बाइबल और मसीही विश्वास सम्बन्धी अपने प्रश्नों के लिए यहाँ क्लिक करें:

GotQuestions?org

Monday, October 19, 2015

आश्वासन


   राजा शाऊल 9 वर्ष तक दाऊद के पीछे ऐसे पड़ा रहा "...जैसा कि कोई पहाड़ों पर तीतर का अहेर करे" (1 शमूएल 26:20) और दाऊद ने अपनी परेशानी में परमेश्वर को पुकारा, "हे परमेश्वर तू कब तक? क्या सदैव मुझे भूला रहेगा? तू कब तक अपना मुखड़ा मुझ से छिपाए रहेगा? मैं कब तक अपने मन ही मन में युक्तियां करता रहूं, और दिन भर अपने हृदय में दुखित रहा करूं, कब तक मेरा शत्रु मुझ पर प्रबल रहेगा?" (भजन 13:1-2)

   लंबे समय तक चलती रहने वाली परेशानी हमें घबरा सकती है; हमें उसका समाधान चाहिए होता है, तुरंत समाधान। लेकिन कुछ बातें ऐसी होती हैं जिनका समाधान नहीं वरन उन्हें सहना होता है। हम अपने कष्टों में परमेश्वर की दोहाई दे सकते हैं, उसे पुकार सकते हैं। हमारा परमेश्वर पिता चाहता है कि हम अपने संघर्षों में उसे सम्मिलित करें, अपनी परिस्थितियों को उसके साथ बाँटें। जैसा वह हमें समझता और जानता है, वैसा और कोई नहीं।

   जब हम अपनी शिकायतें लेकर उसकी ओर फिरते हैं तब हम अपने बारे में सचेत होते हैं। दाऊद ने अपनी विकट परिस्थिति में जीवन की निश्चयता को पहिचाना - उसके प्रति परमेश्वर का अडिग और सदा बने रहने वाला प्रेम! दाऊद ने अपने आप को स्मरण कराया, "परन्तु मैं ने तो तेरी करूणा पर भरोसा रखा है; मेरा हृदय तेरे उद्धार से मगन होगा। मैं परमेश्वर के नाम का भजन गाऊंगा, क्योंकि उसने मेरी भलाई की है" (भजन 13:5-6)। चाहे परेशानियाँ बनी रहीं लेकिन दाऊद उन सभी परिस्थित्यों में भजन गा सका, क्योंकि उसे स्मरण रहा कि वह परमेश्वर की प्रीय संतान है; बस यही हम मसीही विश्वासियों को भी स्मरण रखना है।

    ऐ. डबल्यू थोरोल्ड ने लिखा, "आत्मिक जीवन की सबसे ऊँची चोटी खिली हुई धूप में हर्षित आनन्द नहीं है, वरन परमेश्वर के प्रेम में पूर्ण और निःसन्देह भरोसा है।" हमें परमेश्वर की ओर से दृढ़ और अपरिवर्तनीय आश्वासन है कि हमारी सभी परेशानियों और समस्त कष्टों के समयों में भी परमेश्वर का प्रेम हमारे साथ होगा; इसके लिए उसपर संपूर्ण विश्वास किया जा सकता है।


जब सब कुछ असफल भी हो जाए तब भी परमेश्वर का प्रेम स्थिर बना रहता है।

परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा। - रोमियों 5:8

बाइबल पाठ: भजन 13
Psalms 13:1 हे परमेश्वर तू कब तक? क्या सदैव मुझे भूला रहेगा? तू कब तक अपना मुखड़ा मुझ से छिपाए रहेगा? 
Psalms 13:2 मैं कब तक अपने मन ही मन में युक्तियां करता रहूं, और दिन भर अपने हृदय में दुखित रहा करूं, कब तक मेरा शत्रु मुझ पर प्रबल रहेगा? 
Psalms 13:3 हे मेरे परमेश्वर यहोवा मेरी ओर ध्यान दे और मुझे उत्तर दे, मेरी आंखों में ज्योति आने दे, नहीं तो मुझे मृत्यु की नींद आ जाएगी; 
Psalms 13:4 ऐसा न हो कि मेरा शत्रु कहे, कि मैं उस पर प्रबल हो गया; और ऐसा न हो कि जब मैं डगमगाने लगूं तो मेरे शत्रु मगन हों।
Psalms 13:5 परन्तु मैं ने तो तेरी करूणा पर भरोसा रखा है; मेरा हृदय तेरे उद्धार से मगन होगा। 
Psalms 13:6 मैं परमेश्वर के नाम का भजन गाऊंगा, क्योंकि उसने मेरी भलाई की है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 56-58
  • 2 थिस्सलुनीकियों 2