस्मे हुए - मूसा का बपतिस्मा बादल से ढाँपे और विभाजित समुद्र के जल से घेरे जाने के द्वारा पानी से दिया गया सांकेतिक बपतिस्मा; और नए नियम में यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले और प्रभु के तब तथा अब के शिष्यों के द्वारा पानी में दिया जाने वाला डूब का वास्तविक बपतिस्मा। इसलिए बपतिस्मों से संबंधित शिक्षा के दृष्टिकोण से इब्रानियों 6:2 बहु वचनबपतिस्मोंप्रयोग किया गया। 

इफिसियों 4:5 वर्तमान में मसीही विश्वासी के प्रभु की आज्ञा के अनुसार बपतिस्मा लेने के लिए कह रहा है, इसलिए एक वचन है, और नए नियम का एकमात्र बपतिस्मा है।  

 यदि आप मसीही विश्वासी हैं तो यह आपके लिए अनिवार्य है कि आप परमेश्वर पवित्र आत्मा के विषय वचन में दी गई शिक्षाओं को गंभीरता से सीखें, समझें और उनका पालन करें; और सत्य को जान तथा समझ कर ही उचित और उपयुक्त व्यवहार करें, सही शिक्षाओं का प्रचार करें। किसी के भी द्वारा प्रभु, परमेश्वर, पवित्र आत्मा के नाम से प्रचार की गई हर बात को 1 थिस्सलुनीकियों 5:21 तथा प्रेरितों 17:11 के अनुसार जाँच-परख कर, यह स्थापित कर लेने के बाद कि उस शिक्षा का प्रभु यीशु द्वारा सुसमाचारों में प्रचार किया गया है; प्रेरितों के काम में प्रभु के उस प्रचार का निर्वाह किया गया है; और पत्रियों में उस प्रचार तथा कार्य के विषय शिक्षा दी गई है, तब ही उसे स्वीकार करें तथा उसका पालन करें, उसे औरों को सिखाएं या बताएं। आपको अपनी हर बात का हिसाब प्रभु को देना होगा (मत्ती 12:36-37)। जब वचन आपके हाथ में है, वचन को सिखाने के लिए पवित्र आत्मा आपके साथ है, तो फिर बिना जाँचे और परखे गलत शिक्षाओं में फँस जाने, तथा मनुष्यों और उनके समुदायों और उनकी गलत शिक्षाओं को आदर देते रहने के लिए, उन गलत शिक्षाओं में बने रहने के लिए क्या आप प्रभु परमेश्वर को कोई उत्तर दे सकेंगे?

यदि आपने प्रभु की शिष्यता को अभी तक स्वीकार नहीं किया है, तो अपने अनन्त जीवन और स्वर्गीय आशीषों को सुनिश्चित करने के लिए अभी प्रभु यीशु के पक्ष में अपना निर्णय कर लीजिए। जहाँ प्रभु की आज्ञाकारिता है, उसके वचन की बातों का आदर और पालन है, वहाँ प्रभु की आशीष और सुरक्षा भी है। प्रभु यीशु से अपने पापों के लिए क्षमा माँगकर, स्वेच्छा से तथा सच्चे मन से अपने आप को उसकी अधीनता में समर्पित कर दीजिए - उद्धार और स्वर्गीय जीवन का यही एकमात्र मार्ग है। आपको स्वेच्छा और सच्चे मन से प्रभु यीशु मसीह से केवल एक छोटी प्रार्थना करनी है, और साथ ही अपना जीवन उसे पूर्णतः समर्पित करना है। आप यह प्रार्थना और समर्पण कुछ इस प्रकार से भी कर सकते हैं, “प्रभु यीशु मैं आपका धन्यवाद करता हूँ कि आपने मेरे पापों की क्षमा और समाधान के लिए उन पापों को अपने ऊपर लिया, उनके कारण मेरे स्थान पर क्रूस की मृत्यु सही, गाड़े गए, और मेरे उद्धार के लिए आप तीसरे दिन जी भी उठे, और आज जीवित प्रभु परमेश्वर हैं। कृपया मेरे पापों को क्षमा करें, मुझे अपनी शरण में लें, और मुझे अपना शिष्य बना लें। मैं अपना जीवन आप के हाथों में समर्पित करता हूँ।सच्चे और समर्पित मन से की गई आपकी एक प्रार्थना आपके वर्तमान तथा भविष्य को, इस लोक के और परलोक के जीवन को, अनन्तकाल के लिए स्वर्गीय एवं आशीषित बना देगी।

 

एक साल में बाइबल पढ़ें:

  • यहेजकेल 22-23  
  • 1 पतरस   

मंगलवार, 23 नवंबर 2021

मसीही सेवकाई में पवित्र आत्मा की भूमिका - पुनः अवलोकन (5)


मसीही सेवकाई में पवित्र आत्मा की कार्य-विधि - 2 (नवंबर 15 से 18 तक के लेखों का सारांश)

पिछले सारांश में हमने यूहन्ना 16:8-11 के आधार पर पुनःअवलोकन किया था कि मसीही विश्वासी, पवित्र आत्मा की सहायता और मार्गदर्शन द्वारा, संसार के लोगों पर पाप, धार्मिकता, और न्याय के बारे में उन लोगों के विचार, व्यवहार, और धारणाओं की तुलना में मसीही शिक्षाओं और जीवन को रखता है, अपने जीवन से उन्हें प्रदर्शित करता है। संसार और मसीही विश्वास के मध्य का यह तुलनात्मक प्रकटीकरण, स्वतः ही संसार के लोगों को कायल करने के लिए पर्याप्त है। बाइबल के अनुसार यही अपने आप में मसीही विश्वासी में पवित्र आत्मा की उपस्थिति का प्रमाण है। इसके बाद प्रभु यीशु ने 12 पद में शिष्यों से कहा कि परमेश्वर पवित्र आत्मा आकर उन्हें उन बातों को बताएगा, जिन्हें वे अभी नहीं समझ सकते (जैसे कि प्रभु भोज से संबंधित यूहन्ना 6:60-66 की प्रभु की बात) किन्तु पवित्र आत्मा की उनमें उपस्थिति उन्हें उन बातों के ग्रहण करने और समझने के लिए सक्षम कर देगी।

फिर 13 पद में एक बार फिर प्रभु यीशु ने पवित्र आत्मा को 'सत्य का आत्मा' कहा; अर्थात उनकी हर बात सत्य है, और वे केवल सत्य ही का मार्ग बताएंगे; वे किसी भी असत्य के साथ कभी सम्मिलित नहीं होंगे। प्रभु ने कहा कि पवित्र आत्मातुम्हेंअर्थात प्रभु यीशु के शिष्यों की मसीही सेवकाई में तीन बातें और करेगा: 

(i) वह सब सत्य का मार्ग बताएगा

(ii) वह अपनी ओर से नहीं कहेगा, परंतु जो कुछ सुनेगा, वही कहेगा;

(iii) वह आने वाली बातें बताएगा।

 आज परमेश्वर पवित्र आत्मा के नाम से बहुतायत से किए जाने वाले भ्रामक प्रचार, गलत शिक्षाओं, और मन-गढ़न्त बातों के संदर्भ में, उन बातों और शिक्षाओं को जाँचने और परखने, उनकी सत्यता को जानने और पहचानने के लिए, ऐसी शिक्षाओं और उनके प्रचारकों को स्वीकार अथवा अस्वीकार करने के लिए, ये तीनों बातें बहुत सहायक तथा महत्वपूर्ण हैं। 

इनमें से पहली बात है कि पवित्र आत्मा मसीह के शिष्यों अर्थात मसीही विश्वासियों कोसब सत्य का मार्ग बताएगा। आज पवित्र आत्मा के नाम पर गलत शिक्षाएं और व्यवहार सिखाने वाले सभी प्रचारक सामान्यतः परमेश्वर के वचन की शिक्षा (1 यूहन्ना 2:15-17) के विपरीत, सांसारिक सुख-समृद्धि-संपत्ति और शारीरिक चंगाई या लाभ प्राप्त करने ही की बातें करते हैं। उनके प्रचार में पापों के लिए पश्चाताप करने (प्रेरितों 2:38), प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास द्वारा उद्धार पाने का प्रोत्साहन एवं अनिवार्यता (प्रेरितों 15:11; 16:31), प्रभु यीशु के शिष्य बनने और उससे होने वाले मन-परिवर्तन के बारे में (रोमियों 12:1-2; 2 कुरिन्थियों 5:17), अपने आप को संसार में यात्री और परदेशी जानकर सांसारिक नहीं वरन स्वर्गीय वस्तुओं पर मन लगाने (1 पतरस 2:11; कुलुस्सियों 3:1-2), और मसीही विश्वास और सेवकाई में दुख आने और उठाने की अनिवार्यता (फिलिप्पियों 1:29; 2 तिमुथियुस 3:12), आदि, सुसमाचार की बातें या तो होती ही नहीं हैं, अथवा बहुत कम होती हैं। उनका प्रचार, और जीवन मुख्यतः पार्थिव, नश्वर, शारीरिक सुख-सुविधा की बातों से ही संबंधित होता है; और फिर भी वे यह सब पवित्र आत्मा की ओर से अथवा उनकी अगुवाई में होकर कहने का दावा करते हैं। जब कि पवित्र आत्मा के संबंध में ऐसी कोई शिक्षा, कोई बात परमेश्वर के वचन में कहीं नहीं दी गई है। तो फिर वहसत्य का आत्माजो केवल सत्य अर्थात परमेश्वर के वचन और प्रभु यीशु की बातों का मार्ग बताता है, वह यह सब कैसे कर सकता है?

यूहन्ना 16:13 में पवित्र आत्मा के कार्य से संबंधित प्रभु यीशु द्वारा कही गई दूसरी बात है कि वह अपनी ओर से नहीं कहेगा, परंतु जो कुछ सुनेगा, वही कहेगा। प्रभु की इस बात को तथा यह ध्यान रखते हुए कि परमेश्वर का वचन अपनी पूर्णता में लिखा जा चुका है, अनन्तकाल के लिए स्वर्ग में स्थापित हो चुका है (भजन 119:89), यह कैसे संभव है कि परमेश्वर पवित्र आत्मा उस वचन के अतिरिक्त और कुछ नया किसी मनुष्य को बताए या सिखाए? यह तो उपरोक्त बातों के विरुद्ध होगा, उन्हें झूठ दिखाएगा - जोसत्य के आत्मापवित्र आत्मा के गुणों के विरुद्ध है। पवित्र आत्मा के द्वारा नई बातें, नए दर्शन, नई शिक्षाएं आदि पाने के सभी दावे प्रभु के इस वचन के अनुसार झूठे हैं; और मसीही विश्वासियों तथा सेवकों को झूठ के प्रचारकों से बच कर रहना है (2 यूहन्ना 1:10-11)। बाइबल से संबंधित किसी भी सिद्धांत को स्वीकार करने से पहले (1 थिस्सलुनीकियों 5:21), उसे तीन बातों के आधार पर जाँच लेना चाहिए; ये बातें हैं - i. उसे सुसमाचारों में प्रभु यीशु द्वारा प्रचार किया गया; ii. उसको प्रेरितों के काम में व्यावहारिक मसीही या मण्डली के जीवन में प्रदर्शित किया गया; iii. पत्रियों में उसकी व्याख्या की गई या उसके विषय सिखाया गया। जिस बात में ये तीनों गुण नहीं हैं, उसे तुरंत स्वीकार नहीं करना चाहिए; बेरिया के विश्वासियों के समान (प्रेरितों 17:11) वचन से यह देखना चाहिए कि जो कहा और बताया जा रहा है, वास्तव में पवित्र शास्त्र में वैसा ही लिखा है या नहीं - यह खरे आत्मिक व्यक्ति का चिह्न है 1 कुरिन्थियों 2:15 

       यूहन्ना 16:13 की पवित्र आत्मा के कार्य से संबंधित तीसरी बात है कि वहतुम्हेंअर्थात प्रभु के शिष्यों को आने वाली बातें बताएगा। प्रभु की यह बात पवित्र आत्मा के नाम पर कुछ भी कहने और उन्हें पवित्र आत्मा की ओर से दी गईभविष्यवाणीहोने का दावा करने की छूट नहीं है। यदि नए नियम की बातों के आधार पर इस बात को देखें, तो इस बात का जो अर्थ सामने आता है वह है कि पवित्र आत्मा मसीही सेवकाई और सुसमाचार प्रचार के दौरान शिष्यों को आने वाली बातों को बताता है, अर्थात उन्हें सचेत रखता था। ऐसा बिलकुल नहीं था कि पवित्र आत्मा लोगों को अपना ढिंढोरा पीटने और अपने आप को लोगों के सामने भविष्यद्वक्ता दिखा कर वाह-वाही लूटने के लिए कहता था। वरन वह सुसमाचार प्रचार में लगे प्रभु के शिष्यों को हर परिस्थिति के लिए तैयार और आगाह रखता था, जो शिष्यों की सेवकाई के लिए बहुत महत्वपूर्ण बात थी (प्रेरितों 9:16; 13:4; 20:22-23; 21:4, 11; 23:16)। दूसरी बात, यदि लोगों द्वारापवित्र आत्मा की ओर सेमिली और की जा रही भविष्यवाणियों के विषयों को देखें, और उनके पूरा होने का आँकलन करें, तो स्पष्ट हो जाता है कि उनभविष्यवाणियोंके विषय और सामग्री, सामान्यतः परमेश्वर के वचन से बाहर या अतिरिक्त होते हैं - जो, जैसा हम ऊपर देख चुके हैं, पवित्र आत्मा की ओर से किया जाना संभव नहीं है। साथ ही यदि उनभविष्यवाणियोंके पूरे होने के आधार पर आँकलन करने के लिए उन्हें परमेश्वर के वचन की शिक्षा से देखें, तो व्यवस्थाविवरण 18:20-22 में लिखा है किभविष्यवाणियोंका पूरा न होना इस बात का प्रमाण है कि वे परमेश्वर की ओर से नहीं हैं, और ऐसे नबियों को मार डालना चाहिए। किन्तु आज लोग ऐसे झूठे प्रचारकों को बहुत आदर और सम्मान देते हैं; उनकी झूठी शिक्षाओं के लिए उनकी आलोचना भी सहन नहीं करना चाहते हैं, वरन उन गलत, शारीरिक, और सांसारिक बातों को ही सत्य मान कर चलते हैं।

फिर यूहन्ना 16:14-15 में प्रभु ने एक बार फिर इस बात को दोहराया कि पवित्र आत्मा केवल प्रभु यीशु ही की बातों में से कहेगा और सिखाएगा। अर्थात, चाहे कोई भी कुछ भी क्यों न कहता रहे, कोई भी अद्भुत बातप्रमाणके रूप में क्यों न दिखाता रहे, प्रभु यीशु द्वारा वचन में दे दी गई शिक्षाओं और बातों से अधिक या बाहर जो कुछ भी है, वह न तो प्रभु यीशु की ओर से है, और न पवित्र आत्मा की ओर से। इसलिए प्रभु की शिक्षाओं से अतिरिक्त और बाहर की किसी भी शिक्षा या व्यवहार को स्वीकार नहीं करना है। यहाँ परमेश्वर पवित्र आत्मा का एक और कार्य को बताया गया है - वह प्रभु यीशु की महिमा करेगा। आज पवित्र आत्मा के नाम से फैलाई जाने वाली गलत शिक्षाओं को सिखाने और फैलाने वाले बहुत दृढ़ता से यह दावा करते हैं कि उन्हें यह सब पवित्र आत्मा की ओर से मिला है, और वे इसके लिए पवित्र आत्मा की महिमा करने पर बल देते हैं, तथा उन प्रचारकों के स्वयं के जीवन, व्यवहार, और शिक्षाओं में, पवित्र आत्मा के नाम के उपयोग की तुलना में, प्रभु यीशु का नाम और उनकी शिक्षाओं तथा कार्यों का उल्लेख और महत्व बहुत कम होता है। वे लोगों को भी यही बताते और सिखाते हैं कि वे भी पवित्र आत्मा से उनके समान बातों तथा व्यवहार को प्राप्त करने की माँग करें। ये लोग पवित्र आत्मा की महिमा करने पर बहुत बल देते हैं, और अपनी इस बात को पवित्र आत्मा से सीखा हुआ बताते है। जबकि प्रभु यीशु मसीह ने साफ, सीधे शब्दों में, बिलकुल स्पष्ट, दो-टूक कहा है कि पवित्र आत्मा अपनी नहीं वरन प्रभु की महिमा करेगा! प्रभु की यह बात हमारे सामने मसीही विश्वास की शिक्षाओं का आँकलन करने का एक और मापदंड रखती है - मसीही विश्वास और सेवकाई से संबंधित जो भी शिक्षा अथवा व्यवहार प्रभु यीशु मसीह पर केंद्रित न हो, प्रभु यीशु को महिमा न दे; बल्कि प्रभु यीशु और उनके क्रूस पर दिए गए बलिदान, पुनरुत्थान, और सुसमाचार की बजाए किसी अन्य की ओर ध्यान आकर्षित करे, उसे महिमित करने का प्रयास करे, वह परमेश्वर प्रभु की ओर से नहीं है; चाहे उस महिमा का विषय परमेश्वर पवित्र आत्मा ही क्यों न हो। पवित्र आत्मा का कार्य प्रभु यीशु की महिमा करना है; वह अपनी महिमा नहीं करवाता है, और न ही ऐसी कोई शिक्षा या व्यवहार सिखाता है जो प्रभु यीशु की महिमा न करे, या करने पर ध्यान न दे, अथवा वचन के विरुद्ध हो।

यदि आप मसीही विश्वासी हैं तो यह आपके लिए अनिवार्य है कि आप परमेश्वर पवित्र आत्मा के विषय वचन में दी गई शिक्षाओं को गंभीरता से सीखें, समझें और उनका पालन करें; और सत्य को जान तथा समझ कर ही उचित और उपयुक्त व्यवहार करें, सही शिक्षाओं का प्रचार करें। आपको अपनी हर बात का हिसाब प्रभु को देना होगा (मत्ती 12:36-37)। जब वचन आपके हाथ में है, वचन को सिखाने के लिए पवित्र आत्मा आपके साथ है, तो फिर बिना जाँचे और परखे गलत शिक्षाओं में फँस जाने, तथा मनुष्यों और उनके समुदायों और शिक्षाओं को आदर देते रहने के लिए उन गलत शिक्षाओं में बने रहने के लिए क्या आप प्रभु परमेश्वर को कोई उत्तर दे सकेंगे?

यदि आपने प्रभु की शिष्यता को अभी तक स्वीकार नहीं किया है, तो अपने अनन्त जीवन और स्वर्गीय आशीषों को सुनिश्चित करने के लिए अभी प्रभु यीशु के पक्ष में अपना निर्णय कर लीजिए। जहाँ प्रभु की आज्ञाकारिता है, उसके वचन की बातों का आदर और पालन है, वहाँ प्रभु की आशीष और सुरक्षा भी है। प्रभु यीशु से अपने पापों के लिए क्षमा माँगकर, स्वेच्छा से तथा सच्चे मन से अपने आप को उसकी अधीनता में समर्पित कर दीजिए - उद्धार और स्वर्गीय जीवन का यही एकमात्र मार्ग है। आपको स्वेच्छा और सच्चे मन से प्रभु यीशु मसीह से केवल एक छोटी प्रार्थना करनी है, और साथ ही अपना जीवन उसे पूर्णतः समर्पित करना है। आप यह प्रार्थना और समर्पण कुछ इस प्रकार से भी कर सकते हैं, “प्रभु यीशु मैं आपका धन्यवाद करता हूँ कि आपने मेरे पापों की क्षमा और समाधान के लिए उन पापों को अपने ऊपर लिया, उनके कारण मेरे स्थान पर क्रूस की मृत्यु सही, गाड़े गए, और मेरे उद्धार के लिए आप तीसरे दिन जी भी उठे, और आज जीवित प्रभु परमेश्वर हैं। कृपया मेरे पापों को क्षमा करें, मुझे अपनी शरण में लें, और मुझे अपना शिष्य बना लें। मैं अपना जीवन आप के हाथों में समर्पित करता हूँ।सच्चे और समर्पित मन से की गई आपकी एक प्रार्थना आपके वर्तमान तथा भविष्य को, इस लोक के और परलोक के जीवन को, अनन्तकाल के लिए स्वर्गीय एवं आशीषित बना देगी।


एक साल में बाइबल पढ़ें:

  • यहेजकेल 20-21 
  • याकूब 5