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बुधवार, 9 अक्टूबर 2013

लड़ाई की कीमत

   प्रथम विश्वयुद्ध को, उसके होने के समय, "सभी युद्धों का अन्त कर देने वाला युद्ध" कहा गया था। उस युद्ध पर बने एक लघुचलचित्र में बताया गया कि यदि उस युद्ध में काम आए ब्रिटैन के नागरिकों को चार-चार की पंक्ति में करके लंडन में बने उस युद्ध के स्मारक के सामने से निकलने को कहा जाता तो उस स्मारक के सामने से सभी लोगों को निकल पाने में 7 दिन लग जाते। इस स्तब्ध कर देने वाले तथ्य ने मुझे युद्ध की भयानक कीमत का एहसास दिलाया। यद्यपि युद्ध की कीमत आंकने में वित्तीय खर्चे, संपत्ति का विनाश और अर्थव्यवस्था का नाश सम्मिलित होते हैं, लेकिन कुछ भी युद्ध से होने वाली मानवीय क्षति और उसके दूरगामी प्रभावों का आंकलन नहीं कर सकता। सैनिकों तथा नागरिकों, दोनों को ही यह भारी कीमत चुकानी पड़ती है, और यह कीमत बचे हुए लोगों को होने वाले दुख और पीड़ा से और कई गुणा बढ़ जाती है। लड़ाई वासत्व में एक बहुत बड़ी कीमत मांगती है।

   यह बात केवल देशों की आपसी लड़ाईयों तक ही सीमित नहीं है। जब मसीही विश्वासी आपस में लड़ते हैं, तो इसकी भी एक बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है। परमेश्वर के वचन बाइबल में याकूब ने अपनी पत्री में लिखा: "तुम में लड़ाइयां और झगड़े कहां से आ गए? क्या उन सुख-विलासों से नहीं जो तुम्हारे अंगों में लड़ते-भिड़ते हैं?" (याकूब 4:1)। अपनी स्वार्थसिद्धी के अन्तर्गत हम अनेक बार आपस में लड़ने-भिड़ने लगते हैं, बिना इस बात का ध्यान करे कि इस लड़ाई की कीमत हमारे परस्पर संबंधों तथा मसीह यीशु के लिए हमारी गवाही पर बहुत भारी पड़ेगी। संभवतः इसीलिए याकूब ने यह प्रश्न उठाने से पहले मसीही विश्वासियों के सामने एक चुनौती रखी: "और मिलाप कराने वालों के लिये धामिर्कता का फल मेल-मिलाप के साथ बोया जाता है" (याकूब 3:18)।

   यदि हम मसीही विश्वासियों को संसार के सामने शांति के राजकुमार प्रभु यीशु के गवाह बनना है, तो आपसी रंजिश, विवाद, लड़ाई-झगड़े आदि छोड़कर उस प्रेम को अपने जीवनों से दिखाना होगा जो परमेश्वर ने हमसे दिखाया है और वह सहनशीलता प्रदर्शित करनी होगी जो मसीह यीशु ने हमारे प्रति रखी है। अन्यथा थोड़ी सी प्रतीत होने वाली आपसी लड़ाई के लिए हमें एक बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। - बिल क्राउडर


जब मसीही विश्वासी आपस में शांति से रहेंगे तब संसार शांति के राजकुमार को स्पष्टता से देख और जान पाएगा।

तुम में लड़ाइयां और झगड़े कहां से आ गए? क्या उन सुख-विलासों से नहीं जो तुम्हारे अंगों में लड़ते-भिड़ते हैं? - याकूब 4:1-10

बाइबल पाठ: याकूब 4:1-10
James 4:1 तुम में लड़ाइयां और झगड़े कहां से आ गए? क्या उन सुख-विलासों से नहीं जो तुम्हारे अंगों में लड़ते-भिड़ते हैं? 
James 4:2 तुम लालसा रखते हो, और तुम्हें मिलता नहीं; तुम हत्या और डाह करते हो, ओर कुछ प्राप्त नहीं कर सकते; तुम झगड़ते और लड़ते हो; तुम्हें इसलिये नहीं मिलता, कि मांगते नहीं। 
James 4:3 तुम मांगते हो और पाते नहीं, इसलिये कि बुरी इच्छा से मांगते हो, ताकि अपने भोग विलास में उड़ा दो। 
James 4:4 हे व्यभिचारिणयों, क्या तुम नहीं जानतीं, कि संसार से मित्रता करनी परमेश्वर से बैर करना है सो जो कोई संसार का मित्र होना चाहता है, वह अपने आप को परमेश्वर का बैरी बनाता है। 
James 4:5 क्या तुम यह समझते हो, कि पवित्र शास्त्र व्यर्थ कहता है जिस आत्मा को उसने हमारे भीतर बसाया है, क्या वह ऐसी लालसा करता है, जिस का प्रतिफल डाह हो? 
James 4:6 वह तो और भी अनुग्रह देता है; इस कारण यह लिखा है, कि परमेश्वर अभिमानियों से विरोध करता है, पर दीनों पर अनुग्रह करता है। 
James 4:7 इसलिये परमेश्वर के आधीन हो जाओ; और शैतान का साम्हना करो, तो वह तुम्हारे पास से भाग निकलेगा। 
James 4:8 परमेश्वर के निकट आओ, तो वह भी तुम्हारे निकट आएगा: हे पापियों, अपने हाथ शुद्ध करो; और हे दुचित्ते लोगों अपने हृदय को पवित्र करो। 
James 4:9 दुखी होओ, और शोक करा, और रोओ: तुम्हारी हंसी शोक में और तुम्हारा आनन्द उदासी में बदल जाए। 
James 4:10 प्रभु के साम्हने दीन बनो, तो वह तुम्हें शिरोमणि बनाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 32-33 
  • कुलुस्सियों 1


मंगलवार, 8 अक्टूबर 2013

विधि

   "महत्वकांक्षी नहीं है", अवश्य ही इस वाक्यांश को आप अपने संबंध में, अपने कार्य समीक्षा रिपोर्ट पर नहीं देखना चाहेंगे। जहाँ तक कार्य का संबंध है, जो कर्मचारी महत्वकांक्षी नहीं होता वह संस्था में अधिक ऊँचाई तक उठ भी नहीं सकता। जब तक कुछ कर दिखाने की सशक्त अभिलाषा ना हो, कुछ प्राप्त नहीं किया जा सकता। लेकिन महत्वकांक्षा का एक बुरा पहलु भी है। कई बार महत्वकांक्षा हर संभव रीति से अपने आप को बढ़ाने की अधिक और दूसरों के लिए कुछ भला करने के लिए कम होती है।

   यही बुरा पहलु हम इस्त्राएल के अनेक राजाओं के संबंध में भी परमेश्वर के वचन बाइबल में दिए गए उनके वृतांतों में देखते हैं, और यह सिलसिला इस्त्राएल के पहले राजा से ही आरंभ हो गया था। इस्त्राएल के पहला राजा, शाउल, ने परमेश्वर द्वारा उसे दी गई यह ज़िम्मेदारी बड़ी नम्रता और दीनता के साथ आरंभ करी, लेकिन धीरे-धीरे वह इस पद को परमेश्वर का अनुग्रह नहीं वरन अपनी संपत्ति समझने लग गया। वह यह भूल गया कि परमेश्वर ने उसे इसलिए नियुक्त किया जिससे वह परमेश्वर के चुने हुए लोगों, इस्त्राएल का इस प्रकार से नेतृत्व करे जिससे अन्य जातियों के सामने एक उत्तम उदाहरण हो और वे सच्चे परमेश्वर की ओर आकर्षित हो सकें। जब परमेश्वर ने शाउल से यह ज़िम्मेदारी वापस ले ली, तब भी उसके विचार अपने ही लिए थे (1 शमूएल 15:30)।

   इस संसार में जहाँ महत्वकांक्षाएं लोगों को, किसी भी विधि द्वारा, एक दूसरे से शीर्ष होने के लिए उकसाती रहती हैं और जहाँ अनुचित विधियों के प्रयोग द्वारा ऊपर उठना आम देखने में आता है, परमेश्वर अपने लोगों से एक भिन्न मार्ग पर चलने को कहता है - स्वार्थ, विरोध तथा पाप के मार्ग से हटकर: "विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो" (फिलिप्पियों 2:3); "इस कारण जब कि गवाहों का ऐसा बड़ा बादल हम को घेरे हुए है, तो आओ, हर एक रोकने वाली वस्तु, और उलझाने वाले पाप को दूर कर के, वह दौड़ जिस में हमें दौड़ना है, धीरज से दौड़ें" (इब्रानियों 12:1), जिससे वे परमेश्वर की आशीषों के साथ और परमेश्वर द्वारा ऊपर उठ सकें।

   यदि आप वास्तव में शीर्ष पर पहुंचना चाहते हैं, तो दीनता के साथ परमेश्वर से प्रेम तथा उसकी सेवा करने के महत्वकांक्षी हो जाईए, और वह आपको बढ़ाएगा: "इसलिये परमेश्वर के बलवन्‍त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए" (1 पतरस 5:6)। मसीही विश्वासी के लिए ऊँचे उठने और बढ़ते जाने की यही सही और सबसे कारगर विधि है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


यदि महत्वकांक्षा परमेश्वर पर केंद्रित नहीं है तो उसके परिणाम दीर्घकालीन नहीं होंगे।

प्रभु के साम्हने दीन बनो, तो वह तुम्हें शिरोमणि बनाएगा। - याकूब 4:10

बाइबल पाठ: 1 शमूएल 15:17-30
1 Samuel 15:17 शमूएल ने कहा, जब तू अपनी दृष्टि में छोटा था, तब क्या तू इस्राएली गोत्रियों का प्रधान न हो गया, और क्या यहोवा ने इस्राएल पर राज्य करने को तेरा अभिषेक नहीं किया? 
1 Samuel 15:18 और यहोवा ने तुझे यात्रा करने की आज्ञा दी, और कहा, जा कर उन पापी अमालेकियों को सत्यानाश कर, और जब तक वे मिट न जाएं, तब तक उन से लड़ता रह। 
1 Samuel 15:19 फिर तू ने किस लिये यहोवा की वह बात टालकर लूट पर टूट के वह काम किया जो यहोवा की दृष्टि में बुरा है? 
1 Samuel 15:20 शाऊल ने शमूएल से कहा, नि:सन्देह मैं ने यहोवा की बात मानकर जिधर यहोवा ने मुझे भेजा उधर चला, और अमालेकियों को सत्यानाश किया है। 
1 Samuel 15:21 परन्तु प्रजा के लोग लूट में से भेड़-बकरियों, और गाय-बैलों, अर्थात सत्यानाश होने की उत्तम उत्तम वस्तुओं को गिलगाल में तेरे परमेश्वर यहोवा के लिये बलि चढ़ाने को ले आए हैं। 
1 Samuel 15:22 शमूएल ने कहा, क्या यहोवा होमबलियों, और मेलबलियों से उतना प्रसन्न होता है, जितना कि अपनी बात के माने जाने से प्रसन्न होता है? सुन मानना तो बलि चढ़ाने और कान लगाना मेढ़ों की चर्बी से उत्तम है। 
1 Samuel 15:23 देख बलवा करना और भावी कहने वालों से पूछना एक ही समान पाप है, और हठ करना मूरतों और गृहदेवताओं की पूजा के तुल्य है। तू ने जो यहोवा की बात को तुच्छ जाना, इसलिये उसने तुझे राजा होने के लिये तुच्छ जाना है। 
1 Samuel 15:24 शाऊल ने शमूएल से कहा, मैं ने पाप किया है; मैं ने तो अपनी प्रजा के लोगों का भय मानकर और उनकी बात सुनकर यहोवा की आज्ञा और तेरी बातों का उल्लंघन किया है। 
1 Samuel 15:25 परन्तु अब मेरे पाप को क्षमा कर, और मेरे साथ लौट आ, कि मैं यहोवा को दण्डवत करूं। 
1 Samuel 15:26 शमूएल ने शाऊल से कहा, मैं तेरे साथ न लौटूंगा; क्योंकि तू ने यहोवा की बात को तुच्छ जाना है, और यहोवा ने तुझे इस्राएल का राजा होने के लिये तुच्छ जाना है। 
1 Samuel 15:27 तब शमूएल जाने के लिये घूमा, और शाऊल ने उसके बागे की छोर को पकड़ा, और वह फट गया। 
1 Samuel 15:28 तब शमूएल ने उस से कहा आज यहोवा ने इस्राएल के राज्य को फाड़कर तुझ से छीन लिया, और तेरे एक पड़ोसी को जो तुझ से अच्छा है दे दिया है। 
1 Samuel 15:29 और जो इस्राएल का बलमूल है वह न तो झूठ बोलता और न पछताता है; क्योंकि वह मनुष्य नहीं है, कि पछताए। 
1 Samuel 15:30 उसने कहा, मैं ने पाप तो किया है; तौभी मेरी प्रजा के पुरनियों और इस्राएल के साम्हने मेरा आदर कर, और मेरे साथ लौट, कि मैं तेरे परमेश्वर यहोवा को दण्डवत करूं।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 30-31 
  • फिलिप्पियों 4


सोमवार, 7 अक्टूबर 2013

पहचान

   साधारणतया, जब कभी किसी की फोटो खींची जा रही होती है तो उससे मुस्कुराने को कहा जाता है, लेकिन अमेरिका के कुछ क्षेत्रों में, यदि कोई ड्राइविंग लाइसेंस बनावाने जाता है तो उसे फोटो खिंचवाते समय नहीं मुस्कुराने को कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि गलत पहचान प्रमाणों द्वारा लाइसेंस बनवाने को रोका जा सके। लाइसेंस बनाने वाले अधिकारी प्रत्येक फोटो और पहचान प्रमाणों की तकनीकी द्वारा बारीकी से जाँच करते हैं और उनके पास बने हुए फोटो संग्रह के साथ पहचान प्रमाण और फोटो को मिलाकर देखते हैं। यदि कहीं कोई छल या गड़बड़ प्रतीत होती है तो तुरंत लाइसेंस बनाकर देने वाले कर्मचारी को सतर्क कर दिया जाता है। सन 1999 से 2009 तक इस प्रक्रिया की सहायता से छल से लाइसेंस बनवाने के 6000 प्रयासों को विफल किया गया। लेकिन मुस्कुराना क्यों मना किया जाता है? क्योंकि जिस तकनीक का प्रयोग चेहरे और पहचान प्रमाण को जाँचने के लिए किया जाता है, वह उन चेहरों को बेहतर पहचान पाती है जो बिना मुस्कुराहट के होते हैं; इसलिए सही पहचान की संभावना के लिए मुस्कुराना मना किया गया है।

   प्रभु यीशु ने भी मसीही विश्वासियों की एक पहचान दी थी; उन्होंने अपने चेलों से कहा: "यदि आपस में प्रेम रखोगे तो इसी से सब जानेंगे, कि तुम मेरे चेले हो" (यूहन्ना 13:35)। जैसे मसीही विश्वासियों की आवश्यकताएं और परिस्थितियाँ भिन्न तथा अनेक प्रकार की होती हैं, वैसे ही उनसे प्रेम दिखाने के तरीके भी भिन्न तथा अनेक प्रकार के हो सकते हैं; जैसे, प्रोत्साहन के दो शब्द कहना, मिलने जाना, भोजन पर बुलाना, बुराई या गलती के प्रति सचेत करना, प्रार्थना करना, बाइबल के पद बाँटना, उन्हें दिल खोल कर कहने देना और उनकी सुनना, उनके लिए एक प्रेम भरी मुस्कुराहट आदि।

   प्रेरित यूहन्ना ने लिखा, "हम जानते हैं, कि हम मृत्यु से पार हो कर जीवन में पहुंचे हैं; क्योंकि हम भाइयों से प्रेम रखते हैं: जो प्रेम नहीं रखता, वह मृत्यु की दशा में रहता है" (1 यूहन्ना 3:14)। क्या आज लोग आपको एक मसीही विश्वासी के रूप में पहचानते हैं? क्या आपके जीवन में अन्य लोगों के प्रति मसीह यीशु का सा प्रेम दिखाई देता है? क्या आपने मसीह यीशु का अनुयायी होने की अपनी पहचान सही बना रखी है? - ऐनी सेटास


परमेश्वर के प्रति हमारे प्रेम का एक माप है हमारा उसके बच्चों के प्रति प्रेम।

जो कोई अपने भाई से प्रेम रखता है, वह ज्योति में रहता है, और ठोकर नहीं खा सकता। - 1 यूहन्ना 2:10

बाइबल पाठ: यूहन्ना 1 यूहन्ना 3:11-18
1 John 3:11 क्योंकि जो समाचार तुम ने आरम्भ से सुना, वह यह है, कि हम एक दूसरे से प्रेम रखें। 
1 John 3:12 और कैन के समान न बनें, जो उस दुष्‍ट से था, और जिसने अपने भाई को घात किया: और उसे किस कारण घात किया? इस कारण कि उसके काम बुरे थे, और उसके भाई के काम धर्म के थे। 
1 John 3:13 हे भाइयों, यदि संसार तुम से बैर करता है तो अचम्भा न करना। 
1 John 3:14 हम जानते हैं, कि हम मृत्यु से पार हो कर जीवन में पहुंचे हैं; क्योंकि हम भाइयों से प्रेम रखते हैं: जो प्रेम नहीं रखता, वह मृत्यु की दशा में रहता है। 
1 John 3:15 जो कोई अपने भाई से बैर रखता है, वह हत्यारा है; और तुम जानते हो, कि किसी हत्यारे में अनन्त जीवन नहीं रहता। 
1 John 3:16 हम ने प्रेम इसी से जाना, कि उसने हमारे लिये अपने प्राण दे दिए; और हमें भी भाइयों के लिये प्राण देना चाहिए। 
1 John 3:17 पर जिस किसी के पास संसार की संपत्ति हो और वह अपने भाई को कंगाल देख कर उस पर तरस न खाना चाहे, तो उस में परमेश्वर का प्रेम क्योंकर बना रह सकता है? 
1 John 3:18 हे बालकों, हम वचन और जीभ ही से नहीं, पर काम और सत्य के द्वारा भी प्रेम करें।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 28-29 
  • फिलिप्पियों 3


रविवार, 6 अक्टूबर 2013

चमकते रहिए!

   जहाँ हम रहते हैं वहाँ सड़क के किनारे पर पटरी नहीं बनी है, घर से सड़क पर निकलने वाले रास्ते से सड़क पर आते ही हम सड़क पर चल रहे लोगों और वाहनों में होते हैं, इसलिए यह बाहर निकलना बहुत सावधानी से करना पड़ता है। उस रास्ते को रौशन करने वाले बत्ती के खंबे भी एक दूसरे से काफी दूरी पर हैं, इसलिए यदि एक बत्ती भी खराब हो जाए तो सड़क का कुछ भाग अन्धकार में हो जाता है। मेरे घर के बाहर लगे खंबे की बत्ती खराब हो गई थी और अनेक बार फोन द्वारा उसे ठीक करने के प्रयासों के बावजूद वह ठीक नहीं करी जा रही थी। मुझे भय रहता था कि बहुत तड़के जब मैं अपने गैराज से गाड़ी निकाल कर सड़क पर आता हूँ तो अन्धकार के कारण कहीं स्कूल जाते हुए किसी बच्चे के साथ मेरी टक्कर ना हो जाए। थोड़ी सी भी रौशनी कितनी महत्वपूर्ण और सुरक्षादायक हो सकती है मैंने इस बात को समझ पाया।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में ज्योति से संबंधित शिक्षाएं और विचार अनेक बार पाए जाते हैं। प्रभु यीशु ने कहा कि वे जगत की ज्योति हैं (यूहन्ना 8:12); प्रेरित पौलुस ने पवित्र आत्मा की प्रेर्णा से लिखा: "रात बहुत बीत गई है, और दिन निकलने पर है; इसलिये हम अन्धकार के कामों को तज कर ज्योति के हथियार बान्ध लें" (रोमियों 13:12) और प्रभु यीशु ने अपने चेलों को सिखाया कि "उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के साम्हने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें" (मत्ती 5:16)। प्रभु यीशु ने चेलों को यह भी सिखाया कि "और लोग दिया जलाकर पैमाने के नीचे नहीं परन्तु दीवट पर रखते हैं, तब उस से घर के सब लोगों को प्रकाश पहुंचता है" (मत्ती 5:15)।

   जो ज्योति चमकती नहीं है उसकी उपयोगिता जाती रहती है। हम मसीही विश्वासी अपने आप में तो कोई ज्योति नहीं रखते, किंतु प्रभु यीशु में होने के कारण हम ज्योतिर्मय हो गए हैं और यह ज्योति हमारे जीवनों से दिखनी चाहिए: "क्योंकि तुम तो पहले अन्धकार थे परन्तु अब प्रभु में ज्योति हो, सो ज्योति की सन्तान की नाईं चलो" (इफिसियों 5:8); अर्थात हमारे कार्य, व्यवहार, बात-चीत, जीवन शैली इत्यादि ऐसी होनी चाहिए कि हमारे अन्दर की ज्योति से लोग हमारे तथा जगत के उद्धारकर्ता की ओर आकर्षित हो सकें।

   परमेश्वर ने हम सब को एक विशेष वातावरण में रखा है, ऐसे वातावरण में जहाँ हमारी ज्योति सबसे अच्छी तरह चमक सके और हम दूसरों के लिए प्रकाश पहुँचने का कारण हो सकें। शायद आपके आस-पास अन्धकार हो, आपका जीवन या कार्य कुंठाओं से जूझ रहे हों, निराशाओं के अन्धकार आपको घेर रहे हों। हताश मत हों, परमेश्वर ने आपको वहाँ रखा है जहाँ आप उसके लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं; उस अन्धकार में रखा है जहाँ आप सर्वोत्तम प्रकाश दे सकें। आपके जीवन का थोड़ा सा भी प्रकाश किसी के लिए अनन्त जीवन का प्रकाश, किसी के लिए चलने को सही मार्ग दिखाने वाला, किसी को मसीह यीशु की ओर आकर्षित करने वाली ज्योति, किसी को खतरे में आने से बचाने वाला हो सकता है। परमेश्वर ने आपको, अर्थात, अपने दीपक को जला कर, दीवट पर रख दिया है, अन्धकार की शक्तियों को उसे ढाँपने और उसके प्रकाश को दबाने ना दें; चमकते रहिए, परमेश्वर के लिए उपयोगी बने रहिए। - जो स्टोवैल


चाहे आप एक कोने में लगी मोमबत्ती हों या किसी चट्टान पर खड़ा प्रकाश-स्तंभ, बस अपने प्रभु के नाम के लिए चमकते रहिए!

तब यीशु ने फिर लोगों से कहा, जगत की ज्योति मैं हूं; जो मेरे पीछे हो लेगा, वह अन्धकार में न चलेगा, परन्तु जीवन की ज्योति पाएगा। - यूहन्ना 8:12

बाइबल पाठ: मत्ती 5:14-16; 1 पतरस 2:9-10
Matthew 5:14 तुम जगत की ज्योति हो; जो नगर पहाड़ पर बसा हुआ है वह छिप नहीं सकता। 
Matthew 5:15 और लोग दिया जलाकर पैमाने के नीचे नहीं परन्तु दीवट पर रखते हैं, तब उस से घर के सब लोगों को प्रकाश पहुंचता है। 
Matthew 5:16 उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के साम्हने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें।

1 Peter 2:9 पर तुम एक चुना हुआ वंश, और राज-पदधारी याजकों का समाज, और पवित्र लोग, और (परमेश्वर की) निज प्रजा हो, इसलिये कि जिसने तुम्हें अन्धकार में से अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाया है, उसके गुण प्रगट करो। 
1 Peter 2:10 तुम पहिले तो कुछ भी नहीं थे, पर अब परमेश्वर ही प्रजा हो: तुम पर दया नहीं हुई थी पर अब तुम पर दया हुई है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 26-27 
  • फिलिप्पियों 2


शनिवार, 5 अक्टूबर 2013

सही ठिकाना

   आज कल अमेरिका में मकान और ज़मीन खरीदना या बेचना एक जोखिम भरा व्यवसाय बन गया है क्योंकि दाम बहुत गिर गए हैं। यदि आप व्यावासायिक भूमि बेचना चाह रहे हैं तो यह और भी कठिन हो गया है। ऐसे समय में, भूमि और मकान बेचते समय एक पुरानी कहावत स्मरण रखना आवश्यक है: "ज़मीन और मकान बेचते या खरीदते समय, तीन सबसे अधिक महत्वपूर्ण बातें जिनका ध्यान रखना अति आवश्यक है हैं स्थान, स्थान और स्थान!"

   यही बात हम मसीही विश्वासियों द्वारा प्रभु यीशु के लिए जीवन जीने के संबंध में भी लागू होती है - आत्मिक रीति से हम कहाँ हैं हमें यह समझना और स्मरण रखना बहुत आवश्यक है। इस संसार की गिरी हुई दशा में से होकर निकलते समय यदि हमें किसी हानि में पड़ने से बचना है तो हमें अपने आत्मिक ठिकाने के स्मरण को सजीव बनाए रखना होगा। प्रेरित पौलुस ने कुलुस्से के विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में उन्हें स्मरण दिलाया कि मसीह यीशु में विश्वास लाने के द्वारा उनका ठिकाना अब बदल गया है, क्योंकि परमेश्वर "ने हमें अन्धकार के वश से छुड़ाकर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया" (कुलुस्सियों 1:13)। यह स्मरण रखना कि परमेश्वर के महान अनुग्रह के द्वारा अब हमें मसीह यीशु के राज्य में ठिकाना दे दिया गया है बहुत अन्तर लाता है। अब मसीह यीशु हमारे मन-मस्तिषक का स्वामी है, हमारा राजा है और हम उससे मिलने वाले प्रेम, अनुग्रह, द्या और देखभाल के कारण उसके कृतज्ञ सेवक हैं। अब उसकी इच्छा हमारी इच्छा है, उसका आचरण हमारे आचरण के लिए नमूना है और उसके मार्ग हमारे जीवन मार्ग हैं। इस संसार में जब कभी हमारे सामने कोई चुनाव आता है तो हमारी निष्ठा मसीह यीशु ही की ओर है।

   प्रभु यीशु ने हमें पाप के जिस अन्धकार से निकाल कर अपनी ज्योति में स्थान दिया है, जब कभी उस अन्धकार की लालसाएं और प्रलोभन हमारी परीक्षा करें, और हमारे मन-मस्तिषक से उसके राज्य को दूर करने का प्रयास करें तो अपने आप को पुनः स्मरण दिला लें कि अब हमारा ठिकाना संसार और संसार की बातें नहीं वरन स्वर्गीय आशीषों का वह सही ठिकाना है जो प्रभु ने हमारे लिए तैयार किया है और हमें प्रदान किया है। - जो स्टोवैल


मसीही राज्य के निवासियों को मसीही आचरण प्रदर्शित करते रहना चाहिए।

उसी ने हमें अन्धकार के वश से छुड़ाकर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया। - कुलुस्सियों 1:13

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों 1:3-14
Colossians 1:3 हम तुम्हारे लिये नित प्रार्थना कर के अपने प्रभु यीशु मसीह के पिता अर्थात परमेश्वर का धन्यवाद करते हैं। 
Colossians 1:4 क्योंकि हम ने सुना है, कि मसीह यीशु पर तुम्हारा विश्वास है, और सब पवित्र लोगों से प्रेम रखते हो। 
Colossians 1:5 उस आशा की हुई वस्तु के कारण जो तुम्हारे लिये स्वर्ग में रखी हुई है, जिस का वर्णन तुम उस सुसमाचार के सत्य वचन में सुन चुके हो। 
Colossians 1:6 जो तुम्हारे पास पहुंचा है और जैसा जगत में भी फल लाता, और बढ़ता जाता है; अर्थात जिस दिन से तुम ने उसको सुना, और सच्चाई से परमेश्वर का अनुग्रह पहिचाना है, तुम में भी ऐसा ही करता है। 
Colossians 1:7 उसी की शिक्षा तुम ने हमारे प्रिय सहकर्मी इपफ्रास से पाई, जो हमारे लिये मसीह का विश्वास योग्य सेवक है। 
Colossians 1:8 उसी ने तुम्हारे प्रेम को जो आत्मा में है हम पर प्रगट किया। 
Colossians 1:9 इसी लिये जिस दिन से यह सुना है, हम भी तुम्हारे लिये यह प्रार्थना करने और बिनती करने से नहीं चूकते कि तुम सारे आत्मिक ज्ञान और समझ सहित परमेश्वर की इच्छा की पहिचान में परिपूर्ण हो जाओ। 
Colossians 1:10 ताकि तुम्हारा चाल-चलन प्रभु के योग्य हो, और वह सब प्रकार से प्रसन्न हो, और तुम में हर प्रकार के भले कामों का फल लगे, और परमेश्वर की पहिचान में बढ़ते जाओ। 
Colossians 1:11 और उस की महिमा की शक्ति के अनुसार सब प्रकार की सामर्थ से बलवन्‍त होते जाओ, यहां तक कि आनन्द के साथ हर प्रकार से धीरज और सहनशीलता दिखा सको। 
Colossians 1:12 और पिता का धन्यवाद करते रहो, जिसने हमें इस योग्य बनाया कि ज्योति में पवित्र लोगों के साथ मीरास में समभागी हों। 
Colossians 1:13 उसी ने हमें अन्धकार के वश से छुड़ाकर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया। 
Colossians 1:14 जिस में हमें छुटकारा अर्थात पापों की क्षमा प्राप्त होती है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 23-25 
  • फिलिप्पियों 1


शुक्रवार, 4 अक्टूबर 2013

निरीक्षक

   घर के पिछले बरामदे को बैठता देखकर मैं समझ गया कि इसकी मरम्मत मेरे बस की बात नहीं होगी। इसलिए मैंने नया बरामदा बना कर दे सकने वाले कारिगरों तथा होने वाले वाले खर्चे के बारे में पता किया, और फिर एक योग्य प्रतीत होने वाले ठेकेदार को उचित लगने वाले खर्चे पर कार्य सौंप दिया। जब वह काम कर चुका तो मैंने बारीकी से उसके काम का निरीक्षण किया और मुझे उसके काम में कुछ कमियाँ लगीं। इस विषय में एक अन्य राय लेने हेतु मैंने स्थानीय निर्माण निरीक्षक को बुलाया, और मुझे जान कर बड़ा अचंभा हुआ कि जिस ठेकेदार को मैंने काम सौंपा था उसके पास भवन निर्माण संस्था से कार्यकुशलता के आधार पर मिलने वाला अनुमतिपत्र था ही नहीं। बिना निर्माण निरीक्षक की अनुमति और निरीक्षण के उसने निर्माण नियमों का कई जगह उल्लंघन किया था और गलतियाँ करी थीं।

   इस घटना ने मुझे एक महत्वपूर्ण सत्य स्मरण दिलाया (- ठेकेदार का निर्माण अनुमतिपत्र पहले ही देख-परख लेने के अतिरिक्त), हम मनुष्यों की प्रवृति है कि यदि हमारे ऊपर कोई निरीक्षक बना ना रहे और यदि किसी के प्रति प्रगट में हमारी जवाबदेही ना हो तो हम अपने कार्यों में ढिलाई बरतते हैं और हलका काम करते हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भी प्रभु यीशु के दो दृष्टांतों में हम इस मानवीय प्रवृति को कार्यकारी रूप में देखते हैं (मत्ती 24:45-51; 25:14-30); इन दोनों ही दृष्टांतों में हम पाते हैं कि स्वामी की अनुपस्थिति में एक ऐसा कर्मचारी भी था जिसने अपनी ज़िम्मेदारी नहीं निभाई और स्वामी की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा, इसलिए बाद में स्वामी से दंड का भागी हुआ। लेकिन इसके विपरीत हम बाइबल की नीतिवचन पुस्तक में राजा सुलेमान द्वारा चींटी का उदाहरण भी पाते हैं, जिसके ऊपर कोई निरीक्षक नहीं होता परन्तु हर चींटी अपना काम पूरी मेहनत के साथ सारे समय करती रहती है; कुशलता पूर्वक कार्य करते रहने की प्रवृति उसके अन्दर समाई हुई है और वह उसे निभाती रहती है।

   यह हमारे सामने प्रश्न लाता है - कार्य के संबंध में हमारा हाल क्या है? क्या हम अपनी ज़िम्मेदारी को तभी निभाते हैं और सौंपे हुए कार्य को कुशलता से तभी करते हैं जब हमारे ऊपर कोई निरीक्षक खड़ा होकर हम पर नज़र बनाए रखे? या हम इस बात को समझते और मानते हुए अपनी जिम्मेदारी को भली भांति निभाते रहते हैं कि चाहे वर्तमान में कोई मानवीय निरीक्षक हम पर नज़र रखे अथवा नहीं, हमारा निरीक्षक परमेश्वर है जो हर समय हम पर नज़र रखता है और एक दिन उसके सामने खड़े होकर हमें हर बात का हिसाब उसे देना ही है और उससे फिर अपने कार्य की गुणवन्ता के अनुरूप प्रतिफल भी - चाहे वह शर्मिंदगी का हो या शाबाशी का, पाना ही है। - डेव ब्रैनन


हम मसीही विश्वासियों का मानवीय मालिक कोई भी हो, हमारा कार्य अन्ततः परमेश्वर के लिए ही है।

जिसने मुझे भेजा है; हमें उसके काम दिन ही दिन में करना अवश्य है: वह रात आने वाली है जिस में कोई काम नहीं कर सकता। - यूहन्ना 9:4 

बाइबल पाठ: नीतिवचन 6:6-11; कुलुस्सियों 3:22-25
Proverbs 6:6 हे आलसी, च्यूंटियों के पास जा; उनके काम पर ध्यान दे, और बुद्धिमान हो। 
Proverbs 6:7 उन के न तो कोई न्यायी होता है, न प्रधान, और न प्रभुता करने वाला, 
Proverbs 6:8 तौभी वे अपना आहार धूपकाल में संचय करती हैं, और कटनी के समय अपनी भोजन वस्तु बटोरती हैं। 
Proverbs 6:9 हे आलसी, तू कब तक सोता रहेगा? तेरी नींद कब टूटेगी? 
Proverbs 6:10 कुछ और सो लेना, थोड़ी सी नींद, एक और झपकी, थोड़ा और छाती पर हाथ रखे लेटे रहना, 
Proverbs 6:11 तब तेरा कंगालपन बटमार की नाईं और तेरी घटी हथियारबन्द के समान आ पड़ेगी।

Colossians 3:22 हे सेवकों, जो शरीर के अनुसार तुम्हारे स्‍वामी हैं, सब बातों में उन की आज्ञा का पालन करो, मनुष्यों को प्रसन्न करने वालों की नाईं दिखाने के लिये नहीं, परन्तु मन की सीधाई और परमेश्वर के भय से। 
Colossians 3:23 और जो कुछ तुम करते हो, तन मन से करो, यह समझ कर कि मनुष्यों के लिये नहीं परन्तु प्रभु के लिये करते हो। 
Colossians 3:24 क्योंकि तुम जानते हो कि तुम्हें इस के बदले प्रभु से मीरास मिलेगी: तुम प्रभु मसीह की सेवा करते हो। 
Colossians 3:25 क्योंकि जो बुरा करता है, वह अपनी बुराई का फल पाएगा; वहां किसी का पक्षपात नहीं।

एक साल में बाइबल: 

  • यशायाह 20-22 
  • इफिसियों 6


गुरुवार, 3 अक्टूबर 2013

स्वर्गीय चँगाई

   थॉमस मूर (1779-1852) आयरलैंड के रहने वाले एक मसीही विश्वासी, गीत लेखक, गायक और कवि थे। उन्हें गाते हुए सुनने से या उनके गीतों को गाने से उनकी यह प्रतिभाएं अनेकों लोगों के लिए बहुत आनन्द और शान्ति का कारण रहीं। किंतु थॉमस मूर का व्यक्तिगत जीवन बार बार आने वाले दुखों से भरा था, जिसमें उनके जीते जी ही उनके पाँचों बच्चों की मृत्यु हो जाना भी सम्मिलित है। मूर द्वारा सहे गए इन भिन्न दुखों को स्मरण रखते हुए उनके द्वारा लिखे एक गीत की पंक्तियों से परमेश्वर प्रभु यीशु में उनके विश्वास की दृढ़ता का पता चलता है तथा ये पंकतियाँ और भी मार्मिक हो जाती हैं: "यहाँ अपने घायल मनों को लाएं, अपनी व्यथा को बताएं; पृथ्वी के पास ऐसा कोई दुख नहीं है, स्वर्ग के पास जिसका समाधान नहीं है।" उनका यह हृदय स्पर्शी छंद हमें स्मरण दिलाता है कि प्रार्थना में परमेश्वर के साथ मिलना हमारे घायल मनों को स्वस्थ करता है।

   प्रेरित पौलुस ने भी दुखी लोगों को परमेश्वर से मिलने वाली सांत्वना और सामर्थ का उल्लेख करते हुए कुरिन्थुस की मण्डली को लिखा: "हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर, और पिता का धन्यवाद हो, जो दया का पिता, और सब प्रकार की शान्‍ति का परमेश्वर है। वह हमारे सब क्‍लेशों में शान्‍ति देता है; ताकि हम उस शान्‍ति के कारण जो परमेश्वर हमें देता है, उन्हें भी शान्‍ति दे सकें, जो किसी प्रकार के क्‍लेश में हों।" (2 कुरिन्थियों 1:3-4)। कभी कभी हम अपने दुखों में अपने आप को इतना समेट लेते हैं कि हमें सच्ची और स्थाई शान्ति देने वाले परमेश्वर से अपने आप को दूर कर लेते हैं। ऐसे में हमें परमेश्वर से मिलने वाली शान्ति और सांत्वना को स्मरण करके प्रार्थना में पुनः उसके साथ अपने संबंध को ठीक कर लेना चाहिए।

   जैसे जैसे हम अपने परमेश्वर पिता के सामने अपने दिल खोल कर सच्चे, आज्ञाकारी और समर्पित मन के साथ उससे अपने दुखों का बयान करते जाएंगे, उससे शान्ति, सामर्थ और समाधान हमें प्राप्त होता जाएगा और हमारे घायल मन उसकी स्वर्गीय चँगाई को अनुभव करने लग जाएंगे। वास्तव में "पृथ्वी के पास ऐसा कोई दुख नहीं है, स्वर्ग के पास जिसका समाधान नहीं है"। - डेनिस फिशर


प्रार्थना ही वह भूमि है जिसमें आशा और चंगाई सबसे अच्छे फलते-फूलते हैं।

अब प्रभु जो शान्‍ति का सोता है आप ही तुम्हें सदा और हर प्रकार से शान्‍ति दे: प्रभु तुम सब के साथ रहे। (2 थिसुलुनिकीयों 3:16)

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 1:1-10
2 Corinthians 1:1 पौलुस की ओर से जो परमेश्वर की इच्छा से मसीह यीशु का प्रेरित है, और भाई तीमुथियुस की ओर से परमेश्वर की उस कलीसिया के नाम जो कुरिन्थुस में है; और सारे अखया के सब पवित्र लोगों के नाम। 
2 Corinthians 1:2 हमारे पिता परमेश्वर और प्रभु यीशु मसीह की ओर से तुम्हें अनुग्रह और शान्‍ति मिलती रहे। 
2 Corinthians 1:3 हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर, और पिता का धन्यवाद हो, जो दया का पिता, और सब प्रकार की शान्‍ति का परमेश्वर है। 
2 Corinthians 1:4 वह हमारे सब क्‍लेशों में शान्‍ति देता है; ताकि हम उस शान्‍ति के कारण जो परमेश्वर हमें देता है, उन्हें भी शान्‍ति दे सकें, जो किसी प्रकार के क्‍लेश में हों। 
2 Corinthians 1:5 क्योंकि जैसे मसीह के दुख हम को अधिक होते हैं, वैसे ही हमारी शान्‍ति भी मसीह के द्वारा अधिक होती है। 
2 Corinthians 1:6 यदि हम क्‍लेश पाते हैं, तो यह तुम्हारी शान्‍ति और उद्धार के लिये है और यदि शान्‍ति पाते हैं, तो यह तुम्हारी शान्‍ति के लिये है; जिस के प्रभाव से तुम धीरज के साथ उन क्‍लेशों को सह लेते हो, जिन्हें हम भी सहते हैं। 
2 Corinthians 1:7 और हमारी आशा तुम्हारे विषय में दृढ़ है; क्योंकि हम जानते हैं, कि तुम जैसे दुखों के वैसे ही शान्‍ति के भी सहभागी हो। 
2 Corinthians 1:8 हे भाइयों, हम नहीं चाहते कि तुम हमारे उस क्‍लेश से अनजान रहो, जो आसिया में हम पर पड़ा, कि ऐसे भारी बोझ से दब गए थे, जो हमारी सामर्थ से बाहर था, यहां तक कि हम जीवन से भी हाथ धो बैठे थे। 
2 Corinthians 1:9 वरन हम ने अपने मन में समझ लिया था, कि हम पर मृत्यु की आज्ञा हो चुकी है कि हम अपना भरोसा न रखें, वरन परमेश्वर का जो मरे हुओं को जिलाता है। 
2 Corinthians 1:10 उसी ने हमें ऐसी बड़ी मृत्यु से बचाया, और बचाएगा; और उस से हमारी यह आशा है, कि वह आगे को भी बचाता रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 17-19 
  • इफिसियों 5:17-33