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सोमवार, 30 सितंबर 2013

अवश्यंभावी

   अपनी पुस्तक Long for This World में लेखक जौनथन वेइनर विज्ञान की दीर्घायु देने की प्रतिज्ञा के बारे में लिखते हैं। इस पुस्तक का केन्द्र है वैज्ञानिक ऑब्रे डी ग्रे, जिसने यह भविष्यवाणी करी है कि विज्ञान एक दिन हमें 1000 वर्ष के जीवन काल देने पाएगा क्योंकि जीवनशास्त्र के आण्विक स्तर पर अध्ययन के द्वारा यह समझा जा सका है कि हमारी कोषिकाएं अपनी एक उम्र हो जाने के बाद काम करना बन्द क्यों कर देती हैं और फिर ’मरने’ लग जाती हैं। आयुबद्ध होने की इस प्रक्रिया की समझ मिलने से इसे रोकने और बदलने की संभावना भी सामने आ गई है।

   लेकिन इससे क्या फर्क पड़ता है कि हम 1000 वर्ष जी सकेंगे क्योंकि फिर भी मरना तो होगा ही। डी ग्रे की भविष्यवाणी उस अन्तिम और निर्णायक अवश्यंभावी प्रश्न का सामना करने को टाल अवश्य देती है किंतु कोई उत्तर प्रदान नहीं करती कि मरने के बाद क्या होगा, आप वह अनन्त कहाँ बिताएंगे?

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि शारीरिक मृत्यु हमारे अस्तित्व का अन्त नहीं है। बाइबल हमें यह भी बताती है कि जीवन काल केवल एक ही है और फिर उसके बाद न्याय अवशयंभावी है: "और जैसे मनुष्यों के लिये एक बार मरना और उसके बाद न्याय का होना नियुक्त है" (इब्रानियों 9:27)। यह अवशयंभावी है कि प्रत्येक जन को कभी ना कभी मसीह यीशु के सामने खड़े होकर अपने जीवन का हिसाब उसे देना ही होगा - मसीही विश्वासियों को अपने किए अथवा नहीं किए गए कार्यों के लिए और मसीह यीशु में विश्वास नहीं रखने वालों को मसीह यीशु का तिरिस्कार करने के लिए (यूहन्ना 5:25-29; प्रकाशितवाक्य 20:11-15)। साथ ही बाइबल यह भी बताती है कि हम सभी पापी हैं और हम सब को पापों से क्षमा की आवश्यकता है। केवल प्रभु यीशु के क्रुस पर दिए गए बलिदान के द्वारा ही पापों की क्षमा उपलब्ध हुई है, उन सभी के लिए जो प्रभु यीशु पर विश्वास लाते हैं (रोमियों 3:23; 6:23)। वे चाहे कोई, भी कहीं भी क्यों ना हो यह क्षमा संसार के हर जन को उसके जीवन काल भर सेंत-मेंत उपलब्ध रहती है, लेकिन जीवन काल समाप्त हो जाने के बाद फिर क्षमा का अवसर नहीं है, फिर केवल हिसाब और न्याय है।

   परमेश्वर के साथ होने वाला हमारा यह साक्षात्कार अवश्यंभावी है, और हमारे जीवन के परिपेक्ष्य को निर्धारित कर देता है। तो चाहे हम 70 वर्ष जीएं या फिर 1000 वर्ष, उस आने वाले अनन्त के लिए प्रश्न तो वही रहेगा - मरने के बाद क्या होगा, आप वह अनन्त कहाँ बिताएंगे? इस प्रश्न का उत्तर कभी भी अनपेक्षित रूप से आप से माँग लिया जाएगा, और फिर आपके पास कोई अवसर उस अवश्यंभावी को बदलने का नहीं होगा; इसीलिए आज ही यह सुनिश्चित कर लीजिए कि क्या आप परमेश्वर के सामने खड़े होने और हिसाब देने को तैयार हैं? यदि नहीं तो अब हो जाईए; एक सच्चे मन से सच्चे समर्पण के साथ निकली छोटी सी प्रार्थना "हे प्रभु यीशु मेरे पाप क्षमा करें और मुझे अपनी शरण में ले लें", आपका अनन्त बदल डालेगी उसे सुनिश्चित कर देगी। - डेनिस फिशर


केवल वे ही जिन्होंने मसीह यीशु पर अपना विश्वास तथा जीवन स्थिर किया है, अपने सृजनहार से मिलने को भी सदा तैयार रहते हैं।

इस कारण, हे इस्राएल, मैं तुझ से ऐसा ही करूंगा, और इसलिये कि मैं तुझ में यह काम करने पर हूं, हे इस्राएल, अपने परमेश्वर के साम्हने आने के लिये तैयार हो जा। - अमोस 4:12 

बाइबल पाठ: अमोस 4:6-13
Amos 4:6 मैं ने तुम्हारे सब नगरों में दांत की सफाई करा दी, और तुम्हारे सब स्थानों में रोटी की घटी की है, तौभी तुम मेरी ओर फिरकर न आए, यहोवा की यही वाणी है।
Amos 4:7 और जब कटनी के तीन महीने रह गए, तब मैं ने तुम्हारे लिये वर्षा न की; मैं ने एक नगर में जल बरसा कर दूसरे में न बरसाया; एक खेत में जल बरसा, और दूसरा खेत जिस में न बरसा; वह सूख गया।
Amos 4:8 इसलिये दो तीन नगरों के लोग पानी पीने को मारे मारे फिरते हुए एक ही नगर में आए, परन्तु तृप्त न हुए; तौभी तुम मेरी ओर न फिरे, यहोवा की यही वाणी है।
Amos 4:9 मैं ने तुम को लूह और गेरूई से मारा है; और जब तुम्हारी वाटिकाएं और दाख की बारियां, और अंजीर और जलपाई के वृक्ष बहुत हो गए, तब टिड्डियां उन्हें खा गईं; तौभी तुम मेरी ओर फिरकर न आए, यहोवा की यही वाणी है।
Amos 4:10 मैं ने तुम्हारे बीच में मिस्र देश की सी मरी फैलाई; मैं ने तुम्हारे घोड़ों को छिनवा कर तुम्हारे जवानों को तलवार से घात करा दिया; और तुम्हारी छावनी की दुर्गन्ध तुम्हारे पास पहुंचाई; तौभी तुम मेरी ओर फिरकर न आए, यहोवा की यही वाणी है।
Amos 4:11 मैं ने तुम में से कई एक को ऐसा उलट दिया, जैसे परमेश्वर ने सदोम और अमोरा को उलट दिया था, और तुम आग से निकाली हुई लुकटी के समान ठहरे; तौभी तुम मेरी ओर फिरकर न आए, यहोवा की यही वाणी है।
Amos 4:12 इस कारण, हे इस्राएल, मैं तुझ से ऐसा ही करूंगा, और इसलिये कि मैं तुझ में यह काम करने पर हूं, हे इस्राएल, अपने परमेश्वर के साम्हने आने के लिये तैयार हो जा।
Amos 4:13 देख, पहाड़ों का बनाने वाला और पवन का सिरजने वाला, और मनुष्य को उसके मन का विचार बताने वाला और भोर को अन्धकार करने वाला, और जो पृथ्वी के ऊंचे स्थानों पर चलने वाला है, उसी का नाम सेनाओं का परमेश्वर यहोवा है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 9-10 
  • इफिसियों 3


रविवार, 29 सितंबर 2013

दीवार

   रोमी सम्राट हेड्रियन एक दीवार बनवाने के लिए जाने जाते हैं, जो उनके नाम से ही जानी जाती है। सन 117 में सत्ता में आए रोमी सम्राट हेड्रियन की इस उपलब्धि के उत्तरी इंग्लैंड में स्थित खंडहर देखते समय मुझे आभास हुआ कि ’हैड्रीयन की दीवार’ संभवतः उस सम्राट की सबसे प्रसिद्ध उपलब्धी थी। 80 मील लंबी इस दीवार पर 18,000 रोमी सैनिक तैनात रहते थे; उस दीवार और उन सैनिकों का उद्देश्य था उत्तरी इंग्लैंड के बर्बर निवासियों को दक्षिणी इलाकों में हमले करने के लिए प्रवेश करने से रोकना।

   सम्राट हेड्रियन ने भौतिक दीवार खड़ी करवाई लोगों को अलग-अलग और बाहर रखने के लिए, इसकी तुलना में राजाओं के राजा प्रभु यीशु ने एक आत्मिक दीवार गिराई जिससे मनुष्यों की पहुँच और मेल परमेश्वर तथा एक-दूसरे के साथ हो सके।

   जब आरंभिक मसीही मण्डली में यहूदी और गैर-यहूदी मूल से आए विश्वासियों के बीच धार्मिक आस्थाओं को लेकर तना-तनी होने लगी, तो प्रेरित पौलुस ने उन्हें स्मरण दिलाया कि प्रभु यीशु मसीह में विश्वास लाने के द्वारा वे सब एक साथ परमेश्वर के एक ही परिवार के सदस्य हो गए हैं: "क्योंकि वही हमारा मेल है, जिसने दोनों को एक कर लिया: और अलग करने वाली दीवार को जो बीच में थी, ढा दिया। और अपने शरीर में बैर अर्थात वह व्यवस्था जिस की आज्ञाएं विधियों की रीति पर थीं, मिटा दिया, कि दोनों से अपने में एक नया मनुष्य उत्पन्न कर के मेल करा दे। क्योंकि उस ही के द्वारा हम दोनों की एक आत्मा में पिता के पास पंहुच होती है" (इफिसियों 2:14-15, 18)।

   मसीही विश्वास का एक अनुपम और अति सुन्दर पहलु है मसीह यीशु के अनुयायियों की परमेश्वर की दृष्टि में एकसमानता - किसी प्रकार का कोई भेदभाव नहीं, कहीं कोई ऊँच-नीच नहीं; परमेश्वर सबसे समान प्रेम करता है और सबको समान दृष्टि से ही देखता है तथा सबके साथ समान व्यवहार करता है और यही एकता तथा समानता वह इस पृथ्वी पर हम मसीही विश्वासियों में आपस में भी देखना चाहता है। क्रूस पर अपनी मृत्यु के द्वारा प्रभु यीशु ने लोगों को एक दूसरे से और परमेश्वर से अलग करने वाली हर बाधा को दूर कर दिया है और सबको सच्चे प्रेम तथा सच्ची मित्रता के बन्धन में एक साथ अपने साथ कर लिया है जिससे हम सब एक दूसरे के साथ भी इसी बन्धन में बन्धे हुए रहें और संसार के सामने मसीही प्रेम का उदाहरण प्रस्तुत करें। - डेविड मैक्कैसलैंड


मसीही एकता का उद्गम मसीह का क्रूस है।

और उसके क्रूस पर बहे हुए लोहू के द्वारा मेल मिलाप कर के, सब वस्‍तुओं का उसी के द्वारा से अपने साथ मेल कर ले चाहे वे पृथ्वी पर की हों, चाहे स्वर्ग में की। - कुलुस्सियों 1:20

बाइबल पाठ: इफिसियों 2:11-22
Ephesians 2:11 इस कारण स्मरण करो, कि तुम जो शारीरिक रीति से अन्यजाति हो, (और जो लोग शरीर में हाथ के किए हुए खतने से खतना वाले कहलाते हैं, वे तुम को खतना रहित कहते हैं)।
Ephesians 2:12 तुम लोग उस समय मसीह से अलग और इस्‍त्राएल की प्रजा के पद से अलग किए हुए, और प्रतिज्ञा की वाचाओं के भागी न थे, और आशाहीन और जगत में ईश्वर रहित थे।
Ephesians 2:13 पर अब तो मसीह यीशु में तुम जो पहिले दूर थे, मसीह के लोहू के द्वारा निकट हो गए हो।
Ephesians 2:14 क्योंकि वही हमारा मेल है, जिसने दोनों को एक कर लिया: और अलग करने वाली दीवार को जो बीच में थी, ढा दिया।
Ephesians 2:15 और अपने शरीर में बैर अर्थात वह व्यवस्था जिस की आज्ञाएं विधियों की रीति पर थीं, मिटा दिया, कि दोनों से अपने में एक नया मनुष्य उत्पन्न कर के मेल करा दे।
Ephesians 2:16 और क्रूस पर बैर को नाश कर के इस के द्वारा दानों को एक देह बनाकर परमेश्वर से मिलाए।
Ephesians 2:17 और उसने आकर तुम्हें जो दूर थे, और उन्हें जो निकट थे, दानों को मेल-मिलाप का सुसमाचार सुनाया।
Ephesians 2:18 क्योंकि उस ही के द्वारा हम दोनों की एक आत्मा में पिता के पास पंहुच होती है।
Ephesians 2:19 इसलिये तुम अब विदेशी और मुसाफिर नहीं रहे, परन्तु पवित्र लोगों के संगी स्‍वदेशी और परमेश्वर के घराने के हो गए।
Ephesians 2:20 और प्रेरितों और भविष्यद्वक्ताओं की नेव पर जिसके कोने का पत्थर मसीह यीशु आप ही है, बनाए गए हो।
Ephesians 2:21 जिस में सारी रचना एक साथ मिलकर प्रभु में एक पवित्र मन्दिर बनती जाती है।
Ephesians 2:22 जिस में तुम भी आत्मा के द्वारा परमेश्वर का निवास स्थान होने के लिये एक साथ बनाए जाते हो।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 7-8 
  • इफिसियों 2


शनिवार, 28 सितंबर 2013

उन्नति का माध्यम

   लेखक बनने की इच्छा रखने वाले लोगों के लिए उनके लेखों का बार बार अस्वीकृत हो जाना बहुत निराशाजनक हो सकता है। जब वे अपना लेख किसी प्रकाशक को भेजते हैं और फिर उन्हें उत्तर आता है कि "लेख भेजने के लिए धन्यवाद, किंतु आपका यह लेख वर्तमान में हमारे प्रकाशन की आवश्यकताओं के अनुसार नहीं है" तो अकसर इसका तातपर्य होता है, "ना अभी है और ना कभी होगा!" और लेखक एक के बाद एक प्रकाशकों के पास लेख भेजकर अपने प्रयास जारी रखते हैं, इस आशा में कि कभी तो कोई स्वीकार करेगा।

   मैंने पाया है कि प्रकाशकों द्वारा प्रयुक्त यह अस्वीकृति का वाक्यांश मेरे मसीही जीवन में बढोतरी के लिए बहुत उपयोगी है। इसके सहारे मेरे विचार पुनः मेरे उद्धारकर्ता प्रभु यीशु पर केंद्रित हो जाते हैं और मसीही जीवन ठोकर खाने से बच जाता है!

   कैसे? वो इस प्रकार:
   जब कभी कोई चिंता मुझे घेरने लगती है तो मैं इस वाक्यांश को इस प्रकार अपने ऊपर लागू करती हूँ: "चिंता करना वर्तमान में मेरी आवश्यकताओं के अनुसार नहीं है; अभी नहीं और कभी नहीं" क्योंकि परमेश्वर का वचन बाइबल मुझे आश्वस्त करती है कि "किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं" (फिलिप्पियों 4:6) और मुझे स्मरण हो आता है कि मेरा परमेश्वर मेरी हर प्रार्थना को सुनता है और उसका उत्तर देता है। यदि मुझे किसी से कोई ईर्ष्या होने लगती है तो मैं अपने आप से कहती हूँ "ईर्ष्या वर्तमान में मेरी आवश्यकताओं के अनुसार नहीं है; अभी नहीं और कभी नहीं" क्योंकि परमेश्वर का वचन मुझे चिताता है कि "शान्त मन, तन का जीवन है, परन्तु मन के जलने से हड्डियां भी जल जाती हैं" (नीतिवचन 14:30) तथा "हर बात में धन्यवाद करो: क्योंकि तुम्हारे लिये मसीह यीशु में परमेश्वर की यही इच्छा है" (1 थिस्सुलुनीकियों 5:18) और मुझे स्मरण हो आता है कि मेरा कार्य धन्यवाद करते रहना है ईर्ष्या करना नहीं। ऐसी ही अनेक बातों और परिस्थितियों में इस अस्वीकृति के वाक्यांश को, जो औरों के लिए निराशा का माध्यम हो सकता है मैं अपनी उन्नति का माध्यम बना लेती हूँ।

   एक और स्थल है जहाँ यह वाक्याँश मेरे लिए उन्नति का माध्यम रहा है: हम अपने मनों और चाल-चलन को अपने आप पवित्र और शुद्ध नहीं कर सकते; इसके लिए हमें एक परिवर्तित जीवन चाहिए जो केवल प्रभु यीशु से मिलने वाली पापों की क्षमा तथा उद्धार द्वारा ही संभव है। पापों की क्षमा और उद्धार के साथ ही हमारे मन परमेश्वर के पवित्र आत्मा के मन्दिर बन जाते हैं और वह हमारे अन्दर आकर वास करता है, हमें सिखाता है, और उसकी शिक्षाओं का पालन करने से हम एक निर्मल जीवन व्यतीत करते हैं। संसार और शैतान द्वारा मुझे फिर से अपवित्रता तथा सांसारिकता में ले जाने तथा पवित्र आत्मा की अनाज्ञाकारिता करने से रोकने के लिए और मुझे आत्मिक जीवन में गिराने वाली अशुद्ध बातों के प्रति सही निर्णय लेने में यही वाकयाँश "अभी नहीं और कभी नहीं" मेरा बहुत सहायक रहा है, मेरा उन्नति का माध्यम बना है। आप भी इसे अपने जीवन में आज़मा कर देखिए। - ऐनी सेटास


परमेश्वर के वचन पर मनन करने से परमेश्वर के आत्मा द्वारा हमारे मन नूतन हो जाते हैं।

और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो। - रोमियों 12:2 

बाइबल पाठ: रोमियों 11:33-12:2
Romans 11:33 आहा! परमेश्वर का धन और बुद्धि और ज्ञान क्या ही गंभीर है! उसके विचार कैसे अथाह, और उसके मार्ग कैसे अगम हैं!
Romans 11:34 प्रभु की बुद्धि को किस ने जाना या उसका मंत्री कौन हुआ?
Romans 11:35 ​या किस ने पहिले उसे कुछ दिया है जिस का बदला उसे दिया जाए।
Romans 11:36 क्योंकि उस की ओर से, और उसी के द्वारा, और उसी के लिये सब कुछ है: उस की महिमा युगानुयुग होती रहे: आमीन।
Romans 12:1 इसलिये हे भाइयों, मैं तुम से परमेश्वर की दया स्मरण दिला कर बिनती करता हूं, कि अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान कर के चढ़ाओ: यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है।
Romans 12:2 और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 5-6 
  • इफिसियों 1


शुक्रवार, 27 सितंबर 2013

समर्पित

   परंपरागत सांसारिक ज्ञान प्रश्न करता है कि थोड़े से कैसे कुछ किया जा सकता है? यह आम धारणा है कि कुछ करने के लिए संसाधनों का बहुतायत में होना आवश्यक है, जैसे वित्तीय संसाधन, योग्यतापूर्ण मानव संसाधन, अच्छे और कारगर विचार आदि का अच्छी मात्रा में उपलब्ध होना। लेकिन परमेश्वर इन मानवीय विचारों की सीमाओं से बंधा हुआ नहीं है और उसे हमारे संसाधन नहीं केवल हमारा समर्पण चाहिए। परमेश्वर के वचन बाइबल से कुछ उदाहरणों को लीजिए:

   न्यायियों की पुस्तक में उल्लेख है एक अनजान से व्यक्ति का जिसने अकेले ही इस्त्राएलियों को आताताई पलिश्तियों से छुड़ाया, इसके लिए उसने मात्र एक पशु हांकने वाले पैने का प्रयोग किया और 600 पलिश्तियों को मार डाला (न्यायियों 3:31)। जब परमेश्वर की सामर्थ साथ हो तो बड़ी उपलब्धि के लिए एक छोटी सी छड़ी भी अनेक हथियारों से बढ़कर होती है तथा संख्या का कोई महत्व नहीं होता।

   इसी प्रकार निर्गमन कि पुस्तक में मूसा के विषय में हम पाते हैं कि जब परमेश्वर ने उसे इस्त्राएलियों को मिस्त्र के दासत्व से छुड़ाने के लिए भेजना चाहा तो मूसा ने बहुत आनाकानी करी। तब परमेश्वर ने मूसा से पूछा, यह तेरे हाथ में क्या है? मूसा ने, जो इस वार्तालाप के समय तक भेड़ों का चरवाहा बन चुका था, उत्तर दिया लाठी है। और फिर परमेश्वर ने मूसा के हाथ की लाठी को आश्चर्यकर्म करने की लाठी बना दिया जिसके चमत्कारों से फिर मूसा भी मान गया, इस्त्राएलियों ने भी उसे अपना छुड़ाने वाला स्वीकार कर लिया। मूसा ने उसी लाठी के द्वारा मिस्त्र पर बड़े बड़े आश्चर्यकर्म किए, इस्त्राएलियों को दासत्व से छुड़ाया, लाल समुद्र को दो भाग किया, और कनान देश की यात्रा में इस्त्राएलियों के लिए अनेक कार्य संपन्न किए।

   शामगार के हाथों का पैना, और मूसा के हाथ की लाठी, जब परमेश्वर के लिए समर्पित हो गईं तो परमेश्वर के उद्देश्य पूरे करने के लिए सामर्थी हथियार बन गईं। यह दिखाता है कि परमेश्वर के लिए कुछ तुच्छ या गौण नहीं है; जो उसे समर्पित है वह अद्भुत करने के लिए सामर्थी है। परमेश्वर विलक्षण प्रतिभा वाले लोगों को नहीं खोज रहा है, उसे आवश्यकता है उन साधारण लोगों की जो उसपर विश्वास कर के उसकी आज्ञाकारिता में चलने और उसकी इच्छा की पूर्ति के लिए कार्य करने को तैयार हों; उनका मार्गदर्शन, उनके कार्य के लिए संसाधन और आवश्यक क्षमता उन्हें वह प्रदान करेगा।

   क्या आप परमेश्वर के हाथ में समर्पित और सामर्थी जीवन बिताना चाहेंगे? - एल्बर्ट ली


यदि उसमें परमेश्वर है तो थोड़ा भी बहुत होता है।

उसके बाद अनात का पुत्र शमगर हुआ, उसने छ: सौ पलिश्ती पुरूषों को बैल के पैने से मार डाला; इस कारण वह भी इस्राएल का छुड़ाने वाला हुआ। - न्यायियों 3:31

बाइबल पाठ: निर्गमन 4:1-9,17
Exodus 4:1 तब मूसा ने उतर दिया, कि वे मेरी प्रतीति न करेंगे और न मेरी सुनेंगे, वरन कहेंगे, कि यहोवा ने तुझ को दर्शन नहीं दिया।
Exodus 4:2 यहोवा ने उस से कहा, तेरे हाथ में वह क्या है? वह बोला, लाठी।
Exodus 4:3 उसने कहा, उसे भूमि पर डाल दे; जब उसने उसे भूमि पर डाला तब वह सर्प बन गई, और मूसा उसके साम्हने से भागा।
Exodus 4:4 तब यहोवा ने मूसा से कहा, हाथ बढ़ाकर उसकी पूंछ पकड़ ले कि वे लोग प्रतीति करें कि तुम्हारे पितरों के परमेश्वर अर्थात इब्राहीम के परमेश्वर, इसहाक के परमेश्वर, और याकूब के परमेश्वर, यहोवा ने तुझ को दर्शन दिया है।
Exodus 4:5 तब उसने हाथ बढ़ाकर उसको पकड़ा तब वह उसके हाथ में फिर लाठी बन गई।
Exodus 4:6 फिर यहोवा ने उस से यह भी कहा, कि अपना हाथ छाती पर रखकर ढांप। सो उसने अपना हाथ छाती पर रखकर ढांप लिया; फिर जब उसे निकाला तब क्या देखा, कि उसका हाथ कोढ़ के कारण हिम के समान श्वेत हो गया है।
Exodus 4:7 तब उसने कहा, अपना हाथ छाती पर फिर रखकर ढांप। और उसने अपना हाथ छाती पर रखकर ढांप लिया; और जब उसने उसको छाती पर से निकाला तब क्या देखता है, कि वह फिर सारी देह के समान हो गया।
Exodus 4:8 तब यहोवा ने कहा, यदि वे तेरी बात की प्रतीति न करें, और पहिले चिन्ह को न मानें, तो दूसरे चिन्ह की प्रतीति करेंगे।
Exodus 4:9 और यदि वे इन दोनों चिन्हों की प्रतीति न करें और तेरी बात को न मानें, तब तू नील नदी से कुछ जल ले कर सूखी भूमि पर डालना; और जो जल तू नदी से निकालेगा वह सूखी भूमि पर लोहू बन जायेगा।
Exodus 4:17 और तू इस लाठी को हाथ में लिये जा, और इसी से इन चिन्हों को दिखाना।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 3-4 
  • गलतियों 6


गुरुवार, 26 सितंबर 2013

दृढ़ नींव

   वह अभी दो वर्ष की भी नहीं हुई थी कि मेरी पोती केटी ने कुछ ऐसा कर दिखाया जो हर दादा के लिए गर्व की बात होगी; केटी ने कारों को उनके बनाए जाने के वर्ष और कंपनी के नाम से पहचानना आरंभ कर दिया। इस बात का आरंभ हुआ तब हुआ जब केटी के पिता ने उसके साथ अपने खिलौने वाली छोटी कारों के पुराने संग्रह के साथ खेलना आरंभ कर दिया। पिता के साथ खेलते खेलते केटी कारों को पहचानने लग गई; और जब भी उसके पिता किसी कार के लिए कहते: "केटी 1957 की चेवी कार लाओ" तो वह सैकड़ों छोटी खिलौना कारों में से वही कार निकाल लाती। एक दिन जब उसके पिता उसे एक पुस्तक में से कहानी पढ़कर सुना रहे थे तो वह उनकी गोद से उतरी और जा कर उन खिलौना कारों में से वैसी ही रोल्स रॉयस कार उठा लाई जैसी उस कहानी के साथ पुस्तक में चित्रित थी।

   विचार करने कि बात है, यदि दो वर्ष से भी कम उम्र की बच्ची इस प्रकार स्मरण करके वस्तुओं की पहचान बना सकती है तो क्या यह नहीं दिखाता कि बच्चों को बचपन से ही सही बातों की शिक्षा देना और उन बातों को उनके मनों में बैठा देना कितना महत्वपूर्ण है? ऐसा करने के लिए हम FIRM सिद्धांत का उपयोग कर सकते हैं; अंग्रेज़ी शब्द FIRM का अर्थ होता है दृढ़; इसलिए इस शब्द को उसके अर्थ के साथ या उसे acronym अर्थात परिवर्णी शब्द, अर्थात F - Familiarity - घनिष्टता, I - Interest - रुचि, R - Recognition - पहचान या मान्यता और M - Modeling - नमूना बनना, दोनों ही रूपों में लिया जा सकता है।

   यही सिद्धांत परमेश्वर के वचन बाइबल में मूसा ने परमेश्वर के वचन के संबंध में इस्त्राएलियों के सामने रखा था (व्यवस्थाविवरण 6)। मूसा ने उन इस्त्राएलियों को सचेत किया कि अब जब वो वाचा के कनान देश में प्रवेश करने पर हैं तो अपनी सुरक्षा और उन्नति के लिए उनका परमेश्वर के वचन में दृढ़ता से बने रहना अनिवार्य है। इसीलिए उन्हें अपने बच्चों को भी परमेश्वर के वचन में दृढ़ और स्थापित करना है जिससे वे भी उस वचन को अपने जीवन का अभिन्न अंग बना लें, उसकी आशीषों से परिपूर्ण रहें और फिर आगे अपनी सन्तान को भी सिखाते रहें। उन्हें अपने बच्चों को परमेश्वर के वचन से घनिष्टता के साथ परिचित रखना होगा, अवसर तथा परिस्थिति के अनुसार वचन की बातों को उन्हें बताते हुए वचन में उनकी रुचि को बनाए रखना होगा, वचन की बातों और कहानियों को बार बार दोहराते हुए उनकी पहचान बच्चों के मन में बैठानी होगी, और उस वचन को उनके सामने जी कर दिखाना होगा, उनके लिए एक सजीव नमूना बनना होगा।

   यही सिद्धांत आज भी हम मसीही विश्वासियों के लिए अपने परिवारों की सुरक्षा, उन्नति और संसार की बुराईयों से बचे रहने के लिए अनिवार्य हैं। यदि आरंभ से ही हमारे बच्चे परमेश्वर के वचन, प्रेम, मसीह यीशु में संसार के सब लोगों के लिए उपलब्ध पापों से क्षमा और उद्धार आदि के बारे में सीखते, जानते और देखते रहेंगे तो आगे चलकर वे भी परमेश्वर को भावते हुए जीवन जीने और सब का भला करने वाले बन सकेंगे। उनको यह दृढ़ नींव अभी से देना हमारा कर्तव्य है। - डेव ब्रैनन


अपने बच्चों के जीवन परमेश्वर के वचन की दृढ़ नींव पर ही खड़े करें।

और ये आज्ञाएं जो मैं आज तुझ को सुनाता हूं वे तेरे मन में बनी रहें; और तू इन्हें अपने बाल-बच्चों को समझाकर सिखाया करना, और घर में बैठे, मार्ग पर चलते, लेटते, उठते, इनकी चर्चा किया करना। - व्यवस्थाविवरण 6:6-7

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण 6:1-9
Deuteronomy 6:1 यह वह आज्ञा, और वे विधियां और नियम हैं जो तुम्हें सिखाने की तुम्हारे परमेश्वर यहोवा ने आज्ञा दी है, कि तुम उन्हें उस देश में मानो जिसके अधिकारी होने को पार जाने पर हो;
Deuteronomy 6:2 और तू और तेरा बेटा और तेरा पोता यहोवा का भय मानते हुए उसकी उन सब विधियों और आज्ञाओं पर, जो मैं तुझे सुनाता हूं, अपने जीवन भर चलते रहें, जिस से तू बहुत दिन तक बना रहे।
Deuteronomy 6:3 हे इस्राएल, सुन, और ऐसा ही करने की चौकसी कर; इसलिये कि तेरा भला हो, और तेरे पितरों के परमेश्वर यहोवा के वचन के अनुसार उस देश में जहां दूध और मधु की धाराएं बहती हैं तुम बहुत हो जाओ।
Deuteronomy 6:4 हे इस्राएल, सुन, यहोवा हमारा परमेश्वर है, यहोवा एक ही है;
Deuteronomy 6:5 तू अपने परमेश्वर यहोवा से अपने सारे मन, और सारे जीव, और सारी शक्ति के साथ प्रेम रखना।
Deuteronomy 6:6 और ये आज्ञाएं जो मैं आज तुझ को सुनाता हूं वे तेरे मन में बनी रहें;
Deuteronomy 6:7 और तू इन्हें अपने बाल-बच्चों को समझाकर सिखाया करना, और घर में बैठे, मार्ग पर चलते, लेटते, उठते, इनकी चर्चा किया करना।
Deuteronomy 6:8 और इन्हें अपने हाथ पर चिन्हानी कर के बान्धना, और ये तेरी आंखों के बीच टीके का काम दें।
Deuteronomy 6:9 और इन्हें अपने अपने घर के चौखट की बाजुओं और अपने फाटकों पर लिखना।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 1-2 
  • गलतियों 5


बुधवार, 25 सितंबर 2013

राख के ढेर

   किसी ने मुझे से पूछा, कि जब 1 यूहन्ना 3:1-3 के अनुसार स्वर्ग पहुँचने पर तो मैं मसीह यीशु समानता में हो ही जाऊँगी तो फिर आज मुझे उसकी समानता में ढलने का प्रयास करते रहने की आवश्यकता क्यों है? हम मसीही विश्वासियों के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न है, विशेषकर तब जब मसीह यीशु के समान होने से कहीं अधिक सरल है जैसे हैं वैसे ही बने रहना।

   अनेक कारण हैं कि हम मसीही विश्वासियों को मसीह यीशु की समानता में अभी इस पृथ्वी पर के अपने जीवन में ही क्यों ढलना है; और उन उत्तरों में से एक, जो सूचि के शीर्ष के उत्तरों में है, वह है कि जब स्वर्ग में हम उसके सामने खड़े होंगे और उसे देखेंगे तो उसे अपने जीवनों का हिसाब भी देंगे। हमें प्रभु यीशु को यह बताना होगा कि जो जीवन हमने पृथ्वी पर जीया वह उसकी इच्छा और उसके निर्देशों के अनुसार था कि नहीं। इसी बात को प्रेरित पौलुस ने कुरिन्थुस की मण्डली को लिखी अपनी पत्री में बताया और कहा कि हमें दिखाना होगा कि हमने जीवन किन चीज़ों से बनाया है - सोना, चांदी, बहुमूल्य पत्थर आदि से या फिर काठ, घास, भूसे आदि से (1 कुरिन्थियों 3:12-13)। पौलुस द्वारा लिखी गई ये सभी वस्तुएं सूचक हैं कुछ अन्य महत्वपूर्ण बातों की जो सब की सब ’आग’ से अर्थात बहुत बारीकी से परखी जाएंगी।

   जो कुछ भी हम प्रभु यीशु के राज्य के विस्तार के लिए करते हैं, जैसे सुसमाचार प्रचार, मण्डली के उत्थान के कार्य, उसके समान ही संसार में सदाचारिता और न्याय को बढ़ावा देना, मसीही जीवन की गवाही और आत्मिक फलों से लदे हुए जीवन जीना आदि वह सब सोना, चांदी, बहुमूल्य पत्थर आदि के समान ’आग’ में नष्ट ना होने वाली वस्तुएं हैं। इसके विपरीत, यदि हम मसीही विश्वासियों के जीवन अपने स्वार्थपूर्ति के, अपनी पार्थिव लालसाओं को बढ़ाने वाले और संसार के समान ही सांसारिक बातों और बुराईयों में संलग्न रहने वाले जीवन हैं तो वे जीवन ’आग’ से जल जाने वाली वस्तुओं अर्थात काठ, घास, भूसे आदि से बने जीवन हैं जो जब मसीह यीशु की महिमा और न्याय की ’आग’ से परखे जाएंगे तो सब जल कर राख हो जाएगा और ऐसे जीवन जीने वाले राख के ढेर पर छूछे हाथ खड़े मिलेंगे।

   मैं आपके बारे में तो नहीं जानता, परन्तु अपने बारे में यह अवश्य कह सकता हूँ कि मेरे लिए तो मसीह यीशु की समानता में ढलते जाने का जीवन जीने का प्रयास करना बहुत आवश्यक है, क्योंकि उस न्याय के समय राख के ढेर पर छूछे हाथ खड़े होने का विचार मुझे बिलकुल भी पसन्द नहीं है।

   ज़रा विचार कीजिए, आपका जीवन किन बातों से बन रहा है और आप मसीह यीशु के सामने कैसे ढेर पर खड़े होंगे? - जो स्टोवैल


अपने जीवन उन वस्तुओं से बनाएं जो परमेश्वर के न्याय के सामने खड़ी रह सकें।

तो हर एक का काम प्रगट हो जाएगा; क्योंकि वह दिन उसे बताएगा; इसलिये कि आग के साथ प्रगट होगा: और वह आग हर एक का काम परखेगी कि कैसा है। - 1 कुरिन्थियों 3:13

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 3:5-15
1 Corinthians 3:5 अपुल्लोस क्या है? और पौलुस क्या है? केवल सेवक, जिन के द्वारा तुम ने विश्वास किया, जैसा हर एक को प्रभु ने दिया।
1 Corinthians 3:6 मैं ने लगाया, अपुल्लोस ने सींचा, परन्तु परमेश्वर ने बढ़ाया।
1 Corinthians 3:7 इसलिये न तो लगाने वाला कुछ है, और न सींचने वाला, परन्तु परमेश्वर जो बढ़ाने वाला है।
1 Corinthians 3:8 लगाने वाला और सींचने वाला दानों एक हैं; परन्तु हर एक व्यक्ति अपने ही परिश्रम के अनुसार अपनी ही मजदूरी पाएगा।
1 Corinthians 3:9 क्योंकि हम परमेश्वर के सहकर्मी हैं; तुम परमेश्वर की खेती और परमेश्वर की रचना हो।
1 Corinthians 3:10 परमेश्वर के उस अनुग्रह के अनुसार, जो मुझे दिया गया, मैं ने बुद्धिमान राजमिस्त्री की नाईं नेव डाली, और दूसरा उस पर रद्दा रखता है; परन्तु हर एक मनुष्य चौकस रहे, कि वह उस पर कैसा रद्दा रखता है।
1 Corinthians 3:11 क्योंकि उस नेव को छोड़ जो पड़ी है, और वह यीशु मसीह है कोई दूसरी नेव नहीं डाल सकता।
1 Corinthians 3:12 और यदि कोई इस नेव पर सोना या चान्दी या बहुमोल पत्थर या काठ या घास या फूस का रद्दा रखता है।
1 Corinthians 3:13 तो हर एक का काम प्रगट हो जाएगा; क्योंकि वह दिन उसे बताएगा; इसलिये कि आग के साथ प्रगट होगा: और वह आग हर एक का काम परखेगी कि कैसा है।
1 Corinthians 3:14 जिस का काम उस पर बना हुआ स्थिर रहेगा, वह मजदूरी पाएगा।
1 Corinthians 3:15 और यदि किसी का काम जल जाएगा, तो हानि उठाएगा; पर वह आप बच जाएगा परन्तु जलते जलते।

एक साल में बाइबल: 

  • श्रेष्ठगीत 6-8 
  • गलतियों 4

मंगलवार, 24 सितंबर 2013

बद से बदतर

   फिर वही हुआ! मेरे मन में हुड़क उठी कि मुझे अपने कार्यस्थल की सफाई करनी है, और इससे पहले कि मैं अपने आप को रोक पाती, मैंने उस कार्यस्थल को पहले से भी अधिक अस्त-व्यस्त कर डाला। एक ढेर अनेक ढेरों में बदल गया, जब मैं पुस्तकों, पत्रिकाओं, अखबरों, कागज़ों आदि की छंटाई करने और उन्हें पृथक करने लगी। जैसे जैसे वह अव्यवस्था बढ़ती गई मेरी बेचैनी भी बढ़ती गई, और मैं सोचने लगी कि मैंने क्यों यह आरंभ किया, किंतु अब पीछे लौट पाना या रुक पाना असंभव था, इसलिए मैं लगी रही और कार्य पूरा होने पर मेरा कार्यस्थल पहले से बेहतर और सुनियोजित स्थिति में था, जहाँ कार्य करना मेरे लिए अब अधिक सुविधाजनक था। यदि आरंभ की बदतर स्थिति को लेकर मैं पस्त हो कर रुक जाती तो फिर उसी में ही परेशान रह होकर जाती, लेकिन करते रहने से ही स्थिति संभली भी और बेहतर भी हुई।

   जब परमेश्वर ने मूसा को नियुक्त किया कि वह यहूदियों को मिस्त्र के दास्तव से निकाल कर लाए, तो उन यहूदियों की स्थिति भी पहले तो बद से बदतर ही हुई। इसमें कोई दो राय नहीं है कि यह छुटकारा मिलना आवश्यक था। वे लोग अपने छुड़ाए जाने के लिए परमेश्वर की दोहाई देने, उसे पुकारने में लगे हुए थे (निर्गमन 2:23)। बड़े संकोच और हिचकिचाहट के साथ मूसा ने उन यहूदियों के लिए फिरौन के पास जाकर फरियाद करना स्वीकार किया था। किंतु फिरौन के साथ मूसा की भेंट और वार्तालाप कुछ अच्छा नहीं रहा; लोगों को छोड़ देने की बजाए, फिरौन ने उन पर अपनी असंगत मांगें और बढ़ा दीं। लोग निराश हो गए और मूसा को भी लगने लगा कि उसे यह कार्य स्वीकार ही नहीं करना चाहिए था (निर्गमन 5:21-23)। लेकिन परमेश्वर ने मूसा को हताश होकर कार्य छोड़ देने और अलग हो जाने नहीं दिया, उसे फिर से आश्वस्त किया, फिर से उभारा और मूसा फिर पूरे समर्पण और परमेश्वर की कार्यविधि और योजनाओं में विश्वास के साथ यहूदियों को दासत्व से निकालने के प्रयासों में लग गया। अन्ततः बहुत से लोगों द्वारा बहुत सी परेशानियाँ झेलने के बाद ही फिरौन ने इस्त्राएली लोगों को दास्तव की बंधुवाई से जाने देने की आज्ञा दी, और मूसा वह कर पाया जिसकी स्वयं उसे भी कोई आशा नहीं थी।

   जब कभी हम कुछ भला करने निकलें, और चाहे हम उसके बारे में बिलकुल निश्चित हों कि वह कार्य परमेश्वर कि इच्छा ही में है, तो भी हमें निराश और आश्चर्यचकित नहीं होना चाहिए यदि स्थिति सुधरने से पहले बिगड़ने लग जाए। स्थिति का यह रुख इस बात को प्रमाणित नहीं करता कि हम जो कर रहे हैं वह कोई गलती है; वह तो बस इतना ही दिखाता है कि हम हर कार्य परमेश्वर ही की सहायता से कर सकते हैं, अपनी क्षमता या योग्यता से नहीं। किसी बड़े कार्य को करवाने या किसी बड़ी उपलब्धी देने से पहले परमेश्वर हमें अकसर ऐसी स्थिति में आ लेने देता है जहाँ हम अपनी असमर्थता तथा अक्षमता और परमेश्वर की सामर्थ और उस पर अपनी निर्भरता के महत्व को पहचान सकें और फिर उस पर निर्भर होकर सही रीति से कार्य कर को संपन्न सकें।

   ना अपनी क्षमता, ना अपनी योग्यता और ना परिस्थितियों पर भरोसा रखें, वरन केवल परमेश्वर पर जो सब कुछ संभव कर सकता है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


परीक्षा की हर घड़ी में सबसे अधिक आवश्यक बात है परमेश्वर के विषय आपका दर्शन और धारणा। - जी० सी० मॉर्गन

इस कारण तू इस्राएलियों से कह, कि मैं यहोवा हूं, और तुम को मिस्रियों के बोझों के नीचे से निकालूंगा, और उनके दासत्व से तुम को छुड़ाऊंगा, और अपनी भुजा बढ़ाकर और भारी दण्ड देकर तुम्हें छुड़ा लूंगा - निर्गमन 6:6

बाइबल पाठ: निर्गमन 5:1-23
Exodus 5:1 इसके पश्चात मूसा और हारून ने जा कर फिरौन से कहा, इस्राएल का परमेश्वर यहोवा यों कहता है, कि मेरी प्रजा के लोगों को जाने दे, कि वे जंगल में मेरे लिये पर्व्व करें।
Exodus 5:2 फिरौन ने कहा, यहोवा कौन है, कि मैं उसका वचन मानकर इस्राएलियों को जाने दूं? मैं यहोवा को नहीं जानता, और मैं इस्राएलियों को नहीं जाने दूंगा।
Exodus 5:3 उन्होंने कहा, इब्रियों के परमेश्वर ने हम से भेंट की है; सो हमें जंगल में तीन दिन के मार्ग पर जाने दे, कि अपने परमेश्वर यहोवा के लिये बलिदान करें, ऐसा न हो कि वह हम में मरी फैलाए वा तलवार चलवाए।
Exodus 5:4 मिस्र के राजा ने उन से कहा, हे मूसा, हे हारून, तुम क्यों लोगों से काम छुड़वाने चाहते हो? तुम जा कर अपने अपने बोझ को उठाओ।
Exodus 5:5 और फिरोन ने कहा, सुनो, इस देश में वे लोग बहुत हो गए हैं, फिर तुम उन को परिश्रम से विश्राम दिलाना चाहते हो!
Exodus 5:6 और फिरौन ने उसी दिन उन परिश्रम करवाने वालों को जो उन लोगों के ऊपर थे, और उनके सरदारों को यह आज्ञा दी,
Exodus 5:7 कि तुम जो अब तक ईटें बनाने के लिये लोगों को पुआल दिया करते थे सो आगे को न देना; वे आप ही जा कर अपने लिये पुआल इकट्ठा करें।
Exodus 5:8 तौभी जितनी ईंटें अब तक उन्हें बनानी पड़ती थीं उतनी ही आगे को भी उन से बनवाना, ईंटों की गिनती कुछ भी न घटाना; क्योंकि वे आलसी हैं; इस कारण यह कहकर चिल्लाते हैं, कि हम जा कर अपने परमेश्वर के लिये बलिदान करें।
Exodus 5:9 उन मनुष्यों से और भी कठिन सेवा करवाई जाए कि वे उस में परिश्रम करते रहें और झूठी बातों पर ध्यान न लगाएं।
Exodus 5:10 तब लोगों के परिश्रम कराने वालों ने और सरदारों ने बाहर जा कर उन से कहा, फिरौन इस प्रकार कहता है, कि मैं तुम्हें पुआल नहीं दूंगा।
Exodus 5:11 तुम ही जा कर जहां कहीं पुआल मिले वहां से उसको बटोर कर ले आओ; परन्तु तुम्हारा काम कुछ भी नहीं घटाया जाएगा।
Exodus 5:12 सो वे लोग सारे मिस्र देश में तित्तर-बित्तर हुए कि पुआल की सन्ती खूंटी बटोरें।
Exodus 5:13 और परिश्रम करने वाले यह कह कहकर उन से जल्दी करते रहे, कि जिस प्रकार तुम पुआल पाकर किया करते थे उसी प्रकार अपना प्रतिदिन का काम अब भी पूरा करो।
Exodus 5:14 और इस्राएलियों में से जिन सरदारों को फिरौन के परिश्रम कराने वालों ने उनका अधिकारी ठहराया था, उन्होंने मार खाई, और उन से पूछा गया, कि क्या कारण है कि तुम ने अपनी ठहराई हुई ईंटों की गिनती के अनुसार पहिले की नाईं कल और आज पूरी नहीं कराई?
Exodus 5:15 तब इस्राएलियों के सरदारों ने जाकर फिरौन की दोहाई यह कहकर दी, कि तू अपने दासों से ऐसा बर्ताव क्यों करता है?
Exodus 5:16 तेरे दासों को पुआल तो दिया ही नहीं जाता और वे हम से कहते रहते हैं, ईंटे बनाओ, ईंटें बनाओ, और तेरे दासों ने भी मार खाई हैं; परन्तु दोष तेरे ही लोगों का है।
Exodus 5:17 फिरौन ने कहा, तुम आलसी हो, आलसी; इसी कारण कहते हो कि हमे यहोवा के लिये बलिदान करने को जाने दे।
Exodus 5:18 और जब आकर अपना काम करो; और पुआल तुम को नहीं दिया जाएगा, परन्तु ईटों की गिनती पूरी करनी पड़ेगी।
Exodus 5:19 जब इस्राएलियों के सरदारों ने यह बात सुनी कि उनकी ईंटों की गिनती न घटेगी, और प्रतिदिन उतना ही काम पूरा करना पड़ेगा, तब वे जान गए कि उनके दुर्भाग्य के दिन आ गए हैं।
Exodus 5:20 जब वे फिरौन के सम्मुख से बाहर निकल आए तब मूसा और हारून, जो उन से भेंट करने के लिये खड़े थे, उन्हें मिले।
Exodus 5:21 और उन्होंने मूसा और हारून से कहा, यहोवा तुम पर दृष्टि कर के न्याय करे, क्योंकि तुम ने हम को फिरौन और उसके कर्मचारियों की दृष्टि में घृणित ठहरवाकर हमें घात करने के लिये उनके हाथ में तलवार दे दी है।
Exodus 5:22 तब मूसा ने यहोवा के पास लौट कर कहा, हे प्रभु, तू ने इस प्रजा के साथ ऐसी बुराई क्यों की? और तू ने मुझे यहां क्यों भेजा?
Exodus 5:23 जब से मैं तेरे नाम से फिरौन के पास बातें करने के लिये गया तब से उसने इस प्रजा के साथ बुरा ही व्यवहार किया है, और तू ने अपनी प्रजा का कुछ भी छुटकारा नहीं किया।

एक साल में बाइबल: 

  • श्रेष्ठगीत 4-5 
  • गलतियों 3