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Wednesday, April 11, 2012

स्मारक

   भारत में स्थित ताजमहल एक भव्य मकबरा है, सफेद संगमरमर से बना यह स्मारक बादशाह शाहजहां ने अपनी पत्नी की याद में बनवाया था। इसके बनने में २२ वर्ष लगे और आज भी हर साल लाखों सैलानी एक शहनशाह द्वारा अपने पत्नी के प्रति अपने प्रेम की यादगार, इस सुन्दर कब्र को देखने देश विदेश से आते हैं।

   यरुशलेम में भी एक और कब्र है, एक खाली कब्र, जिसे देखने के लिए भी हर साल लाखों सैलानी जाते हैं, जो मानव जाति के प्रति परमेश्वर के प्रेम को स्मरण दिलाती है। यह कब्र प्रभु यीशु की कब्र मानी जाती है। प्रभु यीशु चाहे जिस भी कब्र में रहे हों, वे केवल थोड़े से समय के लिए ही उस में रहे थे। उनके मृतकों में से पुरुत्थान के बाद, पिछले २००० वर्षों से, उनकी कब्र खाली पड़ी है।

   प्रभु यीशु ने किसी पार्थिव या नाशमान वस्तु से अपने लिए बने किसी स्मारक की इच्छा कभी नहीं रखी। वरन, उन्होंने स्वयं ही अपना स्मारक अपने अनुयायियों को बना के दे दिया और उन्हें निर्देश दिए कि उनके पुनः आगमन तक उस यादगार को मनाते रहें। यह स्मारक है उनके द्वारा स्थापित किया गया प्रभु भोज। जिस रात उन्हें पकड़वाया गया, उन्होंने रोटी ली और परमेश्वर को धन्यवाद कर के उसे तोड़ा और अपने चेलों को दे दिया और फिर प्याला भी लिया और परमेश्वर का धन्यवाद करके उसे भी चेलों को दे दिया (लूका २२:१४-२१), और कहा कि उनके दोबारा आने तक यही करते रहें।

   चर्च में प्रभु यीशु के विश्वासी अनुयायी जब कभी प्रभु भोज में सम्मिलित हों, उनके लिए प्रभु के निर्देश हैं कि वे पहले अपने आप को जाँच लें (१ कुरिन्थियों ११:२८), और बीते दिनों के अपने पाप, गलतियां प्रभु यीशु के सामने मानते और उनसे पश्चाताप करते हुए ही इसमें सम्मिलित हों। प्रभु यीशु के विश्वासी जब इस प्रभु भोज में सम्मिलित होते हैं तो वे उस पवित्र प्रभु की देह और लहु के स्मारकों में सम्मिलित होते हैं, उन स्मारकों को अपनी देह और लहु के साथ सम्मिलित करते हैं, इसलिए यह जांचने और पश्चाताप करने की बात अति अनिवार्य और महत्वपूर्ण है।

   प्रभु यीशु का स्मारक कोई रीति-रिवाज़ नहीं है जिसमें सैलानियों के समान किसी को भी, किसी भी और मनमानी रीति से सम्भागी होने की छूट हो। यह बहुत गंभीरता और श्रद्धा के साथ संभागी होने वाला स्मारक है, जिसमें सम्मिलित होने की जवाबदेही भी है; ऐसी जवाबदेही जो परमेश्वर स्वयं लेता है।

   प्रभु यीशु ने जो हमारे लिए किया, उसका एक स्थायी स्मारक भी हमें दे दिया। उसके इस महान प्रेम और बलिदान के महत्व और गंभीरता को सदा स्मरण रखें। - सी. पी. हीया


प्रभु भोज - प्रभु द्वारा अपने चेलों के लिए छोड़ा गया प्रेम और बलिदान का स्मारक।
 
क्‍योंकि जब कभी तुम यह रोटी खाते, और इस कटोरे में से पीते हो, तो प्रभु की मृत्यु को जब तक वह न आए, प्रचार करते हो। - १ कुरिन्थियों ११:२६
 
बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों ११:२३-३२
1Co 11:23  क्‍योंकि यह बात मुझे प्रभु से पहुंची, और मैं ने तुम्हें भी पहुंचा दी, कि प्रभु यीशु ने जिस रात पकड़वाया गया रोटी ली।
1Co 11:24  और धन्यवाद करके उसे तोड़ी, और कहा, कि यह मेरी देह है, जो तुम्हारे लिये है: मेरे स्मरण के लिये यही किया करो।
1Co 11:25  इसी रीति से उस ने बियारी के पीछे कटोरा भी लिया, और कहा, यह कटोरा मेरे लोहू में नई वाचा है: जब कभी पीओ, तो मेरे स्मरण के लिये यही किया करो।
1Co 11:26 क्‍योंकि जब कभी तुम यह रोटी खाते, और इस कटोरे में से पीते हो, तो प्रभु की मृत्यु को जब तक वह न आए, प्रचार करते हो।
1Co 11:27  इसलि्ये जो कोई अनुचित रीति से प्रभु की रोटी खाए, या उसके कटोरे में से पीए, वह प्रभु की देह और लोहू का अपराधी ठहरेगा।
1Co 11:28  इसलिये मनुष्य अपने आप को जांच ले और इसी रीति से इस रोटी में से खाए, और इस कटोरे में से पीए।
1Co 11:29 क्‍योंकि जो खाते-पीते समय प्रभु की देह को न पहिचाने, वह इस खाने और पीने से अपने ऊपर दण्‍ड लाता है।
1Co 11:30  इसी कारण तुम में से बहुत से निर्बल और रोगी हैं, और बहुत से सो भी गए।
1Co 11:31 यदि हम अपने आप में जांचते, तो दण्‍ड न पाते।
1Co 11:32 परन्‍तु प्रभु हमें दण्‍ड देकर हमारी ताड़ना करता है इसलि्ये कि हम संसार के साथ दोषी न ठहरें।
 
एक साल में बाइबल: 
  • १ शमूएल १७-१८ 
  • लूका ११:१-२८