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बुधवार, 16 जून 2021

जानकारी

 

          मेरे बेटे ने पिछली सीट से पूछा, “पापा, समय क्या हुआ है”, और मैंने उत्तर दिया “5:30 बजे हैं” मैं जानता था कि अब वह आगे क्या कहेगा, और उसने वही कहा, “नहीं, अभी 5:28 बजा है।” उसके चेहरे की बड़ी से मुस्कराहट कह रही थी, “देखा! मैंने आपकी गलती पकड़ ली।” मैं भी आनन्दित था – उस आनन्द से जो अपने बच्चों के बारे में जानकारी रखने से माता-पिता को होता है।

          किसी भी अन्य ध्यान रखने वाले माता-पिता के समान, मैं अपने बच्चों को जानता हूँ। मुझे जानकारी है कि उन्हें सोते से उठाने पर वो क्या कहेंगे। मुझे जानकारी है कि उन्हें उनके भोजन में क्या चाहिए। मुझे उनकी बहुत सी अन्य बातों की जानकारी है – उनकी रुचि, अभिलाषाएँ, पसंद आदि, सब की। लेकिन यह सब होते हुए भी, मैं उन्हें कभी वैसे अन्दर-बाहर से नहीं जानने पाऊँगा, जैसे हमारा प्रभु परमेश्वर हमें जानता है।

          हम परमेश्वर के वचन बाइबल में, यूहन्ना 1 में उसकी उस घनिष्ठ जानकारी की एक झलक देखते हैं, जो प्रभु हमारे बारे में रखता है। जब नतनएल, फिलिप्पुस के कहने पर , प्रभु यीशु से मिलने के लिए आगे बढ़ा, तो प्रभु यीशु ने उसके लिए कहा, “...देखो, यह सचमुच इस्राएली है: इस में कपट नहीं” (पद 47)। यह सुनकर नतनएल अचंभित रह गया, और उसने पूछा, “तू मुझे कहां से जानता है? ” प्रभु यीशु ने रहस्यमय भाव से उत्तर दिया कि उसने नतनएल को अंजीर के पेड़ के नीचे देख लिया था (पद 48)।

          हमें यह तो नहीं पता है कि प्रभु यीशु ने इस ख़ास बात को नतनएल को क्यों बताया, लेकिन शायद नतनएल उसके यह कहने से कुछ समझ गया! वह अभिभूत होकर प्रत्युत्तर दिया, “... हे रब्बी, तू परमेश्वर का पुत्र है; तू इस्राएल का महाराजा है” (पद 49)।

          प्रभु यीशु हम में से प्रत्येक को बहुत घनिष्ठता से, पूर्णतः, और सिद्ध रीति से जानता है; हमारी हर बात उसे पता है। और हम जैसे भी हैं, वह हमें वैसा ही स्वीकार करता है। यद्यपि उसके पास हमारे अन्दर-बाहर की पूरी जानकारी है, फिर भी उसका हमें खुला निमंत्रण है कि हम न केवल उसके अनुयायी बनें, वरन उसके प्रिय मित्र भी (यूहन्ना 15:15)। - एडम होल्ज़

 

हे प्रभु मुझे अच्छे से जानते हुए भी, मुझे अपना मित्र बना लेने के लिए आपका बहुत धन्यवाद।


अब से मैं तुम्हें दास न कहूंगा, क्योंकि दास नहीं जानता, कि उसका स्वामी क्या करता है: परन्तु मैं ने तुम्हें मित्र कहा है, क्योंकि मैं ने जो बातें अपने पिता से सुनीं, वे सब तुम्हें बता दीं। - यूहन्ना 15:15

बाइबल पाठ: यूहन्ना 1:43-51

यूहन्ना 1:43 दूसरे दिन यीशु ने गलील को जाना चाहा; और फिलिप्पुस से मिलकर कहा, मेरे पीछे हो ले।

यूहन्ना 1:44 फिलिप्पुस तो अन्द्रियास और पतरस के नगर बैतसैदा का निवासी था।

यूहन्ना 1:45 फिलिप्पुस ने नतनएल से मिलकर उस से कहा, कि जिस का वर्णन मूसा ने व्यवस्था में और भविष्यद्वक्ताओं ने किया है, वह हम को मिल गया; वह यूसुफ का पुत्र, यीशु नासरी है।

यूहन्ना 1:46 नतनएल ने उस से कहा, क्या कोई अच्छी वस्तु भी नासरत से निकल सकती है? फिलिप्पुस ने उस से कहा, चलकर देख ले।

यूहन्ना 1:47 यीशु ने नतनएल को अपनी ओर आते देखकर उसके विषय में कहा, देखो, यह सचमुच इस्राएली है: इस में कपट नहीं।

यूहन्ना 1:48 नतनएल ने उस से कहा, तू मुझे कहां से जानता है? यीशु ने उसको उत्तर दिया; उस से पहिले कि फिलिप्पुस ने तुझे बुलाया, जब तू अंजीर के पेड़ के तले था, तब मैं ने तुझे देखा था।

यूहन्ना 1:49 नतनएल ने उसको उत्तर दिया, कि हे रब्बी, तू परमेश्वर का पुत्र है; तू इस्राएल का महाराजा है।

यूहन्ना 1:50 यीशु ने उसको उत्तर दिया; मैं ने जो तुझ से कहा, कि मैं ने तुझे अंजीर के पेड़ के तले देखा, क्या तू इसी लिये विश्वास करता है? तू इस से बड़े बड़े काम देखेगा।

यूहन्ना 1:51 फिर उस से कहा, मैं तुम से सच सच कहता हूँ कि तुम स्वर्ग को खुला हुआ, और परमेश्वर के स्‍वर्गदूतों को ऊपर जाते और मनुष्य के पुत्र के ऊपर उतरते देखोगे।

 

एक साल में बाइबल: 

  • नहेम्याह 4-6
  • प्रेरितों 2:22-47


शुक्रवार, 28 मई 2021

साथ

 

          इंडोनेशिया के पास्टरों के लिए एक बाइबल मार्गदर्शिका को लिखते समय मेरा एक लेखक मित्र वहाँ के लोगों की एक-दूसरे के साथ रहने की संस्कृति से बहुत प्रभावित हुआ। वहाँ की भाषा में इसे ‘गोटोंग-रोयोंग’ कहते हैं, जिसका अर्थ होता है परस्पर सहायता। इस प्रथा का पालन गाँवों में भी होता है, जिसके अंतर्गत पड़ौसी साथ मिलकर किसी की छत की मरम्मत करते हैं, या कोई पुल अथवा सड़क को बनाते हैं। शहरों में भी, मेरे मित्र ने बताया, “लोग हमेशा एक-दूसरे के साथ जाते हैं – उदाहरण के लिए, किसी चिकित्सक के पास। ये वहाँ की संस्कृति का नियम है। इसलिए कोई भी कभी भी अकेला नहीं होता है।”

          सारे संसार भर में मसीही विश्वासी भी इस बात में आनन्दित होते हैं कि वे कभी भी अकेले नहीं हैं। हम सभी मसीही विश्वासियों के साथ परमेश्वर का पवित्र आत्मा सदा ही बना रहता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखा है कि हमारे परमेश्वर पिता ने हमें अपना आत्मा केवल हमारा मित्र बनकर रहने के लिए ही नहीं दिया है, लेकिन हमारा सहायक और मार्गदर्शक होने के लिए दिया है (यूहन्ना 14:16))।

          प्रभु यीशु मसीह ने शिष्यों से यह वायदा किया कि पृथ्वी पर उनके समय के पूरा हो जाने के बाद भी प्रभु अपने अनुयायियों को अकेला नहीं छोड़ेगा (पद 18)। वरन परमेश्वर का पवित्र आत्मा, जो सत्य का आत्मा है, उनके साथ और उनमें, जिन्होंने प्रभु यीशु को अपना निज उद्धारकर्ता ग्रहण कर लिया है, उसे जीवन समर्पित कर दिया है, सदा बना रहेगा (पद 17)। परमेश्वर पवित्र आत्मा मसीही विश्वासियों का सहायक, सांत्वना देने वाला, प्रोत्साहित करने वाला, और सलाहकार है – हमारा हमेशा का साथी, इस संसार में, जहाँ परस्पर संबंधित लोगों के होते हुए भी एकाकीपन घेर सकता है, वह हमारा कभी हमसे दूर न होने वाला साथी है। हम प्रभु की ओर से हमें मिले इस अद्भुत सहायक के दिलासा देने वाले प्रेम, सहायता और मार्गदर्शन में सदा चलते रहें; उसके साथ के अनुभव में बने रहें। - पेट्रीशिया रेबौन

 

हमारा सर्व-सामर्थी सहायक, परमेश्वर पवित्र आत्मा सदा हमारे साथ बना रहता है।


परन्तु जब वह अर्थात सत्य का आत्मा आएगा, तो तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा, क्योंकि वह अपनी ओर से न कहेगा, परन्तु जो कुछ सुनेगा, वही कहेगा, और आनेवाली बातें तुम्हें बताएगा। - यूहन्ना 16:13

बाइबल पाठ: यूहन्ना 14:15-18

यूहन्ना 14:15 यदि तुम मुझ से प्रेम रखते हो, तो मेरी आज्ञाओं को मानोगे।

यूहन्ना 14:16 और मैं पिता से बिनती करूंगा, और वह तुम्हें एक और सहायक देगा, कि वह सर्वदा तुम्हारे साथ रहे।

यूहन्ना 14:17 अर्थात सत्य का आत्मा, जिसे संसार ग्रहण नहीं कर सकता, क्योंकि वह न उसे देखता है और न उसे जानता है: तुम उसे जानते हो, क्योंकि वह तुम्हारे साथ रहता है, और वह तुम में होगा।

यूहन्ना 14:18 मैं तुम्हें अनाथ न छोडूंगा, मैं तुम्हारे पास आता हूं।

 

एक साल में बाइबल: 

  • 2 इतिहास 4-6
  • यूहन्ना 10:24-42

सोमवार, 10 मई 2021

मित्र

 

          उसके पति के देहांत के बाद से बेट्सी अपने अधिकांश दिन अपने घर में अकेले ही बिताती है, टेलीविज़न देखने में या अपने लिए चाय बनाने में अपना समय बिताती है। इस एकाकीपन में वह अकेली नहीं है। अनुमान है कि ब्रिटेन की आबादी के लगभग पंद्रह प्रतिशत से अधिक लोग यह कहते हैं कि वे अपने को अधिकांशतः या हमेशा अकेला अनुभव करते हैं। इस कारण ब्रिटेन की सरकार ने इस अकेलेपन के कारण और उनका निवारण ढूँढने के लिए एक मंत्री को भी नियुक्त किया है।

          अकेलेपन के कुछ कारण तो सबको पता हैं: हम एक से दूसरे स्थान घर बदलते रहते हैं, और कहीं जड़ें नहीं जमाने पाते हैं। कुछ लोगों को लगता है कि वे अपनी देखभाल स्वयं कर सकते हैं, और उन्हें किसी की ओर हाथ बढ़ाने की कोई आवश्यकता अनुभव नहीं होती है। बहुतेरों को आधुनिक तकनीकी और उपकरणों ने वश में कर रखा है, और वे अपने फोन या कंप्यूटर या टी.वी. को ही देखते रहते हैं। सभी के पास अपने अकेलेपन के अपने ही कारण हैं।

          मुझे इस अकेलेपन के अन्धकार का खतरा अनुभव होता है, और हो सकता है कि आपको भी होता हो। इसीलिए हमें मित्रों की आवश्यकता है; हम मसीही विश्वासियों को अन्य मसीही विश्वासियों की संगति और मित्रता आवश्यक है। परमेश्वर के वचन बाइबल में इब्रानियों की पत्री में, प्रभु यीशु के बलिदान की चर्चा का समापन हमें एक दूसरे के साथ मिलते रहने और निरंतर संगति रखने के निर्देश के साथ होता है (10:25)। हम सभी मसीही विश्वासी परमेश्वर के परिवार का अंग हैं, इसलिए हमें भाई-बहनों के समान परस्पर प्रेम दिखाना चाहिए और अजनबियों के प्रति अतिथि-सत्कार की भावना रखनी चाहिए (13:1-2)। यदि हम सभी प्रयास करें, तो हम सभी को एक-दूसरे की देखभाल और संगति के आनन्द का अनुभव भी होगा।

          हो सकता है कि अकेले रहने वाले लोग हमारी इस कृपा का प्रत्युत्तर न देने पाएँ, परन्तु कृपा न करने का यह कोई कारण नहीं है। हमारे प्रभु यीशु ने हमसे वायदा किया है कि वह हमें कभी नहीं छोड़ेगा या त्यागेगा (13:5), इसलिए हमें भी यही तत्परता औरों के साथ दिखानी चाहिए। जैसे वह हर समय, हर बात के लिए, हर परिस्थिति में, हमारा मित्र बनकर हमारे साथ बना रहता है, वैसे ही हम भी औरों के मित्र बनें, उनके साथ निरंतर संगति बनाए रखें। यदि आप स्वयं अकेले हैं, तो भी परमेश्वर के परिवार के अन्य सदस्यों के साथ संपर्क और संगति बनाए रखने, उनके सहायक बनने के तरीके ढूँढें। मसीह यीशु को अपना मित्र बना लें; उसकी मित्रता और आशीषें न केवल इस जीवन में, वरन परलोक में भी सदा साथ रहती हैं। - माइक व्हिटमर

 

अकेलेपन का समाधान परमेश्वर के परिवार का सक्रिय सदस्य होना है।


और एक दूसरे के साथ इकट्ठा होना ने छोड़ें, जैसे कि कितनों की रीति है, पर एक दूसरे को समझाते रहें; और ज्यों ज्यों उस दिन को निकट आते देखो, त्यों त्यों और भी अधिक यह किया करो। - इब्रानियों 10:25

बाइबल पाठ: इब्रानियों 13:1-8

इब्रानियों 13:1 भाईचारे की प्रीति बनी रहे।

इब्रानियों 13:2 पहुनाई करना न भूलना, क्योंकि इस के द्वारा कितनों ने अनजाने स्‍वर्गदूतों की पहुनाई की है।

इब्रानियों 13:3 कैदियों की ऐसी सुधि लो, कि मानो उन के साथ तुम भी कैद हो; और जिन के साथ बुरा बर्ताव किया जाता है, उन की भी यह समझकर सुधि लिया करो, कि हमारी भी देह है।

इब्रानियों 13:4 विवाह सब में आदर की बात समझी जाए, और बिछौना निष्कलंक रहे; क्योंकि परमेश्वर व्यभिचारियों, और परस्त्रीगामियों का न्याय करेगा।

इब्रानियों 13:5 तुम्हारा स्वभाव लोभरहित हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा।

इब्रानियों 13:6 इसलिये हम बेधड़क हो कर कहते हैं, कि प्रभु, मेरा सहायक है; मैं न डरूंगा; मनुष्य मेरा क्या कर सकता है।

इब्रानियों 13:7 जो तुम्हारे अगुवे थे, और जिन्होंने तुम्हें परमेश्वर का वचन सुनाया है, उन्हें स्मरण रखो; और ध्यान से उन के चाल-चलन का अन्त देखकर उन के विश्वास का अनुकरण करो।

इब्रानियों 13:8 यीशु मसीह कल और आज और युगानुयुग एक सा है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • 2 राजाओं 10-12
  • यूहन्ना 1:29-51

रविवार, 9 मई 2021

सहायक

 

          हम दर्शकों के स्थान में बैठे हुए हमारी बेटी के बास्केटबाल खेल को देख रहे थे; खेल के दौरान उनके प्रशिक्षक ने एक शब्द कहा “डबल्स” (दो एक साथ)। यह सुनते ही तुरंत ही उनकी टीम की सुरक्षा रणनीति परिवर्तित हो गई, और उनके प्रतिरोधियों की सबसे लम्बे खिलाड़ी, जिसके पास गेंद थी, का सामना करने के लिए एक के स्थान पर अब दो खिलाड़ी आ गए। उन दोनों के आ जाने से वह प्रतिरोधी खिलाड़ी बॉल को सही दिशा में फेंक कर अंक नहीं बनाने पाई, और बॉल हमारी बेटी की टीम के हाथों में आ गई।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में जब सभोपदेशक का लेखक सुलैमान, इस संसार की कठिनाइयों और हताशाओं का सामना करता है, तब वह भी इस बात को मान लेता है कि परिश्रम के समय यदि कोई सहायक साथ हो तो परिश्रम से अच्छा परिणाम मिलता है (4:9)। जब कोई अकेला ही परिस्थितियों का सामना कर रहा होता है तो उसके पराजित होने की संभावना अधिक होती है; किन्तु यदि दो एक साथ हों तो वे अपने आप को बचा सकते हैं (पद 12)। यदि कोई मित्र हमारे साथ हो, तो वह हमें गिरने से बचा सकता है (पद 10)।

          सुलैमान के शब्द हमें प्रोत्साहित करते हैं कि अपनी जीवन यात्रा में किसी के मित्र, किसी के सहायक बनें; या किसी को अपनी सहायता के लिए साथ लिए चलें, जिससे हमें अकेले ही समस्याओं से जूझना न पड़े। किन्तु यह करने के लिए हम में से कुछ को अपने आप को इस प्रकार से खुला और उपलब्ध करवाना होगा, जैसा औरों के साथ होने से हम संकोच करते हैं और इस कारण अपने ही अंदर सीमित रहते हैं। लेकिन हम में से कुछ ऐसे भी हैं जो अपने साथ घनिष्ठता चाहते हैं, उन्हें लालसा रहते है कि लोग उनके संपर्क में आएँ और संगति करें, जिन से फिर वो अपने मन की बातों को बाँट सकें। कारण चाहे कुछ भी हो, हमें सहायता देने और सहायता लेने से संकोच नहीं करना चाहिए।

          उस बास्केटबॉल प्रशिक्षक की रणनीति वही थी जो सुलैमान की थी – अपने साथ सहायक ले लेना, जिससे चाहे खेल का स्थान हो या जीवन का मैदान हो, हमारे साथ हमें संभालने के लिए एक सहायक हो। हम अपने प्रभु परमेश्वर के धन्यवादी बने रहें कि वह हमारे जीवनों में सहायक खड़े करता है, और स्वयं भी हमारा सहायक बनकर हमारे साथ रहता है, तथा उसने हमारे सहायक के रूप में पवित्र आत्मा को हम मसीही विश्वासियों में बसाया है। - कर्स्टन होल्मबर्ग

 

प्रभु परमेश्वर जीवन के संघर्षों में आप हमारे सहायक बनें और हमें औरों के सहायक बनाएँ।


और मैं पिता से बिनती करूंगा, और वह तुम्हें एक और सहायक देगा, कि वह सर्वदा तुम्हारे साथ रहे। अर्थात सत्य का आत्मा, जिसे संसार ग्रहण नहीं कर सकता, क्योंकि वह न उसे देखता है और न उसे जानता है: तुम उसे जानते हो, क्योंकि वह तुम्हारे साथ रहता है, और वह तुम में होगा। - यूहन्ना 14:16-17

बाइबल पाठ: सभोपदेशक 4:1-12

सभोपदेशक 4:1 तब मैं ने वह सब अन्धेर देखा जो संसार में होता है। और क्या देखा, कि अन्धेर सहने वालों के आंसू बह रहे हैं, और उन को कोई शान्ति देने वाला नहीं! अन्धेर करने वालों के हाथ में शक्ति थी, परन्तु उन को कोई शान्ति देने वाला नहीं था।

सभोपदेशक 4:2 इसलिये मैं ने मरे हुओं को जो मर चुके हैं, उन जीवतों से जो अब तक जीवित हैं अधिक सराहा;

सभोपदेशक 4:3 वरन उन दोनों से अधिक सुभागी वह है जो अब तक हुआ ही नहीं, न ये बुरे काम देखे जो संसार में होते हैं।

सभोपदेशक 4:4 तब मैंने सब परिश्रम के काम और सब सफल कामों को देखा जो लोग अपने पड़ोसी से जलन के कारण करते हैं। यह भी व्यर्थ और मन का कुढ़ना है।

सभोपदेशक 4:5 मूर्ख छाती पर हाथ रखे रहता और अपना मांस खाता है।

सभोपदेशक 4:6 चैन के साथ एक मुट्ठी उन दो मुट्ठियों से अच्छा है, जिनके साथ परिश्रम और मन का कुढ़ना हो।

सभोपदेशक 4:7 फिर मैं ने धरती पर यह भी व्यर्थ बात देखी।

सभोपदेशक 4:8 कोई अकेला रहता और उसका कोई नहीं है; न उसके बेटा है, न भाई है, तौभी उसके परिश्रम का अन्त नहीं होता; न उसकी आंखें धन से सन्तुष्ट होती हैं, और न वह कहता है, मैं किस के लिये परिश्रम करता और अपने जीवन को सुख रहित रखता हूं? यह भी व्यर्थ और निरा दु:ख भरा काम है।

सभोपदेशक 4:9 एक से दो अच्छे हैं, क्योंकि उनके परिश्रम का अच्छा फल मिलता है।

सभोपदेशक 4:10 क्योंकि यदि उन में से एक गिरे, तो दूसरा उसको उठाएगा; परन्तु हाय उस पर जो अकेला हो कर गिरे और उसका कोई उठाने वाला न हो।

सभोपदेशक 4:11 फिर यदि दो जन एक संग सोए तो वे गर्म रहेंगे, परन्तु कोई अकेला क्योंकर गर्म हो सकता है?

सभोपदेशक 4:12 यदि कोई अकेले पर प्रबल हो तो हो, परन्तु दो उसका सामना कर सकेंगे। जो डोरी तीन तागे से बटी हो वह जल्दी नहीं टूटती।

 

एक साल में बाइबल: 

  • 2 राजाओं 7-9
  • यूहन्ना 1:1-28

गुरुवार, 15 अप्रैल 2021

मित्र

 

          घाना में, अपने बचपन के समय में मुझे अपने पिता का हाथ पकड़कर भीड़ वाले स्थानों में चलते हुए जाना और बातचीत करना बहुत अच्छा लगता था। वो मेरे पिता भी थे, और मित्र भी; हमारी संस्कृति में हाथ पकड़ना सच्ची मित्रता का चिह्न समझा जाता है। चलते हुए हम लोग कई विषयों के बारे में बातें करते जाते थे। मैं जब भी अकेला अनुभव करता, मेरे पिता की उपस्थिति से मुझे दिलासा मिलती थी। मेरे लिए उनके साथ संगति के वो समय बहुमूल्य थे।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु मसीह ने अपने शिष्यों को अपने मित्र कहा है, और उसने उनके प्रति अपनी मित्रता के चिह्न भी दिए हैं। प्रभु ने कहा, “जैसा पिता ने मुझ से प्रेम रखा, वैसा ही मैं ने तुम से प्रेम रखा, मेरे प्रेम में बने रहो” (यूहन्ना 15:9); यहाँ तक कि उन्होंने उनके लिए अपने प्राण भी न्योछावर कर दिए (पद 13)। प्रभु ने उन पर अपने राज्य के उद्देश्यों को प्रकट किया; और जो कुछ भी पिता परमेश्वर ने उन्हें दिया, वह सब उनको सिखा दिया (पद 15)। प्रभु ने अपने शिष्यों को यह सुअवसर भी दिया कि वे उसके साथ मिलकर उसके उद्देश्यों को पूरा करने वाले बनें (पद 16)।

          प्रभु यीशु जीवन भर के लिए हम मसीही विश्वासियों का मित्र और साथी है। वह हमारे साथ रहता है; हर परिस्थिति में साथ चलता रहता है, और हमारी सभी बातों, परेशानियों, दुखों आदि के बारे में ध्यान से सुनता है। जब हम अकेले और निराश अनुभव कर रहे होते हैं, तब हमारा मित्र यीशु हमारा साथ देता है, हमारी हिम्मत बढ़ाता है।

          और हमारे मित्र यीशु के साथ हमारी मित्रता और भी अधिक घनिष्ठ हो जाती है जब हम उसके अन्य मित्रों, हमारे अन्य संगी मसीही विश्वासियों से भी प्रेम करते हैं, और प्रभु के प्रति आज्ञाकारी बने रहते हैं (पद 10, 17)। जब हम प्रभु की आज्ञाओं का पालन करेंगे, तो हमारे जीवनों से ऐसे फल आएँगे जो सदा बने रहेंगे (पद 16)।

          हमारे परेशान संसार की भीड़-भाड़ वाली गलियों और खतरनाक रास्तों पर चलते समय हम प्रभु के साथ बने रहने के प्रति आश्वस्त रह सकते हैं। यह उसके हमारा मित्र होने का चिह्न है। - लॉरेंस दरमानी

 

प्रभु परमेश्वर हमेशा हमारे साथ बना रहता है।


और उन्हें सब बातें जो मैं ने तुम्हें आज्ञा दी है, मानना सिखाओ: और देखो, मैं जगत के अन्त तक सदैव तुम्हारे संग हूं। - मत्ती 28:20

बाइबल पाठ: यूहन्ना 15:9-17

यूहन्ना 15:9 जैसा पिता ने मुझ से प्रेम रखा, वैसा ही मैं ने तुम से प्रेम रखा, मेरे प्रेम में बने रहो।

यूहन्ना 15:10 यदि तुम मेरी आज्ञाओं को मानोगे, तो मेरे प्रेम में बने रहोगे: जैसा कि मैं ने अपने पिता की आज्ञाओं को माना है, और उसके प्रेम में बना रहता हूं।

यूहन्ना 15:11 मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि मेरा आनन्द तुम में बना रहे, और तुम्हारा आनन्द पूरा हो जाए।

यूहन्ना 15:12 मेरी आज्ञा यह है, कि जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो।

यूहन्ना 15:13 इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे।

यूहन्ना 15:14 जो कुछ मैं तुम्हें आज्ञा देता हूं, यदि उसे करो, तो तुम मेरे मित्र हो।

यूहन्ना 15:15 अब से मैं तुम्हें दास न कहूंगा, क्योंकि दास नहीं जानता, कि उसका स्वामी क्या करता है: परन्तु मैं ने तुम्हें मित्र कहा है, क्योंकि मैं ने जो बातें अपने पिता से सुनीं, वे सब तुम्हें बता दीं।

यूहन्ना 15:16 तुम ने मुझे नहीं चुना परन्तु मैं ने तुम्हें चुना है और तुम्हें ठहराया ताकि तुम जा कर फल लाओ; और तुम्हारा फल बना रहे, कि तुम मेरे नाम से जो कुछ पिता से मांगो, वह तुम्हें दे।

यूहन्ना 15:17 इन बातें की आज्ञा मैं तुम्हें इसलिये देता हूं, कि तुम एक दूसरे से प्रेम रखो।

 

एक साल में बाइबल: 

  • 1 शमूएल 27-29
  • लूका 13:1-22

मंगलवार, 8 सितंबर 2020

देखभाल

 

         मैं अपनी आँखें बन्द करता हूँ, हाथ जोड़कर, सिर झुकाकर मन में प्रार्थना करना आरंभ करता हूँ, मेरी प्रार्थना आरंभ होती है, “हे परमेश्वर, मैं आपके सम्मुख आपके बच्चे की तरह आता हूँ। मैं आपकी भलाइयों और सामर्थ्य को स्मरण करता हूँ जो आप ...” और अचानक ही मेरी आँखें झटके से खुल जाती हैं। मुझे स्मरण हो आता है कि मेरे बेटे का स्कूल का काम अभी पूरा नहीं हुआ है, उसे मेरी सहायता की आवश्यकता थी, क्योंकि कल उसे वह स्कूल में दिखाना है। मुझे यह भी स्मरण आता है कि कल दोपहर बाद उसे स्कूल में बास्केटबाल के खेल में भी भाग लेना है, और मुझे वहाँ उसके पास होना है; और मैं विचार करता हूँ कि वह अभी अपने स्कूल के कार्य को पूरा करने में लगा होगा, जो लगभग मध्य-रात्रि तक जाकर पूरा होगा। किन्तु मुझे चिंता है कि उसका यह सब परिश्रम उसे थका कर दुर्बल न कर दे, जिससे फिर कोई बीमारी उसे पकड़ न ले। और मेरा ध्यान प्रार्थना से हट जाता है।

         सुप्रसिद्ध मसीही लेखक सी. एस. ल्युईस ने अपने पुस्तक The Screwtape Letters में प्रार्थना में इस प्रकार ध्यान विचलित करने वाली बातों के बारे में लिखा है। उन्होंने लिखा कि जब हमारे मन इधर-उधर भटकने लगते हैं तो हम अपनी इच्छा-शक्ति के द्वारा उन्हें फिर से अपनी मूल प्रार्थना पर लाने के प्रयास करते हैं। लेकिन ल्युईस का निष्कर्ष था कि ऐसा करने के स्थान पर अधिक अच्छा होता है कि विचलित करने वाली उस नई बात को ही हमारी वर्तमान समस्या समझ लिया जाए, उसे परमेश्वर के सामने रख दिया जाए, और उस बात को ही अपनी प्रार्थना का मुख्य विषय बना लिया जाए।

         कोई स्थायी चिंता, या कोई पापमय विचार परमेश्वर के साथ हमारे वार्तालाप का केंद्र बिंदु बन सकता है, हम उस बात को पिता परमेश्वर के सामने रख कर उसके बारे में उससे उसका मार्गदर्शन और सामर्थ्य माँग सकते हैं। परमेश्वर चाहता है कि हम जब उससे वार्तालाप करें तो निःसंकोच होकर अपनी वास्तविक चिंताओं, भय, संघर्षों, इच्छाओं आदि के बारे में उससे खुलकर बोलें। वह हमारी किसी भी बात से आश्चर्यचकित नहीं होगा, क्योंकि वह सब कुछ पहले से ही जानता है। जैसे एक घनिष्ठ मित्र हमारी बातों पर ध्यान लगाता है, परमेश्वर भी वैसे ही हमारी बातों का ध्यान करता है। इसीलिए परमेश्वर के वचन बाइबल में हमें प्रोत्साहित किया गया है कि हम अपनी सारी चिताएँ उस पर डाल दें क्योंकि उसे हमारा ध्यान है (1 पतरस 5:7), वह हमारी देखभाल करता है। - जेनिफर बेनसन शुल्ट

 

ध्यान बंटने से हमारी प्रार्थनाएं बाधित नहीं होनी चाहिएँ।


अपना बोझ यहोवा पर डाल दे वह तुझे सम्हालेगा; वह धर्मी को कभी टलने न देगा। - भजन 55:22

बाइबल पाठ: 1 पतरस 5:6-10

1 पतरस 5:6 इसलिये परमेश्वर के बलवन्‍त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए।

1 पतरस 5:7 और अपनी सारी चिन्ता उसी पर डाल दो, क्योंकि उसको तुम्हारा ध्यान है।

1 पतरस 5:8 सचेत हो, और जागते रहो, क्योंकि तुम्हारा विरोधी शैतान गरजने वाले सिंह के समान इस खोज में रहता है, कि किस को फाड़ खाए।

1 पतरस 5:9 विश्वास में दृढ़ हो कर, और यह जान कर उसका सामना करो, कि तुम्हारे भाई जो संसार में हैं, ऐसे ही दुख भुगत रहे हैं।

1 पतरस 5:10 अब परमेश्वर जो सारे अनुग्रह का दाता है, जिसने तुम्हें मसीह में अपनी अनन्त महिमा के लिये बुलाया, तुम्हारे थोड़ी देर तक दुख उठाने के बाद आप ही तुम्हें सिद्ध और स्थिर और बलवन्‍त करेगा।

 

 एक साल में बाइबल: 

  • नीतिवचन 3-5
  • 2 कुरिन्थियों 1

सोमवार, 3 अगस्त 2020

प्रोत्साहन


            प्रेरित यूहन्ना ने जो अपने मित्र गयुस के लिए पहली शताब्दी में किया, वह आज इक्कीसवीं शताब्दी में एक लुप्त हो रही कला है। यूहन्ना ने उसे एक पत्र लिखा। न्यू यॉर्क टाइम्स समाचार पत्र की एक लेखिका, कैथरीन फील्ड्स ने कहा, “पत्र लिखना हमारी सबसे प्राचीन कलाओं में से एक है। पत्रों के बारे में सोचें तो ध्यान तरसुस के पौलुस की ओर जाता है”, उदाहरण के लिए; और हम प्रेरित यूहन्ना का नाम भी जोड़ सकते हैं।


            परमेश्वर के वचन बाइबल में यूहन्ना द्वारा गयुस को लिखा गया वह पत्र विद्यमान है। उस पत्र में यूहन्ना ने उसके अच्छे आत्मिक और शारीरिक स्वास्थ्य की आशा रखने के विषय लिखा, गयुस की विश्वासयोग्यता के लिए उसे प्रोत्साहन के शब्द लिखे, और चर्च के लिए उसके प्रेम की सराहना की। यूहन्ना ने चर्च की एक समस्या के बारे में भी लिखा, जिसका समाधान उसने आकर व्यक्तिगत रीति से करने का आश्वासन दिया। यूहन्ना ने परमेश्वर की महिमा के लिए अच्छे कार्य करने के महत्व के बारे में भी लिखा। कुल मिलाकर यह एक मित्र को लिखा गया उत्साहवर्धक और चुनौतीपूर्ण पत्र था।


            आज के इलेक्ट्रोनिक युग में अधिकांश संवाद डिजिटल माध्यम से होते हैं और कागज़ पर पत्र लिखने का चलन समाप्त होता जा रहा है। परन्तु इसके कारण हमें एक-दूसरे को प्रोत्साहित करना बन्द नहीं कर देना चाहिए। पौलुस ने प्रोत्साहन के पत्र चर्मपत्रों पर लिखे; हम औरों को अनेकों प्रकार से प्रोत्साहित कर सकते हैं। महत्व उस माध्यम का नहीं है जिसके द्वारा हम प्रोत्साहित करते हैं, परन्तु इसका है कि हम कुछ समय निकालकर औरों को बताएँ कि हम प्रभु यीशु के नाम में उनकी चिंता करते हैं।


            उस प्रोत्साहन के बारे में विचार कीजिए जो गयुस को यूहन्ना का पत्र प्राप्त होने से मिला होगा। क्या हम भी इसी प्रकार से परमेश्वर के प्रेम को औरों पर अपने किसी पत्र या फोन द्वारा चमका सकते हैं, उन्हें प्रोत्साहित कर सकते हैं? – डेव ब्रैनन

 

प्रोत्साहन के शब्द मानवीय आत्मा को आशा प्रदान करते हैं।



… मसीह जो महिमा की आशा है तुम में रहता है। जिस का प्रचार कर के हम हर एक मनुष्य को जता देते हैं और सारे ज्ञान से हर एक मनुष्य को सिखाते हैं, कि हम हर एक व्यक्ति को मसीह में सिद्ध कर के उपस्थित करें। - कुल्लुस्सियों 1:27-28


बाइबल पाठ: 3 यूहन्ना

3 यूहन्ना 1:1 मुझ प्राचीन की ओर से उस प्रिय गयुस के नाम, जिस से मैं सच्चा प्रेम रखता हूं।

3 यूहन्ना 1:2 हे प्रिय, मेरी यह प्रार्थना है; कि जैसे तू आत्मिक उन्नति कर रहा है, वैसे ही तू सब बातों में उन्नति करे, और भला चंगा रहे।

3 यूहन्ना 1:3 क्योंकि जब भाइयों ने आकर, तेरे उस सत्य की गवाही दी, जिस पर तू सचमुच चलता है, तो मैं बहुत ही आनन्‍दित हुआ।

3 यूहन्ना 1:4 मुझे इस से बढ़कर और कोई आनन्द नहीं, कि मैं सुनूं, कि मेरे लड़के-बाले सत्य पर चलते हैं।

3 यूहन्ना 1:5 हे प्रिय, जो कुछ तू उन भाइयों के साथ करता है, जो परदेशी भी हैं, उसे विश्वासी के समान करता है।

3 यूहन्ना 1:6 उन्होंने मण्‍डली के सामने तेरे प्रेम की गवाही दी थी: यदि तू उन्हें उस प्रकार विदा करेगा जिस प्रकार परमेश्वर के लोगों के लिये उचित है तो अच्छा करेगा।

3 यूहन्ना 1:7 क्योंकि वे उस नाम के लिये निकले हैं, और अन्यजातियों से कुछ नहीं लेते।

3 यूहन्ना 1:8 इसलिये ऐसों का स्‍वागत करना चाहिए, जिस से हम भी सत्य के पक्ष में उन के सहकर्मी हों।

3 यूहन्ना 1:9 मैं ने मण्‍डली को कुछ लिखा था; पर दियुत्रिफेस जो उन में बड़ा बनना चाहता है, हमें ग्रहण नहीं करता।

3 यूहन्ना 1:10 सो जब मैं आऊंगा, तो उसके कामों की जो वह कर रहा है सुधि दिलाऊंगा, कि वह हमारे विषय में बुरी बुरी बातें बकता है; और इस पर भी सन्‍तोष न कर के आप ही भाइयों को ग्रहण नहीं करता, और उन्हें जो ग्रहण करना चाहते हैं, मना करता है: और मण्‍डली से निकाल देता है।

3 यूहन्ना 1:11 हे प्रिय, बुराई के नहीं, पर भलाई के अनुयायी हो, जो भलाई करता है, वह परमेश्वर की ओर से है; पर जो बुराई करता है, उसने परमेश्वर को नहीं देखा।

3 यूहन्ना 1:12 देमेत्रियुस के विषय में सब ने वरन सत्य ने भी आप ही गवाही दी: और हम भी गवाही देते हैं, और तू जानता है, कि हमारी गवाही सच्ची है।

3 यूहन्ना 1:13 मुझे तुझ को बहुत कुछ लिखना तो था; पर सियाही और कलम से लिखना नहीं चाहता।

3 यूहन्ना 1:14 पर मुझे आशा है कि तुझ से शीघ्र भेंट करूंगा: तब हम आम्हने सामने बातचीत करेंगे: तुझे शान्‍ति मिलती रहे। यहां के मित्र तुझे नमस्‍कार करते हैं: वहां के मित्रों से नाम ले ले कर नमस्‍कार कह देना।

 

एक साल में बाइबल: 

  • भजन 63-65
  • रोमियों 6