शनिवार, 30 मई 2020

शब्द



     कुछ समय पहले मैंने अपनी पत्नी कैरी को मोबाइल फोन पर बोल कर लिखा गया एक सन्देश भेजा। मैं उसे उसके कार्य स्थल से लेने के लिए जा रहा था, और मैंने जो सन्देश भेजने के लिए बोला था, वह था, “हे वृद्धा, तुम कहाँ चाहोगी कि मैं पहुँच कर तुम्हें लेने के लिए मिलूँ?” कैरी को बुरा नहीं लगता है जब मैं उसे ‘old gal’ (हे वृद्धा) कहता हूँ – यह हमारा घर में, परस्पर प्रेम व्यक्त करने के लिए प्रयोग किए जाने वाले उपनामों में से एक है। परन्तु मेरे फोन को ‘old gal’ समझ नहीं आया, और सन्देश में लिखा गया ‘old cow’ (बूढ़ी गाय), जो एक गाली के समान अपमानजनक शब्द है।

     सौभाग्य से कैरी तुरंत समझ गई कि क्या हुआ होगा, और उसने इसे मज़ाक के समान लिया। बाद में उसने मेरे इस सन्देश को, मेरी टांग खींचने के लिए, सोशल मीडिया पर भी डाला, और लोगों से पूछा “अब बताओ मुझे क्या करना चाहिए?” हम दोनों इसे लेकर हँसी-मज़ाक करते रहे।

     उस दिन मेरे सन्देश के भद्दे शब्द के प्रति मेरी पत्नी की प्रेम भरी प्रतिक्रिया ने मुझे हमारी प्रार्थनाओं के प्रति परमेश्वर की प्रेम तथा समझ से भरी प्रतिक्रिया के बारे में विचार करने पर विवश किया। जब हम प्रार्थना करते हैं तो हो सकता है कि हम अपने आप को ठीक से व्यक्त नहीं करने पाते हैं, या कभी-कभी हमें समझ भी नहीं होती है कि हम क्या मांगें। परन्तु क्योंकि हम मसीह यीशु के हैं, और हमारे अन्दर उसका पवित्र आत्मा निवास करता है, इसलिए “इसी रीति से आत्मा भी हमारी दुर्बलता में सहायता करता है, क्योंकि हम नहीं जानते, कि प्रार्थना किस रीति से करना चाहिए; परन्तु आत्मा आप ही ऐसी आहें भर भरकर जो बयान से बाहर है, हमारे लिये बिनती करता है” (रोमियों 8:26)। स्वयं परमेश्वर ही हमारे लिए प्रावधान करता है कि हमारी आवश्यकताएँ उस के समक्ष रखी जा सकें।

     हमारा स्वर्गीय पिता दूर खड़ा यह प्रतीक्षा नहीं करता रहता है कि हम सही शब्द लेकर उस के समक्ष प्रार्थना में प्रस्तुत हो सकें। हम अपनी प्रत्येक आवश्यकता के लिए निःसंकोच उस के समक्ष आ सकते हैं, आश्वस्त कि वह हमें प्रेम के साथ स्वीकार करता है, वह हमारे हर शब्द को समझता है। - जेम्स बैंक्स

परमेश्वर का प्रेम शब्दों से परे है।

हे यहोवा जैसी तुझ पर हमारी आशा है, वैसी ही तेरी करूणा भी हम पर हो। - भजन 33:22

बाइबल पाठ: रोमियों 8:22-27
रोमियों 8:22 क्योंकि हम जानते हैं, कि सारी सृष्टि अब तक मिलकर कराहती और पीड़ाओं में पड़ी तड़पती है।
रोमियों 8:23 और केवल वही नहीं पर हम भी जिन के पास आत्मा का पहिला फल है, आप ही अपने में कराहते हैं; और लेपालक होने की, अर्थात अपनी देह के छुटकारे की बाट जोहते हैं।
रोमियों 8:24 आशा के द्वारा तो हमारा उद्धार हुआ है परन्तु जिस वस्तु की आशा की जाती है जब वह देखने में आए, तो फिर आशा कहां रही? क्योंकि जिस वस्तु को कोई देख रहा है उस की आशा क्या करेगा?
रोमियों 8:25 परन्तु जिस वस्तु को हम नहीं देखते, यदि उस की आशा रखते हैं, तो धीरज से उस की बाट जोहते भी हैं।
रोमियों 8:26 इसी रीति से आत्मा भी हमारी दुर्बलता में सहायता करता है, क्योंकि हम नहीं जानते, कि प्रार्थना किस रीति से करना चाहिए; परन्तु आत्मा आप ही ऐसी आहें भर भरकर जो बयान से बाहर है, हमारे लिये बिनती करता है।
रोमियों 8:27 और मनों का जांचने वाला जानता है, कि आत्मा की मनसा क्या है क्योंकि वह पवित्र लोगों के लिये परमेश्वर की इच्छा के अनुसार बिनती करता है।  

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 10-12
  • यूहन्ना 11:30-57