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रविवार, 5 दिसंबर 2010

उपहार या उपस्थिति

प्रसिद्ध बाइबल शिक्षक ओस्वॉलड चेमबर्स ने लिखा "हमें परमेश्वर संबंधी प्रतिज्ञाओं की नहीं, स्वयं परमेश्वर की आवश्यक्ता है।"

क्रिसमस की इस ऋतु में अकसर लोग कहते हैं " परमेश्वर की उपस्थिति उपहारों से अधिक ज़रूरी है।" लेकिन जितना समय और मेहनत वे उपहारों की खरीददारी में लगाते हैं उससे कुछ और ही दिखाई देता है।

संसार के कुछ भागों में लोग ६ दिसंबर को ही उपहारों का आदान-प्रदान कर लेते हैं जिससे आगे का महीना प्रभु यीशु के जन्म और संसार को दिये गए परमेश्वर के इस अद्भुत और सिद्ध उपहार पर ध्यान केंद्रित रख सकें।

जब हम कहते हैं कि हम लोगों से उपहारों की बजाए परमेश्वर की उपस्थिति चाहते हैं, तो हो सकता है कि हम सत्य कह रहे हों। परन्तु कितने हैं जो पूरी ईमानदारी के साथ कह सकते हैं कि हम परमेश्वर से उसके उपहारों की बजाए उसकी उपस्थिति चाहते हैं?

सच तो यह है कि अकसर हम परमेश्वर से उसकी उपस्थिति की बजाए उसके उपहार ज़्यादा पसन्द करते हैं। हमें परमेश्वर से अच्छा स्वास्थ्य, धन-संपत्ति, ज्ञान, अच्छी या बेहतर नौकरी, रहने का अच्छा या बेहतर स्थान आदि सब चाहिये। हो सकता है कि परमेश्वर यह सब हमें देना भी चाहता हो, लेकिन यह सब हमें उससे अलग नहीं मिल सकता। प्रभु यीशु ने कहा "...क्‍योंकि अन्यजाति इन सब वस्‍तुओं की खोज में रहते हैं, और तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता जानता है, कि तुम्हें ये सब वस्‍तुएं चाहिए। इसलिये पहिले तुम उसके राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्‍तुएं तुम्हें मिल जाएंगी।" (मत्ती ६:३२, ३३)

दाउद ने इससे भी आगे बढ़कर सच्चे आनन्द के भेद को समझा और कहा " तू मुझे जीवन का रास्ता दिखाएगा। तेरे निकट आनन्द की भरपूरी है, तेरे दाहिने हाथ में सुख सर्वदा बना रहता है।" (भजन १६:११) सांसारिक उपहार हमें कुछ समय के लिये संतुष्टि दे सकते हैं और खुश कर सकते हैं, पर सच्चे और अनन्त आनन्द की भरपूरी तो परमेश्वर के साथ बने रहने वाले सही संबंध द्वारा उसकी उपस्थिति में ही मिल सकती है।

कैसा रहे यदि इस क्रिसमस आप उपहारों के नहीं वरन अपने जीवन में परमेश्वर की उपस्थिति के लालायित हों? - जूली ऐकैरमैन लिंक


हमारे साथ परमेश्वर की उपस्थिति हमारे लिये उसका सबसे उत्तम उपहार है।

तू मुझे जीवन का रास्ता दिखाएगा। तेरे निकट आनन्द की भरपूरी है, तेरे दाहिने हाथ में सुख सर्वदा बना रहता है। - भजन १६:११


बाइबल पाठ: १ युहन्ना २:२४-२९

जो कुछ तुम ने आरम्भ से सुना है वही तुम में बना रहे: जो तुम ने आरम्भ से सुना है, यदि वह तुम में बना रहे, तो तुम भी पुत्र में, और पिता में बने रहोगे।
और जिस की उस ने हम से प्रतिज्ञा की वह अनन्‍त जीवन है।
मैं ने ये बातें तुम्हें उस के विषय में लिखी हैं, जो तुम्हें भरमाते हैं।
और तुम्हारा वह अभिषेक, जो उस की ओर से किया गया, तुम में बना रहता है, और तुम्हें इस का प्रयोजन नही, कि कोई तुम्हें सिखाए, वरन जैसे वह अभिषेक जो उस की ओर से किया गया तुम्हें सब बातें सिखाता है, और यह सच्‍चा है, और झूठा नहीं: और जैसा उस ने तुम्हें सिखाया है वैसे ही तुम उस में बने रहते हो।
निदान, हे बालको, उस में बने रहो; कि जब वह प्रगट हो, तो हमें हियाव हो, और हम उसके आने पर उसके साम्हने लज्ज़ित न हों।
यदि तुम जानते हो, कि वह धामिर्क है, तो यह भी जानते हो, कि जो कोई धर्म का काम करता है, वह उस से जन्मा है।

एक साल में बाइबल:
  • दानियेल १, २
  • १ युहन्ना ४