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Monday, July 30, 2012

कूड़ेदान?

   एक दिन मैंने अखबार में पढ़ा कि कुछ लोगों को समुद्र में कूड़ा फेंके जाने पर कोई आपत्ति नहीं है, उनकी नज़रों में समुद्र को एक विशाल कूड़ेदान के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। इसी संदर्भ में उस लेख में आगे लिखा था कि, "यदि आप को प्रशान्त महासागर में तैरता हुआ यह विशाल प्लास्टिक का ढेर दिखे तो चौंकिए मत, इसे ’विशाल प्रशान्त महसागरीय कूड़ेदान’ कहते हैं और इसका क्षेत्रफल अमेरिका के टैक्सस प्रांत से भी बड़ा है। इसमें तीन करोड़ टन प्लास्टिक का कूड़ा जिसके प्रति वर्गमील क्षेत्र में औसतन ४६,००० प्लास्टिक की चीज़ें हैं, समुद्र में तैर रहा है!" कुछ अन्य लोगों का मानना है कि इसका आकार इससे भी कहीं अधिक बड़ा है। प्लास्टिक पर्यावरण के लिए विशेषकर हानिकारक है क्योंकि यह ना घुलता है और ना ही नष्ट होता है।

   सृष्टि के आरंभ में जब परमेश्वर ने आदम को बनाया तो उसे इस पृथ्वी और इसपर रहने वाले जीव-जन्तुओं की देख-रेख करने कि ज़िम्मेदारी भी दी: "तब यहोवा परमेश्वर ने आदम को लेकर अदन की वाटिका में रख दिया, कि वह उस में काम करे और उसकी रक्षा करे" (उत्पत्ति २:१५)। सृष्टि के वृतांत में यह भी लिखा है कि परमेश्वर ने जो कुछ बनाया वह भला था और परमेश्वर उससे प्रसन्न था (उत्पत्ति १:१०, २०, २१)।

   यह समस्त सृष्टि हमें सृष्टिकर्ता परमेश्वर की महानता को दिखाती है और उसकी यह महानता तथा कार्यकुशलता हमें उसकी प्रशंसा तथा आराधना करने को प्रेरित करती है। इस सृष्टि का बेपरवाही से प्रयोग करना उस सृष्टिकर्ता परमेश्वर का अनादर करना है। इसे एक विशाल कूड़ेदान के समान उपयोग करना इसमें रहने वाले जीव-जन्तुओं को नष्ट करता है, इसकी सुन्दरता को भ्रष्ट करता है और जो परमेश्वर की दृष्टि में अच्छा है उसे तुच्छ जानना है। हम मसीही विश्वासियों का कर्तव्य है कि हम अपने सृष्टिकर्ता और उद्धारकर्ता प्रभु यीशु की इस सुन्दर रचना का आदर करें और धरती, जल और आकाश तथा इनमें रहने तथा विचरण करने वाले जीवों की भी परवाह करें, क्योंकि परमेश्वर ने यह सृष्टि केवल हम मनुष्यों के उपयोग के लिए ही नहीं बनाई है। परमेश्वर की इस सृष्टि की देखभाल करना और उसका ध्यान रखना परमेश्वर की प्रत्येक संतान का भी कर्तव्य है। - डेनिस फिशर


पिता परमेश्वर की सृष्टि की देखभाल उसकी विश्वासी सन्तान का कर्तव्य है।

...और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है। - (उत्पत्ति १:१०)

बाइबल पाठ: उत्पत्ति १:२०-२८; २:१५
Gen 1:20  फिर परमेश्वर ने कहा, जल जीवित प्राणियों से बहुत ही भर जाए, और पक्षी पृथ्वी के ऊपर आकाश कें अन्तर में उड़ें। 
Gen 1:21  इसलिये परमेश्वर ने जाति जाति के बड़े बड़े जल-जन्तुओं की, और उन सब जीवित प्राणियों की भी सृष्टि की जो चलते फिरते हैं जिन से जल बहुत ही भर गया और एक एक जाति के उड़ने वाले पक्षियों की भी सृष्टि की : और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है। 
Gen 1:22  और परमेश्वर ने यह कहके उनको आशीष दी, कि फूलो-फलो, और समुद्र के जल में भर जाओ, और पक्षी पृथ्वी पर बढ़ें। 
Gen 1:23  तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार पांचवां दिन हो गया। 
Gen 1:24  फिर परमेश्वर ने कहा, पृथ्वी से एक एक जाति के जीवित प्राणी, अर्थात घरेलू पशु, और रेंगने वाले जन्तु, और पृथ्वी के वनपशु, जाति जाति के अनुसार उत्पन्न हों; और वैसा ही हो गया। 
Gen 1:25  सो परमेश्वर ने पृथ्वी के जाति जाति के वनपशुओं को, और जाति जाति के घरेलू पशुओं को, और जाति जाति के भूमि पर सब रेंगने वाले जन्तुओं को बनाया : और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है। 
Gen 1:26  फिर परमेश्वर ने कहा, हम मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार अपनी समानता में बनाएं; और वे समुद्र की मछलियों, और आकाश के पक्षियों, और घरेलू पशुओं, और सारी पृथ्वी पर, और सब रेंगने वाले जन्तुओं पर जो पृथ्वी पर रेंगते हैं, अधिकार रखें। 
Gen 1:27  तब परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया, अपने ही स्वरूप के अनुसार परमेश्वर ने उसको उत्पन्न किया, नर और नारी करके उस ने मनुष्यों की सृष्टि की। 
Gen 1:28  और परमेश्वर ने उनको आशीष दी : और उन से कहा, फूलो-फलो, और पृथ्वी में भर जाओ, और उसको अपने वश में कर लो; और समुद्र की मछलियों, तथा आकाश के पक्षियों, और पृथ्वी पर रेंगने वाले सब जन्तुओ पर अधिकार रखो। 
Gen 2:15  तब यहोवा परमेश्वर ने आदम को लेकर अदन की वाटिका में रख दिया, कि वह उस में काम करे और उसकी रक्षा करे।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन ५१-५३ 
  • रोमियों २