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Thursday, October 20, 2016

शब्द


   आर्कड्यूक फ्रांसिस फर्डिनैंड और उनकी पत्नि सोफी की हत्या के प्रत्युत्तर में, 28 जुलाई 1914 को ऑसट्रिया तथा हंग्री की सेनाओं ने सर्बिया के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया। इसके 90 दिन के अन्दर ही अन्य यूरोपीय देश अपनी युद्ध संधियों के पालन तथा अपनी महत्वकांक्षाओं की पूर्ति के लिए इस युद्ध में शामिल हो गए; और हत्या की उस एक घटना ने बढ़ कर प्रथम विश्व-युद्ध का रूप ले लिया जो आधुनिक संसार के इतिहास के सबसे विनाशकारी युद्धों में से एक था; युद्ध की त्रासदी और नुकसान हिला देने वाले होते हैं।

   हमारे पारस्परिक तथा पारिवारिक संबंधों में भी कुछ ही घृणापूर्ण बातें ऐसी ही विनाशकारी दरारें उत्पन्न कर देती हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में याकूब ने लिखा, "वैसे ही जीभ भी एक छोटा सा अंग है और बड़ी बड़ी डींगे मारती है: देखो, थोड़ी सी आग से कितने बड़े वन में आग लग जाती है" (याकूब 3:5); और नीतिवचन का लेखक वाद-विवाद से उत्पन्न होने वाले झगड़ों से बचे रहने का मार्ग बताता है: "कोमल उत्तर सुनने से जलजलाहट ठण्डी होती है, परन्तु कटुवचन से क्रोध धधक उठता है" (नीतिवचन 15:1)।

   एक छोटी सी टिप्पणी बड़ा झगड़ा आरंभ कर सकती है। जब परमेश्वर के अनुग्रह और सामर्थ से हम अपने शब्दों द्वारा किसी से बदला ना लेने का निर्णय लेते हैं तो हम अपने प्रभु परमेश्वर यीशु मसीह का आदर करते हैं; जिसके जीवन एवं व्यवहार के विषय में यशायाह भविष्यद्वक्ता ने भविष्यवाणी करी थी कि, "वह सताया गया, तौभी वह सहता रहा और अपना मुंह न खोला; जिस प्रकार भेड़ वध होने के समय वा भेड़ी ऊन कतरने के समय चुपचाप शान्त रहती है, वैसे ही उसने भी अपना मुंह न खोला" (यशायाह 53:7); और जीवनपर्यन्त प्रभु यीशु ने अपमान, निन्दा और गाली सुनकर भी कभी किसी को बुरा नहीं कहा, किसी का बुरा नहीं किया।

   बाइबल में नीतिवचन की पुस्तक हम से अनुरोध करती है कि हम सदा सत्य बोलें और अपने शब्दों से भी शान्ति के मार्ग पर ही चलें: "शान्ति देने वाली बात जीवन-वृक्ष है, परन्तु उलट फेर की बात से आत्मा दु:खित होती है" (नीतिवचन 15:4)। - डेविड मैक्कैसलैंड


प्रभु मुझे अपनी शान्ति का माध्यम बनाएं;
जहाँ घृणा है, मैं वहाँ प्रेम बोने पाऊँ।

पर जो ज्ञान ऊपर से आता है वह पहिले तो पवित्र होता है फिर मिलनसार, कोमल और मृदुभाव और दया, और अच्‍छे फलों से लदा हुआ और पक्षपात और कपट रहित होता है। - याकूब 3:17

बाइबल पाठ: नीतिवचन 15:1-23
Proverbs 15:1 कोमल उत्तर सुनने से जलजलाहट ठण्डी होती है, परन्तु कटुवचन से क्रोध धधक उठता है। 
Proverbs 15:2 बुद्धिमान ज्ञान का ठीक बखान करते हैं, परन्तु मूर्खों के मुंह से मूढ़ता उबल आती है। 
Proverbs 15:3 यहोवा की आंखें सब स्थानों में लगी रहती हैं, वह बुरे भले दोनों को देखती रहती हैं। 
Proverbs 15:4 शान्ति देने वाली बात जीवन-वृक्ष है, परन्तु उलट फेर की बात से आत्मा दु:खित होती है। 
Proverbs 15:5 मूढ़ अपने पिता की शिक्षा का तिरस्कार करता है, परन्तु जो डांट को मानता, वह चतुर हो जाता है। 
Proverbs 15:6 धर्मी के घर में बहुत धन रहता है, परन्तु दुष्ट के उपार्जन में दु:ख रहता है। 
Proverbs 15:7 बुद्धिमान लोग बातें करने से ज्ञान को फैलाते हैं, परन्तु मूर्खों का मन ठीक नहीं रहता। 
Proverbs 15:8 दुष्ट लोगों के बलिदान से यहोवा धृणा करता है, परन्तु वह सीधे लोगों की प्रार्थना से प्रसन्न होता है। 
Proverbs 15:9 दुष्ट के चाल चलन से यहोवा को घृणा आती है, परन्तु जो धर्म का पीछा करता उस से वह प्रेम रखता है। 
Proverbs 15:10 जो मार्ग को छोड़ देता, उसको बड़ी ताड़ना मिलती है, और जो डांट से बैर रखता, वह अवश्य मर जाता है। 
Proverbs 15:11 जब कि अधोलोक और विनाशलोक यहोवा के साम्हने खुले रहते हैं, तो निश्चय मनुष्यों के मन भी। 
Proverbs 15:12 ठट्ठा करने वाला डांटे जाने से प्रसन्न नहीं होता, और न वह बुद्धिमानों के पास जाता है। 
Proverbs 15:13 मन आनन्दित होने से मुख पर भी प्रसन्नता छा जाती है, परन्तु मन के दु:ख से आत्मा निराश होती है।&nbs