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Thursday, February 12, 2015

निमंत्रण


   कुछ महीने पहले की बात है, मुझे किसी कार्य के लिए वायु-यान द्वारा आना और जाना पड़ा। लौटते समय मुझे अचरज भी हुआ और अच्छा भी लगा कि मुझे जो सीट मिली थी उसके आगे पैर फैलाने के लिए काफी स्थान था, साथ ही मेरे पास वाली सीट खाली थी, इसलिए मैं हाथ भी फैला कर भी बैठ सकता था; कुल मिलाकर सब अच्छा और आरामदायक था, क्योंकि मुझे सीमित से स्थान में फंस कर बैठे रहने की आवश्यकता नहीं थी। अपने आराम के बारे में सोचने के साथ ही मुझे उन अन्य यात्रियों को हो रही असुविधा का भी ध्यान आया जिनके पास मेरे समान सुविधाजनक सीट नहीं थी। मैंने अपनी दृष्टि घुमाकर देखा और मुझे कुछ अपनी जान-पहचान के लोग दिखाई दिए; मैंने उन्हें निमंत्रण दिया कि वे आकर मेरे पास वाली सीट पर बैठ जाएं, लेकिन आश्चर्य हुआ जब किसी ने मेरा निमंत्रण स्वीकार नहीं किया और किसी ना किसी कारण से वे अपनी ही असुविधापूर्ण सीट पर बैठे रहने में संतुष्ट थे।

   हम मसीही विश्वासियों को एक और भी अति आवश्यक निमंत्रण संसार के लोगों को देना है - प्रभु यीशु में विश्वास लाने के द्वारा हमें प्राप्त हुई पापों की क्षमा, उद्धार और अनन्त जीवन में संभागी होने का निमंत्रण, जिसे कुछ तो स्वीकार कर लेंगे, और कुछ नहीं करेंगे। परमेश्वर के वचन बाइबल में यूहन्ना 1:40 में हम लिखा पाते हैं कि जब अन्द्रियास ने प्रभु यीशु के पीछे चलने का निर्णय लिया, तो उसने तुरंत ही अपने भाई शमौन को भी निमंत्रण दिया कि वह भी जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु के पीछे हो ले (पद 41)। प्रभु यीशु ने अपने अनुयायियों के समक्ष जीवन का नया और अद्भुत प्रस्ताव रखा था, कि वे उसे जानें और उसके साथ एक नए तथा आशीषमय जीवन का आनन्द लें।

   प्रभु यीशु में जो आशीषें तथा प्रतिज्ञाएं तब अन्द्रियास एवं शमौन को उपलब्ध थीं, वे आज भी सभी मसीही विश्वासियों के लिए वैसे ही उपलब्ध हैं:
  • उसकी क्षमा, अनुग्रह एवं धर्मी ठहराया जाना (रोमियों 3:24)
  • उसकी सहायता और सुरक्षा (इब्रानियों 13:5)
  • उसकी आशा (रोमियों 15:13)
  • उसकी शांति (यूहन्ना 14:27)
  • उसके साथ अनन्तकाल का जीवन (1 थिस्सलुनीकियों 4:17)

   प्रभु यीशु का यह निमंत्रण किसी धर्म या जाति विशेष के लिए नहीं वरन संसार के सभी लोगों के लिए है। क्या आप उसके निमंत्रण को स्वीकार करके अपने जीवन को सुनिश्चित करेंगे? - ऐनी सेटास


संसार को दिखाएं कि मसीह यीशु ने आपके लिए क्या किया है, और संसार जान लेगा कि प्रभु यीशु संसार के लिए क्या कर सकता है।

यीशु ने उन के पास आकर कहा, कि स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार मुझे दिया गया है। इसलिये तुम जा कर सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ और उन्हें पिता और पुत्र और पवित्रआत्मा के नाम से बपतिस्मा दो। और उन्हें सब बातें जो मैं ने तुम्हें आज्ञा दी है, मानना सिखाओ: और देखो, मैं जगत के अन्‍त तक सदैव तुम्हारे संग हूं। - मत्ती 28:18-20

बाइबल पाठ: यूहन्ना 1:35-42
John 1:35 दूसरे दिन फिर यूहन्ना और उसके चेलों में से दो जन खड़े हुए थे। 
John 1:36 और उसने यीशु पर जो जा रहा था दृष्टि कर के कहा, देखो, यह परमेश्वर का मेम्ना है। 
John 1:37 तब वे दोनों चेले उस की यह सुनकर यीशु के पीछे हो लिए। 
John 1:38 यीशु ने फिरकर और उन को पीछे आते देखकर उन से कहा, तुम किस की खोज में हो? उन्होंने उस से कहा, हे रब्बी, अर्थात (हे गुरू) तू कहां रहता है? उसने उन से कहा, चलो, तो देख लोगे। 
John 1:39 तब उन्होंने आकर उसके रहने का स्थान देखा, और उस दिन उसी के साथ रहे; और यह दसवें घंटे के लगभग था। 
John 1:40 उन दोनों में से जो यूहन्ना की बात सुनकर यीशु के पीछे हो लिये थे, एक तो शमौन पतरस का भाई अन्द्रियास था। 
John 1:41 उसने पहिले अपने सगे भाई शमौन से मिलकर उस से कहा, कि हम को ख्रिस्तुस अर्थात मसीह मिल गया। 
John 1:42 वह उसे यीशु के पास लाया: यीशु ने उस पर दृष्टि कर के कहा, कि तू यूहन्ना का पुत्र शमौन है, तू केफा, अर्थात पतरस कहलाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 13
  • मत्ती 26:26-50