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सोमवार, 5 जुलाई 2010

आशा से भरी आराधना

जीवन की कठिन परिस्थितियों से जूझता मेरा एक मित्र ग्रीष्म के सुन्दर दिन में आंसू बहा रहा था। एक अन्य मित्र उसके जीवन को बदल डालने वाली पिछली उदास बातों को भुला नहीं पा रही थी। एक और मित्र उस चर्च के बन्द हो जाने से दुखी था जिस में उसने बड़ी मेहनत और विश्वासयोग्यता से सेवा करी थी। मेरे चौथे मित्र की नौकरी जाती रही थी।

इन परिस्थितियों से जूझते मेरे मित्र या हममें से कोई भी अन्य जन ऐसे में आशा पाने के लिये क्या कर सकते हैं? हम किधर जाएं जब आने वाला कल हमें खुशी की कोई उम्मीद न दे?

जैसा दाऊद ने लिखा, हम ऐसे में परमेश्वर की आराधना कर सकते हैं उसे "धन्य" कह सकते हैं। संकट और क्लेश के समय में भी अपने जीवन में परमेश्वर की भूमिका को मान लेने से हमारी सोच हमारे दुखों से हटकर परमेश्वर की महानता पर टिक जाती है। दाऊद परेशानियों से भली भांति परिचित था। उसने दुशमनों का सामना किया, अपने पाप के अन्जाम को भुगता और क्लेशों की चुनौतियों को झेला, लेकिन साथ ही इन सब बातों में उसने आराधना की सामर्थ को पहचाना।

इसलिये भजन १०३ में वह हमें परमेश्वर की ओर अपना ध्यान लगाने के अनेक ऐसे कारण देता है। परमेश्वर जो हमें भलाईयों से भरता है - वह हमें क्षमा करता है, चंगा करता है, प्रेम और करुणा का मुकुट हमारे सिर पर रखता है, हमारी अभिलाषाओं को तृप्त करता है, हमें फिर से उठा कर खड़ा करता है। दाऊद हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर हमें न्याय और धार्मिकता देता है और हमारे प्रति अनुग्रहकारी और प्रेम से परिपूर्ण रहता है।

दाउद से सीखिये, परमेश्वर की महानता की आरधना करने से निराश मनों में भी आशा भर जाती है। - डेव ब्रैनन


आराधना आपके भारी से भारी बोझ को भी बहुत हल्का बना देती है।


बाइबल पाठ: भजन १०३:१-१४


हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह, और उसके किसी उपकार को न भूलना। - भजन १०३:२


एक साल में बाइबल:
  • अय्युब ३०, ३१
  • प्रेरितों के काम १३:२६-५२