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Friday, January 11, 2013

अभी क्यों नहीं?


   मेरा एक प्रीय मित्र है जिसने कई वर्ष तक एक छोटे और अनजाने से देश सुरीनाम में मसीही सेवाकाई करी, परन्तु अपने अन्तिम वर्षों में उसे लकवा मार गया। अपनी इस लकवे की दशा में कई बार उसके मन में विचार आता था कि परमेश्वर क्यों उसे अपने पास बुला नहीं लेता; उसके इस प्रकार निषक्रीय जीवन में लटके रहने का क्या उद्देश्य है? उसकी प्रबल इच्छा रहती थी कि वह शरीर से अलग होकर अपने प्रभु से जा मिले।

   हो सकता है कि आपके लिए या आपके किसी मित्र के लिए जीवन बहुत कठिन अथवा दुखदाई हो और आप भी विचार करते हों कि क्यों परमेश्वर ने आपको या आपके प्रीय जन को ऐसे लटका रखा है? जब प्रभु यीशु ने अपने चेलों से कहा कि वह स्वर्ग जाने पर है तो उसके एक चेले पतरस ने प्रश्न किया: "...हे प्रभु, अभी मैं तेरे पीछे क्यों नहीं आ सकता? मैं तो तेरे लिये अपना प्राण दूंगा" (यूहन्ना १३:३७)। पतरस के समान आप भी यह विचार कर सकते हैं कि स्वर्ग में आपका प्रवेश अभी रुका हुआ क्यों हैं तथा प्रश्न कर सकते हैं, "प्रभु, अभी क्यों नहीं?"

   हमें अभी यहीं इस पृथ्वी पर रखने में परमेश्वर के कुछ बुद्धिमता तथा प्रेम से भरे कारण हैं - अभी कुछ कार्य पूरा होना बाकी है जो हमारे द्वारा ही तथा इस पृथ्वी पर ही होना संभव है। हमारे कष्ट जो हमें विचलित करते हैं, उन का भी उद्देश्य है: "क्योंकि हमारा पल भर का हल्का सा क्‍लेश हमारे लिये बहुत ही महत्‍वपूर्ण और अनन्त महिमा उत्पन्न करता जाता है" (२ कुरिन्थियों ४:१७)। हमारे द्वारा अन्य लोगों के लिए कुछ करना भी शेष है, चाहे वह केवल उनके लिए प्रार्थना करना और उनके प्रति प्रेम दिखाना ही हो। हमारी पृथ्वी पर उपस्थिति कुछ लोगों के लिए मसीही प्रेम, करुणा और जीवन के बारे में सीखने का अवसर एवं उदाहरण भी हो सकता है।

   इसलिए चाहे आप अपने या किसी प्रीय जन के लिए संसार से छुटकारा चाह सकते हैं, लेकिन पृथ्वी पर बने रहना आपके या उस प्रीय जन के लिए आशीश की भरपूरी का कारण हो सकता है (फिलिप्पियों १:२१)। प्रतीक्षा में सांत्वना इसी बात से है कि इसमें परमेश्वर के उद्देश्य हैं; ऐसे उद्देश्य जो ना केवल हमारी वरन कई अन्य लोगों की भलाई के लिए हैं। - डेविड रोपर


हमारी सबसे बड़ी सांत्वना यही है कि परमेश्वर सदैव ही नियंत्रण में है।

...दाऊद तो परमेश्वर की इच्छा के अनुसार अपने समय में सेवा कर के सो गया; और अपने बाप दादों में जा मिला...। - प्रेरितों १३:३६

बाइबल पाठ: यूहन्ना १३:३३-३८
John 13:33  हे बालकों, मैं और थोड़ी देर तुम्हारे पास हूं: फिर तुम मुझे ढूंढोगे, और जैसा मैं ने यहूदियों से कहा, कि जहां मैं जाता हूं, वहां तुम नहीं आ सकते वैसा ही मैं अब तुम से भी कहता हूं।
John 13:34  मैं तुम्हें एक नई आज्ञा देता हूं, कि एक दूसरे से प्रेम रखो: जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा है, वैसा ही तुम भी एक दुसरे से प्रेम रखो।
John 13:35  यदि आपस में प्रेम रखोगे तो इसी से सब जानेंगे, कि तुम मेरे चेले हो।
John 13:36  शमौन पतरस ने उस से कहा, हे प्रभु, तू कहां जाता है? यीशु ने उत्तर दिया, कि जहां मैं जाता हूं, वहां तू अब मेरे पीछे आ नहीं सकता! परन्तु इस के बाद मेरे पीछे आएगा।
John 13:37  पतरस ने उस से कहा, हे प्रभु, अभी मैं तेरे पीछे क्यों नहीं आ सकता? मैं तो तेरे लिये अपना प्राण दूंगा।
John 13:38  यीशु ने उत्तर दिया, क्या तू मेरे लिये अपना प्राण देगा? मैं तुझ से सच सच कहता हूं कि मुर्ग बांग न देगा जब तक तू तीन बार मेरा इन्कार न कर लेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति २७-२८ 
  • मत्ती ८:१८-३४