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Thursday, August 8, 2013

प्रेम

   मेरा एक अच्छा मित्र है जिसके साथ मैं कभी कभी मछली पकड़ने चला जाता हूँ। मेरा यह मित्र बहुत विचारशील भी है। जब भी हम मछली पकड़ने जाते हैं, नदी पर पहुँच कर वह पानी में खड़े होने के अपने जूते और कपड़े पहन कर अपनी गाड़ी के पिछले भाग पर बैठ जाता है और लगभग 15 मिनिट या और भी अधिक समय तक पानी की बारीकी से जाँच करता रहता है यह जानने के लिए कि मछलियाँ कहाँ पर उछल रही हैं। उसका कहना और मानना है कि "जहाँ मछलियाँ हैं ही नहीं वहाँ बंसी डालने से क्या फायदा?" उसके इस दृष्टिकोण से मैं एक और बात के बारे में सोचने को बाध्य हुआ - "क्या मैं प्रभु यीशु के लिए वहाँ आत्माएं ढ़ूँढ़ता हूँ जहाँ वे हैं ही नहीं?"

   प्रभु यीशु के लिए कहा जाता था कि वह "...चुंगी लेने वालों का और पापियों का मित्र" (लूका 7:34)। प्रभु यीशु के अनुयायी और मसीही विश्वासी होने के नाते हमें अपने व्यवहार में संसार से पृथक लेकिन फिर भी संसार में विद्यमान जीवन बिताना है, जैसा हमारे प्रभु और उद्धारकर्ता ने किया। इसलिए हमें अपने आप से यह प्रश्न भी पूछना होगा, "क्या प्रभु यीशु के समान ही मेरे मित्रगणों में भी अविश्वासी और सांसारिक लोग हैं? यदि हम केवल मसीही विश्वासियों ही में अपनी मित्र मण्डली बनाते हैं तो हम भी प्रभु के लिए आत्माएं वहाँ खोजने वाले होंगे जहाँ वे हैं ही नहीं।"

   यदि प्रभु यीशु के निकट आत्माओं को लाना है तो अविश्वासियों के साथ रहना इस दिशा में पहला कदम है। इसके पश्चात आता है प्रेम - एक सच्चा और खरा प्रेम जो उनसे उनकी कमियों, खामियों और सांसारिक व्यवहार के बावजूद बना रहता है; जो उनका आलोचक अथवा निन्दक नहीं वरन सहायक होता है। एक ऐसा प्रेम जो उनके बाहरी व्यवहार के नीचे छिपी प्यासी आत्मा की आवाज़ को सुनता है और उस प्यास को बुझाने के लिए जीवन का जल उन्हें देता है - जैसा प्रभु यीशु ने किया। पास्टर जॉर्ज हर्बर्ट (1593-1633) ने इस प्रकार की मित्रता के संबंध में कहा था, "ऐसे मित्र भाव में बहुत उपदेश और शिक्षा होती है।"

   ऐसा सच्चा और खरा प्रेम करना एक सामान्य मानवीय प्रवृति नहीं है, यह सामर्थ केवल परमेश्वर से ही मिलती है। इसलिए हम मसीही विश्वासियों की प्रार्थना रहनी चाहिए: "प्रभु, आज जब मैं अविश्वासियों के साथ रहूँ तो मैं अपनी व्यस्तता में उन्हें नज़रंदाज़ ना करूँ, वरन उनकी आवश्यकताएं और प्यासी आत्मा की आवाज़ के प्रति संवेदनशील रह सकूँ। मैं भी उनके प्रति वैसा ही प्रेम रख सकूँ जैसा आपने रखा, उन्हें वैसी ही अनुकंपा दिखा सकूँ जैसी आपने दिखाई और आपके वचन के जीवन दायक सत्य और शांति को उन के साथ बाँट सकूँ।" - डेविड रोपर


हम प्रभु यीशु के प्रेम और सत्य को संसार में प्रवाहित करने वाली धारा होने के लिए बुलाए गए हैं, उन गुणों को अपने में सीमित रख लेने वाले कुँड होने के लिए नहीं।

फिर किसी फरीसी ने उस से बिनती की, कि मेरे साथ भोजन कर; सो वह उस फरीसी के घर में जा कर भोजन करने बैठा। - लूका 7:36

बाइबल पाठ: लूका 7:34-48
Luke 7:34 मनुष्य का पुत्र खाता-पीता आया है; और तुम कहते हो, देखो, पेटू और पियक्‍कड़ मनुष्य, चुंगी लेने वालों का और पापियों का मित्र।
Luke 7:35 पर ज्ञान अपनी सब सन्‍तानों से सच्चा ठहराया गया है।
Luke 7:36 फिर किसी फरीसी ने उस से बिनती की, कि मेरे साथ भोजन कर; सो वह उस फरीसी के घर में जा कर भोजन करने बैठा।
Luke 7:37 और देखो, उस नगर की एक पापिनी स्त्री यह जानकर कि वह फरीसी के घर में भोजन करने बैठा है, संगमरमर के पात्र में इत्र लाई।
Luke 7:38 और उसके पांवों के पास, पीछे खड़ी हो कर, रोती हुई, उसके पांवों को आंसुओं से भिगाने और अपने सिर के बालों से पोंछने लगी और उसके पांव बारबार चूमकर उन पर इत्र मला।
Luke 7:39 यह देखकर, वह फरीसी जिसने उसे बुलाया था, अपने मन में सोचने लगा, यदि यह भविष्यद्वक्ता होता तो जान लेता, कि यह जो उसे छू रही है, वह कौन और कैसी स्त्री है? क्योंकि वह तो पापिनी है।
Luke 7:40 यह सुन यीशु ने उसके उत्तर में कहा; कि हे शमौन मुझे तुझ से कुछ कहना है वह बोला, हे गुरू कह।
Luke 7:41 किसी महाजन के दो देनदार थे, एक पांच सौ, और दूसरा पचास दीनार धारता था।
Luke 7:42 जब कि उन के पास पटाने को कुछ न रहा, तो उसने दोनों को क्षमा कर दिया: सो उन में से कौन उस से अधिक प्रेम रखेगा।
Luke 7:43 शमौन ने उत्तर दिया, मेरी समझ में वह, जिस का उसने अधिक छोड़ दिया: उसने उस से कहा, तू ने ठीक विचार किया है।
Luke 7:44 और उस स्त्री की ओर फिरकर उसने शमौन से कहा; क्या तू इस स्त्री को देखता है मैं तेरे घर में आया परन्तु तू ने मेरे पांव धाने के लिये पानी न दिया, पर इस ने मेरे पांव आंसुओं से भिगाए, और अपने बालों से पोंछा!
Luke 7:45 तू ने मुझे चूमा न दिया, पर जब से मैं आया हूं तब से इस ने मेरे पांवों का चूमना न छोड़ा।
Luke 7:46 तू ने मेरे सिर पर तेल नहीं मला; पर इस ने मेरे पांवों पर इत्र मला है।
Luke 7:47 इसलिये मैं तुझ से कहता हूं; कि इस के पाप जो बहुत थे, क्षमा हुए, क्योंकि इस ने बहुत प्रेम किया; पर जिस का थोड़ा क्षमा हुआ है, वह थोड़ा प्रेम करता है।
Luke 7:48 और उसने स्त्री से कहा, तेरे पाप क्षमा हुए।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 74-76 
  • रोमियों 9:16-33