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शुक्रवार, 16 अप्रैल 2021

सृष्टि

 

          मैं नैशनल जियोग्राफिक का एक वीडियो देख रही था, जिस में कैलिफोर्निया के निकट के समुद्र तट में चार हज़ार फीट गहराई में एक बहुत ही कम देखी जाने वाली जेली फिश को पानी की गहरी धाराओं के प्रवाह के साथ ‘नाचते हुए दिखाया गया था; उसका शरीर, पानी के कालेपन की तुलना में, चमकीले नीले, बैंगनी, और गुलाबी रंगों की विभिन्न छायाओं से चमक रहा था; और घंटे समान उसके शरीर से निकलने वाले अनेकों लचीले और चमकीले टेंटेकल्स उसके शरीर के प्रत्येक सपंदन के साथ थिरक रहे थे। उस अद्भुत वीडियो को देखते समय मैं विचार कर रही थी कि परमेश्वर ने जेलेटिन के समान इस सुन्दर जन्तु की सृष्टि कितनी अद्भुत रीति से की है; और न केवल उसकी, वरन उन् 2000 से भी अधिक प्रजातियों की जेली फिश की भी जिन्हें अक्तूबर 2017 तक वैज्ञानिक पहचान चुके थे।

          यद्यपि हम परमेश्वर को सृष्टिकर्ता स्वीकार करते हैं, फिर भी क्या हम कभी कुछ धीमे होकर परमेश्वर के वचन बाइबल के पहले अध्याय में प्रकट किए गए विलक्षण सच्चाइयों पर विचार करते हैं? हमारे विस्मयकारी परमेश्वर ने इस विविध प्रकार की रचनाओं से भरे संसार में अपनी ज्योति और जीवन को डाला है। उसने,इसलिये परमेश्वर ने जाति जाति के बड़े बड़े जल-जन्तुओं की, और उन सब जीवित प्राणियों की भी सृष्टि की जो चलते फिरते हैं जिन से जल बहुत ही भर गया” (उत्पत्ति 1:21)। अभी तक वैज्ञानिक उसका और उन जीव-जंतुओं का, जो परमेश्वर ने बनाए हैं, केवल एक छोटा सा अंश ही जानने और समझने पाए हैं।

          न केवल जीव-जन्तु, वरन परमेश्वर ने प्रत्येक मनुष्य को भी एक अनुपम सृष्टि बनाया है, और सभी को अपने अपने अनुपम कार्य और जिम्मेदारियां सौंपी हैं (भजन 139:13–16)। परमेश्वर की विभिन्न रचनाओं का आनन्द लेते समय हम उसके प्रति अपनी कृतज्ञता और धन्यवाद भी अर्पित करें कि उसने हमें अपने स्वरूप में बनाया, हम में अपना श्वास फूंका, और हमें अपनी महिमा के लिए प्रयोग भी करता है। - सोहचील डिक्सन

 

प्रभु पिता, हमारे सृष्टिकर्ता परमेश्वर, हमारी अद्भुत सृष्टि के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।


मैं तेरा धन्यवाद करूंगा, इसलिये कि मैं भयानक और अद्भुत रीति से रचा गया हूं। तेरे काम तो आश्चर्य के हैं, और मैं इसे भली भांति जानता हूं। - भजन 139:14

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 1:1-21

उत्पत्ति 1:1 आदि में परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की।

उत्पत्ति 1:2 और पृथ्वी बेडौल और सुनसान पड़ी थी; और गहरे जल के ऊपर अन्धियारा था: तथा परमेश्वर का आत्मा जल के ऊपर मण्डलाता था।

उत्पत्ति 1:3 तब परमेश्वर ने कहा, उजियाला हो: तो उजियाला हो गया।

उत्पत्ति 1:4 और परमेश्वर ने उजियाले को देखा कि अच्छा है; और परमेश्वर ने उजियाले को अन्धियारे से अलग किया।

उत्पत्ति 1:5 और परमेश्वर ने उजियाले को दिन और अन्धियारे को रात कहा। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार पहिला दिन हो गया।

उत्पत्ति 1:6 फिर परमेश्वर ने कहा, जल के बीच एक ऐसा अन्तर हो कि जल दो भाग हो जाए।

उत्पत्ति 1:7 तब परमेश्वर ने एक अन्तर कर के उसके नीचे के जल और उसके ऊपर के जल को अलग अलग किया; और वैसा ही हो गया।

उत्पत्ति 1:8 और परमेश्वर ने उस अन्तर को आकाश कहा। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार दूसरा दिन हो गया।

उत्पत्ति 1:9 फिर परमेश्वर ने कहा, आकाश के नीचे का जल एक स्थान में इकट्ठा हो जाए और सूखी भूमि दिखाई दे; और वैसा ही हो गया।

उत्पत्ति 1:10 और परमेश्वर ने सूखी भूमि को पृथ्वी कहा; तथा जो जल इकट्ठा हुआ उसको उसने समुद्र कहा: और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है।

उत्पत्ति 1:11 फिर परमेश्वर ने कहा, पृथ्वी से हरी घास, तथा बीज वाले छोटे छोटे पेड़, और फलदाई वृक्ष भी जिनके बीज उन्हीं में एक एक की जाति के अनुसार होते हैं पृथ्वी पर उगें; और वैसा ही हो गया।

उत्पत्ति 1:12 तो पृथ्वी से हरी घास, और छोटे छोटे पेड़ जिन में अपनी अपनी जाति के अनुसार बीज होता है, और फलदाई वृक्ष जिनके बीज एक एक की जाति के अनुसार उन्हीं में होते हैं उगे; और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है।

उत्पत्ति 1:13 तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार तीसरा दिन हो गया।

उत्पत्ति 1:14 फिर परमेश्वर ने कहा, दिन को रात से अलग करने के लिये आकाश के अन्तर में ज्योतियां हों; और वे चिन्हों, और नियत समयों, और दिनों, और वर्षों के कारण हों।

उत्पत्ति 1:15 और वे ज्योतियां आकाश के अन्तर में पृथ्वी पर प्रकाश देने वाली भी ठहरें; और वैसा ही हो गया।

उत्पत्ति 1:16 तब परमेश्वर ने दो बड़ी ज्योतियां बनाईं; उन में से बड़ी ज्योति को दिन पर प्रभुता करने के लिये, और छोटी ज्योति को रात पर प्रभुता करने के लिये बनाया: और तारागण को भी बनाया।

उत्पत्ति 1:17 परमेश्वर ने उन को आकाश के अन्तर में इसलिये रखा कि वे पृथ्वी पर प्रकाश दें,

उत्पत्ति 1:18 तथा दिन और रात पर प्रभुता करें और उजियाले को अन्धियारे से अलग करें: और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है।

उत्पत्ति 1:19 तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार चौथा दिन हो गया।

उत्पत्ति 1:20 फिर परमेश्वर ने कहा, जल जीवित प्राणियों से बहुत ही भर जाए, और पक्षी पृथ्वी के ऊपर आकाश के अन्तर में उड़ें।

उत्पत्ति 1:21 इसलिये परमेश्वर ने जाति जाति के बड़े बड़े जल-जन्तुओं की, और उन सब जीवित प्राणियों की भी सृष्टि की जो चलते फिरते हैं जिन से जल बहुत ही भर गया और एक एक जाति के उड़ने वाले पक्षियों की भी सृष्टि की: और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • 1 शमूएल 30-31
  • लूका 13:23-35

गुरुवार, 15 अप्रैल 2021

मित्र

 

          घाना में, अपने बचपन के समय में मुझे अपने पिता का हाथ पकड़कर भीड़ वाले स्थानों में चलते हुए जाना और बातचीत करना बहुत अच्छा लगता था। वो मेरे पिता भी थे, और मित्र भी; हमारी संस्कृति में हाथ पकड़ना सच्ची मित्रता का चिह्न समझा जाता है। चलते हुए हम लोग कई विषयों के बारे में बातें करते जाते थे। मैं जब भी अकेला अनुभव करता, मेरे पिता की उपस्थिति से मुझे दिलासा मिलती थी। मेरे लिए उनके साथ संगति के वो समय बहुमूल्य थे।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु मसीह ने अपने शिष्यों को अपने मित्र कहा है, और उसने उनके प्रति अपनी मित्रता के चिह्न भी दिए हैं। प्रभु ने कहा, “जैसा पिता ने मुझ से प्रेम रखा, वैसा ही मैं ने तुम से प्रेम रखा, मेरे प्रेम में बने रहो” (यूहन्ना 15:9); यहाँ तक कि उन्होंने उनके लिए अपने प्राण भी न्योछावर कर दिए (पद 13)। प्रभु ने उन पर अपने राज्य के उद्देश्यों को प्रकट किया; और जो कुछ भी पिता परमेश्वर ने उन्हें दिया, वह सब उनको सिखा दिया (पद 15)। प्रभु ने अपने शिष्यों को यह सुअवसर भी दिया कि वे उसके साथ मिलकर उसके उद्देश्यों को पूरा करने वाले बनें (पद 16)।

          प्रभु यीशु जीवन भर के लिए हम मसीही विश्वासियों का मित्र और साथी है। वह हमारे साथ रहता है; हर परिस्थिति में साथ चलता रहता है, और हमारी सभी बातों, परेशानियों, दुखों आदि के बारे में ध्यान से सुनता है। जब हम अकेले और निराश अनुभव कर रहे होते हैं, तब हमारा मित्र यीशु हमारा साथ देता है, हमारी हिम्मत बढ़ाता है।

          और हमारे मित्र यीशु के साथ हमारी मित्रता और भी अधिक घनिष्ठ हो जाती है जब हम उसके अन्य मित्रों, हमारे अन्य संगी मसीही विश्वासियों से भी प्रेम करते हैं, और प्रभु के प्रति आज्ञाकारी बने रहते हैं (पद 10, 17)। जब हम प्रभु की आज्ञाओं का पालन करेंगे, तो हमारे जीवनों से ऐसे फल आएँगे जो सदा बने रहेंगे (पद 16)।

          हमारे परेशान संसार की भीड़-भाड़ वाली गलियों और खतरनाक रास्तों पर चलते समय हम प्रभु के साथ बने रहने के प्रति आश्वस्त रह सकते हैं। यह उसके हमारा मित्र होने का चिह्न है। - लॉरेंस दरमानी

 

प्रभु परमेश्वर हमेशा हमारे साथ बना रहता है।


और उन्हें सब बातें जो मैं ने तुम्हें आज्ञा दी है, मानना सिखाओ: और देखो, मैं जगत के अन्त तक सदैव तुम्हारे संग हूं। - मत्ती 28:20

बाइबल पाठ: यूहन्ना 15:9-17

यूहन्ना 15:9 जैसा पिता ने मुझ से प्रेम रखा, वैसा ही मैं ने तुम से प्रेम रखा, मेरे प्रेम में बने रहो।

यूहन्ना 15:10 यदि तुम मेरी आज्ञाओं को मानोगे, तो मेरे प्रेम में बने रहोगे: जैसा कि मैं ने अपने पिता की आज्ञाओं को माना है, और उसके प्रेम में बना रहता हूं।

यूहन्ना 15:11 मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि मेरा आनन्द तुम में बना रहे, और तुम्हारा आनन्द पूरा हो जाए।

यूहन्ना 15:12 मेरी आज्ञा यह है, कि जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो।

यूहन्ना 15:13 इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे।

यूहन्ना 15:14 जो कुछ मैं तुम्हें आज्ञा देता हूं, यदि उसे करो, तो तुम मेरे मित्र हो।

यूहन्ना 15:15 अब से मैं तुम्हें दास न कहूंगा, क्योंकि दास नहीं जानता, कि उसका स्वामी क्या करता है: परन्तु मैं ने तुम्हें मित्र कहा है, क्योंकि मैं ने जो बातें अपने पिता से सुनीं, वे सब तुम्हें बता दीं।

यूहन्ना 15:16 तुम ने मुझे नहीं चुना परन्तु मैं ने तुम्हें चुना है और तुम्हें ठहराया ताकि तुम जा कर फल लाओ; और तुम्हारा फल बना रहे, कि तुम मेरे नाम से जो कुछ पिता से मांगो, वह तुम्हें दे।

यूहन्ना 15:17 इन बातें की आज्ञा मैं तुम्हें इसलिये देता हूं, कि तुम एक दूसरे से प्रेम रखो।

 

एक साल में बाइबल: 

  • 1 शमूएल 27-29
  • लूका 13:1-22

बुधवार, 14 अप्रैल 2021

आशा

 

          क्या सूर्य पूर्व में उदय होता है? क्या आकाश का रंग नीला होता है? क्या समुद्र का पानी नमकीन होता है? क्या कोबाल्ट का एटॉमिक वज़न 58.9 होता है? हाँ; ठीक है! इस अंतिम प्रश्न का उत्तर उन्हें ही पता होगा जो या तो विज्ञान में बहुत रुचि रखते हैं, या फिर इधर-उधर की जानकारी एकत्रित करते रहते हैं। लेकिन प्रकट है कि अन्य सभी प्रश्नों का एक ही उत्तर है, हाँ! बहुधा इस प्रकार के प्रश्नों में एक ताना मारने की झलक भी मिलती है।

          यदि हम सावधान न रहें तो हमारे आधुनिक, और कुछ बिगड़े हुए कानों को परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु मसीह द्वारा एक अपांग व्यक्ति से किए गए प्रश्न “क्या तू चंगा होना चाहता है?” (यूहन्ना 5:6) में भी ऐसा ही ताना मारना प्रतीत हो सकता है। प्रकट है कि उस अपांग व्यक्ति का उत्तर होता, “क्या तुम मेरे साथ मज़ाक कर रहे हो? मैं यहाँ पर पिछले अड़तीस वर्षों से चंगा होने के लिए किसी की सहायता की प्रतीक्षा कर रहा हूँ!” लेकिन प्रभु के इस प्रश्न में कोई उपहास नहीं है; ऐसा सोचना सर्वथा गलत होगा। प्रभु यीशु की वाणी सदा ही कृपा और अनुग्रह से भरी होती है, और उसके सभी प्रश्न सदा ही हमारी भलाई के लिए ही पूछे जाते हैं।

          प्रभु यीशु जानते थे कि वह मनुष्य चंगा होना चाहता है। वे उसके बारे में यह भी जानते थे कि बहुत लम्बे समय से किसी ने उससे सहायता देने के लिए नहीं कहा था। लेकिन ईश्वरीय आश्चर्यकर्म को करने से पहले वह उसके अन्दर उस आशा को फिर से जगाना चाहते थे जो इतने वर्षों की उपेक्षा सहते हुए ठण्डी पड़ चुकी थी। इसीलिए प्रभु ने उससे यह प्रश्न पूछा और फिर उसे प्रतिक्रिया देने के लिए अवसर दिया; उससे कहा,अपनी खाट उठा कर चल फिर” (पद 8)।

          हम भी उस अपांग व्यक्ति के समान ही हैं। हम सभी के मनों में ऐसे स्थान हैं जहाँ हमारी आशा ठण्डी पड़ चुकी है। प्रभु हमें देखता है, हमारी मनोभावनाओं को देखता है, और हमें अपने अनुग्रह और कृपा में होकर अपने निकट बुलाता है, हम में आशा को फिर से जागृत करता है, कि हम उसमें विश्वास करें, और उससे अपने समाधान प्राप्त करें। - जॉन ब्लेज़

 

हे प्रभु अपने में मेरी आशा और आनन्द को फिर से जागृत कर दे।


हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। मेरा जूआ अपने ऊपर उठा लो; और मुझ से सीखो; क्योंकि मैं नम्र और मन में दीन हूं: और तुम अपने मन में विश्राम पाओगे। - मत्ती 11:28-29

बाइबल पाठ: यूहन्ना 5:1-8

यूहन्ना 5:1 इन बातों के पीछे यहूदियों का एक पर्व हुआ और यीशु यरूशलेम को गया।।

यूहन्ना 5:2 यरूशलेम में भेड़-फाटक के पास एक कुण्ड है जो इब्रानी भाषा में बैतहसदा कहलाता है, और उसके पांच ओसारे हैं।

यूहन्ना 5:3 इन में बहुत से बीमार, अन्धे, लंगड़े और सूखे अंग वाले (पानी के हिलने की आशा में) पड़े रहते थे।

यूहन्ना 5:4 (क्योंकि नियुक्ति समय पर परमेश्वर के स्वर्गदूत कुण्ड में उतरकर पानी को हिलाया करते थे: पानी हिलते ही जो कोई पहिले उतरता वह चंगा हो जाता था चाहे उसकी कोई बीमारी क्यों न हो।)

यूहन्ना 5:5 वहां एक मनुष्य था, जो अड़तीस वर्ष से बीमारी में पड़ा था।

यूहन्ना 5:6 यीशु ने उसे पड़ा हुआ देखकर और जानकर कि वह बहुत दिनों से इस दशा में पड़ा है, उस से पूछा, क्या तू चंगा होना चाहता है?

यूहन्ना 5:7 उस बीमार ने उसको उत्तर दिया, कि हे प्रभु, मेरे पास कोई मनुष्य नहीं, कि जब पानी हिलाया जाए, तो मुझे कुण्ड में उतारे; परन्तु मेरे पहुंचते पहुंचते दूसरा मुझ से पहिले उतर पड़ता है।

यूहन्ना 5:8 यीशु ने उस से कहा, उठ, अपनी खाट उठा कर चल फिर।

 

एक साल में बाइबल: 

  • 1 शमूएल 25-26
  • लूका 12:32-59

मंगलवार, 13 अप्रैल 2021

साथ

 

          जब उसकी पत्नी एक ऐसी घातक बीमारी से ग्रसित हुई, जिसका कोई इलाज नहीं था, और उसके जीवन के दिन थोड़े ही रह गए, तब माइकल की बहुत लालसा थी, कि उसके समान उसकी पत्नी भी परमेश्वर के साथ अपने संबंध ठीक कर ले और परमेश्वर की अद्भुत शान्ति को अपने जीवन में अनुभव कर ले। माइकल अपनी पत्नी के साथ अपने मसीही विश्वास को बाँट चुका था, लेकिन उसे प्रभु में कोई रुचि नहीं थी। एक दिन जब वह एक स्थानीय पुस्तकों की दुकान में घूम रहा था, तो उसका ध्यान एक पुस्तक पर गया, जिसका शीर्षक था God, Are You There? (परमेश्वर, क्या आप मौजूद हैं?); लेकिन वह निर्णय नहीं कर पा रहा था कि उस पुस्तक के प्रति उसकी पत्नी की प्रतिक्रिया क्या होगी। इसी असमंजस में वह कई बार उस पुस्तकों की दुकान के अन्दर और बाहर आया और गया। आखिरकार उसने उस पुस्तक को खरीद लिया, और अपनी पत्नी को दे दिया; और उसे यह देख कर अचंभा हुआ कि उसकी पत्नी ने उस पुस्तक को स्वीकार कर लिया, और वह उसे पढ़ने लगी। उस पुस्तक ने माइकल की पत्नी के मन को छूआ, और उसने बाइबल पढ़ना भी आरंभ कर दिया। इसके दो सप्ताह पश्चात, माइकल की पत्नी का देहांत हो गया, लेकिन तब तक वह उस अनन्त शान्ति को ग्रहण कर चुकी थी जो प्रभु यीशु से मिलती है, और आश्वस्त थी कि अब यह शान्ति उससे किसी के भी द्वारा, कभी भी नहीं ले ली जाएगी।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि जब परमेश्वर ने मूसा को बुलाया कि उसके लोगों को मिस्र के दासत्व में से निकालकर लाए, तब परमेश्वर ने इसके लिए उसे कोई विशिष्ट अद्भुत ताकत देने का वायदा नहीं किया। वरन परमेश्वर ने उससे यह वायदा किया कि वह स्वयं सदा मूसा के साथ बना रहेगा, “उसने कहा, निश्चय मैं तेरे संग रहूंगा” (निर्गमन 3:12)। प्रभु यीशु द्वारा अपने क्रूस पर चढ़ाए जाने से पहले शिष्यों से कहे गए अंतिम शब्दों में, प्रभु ने भी शिष्यों से परमेश्वर के उनके साथ बने रहने का वायदा किया, जो पवित्र आत्मा के मिलने के द्वारा उनके लिए पूरा होगा (यूहन्ना 15:26)।

          जीवन की चुनौतियों का सामना करने में सहायक होने के लिए परमेश्वर अनेकों बातें हमें दे सकता है, जैसे कि भौतिक सुविधाएँ, चंगाइयाँ, या समस्याओं के तुरन्त समाधान, आदि। वह कभी कभी ऐसा करता भी है। लेकिन जो सर्वोत्तम उपहार वह हमें दे सकता है वह है स्वयं हमारे साथ सदा बने रहना। हमारे लिए सबसे अधिक शान्ति की बात यही है – वह हमें कभी नहीं छोड़ेगा, कभी नहीं त्यागेगा, सदा हमारे साथ बना रहेगा। - लेस्ली कोह

 

परमेश्वर अपनी संतानों के साथ सर्वदा बना रहता है।


तुम्हारा स्वभाव लोभरहित हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। - इब्रानियों 13:5

बाइबल पाठ: निर्गमन 3:11-14

निर्गमन 3:11 तब मूसा ने परमेश्वर से कहा, मैं कौन हूं जो फिरौन के पास जाऊं, और इस्राएलियों को मिस्र से निकाल ले आऊं?

निर्गमन 3:12 उसने कहा, निश्चय मैं तेरे संग रहूंगा; और इस बात का कि तेरा भेजने वाला मैं हूं, तेरे लिये यह चिन्ह होगा कि जब तू उन लोगों को मिस्र से निकाल चुके तब तुम इसी पहाड़ पर परमेश्वर की उपासना करोगे।

निर्गमन 3:13 मूसा ने परमेश्वर से कहा, जब मैं इस्राएलियों के पास जा कर उन से यह कहूं, कि तुम्हारे पितृों के परमेश्वर ने मुझे तुम्हारे पास भेजा है, तब यदि वे मुझ से पूछें, कि उसका क्या नाम है? तब मैं उन को क्या बताऊं?

निर्गमन 3:14 परमेश्वर ने मूसा से कहा, मैं जो हूं सो हूं। फिर उसने कहा, तू इस्राएलियों से यह कहना, कि जिसका नाम मैं हूं है उसी ने मुझे तुम्हारे पास भेजा है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • 1 शमूएल 22-24
  • लूका 12:1-31

सोमवार, 12 अप्रैल 2021

जीवन यात्रा

 

          अपनी पुस्तक The Call में ऑस गिन्निस इंग्लैंड के भूतपूर्व प्रधानमंत्री, विंस्टन चर्चिल के जीवन की एक घटना बताते हैं। चर्चिल अपने मित्रों के साथ दक्षिणी फ्रांस में मित्रों के साथ थे। एक ठंडी रात्रि के समय वे आग के पास बैठे हुए थे, और आग में पड़े हुए चीढ़ के लट्ठों को जलते हुए सुन रहे थे; उनके जलने से उनमें से कड़कने, चटकने और फुसफुसाने की आवाज़ें आ रही थीं। अचानक ही उन्होंने अपने चिर-परिचित अंदाज़ में गुर्राती हुई सी आवाज़ में कहा, “मैं समझ सकता हूँ कि ये लट्ठे इस प्रकार की आवाजें क्यों निकाल रहे हैं; मैंने भी जलन का अनुभव किया है।”

          हमारी जीवन यात्रा में कठिनाइयाँ, निराशाएं, खतरे, विपत्तियाँ, हमारी अपनी गलतियों का परिणाम हो सकते हैं, किन्तु फिर भी वे हमें जलन देने वाले अनुभव हो सकते हैं। ऐसी परिस्थितियाँ, धीरे-धीरे हमारे हृदय में से शान्ति और आनन्द को छीन लेती हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि जब दाऊद ने अपने ही पाप के कारण उसके जीवन को खोखला कर देने वाले परिणामों को अनुभव किया, तो उसने अपने इस अनुभव के बारे में लिखा,जब मैं चुप रहा तब दिन भर कराहते कराहते मेरी हड्डियां पिघल गई। क्योंकि रात दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा; और मेरी तरावट धूप काल की सी झुर्राहट बनती गई” (भजन 32:3-4)।

          ऐसी कठिन परिस्थितियों में हम सहायता तथा आशा के लिए किस की ओर मुड़ते हैं? प्रेरित पौलुस ने, जिसकी मसीही जीवन यात्रा सेवकाई के बोझों और दुखों से भरी हुई थी, लिखा “हम चारों ओर से क्लेश तो भोगते हैं, पर संकट में नहीं पड़ते; निरुपाय तो हैं, पर निराश नहीं होते। सताए तो जाते हैं; पर त्यागे नहीं जाते; गिराए तो जाते हैं, पर नाश नहीं होते” (2 कुरिन्थियों 4:8-9)।

          यह किस प्रकार कार्य करता है? जब हम प्रभु यीशु में विश्राम लेते हैं, तो वह अच्छा चरवाहा हमारे जी में जी ले आता है (भजन 23:3), और जीवन यात्रा के अगले चरण के लिए हमें सामर्थ्य प्रदान करता है। उसका हम से वायदा है कि हमारी जीवन यात्रा के हर कदम में वह हमारे साथ बना रहेगा, और जीवन यात्रा के पूरे होने तक हर कदम में साथ चलता रहेगा (इब्रानियों 13:5)। - बिल क्राऊडर

 

प्रभु इस जीवन यात्रा में मेरा हाथ थामे हुए मेरा मार्गदर्शन करते हुए, मुझे लिए चल।


तुम्हारा स्वभाव लोभरहित हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। इसलिये हम बेधड़क हो कर कहते हैं, कि प्रभु, मेरा सहायक है; मैं न डरूंगा; मनुष्य मेरा क्या कर सकता है। - इब्रानियों 13:5-6

बाइबल पाठ: भजन 32

भजन संहिता 32:1 क्या ही धन्य है वह जिसका अपराध क्षमा किया गया, और जिसका पाप ढाँपा गया हो।

भजन संहिता 32:2 क्या ही धन्य है वह मनुष्य जिसके अधर्म का यहोवा लेखा न ले, और जिसकी आत्मा में कपट न हो।

भजन संहिता 32:3 जब मैं चुप रहा तब दिन भर कराहते कराहते मेरी हड्डियां पिघल गई।

भजन संहिता 32:4 क्योंकि रात दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा; और मेरी तरावट धूप काल की सी झुर्राहट बनती गई।

भजन संहिता 32:5 जब मैं ने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया और अपना अधर्म न छिपाया, और कहा, मैं यहोवा के सामने अपने अपराधों को मान लूंगा; तब तू ने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया।

भजन संहिता 32:6 इस कारण हर एक भक्त तुझ से ऐसे समय में प्रार्थना करे जब कि तू मिल सकता है। निश्चय जब जल की बड़ी बाढ़ आए तौभी उस भक्त के पास न पहुंचेगी।

भजन संहिता 32:7 तू मेरे छिपने का स्थान है; तू संकट से मेरी रक्षा करेगा; तू मुझे चारों ओर से छुटकारे के गीतों से घेर लेगा।

भजन संहिता 32:8 मैं तुझे बुद्धि दूंगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उस में तेरी अगुवाई करूंगा; मैं तुझ पर कृपा दृष्टि रखूंगा और सम्मत्ति दिया करूंगा।

भजन संहिता 32:9 तुम घोड़े और खच्चर के समान न बनो जो समझ नहीं रखते, उनकी उमंग लगाम और बाग से रोकनी पड़ती है, नहीं तो वे तेरे वश में नहीं आने के।।

भजन संहिता 32:10 दुष्ट को तो बहुत पीड़ा होगी; परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह करुणा से घिरा रहेगा।

भजन संहिता 32:11 हे धर्मियों यहोवा के कारण आनन्दित और मगन हो, और हे सब सीधे मन वालों आनन्द से जयजयकार करो!

 

एक साल में बाइबल: 

  • 1 शमूएल 19-21
  • लूका 11:29-54

रविवार, 11 अप्रैल 2021

शान्ति

 

          एक व्यावसायिक फुटबॉल खिलाड़ी के रूप में उसके समय के पूरा हो जाने के पैंतालीस वर्ष बाद भी जेरी क्रैमर को उसके खेल की सर्वोच्च प्रतिष्ठा – ‘हॉल ऑफ़ फेम’ में उसके नाम का लिखा जाना, नहीं मिल सका। उसे बहुत से अन्य सम्मान और उपलब्धियां प्राप्त हुईं, लेकिन यह एक उपलब्धि वह प्राप्त नहीं कर सका। यद्यपि दस बार इस उपलब्धि के लिए उसके नाम को सुझाया गया, किन्तु हर बार यह पुरस्कार अन्ततः किसी अन्य खिलाड़ी को दे दिया गया। इतनी बार आशा के टूटने के बाद भी क्रैमर की प्रतिक्रिया विनीत रहने की ही रही। उसका कहना था, “मुझे लगा मानो राष्ट्रीय फुटबॉल लीग ने मुझे मेरे जीवन के दौरान 100 पुरस्कार दिए हैं; इसलिए उस एक के लिए जो मुझे नहीं मिला, विचलित होना और कुड़कुड़ाना, मूर्खता होगी।”

          जिस बात को लेकर कुछ अन्य लोग द्वेष से भर सकते थे, कि बारंबार उनके स्थान पर अन्य खिलाड़ियों को यह आदर दे दिया जाता है, क्रैमर नम्र बना रहा। उसका यह रवैया दिखाता है कि हम किस प्रकार से डाह और द्वेष के कारण हमारे हृदयों को भ्रष्ट और नष्ट होने से बचाए रख सकते हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखा है कि ईर्ष्या “हड्डियों को जला देती है” (नीतिवचन 14:30)। जब हम उस बात पर ही ध्यान लगाए रहते हैं जो हमारे पास नहीं है, या हमें नहीं मिल रही है, और उन अनेकों बातों पर ध्यान नहीं देते हैं जो हमें दी गई हैं, मिल रही हैं – तो परमेश्वर की शान्ति हम से दूर रहेगी।

          फिर ग्यारहवीं बार उसका नाम सुझाए जाने के बाद, फरवरी 2018 में, जेरी क्रैमर को अन्ततः “हॉल ऑफ़ फेम” में स्थान मिल गया। हो सकता है कि क्रैमर के समान हमारी पार्थिव इच्छाओं को पूरा होने में बहुत समय लगे, या वो पूरी न भी हों, लेकिन फिर भी हम अपने मनों में शान्ति बनाए रख सकते हैं। यदि हम उन बातों पर अपना ध्यान लगाए रखेंगे जो परमेश्वर ने हमें दी हैं, और दे रहा है, तथा उनके लिए उसके कृतज्ञ भी रहेंगे, तो परमेश्वर की शान्ति भी हमारे मनों में बसी रहेगी।

          हमारी सांसारिक इच्छाएं चाहे पूरी हों अथवा न हों, परन्तु हमारे प्रभु परमेश्वर की उपस्थिति हमारे साथ सदा बनी रहती है, और वही हमें सच्ची शान्ति देता है। - कर्स्टन होल्मबर्ग

 

परमेश्वर हमारे हृदयों में शान्ति तथा और बहुत कुछ देता है।


मैं तुम्हें शान्ति दिए जाता हूं, अपनी शान्ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे। - यूहन्ना 14:27

बाइबल पाठ: नीतिवचन 14:29-35

नीतिवचन 14:29 जो विलम्ब से क्रोध करने वाला है वह बड़ा समझ वाला है, परन्तु जो अधीर है, वह मूढ़ता की बढ़ती करता है।

नीतिवचन 14:30 शान्त मन, तन का जीवन है, परन्तु मन के जलने से हड्डियां भी जल जाती हैं।

नीतिवचन 14:31 जो कंगाल पर अंधेर करता, वह उसके कर्ता की निन्दा करता है, परन्तु जो दरिद्र पर अनुग्रह करता, वह उसकी महिमा करता है।

नीतिवचन 14:32 दुष्ट मनुष्य बुराई करता हुआ नाश हो जाता है, परन्तु धर्मी को मृत्यु के समय भी शरण मिलती है।

नीतिवचन 14:33 समझ वाले के मन में बुद्धि वास किए रहती है, परन्तु मूर्खों के अन्तःकरण में जो कुछ है वह प्रगट हो जाता है।

नीतिवचन 14:34 जाति की बढ़ती धर्म ही से होती है, परन्तु पाप से देश के लोगों का अपमान होता है।

नीतिवचन 14:35 जो कर्मचारी बुद्धि से काम करता है उस पर राजा प्रसन्न होता है, परन्तु जो लज्जा के काम करता, उस पर वह रोष करता है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • 1 शमूएल 17-18
  • लूका 11:1-28

शनिवार, 10 अप्रैल 2021

परेशानी

 

          हाऐ वू को चीन की सीमा को पार करने के जुर्म में उत्तरी कोरिया के एक श्रम-शिविर में बंदी बना कर रखा गया। उसने बताया कि वहाँ पर दिन और रात निरंतर बहुत परेशानी के समय थे। क्रूर पहरेदार यातनाएँ देते थे, बहुत कठोरता से कठिन परिश्रम करवाया जाता था, और सोने के लिए बर्फ के समान ठण्डा फर्श था जिस पर चूहे और  पिस्सु घूमते रहते थे, इसलिए बहुत ही कम सोने को मिलता था। परन्तु प्रतिदिन परमेश्वर उसकी सहायता करता था, उसे दिखाता था कि किस कैदी के साथ दोस्ती करके उससे अपने मसीही विश्वास को साझा करे।

          बाद में उसे उस शिविर से रिहा कर दिया गया, और अब वह दक्षिणी कोरिया में रह रही है। वू ने अपने बंदी होने के समय पर मनन करते हुए कहा कि भजन 23 उसके अनुभवों का सार है। यद्यपि वह अन्धकार भरी तराई में फँस गई थी, लेकिन वहाँ पर प्रभु यीशु उसके चरवाहे थे, जो उसे शान्ति देते थे: “यद्यपि मुझे ऐसा लगता था कि मैं वास्तविकता में मृत्यु की परछाईं से भरी हुई तराई में हूँ, फिर भी मुझे किसी बात का भय नहीं था। परमेश्वर प्रतिदिन मुझे शान्ति देता रहता था।” उसने परमेश्वर के प्रेम और भलाई का अनुभव किया, और उसके आश्वासन को पाया कि वह उसकी प्रिय पुत्री है, वह सदा उसके साथ है; “मैं एक बहुत भयानक स्थान में थी, परन्तु मैं जानती थी कि मैं परमेश्वर के प्रेम और भलाई को अनुभव करूँगी; और सदा उसकी उपस्थिति में बनी रहूँगी।”

          हम वू की कहानी से प्रोत्साहन पा सकते हैं। उसके भयानक अनुभवों के बावजूद उसने परमेश्वर के प्रेम, भलाई, और अगुवाई को अनुभव किया; और परमेश्वर ने सभी परेशानियों में उसे संभाल के रखा, उसके सभी भय को दूर किया। यदि हम प्रभु यीशु मसीह के पीछे चलेंगे तो वह हमारी सभी परेशानियों के समयों में हमारा मार्गदर्शन करता हुआ हमें कोमलता के साथ सही मार्ग पर लिए चलेगा। हमें परेशानियों से डरने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि हम “यहोवा के धाम में सर्वदा वास करूंगा” (पद 6)। एमी बाउचर पाई

 

हे परमेश्वर तू परेशानी की तराई में से भी मेरे लिए स्वर्गीय आशीषों की ऊंचाइयों का मार्ग प्रदान करता है।


तुम किसी ऐसी परीक्षा में नहीं पड़े, जो मनुष्य के सहने से बाहर है: और परमेश्वर सच्चा है: वह तुम्हें सामर्थ्य से बाहर परीक्षा में न पड़ने देगा, वरन परीक्षा के साथ निकास भी करेगा; कि तुम सह सको। - 1 कुरिन्थियों 10:13

बाइबल पाठ: भजन 23

भजन संहिता 23:1 यहोवा मेरा चरवाहा है, मुझे कुछ घटी न होगी।

भजन संहिता 23:2 वह मुझे हरी हरी चराइयों में बैठाता है; वह मुझे सुखदाई जल के झरने के पास ले चलता है;

भजन संहिता 23:3 वह मेरे जी में जी ले आता है। धर्म के मार्गों में वह अपने नाम के निमित्त मेरी अगुवाई करता है।

भजन संहिता 23:4 चाहे मैं घोर अन्धकार से भरी हुई तराई में हो कर चलूं, तौभी हानि से न डरूंगा, क्योंकि तू मेरे साथ रहता है; तेरे सोंटे और तेरी लाठी से मुझे शान्ति मिलती है।

भजन संहिता 23:5 तू मेरे सताने वालों के सामने मेरे लिये मेज बिछाता है; तू ने मेरे सिर पर तेल मला है, मेरा कटोरा उमण्ड रहा है।

भजन संहिता 23:6 निश्चय भलाई और करुणा जीवन भर मेरे साथ साथ बनी रहेंगी; और मैं यहोवा के धाम में सर्वदा वास करूंगा।

 

एक साल में बाइबल: 

  • 1 शमूएल 15-16
  • लूका 10:25-42