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Tuesday, May 10, 2011

सुधार की विधि

हमारे माता-पिता दो तरह से हमें सुधारते हैं; जब कोई बालक उद्दण्ड अथवा अनाज्ञाकारी होता है, तो उनका एक टेढ़ी नज़र से देखना बालक को उनकी नाराज़गी का सन्देश पहुँचा देता है। बालक जैसे ही अपने आप को सुधार लेता है, माता-पिता की टेढ़ी नज़र, प्यार की नज़र बन जाती है। लेकिन यदि बालक उनके टेढ़ी नज़र के सन्देश को नज़रंदाज़ करके अपनी उद्दण्डता या अनाज्ञाकारिता में बना रहे, तो फिर माता-पिता को उसे सुधारने के लिए कठोर कदम उठाने पड़ते हैं।

दाउद भी ऐसे ही अनुभव से होकर गुज़रा और भजन ३२ में उसने अपने अनुभव और उनसे मिली शिक्षाएं वर्णित करी हैं। उसके पाप के कारण दाउद पर परमेश्वर का हाथ बहुत भारी हुआ, और उस बोझ के तले उसे अपनी हड्डियाँ गलती हुई लगीं और उसके जीवन की तरावट सूख गई; उसने बत्शीबा से अपने व्यभिचार और उसके पति उरीयाह की हत्या करवाने के पाप को मान लिया (पद ३,४,५)। परमेश्वर से क्षमा याचना करने और पश्चाताप करने से परमेश्वर का भारी हाथ उस पर से हट गया, दाउद ने अपने आप को एक नया मनुष्य अनुभव किया और अपने आप को आशा से कहीं आधिक आशीशित पाया। इसलिए वह प्रत्येक उस विश्वासी से, जो किसी कारणवश पाप में गिर जाए, आग्रह करता है कि ऐसा होते ही तुरंत क्षमा की प्रार्थना कर ले (पद ६)।

दाउद ने कहा कि परमेश्वर हमारी अगुवाई अपनी आँख से करेगा, फिर आगे पद ९ में लिखा कि "तुम घोड़े और खच्चर के समान न बनो जो समझ नहीं रखते, उनकी उमंग लगाम और बाग से रोकनी पड़ती है, नहीं तो वे तेरे वश में नहीं आने के।" दाउद का तात्पर्य था कि परमेश्वर के पास हमें अपने पास वापस लौटा लाने के दो तरीके हैं - आँख से या लगाम और नकेल से।

यदि हम कभी भी पाप में पड़ें तो परमेश्वर चाहता है कि जैसे ही हमें पाप का बोध हो, हम तुरंत ही उस पाप का अंगीकार करके उसके लिए क्षमा माँग लें। वह नहीं चाहता कि हम नासमझ जानवरों के समान बनें जिन्हें लगाम और नकेल लगा कर ही सीधा रखा जा सकता है। परमेश्वर का हमारे प्रति प्रेम हमें कभी पाप में बने रहने नहीं देगा, वह हमें अवश्य ही सुधारेगा; लेकिन उसके सुधार की विधि हम पर निर्भर करती है; परमेश्वर तो अपनी नज़र के इशारे से ही हमें सुधारना चाहता है, परन्तु आवश्यक्ता पड़ने पर वह लगाम और नकेल का भी प्रयोग करने से नहीं हिचकिचाता। - डेनिस डी हॉन


हम परमेश्वर के जितना निकट बने रहते हैं, उतना ही स्पष्ट हम उसके मार्गदर्शन को देख-समझ पाते हैं।

मैं तुझे बुद्धि दूंगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उस में तेरी अगुवाई करूंगा; मैं तुझ पर कृपादृष्टि रखूंगा और सम्मत्ति दिया करूंगा। तुम घोड़े और खच्चर के समान न बनो जो समझ नहीं रखते, उनकी उमंग लगाम और बाग से रोकनी पड़ती है, नहीं तो वे तेरे वश में नहीं आने के। - भजन ३२:८,९


बाइबल पाठ: भजन ३२

Psa 32:1 क्या ही धन्य है वह जिसका अपराध क्षमा किया गया, और जिसका पाप ढ़ापा गया हो।
Psa 32:2 क्या ही धन्य है वह मनुष्य जिसके अधर्म का यहोवा लेखा न ले, और जिसकी आत्मा में कपट न हो।
Psa 32:3 जब मैं चुप रहा तब दिन भर कहरते कहरते मेरी हडि्डयां पिघल गई।
Psa 32:4 क्योंकि रात दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा; और मेरी तरावट धूप काल की सी झुर्राहट बनती गई।
Psa 32:5 जब मैं ने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया और अपना अधर्म न छिपाया, और कहा, मैं यहोवा के साम्हने अपने अपराधों को मान लूंगा तब तू ने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया।
Psa 32:6 इस कारण हर एक भक्त तुझ से ऐसे समय में प्रार्थना करे जब कि तू मिल सकता है। निश्चय जब जल की बड़ी बाढ़ आए तौभी उस भक्त के पास न पहुंचेगी।
Psa 32:7 तू मेरे छिपने का स्थान है, तू संकट से मेरी रक्षा करेगा, तू मुझे चारों ओर से छुटकारे के गीतों से घेर लेगा।
Psa 32:8 मैं तुझे बुद्धि दूंगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उस में तेरी अगुवाई करूंगा; मैं तुझ पर कृपादृष्टि रखूंगा और सम्मत्ति दिया करूंगा।
Psa 32:9 तुम घोड़े और खच्चर के समान न बनो जो समझ नहीं रखते, उनकी उमंग लगाम और बाग से रोकनी पड़ती है, नहीं तो वे तेरे वश में नहीं आने के।
Psa 32:10 दुष्ट को तो बहुत पीड़ा होगी परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह करूणा से घिरा रहेगा।
Psa 32:11 हे धर्मियों यहोवा के कारण आनन्दित और मगन हो, और हे सब सीधे मन वालों आनन्द से जयजयकार करो!

एक साल में बाइबल:
  • २ राजा १०-१२
  • यूहन्ना १:२९-५१