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Monday, April 15, 2019

दिशा-निर्देश



      हमारे विवाह की सालगिरह पर मेरे पति माईक ने अपने मित्र से एक ऐसी साइकिल कुछ समय के लिए ली जिसपर आगे-पीछे दो जन बैठ सकते थे, जिसमें दो हैंडल तथा दो पैडल थे, और उस पर बैठकर हम दोनों एक रोमांचक सप्रेम भ्रमण पर जा निकले। उस साइकिल पर हमारे चलने के थोड़े ही समय में मुझे बोध हो गया कि क्योंकि मैं पीछे बैठी हुई थी और मेरे सामने माइक के चौड़े कंधे थे, इसलिए मैं अपने सामने के सड़क को स्पष्ट नहीं देख सकती थी, केवल दोनों ओर के दृश्य को ही निहार सकती थी। साथ ही, जो हैंडल मैंने पकडे हुए थे, वे स्थिर जमे हुए थे और उनसे साइकिल को मोड़ा नहीं जा सकता था, वे बस मेरे शरीर के ऊपरी भाग को सहारा देने भर का काम कर रहे थे। अब यह मेरा निर्णय था कि उन सीमाओं के साथ पीछे बैठकर कुड़कुड़ाउँ, या साइकिल को चलाने और सही दिशा देने का नियंत्रण माईक पर छोड़कर आस-पास के दृश्यों और अपने पति के साथ होने का आनन्द लूँ।

      जब परमेश्वर ने अब्राहम को कहा कि वह अपने स्वदेश और परिवार को छोड़कर उसके पीछे हो ले, तो अब्राहम को गंतव्य-स्थान के विषय में कोई विवरण या जानकारी प्रदान नहीं की। न ही परमेश्वर ने अब्राहम को बताया कि वह स्थान कहाँ स्थित है, न् ही वहां के तथा वहाँ के प्राकृतिक संसाधनों बारे में कोई जानकारी प्रदान की। उसे यह भी नहीं बताया कि उस स्थान तक पहुँचने में कितना समय लगेगा या किस मार्ग से होकर जाना होगा। परमेश्वर ने उससे बस इतना कहा कि वह उस देश को जाए जिसे वह उसे दिखाएगा। सामान्यतः किसी यात्रा के लिए जिस जानकारी के होने की अधिकांश मनुष्य लालसा रखते हैं, उसमें से कुछ भी उपलब्ध न होते हुए भी अब्राहम ने परमेश्वर की बात स्वीकार कर ली और उसकी आज्ञाकारिता में परमेश्वर के पीछे निकल पड़ा, और इसे उसका विश्वास कहा गया (इब्रानियों 11:8)।

      आज यदि हम अपने आप को अनिश्चितताओं, अस्पष्ट भविष्य, परिस्थितियों पर नियंत्रण न होने अदि स्थितियों का सामना करते हुए पाते हैं, तो अब्राहम के समान परमेश्वर पर विश्वास रखकर उसका अनुसरण करते रहें; हमारी जीवन यात्रा के लिए परमेश्वर हमें सदा सही दिशा-निर्देश प्रदान करता रहेगा। - कर्स्टन होम्बर्ग


जीवन यात्रा के लिए सही निर्देशों के लिए परमेश्वर पर सदा भरोसा किया जा सकता है।

विश्वास ही से इब्राहीम जब बुलाया गया तो आज्ञा मानकर ऐसी जगह निकल गया जिसे मीरास में लेने वाला था, और यह न जानता था, कि मैं किधर जाता हूं; तौभी निकल गया। - इब्रानियों 11:8

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 12:1-9
Genesis 12:1 यहोवा ने अब्राम से कहा, अपने देश, और अपनी जन्मभूमि, और अपने पिता के घर को छोड़कर उस देश में चला जा जो मैं तुझे दिखाऊंगा।
Genesis 12:2 और मैं तुझ से एक बड़ी जाति बनाऊंगा, और तुझे आशीष दूंगा, और तेरा नाम बड़ा करूंगा, और तू आशीष का मूल होगा।
Genesis 12:3 और जो तुझे आशीर्वाद दें, उन्हें मैं आशीष दूंगा; और जो तुझे कोसे, उसे मैं शाप दूंगा; और भूमण्डल के सारे कुल तेरे द्वारा आशीष पाएंगे।
Genesis 12:4 यहोवा के इस वचन के अनुसार अब्राम चला; और लूत भी उसके संग चला; और जब अब्राम हारान देश से निकला उस समय वह पचहत्तर वर्ष का था।
Genesis 12:5 सो अब्राम अपनी पत्नी सारै, और अपने भतीजे लूत को, और जो धन उन्होंने इकट्ठा किया था, और जो प्राणी उन्होंने हारान में प्राप्त किए थे, सब को ले कर कनान देश में जाने को निकल चला; और वे कनान देश में आ भी गए।
Genesis 12:6 उस देश के बीच से जाते हुए अब्राम शकेम में, जहां मोरे का बांज वृक्ष है, पंहुचा; उस समय उस देश में कनानी लोग रहते थे।
Genesis 12:7 तब यहोवा ने अब्राम को दर्शन देकर कहा, यह देश मैं तेरे वंश को दूंगा: और उसने वहां यहोवा के लिये जिसने उसे दर्शन दिया था, एक वेदी बनाई।
Genesis 12:8 फिर वहां से कूच कर के, वह उस पहाड़ पर आया, जो बेतेल के पूर्व की ओर है; और अपना तम्बू उस स्थान में खड़ा किया जिसकी पच्छिम की ओर तो बेतेल, और पूर्व की ओर ऐ है; और वहां भी उसने यहोवा के लिये एक वेदी बनाई: और यहोवा से प्रार्थना की
Genesis 12:9 और अब्राम कूच कर के दक्खिन देश की ओर चला गया।

एक साल में बाइबल:  
  • 1 शमूएल 27-29
  • लूका 13:1-22