बाइबल और मसीही विश्वास सम्बन्धी अपने प्रश्नों के लिए यहाँ क्लिक करें:

GotQuestions?org

Wednesday, July 27, 2016

दृष्टिकोण


   बसन्त ऋतु की छुट्टियों में जेसन अमेरिका के न्यू यॉर्क शहर घूमने के लिए गया। एक दोपहर वह और उसके दोस्त कार में बैठकर न्यू योर्क की प्रसिद्ध गगनचुंबी इमारत एम्पायर स्टेट बिल्डिंग देखने गए। एम्पायर स्टेट बिलडिंग तक की वह कार यात्रा, शहर के रास्ते और उन रास्तों पर चल रहे लोगों तथा गाड़ियों के कारण वह शहर जेसन को अव्यवस्थित और खतरनाक लगा। लेकिन जब उसने इमारत के ऊपर पहुँचकर उस ऊँचाई से नीचे फैले न्य़ू यॉर्क शहर को देखा तो उसे उस शहर के निर्माण तथा उसके मार्गों की बनावट में अव्यवस्था नहीं वरन चकित कर देने वाली योजनाबद्ध व्यवस्था दिखाई दी। परिपेक्ष के बदले जाने से शहर के प्रति जेसन के दृष्टिकोण में बहुत बड़ा परिवर्तन आ गया।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भी हम हबक्कूक के जीवन में भी हम कुछ ऐसा ही देखते हैं। जब हबक्कूक ने पृथ्वी पर के अपने दृष्टिकोण से जीवन को देखा, तो उसे प्रतीत हुआ कि समाज में व्याप्त बुराई के प्रति परमेश्वर उदासीन है (हबक्कूक 1:2-4)। लेकिन परमेश्वर ने हबक्कूक को ईश्वरीय दृष्टिकोण प्रदान किया, और वह देखने पाया कि जीवन जैसा दिखाई पड़ता है, उससे बहुत आगे और भी कुछ है; तथा मनुष्य के कार्य परमेश्वर की योजनाओं को विफल नहीं कर सकते (हबक्कूक 2:3)।

   हमें प्रतीत हो सकता है कि जो परमेश्वर की परवाह भी नहीं करते वे फलते-फूलते हैं; किंतु समयानुसार परमेश्वर प्रत्येक बात और बुराई को ठीक कर देगा। जो कुछ भी हो रहा है उसमें भी परमेश्वर अपनी सार्वभौमिकता में होकर कार्य कर रहा है जिससे उसकी भली योजनाएं पूरी हो जाएं। परमेश्वर के कार्य कभी अधूरे नहीं रहते, कभी टल नहीं सकते और अपने नियोजित समयानुसार पूरे भी होंगे (पद 3)।

   हम अपने जीवनों में जिस स्थान पर खड़े हैं वहाँ से जीवन का विहंगम दृश्य तो नहीं देख सकते, किंतु परमेश्वर हम सबके समस्त जीवन के बारे में सब कुछ देखता और जानता है; इसलिए हमें जो दिखाई देता है उसके आधार पर नहीं वरन प्रभु परमेश्वर पर लाए गए अपने विश्वास के आधार पर हमें अपने जीवन व्यतीत करने चाहिएं; क्योंकि परमेश्वर के दृष्टिकोण से सब कुछ मिलकर अन्ततः उसके आदर तथा उसके विश्वासियों की भलाई के लिए ही कार्य कर रहा है। - पोह फैंग चिया


हमारे समय परमेश्वर के हाथों में हैं; हमारी आत्माएं उसकी सुरक्षा में हैं।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: हबक्कूक 2:1-14
Habakkuk 2:1 मैं अपने पहरे पर खड़ा रहूंगा, और गुम्मट पर चढ़ कर ठहरा रहूंगा, और ताकता रहूंगा कि मुझ से वह क्या कहेगा? और मैं अपने दिए हुए उलाहने के विषय में उत्तर दूं? 
Habakkuk 2:2 यहोवा ने मुझ से कहा, दर्शन की बातें लिख दे; वरन पटियाओं पर साफ साफ लिख दे कि दौड़ते हुए भी वे सहज से पढ़ी जाएं। 
Habakkuk 2:3 क्योंकि इस दर्शन की बात नियत समय में पूरी होने वाली है, वरन इसके पूरे होने का समय वेग से आता है; इस में धोखा न होगा। चाहे इस में विलम्ब भी हो, तौभी उसकी बाट जोहते रहना; क्योंकि वह निश्चय पूरी होगी और उस में देर न होगी। 
Habakkuk 2:4 देख, उसका मन फूला हुआ है, उसका मन सीधा नहीं है; परन्तु धर्मी अपने विश्वास के द्वारा जीवित रहेगा। 
Habakkuk 2:5 दाखमधु से धोखा होता है; अहंकारी पुरूष घर में नहीं रहता, और उसकी लालसा अधोलोक के समान पूरी नहीं होती, और मृत्यु की नाईं उसका पेट नहीं भरता। वह सब जातियों को अपने पास खींच लेता, और सब देशों के लोगों को अपने पास इकट्ठे कर रखता है। 
Habakkuk 2:6 क्या वे सब उसका दृष्टान्त चला कर, और उस पर ताना मार कर न कहेंगे कि हाय उस पर जो पराया धल छीन छीनकर धनवान हो जाता है? कब तक? हाय उस पर जो अपना घर बन्धक की वस्तुओं से भर लेता है। 
Habakkuk 2:7 जो तुझ से कर्ज लेते हैं, क्या वे लोग अचानक न उठेंगे? और क्या वे न जागेंगे जो तुझ को संकट में डालेंगे? 
Habakkuk 2:8 और क्या तू उन से लूटा न जाएगा? तू ने बहुत सी जातियों को लूट लिया है, सो सब बचे हुए लोग तुझे भी लूट लेंगे। इसका कारण मनुष्यों की हत्या, और वह अपद्रव भी जो तू ने इस देश और राजधानी और इसके सब रहने वालों पर किया है।
Habakkuk 2:9 हाय उस पर, जो अपने घर के लिये अन्याय के लाभ का लोभी है ताकि वह अपना घोंसला ऊंचे स्थान में बनाकर विपत्ति से बचे। 
Habakkuk 2:10 तू ने बहुत सी जातियों को काट कर अपने घर लिये लज्जा की युक्ति बान्धी, और अपने ही प्राण का दोषी ठहरा है। 
Habakkuk 2:11 क्योंकि घर की भीत का पत्थर दोहाई देता है, और उसके छत की कड़ी उनके स्वर में स्वर मिलाकर उत्तर देती हैं। 
Habakkuk 2:12 हाय उस पर जो हत्या कर के नगर को बनाता, और कुटिलता कर के गढ़ को दृढ़ करता है। 
Habakkuk 2:13 देखो, क्या सेनाओं के यहोवा की ओर से यह नहीं होता कि देश देश के लोग परिश्रम तो करते हैं परन्तु वे आग का कौर होते हैं; और राज्य-राज्य के लोगों का परिश्रम व्यर्थ ही ठहरता है? 
Habakkuk 2:14 क्योंकि पृथ्वी यहोवा की महिमा के ज्ञान से ऐसी भर जाएगी जैसे समुद्र जल से भर जाता है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 43-45
  • प्रेरितों 27:27-44