ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

गुरुवार, 5 दिसंबर 2019

प्रेम



      जब मेरी बहन मेसेल छोटी थी, तो वह एक प्रचलित और जाना-माना मसीही स्तुति गीत अपनी ही रीति से गाया करती थी: “यीशु मुझ से करता प्यार, बाइबल बताती मेसेल को।” उसके द्वारा यह गीत इस प्रकार से गाया जाना सुनकर मुझे, जो उसकी बड़ी तथा अधिक ‘बुद्धिमान’ बहन थी, बहुत खिसियाहट होती थी! मैं जानती थी कि उस गीत की वह पंक्ति ‘...बाइबल बताती सभी को’ है न कि ‘...मेसेल को’ परन्तु मैं कितना भी कह लूँ वह तो अपने ही तरीके से ‘...मेसेल को’ ही गाती थी।

      अब मैं जानती हूँ कि मेसेल सही थी। परमेश्वर का वचन बाइबल यही सिखाती है कि प्रभु यीशु हम सभी से प्रेम करता है। बाइबल में हम बारंबार इसी सत्य को विभिन्न प्रकार से दोहराया गया देखते हैं। उदाहरण के लिए यूहन्ना रचित सुसमाचार के सुप्रसिद्ध पद को ही देखिए: “क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए” (यूहन्ना 3:16)।

      प्रभु के प्रेम के इस सन्देश को यूहन्ना अपनी पत्री में भी दोहराता है: “प्रेम इस में नहीं कि हम ने परमेश्वर ने प्रेम किया; पर इस में है, कि उसने हम से प्रेम किया; और हमारे पापों के प्रायश्‍चित्त के लिये अपने पुत्र को भेजा” (1 यूहन्ना 4:10)। जैसे यूहन्ना जानता था कि प्रभु यीशु उससे प्रेम करते हैं, हम भी वैसे ही आश्वस्त रह सकते हैं – प्रभु परमेश्वर हम से प्रेम करता है, और बाइबल हमें यही बताती है। - एलिसन कीडा

यीशु मुझसे प्यार करता है; मैं यह जानता हूँ।

देखो पिता ने हम से कैसा प्रेम किया है, कि हम परमेश्वर की सन्तान कहलाएं, और हम हैं भी: इस कारण संसार हमें नहीं जानता, क्योंकि उसने उसे भी नहीं जाना। हे प्रियों, अभी हम परमेश्वर की सन्तान हैं, और अब तक यह प्रगट नहीं हुआ, कि हम क्या कुछ होंगे! इतना जानते हैं, कि जब वह प्रगट होगा तो हम भी उसके समान होंगे, क्योंकि उसको वैसा ही देखेंगे जैसा वह है। - 1 यूहन्ना 3:1-2

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 4:7-16
1 John 4:7 हे प्रियों, हम आपस में प्रेम रखें; क्योंकि प्रेम परमेश्वर से है: और जो कोई प्रेम करता है, वह परमेश्वर से जन्मा है; और परमेश्वर को जानता है।
1 John 4:8 जो प्रेम नहीं रखता, वह परमेश्वर को नहीं जानता है, क्योंकि परमेश्वर प्रेम है।
1 John 4:9 जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, वह इस से प्रगट हुआ, कि परमेश्वर ने अपने एकलौते पुत्र को जगत में भेजा है, कि हम उसके द्वारा जीवन पाएं।
1 John 4:10 प्रेम इस में नहीं कि हम ने परमेश्वर ने प्रेम किया; पर इस में है, कि उसने हम से प्रेम किया; और हमारे पापों के प्रायश्‍चित्त के लिये अपने पुत्र को भेजा।
1 John 4:11 हे प्रियो, जब परमेश्वर ने हम से ऐसा प्रेम किया, तो हम को भी आपस में प्रेम रखना चाहिए।
1 John 4:12 परमेश्वर को कभी किसी ने नहीं देखा; यदि हम आपस में प्रेम रखें, तो परमेश्वर हम में बना रहता है; और उसका प्रेम हम में सिद्ध हो गया है।
1 John 4:13 इसी से हम जानते हैं, कि हम उस में बने रहते हैं, और वह हम में; क्योंकि उसने अपने आत्मा में से हमें दिया है।
1 John 4:14 और हम ने देख भी लिया और गवाही देते हैं, कि पिता ने पुत्र को जगत का उद्धारकर्ता कर के भेजा है।
1 John 4:15 जो कोई यह मान लेता है, कि यीशु परमेश्वर का पुत्र है: परमेश्वर उस में बना रहता है, और वह परमेश्वर में।
1 John 4:16 और जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, उसको हम जान गए, और हमें उस की प्रतीति है; परमेश्वर प्रेम है: जो प्रेम में बना रहता है, वह परमेश्वर में बना रहता है; और परमेश्वर उस में बना रहता है।

एक साल में बाइबल: 
  • दानिय्येल 1-2
  • 1 यूहन्ना 4



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें