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Sunday, November 8, 2015

दान


   उस विधवा का अपने आखिरी कुछ सिक्कों को भी भ्रष्ट धार्मिक संस्थान में दाना कर देना उचित प्रतीत नहीं हो रहा था। यरुशलेम के उस मन्दिर से वे धर्माधिकारी आमदनी पाते थे जो वहाँ आई भेंट और दान पर निर्भर होने के बावजूद "...वे विधवाओं के घरों को खा जाते हैं, और दिखाने के लिये बड़ी देर तक प्रार्थना करते रहते हैं..." (मरकुस 12:40)। लेकिन उस गरीब विधवा द्वारा दिए गए उस दान से प्रभु यीशु को अपने चेलों को धन के प्रति सही रवैये की शिक्षा देने का अवसर मिला, जो आज हमारे लिए भी है।

   गौर्डन कौसबी अपने वॉशिंगटन डी. सी. के चर्च ऑफ सेवियर में पास्टर होने के समय की एक घटना का उल्लेख करते हैं; उस चर्च में एक विधवा आया करती थी जिसके छः बच्चे थे। उस विधवा की आमदानी से बड़ी कठिनाई से बच्चों का पालन-पोषण और घर चलाने का खर्चा निकल पाता था; लेकिन वह विधवा नियमित रूप से हर सप्ताह चर्च में 4 डॉलर दान-पात्र में डाला करती थी। चर्च के एक अगुवे ने कौसबी से कहा कि वह जाकर उस विधवा से बात करे कि हालात को देखते हुए दान-पात्र में डालने की बजाए वह अपने घर के खर्चे के लिए उस पैसे का प्रयोग कर ले। कौसबी ने उस अगुवे की सलाह मान ली और उस विधवा के पास बात करने को चला तो गया, लेकिन ऐसा करके उसे शर्मिंदगी ही उठानी पड़ी। कौसबी की बात सुनकर विधवा का प्रत्युत्तर था, "आप मुझसे वह अन्तिम अवसर भी छीन लेना चाहते हैं जो मुझे सर उठा कर जीने तथा जीवन को सार्थक बनाने में सहायता करता है!" उस विधवा ने दान देने के रहस्य को जान लिया था - दान, लेने वाले से अधिक देने वाले के लिए लाभदायक होता है।

   अवश्य ही गरीबों को आर्थिक सहायता की आवश्यकता होती है, लेकिन जितना आवश्यक दान लेना हो सकता है, दान देना उससे कम महत्वपूर्ण नहीं होता। दान देना हमें स्मरण दिलाता है कि हम भी, आकाश के पक्षियों और धरती के फूलों के समान, परमेश्वर के अनुग्रह पर आधारित होकर ही जीते हैं। आकाश के पक्षी और धरती की वनस्पति अपने भविष्य को लेकर चिंतित नहीं रहते; ऐसे ही हम मनुष्यों को भी अपने भविष्य को लेकर चिंतित नहीं रहना चाहिए। समय और आवश्यकतानुसार परमेश्वर सब को देता है। दान देना हमें एक अवसर प्रदान करता है कि हम परमेश्वर में अपने भरोसे को प्रगट कर सकें कि परमेश्वर हमारे लिए भी वैसे ही उपलब्ध करवाएगा जैसे वह सृष्टि के लिए उपलब्ध करवाता है (मत्ती 6:25-34)। - फिलिप यैन्सी


धन दान करके हम अपने ऊपर धन के दुषप्रभाव की संभावनाओं का अन्त करते हैं।

मैं ने तुम्हें सब कुछ कर के दिखाया, कि इस रीति से परिश्रम करते हुए निर्बलों को सम्भालना, और प्रभु यीशु की बातें स्मरण रखना अवश्य है, कि उसने आप ही कहा है; कि लेने से देना धन्य है। - प्रेरितों 20:35

बाइबल पाठ: मरकुस 12:38-44
Mark 12:38 उसने अपने उपदेश में उन से कहा, शस्‍त्रियों से चौकस रहो, जो लम्बे वस्‍त्र पहिने हुए फिरना। 
Mark 12:39 और बाजारों में नमस्‍कार, और आराधनालयों में मुख्य मुख्य आसन और जेवनारों में मुख्य मुख्य स्थान भी चाहते हैं। 
Mark 12:40 वे विधवाओं के घरों को खा जाते हैं, और दिखाने के लिये बड़ी देर तक प्रार्थना करते रहते हैं, ये अधिक दण्‍ड पाएंगे।
Mark 12:41 और वह मन्दिर के भण्‍डार के साम्हने बैठकर देख रहा था, कि लोग मन्दिर के भण्‍डार में किस प्रकार पैसे डालते हैं, और बहुत धनवानों ने बहुत कुछ डाला। 
Mark 12:42 इतने में एक कंगाल विधवा ने आकर दो दमडिय़ां, जो एक अधेले के बराबर होती है, डालीं। 
Mark 12:43 तब उसने अपने चेलों को पास बुलाकर उन से कहा; मैं तुम से सच कहता हूं, कि मन्दिर के भण्‍डार में डालने वालों में से इस कंगाल विधवा ने सब से बढ़कर डाला है। 
Mark 12:44 क्योंकि सब ने अपने धन की बढ़ती में से डाला है, परन्तु इस ने अपनी घटी में से जो कुछ उसका था, अर्थात अपनी सारी जीविका डाल दी है।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 43-45
  • इब्रानियों 5