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सोमवार, 4 अप्रैल 2016

रख-रखाव


   मैं जब अपनी बेटियों को कार चलाना सिखा रहा था तो मैंने उन्हें कार के रख-रखाव से संबंधित कुछ बुनियादी बातों पर भी ध्यान देना सिखाया। हम एक स्थानीय सर्विस स्टेशन पर गए जहाँ उन्होंने देखा और सीखा कि जब भी कार में पैट्रोल डलवाएं तो साथ ही इंजन में तेल भी कैसे जाँच लें। इसके महत्व को समझाने के लिए मैंने उन से कहा, "तेल सस्ता होता है; लेकिन इंजन बहुत महंगा है"; अर्थात इंजन में तेल डालने का, इंजन के रख-रखाव का, खर्च तो थोड़ा सा ही है लेकिन तेल या रख-रखाव के अभाव में खराब हो जाने वाले इंजन को बदलना बहुत महंगा होता है। आज, कई सालों बाद भी उन्हें वह बात याद है, और वे मुझे यह बताती रहती हैं।

   ऐसे ही रख-रखाव हमारे आत्मिक जीवनों के लिए भी बहुत आवश्यक है। प्रति-दिन समय निकाल कर परमेश्वर के वचन बाइबल को पढ़ने और प्रार्थना के द्वारा परमेश्वर की आवाज़ को सुनना, उसके अनुसार अपने जीवन को सुधारना, सुचारू रीति से चलाना हमारे व्यक्तिगत जीवन के रख-रखाव का बहुत महत्वपूर्ण भाग है। दाऊद ने भजन 5 में लिखा: "हे यहोवा, भोर को मेरी वाणी तुझे सुनाई देगी, मैं भोर को प्रार्थना कर के तेरी बाट जोहूंगा" (भजन 5:3), और इसके बाद के पदों में उसने अपने हृदय से परमेश्वर की आराधना, धन्यवाद और प्रार्थना के निवेदन करे।

   बहुत से लोगों का नियम है कि वे अपना दिन परमेश्वर के साथ संगति के साथ करके आरंभ करते हैं। अपनी निज किसी भी बात को करने से पहले, वह चाहे खबरें जानना हो या प्रातः का नाश्ता करना हो या फिर ईमेल देखना हो, वे कुछ समय परमेश्वर के वचन बाइबल का एक भाग पढ़ने, परमेश्वर के प्रति उसके प्रेम तथा महानता के लिए धनयवादी होने, आराधना और प्रार्थना करके उससे दिन भर के लिए मार्गदर्शन लेने के द्वारा करते हैं। तो अन्य कुछ लोग दिन के भिन्न समयों में जब अवसर मिलता है परमेश्वर के वचन को पढ़ने और प्रार्थना करने के द्वारा उससे संगति बनाए रखते हैं।

   यह सब ना तो कोई रीति-रिवाज़ है और ना ही किसी धार्मिक रिवाज़ की पूर्ति मात्र है; यह आत्मिक रख-रखाव है - हम प्रतिदिन अपने प्रभु परमेश्वर को स्मरण करते हैं, उसका धन्यवाद करते हैं और उससे आग्रह करते हैं कि वह हमारे हृदयों में, हमारे साथ-साथ बना रहे, हमारा सहायक और मार्गदर्शक हो तथा प्रत्येक अनुचित बात और बुराई से हमें बचाए रखे। - डेविड मैक्कैसलैंड


परमेश्वर के वचन और प्रार्थना में जीवन की जड़ें जमा लेने से ही परिस्थित्यों का सामना करने की स्थिरता आती है।

और हमें परीक्षा में न ला, परन्तु बुराई से बचा; क्योंकि राज्य और पराक्रम और महिमा सदा तेरे ही हैं। आमीन। - मत्ती 6:13

बाइबल पाठ: भजन 5
Psalms 5:1 हे यहोवा, मेरे वचनों पर कान लगा; मेरे ध्यान करने की ओर मन लगा। 
Psalms 5:2 हे मेरे राजा, हे मेरे परमेश्वर, मेरी दोहाई पर ध्यान दे, क्योंकि मैं तुझी से प्रार्थना करता हूं। 
Psalms 5:3 हे यहोवा, भोर को मेरी वाणी तुझे सुनाई देगी, मैं भोर को प्रार्थना कर के तेरी बाट जोहूंगा। 
Psalms 5:4 क्योंकि तू ऐसा ईश्वर नहीं जो दुष्टता से प्रसन्न हो; बुराई तेरे साथ नहीं रह सकती। 
Psalms 5:5 घमंडी तेरे सम्मुख खड़े होने न पांएगे; तुझे सब अनर्थकारियों से घृणा है। 
Psalms 5:6 तू उन को जो झूठ बोलते हैं नाश करेगा; यहोवा तो हत्यारे और छली मनुष्य से घृणा करता है। 
Psalms 5:7 परन्तु मैं तो तेरी अपार करूणा के कारण तेरे भवन में आऊंगा, मैं तेरा भय मानकर तेरे पवित्र मन्दिर की ओर दण्डवत करूंगा। 
Psalms 5:8 हे यहोवा, मेरे शत्रुओं के कारण अपने धर्म के मार्ग में मेरी अगुवाई कर; मेरे आगे आगे अपने सीधे मार्ग को दिखा। 
Psalms 5:9 क्योंकि उनके मुंह में कोई सच्चाई नहीं; उनके मन में निरी दुष्टता है। उनका गला खुली हुई कब्र है, वे अपनी जीभ से चिकनी चुपड़ी बातें करते हैं। 
Psalms 5:10 हे परमेश्वर तू उन को दोषी ठहरा; वे अपनी ही युक्तियों से आप ही गिर जाएं; उन को उनके अपराधों की अधिकाई के कारण निकाल बाहर कर, क्योंकि उन्होंने तुझ से बलवा किया है। 
Psalms 5:11 परन्तु जितने तुझ पर भरोसा रखते हैं वे सब आनन्द करें, वे सर्वदा ऊंचे स्वर से गाते रहें; क्योंकि तू उनकी रक्षा करता है, और जो तेरे नाम के प्रेमी हैं तुझ में प्रफुल्लित हों। 
Psalms 5:12 क्योंकि तू धर्मी को आशीष देगा; हे यहोवा, तू उसको अपने अनुग्रहरूपी ढाल से घेरे रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • रूत 1-4
  • लूका 8:1-25


गुरुवार, 30 जनवरी 2014

सान्तवना और शाँति


   हैरॉलड, कैथी और उनके दोनो बेटे एक जंगल के इलाके में थे, जब एक चक्रवाधी तूफान वहाँ से होकर निकला। कैथी ने इस घटना के कई वर्षों के बाद मुझसे बात करते हुए उस समय का अपना अनुभव बयान किया: "मेरे पति और बड़ा बेटा मुझसे कुछ दूर थे, मैंने और मेरे छोटे बेटे ने एक लकड़ी से बनी कोठरी में शरण ली। हमें बहुत तेज़ शोर सुनाई दिया मानों सैंकड़ों रेलगाड़ियाँ एक साथ वहाँ से निकल रही हों, और मैं तथा मेरा बेटा ज़मीन पर अपने सिर अपने हाथों में दबाए सिमटकर लेट गए। हमारी आँखों के सामने वह कोठरी टूट कर बिखरने लगी और मलबा हमारे चारों ओर उड़ने लगा। मैंने उड़ते हुए मलबे की चोट से बचने के लिए अपनी आँखें बन्द कर लीं। तभी मुझे लगा मानों मैं हवा में तेज़ी से उठ गई हूँ और फिर मैं पास की झील के पानी में जा गिरी, जहाँ अपने आप को डूबने से बचाए रखने के लिए मैं उड़ के आए हुए मलबे को थामे तैरती रही। लेकिन मेरा छोटा बेटा उस तूफान से बच नहीं पाया। अगले छः हफतों तक हम प्रतिदिन रोते रहे। लेकिन हमें परमेश्वर की सार्वभौमिकता पर पूरा विश्वास है और हम मानते हैं कि परमेश्वर ने अपनी किसी योजना के अन्तर्गत ही उस तूफान को हमारे ऊपर आने दिया। हमें यह स्मरण कर के भी शाँति है कि हमारा बेटा प्रभु यीशु को मानता था।"

   जब कोई प्रीय जन हम से बिछड़ जाता है तो हमारे मनों में अनेक प्रशन उठने लगते हैं। ऐसे समयों में हम मसीही विश्वासियों के लिए रोमियों 8:28 प्रोत्साहन और आश्वासन प्रदान करने का एक अच्छा माध्यम होता है। हम मसीही विश्वासी इस बात में आश्वस्त और शाँति से रह सकते हैं कि परमेश्वर हमारे जीवनों में जो भी आने देगा वह अन्ततः हमारे भले ही के लिए होगा; परमेश्वर कभी हमारा बुरा कर ही नहीं सकता, और ना ही हमारे साथ बुरा होने दे सकता है। वह हमारा प्रेमी पिता है जिसने जब हम पापों में उससे दूर थे तब भी हमारे उद्धार के लिए अपने एकलौते पुत्र को भी रख नहीं छोड़ा, तो फिर अब जब हम उसके परिवार का अंग हैं तो वह हमें कैसे हानि में जा लेने देगा?

   इस दम्पति के परमेश्वर की सार्वभौमिकता और प्रभु यीशु में विश्वास ने ही उनके इस बड़े दुख की घड़ी में उन्हें सान्तवना और शाँति दी। यही शाँति और सान्तवना प्रत्येक मसीही विश्वासी के लिए प्रत्येक परिस्थिति में सदा उपलब्ध रहती है। क्या आपने प्रभु यीशु को अपनी सान्तवना और शाँति का स्त्रोत बनाया है? यदि नहीं तो अभी बना लीजिए। - डेनिस फिशर


दुख में शाँति का हमारा सबसे महान कारण है हमारा विश्वास कि हर परिस्थिति परमेश्वर के नियंत्रण में है, हमारे भले ही के लिए है।

हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर, और पिता का धन्यवाद हो, जो दया का पिता, और सब प्रकार की शान्‍ति का परमेश्वर है। वह हमारे सब क्‍लेशों में शान्‍ति देता है; ताकि हम उस शान्‍ति के कारण जो परमेश्वर हमें देता है, उन्हें भी शान्‍ति दे सकें, जो किसी प्रकार के क्‍लेश में हों। - 2 कुरिन्थियों 1:3-4

बाइबल पाठ:  रोमियों 8:26-30
Romans 8:26 इसी रीति से आत्मा भी हमारी दुर्बलता में सहायता करता है, क्योंकि हम नहीं जानते, कि प्रार्थना किस रीति से करना चाहिए; परन्तु आत्मा आप ही ऐसी आहें भर भरकर जो बयान से बाहर हैं, हमारे लिये बिनती करता है। 
Romans 8:27 और मनों का जांचने वाला जानता है, कि आत्मा की मनसा क्या है क्योंकि वह पवित्र लोगों के लिये परमेश्वर की इच्छा के अनुसार बिनती करता है। 
Romans 8:28 और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। 
Romans 8:29 क्योंकि जिन्हें उसने पहिले से जान लिया है उन्हें पहिले से ठहराया भी है कि उसके पुत्र के स्वरूप में हों ताकि वह बहुत भाइयों में पहिलौठा ठहरे। 
Romans 8:30 फिर जिन्हें उसने पहिले से ठहराया, उन्हें बुलाया भी, और जिन्हें बुलाया, उन्हें धर्मी भी ठहराया है, और जिन्हें धर्मी ठहराया, उन्हें महिमा भी दी है।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 8-10


बुधवार, 29 जनवरी 2014

बलिदान


   अपने नय वर्ष के उत्सव के कई दिन पहले चीनी परिवार अपने घरों को भली भांति साफ करते हैं। इस प्रथा के पालन में उनका मानना है कि इस सफाई से पुराने वर्ष का सारा दुर्भाग्य निकल कर साफ हो जाता है और नए वर्ष के सौभाग्य के आने के लिए घर तैयार हो जाता है।

   प्रेरित पौलुस ने कुरिन्थ के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में उनसे कहा कि वे अपने जीवनों को भली भाँति साफ कर लें - कोई सौभाग्य/दुर्भाग्य के लिए नहीं वरन परमेश्वर के लिए। ऐसा करने के लिए उसने रूपक अलंकार का प्रयोग करते हुए कहा, "पुराना खमीर निकाल कर, अपने आप को शुद्ध करो: कि नया गूंधा हुआ आटा बन जाओ; ताकि तुम अखमीरी हो, क्योंकि हमारा भी फसह जो मसीह है, बलिदान हुआ है" (1 कुरिन्थियों 5:7)। पौलुस ने यहूदियों के फसह और अखमीरी रोटी के पर्व (निर्गमन 12:1-28) पर अपनी यह बात आधारित करी।

   यहूदियों में खमीर पाप और भ्रष्ट प्रवृति का प्रतीक माना जाता है; इन पर्वों को मनाने के लिए यहूदी लोग अपने घरों से सारा खमीर निकाल देते थे (व्यवस्थाविवरण 16:3-4) और पापों के प्रायश्चित के लिए एक मेमना बलिदान करते थे। अब प्रभु यीशु समस्त संसार के लिए वह बलिदान का मेमना बन गया जो उस पर विश्वास करने वाले सब लोगों को उनके पापों से शुद्ध करता है। इसलिए पौलुस ने कुरिन्थ के मसीही विश्वासियों को लिखा कि वे अपने जीवनों तथा मसीही मण्डली से सारा पाप और मलिनता दूर कर लें (1 कुरिन्थियों 5:9-13)।

   प्रभु यीशु के इस बलिदान और हमारे लिए पापों के दण्ड से छुड़ाए जाने के मार्ग को बना कर दे देने के कारण आईए हम जो मसीही विश्वासी हैं अपने जीवनों से पाप और मलिनता को दूर करें और उस पवित्रता का पर्व मनाएं जो केवल मसीह यीशु से ही हमें मिल सकती है; और वे जिन्होंने अभी तक प्रभु यीशु को अपने उधारकर्ता के रूप में ग्रहण नहीं किया है, वे भी प्रभु यीशु के इस बलिदान पर विचार करें और उससे पापों की क्षमा प्राप्त करने उसके पास आ जाएं। - मार्विन विलियम्स


पाप के दाग़ केवल मसीह यीशु के लहु ही से धुल सकते हैं।

परन्तु उसके अनुग्रह से उस छुटकारे के द्वारा जो मसीह यीशु में है, सेंत मेंत धर्मी ठहराए जाते हैं। उसे परमेश्वर ने उसके लोहू के कारण एक ऐसा प्रायश्चित्त ठहराया, जो विश्वास करने से कार्यकारी होता है, कि जो पाप पहिले किए गए, और जिन की परमेश्वर ने अपनी सहनशीलता से आनाकानी की; उन के विषय में वह अपनी धामिर्कता प्रगट करे। - रोमियों 3:24-25

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 5:1-13
1 Corinthians 5:1 यहां तक सुनने में आता है, कि तुम में व्यभिचार होता है, वरन ऐसा व्यभिचार जो अन्यजातियों में भी नहीं होता, कि एक मनुष्य अपने पिता की पत्‍नी को रखता है। 
1 Corinthians 5:2 और तुम शोक तो नहीं करते, जिस से ऐसा काम करने वाला तुम्हारे बीच में से निकाला जाता, परन्तु घमण्‍ड करते हो। 
1 Corinthians 5:3 मैं तो शरीर के भाव से दूर था, परन्तु आत्मा के भाव से तुम्हारे साथ हो कर, मानो उपस्थिति की दशा में ऐसे काम करने वाले के विषय में यह आज्ञा दे चुका हूं। 
1 Corinthians 5:4 कि जब तुम, और मेरी आत्मा, हमारे प्रभु यीशु की सामर्थ के साथ इकट्ठे हो, तो ऐसा मनुष्य, हमारे प्रभु यीशु के नाम से। 
1 Corinthians 5:5 शरीर के विनाश के लिये शैतान को सौंपा जाए, ताकि उस की आत्मा प्रभु यीशु के दिन में उद्धार पाए। 
1 Corinthians 5:6 तुम्हारा घमण्‍ड करना अच्छा नहीं; क्या तुम नहीं जानते, कि थोड़ा सा खमीर पूरे गूंधे हुए आटे को खमीर कर देता है। 
1 Corinthians 5:7 पुराना खमीर निकाल कर, अपने आप को शुद्ध करो: कि नया गूंधा हुआ आटा बन जाओ; ताकि तुम अखमीरी हो, क्योंकि हमारा भी फसह जो मसीह है, बलिदान हुआ है। 
1 Corinthians 5:8 सो आओ हम उत्‍सव में आनन्द मनावें, न तो पुराने खमीर से और न बुराई और दुष्‍टता के खमीर से, परन्तु सीधाई और सच्चाई की अखमीरी रोटी से।
1 Corinthians 5:9 मैं ने अपनी पत्री में तुम्हें लिखा है, कि व्यभिचारियों की संगति न करना। 
1 Corinthians 5:10 यह नहीं, कि तुम बिलकुल इस जगत के व्यभिचारियों, या लोभियों, या अन्‍धेर करने वालों, या मूर्तिपूजकों की संगति न करो; क्योंकि इस दशा में तो तुम्हें जगत में से निकल जाना ही पड़ता। 
1 Corinthians 5:11 मेरा कहना यह है; कि यदि कोई भाई कहला कर, व्यभिचारी, या लोभी, या मूर्तिपूजक, या गाली देने वाला, या पियक्कड़, या अन्‍धेर करने वाला हो, तो उस की संगति मत करना; वरन ऐसे मनुष्य के साथ खाना भी न खाना। 
1 Corinthians 5:12 क्योंकि मुझे बाहर वालों का न्याय करने से क्या काम? क्या तुम भीतर वालों का न्याय नहीं करते? 
1 Corinthians 5:13 परन्तु बाहर वालों का न्याय परमेश्वर करता है: इसलिये उस कुकर्मी को अपने बीच में से निकाल दो।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 5-7


मंगलवार, 28 जनवरी 2014

व्यवहार


   शार्क मछलियों का अध्ययन करने वाले बताते हैं कि शार्क मछलियों द्वारा हमला किए जाने की संभावना अधिक तभी होती है जब उन मछलियों को पानी में रक्त का आभास होता है। रक्त से उनके अन्दर भोजन करने की क्रिया उत्तेजित होती है और वे झुँड के रूप में ही उस संभावित भोजन वस्तु पर, जिससे रक्त निकल रहा है, आक्रमण कर देती हैं। पानी में रक्त की उपस्थिति उनके आक्रमण के निशाने को चिन्हित कर देती है और वे वहीं अपना आक्रमण केंद्रित करती हैं।

   दुख की बात है कि चर्च में भी कभी कभी लोग ऐसे ही उन लोगों पर हमला बोल देते हैं जो किसी कारण दुखित हैं। बजाए इसके कि मसीह यीशु की मण्डली एक ऐसा स्थान हो जहाँ लोग प्रेम के साथ एक दूसरे की देखभाल करते हैं, उन्हें कठिन समयों में सहारा देते हैं, उन्हें निराशाओं से उभारने के प्रयास करते हैं, कभी कभी चर्च एक ऐसा स्थान भी बन जाता है जहाँ खूँखार हमलावर किसी अभागे पर टूट पड़ने की प्रतीक्षा में रहते हैं। इन हमलावरों को जैसे ही किसी की गलती, अस्फलता या उस में किसी खामी-खराबी की गंध मिलती है, बस वे उस बेचारे पर उसे बरबाद करने के लिए टूट पड़ते हैं।

   बजाए इसके कि ठोकर खाकर गिरे हुए व्यक्ति पर और प्रहार कर के उसे और दबाया जाए, हम मसीही विश्वासियों को ऐसा व्यक्ति होना चाहिए जो उन गिरे हुओं को मसीह यीशु की सान्तवना के साथ प्रोत्साहित करता है, उन्हें उठा कर फिर से खड़ा करने में सहायक होता है। इसका यह तात्पर्य नहीं है कि हमें पापमय व्यवहार की अन्देखी करनी है या किसी रीति से ऐसे व्यवहार को बढ़ावा देना है, वरन यह कि अपने प्रभु के समान ही हमें दयावन्त और सहिषुण भी होना है। प्रभु यीशु ने हमें सिखाया है कि "धन्य हैं वे, जो दयावन्‍त हैं, क्योंकि उन पर दया की जाएगी" (मत्ती 5:7)। 

   दया का अर्थ है वह प्रेमपूर्ण व्यवहार हम जिसके योग्य नहीं हैं; और हम सभी अपने पापों के कारण परमेश्वर के न्याय और अनन्तकाल के दण्ड के योग्य हैं। लेकिन परमेश्वर ने हमारे पापों का दण्ड प्रभु यीशु पर डालकर हमारे लिए पापों के पश्चाताप और प्रभु यीशु में विश्वास द्वारा परमेश्वर के निकट आने का मार्ग खोल दिया। जिस परमेश्वर ने हम पर दया करी है, वह चाहता है कि हम भी औरों पर ऐसे ही दया करें।

   इसलिए जब हम किसी को दुखी या गिरा हुआ देखें तो बजाए उस पर हमला करने वाले बनने के हम उस पर दया करने वाले बनें और सदा ध्यान रखें कि ऐसा दिन कभी भी आ सकता है जब हमें या तो अपने लिए दूसरों की दया की आवश्यकता पड़ जाएगी, या फिर प्रभु यीशु के सामने अपने जीवन और व्यवहार का हिसाब देने के लिए खड़ा होना पड़ेगा। - बिल क्राउडर


हम तब ही दूसरों के प्रति दया दिखाना बन्द कर सकते हैं जब प्रभु यीशु हमारे प्रति दया दिखाना बन्द कर दे।

जैसा तुम्हारा पिता दयावन्‍त है, वैसे ही तुम भी दयावन्‍त बनो। - लूका 6:36

बाइबल पाठ: यूहन्ना 8:1-11
John 8:1 परन्तु यीशु जैतून के पहाड़ पर गया। 
John 8:2 और भोर को फिर मन्दिर में आया, और सब लोग उसके पास आए; और वह बैठकर उन्हें उपदेश देने लगा। 
John 8:3 तब शास्त्री और फरीसी एक स्त्री को लाए, जो व्यभिचार में पकड़ी गई थी, और उसको बीच में खड़ी कर के यीशु से कहा। 
John 8:4 हे गुरू, यह स्त्री व्यभिचार करते ही पकड़ी गई है। 
John 8:5 व्यवस्था में मूसा ने हमें आज्ञा दी है कि ऐसी स्‍त्रियों को पत्थरवाह करें: सो तू इस स्त्री के विषय में क्या कहता है? 
John 8:6 उन्होंने उसको परखने के लिये यह बात कही ताकि उस पर दोष लगाने के लिये कोई बात पाएं, परन्तु यीशु झुककर उंगली से भूमि पर लिखने लगा। 
John 8:7 जब वे उस से पूछते रहे, तो उसने सीधे हो कर उन से कहा, कि तुम में जो निष्‍पाप हो, वही पहिले उसको पत्थर मारे। 
John 8:8 और फिर झुक कर भूमि पर उंगली से लिखने लगा। 
John 8:9 परन्तु वे यह सुन कर बड़ों से ले कर छोटों तक एक एक कर के निकल गए, और यीशु अकेला रह गया, और स्त्री वहीं बीच में खड़ी रह गई। 
John 8:10 यीशु ने सीधे हो कर उस से कहा, हे नारी, वे कहां गए? क्या किसी ने तुझ पर दंड की आज्ञा न दी। 
John 8:11 उसने कहा, हे प्रभु, किसी ने नहीं: यीशु ने कहा, मैं भी तुझ पर दंड की आज्ञा नहीं देता; जा, और फिर पाप न करना।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 1-4


शुक्रवार, 24 जनवरी 2014

वास्तविकता


   कार से यात्रा करते हुए मेरा ध्यान मार्ग के किनारे लगे एक संकेत पर गया - वह बेदाग़ सफेद था और बड़े सुन्दर लाल अक्षरों में उस पर लिखा था: "नालियाँ और खिड़कियाँ - उत्कृष्ट कार्य की गरण्टी।" वह संकेत तो बहुत अच्छा था परन्तु मुझे उस पर लिखी बात पर कोई विश्वास नहीं हुआ, क्योंकि जिस घर पर वह लगा था वह घर बड़ी जीर्ण हालत में था और लगता था कभी भी ढह जाएगा, उस घर पर लगा रंग उतर रहा था, वहाँ की खिड़कियाँ टूटी हुई थीं और मुझे कोई नाली वहाँ दिखाई नहीं दी। जिस बात का दावा और विज्ञापन किया जा रहा था वही उस घर में विद्यमान नहीं थी।

   बहुत से ’मसीही’ जीवन भी ऐसे ही होते हैं - मसीह यीशु का विज्ञापन तो बहुत करते हैं परन्तु उनके आत्मिक घर टूटे हुए होते हैं; वे मसीहियत की भाषा तो बोलते हैं, नियमित रीति से चर्च जाते हैं, लोगों से मिलते जुलते भी हैं लेकिन उनमें मसीह यीशु के गुण दिखाई नहीं देते। जब हमारा चाल-चलन हमारे मसीही प्रचार के अनुरूप नहीं होता तो हमारा अच्छा व्यवहार केवल धर्मपरायणता का दिखावा मात्र है। प्रभु यीशु ने फरीसियों अर्थात अपने समय के धर्म के अगुवों को आईना दिखाते हुए कहा: "इसी रीति से तुम भी ऊपर से मनुष्यों को धर्मी दिखाई देते हो, परन्तु भीतर कपट और अधर्म से भरे हुए हो" (मत्ती 23:28)। प्रभु यीशु का यह दो टूक संबोधन केवल फरीसियों के लिए ही नहीं था; उन्होंने अपने चेलों से भी ऐसे ही दो टूक शब्दों में कहा: "सावधान रहो! तुम मनुष्यों को दिखाने के लिये अपने धर्म के काम न करो, नहीं तो अपने स्‍वर्गीय पिता से कुछ भी फल न पाओगे" (मत्ती 6:1)।

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें स्पष्ट शब्दों में कहती है: "आज्ञा का सारांश यह है, कि शुद्ध मन और अच्‍छे विवेक, और कपट रहित विश्वास से प्रेम उत्पन्न हो" (1 तिमुथियुस 1:5)। मसीही जीवन के ये सदगुण हमारी कथनी और करनी दोनो से ही संसार के सामने प्रकट होने चाहिएं (लूका 6:45)। आज अपने आत्मिक जीवन को जाँच के देखें; यदि लोग आपके बाहर के सुन्दर प्रदर्शन से आगे आपके अन्दर के वास्तविक जीवन को देखें तो उन्हें देखने को क्या मिलेगा?

   क्या आपके मसीही जीवन की वास्तविकता मसीह यीशु को स्वीकार योग्य है? - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


परमेश्वर चाहता है कि हमारे कार्य हमारे शुद्ध जीवनों का प्रतिबिंब हों।

भला मनुष्य अपने मन के भले भण्‍डार से भली बातें निकालता है; और बुरा मनुष्य अपने मन के बुरे भण्‍डार से बुरी बातें निकालता है; क्योंकि जो मन में भरा है वही उसके मुंह पर आता है। - लूका 6:45

बाइबल पाठ: मत्ती 23:23-31
Matthew 23:23 हे कपटी शास्‍त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय; तुम पोदीने और सौंफ और जीरे का दसवां अंश देते हो, परन्तु तुम ने व्यवस्था की गम्भीर बातों को अर्थात न्याय, और दया, और विश्वास को छोड़ दिया है; चाहिये था कि इन्हें भी करते रहते, और उन्हें भी न छोड़ते। 
Matthew 23:24 हे अन्धे अगुवों, तुम मच्छर को तो छान डालते हो, परन्तु ऊंट को निगल जाते हो। 
Matthew 23:25 हे कपटी शास्‍त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय, तुम कटोरे और थाली को ऊपर ऊपर से तो मांजते हो परन्तु वे भीतर अन्‍धेर असंयम से भरे हुए हैं। 
Matthew 23:26 हे अन्धे फरीसी, पहिले कटोरे और थाली को भीतर से मांज कि वे बाहर से भी स्‍वच्‍छ हों।
Matthew 23:27 हे कपटी शास्‍त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय; तुम चूना फिरी हुई कब्रों के समान हो जो ऊपर से तो सुन्‍दर दिखाई देती हैं, परन्तु भीतर मुर्दों की हड्डियों और सब प्रकार की मलिनता से भरी हैं। 
Matthew 23:28 इसी रीति से तुम भी ऊपर से मनुष्यों को धर्मी दिखाई देते हो, परन्तु भीतर कपट और अधर्म से भरे हुए हो।
Matthew 23:29 हे कपटी शास्‍त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय; तुम भविष्यद्वक्ताओं की कब्रें संवारते और धर्मियों की कब्रें बनाते हो। 
Matthew 23:30 और कहते हो, कि यदि हम अपने बाप-दादों के दिनों में होते तो भविष्यद्वक्ताओं की हत्या में उन के साझी न होते। 
Matthew 23:31 इस से तो तुम अपने पर आप ही गवाही देते हो, कि तुम भविष्यद्वक्ताओं के घातकों की सन्तान हो।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 28-31


शनिवार, 29 जून 2013

परमेश्वर के अतिरिक्त

   अपनी पुस्तक Through the Valley of the Kwai में स्कॉटलैंड के एक सेना अधिकारी, 6 फुट 2 इन्च कद के एर्नेस्ट गौर्डन, ने दूसरे विश्वयुद्ध में कैदी बनाए जाने के अपने संस्मरण लिखे हैं। युद्ध बंदी बनाए जाने के समय गौर्डन एक नास्तिक था। बन्दीयों को रखने की दशा के कारण उसे मलेरिया, डिप्थीरिया, टायफाइड, बेरीबेरी, डाय्सेन्ट्री, शरीर के घाव आदि बिमारियों से होकर गुज़रना पड़ा। बिमारियों से उत्पन्न कमज़ोरी, कठिन परिश्रम और भोजन की कमी के कारण उसका वज़न शीघ्र ही घटकर 50 किलो से भी कम रह गया।

   युद्ध बन्दीयों के अस्पताल में व्याप्त गन्दगी के कारण गौर्डन ने आग्रह किया कि उसे एक ऐसे स्थान पर रखा जाए जहाँ कुछ सफाई होती है - वहाँ का मुर्दाघर। उस मुर्दाघर की ज़मीन पर लेटा हुआ वह प्रतिदिन अपनी मृत्यु की बाट जोहता था। लेकिन रोज़ एक साथी युद्ध बन्दी, डस्टी मिलर, उसके पास आकर उसके घावों को साफ करता, उसे आशा बन्धाता और मिलने वाले भोजन को स्वीकार करने के लिए समझाता, यहाँ तक कि डस्टी अपने भोजन में से भी गौर्डन को खाने के लिए दे देता। शांत और विनम्र स्वभाव का डस्टी उसकी मरहम-पट्टी करते समय गौर्डन से परमेश्वर में अपने दृढ़ विश्वास के बारे में बातें करता और बताता कि इस क्लेष में भी उसे एक अलौकिक आशा है।

   जिस आशा की बात परमेश्वर का वचन बाइबल करती है वह कोई अस्पष्ट, अनिश्चित, काल्पनिक आशावाद नहीं है। इसके विपरीत बाइबल में वर्णित आशा एक मज़बूत और निश्चयपूर्ण उम्मीद है कि जो कुछ परमेश्वर ने अपने वचन में वायदा किया है उसे वह अवश्य ही पूरा भी करेगा। बाइबल हमें यह भी सिखाती है कि परमेश्वर पर विश्वास करने और उसमें आशा बनाए रखने वालों के लिए क्लेष अकसर एक उत्प्रेरक का कार्य करते हैं और उनके चरित्र में धीरज तथा खराई को बढ़ाकर उन्हें और भी अधिक निखार देते हैं (रोमियों 5:3-4)।

   एक कठोर और कष्टदायक युद्ध बन्दीगृह में, 70 वर्ष पूर्व, एर्नेस्ट गौर्डन ने व्यक्तिगत अनुभव से परमेश्वर के वचन में दिया आशा का यह पाठ सीखा, और कल के उस नास्तिक का आज यह कहना है कि "सच्चा विश्वास वहीं पनपता और बढ़ता है जहाँ परमेश्वर के अतिरिक्त कोई आशा नहीं होती।" (रोमियों 8:24-25)। - सिंडी हैस कैस्पर


मसीह यीशु विश्वासी की आशा की अटूट और स्थिर चट्टान है।

आशा के द्वारा तो हमारा उद्धार हुआ है परन्तु जिस वस्तु की आशा की जाती है जब वह देखने में आए, तो फिर आशा कहां रही? क्योंकि जिस वस्तु को कोई देख रहा है उस की आशा क्या करेगा? परन्तु जिस वस्तु को हम नहीं देखते, यदि उस की आशा रखते हैं, तो धीरज से उस की बाट जोहते भी हैं। - रोमियों 8:24-25

बाइबल पाठ: रोमियों 5:1-5
Romans 5:1 ​सो जब हम विश्वास से धर्मी ठहरे, तो अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर के साथ मेल रखें।
Romans 5:2 जिस के द्वारा विश्वास के कारण उस अनुग्रह तक, जिस में हम बने हैं, हमारी पहुंच भी हुई, और परमेश्वर की महिमा की आशा पर घमण्ड करें।
Romans 5:3 केवल यही नहीं, वरन हम क्लेशों में भी घमण्ड करें, यही जानकर कि क्लेश से धीरज।
Romans 5:4 ओर धीरज से खरा निकलना, और खरे निकलने से आशा उत्पन्न होती है।
Romans 5:5 और आशा से लज्ज़ा नहीं होती, क्योंकि पवित्र आत्मा जो हमें दिया गया है उसके द्वारा परमेश्वर का प्रेम हमारे मन में डाला गया है।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 14-16 
  • प्रेरितों 9:22-43


शुक्रवार, 28 जून 2013

दृष्टिकोण

   विश्व के दो महाशक्तियों अमेरिका और उसके साथी देश, तथा रूस और उसके साथी देशों के बीच 1947 से 1991 तक एक लंबा शीत युद्ध चला जिसमें दोनों ही एक दूसरे से बढ़कर सैन्य क्षमता रखने वाले और एक दूसरे से बलवन्त रहने के प्रयास में लगे रहे। एक दूसरे पर शीर्षता पाने के लिए विकसित किए जाने वाले उनके हथियारों में प्रमुख स्थान था परमाणु हथियारों का। इस होड़ के दौरान प्रसिद्ध परमाणु वैज्ञानिक एल्बर्ट आईन्सटाइन ने एक बहुत अर्थपूर्ण बात कही जो आज तक भी बहुत प्रसिद्ध और उद्धरित होने वाली बात रही है; उन्होंने कहा, "मैं यह तो नहीं जानता कि तीसरा विश्वयुद्ध किस प्रकार के हथियारों से लड़ा जाएगा, लेकिन चौथा विश्वयुद्ध अवश्य ही लाठियों और पत्थरों से लड़ा जाएगा।" आईन्स्टाइन के लिए परमाणु हथियारों से युद्ध लड़े जाने के परिणामों का यह एक स्पष्ट भावी दृष्टिकोण का क्षण था। वह भलि-भाँति यह समझ सके कि चाहे परमाणु युद्ध लड़ने के कारण कोई भी हों, परिणाम संसार भर के लिए अति भीष्ण और अति विध्वंसकारी होंगे।

   दुर्भाग्यवश हम साधारणतया इतने स्पष्ट भावी दृष्टिकोण के साथ आते समय और परिणामों की ओर नहीं देखते। कभी कभी हमारे द्वारा किए गए चुनाव और निर्णयों के संभावित परिणाम आंकना कठिन होता है, और कभी कभी हम केवल अपने वर्तमान के बारे में ही सोच रहे होते हैं ना कि दूरगामी परिणामों के बारे में।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के एक महानायक मूसा के विषय में इब्रानियों 11:24-26 में लिखी बात दिखाती है कि मूसा ने अपने निर्णय के लिए भावी दृष्टिकोण रखा और होने वाले संभावित परिणामों को ध्यान में रखते हुए अपने जीवन के लिए निर्णय लिया: "विश्वास ही से मूसा ने सयाना हो कर फिरौन की बेटी का पुत्र कहलाने से इन्कार किया। इसलिये कि उसे पाप में थोड़े दिन के सुख भोगने से परमेश्वर के लोगों के साथ दुख भोगना और उत्तम लगा। और मसीह के कारण निन्‍दित होने को मिसर के भण्‍डार से बड़ा धन समझा: क्योंकि उस की आंखे फल पाने की ओर लगी थीं" (इब्रानियों 11:24-26)।

   मूसा के लिए यह चुनाव सरल नहीं था लेकिन वह अपने उस चुनाव की खराई और सार्थकता को पहचान सका और इसीलिए उसने आते अनन्त समय के सुखद प्रतिफलों के लिए वर्तमान में दुख उठाना अधिक भला समझा। उसके भावी दृष्टिकोण ने ही उसे वर्तमान के कष्ट सहने में सहायता करी। क्या आज हम जो मसीही विश्वासी कहलाते हैं, मूसा के समान ऐसा ही भावी दृष्टिकोण रखते हुए, मसीह यीशु के लिए निंदित होने के लिए तैयार हैं? क्या परमेश्वर के साथ बिताए जाने वाले उस आते जीवन के अनन्त सुख के लिए हम वर्तमान जीवन में मसीह यीशु के कष्टों में संभागी होने के लिए सहमत हैं? पौलुस प्रेरित ने रोम के विश्वासीयों को लिखी अपनी पत्री में स्पष्ट लिखा है "... जब कि हम उसके साथ दुख उठाएं कि उसके साथ महिमा भी पाएं" (रोमियों 8:17)।

   आज आपका दृष्टिकोण और चुनाव क्या है? - बिल क्राऊडर


यदि हम हर बात के लिए मसीह यीशु पर निर्भर रहेंगे तो हर बात को सहने की सामर्थ भी पाते रहेंगे।

यह बात सच है, कि यदि हम उसके साथ मर गए हैं तो उसके साथ जीएंगे भी। - 2 तिमुथियुस 2:11

बाइबल पाठ: इब्रानियों 11:23-31
Hebrews 11:23 विश्वास ही से मूसा के माता पिता ने उसको, उत्पन्न होने के बाद तीन महीने तक छिपा रखा; क्योंकि उन्होंने देखा, कि बालक सुन्‍दर है, और वे राजा की आज्ञा से न डरे।
Hebrews 11:24 विश्वास ही से मूसा ने सयाना हो कर फिरौन की बेटी का पुत्र कहलाने से इन्कार किया।
Hebrews 11:25 इसलिये कि उसे पाप में थोड़े दिन के सुख भोगने से परमेश्वर के लोगों के साथ दुख भोगना और उत्तम लगा।
Hebrews 11:26 और मसीह के कारण निन्‍दित होने को मिसर के भण्‍डार से बड़ा धन समझा: क्योंकि उस की आंखे फल पाने की ओर लगी थीं।
Hebrews 11:27 विश्वास ही से राजा के क्रोध से न डर कर उसने मिसर को छोड़ दिया, क्योंकि वह अनदेखे को मानों देखता हुआ दृढ़ रहा।
Hebrews 11:28 विश्वास ही से उसने फसह और लोहू छिड़कने की विधि मानी, कि पहिलौठों का नाश करने वाला इस्त्राएलियों पर हाथ न डाले।
Hebrews 11:29 विश्वास ही से वे लाल समुद्र के पार ऐसे उतर गए, जैसे सूखी भूमि पर से; और जब मिस्रियों ने वैसा ही करना चाहा, तो सब डूब मरे।
Hebrews 11:30 विश्वास ही से यरीहो की शहरपनाह, जब सात दिन तक उसका चक्कर लगा चुके तो वह गिर पड़ी।
Hebrews 11:31 विश्वास ही से राहाब वेश्या आज्ञा ने मानने वालों के साथ नाश नहीं हुई; इसलिये कि उसने भेदियों को कुशल से रखा था।


एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 11-13 
  • प्रेरितों 9:1-21


गुरुवार, 27 जून 2013

उपनाम

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस द्वारा फिलिप्पी की मसीही मण्डली को लिखी पत्री में एक नाम आता है "इपफ्रदीतुस"। इपफ्रदीतुस एक युनानी व्यक्ति था जिसने मसीही विश्वास को अपनाया था और मसीह यीशु का अनुयायी हो गया था। वह पौलुस का भी एक निकट सहयोगी था और मसीही प्रचार के लिए करी गई पौलुस की यात्राओं में उसने पौलुस की बहुत अच्छी सेवा करी थी। इस पत्री में पौलुस अपने इस मित्र के लिए कुछ उपनाम प्रयुक्त करता है: "पर मैं ने इपफ्रदीतुस को जो मेरा भाई, और सहकर्मी और संगी योद्धा और तुम्हारा दूत, और आवश्यक बातों में मेरी सेवा टहल करने वाला है, तुम्हारे पास भेजना अवश्य समझा" (फिलिप्पियों 2:25)।

   पौलुस के लिए इपफ्रदीतुस आत्मिक रीति से एक भाई, एक विश्वासयोग्य सहकर्मी, मसीही विश्वास के प्रचार में एक कर्मठ संगी योद्धा और पौलुस द्वारा फिलिप्पियों की मण्डली को लिखी इस प्रेर्णादायक पत्री का पत्रवाहक था। इपफ्रदीतुस का जीवन भाईचारे, निष्ठा, आत्मिक सहनशक्ति और सेवाभाव का नमूना था। इपफ्रदीतुस वास्तव में एक सम्मान योग्य व्यक्तित्व था जिसने अपने जीवन से प्रगट रूप में जी कर दिखाया कि अब वह किसी काल्पनिक देवी-देवता पर नहीं वरन जीवते और सच्चे परमेश्वर प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास रखता था और उसके लिए जीवन जीता था। पौलुस प्रेरित द्वारा रोम के मसीही विश्वासीयों को लिखी पत्री के अन्त में हम एक लंबी सूची पाते हैं उन लोगों की जिन्होंने पौलुस के साथ मसीही सेवकाई में कार्य किया और सहयोग दिया (रोमियों 16)। पौलुस उन सब के नाम के साथ उनके कार्य तथा सहयोग के अनुरूप कुछ उपनाम जोड़ देता है, जो आज भी हमें उन लोगों के मसीही सेवकाई के कार्यों के बारे में बताते हैं।

   हम मसीही विश्वासीयों के लिए हमारे नाम से भी अधिक हमारे वे मसीही विश्वास संबंधित गुण हैं जो हम अपने आस-पास के लोगों और समाज के सामने प्रदर्शित करते हैं, जैसे विश्वासयोग्य, ध्यान रखने और देखभाल करने वाले, प्रोत्साहित करने और उभारने वाले, सदबुद्धि से कार्य करने वाले इत्यादि। आज यदि आपके नाम के साथ, आपके व्यावाहरिक मसीही विश्वास को दिखाने के लिए कोई उपनाम लगाए, तो वह उपनाम क्या होगा? वह उपनाम आपके लिए सम्मान का कारण होगा या शर्मिंदगी का? - डेनिस फिशर


यदि हम अपने चरित्र का ध्यान रखें तो हमारी ख्याति स्वतः ही बन जाएगी।

पर मैं ने इपफ्रदीतुस को जो मेरा भाई, और सहकर्मी और संगी योद्धा और तुम्हारा दूत, और आवश्यक बातों में मेरी सेवा टहल करने वाला है, तुम्हारे पास भेजना अवश्य समझा। - फिलिप्पियों 2:25

बाइबल पाठ: रोमियों 16:1-15
Romans 16:1 मैं तुम से फीबे की, जो हमारी बहिन और किंख्रिया की कलीसिया की सेविका है, बिनती करता हूं।
Romans 16:2 कि तुम जैसा कि पवित्र लोगों को चाहिए, उसे प्रभु में ग्रहण करो; और जिस किसी बात में उसको तुम से प्रयोजन हो, उस की सहायता करो; क्योंकि वह भी बहुतों की वरन मेरी भी उपकारिणी हुई है।
Romans 16:3 प्रिसका और अक्विला को जो मसीह यीशु में मेरे सहकर्मी हैं, नमस्कार।
Romans 16:4 उन्होंने मेरे प्राण के लिये अपना ही सिर दे रखा था और केवल मैं ही नहीं, वरन अन्यजातियों की सारी कलीसियाएं भी उन का धन्यवाद करती हैं।
Romans 16:5 और उस कलीसिया को भी नमस्कार जो उन के घर में है। मेरे प्रिय इपैनितुस को जो मसीह के लिये आसिया का पहिला फल है, नमस्कार।
Romans 16:6 मरियम को जिसने तुम्हारे लिये बहुत परिश्रम किया, नमस्कार।
Romans 16:7 ​अन्द्रुनीकुस और यूनियास को जो मेरे कुटम्बी हैं, और मेरे साथ कैद हुए थे, और प्रेरितों में नामी हैं, और मुझ से पहिले मसीह में हुए थे, नमस्कार।
Romans 16:8 अम्पलियातुस को, जो प्रभु में मेरा प्रिय है, नमस्कार।
Romans 16:9 उरबानुस को, जो मसीह में हमारा सहकर्मी है, और मेरे प्रिय इस्तखुस को नमस्कार।
Romans 16:10 अपिल्लेस को जो मसीह में खरा निकला, नमस्कार। अरिस्तुबुलुस के घराने को नमस्कार।
Romans 16:11 मेरे कुटुम्बी हेरोदियोन को नमस्कार। नरकिस्सुस के घराने के जो लोग प्रभु में हैं, उन को नमस्कार।
Romans 16:12 त्रूफैना और त्रूफोसा को जो प्रभु में परिश्रम करती हैं, नमस्कार। प्रिया परसिस को जिसने प्रभु में बहुत परिश्रम किया, नमस्कार।
Romans 16:13 रूफुस को जो प्रभु में चुना हुआ है, और उस की माता को जो मेरी भी है, दोनों को नमस्कार।
Romans 16:14 असुंक्रितुस और फिलगोन और हिर्मास ओर पत्रुबास और हर्मेस और उन के साथ के भाइयों को नमस्कार।
Romans 16:15 फिलुलुगुस और यूलिया और नेर्युस और उस की बहिन, और उलुम्पास और उन के साथ के सब पवित्र लोगों को नमस्कार।


एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 8-10 
  • प्रेरितों 8:26-40


गुरुवार, 20 जून 2013

संक्षिप्त

   एक बार मैं ने गिनती की और पाया कि अमेरिका के राष्ट्रपति एब्राहम लिंकन के प्रसिद्ध "गेट्सीबर्ग भाषण" में 300 से भी कम शब्द प्रयुक्त हुए थे; अर्थात बात के प्रभावी और विस्मर्णीय होने के लिए शब्दों की बहुतायत होने की आवश्यकता नहीं है।

   यह भी एक कारण है कि मुझे भजन 117 बहुत पसन्द है; संक्षिप्त होना इस भजन की खासियत है। भजनकार ने कुल 38 शब्दों में जो कुछ वह कहना चाहता था कह दिया है; मूल इब्रानी भाषा में तो इस भजन में केवल 17 शब्द ही प्रयुक्त हुए हैं। परमेश्वर की स्तुति एवं प्रशंसा के इस भजन में सारे संसार के लिए संदेश है कि परमेश्वर यहोवा का करूणामय प्रेम हमारे ऊपर प्रबल हुआ है इसलिए वह स्तुति और धन्यवाद का पात्र है।

   थोड़ा परमेश्वर के प्रेम के बारे में मनन करें। हमारे जन्म और अस्तित्व से पहले ही परमेश्वर ने हमसे प्रेम किया; हमारे जीवन भर उसका व्यवहार हमारे प्रति प्रेम और करुणा से भरा रहता है और हमारी मृत्योपरांत भी उसका प्रेम अपनी सन्तान के प्रति बना रहेगा। पौलुस प्रेरित ने रोम के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में उन्हें स्मरण दिलाया कि उनके प्रति मसीह यीशु के प्रेम से हमें अलग कर सकने वाली कोई भी बात नहीं है (रोमियों 8:39)। परमेश्वर का हृदय प्रेम का एक ऐसा सोता है जो ना कभी सूख सकता है और ना कभी समाप्त हो सकता है।

   इस संक्षिप्त से स्तुति एवं प्रशंसा के भजन को पढ़कर अपनी जीवन यात्रा में प्रोत्साहन पाने के लिए परमेश्वर के मेरे प्रति करुणामय प्रेम से बढ़कर लाभकारी किसी अन्य बात की मैं कलपना भी नहीं कर सकता; जीवन यात्रा को सफल बनाने के लिए उसका प्रेम ही मेरे लिए पर्याप्त है। क्या आपने अपने जीवन में परमेश्वर के प्रेम को स्थान दिया है? - डेविड रोपर


जितना हम परमेश्वर को अनुभव करते हैं उतना ही उसके प्रति आनन्दित और स्तुतिपूर्ण होते जाते हैं।

और फिर हे जाति जाति के सब लागो, प्रभु की स्तुति करो; और हे राज्य राज्य के सब लोगो; उसे सराहो। - रोमियों 15:11 

बाइबल पाठ: भजन 117; रोमियों 8:31-39
Psalms 117:1 हे जाति जाति के सब लोगों यहोवा की स्तुति करो! हे राज्य राज्य के सब लोगो, उसकी प्रशंसा करो!
Psalms 117:2 क्योंकि उसकी करूणा हमारे ऊपर प्रबल हुई है; और यहोवा की सच्चाई सदा की है याह की स्तुति करो!

Romans 8:31 सो हम इन बातों के विषय में क्या कहें? यदि परमेश्वर हमारी ओर है, तो हमारा विरोधी कौन हो सकता है?
Romans 8:32 जिसने अपने निज पुत्र को भी न रख छोड़ा, परन्तु उसे हम सब के लिये दे दिया: वह उसके साथ हमें और सब कुछ क्योंकर न देगा?
Romans 8:33 परमेश्वर के चुने हुओं पर दोष कौन लगाएगा? परमेश्वर वह है जो उन को धर्मी ठहराने वाला है।
Romans 8:34 फिर कौन है जो दण्ड की आज्ञा देगा? मसीह वह है जो मर गया वरन मुर्दों में से जी भी उठा, और परमेश्वर की दाहिनी ओर है, और हमारे लिये निवेदन भी करता है।
Romans 8:35 कौन हम को मसीह के प्रेम से अलग करेगा? क्या क्लेश, या संकट, या उपद्रव, या अकाल, या नंगाई, या जोखिम, या तलवार?
Romans 8:36 जैसा लिखा है, कि तेरे लिये हम दिन भर घात किए जाते हैं; हम वध होने वाली भेंडों की नाईं गिने गए हैं।
Romans 8:37 परन्तु इन सब बातों में हम उसके द्वारा जिसने हम से प्रेम किया है, जयवन्त से भी बढ़कर हैं।
Romans 8:38 क्योंकि मैं निश्चय जानता हूं, कि न मृत्यु, न जीवन, न स्वर्गदूत, न प्रधानताएं, न वर्तमान, न भविष्य, न सामर्थ, न ऊंचाई,
Romans 8:39 न गहिराई और न कोई और सृष्टि, हमें परमेश्वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी।

एक साल में बाइबल: 
  • एस्तेर 1-2 
  • प्रेरितों 5:1-21


बुधवार, 19 जून 2013

बचाए गए

   जनवरी 2010 में हेती द्वीप समूह में एक विनाशकारी भूकम्प आया। भूकम्प और उसके बाद के बचाव कार्य को मीडिया के द्वारा व्यापक रूप से दिखाया गया। विनाश तथा जान और माल की हानि के दृश्यों के बीच में, सभी आशाओं के विपरीत, किसी किसी के मलबे से जीवित निकाले जाने के दृश्य भी देखने को मिलते थे, और उनके साथ ही उन बचाए गए लोगों के रिश्तेदारों आदि के कृतज्ञता तथा धन्यवाद सहित आँसुओं से भरे चेहरे भी दिखाए जाते थे। वे रिश्तेदार कृतज्ञ एवं धन्यवादी थे उन अनजान लोगों के प्रति जो चौबीसों घण्टे बचाने के कार्य में लगे रहते थे और जिन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों की जान बचाई। 

   यदि यह आपके साथ होता तो आपको कैसा अनुभव होता? क्या आप कभी किसी जोखिम से बचाए गए हैं?

   परमेश्वर के वचन बाइबल में कुलुस्से के मसीही विश्वासियों को, जिन्होंने व्यक्तिगत रीति से प्रभु यीशु को जाना और जीवन समर्पण किया था तथा जिनके जीवन उनके इस विश्वास को दिखाते थे, लिखी अपनी पत्री में प्रेरित पौलुस ने पहले तो उन्हें आशवासन दिया कि वह निरंतर उन्हें प्रार्थना में स्मरण रखता है कि वे परमेश्वर की सिद्ध और भली इच्छा को जानने वाले और परमेश्वर को प्रसन्न करने वाले बन सकें; तत्पश्चात पौलुस उन्हें स्मरण दिलाता है कि परमेश्वर ने उनके लिए क्या किया है: "उसी ने हमें अन्धकार के वश से छुड़ाकर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया। जिस में हमें छुटकारा अर्थात पापों की क्षमा प्राप्त होती है" (कुलुस्सियों 1:13-14)।

   मसीह यीशु में हम पाप और पाप के श्राप तथा दण्ड से बचाए जाते हैं। उसी ने अपने आप को हमारे लिए बलिदान कर दिया जिससे वह हमारे पापों को अपने ऊपर लेकर, अपनी धार्मिकता हमे दे सके। उसी में हमें मोक्ष या उद्धार और परमेश्वर की सन्तान होने का दर्जा तथा स्वर्ग में स्थान मिलता है। मसीह यीशु ही है जो संसार के हर व्यक्ति को पाप की मृत्यु से उद्धार के अनन्त जीवन में प्रवेश देता है, अन्धकार की शक्तियों से बचाकर निर्मल ज्योति में निवास देता है।

   पाप के प्रभाव तथा अंजाम से बचाए जाने और परमेश्वर के इस अनुग्रह तथा कृपा का हमारे जीवन में क्या स्थान एवं महत्व है, हमारे लिए यह एक गहन विचार का तथा परमेश्वर के प्रति निरंतर धन्यवादी होने का विषय होना चाहिए। - डेविड मैक्कैसलैंड


जो पाप से बचाए गए हैं वे ही दूसरों को भी पाप से बचाने की लालसा रखते हैं।

परन्तु परमेश्वर ने जो दया का धनी है; अपने उस बड़े प्रेम के कारण, जिस से उसने हम से प्रेम किया जब हम अपराधों के कारण मरे हुए थे, तो हमें मसीह के साथ जिलाया; (अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है।) और मसीह यीशु में उसके साथ उठाया, और स्‍वर्गीय स्थानों में उसके साथ बैठाया। - इफिसियों 2:4-6

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों 1:3-18
Colossians 1:3 हम तुम्हारे लिये नित प्रार्थना कर के अपने प्रभु यीशु मसीह के पिता अर्थात परमेश्वर का धन्यवाद करते हैं।
Colossians 1:4 क्योंकि हम ने सुना है, कि मसीह यीशु पर तुम्हारा विश्वास है, और सब पवित्र लोगों से प्रेम रखते हो।
Colossians 1:5 उस आशा की हुई वस्तु के कारण जो तुम्हारे लिये स्वर्ग में रखी हुई है, जिस का वर्णन तुम उस सुसमाचार के सत्य वचन में सुन चुके हो।
Colossians 1:6 जो तुम्हारे पास पहुंचा है और जैसा जगत में भी फल लाता, और बढ़ता जाता है; अर्थात जिस दिन से तुम ने उसको सुना, और सच्चाई से परमेश्वर का अनुग्रह पहिचाना है, तुम में भी ऐसा ही करता है।
Colossians 1:7 उसी की शिक्षा तुम ने हमारे प्रिय सहकर्मी इपफ्रास से पाई, जो हमारे लिये मसीह का विश्वास योग्य सेवक है।
Colossians 1:8 उसी ने तुम्हारे प्रेम को जो आत्मा में है हम पर प्रगट किया।
Colossians 1:9 इसी लिये जिस दिन से यह सुना है, हम भी तुम्हारे लिये यह प्रार्थना करने और बिनती करने से नहीं चूकते कि तुम सारे आत्मिक ज्ञान और समझ सहित परमेश्वर की इच्छा की पहिचान में परिपूर्ण हो जाओ।
Colossians 1:10 ताकि तुम्हारा चाल-चलन प्रभु के योग्य हो, और वह सब प्रकार से प्रसन्न हो, और तुम में हर प्रकार के भले कामों का फल लगे, और परमेश्वर की पहिचान में बढ़ते जाओ।
Colossians 1:11 और उस की महिमा की शक्ति के अनुसार सब प्रकार की सामर्थ से बलवन्‍त होते जाओ, यहां तक कि आनन्द के साथ हर प्रकार से धीरज और सहनशीलता दिखा सको।
Colossians 1:12 और पिता का धन्यवाद करते रहो, जिसने हमें इस योग्य बनाया कि ज्योति में पवित्र लोगों के साथ मीरास में समभागी हों।
Colossians 1:13 उसी ने हमें अन्धकार के वश से छुड़ाकर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया।
Colossians 1:14 जिस में हमें छुटकारा अर्थात पापों की क्षमा प्राप्त होती है।
Colossians 1:15 वह तो अदृश्य परमेश्वर का प्रतिरूप और सारी सृष्‍टि में पहिलौठा है।
Colossians 1:16 क्योंकि उसी में सारी वस्‍तुओं की सृष्‍टि हुई, स्वर्ग की हो अथवा पृथ्वी की, देखी या अनदेखी, क्या सिंहासन, क्या प्रभुतांए, क्या प्रधानताएं, क्या अधिकार, सारी वस्तुएं उसी के द्वारा और उसी के लिये सृजी गई हैं।
Colossians 1:17 और वही सब वस्‍तुओं में प्रथम है, और सब वस्तुएं उसी में स्थिर रहती हैं।
Colossians 1:18 और वही देह, अर्थात कलीसिया का सिर है; वही आदि है और मरे हुओं में से जी उठने वालों में पहिलौठा कि सब बातों में वही प्रधान ठहरे।

एक साल में बाइबल: 
  • नहेम्याह 12-13 
  • प्रेरितों 4:23-37


मंगलवार, 18 जून 2013

केंद्र बिन्दु

   मुझे गोल्फ खेलना अच्छा लगता है, इसलिए कभी कभी मैं कुछ ऐसे वीडियो देखता हूँ जो इस खेल की बारीकियों और इसे खेलने के बारे में सिखाते हैं। लेकिन एक वीडियो से मैं बहुत निराश हुआ क्योंकि सिखाने वाले ने गोल्फ के एक बिन्दु को समझाने के लिए 8 क्रम और हर क्रम के नीचे और दर्जन भर उप-क्रम बताए। यह सब समझने में बहुत कठिन और अनुपयोगी था। यद्यपि मैं गोल्फ का कोई कोई बड़ा खिलाड़ी नहीं हूँ, फिर भी सालों से खलने के अनुभव ने मुझे यह सिखाया है कि खेलते समय जितने अधिक विचार आपके दिमाग़ में चल रहे होंगे, आपकी सफलता की संभावना उतनी ही कम होगी। अच्छे खेल के लिए आपको अपने विचारों को सीमित एवं सरल तथा ध्यान को एक ही बात पर केंद्रित रखना चाहिए कि किस प्रकार गोल्फ के बल्ले और गेंद में सबसे अधिक कारगर संपर्क बनाया जाए। उस प्रशिक्षक द्वारा दिए गए इतने अधिक विचार ध्यान को केंद्रित रखने में बाधा थे।

   जैसे गोल्फ में, वैसे ही जीवन में इसी प्रकार से केंद्रित रहना सफलता के लिए अनिवार्य है। यही बात मसीही विश्वास और मसीही जीवन में भी पाई जाती है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने इस बारे में लिखा है (फिलिप्पियों 3)। बजाए इसके कि वह अनेक बातों पर ध्यान करता रहे, पौलुस ने सबसे महत्वपूरण एक ही बात पर अपना ध्यान केंद्रित रखा: "हे भाइयों, मेरी भावना यह नहीं कि मैं पकड़ चुका हूं: परन्तु केवल यह एक काम करता हूं, कि जो बातें पीछे रह गई हैं उन को भूल कर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ। निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह इनाम पाऊं, जिस के लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है" (फिलिप्पियों 3:13-14)।

   उसके जीवन की सफलता और उन्नति का यही राज़ था - "केवल यह एक काम करता हूं" - केंद्रित विचार। ध्यान इधर-उधर खींचने और भंग करने के अनेक आकर्षणों तथा विधियों से भरे इस संसार में एक मसीही विश्वासी के लिए अपने ध्यान को अपने उद्धारकर्ता मसीह यीशु पर ध्यान केंद्रित रखने से भला और कुछ नहीं है। लेकिन यह तब ही हो सकता है जब मसीह यीशु आपके लिए सबसे महत्वपूर्ण और मूल्यवान हो। जब ऐसा होगा तब सांसारिक प्रलोभन और विचार नहीं वरन मसीह यीशु का जीवन और शिक्षाएं आपका मार्गदर्शक तथा उद्देश्य होंगी और परमेश्वर की आशीष आपके जीवन में बनी रहेगी। 

   क्या आज मसीह यीशु आपके जीवन तथा ध्यान का केंद्र बिन्दु है? - बिल क्राउडर


जब हम मसीह यीशु पर अपने ध्यान को बनाए रखते हैं तब ही हम उसके लिए सबसे प्रभावशाली होते हैं।

क्या तुम नहीं जानते, कि दौड़ में तो दौड़ते सब ही हैं, परन्तु इनाम एक ही ले जाता है तुम वैसे ही दौड़ो, कि जीतो। - 1 कुरिन्थियों 9:24 

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 3:8-16
Philippians 3:8 वरन मैं अपने प्रभु मसीह यीशु की पहिचान की उत्तमता के कारण सब बातों को हानि समझता हूं: जिस के कारण मैं ने सब वस्‍तुओं की हानि उठाई, और उन्हें कूड़ा समझता हूं, जिस से मैं मसीह को प्राप्त करूं।
Philippians 3:9 और उस में पाया जाऊं; न कि अपनी उस धामिर्कता के साथ, जो व्यवस्था से है, वरन उस धामिर्कता के साथ जो मसीह पर विश्वास करने के कारण है, और परमेश्वर की ओर से विश्वास करने पर मिलती है।
Philippians 3:10 और मैं उसको और उसके मृत्युंजय की सामर्थ को, और उसके साथ दुखों में सहभागी हाने के मर्म को जानूँ, और उस की मृत्यु की समानता को प्राप्त करूं।
Philippians 3:11 ताकि मैं किसी भी रीति से मरे हुओं में से जी उठने के पद तक पहुंचूं।
Philippians 3:12 यह मतलब नहीं, कि मैं पा चुका हूं, या सिद्ध हो चुका हूं: पर उस पदार्थ को पकड़ने के लिये दौड़ा चला जाता हूं, जिस के लिये मसीह यीशु ने मुझे पकड़ा था।
Philippians 3:13 हे भाइयों, मेरी भावना यह नहीं कि मैं पकड़ चुका हूं: परन्तु केवल यह एक काम करता हूं, कि जो बातें पीछे रह गई हैं उन को भूल कर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ।
Philippians 3:14 निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह इनाम पाऊं, जिस के लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है।
Philippians 3:15 सो हम में से जितने सिद्ध हैं, यही विचार रखें, और यदि किसी बात में तुम्हारा और ही विचार हो तो परमेश्वर उसे भी तुम पर प्रगट कर देगा।
Philippians 3:16 सो जहां तक हम पहुंचे हैं, उसी के अनुसार चलें।

एक साल में बाइबल: 
  • नहेम्याह 10-11 
  • प्रेरितों 4:1-22


गुरुवार, 13 जून 2013

स्थिर और लचीले

   उत्तरी ध्रुव से लगे हुए अमेरिका के सबसे उत्तरी प्रांत अलास्का में तेल के भण्डार हैं जहाँ से तेल निकाल कर 800 मील लंबी ट्रांस-अलास्का पाईप लाईन द्वारा अमेरिका तक लाया जाता है। यह पाईप लाईन एक भूकंप बहुल क्षेत्र से होकर निकलती है और अपने आप में इंजिनयरी तथा निर्माण तकनीक की एक मिसाल है। इसके निर्माण के समय इंजीनियरों को यह निश्चित करना था कि किसी भूकंप के कारण यह क्षतिग्रस्त ना हो। इंजीनियरों ने भूकंप से पाईप लाईन की सुरक्षा के लिए उसे टेफलॉन स्लाईडर्स पर टिकाया, जो धरती के कांपने पर आपस में एक दूसरे पर फिसल सकते थे। सन 2002 में एक बड़े भूकंप के आने पर इस पाईप लाईन की इस सुरक्षा विधि की पहली बड़ी परख हुई। इंजीनियरों को यह देखकर बहुत खुशी हुई कि यद्यपि पाईप लाईन के नीचे की धरती 18 फीट एक साईड को खसक गई लेकिन पाईप लाईन को कोई क्षति नहीं हुई - सारा खसकना उन टेफलॉन स्लाईडर्स के एक दूसरे पर थोड़ा-थोड़ा खसकने के द्वारा सहन कर लिया गया और पाईप लाईन बच गई। इस सारे बचाव की कुंजी थी टेफलॉन स्लाईडर्स का धरती पर स्थिर बने रहना और परस्पर एक लचीलापन रखना।

   परमेश्वर से एक मसीही विश्वासी के जीवन की आत्मिक सामर्थ पाते रहने की पाईप लाईन भी परमेश्वर पर उसके स्थिर विश्वास पर टिकी हुई है। लेकिन यदि हम परमेश्वर के साथ अपने संबंध में एक लचीलापन नहीं रखेंगे, वरन परमेश्वर को किसी परिस्थिति में कैसे और क्या कार्य करना चाहिए इस बात में अपनी अपेक्षाओं को लेकर अड़ियल और कठोर रहेंगे तो फिर हमारा परेशानियों में पड़ना अवश्यंभावी हो जाएगा। जब हम किसी संकट में पड़ें तो हमारा ध्यान परमेश्वर की बजाए उन विषम परिस्थितियों पर केंद्रित हो सकता है, लेकिन ऐसे में भी हमारी प्रार्थना होनी चाहिए, "हे परमेश्वर मैं नहीं समझ पा रहा हूँ कि यह दुखदायी परिस्थिति आपने मेरे जीवन में क्यों आने दी। लेकिन हर बात में अन्ततः मेरी भलाई करने और मुझे सुरक्षित रखने के आपके अटल वायदे पर पूर्ण और स्थिर विश्वास रखता हूँ। मेरे जीवन में आपका प्रयोजन पूरा होने तक मुझे और मेरे विश्वास को दृढ़ बनाए रखें और किसी भी क्षति से बचाए रखें।" परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार ने अपने ऐसे ही विश्वास को बड़ी सुन्दरता से प्रस्तुत किया है: "हे परमेश्वर, मुझ पर अनुग्रह कर, मुझ पर अनुग्रह कर, क्योंकि मैं तेरा शरणागत हूं; और जब तक ये आपत्तियां निकल न जाएं, तब तक मैं तेरे पंखों के तले शरण लिये रहूंगा" (भजन 57:1)।

   यदि कभी हमारे नीचे की धरती हमारे लिए कांपने लगे तो आवश्यक है कि हम परमेश्वर के प्रेम और हर समय हमारी देखभाल तथा भलाई करने के उसके वायदे के प्रति अपने विश्वास में दृढ़ और स्थिर तथा परिस्थिति के समाधान के लिए उससे अपनी अपेक्षाओं में लचीले रहें। ऐसा रवैया रखने से, उससे जुड़ी हमारी आत्मिक जीवन की पाईप लाईन कभी क्षतिग्रस्त नहीं होगी और उसकी आशीशें तथा सामर्थ अविरल हमारे जीवन में प्रवाहित होते रहेंगे। - डेनिस फिशर


परमेश्वर हमारे अनुरोध अस्वीकार कर सकता है, या उनके मानने में विलंब कर सकता है लेकिन हर बात में सदा ही हमारा भला करने से पीछे कभी नहीं हट सकता।

हे परमेश्वर, मुझ पर अनुग्रह कर, मुझ पर अनुग्रह कर, क्योंकि मैं तेरा शरणागत हूं; और जब तक ये आपत्तियां निकल न जाएं, तब तक मैं तेरे पंखों के तले शरण लिये रहूंगा। - भजन 57:1

बाइबल पाठ: भजन 57
Psalms 57:1 हे परमेश्वर, मुझ पर अनुग्रह कर, मुझ पर अनुग्रह कर, क्योंकि मैं तेरा शरणागत हूं; और जब तक ये आपत्तियां निकल न जाएं, तब तक मैं तेरे पंखों के तले शरण लिये रहूंगा।
Psalms 57:2 मैं परम प्रधान परमेश्वर को पुकारूंगा, ईश्वर को जो मेरे लिये सब कुछ सिद्ध करता है।
Psalms 57:3 ईश्वर स्वर्ग से भेज कर मुझे बचा लेगा, जब मेरा निगलने वाला निन्दा कर रहा हो। परमेश्वर अपनी करूणा और सच्चाई प्रगट करेगा।
Psalms 57:4 मेरा प्राण सिंहों के बीच में है, मुझे जलते हुओं के बीच में लेटना पड़ता है, अर्थात ऐसे मनुष्यों के बीच में जिन के दांत बर्छी और तीर हैं, और जिनकी जीभ तेज तलवार है।
Psalms 57:5 हे परमेश्वर तू स्वर्ग के ऊपर अति महान और तेजोमय है, तेरी महिमा सारी पृथ्वी के ऊपर फैल जाए!
Psalms 57:6 उन्होंने मेरे पैरों के लिये जाल लगाया है; मेरा प्राण ढला जाता है। उन्होंने मेरे आगे गड़हा खोदा, परन्तु आप ही उस में गिर पड़े।
Psalms 57:7 हे परमेश्वर, मेरा मन स्थिर है, मेरा मन स्थिर है; मैं गाऊंगा वरन भजन कीर्तन करूंगा।
Psalms 57:8 हे मेरी आत्मा जाग जा! हे सारंगी और वीणा जाग जाओ। मैं भी पौ फटते ही जाग उठूंगा।
Psalms 57:9 हे प्रभु, मैं देश के लोगों के बीच तेरा धन्यवाद करूंगा; मैं राज्य राज्य के लोगों के बीच में तेरा भजन गाऊंगा।
Psalms 57:10 क्योंकि तेरी करूणा स्वर्ग तक बड़ी है, और तेरी सच्चाई आकाशमण्डल तक पहुंचती है।
Psalms 57:11 हे परमेश्वर, तू स्वर्ग के ऊपर अति महान है! तेरी महिमा सारी पृथ्वी के ऊपर फैल जाए!

एक साल में बाइबल: 
  • एज़्रा 6-8 
  • यूहन्ना 21


बुधवार, 12 जून 2013

संबंध

   मैं अपने घर की बाल्कनी से देख रहा था, सामने की 20 मंज़िला इमारत गिराई जा रही थी। उस इमारत को गिराने का कार्य पूर्ण करने में मुश्किल से एक सप्ताह ही लगा होगा। गिराने के बाद वहाँ नई इमारत का निर्माण आरंभ हो गया। पुनःनिर्माण का यह कार्य दिन-रात लगातार चल रहा है। महीनों बीत चुके हैं किन्तु यह पुनःनिर्माण अभी पूरा नहीं हुआ है। ध्वस्त करना कितना सरल है और बनाना कितनी मेहनत और लगन का कार्य है।

   जो इमारतों के बनाने और गिराने के लिए सत्य है वही परस्पर संबंधों के लिए भी उतना ही सत्य है - स्थिर और विश्वासयोग्य संबंध बनाना सरल नहीं है किन्तु संबंध टूटने में अधिक समय नहीं लगता। परमेश्वर के वचन बाइबल में फिलिप्पियों की मण्डली को लिखी अपनी पत्री में प्रेरित पौलुस ने उस मण्डली की दो महिलाओं से आग्रह किया "मैं यूओदिया को भी समझाता हूं, और सुन्‍तुखे को भी, कि वे प्रभु में एक मन रहें। और हे सच्चे सहकर्मी मैं तुझ से भी बिनती करता हूं, कि तू उन स्‍त्रियों की सहयता कर, क्योंकि उन्होंने मेरे साथ सुसमाचार फैलाने में, क्‍लेमेंस और मेरे उन और सहकिर्मयों समेत परिश्रम किया, जिन के नाम जीवन की पुस्‍तक में लिखे हुए हैं" (फिलिप्पियों 4:2, 3)। ये दो महिलाओं परमेश्वर के कार्य में परिश्रमी थीं, परन्तु इनकी परस्पर अनबन सारी मण्डली को प्रभावित कर रही थी और यदि यह मनमुटाव दूर नहीं होता तो उस मण्डली की सारी गवाही पर बुरा प्रभाव आता। इस मतभेद को सुलझाने और संबंधों के पुनःनिर्माण के लिए पौलुस ने अपने एक "सच्चे सहकर्मी" की सहायता माँगी।

   यह एक दुखदायी सत्य है कि मसीही विश्वासियों में भी परस्पर अनबन और झगड़े पाए जाते हैं, जबकि परमेश्वर का वचन हमें समझाता है कि "जहां तक हो सके, तुम अपने भरसक सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप रखो" (रोमियों 12:18)। यदि हमारे आपसी मतभेद सुल्झाए नहीं गए तो बड़ी मेहनत और लगन से बनाई गई हमारी मसीही गवाही शीघ्र ही ध्वस्त हो जाएगी। टूटे संबंधों के पुनःनिर्माण में समय और मेहनत तो लगते हैं लेकिन यह करना अनिवार्य है। किसी विश्वासयोग्य साथी की सहायता से ऐसा किया जा सकता है और पुनःनिर्मित इमारत के समान, पुनःस्थापित यह संबंध पहले से अधिक अच्छे और स्थिर भी हो सकते हैं।

   हम यह ठान लें कि अपने शब्दों और कार्यों के द्वारा कभी किसी को गिराएंगे नहीं वरन हमारी हर बात दुसरों को बनाने और बढ़ाने ही के लिए होगी। - सी० पी० हीया


एक से भले दो मसीही विश्वासी हैं - तब जब वे आपस में एक हों।

विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो। - फिलिप्पियों 2:3 

बाइबल पाठ: रोमियों 12:9-21
Romans 12:9 प्रेम निष्कपट हो; बुराई से घृणा करो; भलाई मे लगे रहो।
Romans 12:10 भाईचारे के प्रेम से एक दूसरे पर दया रखो; परस्पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो।
Romans 12:11 प्रयत्न करने में आलसी न हो; आत्मिक उन्माद में भरो रहो; प्रभु की सेवा करते रहो।
Romans 12:12 आशा में आनन्दित रहो; क्लेश में स्थिर रहो; प्रार्थना में नित्य लगे रहो।
Romans 12:13 पवित्र लोगों को जो कुछ अवश्य हो, उस में उन की सहायता करो; पहुनाई करने में लगे रहो।
Romans 12:14 अपने सताने वालों को आशीष दो; आशीष दो श्राप न दो।
Romans 12:15 आनन्द करने वालों के साथ आनन्द करो; और रोने वालों के साथ रोओ।
Romans 12:16 आपस में एक सा मन रखो; अभिमानी न हो; परन्तु दीनों के साथ संगति रखो; अपनी दृष्टि में बुद्धिमान न हो।
Romans 12:17 बुराई के बदले किसी से बुराई न करो; जो बातें सब लोगों के निकट भली हैं, उन की चिन्ता किया करो।
Romans 12:18 जहां तक हो सके, तुम अपने भरसक सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप रखो।
Romans 12:19 हे प्रियो अपना पलटा न लेना; परन्तु क्रोध को अवसर दो, क्योंकि लिखा है, पलटा लेना मेरा काम है, प्रभु कहता है मैं ही बदला दूंगा।
Romans 12:20 परन्तु यदि तेरा बैरी भूखा हो तो उसे खाना खिला; यदि प्यासा हो, तो उसे पानी पिला; क्योंकि ऐसा करने से तू उसके सिर पर आग के अंगारों का ढेर लगाएगा।
Romans 12:21 बुराई से न हारो परन्तु भलाई से बुराई का जीत लो।

एक साल में बाइबल: 
  • एज़्रा 3-5 
  • यूहन्ना 20


मंगलवार, 11 जून 2013

राजसी विवाह

   विवाह सदा ही सजावट, वस्त्र और खाने-पीने आदि में मनमाने खर्चे करने के अवसर रहे हैं। वर्तमान समय के विवाह नवयुवतीयों के लिए "एक दिन की राजकुमारी" बनने के अवसर हो गए हैं जब वे अपनी कल्पनाओं को साकार करने के प्रयास करती हैं; आखिर वे उस विवाह की सबसे विशिष्ट व्यक्ति हैं। एक महंगा और खूबसूरत विवाह का वस्त्र - जो शायद फिर कभी ना पहना जाए, बड़ी मेहनत और अनूठे ढंग से सजाए गए केश, फूलों के गुल्दस्ते, रंगीन वस्त्रों में साथ देती सहेलियाँ, आमंत्रित मित्र और परिवारजन, जिनसे किसी अवसर पर ही मिलना संभव हो पाता है, अनुपम सजावट से सुसज्जित विवाह एवं भोज स्थल और ढेर सारा भिन्न भिन्न प्रकार का भोजन - सब मिलकर एक परिकथा का सा वातावरण बना देते हैं। अपनी बेटी के इन सपनों को साकार करने के लिए कई अभिभावक वर्षों पहले से ही धन संचय करना आरंभ कर देते हैं जिससे मौका आने पर कोई कमी ना रह जाए।

   अगर विवाह शाही घरानों में हो रहा हो तो फिर तो इन सारी बातों के आयोजन और आयोजित कार्यक्रमों का स्तर हम "साधारण" लोगों की कल्पना तथा समझ के बाहर हो जाता है। सन 1981 में राजकुमार चार्ल्स तथा राजकुमारी डायना के विवाह कार्यक्रमों ने इसका एक नमूना संसार के सामने रखा जिसे टेलिविज़न तथा अन्य संचार माध्यमों ने सारे संसार में प्रसारित किया तथा लाखों-करोड़ों लोगों ने देखा, सुना और जाना; वास्तव में राजसी विवाह के स्तर कुछ अलग ही होते हैं।

   एक और राजसी विवाह, जिसकी अभी तैयारी चल रही है, होने को है; और वह विवाह संसार के अब तक के हर विवाह - शाही या सामान्य से बिलकुल भिन्न और अनुपम होगा। इस विवाह में सबसे महत्वपूर्ण और विशिष्ट व्यक्ति संसार के अन्य विवाहों के समान दुल्हन नहीं वरन दूल्हा होगा। यह विवाह होगा मसीह यीशु और उसकी मण्डली अर्थात हम मसीही विश्वासियों का जो एक दुल्हन के समान सदा काल के लिए अपने दूल्हे के साथ एक हो जाएंगे। इसकी कल्पना भी हमारे मस्तिष्क की संभावनाओं से परे है, परन्तु प्रेरित युहन्ना, जिसे इस विवाह का दर्शन दिखाया गया लिखता है कि दुल्हन ने अपने आप को इस विवाह के लिए तैयार किया है और उस दुल्हन के विवाह के वस्त्र उसके धार्मिकता के कार्य हैं (प्रकाशितवाक्य 19:7, 8)।

   यद्यपि संसार के विवाह संबंध का काल तो अधिक से अधिक जीवन-अवधि तक ही सीमित होता है, लेकिन फिर भी हर दुल्हन उसके लिए बहुत तैयारी करती है कि उसके विवाह में कोई कमी ना रहे; तो फिर विचार कीजिए कि उस अलौकिक विवाह के लिए जो अनन्त काल के लिए होगा, दुल्हन अर्थात हम मसीही विश्वासियों को अपनी तैयारी कैसी रखनी चाहिए? क्या आज आप अपने आप को तैयार कर रहे हैं? क्या आपके विवाह वस्त्र अर्थात आपके धार्मिकता के कार्य इस अवसर के लिए अनूकूल एवं तैयार हैं? - जूली एकैरमैन लिंक


भले कार्य हमें मसीही विश्वासी नहीं बनाते; लेकिन मसीही विश्वासी होना हमें भले कार्यों को करने की ज़िम्मेदारी देता है।

आओ, हम आनन्‍दित और मगन हों, और उस की स्‍तुति करें; क्योंकि मेम्ने का ब्याह आ पहुंचा: और उस की पत्‍नी ने अपने आप को तैयार कर लिया है। - प्रकाशितवाक्य 19:7 

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य 19:-10
Revelation 19:1 इस के बाद मैं ने स्वर्ग में मानो बड़ी भीड़ को ऊंचे शब्द से यह कहते सुना, कि हल्लिलूय्याह! उद्धार, और महिमा, और सामर्थ हमारे परमेश्वर ही की है।
Revelation 19:2 क्योंकि उसके निर्णय सच्चे और ठीक हैं, इसलिये कि उसने उस बड़ी वेश्या का जो अपने व्यभिचार से पृथ्वी को भ्रष्‍ट करती थी, न्याय किया, और उस से अपने दासों के लोहू का पलटा लिया है।
Revelation 19:3 फिर दूसरी बार उन्होंने हल्लिलूय्याह! कहा: और उसके जलने का धुआं युगानुयुग उठता रहेगा।
Revelation 19:4 और चौबीसों प्राचीनों और चारों प्राणियों ने गिर कर परमेश्वर को दण्‍डवत किया; जो सिंहासन पर बैठा था, और कहा, आमीन, हल्लिलूय्याह!
Revelation 19:5 और सिंहासन में से एक शब्द निकला, कि हे हमारे परमेश्वर से सब डरने वाले दासों, क्या छोटे, क्या बड़े; तुम सब उस की स्‍तुति करो।
Revelation 19:6 फिर मैं ने बड़ी भीड़ का सा, और बहुत जल का सा शब्द, और गर्जनों का सा बड़ा शब्द सुना, कि हल्लिलूय्याह! इसलिये कि प्रभु हमारा परमेश्वर, सर्वशक्तिमान राज्य करता है।
Revelation 19:7 आओ, हम आनन्‍दित और मगन हों, और उस की स्‍तुति करें; क्योंकि मेम्ने का ब्याह आ पहुंचा: और उस की पत्‍नी ने अपने आप को तैयार कर लिया है।
Revelation 19:8 और उसको शुद्ध और चमकदार महीन मलमल पहिनने का अधिकार दिया गया, क्योंकि उस महीन मलमल का अर्थ पवित्र लोगों के धर्म के काम हैं।
Revelation 19:9 और उसने मुझ से कहा; यह लिख, कि धन्य वे हैं, जो मेम्ने के ब्याह के भोज में बुलाए गए हैं; फिर उसने मुझ से कहा, ये वचन परमेश्वर के सत्य वचन हैं।
Revelation 19:10 और मैं उसको दण्‍डवत करने के लिये उसके पांवों पर गिरा; उसने मुझ से कहा; देख, ऐसा मत कर, मैं तेरा और तेरे भाइयों का संगी दास हूं, जो यीशु की गवाही देने पर स्थिर हैं, परमेश्वर ही को दण्‍डवत कर; क्योंकि यीशु की गवाही भविष्यद्वाणी की आत्मा है।

एक साल में बाइबल: 
  • एज़्रा 1-2 
  • यूहन्ना 19:23-42


सोमवार, 10 जून 2013

उपाधि

   आपके नाम के लगी आपकी उपाधि आपकी श्रेणी की सूचक है और निर्धारित करती है कि आपके आस-पास विद्यमान लोगों के संदर्भ में आपके प्रति कैसा व्यवहार किया जाएगा - यदि आपकी उपाधि आपको समाज के शीर्ष वर्ग में दिखाती है तो लोगों का व्यावहार भी उसके अनुरूप होगा, और यदि सामान्य वर्ग में दिखाती है तो फिर व्यवहार भी सामान्य ही होगा। परमेश्वर के वचन बाइबल में पौलुस के नाम के साथ उपाधि जुड़ी है "प्रेरित" अर्थात "भेजा हुआ" (1 तिमुथियुस 1:1)।

   पौलुस के लिए यह उपाधि किसी गर्व का नहीं वरन एक अप्रत्याशित चमत्कार के स्मरण को बनाए रखने का कारण थी। उस ने यह पदवी अपनी किसी योग्यता अथवा परिश्रम के द्वारा कमाई नहीं थी, वरन यह पदवी उसे प्रदान करी गई थी; वह "...मसीह यीशु की आज्ञा से मसीह यीशु का प्रेरित है..."। दूसरे शब्दों में, पौलुस का प्रेरित होना किसी मानवीय योजना के द्वारा नहीं वरन एक ईश्वरीय प्रबंध था।

   पौलुस अपने बारे में लिखता है कि मसीह यीशु पर विश्वास लाने और उसे अपना जीवन समर्पण करने से पहले वह उसकी "...निन्‍दा करने वाला, और सताने वाला, और अन्‍धेर करने वाला था..." (1 तिमुथियुस 1:13)। मसीह यीशु के नाम और उसके अनुयायियों के प्रति अपने इसी व्यवहार के कारण वह अपने आप को संसार का सबसे बड़ा पापी भी मानता था (1 तिमुथियुस 1:15, 16)। लेकिन साथ ही उसने यह भी पहचाना कि यह सब करने के बावजूद, परमेश्वर के अनुग्रह ही से वह अब प्रभु यीशु का प्रेरित था और उस "सनातन राजा" के लिए कार्य करने को उपयुक्त ठहराया गया और नियुक्त किया गया था (1 तिमुथियुस 1:16, 17)।

   जैसे यह पौलुस के लिए अप्रत्याशित और विस्मयकारी था, वैसे ही आज भी सभी मसीही विश्वासियों के लिए भी उनका परमेश्वर के द्वारा अनुग्रह से पापों से बचाया जाना और परमेश्वर के कार्य के लिए उपयोग किया जाना भी है। पौलुस के समान ही उस राजाओं के राजा प्रभु यीशु ने, हमारे मसीही विश्वास में आने से पहले की हमारी दशा और व्यवहार के बावजूद, हमें भी संसार में अपने सन्देश के साथ भेजा है (मत्ती 28:18-20, प्रेरितों 1:8)। उसने हमें अपने राज्दूत नियुक्त किया है (2 कुरिन्थियों 5:20) कि हम उसके राज्य के सुसमाचार को समस्त संसार में फैलाएं।

   पौलुस के समान ही हम भी नम्रता के साथ यह पहचान लें और मान लें कि यह पदवी और सम्मान हमारी किसी योग्यता या सामर्थ से हमने नहीं कमाया है वरन परमेश्वर के अनुग्रह से हमें प्रदान किया गया है। संसार के उद्धारकर्ता और सृष्टि के परमेश्वर का प्रतिनिधि होना और प्रतिदिन उसके सनातन सत्य वचन, मसीह यीशु में सारे संसार के सभी लोगों को सेंत-मेंत उपलब्ध पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार को दूसरों तक पहुँचाना केवल हमारा कर्तव्य ही नहीं वरन हमारे लिए सौभाग्य भी है। - सी. पी. हिया


परमेश्वर ने संसार के साथ बाँटने को एक सन्देश आपको सौंपा है; आपकी ज़िम्मेदारी उसे अपने पास रखना नहीं, उसे बाँटते ही रहना है।

पौलुस की ओर से जो यीशु मसीह का दास है, और प्रेरित होने के लिये बुलाया गया, और परमेश्वर के उस सुसमाचार के लिये अलग किया गया है। - रोमियों 1:1 

बाइबल पाठ: 1 तिमुथियुस 1:1, 12-17
1 Timothy 1:1 पौलुस की ओर से जो हमारे उद्धारकर्ता परमेश्वर, और हमारी आशा-स्थान मसीह यीशु की आज्ञा से मसीह यीशु का प्रेरित है, तिमुथियुस के नाम जो विश्वास में मेरा सच्चा पुत्र है।
1 Timothy 1:12 और मैं, अपने प्रभु मसीह यीशु का, जिसने मुझे सामर्थ दी है, धन्यवाद करता हूं; कि उसने मुझे विश्वास योग्य समझकर अपनी सेवा के लिये ठहराया।
1 Timothy 1:13 मैं तो पहिले निन्‍दा करने वाला, और सताने वाला, और अन्‍धेर करने वाला था; तौभी मुझ पर दया हुई, क्योंकि मैं ने अविश्वास की दशा में बिन समझे बूझे, ये काम किए थे।
1 Timothy 1:14 और हमारे प्रभु का अनुग्रह उस विश्वास और प्रेम के साथ जो मसीह यीशु में है, बहुतायत से हुआ।
1 Timothy 1:15 यह बात सच और हर प्रकार से मानने के योग्य है, कि मसीह यीशु पापियों का उद्धार करने के लिये जगत में आया, जिन में सब से बड़ा मैं हूं।
1 Timothy 1:16 पर मुझ पर इसलिये दया हुई, कि मुझ सब से बड़े पापी में यीशु मसीह अपनी पूरी सहनशीलता दिखाए, कि जो लोग उस पर अनन्त जीवन के लिये विश्वास करेंगे, उन के लिये मैं एक आदर्श बनूं।
1 Timothy 1:17 अब सनातन राजा अर्थात अविनाशी अनदेखे अद्वैत परमेश्वर का आदर और महिमा युगानुयुग होती रहे। आमीन।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 34-36 
  • यूहन्ना 19:1-22


रविवार, 9 जून 2013

विचार

   मैं और मेरी पत्नि कार से एक यात्रा पर जा रहे थे, और एक स्थान पर दोपहर का भोजन करने के लिए रुके। भोजन के उपरान्त जब हमने बाहर निकल कर देखा तो पाया कि हमारी कार का एक शीशा टूटा हुआ है। उस एक झलक में ही मैंने पहचान लिया कि हम अपनी कार में सामने लगे दिशा निर्देशक यन्त्र को हटा कर छिपाना भूल गए थे और चोर ने उसे उठा लिया। मैंने पिछली सीट पर झाँक कर देखा तो मेरा लैपटौप तथा पासपोर्ट और चैकबुक भी नहीं थे।

   बाद में उस शाम, बहुत से फोन करने और बढ़ती चिन्ताओं में कई घन्टे बिताने के बाद एक सुखद अचरज की बात सामने आई। जब मैंने अपना सूटकेस खोला और कपड़े बाहर निकालने लगा, तो मेरे सामने मेरा वह सब सामान - मेरा लैपटौप तथा पासपोर्ट और चैकबुक पड़े थे, जिनके लिए मैं सोच रहा था कि वे उस दिशा निर्देशक यन्त्र के साथ चुरा लिए गई हैं। एकाएक मैं अपनी आँखों पर विश्वास नहीं कर सका; और तब मुझे स्मर्ण आया कि इस बार मैंने अपना यह सब सामान, आदत के अनुसार पिछली सीट पर नहीं रखा था वरन कपड़ों के साथ सूटकेस में रख दिया था और सूटकेस कार की डिग्गी में बन्द करके रख दिया था। कार के टूटे शीशे और चोरी की हड़बड़ाहट में मेरे विचार मुझे किसी अन्य ही दिशा में ले गए जब कि मेरा सामान मेरे ही पास सुरक्षित पड़ा था।

   कभी-कभी मौके की हड़बड़ाहट में हमारा दिमाग़ और हमारे विचार हमें सही आंकलन नहीं करने देते और हमें लगता है कि हम बहुत नुकसान में पड़ गए हैं जबकि ऐसा होता नहीं है। ऐसा ही दाऊद के साथ भी हुआ, और वह यह समझ बैठा कि परमेश्वर ने उसे छोड़ दिया है। बाद में जब उसे वास्तविकता का एहसास हुआ तो वह समझ पाया कि उसका भय और आशंका निराधार हैं और परमेश्वर पर उसका विश्वास सही है, और तब वह हानि की संभावना उसके लिए परमेश्वर की स्तुति के एक गीत को रचने की प्रेर्णा बन गई (भजन 13:5-6)।

   दाऊद के इस आनन्द ने हमारे लिए भी एक उदाहरण रखा है - यदि हमारा जीवन परमेश्वर में सुरक्षित है (कुलुस्सियों 3:3) तो हमसे कोई भी कभी भी वह नहीं छीन सकता जो हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण और बहुमूल्य है। - मार्ट डी हॉन


अपने मन को अपने मस्तिष्क के विचारों पर नहीं वरन अपने प्रति परमेश्वर के प्रेम पर आधारित रखें।

हे परमेश्वर तू कब तक? क्या सदैव मुझे भूला रहेगा? तू कब तक अपना मुखड़ा मुझ से छिपाए रहेगा? - भजन 13:1 

बाइबल पाठ: भजन 13; कुलुस्सियों 3:1-4
Psalms 13:1 हे परमेश्वर तू कब तक? क्या सदैव मुझे भूला रहेगा? तू कब तक अपना मुखड़ा मुझ से छिपाए रहेगा?
Psalms 13:2 मैं कब तक अपने मन ही मन में युक्तियां करता रहूं, और दिन भर अपने हृदय में दुखित रहा करूं, कब तक मेरा शत्रु मुझ पर प्रबल रहेगा?
Psalms 13:3 हे मेरे परमेश्वर यहोवा मेरी ओर ध्यान दे और मुझे उत्तर दे, मेरी आंखों में ज्योति आने दे, नहीं तो मुझे मृत्यु की नींद आ जाएगी;
Psalms 13:4 ऐसा न हो कि मेरा शत्रु कहे, कि मैं उस पर प्रबल हो गया; और ऐसा न हो कि जब मैं डगमगाने लगूं तो मेरे शत्रु मगन हों।
Psalms 13:5 परन्तु मैं ने तो तेरी करूणा पर भरोसा रखा है; मेरा हृदय तेरे उद्धार से मगन होगा।
Psalms 13:6 मैं परमेश्वर के नाम का भजन गाऊंगा, क्योंकि उसने मेरी भलाई की है।

Colossians 3:1 सो जब तुम मसीह के साथ जिलाए गए, तो स्‍वर्गीय वस्‍तुओं की खोज में रहो, जहां मसीह वर्तमान है और परमेश्वर के दाहिनी ओर बैठा है।
Colossians 3:2 पृथ्वी पर की नहीं परन्तु स्‍वर्गीय वस्‍तुओं पर ध्यान लगाओ।
Colossians 3:3 क्योंकि तुम तो मर गए, और तुम्हारा जीवन मसीह के साथ परमेश्वर में छिपा हुआ है।
Colossians 3:4 जब मसीह जो हमारा जीवन है, प्रगट होगा, तब तुम भी उसके साथ महिमा सहित प्रगट किए जाओगे।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 32-33 
  • यूहन्ना 18:19-40


शनिवार, 8 जून 2013

उद्देश्य


   मेरी पत्नि मार्टी बहुत अच्छा भोजन बनाती है। व्यस्त दिनचर्या के बाद शाम को आराम से बैठकर उसके बनाए भोजन का स्वाद तथा आनन्द लेना बहुत भला लगता है। कभी-कभी शाम के भोजन के बाद वह कुछ अन्य छोटे-मोटे कार्य करने में व्यस्त हो जाती है, और मेरे लिए दो ही विकल्प रह जाते हैं - बैठकर टेलिविज़न देखूँ, या फिर रसोई की साफ-सफाई करूँ। जब मैं अपने भले व्यवहार को प्रदर्शित करने की मनोदशा में होता हूँ, तो मैं अपनी आस्तीनें चढ़ा कर रसोई में जुट जाता हूँ और सब गन्दे बर्तनों की सफाई कर देता हूँ। यह सब करते हुए मेरा उद्देश्य रहता है कि इस सब को देखकर जब मार्टी कृतज्ञता के कुछ शब्द कहे, जैसे "अरे वाह जो, क्या बात है! वैसे तुम्हें यह करने की आवश्यकता नहीं थी" तो मैं तुरंत प्रत्युत्तर में उससे कह सकूँ, "मैंने तो यह सब बस तुम्हारे प्रति अपने प्रेम को जताने के लिए किया था"।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु ने इफसुस की मण्डली को इसलिए डाँटा क्योंकि उन्होंने प्रभु यीशु के प्रति "अपना पहला सा प्रेम" छोड़ दिया था (प्रकाशितवाक्य 2:4)। उस मण्डली के लोग बहुत कुछ कर तो रहे थे, लेकिन उनके वे भले कार्य प्रभु यीशु के प्रति प्रेम के कारण नहीं थे। यद्यपि प्रभु यीशु ने उनके धीरज और विश्वास में बने रहने की प्रशंसा करी, लेकिन मसीह यीशु के दृष्टिकोण से उनका यह सब परिश्रम व्यर्थ था क्योंकि इन भले कार्यों को करने में उनका उद्देश्य सही नहीं था।

   मसीही विश्वास में भला व्यवहार मसीह की उपासना के समान है। अपने विश्वास की परीक्षाओं का सामना करना, क्षमाशील होना, दूसरों की सेवा करना, एक दूसरे से प्रेम रखना आदि सभी बातें प्रभु से कोई शाबाशी पाने, पीठ थपथाए जाने या मण्डली में प्रशंसा पाने और नाम कमाने के उद्देश्य से नहीं वरन प्रगट रूप में अपने मसीही विश्वास को जी कर दिखाने और मसीह यीशु के प्रति अपने प्रेम को प्रगट करने के अवसर होने चाहिएं।

   ज़रा सोच कर देखिए, मसीह यीशु के प्रति अपने प्रेम को प्रगट करने के लिए आपने कोई "भला" कार्य आखिरी बार कब किया था? - जो स्टोवैल


व्यावाहरिक प्रेम ही वस्तविक प्रेम है।

पर मुझे तेरे विरुद्ध यह कहना है कि तू ने अपना पहिला सा प्रेम छोड़ दिया है। - प्रकाशितवाक्य 2:4 

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य 2:1-7
Revelation 2:1 इफिसुस की कलीसिया के दूत को यह लिख, कि, जो सातों तारे अपने दाहिने हाथ में लिये हुए है, और सोने की सातों दीवटों के बीच में फिरता है, वह यह कहता है कि
Revelation 2:2 मैं तेरे काम, और परिश्रम, और तेरा धीरज जानता हूं; और यह भी, कि तू बुरे लोगों को तो देख नहीं सकता; और जो अपने आप को प्रेरित कहते हैं, और हैं नहीं, उन्हें तू ने परख कर झूठा पाया।
Revelation 2:3 और तू धीरज धरता है, और मेरे नाम के लिये दु:ख उठाते उठाते थका नहीं।
Revelation 2:4 पर मुझे तेरे विरुद्ध यह कहना है कि तू ने अपना पहिला सा प्रेम छोड़ दिया है।
Revelation 2:5 सो चेत कर, कि तू कहां से गिरा है, और मन फिरा और पहिले के समान काम कर; और यदि तू मन न फिराएगा, तो मैं तेरे पास आकर तेरी दीवट को उस स्थान से हटा दूंगा।
Revelation 2:6 पर हां तुझ में यह बात तो है, कि तू नीकुलइयों के कामों से घृणा करता है, जिन से मैं भी घृणा करता हूं।
Revelation 2:7 जिस के कान हों, वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है: जो जय पाए, मैं उसे उस जीवन के पेड़ में से जो परमेश्वर के स्‍वर्गलोक में है, फल खाने को दूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 30-31 
  • यूहन्ना 18:1-18


शुक्रवार, 7 जून 2013

विश्वास का तात्पर्य

   स्मुरना के इलाके के बिशप पॉलीकार्प (ई० 59-155) को, उनके मसीही विश्वास और प्रचार के कारण रोमी अधिकारियों ने बन्धक बना लिया और उन से कहा कि यदि वे कैद से मुक्त होना चाहते हैं तो मसीह यीशु को कोसें और उसकी निन्दा करें। पॉलीकार्प का उत्तर था, "छियासी वर्षों से मैं उसकी सेवा करता आया हूँ, और उसने आज तक कभी मेरी कोई हानि नहीं की है। मैं अपने मुक्तिदाता राजा की निन्दा कैसे कर सकता हूँ?" रोमी अधिकारी ने धमकी दी, "यदि तू अपनी मनशा नहीं बदलेगा तो तुझे आग के हवाले कर दिया जाएगा।" पॉलीकार्प अपने निर्णय पर अडिग रहा, और उसे लठ्ठे से बांधकर आग के हवाले कर दिया गया जिससे उसकी मृत्यु हो गई।

   इससे सदियों पहले, तीन जवानों - शदरक, मीशक और अबदनेगो को भी परमेश्वर पर अपने विश्वास के कारण ऐसी ही परिस्थिति का सामना करना पड़ा था। उन्होंने भी राजा नबूकदनेस्सर द्वारा जारी राजा की प्रतिमा के आगे गिरने और उसकी उपासना करने की आज्ञा की अवहेलना की थी क्योंकि वे अपने परमेश्वर यहोवा पर विश्वास रखते थे और केवल उसी की उपासना करते थे। राजा नबूकदनेस्सर ने उनके सामने विकल्प रखा, या तो मेरी प्रतिमा की उपासना स्वीकार करो अथवा आग के भट्टे में झोंके जानो को तैयार हो जाओ। उन तीनों जवानों का राजा को उत्तर था, "...हे नबूकदनेस्सर, इस विषय में तुझे उत्तर देने का हमें कुछ प्रयोजन नहीं जान पड़ता। हमारा परमेश्वर, जिसकी हम उपासना करते हैं वह हम को उस धधकते हुए भट्टे की आग से बचाने की शक्ति रखता है; वरन हे राजा, वह हमें तेरे हाथ से भी छुड़ा सकता है। परन्तु, यदि नहीं, तो हे राजा तुझे मालूम हो, कि हम लोग तेरे देवता की उपासना नहीं करेंगे, और न तेरी खड़ी कराई हुई सोने की मूरत को दण्डवत करेंगे" (दानिय्येल 3:16-18)। उन तीनों को आग के भट्टे में झोंक दिया गया परन्तु आग उन तीनों का कुछ भी नहीं बिगाड़ सकी; जब उन्हें भट्टे से बाहर निकाला गया तो ना तो उनके कपड़े या बाल झुलसे थे और ना ही उनमें आग की कोई गन्ध थी।

   एक ही परमेश्वर के प्रति एक समान विश्वास के लिए एक समान दण्ड, किन्तु दो भिन्न परिणाम - एक आग से जल कर मर गया तो दूसरे आग से अछूते बाहर आ गए। मसीही विश्वास के इन दिग्गजों की गवाही सिखाती है कि मसीही विश्वास में परमेश्वर पर विश्वास का तात्पर्य केवल परमेश्वर की क्षमताओं अथवा हर बात में इच्छित परिणामों की आशा पर विश्वास ही नहीं है वरन सच्चे विश्वास का अर्थ है, चाहे परमेश्वर परिस्थिति से छुड़ाए या ना छुड़ाए, उसपर अडिग अविचिलित विश्वास बनाए रखना। परिस्थिति का अन्जाम चाहे कुछ भी हो, परमेश्वर परमेश्वर ही है और हर बात के लिए अन्तिम निर्णय उसी का है। हम मसीही विश्वासियों का कर्तव्य अपने विश्वास को बनाए रखना है - केवल परिस्थितियों के अनुकूल परिणामों के अनुसार नहीं, वरन, सदा सर्वदा। - एलबर्ट ली


जीवन कठिन है, पर परमेश्वर भला है - हर समय और हर बात में।

स्‍त्रियों ने अपने मरे हुओं को फिर जीवते पाया; कितने तो मार खाते खाते मर गए; और छुटकारा न चाहा; इसलिये कि उत्तम पुनरुत्थान के भागी हों। - इब्रानियों 11:35 

बाइबल पाठ: इब्रानियों 11:32-40
Hebrews 11:32 अब और क्या कहूँ क्योंकि समय नहीं रहा, कि गिदोन का, और बाराक और समसून का, और यिफतह का, और दाऊद का और शामुएल का, और भविष्यद्वक्ताओं का वर्णन करूं।
Hebrews 11:33 इन्‍होंने विश्वास ही के द्वारा राज्य जीते; धर्म के काम किए; प्रतिज्ञा की हुई वस्तुएं प्राप्त की, सिंहों के मुंह बन्‍द किए।
Hebrews 11:34 आग की ज्‍वाला को ठंडा किया; तलवार की धार से बच निकले, निर्बलता में बलवन्‍त हुए; लड़ाई में वीर निकले; विदेशियों की फौजों को मार भगाया।
Hebrews 11:35 स्‍त्रियों ने अपने मरे हुओं को फिर जीवते पाया; कितने तो मार खाते खाते मर गए; और छुटकारा न चाहा; इसलिये कि उत्तम पुनरुत्थान के भागी हों।
Hebrews 11:36 कई एक ठट्ठों में उड़ाए जाने; और कोड़े खाने; वरन बान्‍धे जाने; और कैद में पड़ने के द्वारा परखे गए।
Hebrews 11:37 पत्थरवाह किए गए; आरे से चीरे गए; उन की परीक्षा की गई; तलवार से मारे गए; वे कंगाली में और क्‍लेश में और दुख भोगते हुए भेड़ों और बकिरयों की खालें ओढ़े हुए, इधर उधर मारे मारे फिरे।
Hebrews 11:38 और जंगलों, और पहाड़ों, और गुफाओं में, और पृथ्वी की दरारों में भटकते फिरे।
Hebrews 11:39 संसार उन के योग्य न था: और विश्वास ही के द्वारा इन सब के विषय में अच्छी गवाही दी गई, तौभी उन्हें प्रतिज्ञा की हुई वस्तु न मिली।
Hebrews 11:40 क्योंकि परमेश्वर ने हमारे लिये पहिले से एक उत्तम बात ठहराई, कि वे हमारे बिना सिद्धता को न पहुंचे।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 28-29 
  • यूहन्ना 17


गुरुवार, 6 जून 2013

परीक्षाएं


  एक दोपहर मित्र गोष्ठी के साथ भोजन करते हुए बात-चीत के दौरान एक मित्र ने कहा कि मिशिगन झील में, जो समुद्र से काफी दूर एक स्वच्छ पानी की झील है, एक बार बुल-शार्क मछली द्वारा हमला होने की खबर आ चुकी है। हमारे लिए यह इतना असंभव विचार था कि हम ने इस बात को ठठ्ठों में उड़ा दिया। फिर मैंने इस पर खोज करने का सोचा और इन्टरनैट पर इसके बारे में ढूँढ़ने लगा। वहाँ मुझे मिला कि 1955 में एक ऐसा दावा किया गया था, लेकिन इस दावे की कभी पुष्टि नहीं होने पाई। शार्क! मिशिगन झील में! यदि यह सत्य भी है तो भी एक बहुत दुर्लभ और असामान्य घटना है।

   कितना अच्छा होता यदि हमारे लिए कठिनाईयों और परीक्षाओं का सामना करना भी मिशिगन झील के शार्क हमले के समान ही होता - अति दुर्लभ और असामान्य! लेकिन ऐसा है नहीं। सभी को कठिनाईयों और परीक्षाओं का सामना सामान्यता करना ही होता है; बस जब हमें सामना करना पड़ता है तो हम यही सोचते हैं कि काश ऐसा नहीं होता। इसी लिए प्रेरित पतरस ने पहली शताब्दी के मसीही विश्वासीयों को, जो अपने मसीही विश्वास के कारण घोर अत्यचार और अति विषम परिस्थितियों से होकर निकल रहे थे, लिखी अपनी पत्री में लिखा, "हे प्रियों, जो दुख रूपी अग्‍नि तुम्हारे परखने के लिये तुम में भड़की है, इस से यह समझ कर अचंभा न करो कि कोई अनोखी बात तुम पर बीत रही है" (1 पतरस 4:12)।

   मसीही विश्वासीयों के लिए इस प्रकार की परीक्षाएं कोई अनहोनी या अस्वाभाविक बात नहीं है, वरन उनकी विश्वास यात्रा का एक अनिवर्य भाग है - आखिर शैतान अपने चंगुल से बच निकलने वालों को शांति से कैसे रहने देगा? वह तो अपनी सारी शक्ति और सभी सहायकों द्वारा उनके जीवन को यथासंभव कठिन बनाने का भरसक प्रयास करेगा ही। लेकिन इस दुख रूपी अग्नि में ताए जाकर ही हमारा मसीही विश्वास खरे कुन्दन सा स्वच्छ और बहूमूल्य होकर निकलता है। इस ताए जाने से ही हमारे मसीही विश्वास के जीवन से संबंधित सभी व्यर्थ बातें भी भस्म हो जाती हैं तथा अपने किसी स्वार्थ में होकर या झूठे या दिखावे के विश्वास में मसीह यीशु का अनुकरण करने वालों की छाँटाई भी इससे हो जाती है। शैतान जो युक्तियाँ अपने अनुयायीयों द्वारा मसीही विश्वासियों को सताने के लिए प्रयोग करता है, परमेश्वर उन्हीं के द्वारा उसके ही अनुयायियों की वास्तविकता और उनकी दुष्ट मानसिकता को संसार पर प्रगट कर देता है तथा अपनी मण्डली को भेड़ की खाल में छिपे भेड़ियों से शुद्ध करने के लिए प्रयोग कर लेता है।

   परमेश्वर का प्रेम अपनी सन्तान के प्रति कभी कम नहीं होता, वह उन्हें कभी नहीं छोड़ता, कभी नहीं त्यागता। हर कठिनाई, अत्याचार, विषम परिस्थिति में वह उनके साथ बना रहता है, उन्हें सामर्थ देता है, सहने की शक्ति और परिस्थिति के उपयुक्त शांति देता है, और उनकी इस गवाही को शैतान के प्रयोजनों को विफल करने, अपने अनुयायियों को बड़े प्रतिफल देने तथा उन्हें अपनी महिमा का कारण होने वाला बना लेता है। परीक्षाओं से विचलित ना हों, परीक्षाओं में अपनी मसीही गवाही बनाए रखें - यह आपके लिए अद्भुत प्रतिफलों को प्राप्त करने और परमेश्वर को अपने जीवन से महिमा देने का एक सामर्थी माध्यम हैं। - बिल क्राउडर


अपने प्रेम की रौशनी से परमेश्वर हमारे जीवन की काली घटाओं पर एक सुन्दर, चमकीला और आकर्षक मेघधनुष बना देता है।

हे प्रियों, जो दुख रूपी अग्‍नि तुम्हारे परखने के लिये तुम में भड़की है, इस से यह समझ कर अचंभा न करो कि कोई अनोखी बात तुम पर बीत रही है। - 1 पतरस 4:12

बाइबल पाठ: 1 पतरस 4:12-19
1 Peter 4:12 हे प्रियों, जो दुख रूपी अग्‍नि तुम्हारे परखने के लिये तुम में भड़की है, इस से यह समझ कर अचम्भा न करो कि कोई अनोखी बात तुम पर बीत रही है।
1 Peter 4:13 पर जैसे जैसे मसीह के दुखों में सहभागी होते हो, आनन्द करो, जिस से उसकी महिमा के प्रगट होते समय भी तुम आनन्‍दित और मगन हो।
1 Peter 4:14 फिर यदि मसीह के नाम के लिये तुम्हारी निन्‍दा की जाती है, तो धन्य हो; क्योंकि महिमा का आत्मा, जो परमेश्वर का आत्मा है, तुम पर छाया करता है।
1 Peter 4:15 तुम में से कोई व्यक्ति हत्यारा या चोर, या कुकर्मी होने, या पराए काम में हाथ डालने के कारण दुख न पाए।
1 Peter 4:16 पर यदि मसीही होने के कारण दुख पाए, तो लज्ज़ित न हो, पर इस बात के लिये परमेश्वर की महिमा करे।
1 Peter 4:17 क्योंकि वह समय आ पहुंचा है, कि पहिले परमेश्वर के लोगों का न्याय किया जाए, और जब कि न्याय का आरम्भ हम ही से होगा तो उन का क्या अन्‍त होगा जो परमेश्वर के सुसमाचार को नहीं मानते?
1 Peter 4:18 और यदि धर्मी व्यक्ति ही कठिनता से उद्धार पाएगा, तो भक्तिहीन और पापी का क्या ठिकाना?
1 Peter 4:19 इसलिये जो परमेश्वर की इच्छा के अनुसार दुख उठाते हैं, वे भलाई करते हुए, अपने अपने प्राण को विश्वासयोग्य सृजनहार के हाथ में सौंप दें।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 25-27 
  • यूहन्ना 16


बुधवार, 5 जून 2013

शुद्ध और स्वच्छ


   एक अन्तर्राष्ट्रीय पुस्तक सम्मेलन में लेखक अपनी लिखी पुस्तकों को खरीदने वालों को उन्हें हस्ताक्षारित कर के दे रहे थे। एक फ्रांसिसी लेखक की एक पुस्तक को एक स्त्री ने उठाया, सरसरी नज़र से उसके पन्ने पलटे और उस का आंकलन किया, फिर लंबी साँस भरते हुए बोली, "आखिर, एक साफ-सुथरी कहानी वाली पुस्तक!" उस लेखक ने शालीनता से उत्तर दिया, "महोदया, मैं स्वच्छ सोचता हूँ इसीलिए स्वच्छ लिखता हूँ।" वह लेखक वैसा ही छपने को देता था जैसा कि वह अन्दर से था, क्योंकि प्रभु यीशु में विश्वास के द्वारा उसका जीवन अन्दर से शुद्ध और स्वच्छ हो गया था।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में यूहन्ना के 15 अध्याय में प्रभु यीशु की अपने शिष्यों को एक फलवंत जीवन के लिए दी गई शिक्षाएं हैं जिनका सार है कि उन्हें प्रभु यीशु में उनका लगातार बने रहना है। इस बात को समझाने के लिए प्रभु यीशु ने दाखलता, उसकी डालियों और उसके फलवंत होने के चित्रण का प्रयोग किया है; इस चित्रण में वे एक स्थान पर चेलों से कहते हैं, "तुम तो उस वचन के कारण जो मैं ने तुम से कहा है, शुद्ध हो" (यूहन्ना 15:3)। यहाँ जिस शब्द का अनुवाद "शुद्ध" हुआ है, उस के बारे में बाइबल ज्ञाता तथा बाइबल में प्रयुक्त युनानी भाषा के विद्वान डब्ल्यु. ई. वाईन कहते हैं कि मूल युनानी भाषा में इस शब्द का अर्थ है, "किसी भी अशुद्धता और मिलावट से रहित, दाग़रहित, निष्कलंक"।

   मनुष्य का मन केवल प्रभु यीशु द्वारा मिलने वाली पापों की क्षमा और उसके लहु से धोये जाने से ही शुद्ध और स्वच्छ किया जा सकता है और प्रभु यीशु ही की सामर्थ से मन शुद्ध तथा स्वच्छ बना भी रह सकता है। हम कई बार असफल हो जाते हैं, पाप से समझौते कर बैठते हैं, सांसारिकता में फिसल जाते हैं; लेकिन परमेश्वर प्रभु यीशु का वायदा है कि "यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है" (1 यूहन्ना 1:9)। यह शुद्धता, स्वच्छता और पुनः-नवीनिकरण किसी बाहरी क्रिया-कलापों या विधि-विधानों द्वारा नहीं, वरन हमारे अन्दर से, हमारे मन के शुद्धिकरण द्वारा ही संभव है और प्रभु यीशु में सदा उपलब्ध है।

   प्रभु यीशु ने अपने बलिदान तथा अपने वचन के द्वारा समस्त मानव जाति के लिए पापों की क्षमा तथा अन्दर से शुद्ध और स्वच्छ होने का मार्ग खोल दिया है। जो कोई स्वेच्छा से अपने पापों की क्षमा प्रभु यीशु से माँगता है और अपना जीवन उसे समर्पित करता है, वह प्रभु यीशु द्वारा शुद्ध और स्वच्छ किया जाता है। प्रभु यीशु के हर शिष्य, हर मसीही विश्वासी का यह कर्तव्य है कि वह अपने आचरण और बातचीत द्वारा अपने इस शुद्ध और स्वच्छ होने को प्रदर्षित करे; यह ना केवल उसके प्रभु यीशु में बने होने का प्रमाण है वरन दूसरों को प्रभु यीशु के प्रति आकर्षित करने के लिए एक सक्षम गवाही भी है। - डेविड मैक्कैसलैंड


परमेश्वर से किया गया पाप-अंगीकार, परमेश्वर से मिलने वाली शुद्धता और स्वच्छता को जीवन में ले आता है।

पर जैसा तुम्हारा बुलाने वाला पवित्र है, वैसे ही तुम भी अपने सारे चाल चलन में पवित्र बनो। क्योंकि लिखा है, कि "पवित्र बनो, क्योंकि मैं पवित्र हूं"। - 1 पतरस 1:15-16

बाइबल पाठ: यूहन्ना 15:1-8
John 15:1 सच्ची दाखलता मैं हूं; और मेरा पिता किसान है।
John 15:2 जो डाली मुझ में है, और नहीं फलती, उसे वह काट डालता है, और जो फलती है, उसे वह छांटता है ताकि और फले।
John 15:3 तुम तो उस वचन के कारण जो मैं ने तुम से कहा है, शुद्ध हो।
John 15:4 तुम मुझ में बने रहो, और मैं तुम में: जैसे डाली यदि दाखलता में बनी न रहे, तो अपने आप से नहीं फल सकती, वैसे ही तुम भी यदि मुझ में बने न रहो तो नहीं फल सकते।
John 15:5 मैं दाखलता हूं: तुम डालियां हो; जो मुझ में बना रहता है, और मैं उस में, वह बहुत फल फलता है, क्योंकि मुझ से अलग हो कर तुम कुछ भी नहीं कर सकते।
John 15:6 यदि कोई मुझ में बना न रहे, तो वह डाली की नाईं फेंक दिया जाता, और सूख जाता है; और लोग उन्हें बटोरकर आग में झोंक देते हैं, और वे जल जाती हैं।
John 15:7 यदि तुम मुझ में बने रहो, और मेरी बातें तुम में बनी रहें तो जो चाहो मांगो और वह तुम्हारे लिये हो जाएगा।
John 15:8 मेरे पिता की महिमा इसी से होती है, कि तुम बहुत सा फल लाओ, तब ही तुम मेरे चेले ठहरोगे।

एक साल में बाइबल: 2 इतिहास 23-24 यूहन्ना 15