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सोमवार, 12 अप्रैल 2021

जीवन यात्रा

 

          अपनी पुस्तक The Call में ऑस गिन्निस इंग्लैंड के भूतपूर्व प्रधानमंत्री, विंस्टन चर्चिल के जीवन की एक घटना बताते हैं। चर्चिल अपने मित्रों के साथ दक्षिणी फ्रांस में मित्रों के साथ थे। एक ठंडी रात्रि के समय वे आग के पास बैठे हुए थे, और आग में पड़े हुए चीढ़ के लट्ठों को जलते हुए सुन रहे थे; उनके जलने से उनमें से कड़कने, चटकने और फुसफुसाने की आवाज़ें आ रही थीं। अचानक ही उन्होंने अपने चिर-परिचित अंदाज़ में गुर्राती हुई सी आवाज़ में कहा, “मैं समझ सकता हूँ कि ये लट्ठे इस प्रकार की आवाजें क्यों निकाल रहे हैं; मैंने भी जलन का अनुभव किया है।”

          हमारी जीवन यात्रा में कठिनाइयाँ, निराशाएं, खतरे, विपत्तियाँ, हमारी अपनी गलतियों का परिणाम हो सकते हैं, किन्तु फिर भी वे हमें जलन देने वाले अनुभव हो सकते हैं। ऐसी परिस्थितियाँ, धीरे-धीरे हमारे हृदय में से शान्ति और आनन्द को छीन लेती हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि जब दाऊद ने अपने ही पाप के कारण उसके जीवन को खोखला कर देने वाले परिणामों को अनुभव किया, तो उसने अपने इस अनुभव के बारे में लिखा, “जब मैं चुप रहा तब दिन भर कराहते कराहते मेरी हड्डियां पिघल गई। क्योंकि रात दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा; और मेरी तरावट धूप काल की सी झुर्राहट बनती गई” (भजन 32:3-4)।

          ऐसी कठिन परिस्थितियों में हम सहायता तथा आशा के लिए किस की ओर मुड़ते हैं? प्रेरित पौलुस ने, जिसकी मसीही जीवन यात्रा सेवकाई के बोझों और दुखों से भरी हुई थी, लिखा “हम चारों ओर से क्लेश तो भोगते हैं, पर संकट में नहीं पड़ते; निरुपाय तो हैं, पर निराश नहीं होते। सताए तो जाते हैं; पर त्यागे नहीं जाते; गिराए तो जाते हैं, पर नाश नहीं होते” (2 कुरिन्थियों 4:8-9)।

          यह किस प्रकार कार्य करता है? जब हम प्रभु यीशु में विश्राम लेते हैं, तो वह अच्छा चरवाहा हमारे जी में जी ले आता है (भजन 23:3), और जीवन यात्रा के अगले चरण के लिए हमें सामर्थ्य प्रदान करता है। उसका हम से वायदा है कि हमारी जीवन यात्रा के हर कदम में वह हमारे साथ बना रहेगा, और जीवन यात्रा के पूरे होने तक हर कदम में साथ चलता रहेगा (इब्रानियों 13:5)। - बिल क्राऊडर

 

प्रभु इस जीवन यात्रा में मेरा हाथ थामे हुए मेरा मार्गदर्शन करते हुए, मुझे लिए चल।


तुम्हारा स्वभाव लोभरहित हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। इसलिये हम बेधड़क हो कर कहते हैं, कि प्रभु, मेरा सहायक है; मैं न डरूंगा; मनुष्य मेरा क्या कर सकता है। - इब्रानियों 13:5-6

बाइबल पाठ: भजन 32

भजन संहिता 32:1 क्या ही धन्य है वह जिसका अपराध क्षमा किया गया, और जिसका पाप ढाँपा गया हो।

भजन संहिता 32:2 क्या ही धन्य है वह मनुष्य जिसके अधर्म का यहोवा लेखा न ले, और जिसकी आत्मा में कपट न हो।

भजन संहिता 32:3 जब मैं चुप रहा तब दिन भर कराहते कराहते मेरी हड्डियां पिघल गई।

भजन संहिता 32:4 क्योंकि रात दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा; और मेरी तरावट धूप काल की सी झुर्राहट बनती गई।

भजन संहिता 32:5 जब मैं ने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया और अपना अधर्म न छिपाया, और कहा, मैं यहोवा के सामने अपने अपराधों को मान लूंगा; तब तू ने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया।

भजन संहिता 32:6 इस कारण हर एक भक्त तुझ से ऐसे समय में प्रार्थना करे जब कि तू मिल सकता है। निश्चय जब जल की बड़ी बाढ़ आए तौभी उस भक्त के पास न पहुंचेगी।

भजन संहिता 32:7 तू मेरे छिपने का स्थान है; तू संकट से मेरी रक्षा करेगा; तू मुझे चारों ओर से छुटकारे के गीतों से घेर लेगा।

भजन संहिता 32:8 मैं तुझे बुद्धि दूंगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उस में तेरी अगुवाई करूंगा; मैं तुझ पर कृपा दृष्टि रखूंगा और सम्मत्ति दिया करूंगा।

भजन संहिता 32:9 तुम घोड़े और खच्चर के समान न बनो जो समझ नहीं रखते, उनकी उमंग लगाम और बाग से रोकनी पड़ती है, नहीं तो वे तेरे वश में नहीं आने के।।

भजन संहिता 32:10 दुष्ट को तो बहुत पीड़ा होगी; परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह करुणा से घिरा रहेगा।

भजन संहिता 32:11 हे धर्मियों यहोवा के कारण आनन्दित और मगन हो, और हे सब सीधे मन वालों आनन्द से जयजयकार करो!

 

एक साल में बाइबल: 

  • 1 शमूएल 19-21
  • लूका 11:29-54

गुरुवार, 3 सितंबर 2020

यात्रा

 

         कभी-कभी यह जीवन यात्रा इतनी कठिन हो जाती है कि हम अभिभूत हो जाते हैं, और हमें लगता है कि अंधकार का कोई अन्त ही नहीं है। हमारे पारिवारिक जीवन में भी एक समय ऐसा चल रहा था, और एक प्रातः मेरी पत्नी जब परमेश्वर के साथ संगति और प्रार्थना के अपने एकांत-समय के बाद जब बाहर आई तो उसने कहा, “मुझे लगता है कि परमेश्वर चाहता है कि इस अन्धकार में हम जो शिक्षाएँ प्राप्त करें, उन्हें अपने उजियाले के समयों में कभी भूलें नहीं।”

         परमेश्वर के वचन बाइबल में पौलुस भी कुछ ऐसा ही विचार कोरिन्थ के मसीही मण्डली को लिखी उसकी दूसरी पत्री में व्यक्त करता है (2 कुरिन्थियों 1), उन्हें अपने उन कठिन अनुभवों के बारे में बताने के पश्चात जिनका सामना उसे और उसके साथियों को एशिया में करना पड़ा था। पौलुस चाहता था कि कोरिन्थ के मसीही विश्वासी यह समझ सकें कि किस प्रकार परमेश्वर हमारे सबसे अंधकारपूर्ण समय का भी सदुपयोग कर सकता है। वह कहता है कि हम सांत्वना इसलिए पाते हैं, जिससे औरों को सांत्वना देना सीख सकें (पद 4)। पौलुस और उसके साथी अपनी परीक्षा के समयों में परमेश्वर से वे बातें सीख रहे थे जिनका प्रयोग वे कोरिन्थ के लोगों को सिखाने और सांत्वना देने के लिए कर सकते थे, जब कोरिन्थ के लोग परीक्षाओं में से हो कर निकलें। और परमेश्वर यही हम सभी के लिए भी करता है। वह हमारी परीक्षाओं का सदुपयोग हमें वह सिखाने के लिए करेगा जिसका प्रयोग हम औरों की सेवा में कर सकें।

         क्या अपनी जीवन यात्रा में आप अभी अन्धकार के समय में हैं? पौलुस के वचन और अनुभव से प्रोत्साहित हों। भरोसा रखें कि अभी इस समय में भी परमेश्वर आपके कदमों को निर्धारित दिशा में ले कर जा रहा है, साथ ही आपके हृदय पर अपने सत्यों को बैठा रहा, जिससे कि आप उन्हें औरों के साथ, जो ऐसी ही परिस्थितियों में हों, बाँट सकें, उन्हें उभार सकें। जब आप यात्रा की उन कठिनाइयों के अनुभवों से परिचित होंगे, तो अन्य यात्रा करने वालों का भी मार्गदर्शन कर सकेंगे। - रैंडी किल्गोर

 

अन्धकार में हम जो शिक्षाएँ प्राप्त करें, उन्हें अपने उजियाले के समयों में कभी भूलें नहीं।


क्योंकि हमारा पल भर का हल्का सा क्लेश हमारे लिये बहुत ही महत्वपूर्ण और अनन्त महिमा उत्पन्न करता जाता है। - 2 कुरिन्थियों 4:17

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 1:3-11

2 कुरिन्थियों 1:3 हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर, और पिता का धन्यवाद हो, जो दया का पिता, और सब प्रकार की शान्ति का परमेश्वर है।

2 कुरिन्थियों 1:4 वह हमारे सब क्लेशों में शान्ति देता है; ताकि हम उस शान्ति के कारण जो परमेश्वर हमें देता है, उन्हें भी शान्ति दे सकें, जो किसी प्रकार के क्लेश में हों।

2 कुरिन्थियों 1:5 क्योंकि जैसे मसीह के दुख हम अधिक सहभागी होते हैं, वैसे ही हमारी शान्ति भी मसीह के द्वारा अधिक होती है।

2 कुरिन्थियों 1:6 यदि हम क्लेश पाते हैं, तो यह तुम्हारी शान्ति और उद्धार के लिये है और यदि शान्ति पाते हैं, तो यह तुम्हारी शान्ति के लिये है; जिस के प्रभाव से तुम धीरज के साथ उन क्लेशों को सह लेते हो, जिन्हें हम भी सहते हैं।

2 कुरिन्थियों 1:7 और हमारी आशा तुम्हारे विषय में दृढ़ है; क्योंकि हम जानते हैं, कि तुम जैसे दुखों के वैसे ही शान्ति के भी सहभागी हो।

2 कुरिन्थियों 1:8 हे भाइयों, हम नहीं चाहते कि तुम हमारे उस क्लेश से अनजान रहो, जो आसिया में हम पर पड़ा, कि ऐसे भारी बोझ से दब गए थे, जो हमारी सामर्थ्य से बाहर था, यहां तक कि हम जीवन से भी हाथ धो बैठे थे।

2 कुरिन्थियों 1:9 वरन हम ने अपने मन में समझ लिया था, कि हम पर मृत्यु की आज्ञा हो चुकी है कि हम अपना भरोसा न रखें, वरन परमेश्वर का जो मरे हुओं को जिलाता है।

2 कुरिन्थियों 1:10 उसी ने हमें ऐसी बड़ी मृत्यु से बचाया, और बचाएगा; और उस से हमारी यह आशा है, कि वह आगे को भी बचाता रहेगा।

2 कुरिन्थियों 1:11 और तुम भी मिलकर प्रार्थना के द्वारा हमारी सहायता करोगे, कि जो वरदान बहुतों के द्वारा हमें मिला, उसके कारण बहुत लोग हमारी ओर से धन्यवाद करें।

  

एक साल में बाइबल: 

  • भजन 140-142
  • 1 कुरिन्थियों 14:1-20

सोमवार, 15 अप्रैल 2019

दिशा-निर्देश



      हमारे विवाह की सालगिरह पर मेरे पति माईक ने अपने मित्र से एक ऐसी साइकिल कुछ समय के लिए ली जिसपर आगे-पीछे दो जन बैठ सकते थे, जिसमें दो हैंडल तथा दो पैडल थे, और उस पर बैठकर हम दोनों एक रोमांचक सप्रेम भ्रमण पर जा निकले। उस साइकिल पर हमारे चलने के थोड़े ही समय में मुझे बोध हो गया कि क्योंकि मैं पीछे बैठी हुई थी और मेरे सामने माइक के चौड़े कंधे थे, इसलिए मैं अपने सामने के सड़क को स्पष्ट नहीं देख सकती थी, केवल दोनों ओर के दृश्य को ही निहार सकती थी। साथ ही, जो हैंडल मैंने पकडे हुए थे, वे स्थिर जमे हुए थे और उनसे साइकिल को मोड़ा नहीं जा सकता था, वे बस मेरे शरीर के ऊपरी भाग को सहारा देने भर का काम कर रहे थे। अब यह मेरा निर्णय था कि उन सीमाओं के साथ पीछे बैठकर कुड़कुड़ाउँ, या साइकिल को चलाने और सही दिशा देने का नियंत्रण माईक पर छोड़कर आस-पास के दृश्यों और अपने पति के साथ होने का आनन्द लूँ।

      जब परमेश्वर ने अब्राहम को कहा कि वह अपने स्वदेश और परिवार को छोड़कर उसके पीछे हो ले, तो अब्राहम को गंतव्य-स्थान के विषय में कोई विवरण या जानकारी प्रदान नहीं की। न ही परमेश्वर ने अब्राहम को बताया कि वह स्थान कहाँ स्थित है, न् ही वहां के तथा वहाँ के प्राकृतिक संसाधनों बारे में कोई जानकारी प्रदान की। उसे यह भी नहीं बताया कि उस स्थान तक पहुँचने में कितना समय लगेगा या किस मार्ग से होकर जाना होगा। परमेश्वर ने उससे बस इतना कहा कि वह उस देश को जाए जिसे वह उसे दिखाएगा। सामान्यतः किसी यात्रा के लिए जिस जानकारी के होने की अधिकांश मनुष्य लालसा रखते हैं, उसमें से कुछ भी उपलब्ध न होते हुए भी अब्राहम ने परमेश्वर की बात स्वीकार कर ली और उसकी आज्ञाकारिता में परमेश्वर के पीछे निकल पड़ा, और इसे उसका विश्वास कहा गया (इब्रानियों 11:8)।

      आज यदि हम अपने आप को अनिश्चितताओं, अस्पष्ट भविष्य, परिस्थितियों पर नियंत्रण न होने अदि स्थितियों का सामना करते हुए पाते हैं, तो अब्राहम के समान परमेश्वर पर विश्वास रखकर उसका अनुसरण करते रहें; हमारी जीवन यात्रा के लिए परमेश्वर हमें सदा सही दिशा-निर्देश प्रदान करता रहेगा। - कर्स्टन होम्बर्ग


जीवन यात्रा के लिए सही निर्देशों के लिए परमेश्वर पर सदा भरोसा किया जा सकता है।

विश्वास ही से इब्राहीम जब बुलाया गया तो आज्ञा मानकर ऐसी जगह निकल गया जिसे मीरास में लेने वाला था, और यह न जानता था, कि मैं किधर जाता हूं; तौभी निकल गया। - इब्रानियों 11:8

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 12:1-9
Genesis 12:1 यहोवा ने अब्राम से कहा, अपने देश, और अपनी जन्मभूमि, और अपने पिता के घर को छोड़कर उस देश में चला जा जो मैं तुझे दिखाऊंगा।
Genesis 12:2 और मैं तुझ से एक बड़ी जाति बनाऊंगा, और तुझे आशीष दूंगा, और तेरा नाम बड़ा करूंगा, और तू आशीष का मूल होगा।
Genesis 12:3 और जो तुझे आशीर्वाद दें, उन्हें मैं आशीष दूंगा; और जो तुझे कोसे, उसे मैं शाप दूंगा; और भूमण्डल के सारे कुल तेरे द्वारा आशीष पाएंगे।
Genesis 12:4 यहोवा के इस वचन के अनुसार अब्राम चला; और लूत भी उसके संग चला; और जब अब्राम हारान देश से निकला उस समय वह पचहत्तर वर्ष का था।
Genesis 12:5 सो अब्राम अपनी पत्नी सारै, और अपने भतीजे लूत को, और जो धन उन्होंने इकट्ठा किया था, और जो प्राणी उन्होंने हारान में प्राप्त किए थे, सब को ले कर कनान देश में जाने को निकल चला; और वे कनान देश में आ भी गए।
Genesis 12:6 उस देश के बीच से जाते हुए अब्राम शकेम में, जहां मोरे का बांज वृक्ष है, पंहुचा; उस समय उस देश में कनानी लोग रहते थे।
Genesis 12:7 तब यहोवा ने अब्राम को दर्शन देकर कहा, यह देश मैं तेरे वंश को दूंगा: और उसने वहां यहोवा के लिये जिसने उसे दर्शन दिया था, एक वेदी बनाई।
Genesis 12:8 फिर वहां से कूच कर के, वह उस पहाड़ पर आया, जो बेतेल के पूर्व की ओर है; और अपना तम्बू उस स्थान में खड़ा किया जिसकी पच्छिम की ओर तो बेतेल, और पूर्व की ओर ऐ है; और वहां भी उसने यहोवा के लिये एक वेदी बनाई: और यहोवा से प्रार्थना की
Genesis 12:9 और अब्राम कूच कर के दक्खिन देश की ओर चला गया।

एक साल में बाइबल:  
  • 1 शमूएल 27-29
  • लूका 13:1-22



शनिवार, 20 अक्टूबर 2018

यात्रा



      मैं 1960 के बलवाई प्रवृत्ति के दशक में बड़ा हुआ था, और धर्म के विमुख हो गया था। मैं जीवन भर चर्च तो जाता रहा, परन्तु प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास में मैं एक भयानक दुर्घटना के पश्चात, 20 की आयु के आरंभिक वर्षों में आया। उसके बाद से मैंने अपना जीवन दूसरों को हमारे प्रति प्रभु यीशु मसीह के प्रेम के बारे में बताने में ही बिताया है; और यह एक विलक्षण यात्रा रही है।

      निःसंदेह, “यात्रा” इस टूटे सँसार में व्यतीत किए जाने वाले जीवन के अनुभवों का वर्णन है। इस जीवन यात्रा में हम पहाड़ों और घाटियों, मैदानों और नदियों, एकांत सड़कों और व्यस्त राजमार्गों – जीवन में उतार-चढ़ाव, आनन्द और दुःख, संघर्ष और हानि, अकेलापन और व्यथा, आदि सभी प्रकार के अनुभवों से होकर हम निकलते हैं। हमें आगे का मार्ग तो दिखाई नहीं देता है, इसलिए जो जैसा होता है, उस सब से होकर निकलना पड़ता है, वह चाहे वैसा हो या न हो जैसा हम उस मार्ग को चाहते हैं कि हो।

      परन्तु प्रभु यीशु मसीह के अनुयायी को यह निश्चय है कि वह अपनी इस जीवन यात्रा में कभी भी अकेला नहीं है, एक पल के लिए भी नहीं! परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बारंबार आश्वस्त करती है कि हमारे प्रभु परमेश्वर की उपस्थिति हमारे साथ सदैव बनी रहती है। ऐसा कोई स्थान नहीं है जहाँ हम पहुँच सकें, किन्तु हमारा प्रभु वहाँ न हो (भजन 139:7-12)। वह हमें कभी नहीं छोड़ता या त्यागता है (व्यवस्थाविवरण 31:6; इब्रानियों 13:5)। प्रभु यीशु ने अपने शिष्यों से पवित्र-आत्मा को भेजने की प्रतिज्ञा के तुरंत बाद उन्हें यह कहकर भी आश्वस्त किया कि, “मैं तुम्हें अनाथ न छोडूंगा, मैं तुम्हारे पास आता हूं” (यूहन्ना 14:18)।

      हम मसीही अपनी जीवन यात्रा में आने वाली चुनौतियों और अवसरों का निर्भीक होकर दृढ़ता से सामना कर सकते हैं क्योंकि हमारी संपूर्ण यात्रा में हमारे प्रभु परमेश्वर की उपस्थिति हमारे साथ-साथ बनी रहती है, और वही हमें हमारे अनन्त में भी सुरक्षित पहुंचाता है। - बिल क्राउडर


विश्वास यह कभी नहीं जानता है कि उसे कहाँ ले जाया जा रहा है,
 परन्तु वह अपने ले जाने वाले को जानता है, और उससे प्रेम करता है। - ओस्वॉल्ड चैम्बर्स

तू हियाव बान्ध और दृढ़ हो, उन से न डर और न भयभीत हो; क्योंकि तेरे संग चलने वाला तेरा परमेश्वर यहोवा है; वह तुझ को धोखा न देगा और न छोड़ेगा। - व्यवस्थाविवरण 31:6

बाइबल पाठ: यूहन्ना 14:15-21
John 14:15 यदि तुम मुझ से प्रेम रखते हो, तो मेरी आज्ञाओं को मानोगे।
John 14:16 और मैं पिता से बिनती करूंगा, और वह तुम्हें एक और सहायक देगा, कि वह सर्वदा तुम्हारे साथ रहे।
John 14:17 अर्थात सत्य का आत्मा, जिसे संसार ग्रहण नहीं कर सकता, क्योंकि वह न उसे देखता है और न उसे जानता है: तुम उसे जानते हो, क्योंकि वह तुम्हारे साथ रहता है, और वह तुम में होगा।
John 14:18 मैं तुम्हें अनाथ न छोडूंगा, मैं तुम्हारे पास आता हूं।
John 14:19 और थोड़ी देर रह गई है कि फिर संसार मुझे न देखेगा, परन्तु तुम मुझे देखोगे, इसलिये कि मैं जीवित हूं, तुम भी जीवित रहोगे।
John 14:20 उस दिन तुम जानोगे, कि मैं अपने पिता में हूं, और तुम मुझ में, और मैं तुम में।
John 14:21 जिस के पास मेरी आज्ञा है, और वह उन्हें मानता है, वही मुझ से प्रेम रखता है, और जो मुझ से प्रेम रखता है, उस से मेरा पिता प्रेम रखेगा, और मैं उस से प्रेम रखूंगा, और अपने आप को उस पर प्रगट करूंगा।


एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 59-61
  • 2 थिस्सलुनीकियों 3



बुधवार, 17 अक्टूबर 2018

प्रार्थना



      जोई ने बच्चों के कार्यकर्म का आरंभ प्रार्थना के साथ किया, फिर उन बच्चों के साथ एक स्तुति-गीत गाया। फिर उसने उस दिन के वक्ता, एरोन का उन बच्चों से परिचय करवाया और फिर से प्रार्थना की; छः वर्षीय इम्मानुएल अपनी कुर्सी पर बैठा विचलित होने लगा। फिर एरोन ने अपने सन्देश के आरंभ और अन्त में फिर से प्रार्थना की। इम्मानुएल ने शिकायत की: “चार प्रार्थनाएं! इतनी देर तक मुझसे नहीं बैठा जाता है!”


      यदि आपको लगता है कि इम्मानुएल के लिए यह चुनौती कठिन थी, तो फिर परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस द्वारा कही गई बात, “निरन्‍तर प्रार्थना मे लगे रहो” (1 थिस्सलुनीकियों 5:17), अर्थात सदा प्रार्थना के भाव में रहें पर विचार करें। हम में से कुछ व्यसक भी प्रार्थना को उबाने वाला समझते हैं। हो सकता है कि ऐसा इसलिए है क्योंकि हम नहीं जानते हैं कि प्रार्थना में क्या कहना है, या यह नहीं समझते कि प्रार्थना परमेश्वर पिता से वार्तालाप करना है।

      सत्रहवीं शताब्दी में फ्रैन्कोएस फेनेलों द्वारा लिखे गए शब्दों से मुझे प्रार्थना को समझने में बहुत सहायता मिली; उन्होंने लिखा: “आपके मन में जो कुछ भी हो उसे परमेश्वर को बता दीजिए, बिलकुल वैसे जैसे कोई अपने अंतरंग मित्र को अपने मन की हर बात, हर दुःख, हर खुशी बता देता है। उसे अपनी परेशानियां बताईए जिससे वह आपको सांतवना दे; अपने आनन्द की बातें बताईए जिससे वह आपको शान्त और संयमी रखे; उसे अपनी लालसाएं बताईए, जिससे वह उन्हें पवित्र करे;” उसने आगे कहा, “उससे अपनी परीक्षाओं और प्रलाभानों के विषय कहें, जिससे वह आपको उनसे सुरक्षित करे; उसे अपने मन के घाव दिखाईए, जिससे वह उन्हें भर दे;...यदि आप इस प्रकार से अपनी सभी कमजोरियां, आवश्यकताएँ, परेशानियां आदि प्रार्थना में उससे कहेंगे, तो प्रार्थना न तो उबाऊ होगी, और न ही प्रार्थना में कहने के लिए विषयों की कोई कमी अथवा कठिनाई होगी।”

      हम अपनी प्रार्थनाओं के द्वारा परमेश्वर से अपनी घनिष्ठता को बढ़ाते रहें; उसके साथ अधिक से अधिक समय बिताते रहें। - ऐनी सेटास


प्रार्थना परमेश्वर के साथ अंतरंग वार्तालाप है।

परन्तु वह [प्रभु यीशु] जंगलों में अलग जा कर प्रार्थना किया करता था। - लूका 5:16

बाइबल पाठ: 1 थिस्सलुनीकियों 5:12-28
1 Thessalonians 5:12 और हे भाइयों, हम तुम से बिनती करते हैं, कि जो तुम में परिश्रम करते हैं, और प्रभु में तुम्हारे अगुवे हैं, और तुम्हें शिक्षा देते हैं, उन्हें मानो।
1 Thessalonians 5:13 और उन के काम के कारण प्रेम के साथ उन को बहुत ही आदर के योग्य समझो: आपस में मेल-मिलाप से रहो।
1 Thessalonians 5:14 और हे भाइयों, हम तुम्हें समझाते हैं, कि जो ठीक चाल नहीं चलते, उन को समझाओ, कायरों को ढाढ़स दो, निर्बलों को संभालो, सब की ओर सहनशीलता दिखाओ।
1 Thessalonians 5:15 सावधान! कोई किसी से बुराई के बदले बुराई न करे; पर सदा भलाई करने पर तत्‍पर रहो आपस में और सब से भी भलाई ही की चेष्‍टा करो।
1 Thessalonians 5:16 सदा आनन्‍दित रहो।
1 Thessalonians 5:17 निरन्‍तर प्रार्थना मे लगे रहो।
1 Thessalonians 5:18 हर बात में धन्यवाद करो: क्योंकि तुम्हारे लिये मसीह यीशु में परमेश्वर की यही इच्छा है।
1 Thessalonians 5:19 आत्मा को न बुझाओ।
1 Thessalonians 5:20 भविष्यद्वाणियों को तुच्‍छ न जानो।
1 Thessalonians 5:21 सब बातों को परखो: जो अच्छी है उसे पकड़े रहो।
1 Thessalonians 5:22 सब प्रकार की बुराई से बचे रहो।
1 Thessalonians 5:23 शान्‍ति का परमेश्वर आप ही तुम्हें पूरी रीति से पवित्र करे; और तुम्हारी आत्मा और प्राण और देह हमारे प्रभु यीशु मसीह के आने तक पूरे पूरे और निर्दोष सुरक्षित रहें।
1 Thessalonians 5:24 तुम्हारा बुलाने वाला सच्चा है, और वह ऐसा ही करेगा।
1 Thessalonians 5:25 हे भाइयों, हमारे लिये प्रार्थना करो।
1 Thessalonians 5:26 सब भाइयों को पवित्र चुम्बन से नमस्‍कार करो।
1 Thessalonians 5:27 मैं तुम्हें प्रभु की शपथ देता हूं, कि यह पत्री सब भाइयों को पढ़कर सुनाईं जाए।
1 Thessalonians 5:28 हमारे प्रभु यीशु मसीह का अनुग्रह तुम पर होता रहे।


एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 50-52
  • 1 थिस्सलुनीकियों 5



मंगलवार, 16 अक्टूबर 2018

प्रोत्साहन



      मेरे बेटे को पुस्तकें पढ़ने का बहुत शौक है। स्कूल में यदि वह जितनी आवश्यक हैं, उनसे अधिक पुस्तकें पढ़ लेता है, तो उसे पुरुस्कार में इसका एक प्रमाण पत्र मिलता है। यह प्रोत्साहन उसे इस भले कार्य को करते रहने के लिए प्रेरित करता रहता है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में जब पौलुस ने थिस्सलुनीकिया की मसीही विश्वासियों की मण्डली को पत्र लिखा, तो उसने उन्हें किसी पुरुस्कार के द्वारा नहीं वरन प्रोत्साहन के शब्दों के द्वारा प्रेरित किया। उसने उन्हें लिखा, “निदान, हे भाइयों, हम तुम से बिनती करते हैं, और तुम्हें प्रभु यीशु में समझाते हैं, कि जैसे तुम ने हम से योग्य चाल चलना, और परमेश्वर को प्रसन्न करना सीखा है, और जैसा तुम चलते भी हो, वैसे ही और भी बढ़ते जाओ” (1 थिस्सलुनीकियों 4:1)। ये मसीही विश्वासी अपने जीवनों के द्वारा परमेश्वर को प्रसन्न कर रहे थे; और पौलुस ने उन्हें प्रेरित किया कि वे ऐसा और भी अधिक करते रहें।

      संभव है कि आप और मैं आज अपने प्रेमी परमेश्वर पिता को निकटता से जानने, उससे प्रेम करने, और उसे प्रसन्न करने में संलग्न हों। हम पौलुस के इस प्रोत्साहन को अपने लिए लें और अपने विश्वास में बने तथा बढ़ते रहें। क्यों न इससे एक कदम और आगे बढ़ें, तथा किसी और को भी प्रोत्साहित करें कि वह भी अपने विश्वास में बना रहे तथा बढ़ता रहे?

      पौलुस के उपरोक्त शब्दों के द्वारा आज आप किसे प्रोत्साहित कर सकते हैं? क्या आपके ध्यान में ऐसा कोई आता है जो प्रभु परमेश्वर का अनुसरण तथा उसे प्रसन्न करने में लगा रहता है? उसे प्रोत्साहन का एक छोटा पत्र लिखें, अथवा फोन करके प्रोत्साहित करें, कि वह मसीही विश्वास की अपनी यात्रा में स्वयँ भी अग्रसर होता रहे, तथा औरों को भी करता रहे।

      आज आप जो कहेंगे, हो सकता है कि उसे अपनी मसीही विश्वास में बढ़ते रहने के लिए उस प्रोत्साहन की आवश्यकता हो! – कीला ओकोआ


आज किसी को प्रोत्साहित करें कि वह परमेश्वर के लिए जीवन व्यतीत करता रहे।

इसलिये हे भाइयों, मैं तुम से परमेश्वर की दया स्मरण दिला कर बिनती करता हूं, कि अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान कर के चढ़ाओ: यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है। और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो। - रोमियों 12:1-2

बाइबल पाठ: 1 थिस्सलुनीकियों 4:1-12
1 Thessalonians 4:1 निदान, हे भाइयों, हम तुम से बिनती करते हैं, और तुम्हें प्रभु यीशु में समझाते हैं, कि जैसे तुम ने हम से योग्य चाल चलना, और परमेश्वर को प्रसन्न करना सीखा है, और जैसा तुम चलते भी हो, वैसे ही और भी बढ़ते जाओ।
1 Thessalonians 4:2 क्योंकि तुम जानते हो, कि हम ने प्रभु यीशु की ओर से तुम्हें कौन कौन सी आज्ञा पहुंचाई।
1 Thessalonians 4:3 क्योंकि परमेश्वर की इच्छा यह है, कि तुम पवित्र बनो: अर्थात व्यभिचार से बचे रहो।
1 Thessalonians 4:4 और तुम में से हर एक पवित्रता और आदर के साथ अपने पात्र को प्राप्त करना जाने।
1 Thessalonians 4:5 और यह काम अभिलाषा से नहीं, और न उन जातियों के समान, जो परमेश्वर को नहीं जानतीं।
1 Thessalonians 4:6 कि इस बात में कोई अपने भाई को न ठगे, और न उस पर दांव चलाए, क्योंकि प्रभु इन सब बातों का पलटा लेने वाला है; जैसा कि हम ने पहिले तुम से कहा, और चिताया भी था।
1 Thessalonians 4:7 क्योंकि परमेश्वर ने हमें अशुद्ध होने के लिये नहीं, परन्तु पवित्र होने के लिये बुलाया है।
1 Thessalonians 4:8 इस कारण जो तुच्‍छ जानता है, वह मनुष्य को नहीं, परन्तु परमेश्वर को तुच्‍छ जानता है, जो अपना पवित्र आत्मा तुम्हें देता है।
1 Thessalonians 4:9 किन्‍तु भाईचारे की प्रीति के विषय में यह अवश्य नहीं, कि मैं तुम्हारे पास कुछ लिखूं; क्योंकि आपस में प्रेम रखना तुम ने आप ही परमेश्वर से सीखा है।
1 Thessalonians 4:10 और सारे मकिदुनिया के सब भाइयों के साथ ऐसा करते भी हो, पर हे भाइयों, हम तुम्हें समझाते हैं, कि और भी बढ़ते जाओ।
1 Thessalonians 4:11 और जैसी हम ने तुम्हें आज्ञा दी, वैसे ही चुपचाप रहने और अपना अपना काम काज करने, और अपने अपने हाथों से कमाने का प्रयत्न करो।
1 Thessalonians 4:12 कि बाहर वालों के साथ सभ्यता से बर्ताव करो, और तुम्हें किसी वस्तु की घटी न हो।


एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 47-49
  • 1 थिस्सलुनीकियों 4



मंगलवार, 27 दिसंबर 2016

निकल आना


   एक बार जब हमारा परिवार यात्रा में था, तो यात्रा के दौरान जिस स्थान पर जहाँ हम पहुँचे ही थे, वहाँ भीषण चक्रवादी तूफान आने की चेतावनी ज़ारी की गई। हमारे लिए अचानक ही सब कुछ बदल गया क्योंकि हमें लगा कि हमारे बच्चे खतरे में हैं।

   मैंने इस घटना का उल्लेख इसलिए किया है जिससे कि हम समझ सकें कि यूसुफ और मरियम के लिए कैसा रहा होगा जब वे अपने साथ छोटे बालक यीशु को लेकर मिस्त्र को गए। उन पर किसी चक्रवादी तूफान नहीं वरन राजा हेरोदेस का खतरा था, जो उनके बालक को मार डालना चाहता था। कल्पना कीजिए कि उनके लिए कितना भयावह रहा होगा, यह जानते हुए यात्रा करते जाना कि "...हेरोदेस इस बालक को ढूंढ़ने पर है कि उसे मरवा डाले" (मत्ती 2:13)।

   सामान्यतः हम क्रिसमस के समय का बड़ा साधारण और सुचारू दृष्टिकोण रखते हैं - शान्तिमय दृश्य में रंभाते हुए गाय-बैल, प्रभु यीशु की चरनी के पास दण्डवत करते हुए चरवाहे, आदि। परन्तु प्रभु यीशु के परिवार के लिए, हेरोदेस के भय से भागते हुए, ऐसी कोई शान्ति नहीं थी। जब तक स्वर्गदूत ने उन्हें सुरक्षित हो जाने तथा मिस्त्र से निकल आने के लिए नहीं कहा वे वापस अपने घर नासरत नहीं आ सके (पद 20-23)।

   प्रभु यीशु के देहधारण करने के लिए हमारे अन्दर कैसी श्रद्धा होनी चाहिए; वह प्रभु जो अपने पिता परमेश्वर के साथ स्वर्ग की महिमा का पात्र था, उस स्वर्गीय महिमा को छोड़कर पृथ्वी पर आ गया, उसने निर्धनता में जन्म लिया, यद्यपि वह सदा ही सच्चा, खरा और निर्दोष था और सबका भला करता था फिर भी उसने जीवन में अनेकों कठिन परिस्थितियों, झूठे दोषारोपणों और प्राण के खतरों का सामना किया, और अन्ततः हमारे पापों की क्षमा तथा उद्धार के लिए स्वेच्छा से क्रूस पर बलिदान हो गया।

   मिस्त्र से निकल आना तो एक बात है, परन्तु स्वर्ग की महिमा और आदर छोड़कर हम पापी मनुष्यों के लिए अपमानित होने और मारे जाने के लिए निकल आना और ही बात है - यही इस घटना का महान और विलक्षण भाग है। - डेव ब्रैनन


प्रभु यीशु हमारे लिए पृथ्वी पर आ गया जिससे हम उसके साथ स्वर्ग जा सकें।

किसी धर्मी जन के लिये कोई मरे, यह तो र्दुलभ है, परन्तु क्या जाने किसी भले मनुष्य के लिये कोई मरने का भी हियाव करे। परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा। - रोमियों 5:7-8

बाइबल पाठ: मत्ती 2:13-23
Matthew 2:13 उन के चले जाने के बाद देखो, प्रभु के एक दूत ने स्‍वप्‍न में यूसुफ को दिखाई देकर कहा, उठ; उस बालक को और उस की माता को ले कर मिस्र देश को भाग जा; और जब तक मैं तुझ से न कहूं, तब तक वहीं रहना; क्योंकि हेरोदेस इस बालक को ढूंढ़ने पर है कि उसे मरवा डाले। 
Matthew 2:14 वह रात ही को उठ कर बालक और उस की माता को ले कर मिस्र को चल दिया। 
Matthew 2:15 और हेरोदेस के मरने तक वहीं रहा; इसलिये कि वह वचन जो प्रभु ने भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा था कि मैं ने अपने पुत्र को मिस्र से बुलाया पूरा हो। 
Matthew 2:16 जब हेरोदेस ने यह देखा, कि ज्योतिषियों ने मेरे साथ ठट्ठा किया है, तब वह क्रोध से भर गया; और लोगों को भेज कर ज्योतिषियों से ठीक ठीक पूछे हुए समय के अनुसार बैतलहम और उसके आस पास के सब लड़कों को जो दो वर्ष के, वा उस से छोटे थे, मरवा डाला। 
Matthew 2:17 तब जो वचन यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा गया था, वह पूरा हुआ, 
Matthew 2:18 कि रामाह में एक करूण-नाद सुनाई दिया, रोना और बड़ा विलाप, राहेल अपने बालकों के लिये रो रही थी, और शान्‍त होना न चाहती थी, क्योंकि वे हैं नहीं।
Matthew 2:19 हेरोदेस के मरने के बाद देखो, प्रभु के दूत ने मिस्र में यूसुफ को स्‍वप्‍न में दिखाई देकर कहा। 
Matthew 2:20 कि उठ, बालक और उस की माता को ले कर इस्राएल के देश में चला जा; क्योंकिं जो बालक के प्राण लेना चाहते थे, वे मर गए। 
Matthew 2:21 वह उठा, और बालक और उस की माता को साथ ले कर इस्राएल के देश में आया। 
Matthew 2:22 परन्तु यह सुनकर कि अरिखलाउस अपने पिता हेरोदेस की जगह यहूदिया पर राज्य कर रहा है, वहां जाने से डरा; और स्‍वप्‍न में चितौनी पाकर गलील देश में चला गया। 
Matthew 2:23 और नासरत नाम नगर में जा बसा; ताकि वह वचन पूरा हो, जो भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा कहा गया था, कि वह नासरी कहलाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • ज़कर्याह 1-4
  • प्रकाशितवाक्य 18


शुक्रवार, 22 अप्रैल 2016

कृपा


   कुछ मित्रों के साथ यात्रा करते हुए हमने मार्ग के किनारे एक परिवार को बेबस सा खड़ा हुआ देखा। मेरे मित्रों ने तुरंत सड़क के किनारे होकर अपनी गाड़ी रोकी और उस परिवार की सहायता के लिए उनके पास पहुँचे। उन्होंने उस परिवार की गाड़ी की जांच-पड़ताल करी, उसे पुनः चालू किया और उन लोगों को पैट्रोल भरवाने के लिए कुछ पैसे भी दिए। जब परिवार की माँ बारंबार उनका धन्यवाद करने लगी, तो मेरे मित्रों ने उत्तर दिया, "आपकी सहायाता करके हमें आनन्द मिला है, और हम यह सब प्रभु यीशु के नाम में कर रहे हैं।" जब हम अपनी गाड़ी में बैठकर आगे बढ़े तो मैं विचार करने लागा कि मेरे उन मित्रों के लिए ज़रूरतमन्दों की सहायता करना और अपनी उदारता का स्त्रोत प्रभु यीशु मसीह को बताना कितना स्वाभाविक था।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के दो पात्र, प्रभु यीशु के चेले, पतरस और यूहन्ना ने भी आनन्दपूर्वक यरूशालेम के मन्दिर के बाहर बैठे जन्म के लंगड़े भिखारी के प्रति ऐसे ही उदारता दिखाई, और उसे चंगाई दी (प्रेरितों 3:1-10)। इस कारण उन्हें पकड़ कर अधिकारियों के सामने प्रस्तुत किया गया जिन्होंने उनसे पूछा, "...तुम ने यह काम किस सामर्थ से और किस नाम से किया है" (प्रेरितों 4:7)? इस पर पतरस ने उत्तर दिया, "हे लोगों के सरदारों और पुरनियों, इस दुर्बल मनुष्य के साथ जो भलाई की गई है, यदि आज हम से उसके विषय में पूछ पाछ की जाती है, कि वह क्योंकर अच्छा हुआ। तो तुम सब और सारे इस्त्राएली लोग जान लें कि यीशु मसीह नासरी के नाम से जिसे तुम ने क्रूस पर चढ़ाया, और परमेश्वर ने मरे हुओं में से जिलाया, यह मनुष्य तुम्हारे साम्हने भला चंगा खड़ा है" (प्रेरितों 4:9-10)।

   कृपा परमेश्वर के पवित्र आत्मा से मिलने वाले फलों में से एक फल है (गलतियों 5:23), और हम मसीही विश्वासियों के लिए औरों के साथ प्रभु यीशु मसीह के बारे में बाँटने का एक बहुत सामर्थी संदर्भ बना कर देती है। - डेविड मैक्कैसलैंड


कृपा का एक कार्य परमेश्वर के प्रेम के बारे में अनेकों उपदेशों से कहीं अधिक सिखा सकता है।

पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, मेल, धीरज, और कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं; ऐसे ऐसे कामों के विरोध में कोई भी व्यवस्था नहीं। - गलतियों 5:22-23

बाइबल पाठ: प्रेरितों 4:1-13
Acts 4:1 जब वे लोगों से यह कह रहे थे, तो याजक और मन्दिर के सरदार और सदूकी उन पर चढ़ आए। 
Acts 4:2 क्योंकि वे बहुत क्रोधित हुए कि वे लोगों को सिखाते थे और यीशु का उदाहरण दे देकर मरे हुओं के जी उठने का प्रचार करते थे। 
Acts 4:3 और उन्होंने उन्हें पकड़कर दूसरे दिन तक हवालात में रखा क्योंकि सन्‍धया हो गई थी। 
Acts 4:4 परन्तु वचन के सुनने वालों में से बहुतों ने विश्वास किया, और उन की गिनती पांच हजार पुरूषों के लगभग हो गई।
Acts 4:5 दूसरे दिन ऐसा हुआ कि उन के सरदार और पुरिनये और शास्त्री। 
Acts 4:6 और महायाजक हन्ना और कैफा और यूहन्ना और सिकन्‍दर और जितने महायाजक के घराने के थे, सब यरूशलेम में इकट्ठे हुए। 
Acts 4:7 और उन्हें बीच में खड़ा कर के पूछने लगे, कि तुम ने यह काम किस सामर्थ से और किस नाम से किया है? 
Acts 4:8 तब पतरस ने पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हो कर उन से कहा। 
Acts 4:9 हे लोगों के सरदारों और पुरनियों, इस दुर्बल मनुष्य के साथ जो भलाई की गई है, यदि आज हम से उसके विषय में पूछ पाछ की जाती है, कि वह क्योंकर अच्छा हुआ। 
Acts 4:10 तो तुम सब और सारे इस्त्राएली लोग जान लें कि यीशु मसीह नासरी के नाम से जिसे तुम ने क्रूस पर चढ़ाया, और परमेश्वर ने मरे हुओं में से जिलाया, यह मनुष्य तुम्हारे साम्हने भला चंगा खड़ा है। 
Acts 4:11 यह वही पत्थर है जिसे तुम राजमिस्त्रियों ने तुच्‍छ जाना और वह कोने के सिरे का पत्थर हो गया। 
Acts 4:12 और किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं; क्योंकि स्वर्ग के नीचे मनुष्यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया, जिस के द्वारा हम उद्धार पा सकें।
Acts 4:13 जब उन्होंने पतरस और यूहन्ना का हियाव देखा, ओर यह जाना कि ये अनपढ़ और साधारण मनुष्य हैं, तो अचम्भा किया; फिर उन को पहचाना, कि ये यीशु के साथ रहे हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 14-15
  • लूका 17:1-19



मंगलवार, 29 दिसंबर 2015

रुचि


   अपने जीवन के अन्तिम दिनों में भी सी. एस. ल्यूईस युवा मसीही विश्वासियों की आत्मिक उन्नति में रुचि रखते थे। अपने देहांत के समय वे अस्वस्थ थे, फिर भी फिलिप नामक एक बच्चे के पत्र का उन्होंने उत्तर दिया। अपने उत्तर में उन्होंने उस बच्चे की लिखने की शैली की प्रशंसा करी, और उससे कहा कि वे यह जानकर बहुत प्रसन्न हैं कि उसने यह समझ लिया है कि नारनिया संबंधित उनकी कहानियों में असलन नाम का सिंह प्रभु यीशु मसीह को दर्शाता है। यह उत्तर लिखने के अगले दिन, ऑक्सफर्ड, इंगलैंड में स्थित उनके घर में, उनके 65वें जन्मदिन से एक सप्ताह पूर्व, ल्यूईस की मृत्यु हो गई।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित यूहन्ना ने अपने आत्मिक बच्चों को, अपने अन्तिम वर्षों में, पत्र लिखे। उन पत्रों में हम एक परिपक्व मसीही विश्वासी के आनन्द को देखते हैं, जो अपने युवा आत्मिक बच्चों को प्रोत्साहित कर रहा है कि सत्य और मसीह यीशु के पीछे चलते रहें। यूहन्ना ने लिखा, "मुझे इस से बढ़कर और कोई आनन्द नहीं, कि मैं सुनूं, कि मेरे लड़के-बाले सत्य पर चलते हैं" (3 यूहन्ना 1:4)। चाहे यूहन्ना द्वारा लिखित यह पत्री छोटी ही है, लेकिन इसमें हम उस आनन्द को स्पष्ट देख सकते हैं जो आने वाली पीढ़ी का आत्मिक पालन-पोषण करने, उन्हें संभालने और प्रोत्साहित करने और उन्हें बढ़ता हुआ देखने से आता है।

   हर परिपक्व मसीही विश्वासी का यह ध्येय होना चाहिए कि वह मसीही विश्वासियों की अगली पीढ़ी को आत्मिक समझ-बूझ में बढ़ावा दे, समझाए, प्रोत्साहित करे। ऐसा करने के लिए वे विभिन्न तरीके अपना सकते हैं - प्रोत्साहन के कुछ शब्द लिखकर भेजना, उनके साथ प्रार्थना करना, उन्हें अच्छी और सही सलाह देना इत्यादि, जिनके द्वारा वे परमेश्वर के साथ अपनी आत्मिक यात्रा में आगे बढ़ सकते हैं। परिपक्व विश्वासियों द्वारा आत्मिक बच्चों के जीवनों में दिखाई गई रुचि उन बच्चों को परिपक्व होने में बहुत सहायक होगी। - डेनिस फिशर


मार्ग की जानकारी रखने वाले के साथ यात्रा करना यात्रा को बेहतर बना देता है।

यह मनुष्य का पुत्र कौन है? यीशु ने उन से कहा, ज्योति अब थोड़ी देर तक तुम्हारे बीच में है, जब तक ज्योति तुम्हारे साथ है तब तक चले चलो; ऐसा न हो कि अन्धकार तुम्हें आ घेरे; जो अन्धकार में चलता है वह नहीं जानता कि किधर जाता है। जब तक ज्योति तुम्हारे साथ है, ज्योति पर विश्वास करो कि तुम ज्योति के सन्तान होओ। ये बातें कहकर यीशु चला गया और उन से छिपा रहा। - यूहन्ना 12:35-36


बाइबल पाठ: 3 यूहन्ना
3 John 1:1 मुझ प्राचीन की ओर से उस प्रिय गयुस के नाम, जिस से मैं सच्चा प्रेम रखता हूं।
3 John 1:2 हे प्रिय, मेरी यह प्रार्थना है; कि जैसे तू आत्मिक उन्नति कर रहा है, वैसे ही तू सब बातों मे उन्नति करे, और भला चंगा रहे। 
3 John 1:3 क्योंकि जब भाइयों ने आकर, तेरे उस सत्य की गवाही दी, जिस पर तू सचमुच चलता है, तो मैं बहुत ही आनन्‍दित हुआ। 
3 John 1:4 मुझे इस से बढ़कर और कोई आनन्द नहीं, कि मैं सुनूं, कि मेरे लड़के-बाले सत्य पर चलते हैं। 
3 John 1:5 हे प्रिय, जो कुछ तू उन भाइयों के साथ करता है, जो परदेशी भी हैं, उसे विश्वासी की नाईं करता है। 
3 John 1:6 उन्होंने मण्‍डली के साम्हने तेरे प्रेम की गवाही दी थी: यदि तू उन्हें उस प्रकार विदा करेगा जिस प्रकार परमेश्वर के लोगों के लिये उचित है तो अच्छा करेगा। 
3 John 1:7 क्योंकि वे उस नाम के लिये निकले हैं, और अन्यजातियों से कुछ नहीं लेते। 
3 John 1:8 इसलिये ऐसों का स्‍वागत करना चाहिए, जिस से हम भी सत्य के पक्ष में उन के सहकर्मी हों।
3 John 1:9 मैं ने मण्‍डली को कुछ लिखा था; पर दियुत्रिफेस जो उन में बड़ा बनना चाहता है, हमें ग्रहण नहीं करता। 
3 John 1:10 सो जब मैं आऊंगा, तो उसके कामों की जो वह कर रहा है सुधि दिलाऊंगा, कि वह हमारे विषय में बुरी बुरी बातें बकता है; और इस पर भी सन्‍तोष न कर के आप ही भाइयों को ग्रहण नहीं करता, और उन्हें जो ग्रहण करना चाहते हैं, मना करता है: और मण्‍डली से निकाल देता है। 
3 John 1:11 हे प्रिय, बुराई के नहीं, पर भलाई के अनुयायी हो, जो भलाई करता है, वह परमेश्वर की ओर से है; पर जो बुराई करता है, उसने परमेश्वर को नहीं देखा। 
3 John 1:12 देमेत्रियुस के विषय में सब ने वरन सत्य ने भी आप ही गवाही दी: और हम भी गवाही देते हैं, और तू जानता है, कि हमारी गवाही सच्ची है।
3 John 1:13 मुझे तुझ को बहुत कुछ लिखना तो था; पर सियाही और कलम से लिखना नहीं चाहता। 
3 John 1:14 पर मुझे आशा है कि तुझ से शीघ्र भेंट करूंगा: तब हम आम्हने साम्हने बातचीत करेंगे: तुझे शान्‍ति मिलती रहे। यहां के मित्र तुझे नमस्‍कार करते हैं: वहां के मित्रों से नाम ले ले कर नमस्‍कार कह देना।

एक साल में बाइबल: 
  • ज़कर्याह 9-12
  • प्रकाशितवाक्य 20


गुरुवार, 19 नवंबर 2015

यात्रा


   हाल ही में मैंने अपने साथ कॉलेज से स्नात्क होने वाले छात्रों के बारे में पता लगाया, और पाया कि मेरे साथ के कई विद्यार्थी अब संसार से कूच कर चुके हैं; जीवन के अल्पकालीन होने का यह गंभीर स्मरण था। परमेश्वर के वचन बाइबल में मनुष्य की आयु के लिए लिखा है, "हमारी आयु के वर्ष सत्तर तो होते हैं, और चाहे बल के कारण अस्सी वर्ष के भी हो जाएं, तौभी उनका घमण्ड केवल नष्ट और शोक ही शोक है; क्योंकि वह जल्दी कट जाती है, और हम जाते रहते हैं" (भजन 90:10) - बस अस्सी वर्ष के लगभग और हमारे संसार से कूच करके अनन्तकाल में प्रवेश करने का समय हो जाता है। भजनकार सही है, हम इस पृथ्वी पर परदेशी और यात्री ही तो हैं (भजन 39:12)।

   जीवन के अल्पकालीन होने के कारण हमें अपने ’अन्त’ तथा अनन्त, दोनों के बारे में गंभीरता से विचार कर लेना चाहिए, यह जानते हुए कि हम कैसे अनित्य हैं (भजन 39:4); और जैसे जैसे हमारा अन्त समय निकट आता जाता है, यह भावना और प्रबल होती जाती है कि संसार हमारा घर नहीं है, हम तो यहाँ परदेशी और यात्री मात्र हैं। लेकिन हम मसीही विश्वासियों को एक बहुत सामर्थी आश्वासन भी है - इस यात्रा में हम अकेले नहीं हैं; हमारा परमेश्वर पिता भी हमारे हर पल, हर पग में हमारे साथ बना रहता है। इस कारण यात्री और परदेशी होने तथा अनन्तकाल व्यतीत करने संसार से बाहर जाने का विचार हमारे लिए कम परेशानी, कम भय और कम चिंता उत्पन्न करने वाला है। इस संसार में भी और आने वाले संसार में भी हमारा प्रेमी स्वर्गीय पिता हमारा सहायक तथा मार्गदर्शक बनकर सदा हमारे साथ रहता है (मत्ती 28:20); अपनी यात्रा में हम कभी अकेले नहीं होते (भजन 73:24-25)।

   हमारे माता-पिता, जीवन साथी, मित्रगण हमारी नज़रों से ओझल हो सकते हैं, लेकिन हम जानते हैं कि परमेश्वर सदा हमारे साथ बना रहता है, और जैसा एक पुरानी कहावत है, ’अच्छे साथी के साथ मार्ग सरल प्रतीत होता है’ - इस लोक तथा आते लोक, दोनों में परमेश्वर का साथ हमारी यात्रा को सरल और सार्थक बना देता है। - डेविड रोपर


जीवन के थका देने वाले मार्ग पर प्रभु यीशु आपका भारी बोझ उठाना चाहता है।

तू सम्मति देता हुआ, मेरी अगुवाई करेगा, और तब मेरी महिमा कर के मुझ को अपने पास रखेगा। स्वर्ग में मेरा और कौन है? तेरे संग रहते हुए मैं पृथ्वी पर और कुछ नहीं चाहता। - भजन 73:24-25

बाइबल पाठ: - भजन 39
Psalms 39:1 मैं ने कहा, मैं अपनी चाल चलन में चौकसी करूंगा, ताकि मेरी जीभ से पाप न हो; जब तक दुष्ट मेरे साम्हने है, तब तक मैं लगाम लगाए अपना मुंह बन्द किए रहूंगा। 
Psalms 39:2 मैं मौन धारण कर गूंगा बन गया, और भलाई की ओर से भी चुप्पी साधे रहा; और मेरी पीड़ा बढ़ गई, 
Psalms 39:3 मेरा हृदय अन्दर ही अन्दर जल रहा था। सोचते सोचते आग भड़क उठी; तब मैं अपनी जीभ से बोल उठा; 
Psalms 39:4 हे यहोवा ऐसा कर कि मेरा अन्त मुझे मालुम हो जाए, और यह भी कि मेरी आयु के दिन कितने हैं; जिस से मैं जान लूं कि कैसा अनित्य हूं! 
Psalms 39:5 देख, तू ने मेरे आयु बालिश्त भर की रखी है, और मेरी अवस्था तेरी दृष्टि में कुछ है ही नहीं। सचमुच सब मनुष्य कैसे ही स्थिर क्यों न हों तौभी व्यर्थ ठहरे हैं। 
Psalms 39:6 सचमुच मनुष्य छाया सा चलता फिरता है; सचमुच वे व्यर्थ घबराते हैं; वह धन का संचय तो करता है परन्तु नहीं जानता कि उसे कौन लेगा! 
Psalms 39:7 और अब हे प्रभु, मैं किस बात की बाट जोहूं? मेरी आशा तो तेरी ओर लगी है। 
Psalms 39:8 मुझे मेरे सब अपराधों के बन्धन से छुड़ा ले। मूढ़ मेरी निन्दा न करने पाए। 
Psalms 39:9 मैं गूंगा बन गया और मुंह न खोला; क्योंकि यह काम तू ही ने किया है। 
Psalms 39:10 तू ने जो विपत्ति मुझ पर डाली है उसे मुझ से दूर कर दे, क्योंकि मैं तो तेरे हाथ की मार से भस्म हुआ जाता हूं। 
Psalms 39:11 जब तू मनुष्य को अधर्म के कारण डाँट डपटकर ताड़ना देता है; तब तू उसकी सुन्दरता को पतंगे की नाईं नाश करता है; सचमुच सब मनुष्य व्यर्थ अभिमान करते हैं।
Psalms 39:12 हे यहोवा, मेरी प्रार्थना सुन, और मेरी दोहाई पर कान लगा; मेरा रोना सुनकर शांत न रह! क्योंकि मैं तेरे संग एक परदेशी यात्री की नाईं रहता हूं, और अपने सब पुरखाओं के समान परदेशी हूं। 
Psalms 39:13 आह! इस से पहिले कि मैं यहां से चला जाऊं और न रह जाऊं, मुझे बचा ले जिस से मैं प्रदीप्त जीवन प्राप्त करूं!

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 11-13
  • याकूब 1


शनिवार, 11 जुलाई 2015

मार्ग


   अपनी पुस्तक A Sweet and Bitter Providence में लेखक जॉन पाइपर परमेश्वर द्वारा दिए जाने वाले मार्गदर्शन और प्रावधानों के बारे कुछ विचार प्रस्तुत करता है; जैसे: "जीवन, एक आशीष से दूसरी आशीष तक और फिर अन्ततः स्वर्ग तक पहुँचाने वाली सीधी रेखा नहीं है। जीवन परेशानियों से भरा एक घुमावदार मार्ग है...परमेश्वर हर परेशानी के आने पर प्रगट होकर उसे मिटाने नहीं आता। परमेश्वर हमारे जीवन मार्ग की दिशा और अपनी दूरगामी योजनाओं के निर्धारित परिणामों के अनुसार हमारी परेशानियों का प्रबंधन करता है जिससे अनन्तः हमारी भलाई और प्रभु यीशु की महिमा हो।"

   जब यहूदी अपने सालाना पर्वों को मनाने यरुशलेम आते थे तो उन्हें निश्चय रहता था कि परमेश्वर उनकी दिशा और घुमावदार तथा परेशानियों से भरे मार्गों को नियंत्रित कर रहा है। अपनी यात्रा के दौरान वे अनेक भजन गाते थे, जिनमें से एक था भजन 121। इस भजन के आरंभ में लिखा गया प्रश्न: "...मुझे सहायता कहां से मिलेगी?" उनके किसी सन्देह को नहीं वरन परम-प्रधान और सब बातों पर नियंत्रण रखने वाले परमेश्वर पर उनके विश्वास को दिखाता था (पद 1-2)। वे जानते थे कि संसार के रक्षक या सुरक्षाकर्मी ऊँघ सकते हैं, संसार के देवी-देवता सो सकते हैं और उन के उपासक उन्हें उनकी निद्रा से जगाने के प्रयास भी करते हैं (1 राजा 18:27), परन्तु इस्त्राएल का परमेश्वर सदा जागृत और सचेत रहता है और उनकी रक्षा करता रहता है (पद 3-4)। परमेश्वर यहोवा अपनी प्रजा के साथ बना रहता है, उनकी सहायता तथा रक्षा करता है।

   जीवन मार्ग अनदेखे और अनजाने खतरों से भरा एक घुमावदार मार्ग है, परन्तु उन इस्त्राएलियों के समान ही हम मसीही विश्वासी भी अपने जीवन मार्ग पर परमेश्वर पिता की लगातार हमारे साथ बनी रहने वाली उपस्थिति, उसकी सुरक्षा, उसके प्रावधानों और उस की देखरेख के लिए निश्चित एवं निश्चिंत रह सकते हैं। - मार्विन विलियम्स


परेशानियों का कुछ पता नहीं है; परमेश्वर की उपस्थिति और प्रावधान निश्चित हैं।

हे यहोवा के प्रेमियों, बुराई से घृणा करो; वह अपने भक्तों के प्राणों की रक्षा करता, और उन्हें दुष्टों के हाथ से बचाता है। - भजन 97:10

बाइबल पाठ: भजन 121:1-8
Psalms 121:1 मैं अपनी आंखें पर्वतों की ओर लगाऊंगा। मुझे सहायता कहां से मिलेगी? 
Psalms 121:2 मुझे सहायता यहोवा की ओर से मिलती है, जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है।
Psalms 121:3 वह तेरे पांव को टलने न देगा, तेरा रक्षक कभी न ऊंघेगा। 
Psalms 121:4 सुन, इस्राएल का रक्षक, न ऊंघेगा और न सोएगा।
Psalms 121:5 यहोवा तेरा रक्षक है; यहोवा तेरी दाहिनी ओर तेरी आड़ है। 
Psalms 121:6 न तो दिन को धूप से, और न रात को चांदनी से तेरी कुछ हानि होगी।
Psalms 121:7 यहोवा सारी विपत्ति से तेरी रक्षा करेगा; वह तेरे प्राण की रक्षा करेगा। 
Psalms 121:8 यहोवा तेरे आने जाने में तेरी रक्षा अब से ले कर सदा तक करता रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 1-3
  • प्रेरितों 17:1-15


गुरुवार, 14 अगस्त 2014

योग्य


   हमारी एक मित्र अकसर तसमानिया के होबार्ट शहर जाया करती थी और हम सोचते थे कि ऐसा क्या है जिसके कारण वह बार बार होबार्ट जाती रहती है। हाल ही में उसने हमें निमंत्रण दिया कि हम भी उसके साथ वहाँ पर कुछ समय व्यतीत करें। हम हवाई आडे से निकल कर एक पुल पर से होकर निकले, फिर शहर और उसके आस-पास बसी हुई बस्ती से निकलने लगे - यात्रा में कुछ भी अनूठा या आकर्षक नहीं था, परन्तु हम आगे की ओर बढ़ते रहे। फिर चढ़ाई आरंभ हो गई, कुछ तीव्र मोड़ों और खड़ी चढ़ाई के पश्चात हमें नीचे का समुद्र तट दिखाई देने लगा, लेकिन उसमें भी कुछ विशेष बात नहीं थी।

   अन्ततः एक खड़ी ढाल वाली चढ़ाई पर चढ़कर हम अपने गन्तव्य पर पहुँच गए, और वहाँ से जो नीचे के शहर तथा इलाके का नज़ारा था वह स्तब्ध कर देने वाला था। हवाई अड्डे से निकल कर जिस पुल पर से हो कर हम आए थे, वह भी हमें दिखाई दे रहा था; अब वह नीरस नहीं वरन बहुत सुन्दर दिख रहा था! अब हम समझ पाए कि हमारी वह मित्र यहाँ अकसर क्यों आती रहती थी।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में इब्रानियों की पत्री के 11वें अध्याय में अनेक विश्वास के योद्धाओं के नाम दर्ज हैं। उन सभी के जीवन में कई "तीखे मोड़ और चढ़ाईयाँ" तथा नीरस परिस्थितियाँ आईं। लेकिन वे सभी अपनी विश्वास यात्रा में आगे बढ़ते ही रहे, ना रुके और ना वापस लौटे। उनका गन्तव्य? स्वर्ग, वह स्थिर नेव वाला नगर - "...जिस का रचने वाला और बनाने वाला परमेश्वर है" (इब्रानियों 11:10)।

   एस्तेर केर रश्तोई ने अपने स्तुति गीत, "When We See Christ" (जब हम मसीह को देखेंगे) में स्वर्ग की ओर मसीही विश्वासी की यात्रा के विषय में लिखा है:
   यह सब उस पल के योग्य होगा, जब हम मसीह को देखेंगे
   जीवन की कठिनाईयाँ कितनी छोटी लगेंगी, जब हम मसीह को देखेंगे
   उसके चेहरे की एक झलक से ही सारे दुख जाते रहेंगे
   इसलिए बहादुरी से जीवन दौड़ को दौड़ो, जब तक कि हम मसीह को देखें

   आज चाहे आपका मसीही विश्वास का जीवन सामान्य हो चाहे कठिन, आगे की ओर बढ़ते ही रहें। अपनी यात्रा के अन्त में आकर आप उस अद्भुत स्थान को देखने पाएंगे जो परमेश्वर ने आप के लिए तैयार किया है, और इस जीवन की हर बात उस पल के योग्य होगी। - सी. पी. हिया


स्वर्ग के आनन्द पृथ्वी की कठिनाईयों की भरपाई से भी अधिक होंगे।

सो जब तुम मसीह के साथ जिलाए गए, तो स्‍वर्गीय वस्‍तुओं की खोज में रहो, जहां मसीह वर्तमान है और परमेश्वर के दाहिनी ओर बैठा है। पृथ्वी पर की नहीं परन्तु स्‍वर्गीय वस्‍तुओं पर ध्यान लगाओ। - कुलुस्सियों 3:1-2

बाइबल पाठ: इब्रानियों 11:8-16
Hebrews 11:8 विश्वास ही से इब्राहीम जब बुलाया गया तो आज्ञा मानकर ऐसी जगह निकल गया जिसे मीरास में लेने वाला था, और यह न जानता था, कि मैं किधर जाता हूं; तौभी निकल गया। 
Hebrews 11:9 विश्वास ही से उसने प्रतिज्ञा किए हुए देश में जैसे पराए देश में परदेशी रह कर इसहाक और याकूब समेत जो उसके साथ उसी प्रतिज्ञा के वारिस थे, तम्बूओं में वास किया। 
Hebrews 11:10 क्योंकि वह उस स्थिर नेव वाले नगर की बाट जोहता था, जिस का रचने वाला और बनाने वाला परमेश्वर है। 
Hebrews 11:11 विश्वास से सारा ने आप बूढ़ी होने पर भी गर्भ धारण करने की सामर्थ पाई; क्योंकि उसने प्रतिज्ञा करने वाले को सच्चा जाना था। 
Hebrews 11:12 इस कारण एक ही जन से जो मरा हुआ सा था, आकाश के तारों और समुद्र के तीर के बालू की नाईं, अनगिनित वंश उत्पन्न हुआ।
Hebrews 11:13 ये सब विश्वास ही की दशा में मरे; और उन्होंने प्रतिज्ञा की हुई वस्तुएं नहीं पाईं; पर उन्हें दूर से देखकर आनन्‍दित हुए और मान लिया, कि हम पृथ्वी पर परदेशी और बाहरी हैं। 
Hebrews 11:14 जो ऐसी ऐसी बातें कहते हैं, वे प्रगट करते हैं, कि स्‍वदेश की खोज में हैं। 
Hebrews 11:15 और जिस देश से वे निकल आए थे, यदि उस की सुधि करते तो उन्हें लौट जाने का अवसर था। 
Hebrews 11:16 पर वे एक उत्तम अर्थात स्‍वर्गीय देश के अभिलाषी हैं, इसी लिये परमेश्वर उन का परमेश्वर कहलाने में उन से नहीं लजाता, सो उसने उन के लिये एक नगर तैयार किया है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 55-57


मंगलवार, 24 जून 2014

दूरी और समय


   बहुत वर्षों से मैं नेपाल में काम कर रहे एक पास्टर के साथ पत्राचार द्वारा संपर्क में हूँ। वह पास्टर अपने चर्च के सदस्यों के साथ अकसर हिमालय के दुर्गम क्षेत्रों में प्रभु यीशु में लाए गए विश्वास द्वारा मिलने वाली पापों से क्षमा एवं उद्धार का सुसमाचार प्रचार करने के लिए यात्रा करता रहता है। हाल ही में मुझे उससे एक पत्र प्राप्त हुआ, जिसमें उसने आने वाले सप्ताह में अपनी यात्रा का कार्यक्रम लिखा था और उसके लिए प्रार्थना करने को कहा था।

   उसके उस व्यस्त कार्यक्रम के अनुसार उसने उस सप्ताह में अपनी मोटरसाईकिल द्वारा 160 किलोमीटर की यात्रा का लक्ष्य रखा था जिसमें उसे अनेक स्थानों पर सुसमाचार प्रचार तथा पुस्तिकाओं का वितरण करना था। मुझे अपने मित्र द्वारा उस कठिन पहाड़ी क्षेत्र में इतनी लंबी यात्रा करने पर अचरज हुआ और मैंने उसे पत्र लिख कर उसका कुशल-मंगल तथा यात्रा का समाचार पूछा। उसका उत्तर आया, "पहाड़ों में अपने चर्च के सदस्यों के साथ पैदल यात्रा करना और उद्धार के सुसमाचार का प्रचार करना हमारे लिए एक बड़ा अद्भुत समय रहा है। क्योंकि सभी चर्च सदस्यों के पास मोटरसाईकलें नहीं थीं इसलिए हम सब ने पैदल ही यह यात्रा करने का निर्णय लिया। यह हम सबके लिए बहुत आशीषमय रहा है और अभी अनेक ऐसे स्थान हैं जहाँ जाना बाकी है।" 

   उसके इस उत्तर से मुझे दो बातें स्मरण हो आईं - पहली तो, "और यीशु सब नगरों और गांवों में फिरता रहा और उन की सभाओं में उपदेश करता, और राज्य का सुसमाचार प्रचार करता, और हर प्रकार की बीमारी और दुर्बलता को दूर करता रहा" (मत्ती 9:35); और दूसरी अपनी दशा। मुझे कितनी हिचकिचाहट होती है यदि बर्फ के समय में मुझे अकेले रह रहे किसी विधुर से मिलने जाना होता है; या सड़क के पार रह रहे किसी पड़ौसी की सहायता के लिए बाहर निकलना पड़ता है; या जब मैं किसी कार्य में व्यस्त हूँ तब कोई मित्र आकर मेरा द्वार खटखटाए तो जाकर उसके लिए द्वार खोलना पड़ता है - अर्थात उस मसीही प्रेम के अन्तर्गत जब मुझे किसी समय भी कोई दूरी तय करनी होती है।

   मेरे मित्र उस नेपाली पास्टर के लिए प्रभु यीशु का उदाहरण सर्वोपरी है। वह अपने प्रभु के समान ही परमेश्वर के राज्य के सुसमाचार के प्रचार के लिए किसी भी समय कोई भी दूरी तय करने के लिए तैयार रहता है, और प्रभु हम मसीही विश्वासियों से यही चाहता है (मत्ती 28:18-20)। - डेविड रोपर


परमेश्वर ने हमें जो दिया है, वह चाहता है कि हम उसे दूसरों के साथ बाँटें भी।

परन्तु जब पवित्र आत्मा तुम पर आएगा तब तुम सामर्थ पाओगे; और यरूशलेम और सारे यहूदिया और सामरिया में, और पृथ्वी की छोर तक मेरे गवाह होगे। - प्रेरितों 1:8

बाइबल पाठ: मत्ती 9:35-38, 28:18-20
Matthew 9:35 और यीशु सब नगरों और गांवों में फिरता रहा और उन की सभाओं में उपदेश करता, और राज्य का सुसमाचार प्रचार करता, और हर प्रकार की बीमारी और दुर्बलता को दूर करता रहा। 
Matthew 9:36 जब उसने भीड़ को देखा तो उसको लोगों पर तरस आया, क्योंकि वे उन भेड़ों की नाईं जिनका कोई रखवाला न हो, व्याकुल और भटके हुए से थे। 
Matthew 9:37 तब उसने अपने चेलों से कहा, पक्के खेत तो बहुत हैं पर मजदूर थोड़े हैं। 
Matthew 9:38 इसलिये खेत के स्‍वामी से बिनती करो कि वह अपने खेत काटने के लिये मजदूर भेज दे।

Matthew 28:18 यीशु ने उन के पास आकर कहा, कि स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार मुझे दिया गया है। 
Matthew 28:19 इसलिये तुम जा कर सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ और उन्हें पिता और पुत्र और पवित्रआत्मा के नाम से बपतिस्मा दो। 
Matthew 28:20 और उन्हें सब बातें जो मैं ने तुम्हें आज्ञा दी है, मानना सिखाओ: और देखो, मैं जगत के अन्‍त तक सदैव तुम्हारे संग हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 91-93


बुधवार, 18 दिसंबर 2013

यात्रा


   नासरत से बैतलेहम की दूरी कितनी है? गलील के नासरत से, जो प्रभु यीशु के शारीरिक माता-पिता - मरियम और यूसुफ के रहने का स्थान था, बैतलेहम लगभग 80 मील की दूरी पर है। यह यात्रा करने के लिए  यूसुफ और गर्भवती मरियम को लगभग एक सप्ताह लगा होगा। जब वे वहाँ पहुँचे तो उन्हें रहने के लिए कोई अच्छा होटल का कमरा नहीं मिला; जो मिला वह थी एक गौशाला, और वहीं मरियम ने अपने पहिलौठे पुत्र को जन्म दिया (लूका 2:7)।

   लेकिन प्रभु यीशु की यह यात्रा तो 80 मील से कहीं अधिक लंबी है - वे स्वर्ग में परमेश्वर के दाहिने के अपने स्थान से इस पृथ्वी पर आए, मानव रूप स्वीकार किया, लगभग 33 वर्ष का जीवन काल इस पृथ्वी पर बिताया। वे क्रूस पर टाँगे जाकर मारे गए और एक उधार की कब्र में दफनाए गए; लेकिन उनकी यात्रा क यह अन्त नहीं था। वे तीसरे दिन मृतकों में से जी उठे, मनुष्यों के बीच में 40 दिन तक चलते फिरते रहे और फिर अपने चेलों के देखते देखते स्वर्ग पर उठा लिए गए। यह भी उनकी यात्रा का अन्त नहीं है; अभी वे स्वर्ग में हम मसीही विश्वासियों के सहायक हैं, पिता परमेश्वर से हमारे लिए विनती करते हैं और हमारे रहने का स्थान तैयार कर रहे हैं, और बहुत शीघ्र एक दिन वे वापस आएंगे - राजाओं के राजा और प्रभुओं के प्रभु बन कर और अनन्त काल तक उनका राज्य इस सृष्टि पर बना रहेगा, उनके अनुयायी उनके साथ बने रहेंगे।

   इस वर्ष, क्रिसमस के उपलक्ष में जब आप कोई यात्रा करें तो उस यात्रा पर भी विचार करें जो प्रभु यीशु ने आपके लिए करी। वे स्वर्ग की महीमा छोड़कर इस पृथ्वी पर अपमानित होने और श्रापित मृत्यु झेलने आ गए जिससे हम मनुष्यों को पापों की क्षमा और अनन्त काल की महिमा मिल सके। अपने महिमामय पुनरुत्थान के द्वारा उन्होंने अपने परमेश्वरत्व को प्रमाणित किया और अपनी महिमा में संभागी होने का आदर अपने अनुयायियों को भी दिया।

   परमेश्वर का धन्यवाद हो उस पहले क्रिसमस की यात्रा के लिए जिससे समस्त मानव जाति के लिए अनन्त महिमा का मार्ग खुल गया। क्या आपने प्रभु के इस निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है? - डेव एगनर


प्रभु यीशु हमारे लिए स्वर्ग से पृथ्वी पर आए जिससे हम उनके साथ पृथ्वी से स्वर्ग जा सकें।

वह पुत्र जनेगी और तू उसका नाम यीशु रखना; क्योंकि वह अपने लोगों का उन के पापों से उद्धार करेगा। - मत्ती 1:21

बाइबल पाठ: गलतियों 4:1-7
Galatians 4:1 मैं यह कहता हूं, कि वारिस जब तक बालक है, यद्यपि सब वस्‍तुओं का स्‍वामी है, तौभी उस में और दास में कुछ भेद नहीं। 
Galatians 4:2 परन्तु पिता के ठहराए हुए समय तक रक्षकों और भण्‍डारियों के वश में रहता है। 
Galatians 4:3 वैसे ही हम भी, जब बालक थे, तो संसार की आदि शिक्षा के वश में हो कर दास बने हुए थे। 
Galatians 4:4 परन्तु जब समय पूरा हुआ, तो परमेश्वर ने अपने पुत्र को भेजा, जो स्त्री से जन्मा, और व्यवस्था के आधीन उत्पन्न हुआ। 
Galatians 4:5 ताकि व्यवस्था के आधीनों को मोल ले कर छुड़ा ले, और हम को लेपालक होने का पद मिले। 
Galatians 4:6 और तुम जो पुत्र हो, इसलिये परमेश्वर ने अपने पुत्र के आत्मा को, जो हे अब्‍बा, हे पिता कह कर पुकारता है, हमारे हृदय में भेजा है। 
Galatians 4:7 इसलिये तू अब दास नहीं, परन्तु पुत्र है; और जब पुत्र हुआ, तो परमेश्वर के द्वारा वारिस भी हुआ। 

एक साल में बाइबल: 
  • ओब्द्याह 
  • प्रकाशितवाक्य 9


मंगलवार, 12 नवंबर 2013

पालनहारा परमेश्वर


   रॉबिन और स्टीव परमर्श देने का कार्य करते हैं, यही उनकी मसीही सेवकाई भी है; किंतु इससे उन्हें आमदानी बहुत कम मिलती है। हाल ही में परिवार में उठी एक समस्य के कारण अपनी पुरानी कार में उन्हें 5,000 मील की यात्रा करनी पड़ी। समस्या से निपटने के बाद वापस लौटते हुए, घर से लगभग 2,000 मील दूर उनकी कार से आवाज़ें आने लगीं और वह चलने में दिक्कत देने लगी। उन्होंने गाड़ी को जब एक कार ठीक करने वाले मिस्त्री को दिखाया तो उत्तर मिला, इसका अब कुछ नहीं हो सकता, पूरा इंजन ही बदलना पड़ेगा। उनके पास नया इंजन डलवाने के लिए पैसे नहीं थे इसलिए बड़ी कठिनाई से वे जैसे-तैसे उस गाड़ी में घर तक तो लौट आए। तब उन्हें एक "कार मिशनरी" का पता चला जो मसीही सेवकाई में लगे लोगों कि सहायता करता था। उसने उनकी कार देखी और उसे अचंभा हुआ कि वह वापस घर तक आ गई थी। लेकिन उससे भी अधिक अचंभा स्टीव और रॉबिन को हुआ जब उस "कार मिशनरी" ने उनसे बिना कोई पैसा लिए उनकी गाड़ी में नया इंजन लगवाने का प्रस्ताव दिया। यदि उन्होंने मार्ग में नया इंजन डलवाने का प्रयास किया होता तो व्यर्थ ही, उतने पैसे ना होते हुए भी उन्हें हज़ारों डॉलर का खर्चा उठाना पड़ जाता। परमेश्वर ने उनके लिए कुछ अलग ही इन्तज़ाम पहले ही कर रखा था।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में जब इस्त्राएली मिस्त्र की गुलामी से निकल कर परमेश्वर की अगुवाई में वाचा के देश कनान की ओर चले तो उन्हें मरुभूमि से होकर जाना पड़ा। तीन दिन कि यात्रा के बाद उनका पानी समाप्त हो गया, और उन्हें यह भी पता नहीं था कि अब पानी कहाँ से मिलेगा। लेकिन परमेश्वर समस्या भी जानता था और उसका समाधान भी। जिस मार्ग से वे इस्त्राएली जा रहे थे वहाँ दो जगह, मारा और एलीम पर, पानी के सोते थे और परमेश्वर उन्हें वहीं लेकर गया। उन स्थानों पर ना केवल उन्हें पानी मिला वरन विश्राम करने के लिए अच्छा स्थान भी मिला।

   चाहे हमारी समस्या गंभीर और परिस्थिति विकट लगे, हम मसीही विश्वासियों को परमेश्वर का यह आश्वासन है कि परमेश्वर हमारी अगुवाई कर रहा है। वह हमारा पालनहारा परमेश्वर है, हमारी यात्रा के मार्ग और मार्ग की हर बात को तथा मार्ग के लिए हमारी प्रत्येक आवश्यकता को वह भली-भांति जानता है। जब आवश्यकता आन पड़ेगी तब हमारा पालनहारा परमेश्वर उसका समाधान भी करेगा। - डेव ब्रैनन


असंभव परिस्थितियाँ परमेश्वर पर हमारे विश्वास को दृढ़ करने के अवसर होते हैं।

तब मूसा ने यहोवा की दोहाई दी, और यहोवा ने उसे एक पौधा बतला दिया, जिसे जब उसने पानी में डाला, तब वह पानी मीठा हो गया। - निर्गमन 15:25

बाइबल पाठ: निर्गमन 15:22-27
Exodus 15:22 तब मूसा इस्राएलियों को लाल समुद्र से आगे ले गया, और वे शूर नाम जंगल में आए; और जंगल में जाते हुए तीन दिन तक पानी का सोता न मिला। 
Exodus 15:23 फिर मारा नाम एक स्थान पर पहुंचे, वहां का पानी खारा था, उसे वे न पी सके; इस कारण उस स्थान का नाम मारा पड़ा। 
Exodus 15:24 तब वे यह कहकर मूसा के विरुद्ध बकझक करने लगे, कि हम क्या पीएं? 
Exodus 15:25 तब मूसा ने यहोवा की दोहाई दी, और यहोवा ने उसे एक पौधा बतला दिया, जिसे जब उसने पानी में डाला, तब वह पानी मीठा हो गया। वहीं यहोवा ने उनके लिये एक विधि और नियम बनाया, और वहीं उसने यह कहकर उनकी परीक्षा की, 
Exodus 15:26 कि यदि तू अपने परमेश्वर यहोवा का वचन तन मन से सुने, और जो उसकी दृष्टि में ठीक है वही करे, और उसकी आज्ञाओं पर कान लगाए, और उसकी सब विधियों को माने, तो जितने रोग मैं ने मिस्रियों पर भेजा है उन में से एक भी तुझ पर न भेजूंगा; क्योंकि मैं तुम्हारा चंगा करने वाला यहोवा हूं। 
Exodus 15:27 तब वे एलीम को आए, जहां पानी के बारह सोते और सत्तर खजूर के पेड़ थे; और वहां उन्होंने जल के पास डेरे खड़े किए।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 51-52 
  • इब्रानियों 9