बाइबल और मसीही विश्वास सम्बन्धी अपने प्रश्नों के लिए यहाँ क्लिक करें:

GotQuestions?org

Sunday, September 25, 2016

बोलना और सुनना


   वर्षों पहले किसी अज्ञात लेखक ने हमारे बोलने को सीमित रखने की बुद्धिमता से संबंधित एक लघु-कविता लिखी, जो कुछ इस प्रकार है:
एक बुद्धिमान बुज़ुर्ग उल्लू बाँझ वृक्ष पर रहता था;
जितना अधिक वह देखता था उतना ही कम वह बोलता था;
जितना कम वह बोलता था, उतना अधिक वह सुनता था;
क्यों नहीं हम उस उस बुद्धिमान पक्षी के समान बनते?

   बुद्धिमानी और हमारे बोलने को सीमित रखने में एक संबंध है; परमेश्वर का वचन बाइबल भी इस बात को सिखाती है: "जहां बहुत बातें होती हैं, वहां अपराध भी होता है, परन्तु जो अपने मुंह को बन्द रखता है वह बुद्धि से काम करता है" (नीतिवचन 10:19)। कुछ परिस्थितियों में हम क्या और कितना बोलते है, इसके प्रति सावधान रहने में बुद्धिमानी होती है। जब हम क्रोध या आवेश में हों तो अपने बोले गए शब्दों के प्रति सचेत और संयमी रहना भला होता है: "हे मेरे प्रिय भाइयो, यह बात तुम जानते हो: इसलिये हर एक मनुष्य सुनने के लिये तत्‍पर और बोलने में धीरा और क्रोध में धीमा हो" (याकूब 1:19)। परमेश्वर की उपस्थिति में अपने शब्दों के प्रयोग का नियंत्रण करना, उनके प्रति संयमी होना परमेश्वर के प्रति हमारे आदर और श्रद्धा को भी दिखाता है: "बातें करने में उतावली न करना, और न अपने मन से कोई बात उतावली से परमेश्वर के साम्हने निकालना, क्योंकि परमेश्वर स्वर्ग में हैं और तू पृथ्वी पर है; इसलिये तेरे वचन थोड़े ही हों" (सभोपदेशक 3:7)। जब लोग दुःखी हों तो उनसे सांत्वना के बहुत शब्द कहने की बजाए उनके साथ हमारी मूक उपस्थिति उनके लिए कहीं अधिक शांतिदायक और सहायक हो सकती है: "तब वे सात दिन और सात रात उसके संग भूमि पर बैठे रहे, परन्तु उसका दु:ख बहुत ही बड़ा जान कर किसी ने उस से एक भी बात न कही" (अय्यूब 2:13)।

   परमेश्वर का वचन हमें सिखाता है कि बोलने का भी समय होता है और शांत रहने का भी (सभोपदेशक 3:7)। कम बोलना हमें अधिक सुनने वाला वाला बनाता है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


या तो आपके बोल आपके शांत रहने से बेहतर हों; 
अन्यथा शांत रहना बेहतर होता है।

फाड़ने का समय, और सीने का भी समय; चुप रहने का समय, और बोलने का भी समय है; - (सभोपदेशक 3:7)

बाइबल पाठ: नीतिवचन 10:17-21
Proverbs 10:17 जो शिक्षा पर चलता वह जीवन के मार्ग पर है, परन्तु जो डांट से मुंह मोड़ता, वह भटकता है। 
Proverbs 10:18 जो बैर को छिपा रखता है, वह झूठ बोलता है, और जो अपवाद फैलाता है, वह मूर्ख है। 
Proverbs 10:19 जहां बहुत बातें होती हैं, वहां अपराध भी होता है, परन्तु जो अपने मुंह को बन्द रखता है वह बुद्धि से काम करता है। 
Proverbs 10:20 धर्मी के वचन तो उत्तम चान्दी हैं; परन्तु दुष्टों का मन बहुत हलका होता है। 
Proverbs 10:21 धर्मी के वचनों से बहुतों का पालन पोषण होता है, परन्तु मूढ़ लोग निर्बुद्धि होने के कारण मर जाते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • श्रेष्ठगीत 6-8
  • गलतियों 4


Saturday, September 24, 2016

साथ


   यूरोपिय देश स्पेन के कैनरी द्वीप समूह में एक छोटा सा द्वीप है, ला गोमेरा; इस द्वीप में एक भाषा को, जो पक्षियों की आवाज़ के समान सुनाई देती है, पुनर्जीवित किया जा रहा है। वह द्वीप गहरी घाटियों और ऊँची खड़ी चट्टानों का देश है, जहाँ पर स्कूली बच्चे और सैलानी सीख रहे हैं कि कैसे एक समय पर सीटी बजाकर 2 मील दूर तक भी संदेश भेजे जाते थे। भेड़-बकरियों के एक चरवाहे ने, जो इस प्राचीन संपर्क ’भाषा’ का प्रयोग अपने झुण्ड से संपर्क करने के लिए करता है, कहा: "ये मेरी सीटी को वैसे ही पहिचानती हैं जैसे मेरी आवाज़ को।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भी इस प्रकार से सीटी बजाने का उपयोग होने का उल्लेख है। ज़कर्याह नबी की पुस्तक में परमेश्वर को एक चरवाहे के समाने अपने झुण्ड को एकत्रित करने के लिए सीटी का उपयोग करते हुए बताया गया है। परमेश्वर के लोग, जो उससे भटक कर संसार में तितर-बितर हो गए हैं, उन्हें पुनः अपने पास एकत्रित करने के लिए परमेश्वर सीटी बजाकर उन्हें बुलाएगा (ज़कर्याह 10:8)।

   जकर्याह द्वारा कही इस बात के सैंकड़ों वर्षों के पश्चात, प्रभु यीशु ने कहा, "मेरी भेड़ें मेरा शब्द सुनती हैं, और मैं उन्हें जानता हूं, और वे मेरे पीछे पीछे चलती हैं" (यूहन्ना 10:27)। भेड़ें किसी भाषा के शब्द तो नहीं समझती परन्तु अपने चरवाहे की आवाज़ को पहिचानती हैं, चाहे वह सीटी हो या फिर उच्चारण किए गए किसी भाषा के कोई शब्द। चरवाहे की आवाज़ उन्हें आश्वस्त करती है कि उनका रखवाला उनके साथ है, उनके पास है।

   जैसा ज़कर्याह 10:2 में लिखा है, भ्रामक आवाज़ें और ध्यान भंग करने वाला शोर हमारे ध्यान को परमेश्वर से अलग करने के लिए प्रयासरत रहता है; लेकिन परमेश्वर बिना कोई शब्द कहे भी हमारे साथ बनी रहने वाली अपनी उपस्थिति का एहसास हमें कराता रहता है, जिसका एक माध्यम है परिस्थितियाँ; जो चाहे प्रोत्साहित करने वाले हों या भयप्रद, लेकिन परमेश्वर का उन पर नियंत्रण और उनके द्वारा जो वह हमें सिखाता-समझाता है, हमें आश्वस्त करता है कि वह हमारी रक्षा कर रहा है, हमारा मार्गदर्शन कर रहा है, हमारे साथ-साथ बना हुआ है। - मार्ट डी हॉन


परमेश्वर की पुकार का पता सदा लगता ही है।

तुम्हारा स्‍वभाव लोभरिहत हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। - इब्रानियों 13:5

बाइबल पाठ: ज़कर्याह 10:1-8
Zechariah 10:1 बरसात के अन्त में यहोवा से वर्षा मांगो, यहोवा से जो बिजली चमकाता है, और वह उन को वर्षा देगा और हर एक के खेत में हरियाली उपजाएगा। 
Zechariah 10:2 क्योंकि गृहदेवता अनर्थ बात कहते और भावी कहने वाले झूठा दर्शन देखते और झूठे स्वपन सुनाते, और व्यर्थ शान्ति देते हैं। इस कारण लोग भेड़-बकरियों की नाईं भटक गए; और चरवाहे न होने के कारण दुर्दशा में पड़े हैं।
Zechariah 10:3 मेरा क्रोध चरवाहों पर भड़का है, और मैं उन बकरों को दण्ड दूंगा; क्योंकि सेनाओं का यहोवा अपने झुण्ड अर्थात यहूदा के घराने का हाल देखने का आएगा, और लड़ाई में उन को अपना हृष्टपुष्ट घोड़ा सा बनाएगा। 
Zechariah 10:4 उसी में से कोने का पत्थर, उसी में से खूंटी, उसी में से युद्ध का धनुष, उसी में से सब प्रधान प्रगट होंगे। 
Zechariah 10:5 और वे ऐसे वीरों के समान होंगे जो लड़ाई में अपने बैरियों को सड़कों के कीच की नाईं रौंदते हों; वे लड़ेंगे, क्योंकि यहोवा उनके संग रहेगा, इस कारण वे वीरता से लड़ेंगे और सवारों की आशा टूटेगी।
Zechariah 10:6 मैं यहूदा के घराने को पराक्रमी करूंगा, और यूसुफ के घराने का उद्धार करूंगा। और मुझे उन पर दया आई है, इस कारण मैं उन्हें लौटा लाकर उन्हीं के देश में बसाऊंगा, और वे ऐसे होंगे, मानों मैं ने उन को मन से नहीं उतारा; मैं उनका परमेश्वर यहोवा हूं, इसलिये उनकी सुन लूंगा। 
Zechariah 10:7 एप्रैमी लोग वीर के समान होंगे, और उनका मन ऐसा आनन्दित होगा जैसे दाखमधु से होता है। यह देख कर उनके लड़केबाले आनन्द करेंगे और उनका मन यहोवा के कारण मगन होगा।
Zechariah 10:8 मैं सीटी बजाकर उन को इकट्ठा करूंगा, क्योंकि मैं उनका छुड़ाने वाला हूं, और वे ऐसे बढ़ेंगे जैसे पहले बढ़े थे।

एक साल में बाइबल: 
  • श्रेष्ठगीत 4-5
  • गलतियों 3


Friday, September 23, 2016

आपात स्थिति


   मार्च 2011 में एक विध्वंसकारी सुनामी जापान के तट से टकराई जिससे समुद्र के किनारे के गाँव तथा नगर उजड़ गए, और लगभग 16000 लोगों की जानें जाती रहीं। लेखिका तथा कवित्री ग्रेटल एर्लिच उस विनाश को देखने जब जापान पहुँची, तो जो कुछ उन्होंने देखा उसका बयान करने के लिए उनके पास शब्द नहीं थे; उन्होंने अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए उस परिस्थिति पर एक कविता लिखी। बाद में समाचार मीडिया को दिए एक टेलिविज़न साक्षात्कार में इस विषय पर बात करते हुए उन्होंने अपने एक दिवंगत मित्र और कवी विलियम स्टैफोर्ड का हवाला देकर कहा: "मेरे पुराने मित्र विलियम स्टैफोर्ड ने कहा था, कविता आत्मा की आपात स्थिति का उद्गार है।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भी गहरी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए, चाहे वे आनन्द से भरा स्तुतिगान हो या हानि से आया गहरा दुःख, हम कविता का भरपूरी से प्रयोग पाते हैं। जब राजा शाउल और उसका पुत्र योनातान युद्ध में मारे गए तो दाउद दुःख से अभिभूत हो गया (2 शमूएल 1:1-2) और अपने इस गहरे दुःख को व्यक्त करने के लिए उसने एक विलापगीत लिखा: "शाऊल और योनातन जीवनकाल में तो प्रिय और मनभाऊ थे, और अपनी मृत्यु के समय अलग न हुए; वे उकाब से भी वेग चलने वाले, और सिंह से भी अधिक पराक्रमी थे। हे इस्राएली स्त्रियो, शाऊल के लिये रोओ, वह तो तुम्हें लाल रंग के वस्त्र पहिनाकर सुख देता, और तुम्हारे वस्त्रों के ऊपर सोने के गहने पहिनाता था। हाय, युद्ध के बीच शूरवीर कैसे काम आए! हे योनातन, हे ऊंचे स्थानों पर जूझे हुए, हे मेरे भाई योनातन, मैं तेरे कारण दु:खित हूँ; तू मुझे बहुत मनभाऊ जान पड़ता था; तेरा प्रेम मुझ पर अद्‌भुत, वरन स्त्रियों के प्रेम से भी बढ़कर था" (1 शमूएल 1:23-26)।

   आज हमें यदि किसी आत्मा की आपात स्थिति का सामना करना पड़े, वह चाहे आनन्द की हो या दुःख की, हमारी प्रार्थना भी एक कविता के समान प्रमेश्वर के सामने हमारी भावनाएं प्रगट करती है; और हम परमेश्वर के वचन बाइबल से भी प्रार्थनाओं की उन कविताओं का प्रयोग अपनी भावना व्यक्त करने के लिए कर सकते हैं। चाहे अपने मन की बात कहने के लिए हमारे पास शब्द ना हों, लेकिन परमेश्वर का आत्मा हमारी सहायता करता है (रोमियों 8:26) और हमारे मन की भावनाओं को परमेश्वर के सामने प्रार्थना में प्रस्तुत करता है। - डेविड मैक्कैसलैंड


परमेश्वर केवल शब्दों को ही नहीं सुनता; वह दिल का हाल भी पढ़ता है।

इसी रीति से आत्मा भी हमारी दुर्बलता में सहायता करता है, क्योंकि हम नहीं जानते, कि प्रार्थना किस रीति से करना चाहिए; परन्तु आत्मा आप ही ऐसी आहें भर भरकर जो बयान से बाहर है, हमारे लिये बिनती करता है। - रोमियों 8:26

बाइबल पाठ: 2 शमूएल 1:17-27
2 Samuel 1:17 (शाऊल और योनातन के लिये दाऊद का बनाया हुआ विलापगीत ) तब दाऊद ने शाऊल और उसके पुत्र योनातन के विषय यह विलापगीत बनाया, 
2 Samuel 1:18 और यहूदियों को यह धनुष नाम गीत सिखाने की आज्ञा दी; यह याशार नाम पुस्तक में लिखा हुआ है; 
2 Samuel 1:19 हे इस्राएल, तेरा शिरोमणि तेरे ऊंचे स्थान पर मारा गया। हाय, शूरवीर क्योंकर गिर पड़े हैं! 
2 Samuel 1:20 गत में यह न बताओ, और न अश्कलोन की सड़कों में प्रचार करना; न हो कि पलिश्ती स्त्रियाँ आनन्दित हों, न हो कि खतनारहित लोगों की बेटियां गर्व करने लगें। 
2 Samuel 1:21 हे गिलबो पहाड़ो, तुम पर न ओस पड़े, और न वर्षा हो, और न भेंट के योग्य उपज वाले खेत पाए जाएं! क्योंकि वहां शूरवीरों की ढालें अशुद्ध हो गई। और शाऊल की ढाल बिना तेल लगाए रह गई। 
2 Samuel 1:22 जूझे हुओं के लोहू बहाने से, और शूरवीरों की चर्बी खाने से, योनातन का धनुष लौट न जाता था, और न शाऊल की तलवार छूछी फिर आती थी। 
2 Samuel 1:23 शाऊल और योनातन जीवनकाल में तो प्रिय और मनभाऊ थे, और अपनी मृत्यु के समय अलग न हुए; वे उकाब से भी वेग चलने वाले, और सिंह से भी अधिक पराक्रमी थे। 
2 Samuel 1:24 हे इस्राएली स्त्रियो, शाऊल के लिये रोओ, वह तो तुम्हें लाल रंग के वस्त्र पहिनाकर सुख देता, और तुम्हारे वस्त्रों के ऊपर सोने के गहने पहिनाता था। 
2 Samuel 1:25 हाय, युद्ध के बीच शूरवीर कैसे काम आए! हे योनातन, हे ऊंचे स्थानों पर जूझे हुए, 
2 Samuel 1:26 हे मेरे भाई योनातन, मैं तेरे कारण दु:खित हूँ; तू मुझे बहुत मनभाऊ जान पड़ता था; तेरा प्रेम मुझ पर अद्‌भुत, वरन स्त्रियों के प्रेम से भी बढ़कर था। 
2 Samuel 1:27 हाय, शूरवीर क्योंकर गिर गए, और युद्ध के हथियार कैसे नाश हो गए हैं!

एक साल में बाइबल: 
  • श्रेष्ठगीत 1-3
  • गलतियों 2


Thursday, September 22, 2016

सुसमाचार


   यदि आपने हवाई-अड्डों पर कभी स्वचलित मार्ग-पट्टी का प्रयोग किया है तो आप अवश्य बारंबार दोहराई जाने वाली चेतावनी, "सावधान! स्वचलित मार्ग-पट्टी समाप्त होने पर है" से परिचित होंगे। हवाई-अड्डों पर यह चेतावनी बारंबार क्यों दोहराई जाती है? इसलिए कि यात्री सावधान रहें, उस ’स्वचलित मार्ग-पट्टी’ के प्रयोग के समय किसी हानि से बचे रहें और यदि किसी को कोई हानि होती भी है तो वे हवाई-अड्डे को इसका ज़िम्मेदार ना बना सकें।

   बारंबार दोहराई जाने वाली चेतावनियाँ तथा घोषणाएं परेशान करने वाली हो सकती हैं, परन्तु उनकी उपयोगिता भी है। परमेश्वर के वचन बाइबल में भी हम परमेश्वर की अनेकों चेतावनियों और शिक्षाओं को बारंबार दोहराया गया पाते हैं। प्रेरित पौलुस ने गलतिया के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में, ऐसे ही एक महत्वपूर्ण चेतावनी को दोहराया है। पौलुस ने उन्हें सचेत किया कि यदि कोई भी, चाहे वह स्वयं, या चाहे कोई स्वर्गदूत ही आकर उन्हें ऐसा सुसमाचार सुनाए जो उस सुसमाचार से भिन्न हो जो वे पहले सुन चुके हैं, तो उस पर कदापि विश्वास ना करें (गलतियों 1:8)। इससे अगले पद में पौलुस ने फिर से यही बात दोहराई; क्योंकि यह चेतावनी दोहराने के योग्य थी। पौलुस को ऐसा इसलिए करना पड़ा क्योंकि गलतिया के वे मसीही विश्वासी, केवल परमेश्वर के अनुग्रह से मिलने वाली पाप क्षमा और केवल मसीह यीशु पर लाए गए विश्वास द्वारा उद्धार के सच्चे सुसमाचार से हटकर उस गलत शिक्षा की ओर मुड़ने लगे थे कि पाप क्षमा, उद्धार और परमेश्वर के साथ उनका संबंध उनके भले कार्यों और रीति-रिवाज़ों के पालन पर निर्भर है।

   प्रभु यीशु मसीह का सुसमाचार - उसमें लाए गए विश्वास द्वारा पापों की क्षमा और उद्धार, केवल उसकी मृत्यु, गाड़े जाने और पुनरुत्थान के द्वारा ही संभव है: "हे भाइयों, मैं तुम्हें वही सुसमाचार बताता हूं जो पहिले सुना चुका हूं, जिसे तुम ने अंगीकार भी किया था और जिस में तुम स्थिर भी हो। उसी के द्वारा तुम्हारा उद्धार भी होता है, यदि उस सुसमाचार को जो मैं ने तुम्हें सुनाया था स्मरण रखते हो; नहीं तो तुम्हारा विश्वास करना व्यर्थ हुआ। इसी कारण मैं ने सब से पहिले तुम्हें वही बात पहुंचा दी, जो मुझे पहुंची थी, कि पवित्र शास्त्र के वचन के अनुसार यीशु मसीह हमारे पापों के लिये मर गया। और गाड़ा गया; और पवित्र शास्त्र के अनुसार तीसरे दिन जी भी उठा" (1 कुरिन्थियों 15:1-4)। और यही वह सुसमाचार है जिसे दुनिया के लोगों को बताने की ज़िम्मेदारी प्रभु ने अपने अनुयायियों को सौंपी है (मत्ती 28:18-20; प्रेरितों 1:8)।

   जब हम प्रभु यीशु के सुसमाचार को लोगों के सामने रखें, तो सचेत रहें कि उस सुसमाचार को छोड़ जो परमेश्वर की ओर से हमें दिया गया है, अन्य किसी भी गलत ’सुसमाचार’ को ना सुनाएं। प्रभु यीशु में लाए गए विश्वास और उसके अनुग्रह से मिलने वाली पापों की क्षमा द्वारा उद्धार ही एकमात्र एवं सच्चा सुसमाचार है। - डेव ब्रैनन


मसीह यीशु ही वह एकमात्र मार्ग है जो स्वर्ग ले जाता है।

यीशु ने उस से कहा, मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता। - यूहन्ना 14:6

बाइबल पाठ: गलतियों 1:1-10
Galatians 1:1 पौलुस की, जो न मनुष्यों की ओर से, और न मनुष्य के द्वारा, वरन यीशु मसीह और परमेश्वर पिता के द्वारा, जिसने उसको मरे हुओं में से जिलाया, प्रेरित है। 
Galatians 1:2 और सारे भाइयों की ओर से, जो मेरे साथ हैं; गलतिया की कलीसियाओं के नाम। 
Galatians 1:3 परमेश्वर पिता, और हमारे प्रभु यीशु मसीह की ओर से तुम्हें अनुग्रह और शान्‍ति मिलती रहे। 
Galatians 1:4 उसी ने अपने आप को हमारे पापों के लिये दे दिया, ताकि हमारे परमेश्वर और पिता की इच्छा के अनुसार हमें इस वर्तमान बुरे संसार से छुड़ाए। 
Galatians 1:5 उस की स्‍तुति और बड़ाई युगानुयुग होती रहे। आमीन।
Galatians 1:6 मुझे आश्चर्य होता है, कि जिसने तुम्हें मसीह के अनुग्रह से बुलाया उस से तुम इतनी जल्दी फिर कर और ही प्रकार के सुसमाचार की ओर झुकने लगे। 
Galatians 1:7 परन्तु वह दूसरा सुसमाचार है ही नहीं: पर बात यह है, कि कितने ऐसे हैं, जो तुम्हें घबरा देते, और मसीह के सुसमाचार को बिगाड़ना चाहते हैं। 
Galatians 1:8 परन्तु यदि हम या स्वर्ग से कोई दूत भी उस सुसमाचार को छोड़ जो हम ने तुम को सुनाया है, कोई और सुसमाचार तुम्हें सुनाए, तो श्रापित हो। 
Galatians 1:9 जैसा हम पहिले कह चुके हैं, वैसा ही मैं अब फिर कहता हूं, कि उस सुसमाचार को छोड़ जिसे तुम ने ग्रहण किया है, यदि कोई और सुसमाचार सुनाता है, तो श्रापित हो। अब मैं क्या मनुष्यों को मनाता हूं या परमेश्वर को? क्या मैं मनुष्यों को प्रसन्न करना चाहता हूं? 
Galatians 1:10 यदि मैं अब तक मनुष्यों को ही प्रसन्न करता रहता, तो मसीह का दास न होता।

एक साल में बाइबल: 
  • सभोपदेशक 10-12
  • गलतियों 1


Wednesday, September 21, 2016

दावत


   कुछ समय पहले मैंने मध्य-कालीन समय पर आयोजित एक सम्मेलन में भाग लिया। उस सम्मेलन के एक हिस्से में हमने उस समय की विधियों से कई प्रकार के ऐसे भोजन बनाए जो उन दिनों में प्रचलित रहे होंगे। हमने दालचीनी और फलों को कूट कर जैम बनाने के लिए इमामदस्ते का प्रयोग किया; सन्तरे के छिलके को शहद और अदरक के साथ पका कर मीठा नाशता बनाया; बादाम को पानी और अन्य वस्तुओं के साथ कुचलकर बादाम का दूध बनाया; और चावल के साथ खाने के लिए एक पूरे मुर्गे को मुख्य भोजन के लिए पकाया। इन सभी भोजनों को तैयार कर के हम ने उन के स्वाद के अनुभव का आनन्द भी लिया।

   जब बात हमारे प्राणों के लिए आत्मिक भोजन की आती है तो, परमेश्वर ने अपने वचन बाइबल में हमें विविध प्रकार के वयंजनों का संकलन दिया है, जिन्हें हम समय तथा आवश्यकतानुसार प्रयोग में लाकर उनका लाभ पा सकें। ऐसा करने से हम ना केवल तृप्त एवं संतुष्ट होंगे, वरन विभिन्न परिस्थितियों का सामना करने के लिए आत्मिक बल-बुद्धि-सामर्थ भी प्राप्त करेंगे। बाइबल के विभिन्न अंश, जैसे इतिहास की पुस्तकें, भजन और काव्य, बुद्धिमता की शिक्षाएं, भविष्यवाणियाँ इत्यादि हमें कमज़ोरी के समयों में बल देती हैं; हमारी आवश्यकतानुसार हमें बुद्धिमता और प्रोत्साहन देती हैं (भजन 19:7-14; 119:97-104; इब्रानियों 5:12)। जैसा कि भजनकार कहता है: "तेरे वचन मुझ को कैसे मीठे लगते हैं, वे मेरे मुंह में मधु से भी मीठे हैं!" (भजन 119:103)

   परमेश्वर ने हम सब के लिए अपनी दावत तैयार करके सजाई हुई है; समस्त मानव जाति के लिए उसका खुला निमंत्रण है कि सब उसके पास आएं और उसकी दावत में शामिल हों, उसके व्यंजनों का आनन्द लें। तो अब देर किस बात की है? - डेनिस फिशर


बाइबल जीवन की वह रोटी है जो कभी बासी नहीं होती।

क्योंकि बुद्धि यहोवा ही देता है; ज्ञान और समझ की बातें उसी के मुंह से निकलती हैं। वह सीधे लोगों के लिये खरी बुद्धि रख छोड़ता है; जो खराई से चलते हैं, उनके लिये वह ढाल ठहरता है। वह न्याय के पथों की देख भाल करता, और अपने भक्तों के मार्ग की रक्षा करता है। - नीतिवचन 2:6-8

बाइबल पाठ: भजन 19:7-14
Psalms 19:7 यहोवा की व्यवस्था खरी है, वह प्राण को बहाल कर देती है; यहोवा के नियम विश्वासयोग्य हैं, साधारण लोगों को बुद्धिमान बना देते हैं; 
Psalms 19:8 यहोवा के उपदेश सिद्ध हैं, हृदय को आनन्दित कर देते हैं; यहोवा की आज्ञा निर्मल है, वह आंखों में ज्योति ले आती है; 
Psalms 19:9 यहोवा का भय पवित्र है, वह अनन्तकाल तक स्थिर रहता है; यहोवा के नियम सत्य और पूरी रीति से धर्ममय हैं। 
Psalms 19:10 वे तो सोने से और बहुत कुन्दन से भी बढ़कर मनोहर हैं; वे मधु से और टपकने वाले छत्ते से भी बढ़कर मधुर हैं। 
Psalms 19:11 और उन्हीं से तेरा दास चिताया जाता है; उनके पालन करने से बड़ा ही प्रतिफल मिलता है। 
Psalms 19:12 अपनी भूलचूक को कौन समझ सकता है? मेरे गुप्त पापों से तू मुझे पवित्र कर। 
Psalms 19:13 तू अपने दास को ढिठाई के पापों से भी बचाए रख; वह मुझ पर प्रभुता करने न पाएं! तब मैं सिद्ध हो जाऊंगा, और बड़े अपराधों से बचा रहूंगा।
Psalms 19:14 मेरे मुंह के वचन और मेरे हृदय का ध्यान तेरे सम्मुख ग्रहण योग्य हों, हे यहोवा परमेश्वर, मेरी चट्टान और मेरे उद्धार करने वाले!

एक साल में बाइबल: 
  • सभोपदेशक 7-9
  • 2 कुरिन्थियों 13


Tuesday, September 20, 2016

सच्चा विश्वास


   परमेश्वर के वचन बाइबल का एक पात्र है राजा योआश। उसके शिशु काल में ही उसकी दादी अथालिया ने उसके अन्य भईयों को मरवा कर यहूदा की राज-गद्दी हथिया ली थी। लेकिन योआश को उसकी फूफी और फूफा ने अपने पास छः वर्ष तक सुरक्षित छुपाए रखा (2 इतिहास 22:10-12)। योआश उनके प्रेम और संरक्षण में बड़ा हुआ और जब वह सात वर्ष का हुआ तब अथालिया का तख्ता पलट करके और उसका राज्याभिषेक करके उसे राजा बना दिया गया। राजा योआश के साथ उसके फूफा, यहोयादा के रूप में एक बुद्धिमान सलाहकार था जो परमेश्वर के भय में चलता था और उसे भी वैसे ही चलना सिखाता था। योआश यहूदा के गिने-चुने "अच्छे राजाओं" में से एक था, और जब तक उसके फूफा जीवित थे वह परमेश्वर के भय में चलता रहा और सही कार्य करता रहा (2 इतिहास 24:2)। लेकिन अपने फूफा के मृत्योपरांत, जब उसके साथ परमेश्वर के भय में चलने और सिखाने वाला कोई नहीं रहा तो योआश भी परमेश्वर से दूर हो गया, मूर्तिपूजा में पड़ गया और उसके जीवन का अन्त बहुत दुःखदायी हुआ (2 इतिहास 24:15-25)। ऐसा लगता है कि योआश के परमेश्वर में विश्वास की जड़ें कुछ खास गहरी नहीं थीं; संभवतः परमेश्वर में विश्वास योआश का नहीं वरन उसके फूफा का था जिनका बस वह ऊपरी रीति से अनुसरण कर रहा था, और उनके जाने के बाद योआश अपने विश्वास में स्थिर बना नहीं रह सका।

   हो सकता है कि लोग हमें अपने मसीही विश्वास के आधार के बारे में सिखा सकें, परन्तु हम में से प्रत्येक को स्वयं स्वेच्छा और सच्चे समर्पण के साथ मसीह यीशु के साथ संबंध स्थापित करना है, विश्वास में आना है, तब ही परमेश्वर के साथ हमारा संबंध सही होगा। यह वास्तविक मसीही विश्वास किसी परिवार-विशेष में जन्म ले लेने या कुछ विधि-विधानों को पूरा करने या फिर कोई रीति-रिवाज़ों-त्यौहारों को मानने से नहीं मिलता। जब हम सच्चे समर्पण तथा पापों के अंगीकार तथा उन की क्षमा के लिए प्रभु यीशु मसीह के पास आते हैं, तब ही हम मसीह यीशु के सच्चे अनुयायी और परमेश्वर की सन्तान, तथा उसकी स्वर्गीय आशीषों के संभागी बनते हैं (यूहन्ना 1:12-13)। - सिंडी हैस कैस्पर


जो विश्वास अन्त तक स्थिर बना रहता 
वही प्रमाणित करता है कि वह आरंभ से ही वास्तविक रहा है।

परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं। - यूहन्ना 1:12-13

बाइबल पाठ: 2 इतिहास 24:15-25
2 Chronicles 24:15 परन्तु यहोयादा बूढ़ा हो गया और दीर्घायु हो कर मर गया। जब वह मर गया तब एक सौ तीस वर्ष का था। 
2 Chronicles 24:16 और दाऊदपुर में राजाओं के बीच उसको मिट्टी दी गई, क्योंकि उसने इस्राएल में और परमेश्वर के और उसके भवन के विषय में भला किया था। 
2 Chronicles 24:17 यहोयादा के मरने के बाद यहूदा के हाकिमों ने राजा के पास जा कर उसे दण्डवत की, और राजा ने उनकी मानी। 
2 Chronicles 24:18 तब वे अपने पितरों के परमेश्वर यहोवा का भवन छोड़कर अशेरों और मूरतों की उपासना करने लगे। सो उनके ऐसे दोषी होने के कारण परमेश्वर का क्रोध यहूदा और यरूशलेम पर भड़का। 
2 Chronicles 24:19 तौभी उसने उनके पास नबी भेजे कि उन को यहोवा के पास फेर लाएं; और इन्होंने उन्हें चिता दिया, परन्तु उन्होंने कान न लगाया। 
2 Chronicles 24:20 और परमेश्वर का आत्मा यहोयादा याजक के पुत्र जकर्याह में समा गया, और वह ऊंचे स्थान पर खड़ा हो कर लोगों से कहने लगा, परमेश्वर यों कहता है, कि तुम यहोवा की आज्ञाओं को क्यों टालते हो? ऐसा कर के तुम भाग्यवान नहीं हो सकते, देखो, तुम ने तो यहोवा को त्याग दिया है, इस कारण उसने भी तुम को त्याग दिया। 
2 Chronicles 24:21 तब लोगों ने उस से द्रोह की गोष्ठी कर के, राजा की आज्ञा से यहोवा के भवन के आंगन में उसको पत्थरवाह किया। 
2 Chronicles 24:22 यों राजा योआश ने वह प्रीति भूल कर जो यहोयादा ने उस से की थी, उसके पुत्र को घात किया। और मरते समय उसने कहा यहोवा इस पर दृष्टि कर के इसका लेखा ले।
2 Chronicles 24:23 नए वर्ष के लगते अरामियों की सेना ने उस पर चढ़ाई की, और यहूदा ओर यरूशलेम आकर प्रजा में से सब हाकिमों को नाश किया और उनका सब धन लूट कर दमिश्क के राजा के पास भेजा। 
2 Chronicles 24:24 अरामियों की सेना थोड़े ही पुरुषों की तो आई, पन्तु यहोवा ने एक बहुत बड़ी सेना उनके हाथ कर दी, क्योंकि उन्होंने अपने पितरों के परमेश्वर को त्याग दिया था। और योआश को भी उन्होंने दण्ड दिया।
2 Chronicles 24:25 और जब वे उसे बहुत ही रोगी छोड़ गए, तब उसके कर्मचारियों ने यहोयादा याजक के पुत्रों के खून के कारण उस से द्रोह की गोष्ठी कर के, उसे उसके बिछौने पर ही ऐसा मारा, कि वह मर गया; और उन्होंने उसको दाऊद पुर में मिट्टी दी, परन्तु राजाओं के कब्रिस्तान में नहीं।

एक साल में बाइबल: 
  • सभोपदेशक 4-6
  • 2 कुरिन्थियों 12


Monday, September 19, 2016

जान-पहचान


   हमारा सबसे कठिन अन्तर्द्वन्द होता है हमारी इस इच्छा कि लोग हमें जाने, तथा हमारे भय के कि पहचान लिए जाने पर कुछ अप्रत्याशित तो नहीं हो जाएगा, के मध्य। क्योंकि परमेश्वर ने हमें अपने स्वरूप में रचा है, इसलिए हम जाने और पहचाने जाने के लिए हैं - परमेश्वर द्वारा भी, और अन्य लोगों के द्वारा भी। परन्तु फिर भी हमारे पतित स्वभाव के कारण हमारे जीवनों में ऐसी कमज़ोरियाँ और पाप होते हैं जिन्हें हम नहीं चाहते कि कोई जाने या पहचाने। हम अपने जीवन के कुछ "गहरे" या "दुःखद" भागों एवं पहलुओं को छुपा कर रखना चाहते हैं; और दूसरों को प्रोत्साहित करते हैं कि वे अपने जीवन के सबसे अच्छे भाग या पहलू को प्रगट करें।

   हमारे द्वारा अपने जाने या पहचाने जाने का जोखिम ना उठाने का एक कारण होता है उसके बाद होने वाले तिरिस्कार और उपहास की संभावना। लेकिन जब परमेश्वर के वचन बाइबल के आधार पर हम यह जानने लगते हैं कि परमेश्वर हमें भली-भांति, अन्दर-बाहर से जानता है, हमारी कोई भी बात उससे छुपी नहीं है, लेकिन फिर भी वह हम से प्रेम करता है, हमारे बुरे से बुरे कार्य एवं पाप के बावजूद वह हमें क्षमा करके अपनी सन्तान, अपने परिवार का एक अंग बनाना चाहता है तो परमेश्वर द्वारा तिरिस्कृत होने का हमारा भय हटना आरंभ हो जाता है। और जब हम उसकी क्षमा के इस प्रस्ताव को स्वीकार करके, उससे अपने पापों की क्षमा माँग लेते हैं, अपने जीवन प्रभु यीशु को समर्पित कर देते हैं, तो वह हमें अन्य मसीही विश्वासियों की मण्डली में जोड़ देता है, जो हमारे समान ही क्षमा प्राप्त करके प्रभु के जन बने हैं, जो पापों के अंगीकार और क्षमा के संबंध को व्यक्तिगत अनुभव से जानते और समझते हैं। अब ऐसे लोगों की संगति में रहकर हम अपने पाप और कमज़ोरियों को एक दूसरे के सामने स्वीकार कर लेने, उनके लिए क्षमा माँग लेने से हिचकिचाते नहीं हैं।

   मसीही विश्वास का जीवन, संसार के अन्य लोगों की प्रवृत्ति के विपरीत, केवल हमारे जीवन के भले पहलुओं और भली बातों को दूसरों के सामने रखने से संबंधित नहीं है। इस मसीही विश्वास के जीवन में हम अपने जीवन के उन "गहरे" या "दुःखद" भागों एवं पहलुओं को भी लोगों के समक्ष लाते हैं, और इस बात की गवाही देते हैं कि जब हमने इन "गहरे" या "दुःखद" भागों एवं पहलुओं को प्रभु यीशु में लाए गए विश्वास के द्वारा परमेश्वर के सामने रखा और उससे उनके लिए क्षमा माँगी, तो उसने ना केवल हमें क्षमा किया, वरन हमारे उन "गहरे" या "दुःखद" भागों एवं पहलुओं को ही हमारे तथा अन्य लोगों के लिए लाभ की बात बना दिया। प्रभु यीशु के साथ इस प्रकार होने वाली जान-पहचान द्वारा मसीही विश्वास में आत्मिक चंगाई और क्षमा से मिली स्वतंत्रता के आनन्द को पाने का यही मार्ग है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


पाप की आवाज़ ऊँची हो सकती है, परन्तु क्षमा की आवाज़ उससे भी ऊँची होती है।

जब मैं ने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया और अपना अधर्म न छिपाया, और कहा, मैं यहोवा के साम्हने अपने अपराधों को मान लूंगा; तब तू ने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया। - भजन 32:5

बाइबल पाठ: याकूब 5:16-20
James 5:16 इसलिये तुम आपस में एक दूसरे के साम्हने अपने अपने पापों को मान लो; और एक दूसरे के लिये प्रार्थना करो, जिस से चंगे हो जाओ; धर्मी जन की प्रार्थना के प्रभाव से बहुत कुछ हो सकता है। 
James 5:17 एलिय्याह भी तो हमारे समान दुख-सुख भोगी मनुष्य था; और उसने गिड़िगड़ा कर प्रार्थना की; कि मेंह न बरसे; और साढ़े तीन वर्ष तक भूमि पर मेंह नहीं बरसा। 
James 5:18 फिर उसने प्रार्थना की, तो आकाश से वर्षा हुई, और भूमि फलवन्‍त हुई।
James 5:19 हे मेरे भाइयों, यदि तुम में कोई सत्य के मार्ग से भटक जाए, और कोई उसको फेर लाए। 
James 5:20 तो वह यह जान ले, कि जो कोई किसी भटके हुए पापी को फेर लाएगा, वह एक प्राण को मृत्यु से बचाएगा, और अनेक पापों पर परदा डालेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • सभोपदेशक 1-3
  • 2 कुरिन्थियों 11:16-33