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बुधवार, 31 मार्च 2021

सर्वोत्तम उपहार

 

          मेरी सहेली बनने के बाद से, बारबरा ने मुझे प्रोत्साहित करने के लिए असंख्य कार्ड और उपहार दिए हैं। जब मैंने उसे बताया कि मैंने प्रभु यीशु मसीह को अपना उद्धारकर्ता और प्रभु ग्रहण कर लिया है, तब उसने मुझे वह उपहार दिया था, जिसे मैं उसके द्वारा दिया गया सर्वोत्तम उपहार मानती हूँ – परमेश्वर के वचन बाइबल की मेरी पहली प्रति। उसे देते समय उसने मुझ से कहा, “इसके द्वारा तुम परमेश्वर की निकटता में बढ़ती जा सकती हो, आत्मिक जीवन में परिपक्व होती जा सकती हो; इसमें होकर प्रभु से प्रतिदिन मिलने, संपर्क रखने, उसकी आज्ञाकारिता करते रहने, उस पर भरोसा बनाए रखने, और प्रार्थना करते रहने के द्वारा।” बारबरा द्वारा मुझे दिए गए इस उपहार, मार्गदर्शन और आमंत्रण के द्वारा मेरा जीवन पूर्णतः बदल गया।

          बारबरा मुझे प्रेरित फिलिप्पुस का स्मरण करवाती है। प्रभु यीशु द्वारा फिलिप्पुस को अपने पीछे हो लेने का निमंत्रण देने के पश्चात (यूहन्ना 1:43), उसने तुरंत जाकर अपने मित्र नतनएल को बताया कि वह यीशु ही है जिसके बारे में मूसा ने व्यवस्था में, और नबियों ने अपनी पुस्तकों में लिखा था (पद 45)। जब नतनएल को संदेह हुआ, तो फिलिप्पुस ने न तो कोई वाद-विवाद किया, न उसकी आलोचना की, न उसे उसके हाल पर छोड़ दिया, वरन उसे निमंत्रण दिया कि वह आकर स्वयं प्रभु यीशु से मिले और वास्तविकता को समझ तथा जान ले (पद 46)।

          मैं फिलिप्पुस के आनन्द की कल्पना कर सकती हूँ जब उसने नतनएल को कहे सुना कि वास्तव में यीशु ही “परमेश्वर का पुत्र” और “इस्राएल का राजा” है (पद 49)। उसके लिए यह कैसी अद्भुत आशीष की बात रही होगी जब उसने प्रभु से यह सुना कि आते समय में वे और भी बड़ी बड़ी बातों और कार्यों को देखने पाएँगे (पद 50-51)।

          परमेश्वर का पवित्र आत्मा परमेश्वर के साथ हमारे संबंध का आरंभ करवाता है, और फिर जो उसकी बात के अनुसार सही प्रतिक्रिया देते हैं, प्रभु यीशु में विश्वास करके उसे अपना प्रभु और उद्धारकर्ता स्वीकार करते हैं, उनमें निवास करता है, उन्हें विश्वास और मसीही जीवन की परिपक्वता तथा आशीषों में बढ़ाता जाता है। वही सभी मसीही विश्वासियों को सक्षम करता है कि वे प्रभु परमेश्वर को व्यक्तिगत रीति से और घनिष्ठता से जानते चले जाएँ, उसके वचन की समझ-बूझ और व्यावहारिक उपयोगिता में बढ़ते चले जाएँ; तथा औरों को भी उसके संपर्क में लाने वाले बनें, उन्हें भी प्रभु को व्यक्तिगत रीति से जानने के लिए आमंत्रित करें। समस्त संसार के प्रत्येक जन के उद्धारकर्ता के संपर्क में आने का निमंत्रण और सृष्टिकर्ता परमेश्वर के साथ घनिष्ठता का मार्ग, जीवन का वह सर्वोत्तम उपहार है जो आप किसी को दे सकते हैं। - सोहचील डिक्सन

 

प्रभु यीशु को जानना वह सर्वोत्तम उपहार है जो हम स्वीकार कर सकते हैं; 

उसे औरों के जीवन में पहुँचाना वह सर्वोत्तम उपहार है जो हम प्रदान कर सकते हैं।


यीशु ने उत्तर दिया, यदि तू परमेश्वर के वरदान को जानती, और यह भी जानती कि वह कौन है जो तुझ से कहता है; मुझे पानी पिला तो तू उस से मांगती, और वह तुझे जीवन का जल देता। - यूहन्ना 4:10

बाइबल पाठ: यूहन्ना 1:43-51

यूहन्ना 1:43 दूसरे दिन यीशु ने गलील को जाना चाहा; और फिलिप्पुस से मिलकर कहा, मेरे पीछे हो ले।

यूहन्ना 1:44 फिलिप्पुस तो अन्द्रियास और पतरस के नगर बैतसैदा का निवासी था।

यूहन्ना 1:45 फिलिप्पुस ने नतनएल से मिलकर उस से कहा, कि जिस का वर्णन मूसा ने व्यवस्था में और भविष्यद्वक्ताओं ने किया है, वह हम को मिल गया; वह यूसुफ का पुत्र, यीशु नासरी है।

यूहन्ना 1:46 नतनएल ने उस से कहा, क्या कोई अच्छी वस्तु भी नासरत से निकल सकती है? फिलिप्पुस ने उस से कहा, चलकर देख ले।

यूहन्ना 1:47 यीशु ने नतनएल को अपनी ओर आते देखकर उसके विषय में कहा, देखो, यह सचमुच इस्राएली है: इस में कपट नहीं।

यूहन्ना 1:48 नतनएल ने उस से कहा, तू मुझे कहां से जानता है? यीशु ने उसको उत्तर दिया; उस से पहिले कि फिलिप्पुस ने तुझे बुलाया, जब तू अंजीर के पेड़ के तले था, तब मैं ने तुझे देखा था।

यूहन्ना 1:49 नतनएल ने उसको उत्तर दिया, कि हे रब्बी, तू परमेश्वर का पुत्र है; तू इस्राएल का महाराजा है।

यूहन्ना 1:50 यीशु ने उसको उत्तर दिया; मैं ने जो तुझ से कहा, कि मैं ने तुझे अंजीर के पेड़ के तले देखा, क्या तू इसी लिये विश्वास करता है? तू इस से बड़े बड़े काम देखेगा।

यूहन्ना 1:51 फिर उस से कहा, मैं तुम से सच सच कहता हूँ कि तुम स्वर्ग को खुला हुआ, और परमेश्वर के स्‍वर्गदूतों को ऊपर जाते और मनुष्य के पुत्र के ऊपर उतरते देखोगे।

 

एक साल में बाइबल: 

  • न्यायियों 11-12
  • लूका 6:1-26

सोमवार, 14 सितंबर 2020

संतुष्टि

 

         हमारे बाइबल स्कूल के एक कार्यक्रम के दौरान हमने बच्चों में नाश्ता बांटा, और हम ने देखा कि एक बच्चे ने अपने नाश्ते को बहुत जल्दी से खा लिया, और फिर अन्य बच्चों के द्वारा मेज़ छोड़े गए नाश्ते को भी उठाकर खा लिया। फिर मैंने उस पौपकौर्ण का एक पैकेट और दे दिया, किन्तु भी वह संतुष्ट नहीं था। हम आयोजक चिंतित थे कि यह छोटा बच्चा इतना भूखा क्यों था।

         मुझे बाद में विचार आया कि हम भी उस बालक के समान हो सकते हैं, जब बात हमारी गहरी लालसाओं की होती है। हम उन लालसाओं की संतुष्टि के तरीके तो ढूँढ़ते हैं, परन्तु हमें वह नहीं मिलता है जो हमें पूर्णतः संतुष्ट करता है।

         परमेश्वर के वचन बाइबल में यशायाह भविष्यद्वक्ता उन्हें जो भूखे और प्यासे हैं, आमंत्रित करता है, “आओ ... मोल लो और खाओ” (यशायाह 55:1)। परन्तु फिर वह पूछता है, “जो भोजन वस्तु नहीं है, उसके लिये तुम क्यों रुपया लगाते हो, और, जिस से पेट नहीं भरता उसके लिये क्यों परिश्रम करते हो?” (पद 2)। यहाँ पर यशायाह मात्र शारीरिक भूख के बारे में ही बात नहीं कर रहा है। परमेश्वर हमारी आत्मिक और भावनात्मक भूख को भी अपनी उपस्थिति की प्रतिज्ञा के द्वारा संतुष्ट कर सकता है। पद 3 की “सदा की वाचा” परमेश्वर द्वारा दाऊद से 2 शमूएल 7:8-16 में की गई प्रतिज्ञा को स्मरण कराती है। दाऊद के वंश से एक उद्धारकर्ता ने आना था जो मनुष्यों का परमेश्वर के साथ फिर से मेल-मिलाप करवा देगा। बाद में यूहन्ना 6:35 और 7:37 में, प्रभु यीशु ने भी उसी निमंत्रण को दिया जो यशायाह ने दिया था, और इस प्रकार अपनी पहचान उसी उद्धारकर्ता के रूप में करवाई जिसके विषय यशायाह और अन्य भविष्यद्वक्ताओं ने भविष्यवाणियाँ की थीं।

         परमेश्वर का निमंत्रण आज भी सभी के लिए खुला है, कि उसके पास पश्चाताप और समर्पण में आएँ और उससे पूर्ण संतुष्टि पाएं। - लिंडा वॉशिंगटन

 

केवल परमेश्वर ही हमारी आत्मिक भूख की संतुष्टि प्रदान कर सकता है।


यीशु ने उन से कहा, जीवन की रोटी मैं हूं: जो मेरे पास आएगा वह कभी भूखा न होगा और जो मुझ पर विश्वास करेगा, वह कभी प्यासा न होगा। - यूहन्ना 6:35

बाइबल पाठ: यशायाह 55:1-7

यशायाह 55:1 अहो सब प्यासे लोगों, पानी के पास आओ; और जिनके पास रुपया न हो, तुम भी आकर मोल लो और खाओ! दाखमधु और दूध बिन रुपए और बिना दाम ही आकर ले लो।

यशायाह 55:2 जो भोजन वस्तु नहीं है, उसके लिये तुम क्यों रुपया लगाते हो, और, जिस से पेट नहीं भरता उसके लिये क्यों परिश्रम करते हो? मेरी ओर मन लगाकर सुनो, तब उत्तम वस्तुएं खाने पाओगे और चिकनी चिकनी वस्तुएं खाकर सन्तुष्ट हो जाओगे।

यशायाह 55:3 कान लगाओ, और मेरे पास आओ; सुनो, तब तुम जीवित रहोगे; और मैं तुम्हारे साथ सदा की वाचा बान्धूंगा अर्थात दाऊद पर की अटल करुणा की वाचा।

यशायाह 55:4 सुनो, मैं ने उसको राज्य राज्य के लोगों के लिये साक्षी और प्रधान और आज्ञा देने वाला ठहराया है।

यशायाह 55:5 सुन, तू ऐसी जाति को जिसे तू नहीं जानता बुलाएगा, और ऐसी जातियां जो तुझे नहीं जानतीं तेरे पास दौड़ी आएंगी, वे तेरे परमेश्वर यहोवा और इस्राएल के पवित्र के निमित्त यह करेंगी, क्योंकि उसने तुझे शोभायमान किया है।

यशायाह 55:6 जब तक यहोवा मिल सकता है तब तक उसकी खोज में रहो, जब तक वह निकट है तब तक उसे पुकारो;

यशायाह 55:7 दुष्ट अपनी चाल चलन और अनर्थकारी अपने सोच विचार छोड़कर यहोवा ही की ओर फिरे, वह उस पर दया करेगा, वह हमारे परमेश्वर की ओर फिरे और वह पूरी रीति से उसको क्षमा करेगा।

 

एक साल में बाइबल: 

  • नीतिवचन 19-21
  • 2 कुरिन्थियों 7

बुधवार, 26 सितंबर 2018

निमंत्रण



      एक संगीत सभा में उपस्थिति के दौरान, मेरा मन एक परेशान करने वाली ऐसी बात की ओर चला गया जिस पर मुझे ध्यान देने की आवश्यकता थी। परन्तु मेरे ध्यान का उस ओर भटकना केवल कुछ पल का ही थी, क्योंकि एक बहुत ही मनोहर भक्ति-गीत के शब्द मेरे कानों से होकर मेरे मन की गहराइयों को छूने लगे। संगीत मण्डली के सदस्य गा रहे थे, “मेरी आत्मा शान्त रह।” उन शब्दों को सुनते और उन पर मनन करते हुए मेरी आँखें भर आईं, उस शान्ति के बारे में सोचते हुए जो केवल प्रभु परमेश्वर द्वारा ही उपलब्ध करवाई जा सकती है। उस गीत के बोल कुछ इस प्रकार थे:
      मेरी आत्मा शान्त रह:
      प्रभु निकट है तेरे!
      दुःख दर्द का क्रूस सह धीरज से तू;
      आज्ञा और प्रबंध छोड़ परमेश्वर पर;
      हर बदालव में वह रहेगा खरा।

      जब प्रभु यीशु उन नगरों को डाँट रहे थे जिनमें उन्होंने अपने अधिकांश आश्चर्यकर्म किए थे परन्तु फिर भी जिन्होंने पश्चाताप नहीं किया था (मत्ती 11:40), तब भी प्रभु के पास उन लोगों के लिए सांत्वना और शान्ति के शब्द थे जो उनके निकट आना चाहते थेते। परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखा है कि प्रभु ने उनके पास आने की इच्छा रखने वालों को निमंत्रण देते हुए कहा “हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। मेरा जूआ अपने ऊपर उठा लो; और मुझ से सीखो; क्योंकि मैं नम्र और मन में दीन हूं: और तुम अपने मन में विश्राम पाओगे” (मत्ती 11:28-29)।

      उनका यह कथन चौंकाने वाला है! जो उनका तिरिस्कार कर रहे थे, उनके लिए प्रयोग किए गए उनके कठोर शब्दों के तुरंत बाद प्रभु ने सभी के लिए यह निमंत्रण दिया कि सभी लोग उनके निकट आएँ और उस शान्ति को प्राप्त करें जिसकी सब को लालसा रहती है। प्रभु यीशु ही एकमात्र हैं को हमारी व्याकुल और श्रमित आत्माओं को स्थाई और सच्ची शान्ति प्रदान कर सकते हैं; और इसके लिए उनका निमंत्रण सँसार के सभी लोगों के लिए खुला एवँ उपलब्ध है। - जो स्टोवैल


जब हम अपने मन प्रभु यीशु पर लगाए रखते हैं, 
तो वह हमारे मनों को शान्त बनाए रखता है।

जिसका मन तुझ में धीरज धरे हुए हैं, उसकी तू पूर्ण शान्ति के साथ रक्षा करता है, क्योंकि वह तुझ पर भरोसा रखता है। - यशायाह 26:3

बाइबल पाठ: मत्ती 11:25-30
Matthew 11:25 उसी समय यीशु ने कहा, हे पिता, स्वर्ग और पृथ्वी के प्रभु; मैं तेरा धन्यवाद करता हूं, कि तू ने इन बातों को ज्ञानियों और समझदारों से छिपा रखा, और बालकों पर प्रगट किया है।
Matthew 11:26 हां, हे पिता, क्योंकि तुझे यही अच्छा लगा।
Matthew 11:27 मेरे पिता ने मुझे सब कुछ सौंपा है, और कोई पुत्र को नहीं जानता, केवल पिता; और कोई पिता को नहीं जानता, केवल पुत्र और वह जिस पर पुत्र उसे प्रगट करना चाहे।
Matthew 11:28 हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा।
Matthew 11:29 मेरा जूआ अपने ऊपर उठा लो; और मुझ से सीखो; क्योंकि मैं नम्र और मन में दीन हूं: और तुम अपने मन में विश्राम पाओगे।
Matthew 11:30 क्योंकि मेरा जूआ सहज और मेरा बोझ हल्का है।


एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 1-2
  • गलतियों 5



सोमवार, 26 मार्च 2018

पीछे



   वज़न कम करने और स्वस्थ जीवन जीने की इच्छा रखने वालों के लिए स्वास्थ्य कल्ब अनेकों कार्यक्रम बनाते हैं। एक स्वास्थ्य क्लब केवल उन्हें प्रवेश देता है जो कम से कम 50 पाउंड वज़न कम करना चाहते हैं और स्वास्थ्य जीवनशैली अपनाना चाहते हैं। एक स्वास्थ्य क्लब की सदस्या ने बताया कि उसने अपने पिछले स्वास्थ्य क्लब को इसलिए छोड़ दिया क्योंकि उसे लगा के वहाँ के सुडौल और छरहरे लोग उसकी बेडौल देह को घूरते थे और टिप्पणी करते थे। अब वह एक सकारात्मक तथा स्वागत्पूर्ण वातावरण में सप्ताह में 5 दिन व्यायाम करती है।

   दो हज़ार वर्ष पहले प्रभु यीशु इस पृथ्वी पर आत्मिक रीति से अस्वस्थ्य लोगों को अपना अनुसरण करने के लिए बुलाने आए थे। लेवी भी ऐसा ही एक व्यक्ति था। प्रभु यीशु ने उसे अपने चुंगी लेने के स्थान पर बैठे हुए देखा और उससे कहा, “मेरे पीछे हो ले” (मरकुस 2:14)। प्रभु के शब्दों ने लेवी को प्रभावित किया, और वह प्रभु यीशु के पीछे हो लिया। चुंगी लेने वाले अकसर लालची और बेईमान होते थे, और उन्हें धार्मिक रीति से अपवित्र माना जाता था। जब धार्मिक अगुवों ने प्रभु यीशु को लेवी के घर अन्य चुंगी लेने वालों के साथ बैठकर भोजन करते हुए देखा, तो उन्होंने प्रश्न किया, “...वह तो चुंगी लेने वालों और पापियों के साथ खाता पीता है” (2:16)। प्रभु यीशु ने उत्तर दिया, “...भले चंगों को वैद्य की आवश्यकता नहीं, परन्तु बीमारों को है: मैं धर्मियों को नहीं, परन्तु पापियों को बुलाने आया हूं” (2:17)।

   प्रभु यीशु सारे सँसार के सभी पापियों को, जिनमें हम सभी सम्मिलित हैं, बचाने के लिए आए थे। वह हमसे हमारी पाप की दशा में भी प्रेम करते हैं, चाहते हैं कि हम उनकी उपस्थिति में रहें, और हम जैसे भी हैं उसी स्थिति में हमें अपने पीछे हो लेना का खुला निमंत्रण देते हैं। जब हम उनके पीछे हो लेते हैं, उनके मार्गों में उनके साथ चलते हैं, तो हम आत्मिक अस्वस्थता से निकल कर आत्मिक स्वास्थ्य में आते तथा बढ़ते जाते हैं। - मारविन विलियम्स


प्रभु यीशु की बाहें हमारे स्वागत के लिए सदा खुली रहती हैं।

क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए। - यूहन्ना 3:16

बाइबल पाठ: मरकुस 2:13-17
Mark 2:13 वह फिर निकलकर झील के किनारे गया, और सारी भीड़ उसके पास आई, और वह उन्हें उपदेश देने लगा।
Mark 2:14 जाते हुए उसने हलफई के पुत्र लेवी को चुंगी की चौकी पर बैठे देखा, और उस से कहा; मेरे पीछे हो ले।
Mark 2:15 और वह उठ कर, उसके पीछे हो लिया: और वह उसके घर में भोजन करने बैठा, और बहुत से चुंगी लेने वाले और पापी यीशु और उसके चेलों के साथ भोजन करने बैठे; क्योंकि वे बहुत से थे, और उसके पीछे हो लिये थे।
Mark 2:16 और शास्‍त्रियों और फरीसियों ने यह देखकर, कि वह तो पापियों और चुंगी लेने वालों के साथ भोजन कर रहा है, उसके चेलों से कहा; वह तो चुंगी लेने वालों और पापियों के साथ खाता पीता है!!
Mark 2:17 यीशु ने यह सुनकर, उन से कहा, भले चंगों को वैद्य की आवश्यकता नहीं, परन्तु बीमारों को है: मैं धर्मियों को नहीं, परन्तु पापियों को बुलाने आया हूं।


एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू 22-24
  • लूका 3



शुक्रवार, 23 मार्च 2018

कहानी



   वह पुराना कमरा हाथ से कटी हुई लकड़ी से दक्ष हाथों द्वारा बनाया गया था, और किसी भी पत्रिका के प्रथम पृष्ठ की फोटो में दिखाए जाने के योग्य था। परन्तु उसका निर्माण और ढाँचा केवल आधी ही कहानी थे। कमरे के अन्दर पारिवारिक विरासत की वस्तुएँ दीवारों पर टंगी हुई थीं, जिससे वह सारा घर एक यादगार बन गया था। मेज़ पर हाथ से बुनी हुई अंडे रखने की टोकरी, बिस्किट बनाने की पुरानी तख्ती, और तेल से जलने वाली एक लालटेन रखी हुई थी। सामने के दरवाज़े पर एक पुरानी टोपी टंगी हुई थी। उस कमरे और घर के मालिक ने गर्व से कहा, “प्रत्येक वस्तु की पीछे एक कहानी है।”

   परमेश्वर के वचन बाइबल में जब परमेश्वर ने मूसा को मिलापवाला तम्बू बनाने के निर्देश दिए, तो वहाँ की प्रत्येक वस्तु के पीछे भी एक कहानी थी (निर्गमन 25-27)। उस तम्बू का केवल एक ही  प्रवेश द्वार था, जैसे कि हमारे पास परमेश्वर तक पहुँचने के लिए केवल एक ही मार्ग है (प्रेरितों 4:12)। अन्दर टंगा मोटा पर्दा लोगों को परमेश्वर की उपस्थिति के परम-पवित्र स्थान तक पहुँचने से रोकता था, जैसे हमारा पाप हमें परमेश्वर की उपस्थिति में आने से रोकता है। उस परम-पवित्र स्थान में वाचा का संदूक था, जो परमेश्वर की उपस्थिति का सूचक था। वहाँ जाकर बलिदान चढ़ाने और सेवा करने वाला महायाजक उस आने वाले महान याजक – प्रभु यीशु मसीह का अग्रदूत था। बलिदानों का लहू मसीह यीशु के उस सिद्ध बलिदान की छाया था: “...अपने ही लोहू के द्वारा एक ही बार पवित्र स्थान में प्रवेश किया, और अनन्त छुटकारा प्राप्त किया” (इब्रानियों 9:12)।

   ये सभी बातें मसीह यीशु और उसके द्वारा हमारे उद्धार के लिए किए जाने वाले कार्य की कहानी बताते हैं। मसीह यीशु ने यह सब इसलिए किया ताकि “...बुलाए हुए लोग प्रतिज्ञा के अनुसार अनन्त मीरास को प्राप्त करें” (पद 15)। आज सँसार के सभी लोगों के लिए मसीह यीशु का खुला निमंत्रण है कि वे स्वेच्छा से आएं और उसके साथ जुड़कर इस कहानी का एक भाग बना जाएँ। - टिम गुस्टफसन


प्रभु यीशु ने हमारे पापों को अपने ऊपर ले लिया जिससे हमें उद्धार मिल सके।

और किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं; क्योंकि स्वर्ग के नीचे मनुष्यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया, जिस के द्वारा हम उद्धार पा सकें। - प्रेरितों 4:12

बाइबल पाठ: इब्रानियों 9:11-15
Hebrews 9:11 परन्तु जब मसीह आने वाली अच्छी अच्छी वस्‍तुओं का महायाजक हो कर आया, तो उसने और भी बड़े और सिद्ध तम्बू से हो कर जो हाथ का बनाया हुआ नहीं, अर्थात इस सृष्‍टि का नहीं।
Hebrews 9:12 और बकरों और बछड़ों के लोहू के द्वारा नहीं, पर अपने ही लोहू के द्वारा एक ही बार पवित्र स्थान में प्रवेश किया, और अनन्त छुटकारा प्राप्त किया।
Hebrews 9:13 क्योंकि जब बकरों और बैलों का लोहू और कलोर की राख अपवित्र लोगों पर छिड़के जाने से शरीर की शुद्धता के लिये पवित्र करती है।
Hebrews 9:14 तो मसीह का लोहू जिसने अपने आप को सनातन आत्मा के द्वारा परमेश्वर के साम्हने निर्दोष चढ़ाया, तुम्हारे विवेक को मरे हुए कामों से क्यों न शुद्ध करेगा, ताकि तुम जीवते परमेश्वर की सेवा करो।
Hebrews 9:15 और इसी कारण वह नई वाचा का मध्यस्थ है, ताकि उस मृत्यु के द्वारा जो पहिली वाचा के समय के अपराधों से छुटकारा पाने के लिये हुई है, बुलाए हुए लोग प्रतिज्ञा के अनुसार अनन्त मीरास को प्राप्त करें।


एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू 13-15
  • लूका 1:57-80



सोमवार, 19 मार्च 2018

स्मरण



   मुझे समझ नहीं आता है कि ये लोग मुझे कैसे ढूँढ़ लेते हैं, परन्तु मुझे डाक में अधिकाधिक निमंत्रण मिलते जा रहे हैं उन लोगों की ओर से जो मुझे सिखाना चाहते हैं कि नौकरी से सेवानिवृत्ति के पश्चात अधिक से अधिक लाभ कैसे कमाया जाए, और इसके लिए वे चाहते हैं कि मैं उनके द्वारा आयोजित कार्यकर्म का निमंत्रण स्वीकार करके उसमें आऊँ। यह सिलसिला कई वर्ष पहले आरम्भ हुआ था, और तब मुझे निमंत्रण मिलते थे कि मैं सेवानिवृत लोगों के हित के लिए कार्य करने वाली संस्था में सम्मिलित हो जाऊँ। ये सभी निमंत्रण मुझे स्मरण दिलाने के लिए हैं कि “आप वृद्ध हो रहे हैं। वृद्धावस्था के लिए तैयार हो जाईए!”

   अभी तक तो मैं इन सबको अनदेखा करता आ रहा हूँ, परन्तु किसी-न-किसी दिन, मैं इनका कोई निमंत्रण स्वीकार कर बैठूँगा, और उनके किसी कार्यक्रम में चला जाऊँगा। इससे इन्कार नहीं है कि मैं वृद्ध होता जा रहा हूँ, और मुझे इसके बारे में कुछ करने की आवश्यकता है।

   ऐसे ही स्मरण करवाने की बातें मुझे और आपको परमेश्वर के वचन बाइबल से भी मिलती रहती हैं। हम यह जानते और पहचानते हैं कि पवित्र-शास्त्र का वह खण्ड अथवा परिच्छेद जो कह रहा है वह हमारे लिए सही बैठता है, हमें उस पर व्यवहार करना चाहिए। हो सकता ही कि वह परिच्छेद रोमियों 14:13 हो जो हमें एक दूसरे पर दोष लगाने के लिए मना करता है; या फिर 2 कुरिन्थियों 9:6 हो जो हमें उदार मन रखने की शिक्षा देता है; या फिर फिलिप्पियों 1:27-28 जो हमें एकसाथ मिलकर विश्वास और सुसमाचार के लिए कार्य करने को कहता है।

   हम जब परमेश्वर के वचन को पढ़ते हैं, हमारे मार्गदर्शन के लिए हमें स्मरण दिलाने वाली महत्वपूर्ण बातें परमेश्वर की ओर से हमें मिलती रहती हैं। हम परमेश्वर की इन बातों को गंभीरता से लें, और इनका पालन करें, क्योंकि यह स्मरण हमें हमारे प्रेमी परमेश्वर पिता से मिलते हैं जो हमारे लिए भला क्या है हमसे बेहतर जानता है, और सदा हमारा भला ही चाहता है। - डेव ब्रैनन


पवित्रता हमारे अन्दर मसीह द्वारा 
पिता परमेश्वर की इच्छा और आज्ञाओं को पूरा करना है।

सो आगे को हम एक दूसरे पर दोष न लगाएं पर तुम यही ठान लो कि कोई अपने भाई के साम्हने ठेस या ठोकर खाने का कारण न रखे। - रोमियों 14:13

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 1:27-30
Philippians 1:27 केवल इतना करो कि तुम्हारा चाल-चलन मसीह के सुसमाचार के योग्य हो कि चाहे मैं आकर तुम्हें देखूं, चाहे न भी आऊं, तुम्हारे विषय में यह सुनूं, कि तुम एक ही आत्मा में स्थिर हो, और एक चित्त हो कर सुसमाचार के विश्वास के लिये परिश्रम करते रहते हो।
Philippians 1:28 और किसी बात में विरोधियों से भय नहीं खाते यह उन के लिये विनाश का स्‍पष्‍ट चिन्ह है, परन्तु तुम्हारे लिये उद्धार का, और यह परमेश्वर की ओर से है।
Philippians 1:29 क्योंकि मसीह के कारण तुम पर यह अनुग्रह हुआ कि न केवल उस पर विश्वास करो पर उसके लिये दुख भी उठाओ।
Philippians 1:30 और तुम्हें वैसा ही परिश्रम करना है, जैसा तुम ने मुझे करते देखा है, और अब भी सुनते हो, कि मैं वैसा ही करता हूं।


एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू 1-3
  • मरकुस 16



बुधवार, 5 जुलाई 2017

निमंत्रण


   जब प्रभु यीशु इस पृथ्वी पर थे, तो वे लोगों को अपने पास आने का निमंत्रण दिया करते थे, और उनका यह निमंत्रण आज भी संसार के प्रत्येक जन के लिए उपलब्ध है (यूहन्ना 6:35)। लेकिन प्रभु तथा परमेश्वर पिता के पास ऐसा क्या है जो वे हमें देना चाहते हैं, और जो कहीं और, किसी अन्य के पास उपलब्ध नहीं है? परमेश्वर का वचन बाइबल हमें ऐसी कई बातें बताती है जो हमें प्रभु परमेश्वर से सेंत-मेंत, उपहार स्वरूप, उन पर विश्वास लाने और उनके प्रति अपना जीवन समर्पण करने से मिलती हैं:

   उद्धार: पापों की क्षमा और अनन्त जीवन पाने के लिए प्रभु यीशु ही एकमात्र मार्ग हैं - "क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए" (यूहन्ना 3:16); और "यीशु ने उस से कहा, मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता" (यूहन्ना 14:6)।
   
   सुरक्षा: यदि हम अपना प्राण, देह, आत्मा प्रभु को समर्पित करके उसके शिष्य बनकर पीछे हो लेते हैं तो कोई भी सांसारिक हानि, हमारे लिए हानि नहीं होगी - "उसने भीड़ को अपने चेलों समेत पास बुलाकर उन से कहा, जो कोई मेरे पीछे आना चाहे, वह अपने आपे से इन्कार करे और अपना क्रूस उठा कर, मेरे पीछे हो ले। क्योंकि जो कोई अपना प्राण बचाना चाहे वह उसे खोएगा, पर जो कोई मेरे और सुसमाचार के लिये अपना प्राण खोएगा, वह उसे बचाएगा" (मरकुस 8:34-35)।

   शान्ति: हमारा प्रभु परमेश्वर प्रत्येक परिस्थिति, परेशानी में हमें मार्गदर्शन, शान्ति और सांत्वना देने के लिए सदैव हमारे साथ रहेगा - "हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर, और पिता का धन्यवाद हो, जो दया का पिता, और सब प्रकार की शान्‍ति का परमेश्वर है। वह हमारे सब क्‍लेशों में शान्‍ति देता है; ताकि हम उस शान्‍ति के कारण जो परमेश्वर हमें देता है, उन्हें भी शान्‍ति दे सकें, जो किसी प्रकार के क्‍लेश में हों" (2 कुरिन्थियों 1:3-4)।

   बुद्धिमत्ता: प्रभु परमेश्वर का आश्वासन है वह हमें बुद्धि प्रदान करेगा - "पर यदि तुम में से किसी को बुद्धि की घटी हो, तो परमेश्वर से मांगे, जो बिना उलाहना दिए सब को उदारता से देता है; और उसको दी जाएगी" (याकूब 1:5)।

   सामर्थ्य: यदि हम श्रमित और थके भी हों, प्रभु हमें नई साम्र्थ्य से भर देगा - "वह थके हुए को बल देता है और शक्तिहीन को बहुत सामर्थ देता है। तरूण तो थकते और श्रमित हो जाते हैं, और जवान ठोकर खाकर गिरते हैं; परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों की नाईं उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे" (यशायाह 40:29-31)।

   बहुतायत का जीवन: जीवन को उसकी संपूर्णता में जीने और उसका आनन्द लेने के क्षमता हमें प्रभु से मिलती है - "चोर किसी और काम के लिये नहीं परन्तु केवल चोरी करने और घात करने और नष्‍ट करने को आता है। मैं इसलिये आया कि वे जीवन पाएं, और बहुतायत से पाएं" (यूहन्ना 10:10)।

प्रभु यीशु का संसार के प्रत्येक जन के लिए खुला निमंत्रण है, "हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा" (मत्ती 11:28) और "जो कुछ पिता मुझे देता है वह सब मेरे पास आएगा, उसे मैं कभी न निकालूंगा" (यूहन्ना 6:37)। - ऐनी सेटास


प्रभु यीशु आशीषित जीवन देने के लिए हमें बुलाता है।

तुम पवित्र शास्त्र में ढूंढ़ते हो, क्योंकि समझते हो कि उस में अनन्त जीवन तुम्हें मिलता है, और यह वही है, जो मेरी गवाही देता है। फिर भी तुम जीवन पाने के लिये मेरे पास आना नहीं चाहते। - यूहन्ना 5:39-40

बाइबल पाठ: यूहन्ना 6:28-40
John 6:28 उन्होंने उस से कहा, परमेश्वर के कार्य करने के लिये हम क्या करें? 
John 6:29 यीशु ने उन्हें उत्तर दिया; परमेश्वर का कार्य यह है, कि तुम उस पर, जिसे उसने भेजा है, विश्वास करो।
John 6:30 तब उन्होंने उस से कहा, फिर तू कौन सा चिन्ह दिखाता है कि हम उसे देखकर तेरी प्रतीति करें, तू कौन सा काम दिखाता है? 
John 6:31 हमारे बाप दादों ने जंगल में मन्ना खाया; जैसा लिखा है; कि उसने उन्हें खाने के लिये स्वर्ग से रोटी दी। 
John 6:32 यीशु ने उन से कहा, मैं तुम से सच सच कहता हूं कि मूसा ने तुम्हें वह रोटी स्वर्ग से न दी, परन्तु मेरा पिता तुम्हें सच्ची रोटी स्वर्ग से देता है।
John 6:33 क्योंकि परमेश्वर की रोटी वही है, जो स्वर्ग से उतरकर जगत को जीवन देती है।
John 6:34 तब उन्होंने उस से कहा, हे प्रभु, यह रोटी हमें सर्वदा दिया कर। 
John 6:35 यीशु ने उन से कहा, जीवन की रोटी मैं हूं: जो मेरे पास आएगा वह कभी भूखा न होगा और जो मुझ पर विश्वास करेगा, वह कभी प्यासा न होगा। 
John 6:36 परन्तु मैं ने तुम से कहा, कि तुम ने मुझे देख भी लिया है, तोभी विश्वास नहीं करते। 
John 6:37 जो कुछ पिता मुझे देता है वह सब मेरे पास आएगा, उसे मैं कभी न निकालूंगा।
John 6:38 क्योंकि मैं अपनी इच्छा नहीं, वरन अपने भेजने वाले की इच्छा पूरी करने के लिये स्वर्ग से उतरा हूं। 
John 6:39 और मेरे भेजने वाले की इच्छा यह है कि जो कुछ उसने मुझे दिया है, उस में से मैं कुछ न खोऊं परन्तु उसे अंतिम दिन फिर जिला उठाऊं। 
John 6:40 क्योंकि मेरे पिता की इच्छा यह है, कि जो कोई पुत्र को देखे, और उस पर विश्वास करे, वह अनन्त जीवन पाए; और मैं उसे अंतिम दिन फिर जिला उठाऊंगा। 

एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 30-31
  • प्रेरितों 13:26-52


रविवार, 16 अप्रैल 2017

जैसे भी


   सुप्रसिध्द मसीही भजन Just As I Am (जैसा मैं हूँ) सन 1834 में शारलेट ईलिय्ट के द्वारा लिखा गया था। शारलेट कई वर्षों से विकलांग थीं, और यद्यपि वे लड़कियों के एक स्कूल के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाने में योगदान करना चाहती थीं, परन्तु उनकी बीमारी ने उन्हें अन्य लोगों के साथ जाकर स्वयं सेवा करने नहीं दी। इससे वे अपने आप को व्यर्थ अनुभव करने लगीं और उनके इसी भीतरी द्वंद ने उन के मन में मसीह पर उनके विश्वास के प्रति शंकाएं उत्पन्न कीं। अपने मन में उठ रही उन शंकाओं के प्रत्युत्तर में उन्होंने यह भजन लिखा। उनकी वेदना संभवतः इस भजन की इन पंकतियों सबसे अच्छी तरह दिखाई देती है:
जैसी मैं हूँ मन शंकामय, और बाहर भीतर हर समय,
है दुविधा, झगड़ा, जलन, भय, मसीह मैं आती हूँ।

   अपने क्रूस पर दिए गए बलिदान और दफनाए जाने के तीन दिन पश्चात, प्रभु यीशु मृतकों में से जी उठे और जा कर अपने चेलों से मिले। जब प्रभु यीशु पहली बार चेलों से मिलने आए, तब एक चेला थोमा, जिसे इतिहास ने "शंका करने वाला थोमा" का उपनाम दिया है शेष चेलों के साथ नहीं था। जब अन्य चेलों ने थोमा को प्रभु यीशु के जी उठने और मिलने आने के बारे में बताया तो उसने उनकी बात पर विश्वास नहीं किया और कहा कि जब तक वह प्रभु के हाथों में कीलों के, तथा पंजर में भाले के छेद मे अपनी ऊँगली नहीं डाल लेता, तब तक वह विश्वास नहीं करेगा। बाद में प्रभु यीशु फिर से चेलों से मिलने आए और उन्होंने थोमा को उन्हें क्रूस पर चढ़ाए जाने के चिन्हों द्वारा पुष्टि करने को कहा (यूहन्ना 20:27)। थोमा प्रभु के सामने नतमस्तक हो गया और उसने प्रभु के मृतकों में से पुनरुत्थान पर विश्वास किया। तब, "यीशु ने उस से कहा, तू ने तो मुझे देखकर विश्वास किया है, धन्य वे हैं जिन्हों ने बिना देखे विश्वास किया" (पद 29)।

   आज के हम मसीही विश्वासी वे हैं जिन्होंने प्रभु यीशु को, उन चेलों के समान सदेह, प्रत्यक्ष नहीं देखा है परन्तु फिर भी प्रभु पर विश्वास किया है। साथ ही, समय-समय पर आने वाली सांसारिक परिस्थितियों के कारण, हम भी कभी-कभी अपने मसीही विश्वास या फिर प्रभु यीशु पर ही सन्देह करने लग जाते हैं। इस कमज़ोर विश्वास की स्थिति में भी यदि हम प्रभु को पुकार कर कहें, "...हे प्रभु, मैं विश्वास करता हूं, मेरे अविश्वास का उपाय कर" (मरकुस 9:24) तो थोमा और शारलेट के समान ही प्रभु हमें भी अपनी शान्ति से परिपूर्ण करेगा, अपने निकट ले लेगा। प्रभु यीशु हमें, जैसे भी हम हैं, उसी अवस्था में अपने पास आने का निमंत्रण देता है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


पुनर्जीवित हो उठा मसीह यीशु आपको 
जीवन की भरपूरी प्राप्त करने के लिए आमंत्रित करता है।

उस से तुम बिन देखे प्रेम रखते हो, और अब तो उस पर बिन देखे भी विश्वास कर के ऐसे आनन्‍दित और मगन होते हो, जो वर्णन से बाहर और महिमा से भरा हुआ है। - 1 पतरस 1:8

बाइबल पाठ: यूहन्ना 20:19-31
John 20:19 उसी दिन जो सप्‍ताह का पहिला दिन था, सन्‍ध्या के समय जब वहां के द्वार जहां चेले थे, यहूदियों के डर के मारे बन्‍द थे, तब यीशु आया और बीच में खड़ा हो कर उन से कहा, तुम्हें शान्‍ति मिले। 
John 20:20 और यह कहकर उसने अपना हाथ और अपना पंजर उन को दिखाए: तब चेले प्रभु को देखकर आनन्‍दित हुए। 
John 20:21 यीशु ने फिर उन से कहा, तुम्हें शान्‍ति मिले; जैसे पिता ने मुझे भेजा है, वैसे ही मैं भी तुम्हें भेजता हूं। 
John 20:22 यह कहकर उसने उन पर फूंका और उन से कहा, पवित्र आत्मा लो। 
John 20:23 जिन के पाप तुम क्षमा करो वे उन के लिये क्षमा किए गए हैं जिन के तुम रखो, वे रखे गए हैं।
John 20:24 परन्तु बारहों में से एक व्यक्ति अर्थात थोमा जो दिदुमुस कहलाता है, जब यीशु आया तो उन के साथ न था। 
John 20:25 जब और चेले उस से कहने लगे कि हम ने प्रभु को देखा है: तब उसने उन से कहा, जब तक मैं उस के हाथों में कीलों के छेद न देख लूं, और कीलों के छेदों में अपनी उंगली न डाल लूं, और उसके पंजर में अपना हाथ न डाल लूं, तब तक मैं प्रतीति नहीं करूंगा।
John 20:26 आठ दिन के बाद उस के चेले फिर घर के भीतर थे, और थोमा उन के साथ था, और द्वार बन्‍द थे, तब यीशु ने आकर और बीच में खड़ा हो कर कहा, तुम्हें शान्‍ति मिले। 
John 20:27 तब उसने थोमा से कहा, अपनी उंगली यहां लाकर मेरे हाथों को देख और अपना हाथ लाकर मेरे पंजर में डाल और अविश्वासी नहीं परन्तु विश्वासी हो। 
John 20:28 यह सुन थोमा ने उत्तर दिया, हे मेरे प्रभु, हे मेरे परमेश्वर! 
John 20:29 यीशु ने उस से कहा, तू ने तो मुझे देखकर विश्वास किया है, धन्य वे हैं जिन्हों ने बिना देखे विश्वास किया।
John 20:30 यीशु ने और भी बहुत चिन्ह चेलों के साम्हने दिखाए, जो इस पुस्‍तक में लिखे नहीं गए। 
John 20:31 परन्तु ये इसलिये लिखे गए हैं, कि तुम विश्वास करो, कि यीशु ही परमेश्वर का पुत्र मसीह है: और विश्वास कर के उसके नाम से जीवन पाओ।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 30-31
  • लूका 13:23-35


मंगलवार, 31 जनवरी 2017

द्वार


   ट्रेन चलने को थी; ट्रेन के बन्द होते द्वारों की सूचक ध्वनि बजनी आरंभ हो गई थी। लेकिन फिर भी विलंब से आने वाले कुछ लोग भागकर ट्रेन में चढ़ने का प्रयास करने लगे; उनमें से एक के ऊपर द्वार बन्द भी हुआ, परन्तु उससे टकराकर द्वार फिर से खुल गया, और वह यात्री सुरक्षित ट्रेन के अन्दर आ गया। मैं सोचने लगा कि लोग इतना जोखिम क्यों उठाते हैं जब कि इस से अगली ट्रेन मात्र 4 मिनट में आने वाली थी।

   लेकिन एक द्वार है जो कभी भी, बिना किसी चेतावनी के, सदा के लिए बन्द हो जाएगा और किसी के लिए किसी भी परिस्थिति में फिर कभी नहीं खुलेगा - परमेश्वर के अनुग्रह का द्वार। समस्त मानव जाति को उनके पापों की क्षमा प्रदान करने तथा उन्हें सेंत-मेंत उद्धार का मार्ग देने के लिए परमेश्वर ने प्रभु यीशु मसीह को संसार में भेजा और उन्होंने यह कार्य पूरा करके आज सबके लिए यह मार्ग तैयार करके दे दिया है। अब इसे स्वीकार करना और इसपर अग्रसर होना यह प्रत्येक व्यक्ति का अपना निर्णय है; लेकिन परमेश्वर के इस अनुग्रह का द्वार आज सब के लिए खुला है, उसका निमंत्रण सबके लिए है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने लिखा है, "...देखो, अभी वह प्रसन्नता का समय है; देखो, अभी उद्धार का दिन है" (2 कुरिन्थियों 6:2)।

   प्रभु यीशु मसीह ने यह भी बताया कि उनके दूसरे आगमन और अनुग्रह के द्वार के बन्द होने से पहले क्या चिन्ह होंगे (मत्ती 24); और आज हम अपनी आँखों के सामने उन बातों को पूरा होते देख रहे हैं, जो इस द्वार के बन्द होने का समय पूरा होने के सूचक हैं। इसलिए यह निश्चित है कि अनुग्रह का यह समय कभी भी पूरा हो जाएगा, द्वार बन्द हो जाएगा, और संसार अपने न्याय के लिए खड़ा किया जाएगा। जिन्होंने प्रभु यीशु मसीह में विश्वास किया और उससे अपने पापों की क्षमा माँगकर अपना जीवन उसे समर्पित किया है, उन्हें प्रभु यीशु कहेगा, "तब राजा अपनी दाहिनी ओर वालों से कहेगा, हे मेरे पिता के धन्य लोगों, आओ, उस राज्य के अधिकारी हो जाओ, जो जगत के आदि से तुम्हारे लिये तैयार किया हुआ है" (मत्ती 25:34), परन्तु शेष सभी उसके पास से अनन्त विनाश में चले जाएंगे, "तब वह बाईं ओर वालों से कहेगा, हे श्रापित लोगो, मेरे साम्हने से उस अनन्त आग में चले जाओ, जो शैतान और उसके दूतों के लिये तैयार की गई है" (मत्ती 25:41)।

   प्रभु यीशु मसीह के निमंत्रण और कार्य के प्रति हमारा प्रत्युत्तर हमारे अनन्तकाल को निर्धारित करता है। प्रभु यीशु ने कहा: "द्वार मैं हूं: यदि कोई मेरे द्वारा भीतर प्रवेश करे तो उद्धार पाएगा और भीतर बाहर आया जाया करेगा और चारा पाएगा" (यूहन्ना 10:9); तथा, "यीशु ने उस से कहा, मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता" (यूहन्ना 14:6); और उसका यह निमंत्रण आज आपके लिए खुला है। इससे पहले कि द्वार सदा के लिए बन्द हो जाए, परमेश्वर के अनुग्रह का लाभ उठाएं और अपना अनन्तकाल सुनिश्चित कर लें। - पोह फैंग चिया


परमेश्वर के परिवार में सम्मिलित होने के लिए आज के दिन से अच्छा और कोई समय नहीं है।

परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं। - यूहन्ना 1:12-13

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 5:14-6:2
2 Corinthians 5:14 क्योंकि मसीह का प्रेम हमें विवश कर देता है; इसलिये कि हम यह समझते हैं, कि जब एक सब के लिये मरा तो सब मर गए। 
2 Corinthians 5:15 और वह इस निमित्त सब के लिये मरा, कि जो जीवित हैं, वे आगे को अपने लिये न जीएं परन्तु उसके लिये जो उन के लिये मरा और फिर जी उठा। 
2 Corinthians 5:16 सो अब से हम किसी को शरीर के अनुसार न समझेंगे, और यदि हम ने मसीह को भी शरीर के अनुसार जाना था, तौभी अब से उसको ऐसा नहीं जानेंगे। 
2 Corinthians 5:17 सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं। 
2 Corinthians 5:18 और सब बातें परमेश्वर की ओर से हैं, जिसने मसीह के द्वारा अपने साथ हमारा मेल-मिलाप कर लिया, और मेल-मिलाप की सेवा हमें सौंप दी है। 
2 Corinthians 5:19 अर्थात परमेश्वर ने मसीह में हो कर अपने साथ संसार का मेल मिलाप कर लिया, और उन के अपराधों का दोष उन पर नहीं लगाया और उसने मेल मिलाप का वचन हमें सौंप दिया है।
2 Corinthians 5:20 सो हम मसीह के राजदूत हैं; मानो परमेश्वर हमारे द्वारा समझाता है: हम मसीह की ओर से निवेदन करते हैं, कि परमेश्वर के साथ मेल मिलाप कर लो। 
2 Corinthians 5:21 जो पाप से अज्ञात था, उसी को उसने हमारे लिये पाप ठहराया, कि हम उस में हो कर परमेश्वर की धामिर्कता बन जाएं।
2 Corinthians 6:1 और हम जो उसके सहकर्मी हैं यह भी समझाते हैं, कि परमेश्वर का अनुग्रह जो तुम पर हुआ, व्यर्थ न रहने दो। 
2 Corinthians 6:2 क्योंकि वह तो कहता है, कि अपनी प्रसन्नता के समय मैं ने तेरी सुन ली, और उद्धार के दिन मैं ने तेरी सहायता की: देखो, अभी वह प्रसन्नता का समय है; देखो, अभी उद्धार का दिन है।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 25-26
  • मत्ती 20:17-34


शुक्रवार, 29 जुलाई 2016

मार्ग


   फ्रांस में नौरमैन्डी के समुद्र-तट से करीब आधा मील दूर स्थित मॉन्ट सेंट-माईकल टापू है जिस पर एक मठ बना है। सदियों से यह स्थान धार्मिक तीर्थयात्रियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। जब तक वहाँ पहुँचने का मार्ग नहीं बन गया, उस टापू तक जाना खतरनाक रहा, और वहाँ पहुँचने के प्रयासों में कुछ तीर्थयात्रियों की जान भी जा चुकी है। जब समुद्र में ज्वार होता है तो वह टापू पानी से घिरा रहता है, और जब भाटा होता है तो टापू के आस-पास उबड़-खाबड़ रेत फैली होती है। उस मार्ग के बन जाने से पहले, उस टापू तक पहुँचना भय से भरा होता था।

   पुराने नियम के समय के यहूदियों के लिए परमेश्वर तक पहुँचना भी भय से भरा होता था। जब परमेश्वर ने अपनी आज्ञाएं दीं तो उसकी आवाज़ के भीषण गर्जन के कारण वे यहूदी लोग उसके समीप आने से डरने लगे (निर्गमन 19:10-16)। जब महायाजक के माध्यम से परमेश्वर तक पहुँचने का मार्ग मिला तो भी कुछ अनुष्ठान और विधियाँ पूरी करे बिना यह संभव नहीं था (लैव्यवस्था 16:1-34)। परमेश्वर की पवित्र उपस्थिति के प्रतीक वाचा के सन्दूक को गलती से भी छू लेना, मृत्यु का कारण बन सकता था (2 शमूएल 6:7-8)।

   किंतु प्रभु यीशु के बलिदान और मृतकों में से पुनरुत्थान के द्वारा आज हमारे लिए परमेश्वर तक निर्भीक होकर पहुँचने का मार्ग तैयार और उपलब्ध है। प्रभु यीशु के बलिदान ने समस्त मानव जाति के पापों के दण्ड की कीमत चुका दी है; प्रभु में लाए गए विश्वास के द्वारा किसी भी मसीही विश्वासी को अपने पापों के दण्ड को भोगने की कोई आवश्यकता नहीं रह गई है; अब प्रभु यीशु के सभी विश्वासियों को परमेश्वर की उपस्थिति में निमंत्रण है: "इसलिये आओ, हम अनुग्रह के सिंहासन के निकट हियाव बान्‍धकर चलें, कि हम पर दया हो, और वह अनुग्रह पाएं, जो आवश्यकता के समय हमारी सहायता करे" (इब्रानियों 4:16)।

   प्रभु यीशु मसीह में सभी मनुष्यों के लिए कभी भी, कहीं भी प्रार्थना में परमेश्वर की उपस्थिति में आने का मार्ग तैयार और उपलब्ध हो गया है। - डेनिस फिशर


प्रभु यीशु के नाम से करी गई प्रार्थना के द्वारा प्रमेश्वर पिता तक हमारी तात्कालिक पहुँच होती है।

और उसने आकर तुम्हें जो दूर थे, और उन्हें जो निकट थे, दानों को मेल-मिलाप का सुसमाचार सुनाया। क्योंकि उस ही के द्वारा हम दोनों की एक आत्मा में पिता के पास पंहुच होती है। - इफिसियों 2:17-18

बाइबल पाठ: इब्रानियों 4:14-16; 10:19-22
Hebrews 4:14 सो जब हमारा ऐसा बड़ा महायाजक है, जो स्‍वर्गों से हो कर गया है, अर्थात परमेश्वर का पुत्र यीशु; तो आओ, हम अपने अंगीकार को दृढ़ता से थामें रहे। 
Hebrews 4:15 क्योंकि हमारा ऐसा महायाजक नहीं, जो हमारी निर्बलताओं में हमारे साथ दुखी न हो सके; वरन वह सब बातों में हमारी नाईं परखा तो गया, तौभी निष्‍पाप निकला। 
Hebrews 4:16 इसलिये आओ, हम अनुग्रह के सिंहासन के निकट हियाव बान्‍धकर चलें, कि हम पर दया हो, और वह अनुग्रह पाएं, जो आवश्यकता के समय हमारी सहायता करे।
Hebrews 10:19 सो हे भाइयो, जब कि हमें यीशु के लोहू के द्वारा उस नए और जीवते मार्ग से पवित्र स्थान में प्रवेश करने का हियाव हो गया है। 
Hebrews 10:20 जो उसने परदे अर्थात अपने शरीर में से हो कर, हमारे लिये अभिषेक किया है, 
Hebrews 10:21 और इसलिये कि हमारा ऐसा महान याजक है, जो परमेश्वर के घर का अधिकारी है। 
Hebrews 10:22 तो आओ; हम सच्चे मन, और पूरे विश्वास के साथ, और विवेक को दोष दूर करने के लिये हृदय पर छिड़काव ले कर, और देह को शुद्ध जल से धुलवा कर परमेश्वर के समीप जाएं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 49-50
  • रोमियों 1


शनिवार, 31 अक्टूबर 2015

प्रेम-दृष्टि


   मार्क सालेम के कार्यक्रमों में आने वाले अनेक लोग यह मानते हैं कि वह उनके मन को पढ़ लेता है; लेकिन मार्क ऐसा कोई दावा नहीं करता। मार्क का कहना है कि वह ना तो कोई जादूगर है और ना ही उसमें लोगों के अन्दर देख पाने की क्षमता है, वह तो केवल उसके पास आने वाले लोगों की हर बात को बारीकी से देखता है और उसका आंकलन करता है। मार्क ने लेखिका जेनिफर मुलसन से एक साक्षात्कार में कहा, "हम एक ऐसे संसार में रहते हैं जो हमारे लिए प्रायः अदृश्य है क्योंकि हम बातों पर ध्यान नहीं देते हैं...मैं लोगों द्वारा प्रगट करी जा रही बातों के प्रति अति संवेदनशील रहता हूँ।"

   यह जानना रुचिकर है कि प्रभु यीशु लोगों में क्या देखते थे। अनन्त जीवन के खोजी एक धनी जवान व्यक्ति से हुई प्रभु यीशु की बातचीत इसका एक अच्छा उदाहरण प्रस्तुत करती है। यह बातचीत परमेश्वर के वचन बाइबल में मत्ती, मरकुस और लूका नामक तीन पुस्तकों में दर्ज है। मरकुस ने अपने विवरण में एक रोचक बात लिखी है, "यीशु ने उस पर दृष्टि कर के उस से प्रेम किया..." (मरकुस 10:21)। क्योंकि यह जवान व्यक्ति धनवान था, संभवतः कुछ लोग उससे ईर्ष्या करते होंगे; या उसके आज्ञाओं को लड़कपन से मानते आने (मरकुस10:19-20) के दावे को लेकर उसे घमण्डी समझते होंगे, लेकिन प्रभु यीशु मे उसे प्रेम-दृष्टि से देखा।

   इस घटना को पढ़ते समय हम अकसर उस अमीर जवान व्यक्ति के अपने धनसंपत्ति को त्यागकर प्रभु यीशु के पीछे हो लेने से इंकार करने और वापस लौट जाने (पद 22) पर ध्यान करते हैं; प्रभु यीशु के चेलों ने भी ऐसा ही किया और किसी धनी व्यक्ति के परमेश्वर के राज्य में प्रवेश कर पाने की कठिनाई से चकित हुए (पद 26), लेकिन प्रभु यीशु ने फिर से अपने प्रेम का उदाहरण देते हुए चेलों से कहा, "...मनुष्यों से तो यह नहीं हो सकता, परन्तु परमेश्वर से हो सकता है; क्योंकि परमेश्वर से सब कुछ हो सकता है" (पद 27)।

   आज भी प्रभु यीशु संसार के हर जन को प्रेम-दृष्टि से देखता है, हर जन को अपने पास आमंत्रित करता है, सभी को उसके पास लौट आने की प्रतीक्षा करता है। प्रभु यीशु के इस निमंत्रण के प्रति आपका प्रत्युत्तर क्या है? - डेविड मैक्कसलैंड


परमेश्वर के पास सब कुछ देखने और जानने वाली दृष्टि और सबको क्षमा कर देने वाला मन है।

यह हमारे उद्धारकर्ता परमेश्वर को अच्छा लगता, और भाता भी है। वह यह चाहता है, कि सब मनुष्यों का उद्धार हो; और वे सत्य को भली भांति पहिचान लें। - 1 तिमुथियुस 2:3-4

बाइबल पाठ: मरकुस 10:17-27
Mark 10:17 और जब वह निकलकर मार्ग में जाता था, तो एक मनुष्य उसके पास दौड़ता हुआ आया, और उसके आगे घुटने टेककर उस से पूछा हे उत्तम गुरू, अनन्त जीवन का अधिकारी होने के लिये मैं क्या करूं? 
Mark 10:18 यीशु ने उस से कहा, तू मुझे उत्तम क्यों कहता है? कोई उत्तम नहीं, केवल एक अर्थात परमेश्वर। 
Mark 10:19 तू आज्ञाओं को तो जानता है; हत्या न करना, व्यभिचार न करना, चोरी न करना, झूठी गवाही न देना, छल न करना, अपने पिता और अपनी माता का आदर करना। 
Mark 10:20 उसने उस से कहा, हे गुरू, इन सब को मैं लड़कपन से मानता आया हूं। 
Mark 10:21 यीशु ने उस पर दृष्टि कर के उस से प्रेम किया, और उस से कहा, तुझ में एक बात की घटी है; जा, जो कुछ तेरा है, उसे बेच कर कंगालों को दे, और तुझे स्वर्ग में धन मिलेगा, और आकर मेरे पीछे हो ले। 
Mark 10:22 इस बात से उसके चेहरे पर उदासी छा गई, और वह शोक करता हुआ चला गया, क्योंकि वह बहुत धनी था। 
Mark 10:23 यीशु ने चारों ओर देखकर अपने चेलों से कहा, धनवानों को परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना कैसा कठिन है! 
Mark 10:24 चेले उस की बातों से अचंभित हुए, इस पर यीशु ने फिर उन को उत्तर दिया, हे बालको, जो धन पर भरोसा रखते हैं, उन के लिये परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना कैसा कठिन है! 
Mark 10:25 परमेश्वर के राज्य में धनवान के प्रवेश करने से ऊंट का सूई के नाके में से निकल जाना सहज है! 
Mark 10:26 वे बहुत ही चकित हो कर आपस में कहने लगे तो फिर किस का उद्धार हो सकता है? 
Mark 10:27 यीशु ने उन की ओर देखकर कहा, मनुष्यों से तो यह नहीं हो सकता, परन्तु परमेश्वर से हो सकता है; क्योंकि परमेश्वर से सब कुछ हो सकता है।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 22-23
  • तीतुस 1


सोमवार, 6 जुलाई 2015

प्यास


   पिछले कुछ वर्षों में मैं एक-दो बार शरीर में पानी की कमी होने के कारण अस्वस्थ हुआ हूँ। जब भी मेरे शरीर में पानी की कमी हुई, मुझे चक्कर आने लगे, मैं ठीक से दिखने नहीं पा रहा था, मुझे समय स्थान और व्यक्ति को पहचान पाने में बहुत कठिनाई होने लगी, मैं स्पष्ट बोल भी नहीं पा रहा था। अपने उन कष्टदायक अनुभवों से मैंने सीख लिया कि पानी की उचित मात्रा शरीर में रहना कितना आवश्यक है; और मैं दोबारा उस अनुभव से कतई नहीं निकलना चाहता हूँ।

   शरीर में पानी की कमी के इन अनुभवों ने मुझे प्रभु यीशु के एक निमंत्रण के बारे में नया मूल्यांकन दिया है; प्रभु यीशु ने मन्दिर में खड़े होकर सार्वजनिक निमंत्रण दिया: "फिर पर्व के अंतिम दिन, जो मुख्य दिन है, यीशु खड़ा हुआ और पुकार कर कहा, यदि कोई प्यासा हो तो मेरे पास आकर पीए" (यूहन्ना 7:37)। प्रभु द्वारा की गई यह घोषणा, जिस दिन वह करी गई उसके संदर्भ में, नाटकीय थी। यूहन्ना बताता है कि वह यहूदियों के एक बड़े पर्व का अन्तिम एवं मुख्य दिन था। जिस पर्व का यहाँ उल्लेख आया है वह यहूदियों के मिस्त्र की गुलामी से निकलकर वाचा किए हुए कनान देश तक पहुँचने की चालीस वर्षीय जंगल यात्रा को समरण करने का पर्व था। उस पर्व के अन्तिम एवं मुख्य दिन मन्दिर की सीढ़ियों पर जल प्रवाहित किया जाता था जो परमेश्वर द्वारा बियाबान और जंगल की यात्रा में भी उन इस्त्राएलियों को पानी उपलब्ध करवाते रहने को स्मरण करवाता था। उस जल प्रवाह करने के समय, प्रभु यीशु ने अपने आप को सभी के लिए अति आवश्यक जीवन का जल होना घोषित किया और निमंत्रण दिया कि जो प्यासा हो वह स्वेच्छा से आए और उससे जीवन जल भरपूरी से ले।

   हमारे आत्मिक स्वास्थ्य और भलाई के लिए हमारा प्रभु यीशु पर ऐसे निर्भर रहना जैसे हम दैनिक जीवन में जल पर निर्भर रहते हैं अति आवश्यक है; अन्यथा आत्मिक जल की कमी के वैसे ही आत्मिक लक्षण हम में दिखने लगेंगे जैसे मैंने शारीरिक जल की कमी के कारण अनुभव किए थे। अपने अन्दर इस आत्मिक जल की मात्रा को बनाए रखने और आत्मिक प्यास को बुझाए रखने के लिए हमें प्रभु के साथ प्रार्थना में बातचीत करते रहना चाहिए, उसके वचन के अध्ययन के द्वारा उसके साथ संपर्क तथा संगति को बनाए रखना चाहिए और अपने प्रत्येक निर्णय में उसकी बुद्धिमता और मार्गदर्शन को प्राप्त करना चाहिए।

   प्रभु यीशु से घनिष्ठता से जुड़े रहें, आपके आत्मा की प्यास को केवल वह ही बुझा सकता है। - जो स्टोवैल


जीवन जल की तरोताज़गी प्राप्त करने के लिए प्रभु यीशु के पास आएं, उसके साथ बने और चलते रहें।

क्योंकि मैं प्यासी भूमि पर जल और सूखी भूमि पर धाराएं बहाऊंगा; मैं तेरे वंश पर अपनी आत्मा और तेरी सन्तान पर अपनी आशीष उण्डेलूंगा। - यशायाह 44:3

बाइबल पाठ: यूहन्ना 7:37-39
John 7:37 फिर पर्व के अंतिम दिन, जो मुख्य दिन है, यीशु खड़ा हुआ और पुकार कर कहा, यदि कोई प्यासा हो तो मेरे पास आकर पीए। 
John 7:38 जो मुझ पर विश्वास करेगा, जैसा पवित्र शास्त्र में आया है उसके हृदय में से जीवन के जल की नदियां बह निकलेंगी। 
John 7:39 उसने यह वचन उस आत्मा के विषय में कहा, जिसे उस पर विश्वास करने वाले पाने पर थे; क्योंकि आत्मा अब तक न उतरा था; क्योंकि यीशु अब तक अपनी महिमा को न पहुंचा था।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 32-33
  • प्रेरितों 14


गुरुवार, 12 फ़रवरी 2015

निमंत्रण


   कुछ महीने पहले की बात है, मुझे किसी कार्य के लिए वायु-यान द्वारा आना और जाना पड़ा। लौटते समय मुझे अचरज भी हुआ और अच्छा भी लगा कि मुझे जो सीट मिली थी उसके आगे पैर फैलाने के लिए काफी स्थान था, साथ ही मेरे पास वाली सीट खाली थी, इसलिए मैं हाथ भी फैला कर भी बैठ सकता था; कुल मिलाकर सब अच्छा और आरामदायक था, क्योंकि मुझे सीमित से स्थान में फंस कर बैठे रहने की आवश्यकता नहीं थी। अपने आराम के बारे में सोचने के साथ ही मुझे उन अन्य यात्रियों को हो रही असुविधा का भी ध्यान आया जिनके पास मेरे समान सुविधाजनक सीट नहीं थी। मैंने अपनी दृष्टि घुमाकर देखा और मुझे कुछ अपनी जान-पहचान के लोग दिखाई दिए; मैंने उन्हें निमंत्रण दिया कि वे आकर मेरे पास वाली सीट पर बैठ जाएं, लेकिन आश्चर्य हुआ जब किसी ने मेरा निमंत्रण स्वीकार नहीं किया और किसी ना किसी कारण से वे अपनी ही असुविधापूर्ण सीट पर बैठे रहने में संतुष्ट थे।

   हम मसीही विश्वासियों को एक और भी अति आवश्यक निमंत्रण संसार के लोगों को देना है - प्रभु यीशु में विश्वास लाने के द्वारा हमें प्राप्त हुई पापों की क्षमा, उद्धार और अनन्त जीवन में संभागी होने का निमंत्रण, जिसे कुछ तो स्वीकार कर लेंगे, और कुछ नहीं करेंगे। परमेश्वर के वचन बाइबल में यूहन्ना 1:40 में हम लिखा पाते हैं कि जब अन्द्रियास ने प्रभु यीशु के पीछे चलने का निर्णय लिया, तो उसने तुरंत ही अपने भाई शमौन को भी निमंत्रण दिया कि वह भी जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु के पीछे हो ले (पद 41)। प्रभु यीशु ने अपने अनुयायियों के समक्ष जीवन का नया और अद्भुत प्रस्ताव रखा था, कि वे उसे जानें और उसके साथ एक नए तथा आशीषमय जीवन का आनन्द लें।

   प्रभु यीशु में जो आशीषें तथा प्रतिज्ञाएं तब अन्द्रियास एवं शमौन को उपलब्ध थीं, वे आज भी सभी मसीही विश्वासियों के लिए वैसे ही उपलब्ध हैं:
  • उसकी क्षमा, अनुग्रह एवं धर्मी ठहराया जाना (रोमियों 3:24)
  • उसकी सहायता और सुरक्षा (इब्रानियों 13:5)
  • उसकी आशा (रोमियों 15:13)
  • उसकी शांति (यूहन्ना 14:27)
  • उसके साथ अनन्तकाल का जीवन (1 थिस्सलुनीकियों 4:17)

   प्रभु यीशु का यह निमंत्रण किसी धर्म या जाति विशेष के लिए नहीं वरन संसार के सभी लोगों के लिए है। क्या आप उसके निमंत्रण को स्वीकार करके अपने जीवन को सुनिश्चित करेंगे? - ऐनी सेटास


संसार को दिखाएं कि मसीह यीशु ने आपके लिए क्या किया है, और संसार जान लेगा कि प्रभु यीशु संसार के लिए क्या कर सकता है।

यीशु ने उन के पास आकर कहा, कि स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार मुझे दिया गया है। इसलिये तुम जा कर सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ और उन्हें पिता और पुत्र और पवित्रआत्मा के नाम से बपतिस्मा दो। और उन्हें सब बातें जो मैं ने तुम्हें आज्ञा दी है, मानना सिखाओ: और देखो, मैं जगत के अन्‍त तक सदैव तुम्हारे संग हूं। - मत्ती 28:18-20

बाइबल पाठ: यूहन्ना 1:35-42
John 1:35 दूसरे दिन फिर यूहन्ना और उसके चेलों में से दो जन खड़े हुए थे। 
John 1:36 और उसने यीशु पर जो जा रहा था दृष्टि कर के कहा, देखो, यह परमेश्वर का मेम्ना है। 
John 1:37 तब वे दोनों चेले उस की यह सुनकर यीशु के पीछे हो लिए। 
John 1:38 यीशु ने फिरकर और उन को पीछे आते देखकर उन से कहा, तुम किस की खोज में हो? उन्होंने उस से कहा, हे रब्बी, अर्थात (हे गुरू) तू कहां रहता है? उसने उन से कहा, चलो, तो देख लोगे। 
John 1:39 तब उन्होंने आकर उसके रहने का स्थान देखा, और उस दिन उसी के साथ रहे; और यह दसवें घंटे के लगभग था। 
John 1:40 उन दोनों में से जो यूहन्ना की बात सुनकर यीशु के पीछे हो लिये थे, एक तो शमौन पतरस का भाई अन्द्रियास था। 
John 1:41 उसने पहिले अपने सगे भाई शमौन से मिलकर उस से कहा, कि हम को ख्रिस्तुस अर्थात मसीह मिल गया। 
John 1:42 वह उसे यीशु के पास लाया: यीशु ने उस पर दृष्टि कर के कहा, कि तू यूहन्ना का पुत्र शमौन है, तू केफा, अर्थात पतरस कहलाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 13
  • मत्ती 26:26-50



रविवार, 9 नवंबर 2014

निमंत्रण


   चर्च में युवकों के दल की पार्टी थी और उस दल की एक सदस्या, लिंडा ने अपनी एक सहेली केटी को भी उसमें सम्मिलित होने का निमंत्रण दिया था। केटी बचपन के बाद से कभी चर्च नहीं गई थी और इस पार्टी में सम्मिलित होते हुए उसके अन्दर एक घबराहट थी, उसे समझ नहीं आ रहा था कि लगभग सभी लोग जहाँ उसके लिए अपरिचित होंगे, वहाँ उसे कैसा लगेगा, उसके साथ कैसा व्यवहार होगा, वह औरों के साथ कैसे संपर्क बना पाएगी। लेकिन वहाँ पहुँचने पर उसका मन शान्त हो गया; उसके नाम की प्लेट पर उपस्थित लोगों की ओर से सप्रेम स्वागत के कार्ड पहले से ही रखे हुए थे, जैसे कि सब ने अन्य सभी के लिए लिख कर रखे थे। लेकिन केटी के लिए यह हृदय छू लेने वाली बात थी कि उस दल के सदस्यों ने सारी पार्टी में उस अपरिचित के लिए भी वही आदर और प्रेम दिखाया जो उन्होंने अपनी जान-पहचान वालों के लिए दिखाया था।

   केटी को वहाँ बहुत अच्छा लगा, और उनका यह प्रेम देखकर उसने लिंडा द्वारा दिया गया चर्च आने का निमंत्रण भी स्वीकार कर लिया। चर्च में उसने उसके पापों में होने के बावजूद, उसके प्रति परमेश्वर के प्रेम के बारे में सुना और उसने प्रभु यीशु में होकर मिलने वाली पापों की क्षमा एवं उद्धार को ग्रहण कर लिया। उस युवा दल के सप्रेम व्यवहार ने उसे परमेश्वर के प्रेम की एक झलक दिखाई थी जिससे परमेश्वर उसके हृदय को परमेश्वर पर विश्वास करने उसे समर्पित जीवन जीने के लिए प्रेरित कर सका।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित यूहन्ना ने लिखा, "हे प्रियो, जब परमेश्वर ने हम से ऐसा प्रेम किया, तो हम को भी आपस में प्रेम रखना चाहिए" (1 यूहन्ना 4:11)। यह प्रेम केवल हमारे अपने परिवार या अन्य मसीही विश्वासियों तक ही सीमित नहीं रहना है, वरन उनके लिए भी प्रदर्शित होना है जो अभी तक मसीह के प्रेम को नहीं जानते हैं। रे स्टैडमैन ने लिखा, "जब परमेश्वर का प्रेम हमारे हृदयों को रौशन करता है, हमारे मन औरों के लिए और खुले हो जाते हैं, और उस प्रेम की सुगन्ध हमारे मनों से निकलकर औरों तक पहुँचती है जिससे वे भी उस सुगन्ध के स्त्रोत के प्रति आकर्षित होते हैं।" यही लिंडा के निमंत्रण और उस युवा दल के व्यवहार ने केटी के लिए किया।

   आज भी परमेश्वर आप में होकर अपने प्रेम की सुगन्ध दूसरों तक पहुँचा सकता है जो उन लोगों के लिए परमेश्वर के प्रेम तक पहुँचने का निमंत्रण तथा अनन्त जीवन का मार्ग बन सकता है। - ऐनी सेटास


परमेश्वर के प्रेम और भय में व्यतीत होने वाला जीवन दुसरों को मसीह यीशु की ओर आकर्षित करने वाला जीवन होता है।

क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए। - यूहन्ना 3:16  

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 4:7-11
1 John 4:7 हे प्रियों, हम आपस में प्रेम रखें; क्योंकि प्रेम परमेश्वर से है: और जो कोई प्रेम करता है, वह परमेश्वर से जन्मा है; और परमेश्वर को जानता है। 
1 John 4:8 जो प्रेम नहीं रखता, वह परमेश्वर को नहीं जानता है, क्योंकि परमेश्वर प्रेम है। 
1 John 4:9 जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, वह इस से प्रगट हुआ, कि परमेश्वर ने अपने एकलौते पुत्र को जगत में भेजा है, कि हम उसके द्वारा जीवन पाएं। 
1 John 4:10 प्रेम इस में नहीं कि हम ने परमेश्वर ने प्रेम किया; पर इस में है, कि उसने हम से प्रेम किया; और हमारे पापों के प्रायश्‍चित्त के लिये अपने पुत्र को भेजा। 
1 John 4:11 हे प्रियो, जब परमेश्वर ने हम से ऐसा प्रेम किया, तो हम को भी आपस में प्रेम रखना चाहिए।

एक साल में बाइबल: 
  • प्रेरितों 3-5