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गुरुवार, 6 अप्रैल 2017

अडिग विश्वास


   मेरी पत्नी तथा मेरे परिवारों में हमारी दादी-नानी रहीं है जो 100 वर्ष की आयु से भी अधिक तक जीवित रहीं। मैंने संसार के लगभग सभी स्थानों में वृद्ध लोगों में एक प्रवृति देखी है; वे बीते समय की कठिन एवं कष्टदायक परिस्थितियों का स्मरण बहुत गहरी भावना के साथ करते हैं। वृद्ध लोग दूसरे विश्व-युद्ध की तथा सारे विश्व को प्रभावित करने वाली आर्थिक महामन्दी के समय की कहानियों और घटनाओं का आदान-प्रदान करते हैं; वे बर्फीले तूफानों, बचपन में खेलने के स्थानों, कॉलेज में कठिन आर्थिक परिस्थितियों में बिताए गए दिन जब लगातार तीन सप्ताह तक डिब्बा बन्द सूप और बासी डबल रोटी के साथ जीना पड़ता था आदि कठिनाईयों के विषय में बड़ी लगन के साथ बातचीत करते हैं।

   यह एक प्रकार का विरोधाभास ही है कि ये कठिन एवं कष्टदायक परिस्थितियाँ अकसर परस्पर संबंधों को और प्रगाढ़ तथा परमेश्वर पर विश्वास के बंधनों को और दृढ़ बना देती हैं। क्योंकि मैंने इस सिद्धांत को अपने निकट संबंधियों के जीवनों में सजीव अनुभव किया है इसलिए मैं परमेश्वर से संबंधित एक रहस्य को और बेहतर समझने पाया हूँ - परमेश्वर पर विश्वास का तात्पर्य अन्ततः उस पर हर बात के लिए रखा गया भरोसा है। यदि मैं परमेश्वर के वचन बाइबल के अनुसार परमेश्वर पर विश्वास के चट्टान रूपी भरोसे पर खड़ा हूँ (भजन 18:2) तो सबसे बदतर परिस्थिति भी उस भरोसे के संबंध को तोड़ नहीं सकती है।

   ठोस-चट्टान जैसा अडिग विश्वास मुझे भरोसा दिलाता है कि वर्तमान की अव्यवस्था के बावजूद, परमेश्वर शासन कर रहा है, हर बात को जानता है और हर परिस्थिति को नियंत्रित करता है। चाहे मैं अपनी नज़रों में कितना भी महत्वहीन क्यों ना होऊँ, मुझसे प्रेम करने वाले मेरे प्रभु परमेश्वर के लिए मैं बहुत महत्वपूर्ण हूँ। कोई भी पीड़ा सदा बनी नहीं रहती है, और हर बुराई अन्ततः पराजित होती है।

   ठोस-चट्टान जैसा अडिग विश्वास मुझे दिखाता है कि मानव इतिहास का सबसे काला कृत्य, परमेश्वर के पुत्र प्रभु यीशु मसीह का क्रूस पर मारा जाना, सारे मानव इतिहास के सबसे ज्योतिर्मय पल अर्थात उसके पुनरुत्थान और मृत्यु पर उसकी विजय के लिए आवश्यक पूर्व घटना थी। इस बलिदान, मृत्यु, पुनरुत्थान और विजय ने ही समस्त मानव जाति के लिए साधारण विश्वास के द्वारा सेंत-मेंत पाप क्षमा, उद्धार और परमेश्वर से मेल-मिलाप का मार्ग तैयार कर के दिया है। - फिलिप यैन्सी


चट्टान मसीह यीशु हमारी दृढ़ आशा का आधार है।

कौन हम को मसीह के प्रेम से अलग करेगा? क्या क्लेश, या संकट, या उपद्रव, या अकाल, या नंगाई, या जोखिम, या तलवार? जैसा लिखा है, कि तेरे लिये हम दिन भर घात किए जाते हैं; हम वध होने वाली भेंडों की नाईं गिने गए हैं। परन्तु इन सब बातों में हम उसके द्वारा जिसने हम से प्रेम किया है, जयवन्त से भी बढ़कर हैं। - रोमियों 8:35-37

बाइबल पाठ: भजन 18:1-3; 16-28
Psalms 18:1 हे परमेश्वर, हे मेरे बल, मैं तुझ से प्रेम करता हूं। 
Psalms 18:2 यहोवा मेरी चट्टान, और मेरा गढ़ और मेरा छुड़ाने वाला है; मेरा ईश्वर, मेरी चट्टान है, जिसका मैं शरणागत हूं, वह मेरी ढ़ाल और मेरी मुक्ति का सींग, और मेरा ऊँचा गढ़ है। 
Psalms 18:3 मैं यहोवा को जो स्तुति के योग्य है पुकारूंगा; इस प्रकार मैं अपने शत्रुओं से बचाया जाऊंगा।
Psalms 18:16 उसने ऊपर से हाथ बढ़ाकर मुझे थाम लिया, और गहिरे जल में से खींच लिया। 
Psalms 18:17 उसने मेरे बलवन्त शत्रु से, और उन से जो मुझ से घृणा करते थे मुझे छुड़ाया; क्योंकि वे अधिक सामर्थी थे। 
Psalms 18:18 मेरी विपत्ति के दिन वे मुझ पर आ पड़े। परन्तु यहोवा मेरा आश्रय था। 
Psalms 18:19 और उसने मुझे निकाल कर चौड़े स्थान में पहुंचाया, उसने मुझ को छुड़ाया, क्योंकि वह मुझ से प्रसन्न था। 
Psalms 18:20 यहोवा ने मुझ से मेरे धर्म के अनुसार व्यवहार किया; और मेरे हाथों की शुद्धता के अनुसार उसने मुझे बदला दिया। 
Psalms 18:21 क्योंकि मैं यहोवा के मार्गों पर चलता रहा, और दुष्टता के कारण अपने परमेश्वर से दूर न हुआ। 
Psalms 18:22 क्योंकि उसके सारे निर्णय मेरे सम्मुख बने रहे और मैं ने उसकी विधियों को न त्यागा। 
Psalms 18:23 और मैं उसके सम्मुख सिद्ध बना रहा, और अधर्म से अपने को बचाए रहा। 
Psalms 18:24 यहोवा ने मुझे मेरे धर्म के अनुसार बदला दिया, और मेरे हाथों की उस शुद्धता के अनुसार जिसे वह देखता था।
Psalms 18:25 दयावन्त के साथ तू अपने को दयावन्त दिखाता; और खरे पुरूष के साथ तू अपने को खरा दिखाता है। 
Psalms 18:26 शुद्ध के साथ तू अपने को शुद्ध दिखाता, और टेढ़े के साथ तू तिर्छा बनता है। 
Psalms 18:27 क्योंकि तू दीन लोगों को तो बचाता है; परन्तु घमण्ड भरी आंखों को नीची करता है। 
Psalms 18:28 हां, तू ही मेरे दीपक को जलाता है; मेरा परमेश्वर यहोवा मेरे अन्धियारे को उजियाला कर देता है। 

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 4-6
  • लूका 9:1-17


शुक्रवार, 24 मार्च 2017

भरोसा


   जब हमारे बच्चे छोटे थे तो उन्हें डॉक्टर के पास बिमारी से बचने के टीके लगवाने ले जाना एक रोचक अनुभव होता था। डॉक्टर का प्रतीक्षालय खिलौनों और बच्चों की पुस्तकों तथा पत्रिकाओं से भरा हुआ था, जिनसे वे खेलते थे या जिन्हें मैं उन्हें पढ़कर सुनाता था। यहाँ तक तो कोई समस्या नहीं होती थी। लेकिन जैसे ही मैं उन्हें उठाकर अन्दर डॉक्टर से मिलने ले कर जाता था, सब कुछ बदल जाता था। जैसे ही वे नर्स को टीका लेकर अपनी ओर आता देखते थे, उनका आनन्द भय में परिवर्तित हो जाता था; और नर्स जितनी निकट आती जाती थी वे उतनी ही ज़ोर से सांत्वना तथा शान्ति पाने के लिए मुझ से चिपटते जाते थे, क्योंकि उन्हें मुझ पर भरोसा था।

   पाप और अशान्ति में पड़े हुए इस संसार में कभी कभी हम शान्ति और आराम की स्थिति से निकल कर पीड़ादायक क्षेत्रों में आ जाते हैं। ऐसे समय में प्रश्न होता है कि उस परिस्थिति के प्रति हमारी प्रतिक्रिया क्या होगी? हम भयभीत होकर परमेश्वर से प्रश्न कर सकते हैं कि उसने हमारे साथ ऐसा क्यों होने दिया? या हम उस पर भरोसा रखते हुए यह मानकर चल सकते हैं कि उन परेशानियों में भी वह हमारे लिए कुछ ऐसा कर रहा है जो हमारी भलाई के लिए है, चाहे अभी वह बात कष्टदायक ही क्यों ना हो। जब ऐसी परिस्थितियाँ आएं तो हमें परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार द्वारा लिखे गए शब्द स्मरण रखने चाहिएं, "जिस समय मुझे डर लगेगा, मैं तुझ पर भरोसा रखूंगा" (भजन 56:3)।

   जैसे मेरे बच्चे मुझ से ज़ोर से लिपट जाते थे, हमें प्रभु परमेश्वर से ज़ोर से लिपटे रहना चाहिए, और जितनी कठिन परिस्थिति हो, उतने ही अधिक ज़ोर से हम प्रभु से लिपटे रहें; उस पर भरोसा रखें क्योंकि उसका प्रेम कभी चूकता नहीं है। - जो स्टोवैल


अपने परमेश्वर पिता से लिपटे रहें, वही आपकी एकमात्र भरोसेमन्द आशा है।

मनुष्य का भय खाना फन्दा हो जाता है, परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह ऊंचे स्थान पर चढ़ाया जाता है। - नीतिवचन 29:25

बाइबल पाठ: भजन 56
Psalms 56:1 हे परमेश्वर, मुझ पर अनुग्रह कर, क्योंकि मनुष्य मुझे निगलना चाहते हैं। वे दिन भर लड़कर मुझे सताते हैं। 
Psalms 56:2 मेरे द्रोही दिन भर मुझे निगलना चाहते हैं, क्योंकि जो लोग अभिमान कर के मुझ से लड़ते हैं वे बहुत हैं। 
Psalms 56:3 जिस समय मुझे डर लगेगा, मैं तुझ पर भरोसा रखूंगा। 
Psalms 56:4 परमेश्वर की सहायता से मैं उसके वचन की प्रशंसा करूंगा, परमेश्वर पर मैं ने भरोसा रखा है, मैं नहीं डरूंगा। कोई प्राणी मेरा क्या कर सकता है? 
Psalms 56:5 वे दिन भर मेरे वचनों को, उलटा अर्थ लगा लगाकर मरोड़ते रहते हैं उनकी सारी कल्पनाएं मेरी ही बुराई करने की होती है। 
Psalms 56:6 वे सब मिलकर इकट्ठे होते हैं और छिपकर बैठते हैं; वे मेरे कदमों को देखते भालते हैं मानों वे मेरे प्राणों की घात में ताक लगाए बैठें हों। 
Psalms 56:7 क्या वे बुराई कर के भी बच जाएंगे? हे परमेश्वर, अपने क्रोध से देश देश के लोगों को गिरा दे! 
Psalms 56:8 तू मेरे मारे मारे फिरने का हिसाब रखता है; तू मेरे आंसुओं को अपनी कुप्पी में रख ले! क्या उनकी चर्चा तेरी पुस्तक में नहीं है? 
Psalms 56:9 जब जिस समय मैं पुकारूंगा, उसी समय मेरे शत्रु उलटे फिरेंगे। यह मैं जानता हूं, कि परमेश्वर मेरी ओर है। 
Psalms 56:10 परमेश्वर की सहायता से मैं उसके वचन की प्रशंसा करूंगा, यहोवा की सहायता से मैं उसके वचन की प्रशंसा करूंगा। 
Psalms 56:11 मैं ने परमेश्वर पर भरोसा रखा है, मैं न डरूंगा। मनुष्य मेरा क्या कर सकता है? 
Psalms 56:12 हे परमेश्वर, तेरी मन्नतों का भार मुझ पर बना है; मैं तुझ को धन्यवाद बलि चढ़ाऊंगा। 
Psalms 56:13 क्योंकि तू ने मुझ को मृत्यु से बचाया है; तू ने मेरे पैरों को भी फिसलने से बचाया है, ताकि मैं ईश्वर के साम्हने जीवतों के उजियाले में चलूं फिरूं?

एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू 16-18
  • लूका 2:1-24


रविवार, 9 अक्टूबर 2016

उम्मीद


   अपनी पुस्तक God in the Dock (कटघरे में परमेश्वर) में सुप्रसिद्ध मसीही विश्वासी और लेखक सी. एस. ल्युईस ने लिखा: "कलपना कीजिए कि एक इमारत में, जिसमें कई लोग साथ रहते हैं, आधे यह मानते हैं कि वह इमारत के होटल है, और शेष आधे यह मानते हैं कि वह इमारत एक कैदखाना है। जो उसे होटल मानते हैं, उन्हें वह इमारत काफी कष्टदायक और असहनीय लगेगी; और जो उसे कैदखाना मानते हैं उनके लिए वही इमारत आश्चर्यजनक रूप से आरामदेह होगी।" ल्युईस ने बड़ी चतुराई से इस तुलनात्मक स्थिति के द्वारा इस बात को दिखाया है कि कैसे हम अपनी उम्मीद के आधार पर जीवन के प्रति दृष्टिकोण को बनाते हैं। ल्युईस आगे लिखते हैं, "यदि आप इस संसार को एक होटल के रूप में देखते हैं जो आप के सुख-सुविधा और आनन्द उठाने के लिए है, तो आपको यह संसार कष्टदायक एवं असहनीय लगेगा। परन्तु यदि आप इसी संसार को अपने प्रशिक्षण और सुधार का स्थान मान लेते हैं तो यही संसार आपको फिर उतना बुरा भी नहीं लगेगा।"

   अधिकांशतः उम्मीद करी जाती है कि जीवन को आरामदेह, आनन्दपूर्ण और कष्ट-विहीन होना चाहिए। परन्तु परमेश्वर का वचन बाइबल हमें ऐसा नहीं सिखाती है। एक मसीही विश्वासी के लिए संसार आत्मिक विकास एवं उन्नति का स्थान है, अच्छे और बुरे, दोनों ही प्रकार के अनुभवों के द्वारा। प्रभु यीशु मसीह जीवन के प्रति उम्मीद रखने के विषय में यथार्तवादी थे; उन्होंने अपने चेलों से कहा, "मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि तुम्हें मुझ में शान्‍ति मिले; संसार में तुम्हें क्‍लेश होता है, परन्तु ढाढ़स बांधो, मैं ने संसार को जीन लिया है" (यूहन्ना 16:33)। प्रभु यीशु में होकर हमको जीवन की आशीषों और कष्टों को झेलने के समय एक भीतरी शान्ति भी रहती है, क्योंकि हम यह जानते हैं कि सब कुछ परमेश्वर के नियंत्रण में है, और जो भी परमेश्वर हमारे साथ होने दे रहा है वह उसकी सार्वभौमिक योजना के अन्तर्गत, अन्ततः हमारी भलाई और उसकी महिमा के लिए ही हो रहा है।

   हमारे जीवनों में प्रभु यीशु की उपस्थिति, कष्ट के समयों में भी हमें प्रसन्नचित बने रहने की सहायता एवं सामर्थ प्रदान करती है। - डेनिस फिशर


कष्ट के समयों में भी प्रभु यीशु में शान्ति प्राप्त होती है।

मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे। - यूहन्ना 14:27

बाइबल पाठ: यूहन्ना 16:25-33
John 16:25 मैं ने ये बातें तुम से दृष्‍टान्‍तों में कही हैं, परन्तु वह समय आता है, कि मैं तुम से दृष्‍टान्‍तों में और फिर नहीं कहूंगा परन्तु खोल कर तुम्हें पिता के विषय में बताऊंगा। 
John 16:26 उस दिन तुम मेरे नाम से मांगोगे, और मैं तुम से यह नहीं कहता, कि मैं तुम्हारे लिये पिता से बिनती करूंगा। 
John 16:27 क्योंकि पिता तो आप ही तुम से प्रीति रखता है, इसलिये कि तुम ने मुझ से प्रीति रखी है, और यह भी प्रतीति की है, कि मैं पिता कि ओर से निकल आया। 
John 16:28 मैं पिता से निकलकर जगत में आया हूं, फिर जगत को छोड़कर पिता के पास जाता हूं। 
John 16:29 उसके चेलों ने कहा, देख, अब तो तू खोल कर कहता है, और कोई दृष्‍टान्‍त नहीं कहता। 
John 16:30 अब हम जान गए, कि तू सब कुछ जानता है, और तुझे प्रयोजन नहीं, कि कोई तुझ से पूछे, इस से हम प्रतीति करते हैं, कि तू परमेश्वर से निकला है। 
John 16:31 यह सुन यीशु ने उन से कहा, क्या तुम अब प्रतीति करते हो? 
John 16:32 देखो, वह घड़ी आती है वरन आ पहुंची कि तुम सब तित्तर बित्तर हो कर अपना अपना मार्ग लोगे, और मुझे अकेला छोड़ दोगे, तौभी मैं अकेला नहीं क्योंकि पिता मेरे साथ है। 
John 16:33 मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि तुम्हें मुझ में शान्‍ति मिले; संसार में तुम्हें क्‍लेश होता है, परन्तु ढाढ़स बांधो, मैं ने संसार को जीन लिया है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 32-33
  • कुलुस्सियों 1


रविवार, 10 जनवरी 2016

धैर्य


   सन 2006 में 1000 व्यसक लोगों पर किए गए एक सर्वेक्षण में पाया गया कि कतार में खड़े रहने पर एक व्यक्ति औसतन 17 मिनिट में धैर्य खो देता है। यह भी पाया गया कि यदि फोन पर उन्हें प्रतीक्षा करने के लिए कहा जाए तो वे औसतन 9 मिनिट में अधीर हो जाते हैं। अधीर हो जाना सभी मनुष्यों का एक सामान्य गुण है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में याकूब की लिखी पत्री उन मसीही विश्वासियों को लिखी गई थी जो प्रभु यीशु में अपने विश्वास के कारण संघर्षों का सामना कर रहे थे और इन संघर्षों के कारण प्रभु के पुनःआगमन को लेकर अधीर हो चले थे (याकूब 5:7)। वे शोषण और दुःखों से होकर निकल रहे थे, और याकूब ने उन्हें समझाया कि वे अधीर ना हों परन्तु अपने धैर्य को बनाए रखें। उन्हें कष्टों का सामना करने में धीरज दिखाने के लिए प्रोत्साहित करते हुए याकूब ने उन से कहा कि वे अपने मसीही विश्वास में दृढ़ बने रहें और प्रभु के लिए त्याग करने से ना घबराएं क्योंकि प्रभु का आना निकट है और वह आकर सभी अन्याय और अनुचित को सही कर देगा: "तुम भी धीरज धरो, और अपने हृदय को दृढ़ करो, क्योंकि प्रभु का शुभागमन निकट है" (याकूब 5:8)।

   याकूब ने उन्हें उस किसान के समान धैर्य रखने को कहा जो वर्षा और फसल के लिए धैर्य के साथ प्रतीक्षा करता है (पद 7)। साथ ही उसने उन विश्वासियों को पुराने समय के भविष्यद्वक्ताओं का और कुलप्ति अय्युब का भी उदाहरण स्मरण करवाया जो हर परिस्थिति में परमेश्वर पर अपने विश्वास में दृढ़ डटा रहा (पद 10-11)। याकूब ने उन्हें उभारा, क्योंकि उनके मसीही विश्वास की दौड़ की समापन रेखा निकट ही है इसलिए अब वे अपना धैर्य ना खोएं।

   आज जब हम अपने मसीही विश्वास के कारण दुःखों की कुठाली में परखे जाते हैं, तो परमेश्वर चाहता है कि हम अपने मसीही विश्वास को थामे रहें और उसके प्रेम, और करुणा पर भरोसा बनाए रखें, उसके समय की प्रतीक्षा करें (पद 11)। - मार्विन विलियम्स


महान धीरज का मार्ग महान परीक्षाओं से होकर निकलता है।

धन्य हो तुम, जब मनुष्य के पुत्र के कारण लोग तुम से बैर करेंगे, और तुम्हें निकाल देंगे, और तुम्हारी निन्‍दा करेंगे, और तुम्हारा नाम बुरा जानकर काट देंगे। उस दिन आनन्‍दित हो कर उछलना, क्योंकि देखो, तुम्हारे लिये स्वर्ग में बड़ा प्रतिफल है: उन के बाप-दादे भविष्यद्वक्ताओं के साथ भी वैसा ही किया करते थे। - लूका 6:22-23

बाइबल पाठ: याकूब 5:7-11
James 5:7 सो हे भाइयों, प्रभु के आगमन तक धीरज धरो, देखो, गृहस्थ पृथ्वी के बहुमूल्य फल की आशा रखता हुआ प्रथम और अन्‍तिम वर्षा होने तक धीरज धरता है। 
James 5:8 तुम भी धीरज धरो, और अपने हृदय को दृढ़ करो, क्योंकि प्रभु का शुभागमन निकट है। 
James 5:9 हे भाइयों, एक दूसरे पर दोष न लगाओ ताकि तुम दोषी न ठहरो, देखो, हाकिम द्वार पर खड़ा है। 
James 5:10 हे भाइयो, जिन भविष्यद्वक्ताओं ने प्रभु के नाम से बातें की, उन्हें दुख उठाने और धीरज धरने का एक आदर्श समझो। 
James 5:11 देखो, हम धीरज धरने वालों को धन्य कहते हैं: तुम ने अय्यूब के धीरज के विषय में तो सुना ही है, और प्रभु की ओर से जो उसका प्रतिफल हुआ उसे भी जान लिया है, जिस से प्रभु की अत्यन्‍त करूणा और दया प्रगट होती है।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 25-26
  • मत्ती 8:1-17


बुधवार, 9 दिसंबर 2015

परिस्थितियाँ


   परमेश्वर के भविष्यद्वक्ता योना और उसका परमेश्वर के निर्देशों का पालन ना करने की कहानी हमें सिखाती है कि कैसे परमेश्वर परिस्थितियों को, चाहे वे भली हों या बुरी, हमें जागरूक करने और हमें भला बनाने के लिए प्रयोग करता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में योना की पुस्तक में हम देखते हैं कि परमेश्वर ने पाँच बार योना के लिए कुछ परिस्थितियाँ तैयार करीं, कुछ भली तो कुछ कष्टप्रद।

   हम योना 1:4 में पढ़ते हैं कि परमेश्वर ने उसकी आज्ञाकारिता से बचकर भाग रहे योना को लौटा लाने के लिए तूफान को भेजा, "तब यहोवा ने समुद्र में एक प्रचण्ड आंधी चलाई, और समुद्र में बड़ी आंधी उठी, यहां तक कि जहाज टूटने पर था" (योना 1:4)। जब उस जलपोत के नाविकों ने जाना कि उनके तूफान में फंसने का कारण योना ही है, तो योना के कहने पर उन्होंने उसे समुद्र में फेंक दिया (योना 1:15), जहाँ परमेश्वर ने पहले से उसके लिए एक बड़ा मच्छ ठहरा रखा था जिसने उसे निगल कर डूबने से बचा लिया (योना 1:17)। आगे चलकर हम पाते हैं कि परमेश्वर ने योना को कड़ी धूप से छाया देने के लिए एक पेड़ को उगाया (योना 4:6), और फिर परमेश्वर ने योना को समझाने के लिए पहले एक कीड़े को भेजा जिसने उस पेड़ को नाश करके योना पर से उसकी छाया को हटा दिया, फिर तेज़ लू और धूप को भेजा (योना 4:7-9)। इन सब परिस्थितियों के द्वारा परमेश्वर ने योना पर उसके बलवई तथा दयाविहीन मन को उजागर किया, योना को तैयार किया कि परमेश्वर उससे बात कर सके और उसे समझा सके।

   अपने जीवनों में जब हम भिन्न परिस्थितियों का सामना करते हैं तो हमें स्मरण रखना चाहिए कि चाहे आशीष हो या परेशानी, परमेश्वर की पूर्ण प्रभुता प्रत्येक बात और परिस्थिति पर रहती है। परमेश्वर हर परिस्थिति के द्वारा हमारे चरित्र का निर्माण करता रहता है (याकूब 1:1-5)। वह भली और कष्टप्रद, दोनों ही बातों को हमें सुधारने और हमारा मार्गदर्शन करने के लिए प्रयोग करता है। - डेनिस फिशर


परमेश्वर देता भी है और ले भी लेता है; हर बात से उसकी महिमा हो, उसका नाम धन्य हो।

हे मेरे भाइयों, जब तुम नाना प्रकार की परीक्षाओं में पड़ो तो इसको पूरे आनन्द की बात समझो, यह जान कर, कि तुम्हारे विश्वास के परखे जाने से धीरज उत्पन्न होता है। - याकूब 1:2-3

बाइबल पाठ: योना4:1-11
Jonah 4:1 यह बात योना को बहुत ही बुरी लगी, और उसका क्रोध भड़का। 
Jonah 4:2 और उसने यहोवा से यह कह कर प्रार्थना की, हे यहोवा जब मैं अपने देश में था, तब क्या मैं यही बात न कहता था? इसी कारण मैं ने तेरी आज्ञा सुनते ही तर्शीश को भाग जाने के लिये फुर्ती की; क्योंकि मैं जानता था कि तू अनुग्रहकारी और दयालु परमेश्वर है, विलंब से कोप करने वाला करूणानिधान है, और दु:ख देने से प्रसन्न नहीं होता। 
Jonah 4:3 सो अब हे यहोवा, मेरा प्राण ले ले; क्योंकि मेरे लिये जीवित रहने से मरना ही भला है। 
Jonah 4:4 यहोवा ने कहा, तेरा जो क्रोध भड़का है, क्या वह उचित है? 
Jonah 4:5 इस पर योना उस नगर से निकल कर, उसकी पूरब ओर बैठ गया; और वहां एक छप्पर बना कर उसकी छाया में बैठा हुआ यह देखने लगा कि नगर को क्या होगा? 
Jonah 4:6 तब यहोवा परमेश्वर ने एक रेंड़ का पेड़ लगा कर ऐसा बढ़ाया कि योना के सिर पर छाया हो, जिस से उसका दु:ख दूर हो। योना उस रेंड़ के पेड़ के कारण बहुत ही आनन्दित हुआ। 
Jonah 4:7 बिहान को जब पौ फटने लगी, तब परमेश्वर ने एक कीड़े को भेजा, जिसने रेंड़ का पेड़ ऐसा काटा कि वह सूख गया। 
Jonah 4:8 जब सूर्य उगा, तब परमेश्वर ने पुरवाई बहा कर लू चलाई, और घाम योना के सिर पर ऐसा लगा कि वह मूर्च्छा खाने लगा; और उसने यह कह कर मृत्यु मांगी, मेरे लिये जीवित रहने से मरना ही अच्छा है। 
Jonah 4:9 परमेश्वर ने योना से कहा, तेरा क्रोध, जो रेंड़ के पेड़ के कारण भड़का है, क्या वह उचित है? उसने कहा, हां, मेरा जो क्रोध भड़का है वह अच्छा ही है, वरन क्रोध के मारे मरना भी अच्छा होता। 
Jonah 4:10 तब यहोवा ने कहा, जिस रेंड़ के पेड़ के लिये तू ने कुछ परिश्रम नहीं किया, न उसको बढ़ाया, जो एक ही रात में हुआ, और एक ही रात में नाश भी हुआ; उस पर तू ने तरस खाया है। 
Jonah 4:11 फिर यह बड़ा नगर नीनवे, जिस में एक लाख बीस हजार से अधिक मनुष्य हैं, जो अपने दाहिने बाएं हाथों का भेद नहीं पहिचानते, और बहुत घरेलू पशु भी उस में रहते हैं, तो क्या मैं उस पर तरस न खाऊं?

एक साल में बाइबल: 
  • दानिय्येल 11-12
  • यहूदा


सोमवार, 19 अक्टूबर 2015

आश्वासन


   राजा शाऊल 9 वर्ष तक दाऊद के पीछे ऐसे पड़ा रहा "...जैसा कि कोई पहाड़ों पर तीतर का अहेर करे" (1 शमूएल 26:20) और दाऊद ने अपनी परेशानी में परमेश्वर को पुकारा, "हे परमेश्वर तू कब तक? क्या सदैव मुझे भूला रहेगा? तू कब तक अपना मुखड़ा मुझ से छिपाए रहेगा? मैं कब तक अपने मन ही मन में युक्तियां करता रहूं, और दिन भर अपने हृदय में दुखित रहा करूं, कब तक मेरा शत्रु मुझ पर प्रबल रहेगा?" (भजन 13:1-2)

   लंबे समय तक चलती रहने वाली परेशानी हमें घबरा सकती है; हमें उसका समाधान चाहिए होता है, तुरंत समाधान। लेकिन कुछ बातें ऐसी होती हैं जिनका समाधान नहीं वरन उन्हें सहना होता है। हम अपने कष्टों में परमेश्वर की दोहाई दे सकते हैं, उसे पुकार सकते हैं। हमारा परमेश्वर पिता चाहता है कि हम अपने संघर्षों में उसे सम्मिलित करें, अपनी परिस्थितियों को उसके साथ बाँटें। जैसा वह हमें समझता और जानता है, वैसा और कोई नहीं।

   जब हम अपनी शिकायतें लेकर उसकी ओर फिरते हैं तब हम अपने बारे में सचेत होते हैं। दाऊद ने अपनी विकट परिस्थिति में जीवन की निश्चयता को पहिचाना - उसके प्रति परमेश्वर का अडिग और सदा बने रहने वाला प्रेम! दाऊद ने अपने आप को स्मरण कराया, "परन्तु मैं ने तो तेरी करूणा पर भरोसा रखा है; मेरा हृदय तेरे उद्धार से मगन होगा। मैं परमेश्वर के नाम का भजन गाऊंगा, क्योंकि उसने मेरी भलाई की है" (भजन 13:5-6)। चाहे परेशानियाँ बनी रहीं लेकिन दाऊद उन सभी परिस्थित्यों में भजन गा सका, क्योंकि उसे स्मरण रहा कि वह परमेश्वर की प्रीय संतान है; बस यही हम मसीही विश्वासियों को भी स्मरण रखना है।

    ऐ. डबल्यू थोरोल्ड ने लिखा, "आत्मिक जीवन की सबसे ऊँची चोटी खिली हुई धूप में हर्षित आनन्द नहीं है, वरन परमेश्वर के प्रेम में पूर्ण और निःसन्देह भरोसा है।" हमें परमेश्वर की ओर से दृढ़ और अपरिवर्तनीय आश्वासन है कि हमारी सभी परेशानियों और समस्त कष्टों के समयों में भी परमेश्वर का प्रेम हमारे साथ होगा; इसके लिए उसपर संपूर्ण विश्वास किया जा सकता है।


जब सब कुछ असफल भी हो जाए तब भी परमेश्वर का प्रेम स्थिर बना रहता है।

परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा। - रोमियों 5:8

बाइबल पाठ: भजन 13
Psalms 13:1 हे परमेश्वर तू कब तक? क्या सदैव मुझे भूला रहेगा? तू कब तक अपना मुखड़ा मुझ से छिपाए रहेगा? 
Psalms 13:2 मैं कब तक अपने मन ही मन में युक्तियां करता रहूं, और दिन भर अपने हृदय में दुखित रहा करूं, कब तक मेरा शत्रु मुझ पर प्रबल रहेगा? 
Psalms 13:3 हे मेरे परमेश्वर यहोवा मेरी ओर ध्यान दे और मुझे उत्तर दे, मेरी आंखों में ज्योति आने दे, नहीं तो मुझे मृत्यु की नींद आ जाएगी; 
Psalms 13:4 ऐसा न हो कि मेरा शत्रु कहे, कि मैं उस पर प्रबल हो गया; और ऐसा न हो कि जब मैं डगमगाने लगूं तो मेरे शत्रु मगन हों।
Psalms 13:5 परन्तु मैं ने तो तेरी करूणा पर भरोसा रखा है; मेरा हृदय तेरे उद्धार से मगन होगा। 
Psalms 13:6 मैं परमेश्वर के नाम का भजन गाऊंगा, क्योंकि उसने मेरी भलाई की है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 56-58
  • 2 थिस्सलुनीकियों 2


गुरुवार, 16 जुलाई 2015

शुद्ध तथा बलवन्त


   हीरे मज़बूत एवं ठोस, सुन्दर और बहुमूल्य रत्न होते हैं, परन्तु उनका आरंभ बहुत साधारण से काले, भद्दे और ज्वलनशील कोएले (कार्बन) के रूप में होता है। वर्षों तक अत्याधिक तापमान और दबाव सहते सहते यह कार्बन शुद्ध, चमकीले, सुन्दर और मज़बूत हीरे में परिवर्तित हो जाता है, जिसे तराशने और संवारने से वह बहुमूल्य बन जाता है। यह उन्हें आत्मिक सामर्थ और निखार प्राप्त करने की प्रक्रिया को समझने के लिए उचित उदाहरण भी बनाता है।

   प्रेरित पौलुस ने कहा कि परमेश्वर की सामर्थ हमारी निर्बलता में सिद्ध होती है (2 कुरिन्थियों 12:9)। काश कि यह सच नहीं होता, क्योंकि मुझे निर्बल होना अच्छा नहीं लगता। शारिरिक निर्बलता क्या होती है यह मैंने अपने कैंसर के लिए दी जाने वाली कीमोथैरपी और विकिरण से इलाज द्वारा अच्छे से सीखा है। फिर एक छोटी सी घटना ने मुझे अनायास ही भावनाओं की दुर्बलता में भी डाल दिया। इलाज में अपने 3 फीट लंबे बाल गंवा कर लगभग एक साल के लिए गंजा हो जाने से गुज़रने के बाद, एक बार का गलत रीति से मेरे बालों का काटा जाना मेरे लिए कोई बड़ी बात नहीं होनी चाहिए थी, परन्तु वह हो गई और मैं इस बात को लेकर अपने भावनात्मक रूप से निर्बल हो जाने के कारण बहुत शर्मिंदा अनुभव करती रही। हम में से कुछ लोग अपने चारों ओर सामर्थ और आत्म-निर्भरता का आवरण लपेटे रहते हैं। परन्तु कोई आक्समक दुर्घटना, या अस्वस्थता, या बेरोज़गारी या किसी प्रीय संबंध का विच्छेद हमें परमेश्वर के अनुग्रह पर अपनी पूर्ण निर्भरता का स्मरण करवा देता है।

   जब कभी हमें कष्ट की भट्टी से होकर निकलना पड़े, वह चाहे शारीरिक हो या भावनात्मक, चाहे बाहर से आने वाला सताव हो या हमारे अन्दर से उठने वाली ग्लानि और शर्मिंदगी - सदा स्मरण रखें कि परमेश्वर का उद्देश्य हमें इन सभी दबाव और कष्टों द्वारा शुद्ध तथा बलवन्त बनाना ही है, हमारी भलाई के लिए है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


कष्ट वह भट्टी हैं जिसका उपयोग परमेश्वर हमें शुद्ध तथा बलवन्त करने के लिए करता है।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 12:1-10
2 Corinthians 12:1 यद्यपि घमण्‍ड करना तो मेरे लिये ठीक नहीं तौभी करना पड़ता है; सो मैं प्रभु के दिए हुए दर्शनों और प्रकाशों की चर्चा करूंगा। 
2 Corinthians 12:2 मैं मसीह में एक मनुष्य को जानता हूं, चौदह वर्ष हुए कि न जाने देह सहित, न जाने देह रहित, परमेश्वर जानता है, ऐसा मनुष्य तीसरे स्वर्ग तक उठा लिया गया। 
2 Corinthians 12:3 मैं ऐसे मनुष्य को जानता हूं न जाने देह सहित, न जाने देह रहित परमेश्वर ही जानता है। 
2 Corinthians 12:4 कि स्वर्ग लोक पर उठा लिया गया, और एसी बातें सुनीं जो कहने की नहीं; और जिन का मुंह पर लाना मनुष्य को उचित नहीं। 
2 Corinthians 12:5 ऐसे मनुष्य पर तो मैं घमण्‍ड करूंगा, परन्तु अपने पर अपनी निर्बलताओं को छोड़, अपने विषय में घमण्‍ड न करूंगा। 
2 Corinthians 12:6 क्योंकि यदि मैं घमण्‍ड करना चाहूं भी तो मूर्ख न हूंगा, क्योंकि सच बोलूंगा; तोभी रुक जाता हूं, ऐसा न हो, कि जैसा कोई मुझे देखता है, या मुझ से सुनता है, मुझे उस से बढ़कर समझे। 
2 Corinthians 12:7 और इसलिये कि मैं प्रकाशों की बहुतायत से फूल न जाऊं, मेरे शरीर में एक कांटा चुभाया गया अर्थात शैतान का एक दूत कि मुझे घूँसे मारे ताकि मैं फूल न जाऊं। 
2 Corinthians 12:8 इस के विषय में मैं ने प्रभु से तीन बार बिनती की, कि मुझ से यह दूर हो जाए। 
2 Corinthians 12:9 और उसने मुझ से कहा, मेरा अनुग्रह तेरे लिये बहुत है; क्योंकि मेरी सामर्थ निर्बलता में सिद्ध होती है; इसलिये मैं बड़े आनन्द से अपनी निर्बलताओं पर घमण्‍ड करूंगा, कि मसीह की सामर्थ मुझ पर छाया करती रहे। 
2 Corinthians 12:10 इस कारण मैं मसीह के लिये निर्बलताओं, और निन्‍दाओं में, और दरिद्रता में, और उपद्रवों में, और संकटों में, प्रसन्न हूं; क्योंकि जब मैं निर्बल होता हूं, तभी बलवन्‍त होता हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 16-17
  • प्रेरितों 20:1-16


बुधवार, 27 मई 2015

तूफान


   कहा जाता है कि वर्तमान इतोपिया देश में लाल सागर के तट पर स्थित प्राचीन देश अक्सुम के निवासियों ने खोज करी कि वर्षा ऋतु की तूफानी हवाओं के वेग को नाव में लगे पाल द्वारा वश में लेकर तेज़ी से नौकावाहन किया जा सकता है। इससे उन्होंने तेज़ हवाओं और ऊँची लहरों से डर कर रहने की बजाए, उन तूफानी परिस्थितियों को अपने लाभ के लिए उपयोग करना सीख लिया।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 107 भी हमारे लिए जीवन में तूफानों की भूमिका का एक उत्तम शब्दचित्र प्रस्तुत करता है। इस भजन में भजनकार वर्णन करता है कि कैसे परमेश्वर हमारे जीवन में तूफानों को आने देता है और फिर उनमें हमें सुरक्षित निकाल कर ले आता है जिससे हम हर परिस्थिति में उस पर विश्वास रखना सीख सकें।

   परेशान परिस्थितियों में परमेश्वर पर भरोसा बनाए रखना बाइबल में अनेक बार दोहराया गया विषय है। इब्रानियों के नाम लिखी पत्री के 11वें अध्याय में लेखक उन अनेक परमेश्वर के विश्वासी जनों का उल्लेख करता है जिन्होंने अपनी समस्याओं तथा विकट परिस्थितियों को परमेश्वर के प्रति अपने विश्वास को व्यक्त करने का अवसर बनाया और परमेश्वर के अनुग्रह, प्रावाधान तथा छुटकारे का अनुभव किया (इब्रानियों 11:33-34)।

   जीवन में अनेकों तूफानों का आना तो अवश्यंभावी हैं; उन तूफानों के प्रति चाहे हमारी प्रथम प्रतिक्रीया उन से बचकर भाग निकल पाने के प्रयास की हो, फिर भी हम परमेश्वर से प्रार्थना में माँग सकते हैं कि वह हमें उन तूफानों में उस पर अपने विश्वास को बनाए रखना सिखाए और उन तूफानों का उपयोग उसकी निकटता में बढ़ने तथा उस से आशीषें प्राप्त करने के लिए करना सिखाए। - डेनिस फिशर


मसीह यीशु के साथ तूफान से होकर निकलना मसीह यीशु के बिना आरामदायक जीवन जीने से बेहतर है।

इन्‍होंने विश्वास ही के द्वारा राज्य जीते; धर्म के काम किए; प्रतिज्ञा की हुई वस्तुएं प्राप्त की, सिंहों के मुंह बन्‍द किए। आग की ज्‍वाला को ठंडा किया; तलवार की धार से बच निकले, निर्बलता में बलवन्‍त हुए; लड़ाई में वीर निकले; विदेशियों की फौजों को मार भगाया। - इब्रानियों 11:33-34

बाइबल पाठ: भजन 107:23-32
Psalms 107:23 जो लोग जहाजों में समुद्र पर चलते हैं, और महासागर पर हो कर व्यापार करते हैं; 
Psalms 107:24 वे यहोवा के कामों को, और उन आश्चर्यकर्मों को जो वह गहिरे समुद्र में करता है, देखते हैं। 
Psalms 107:25 क्योंकि वह आज्ञा देता है, वह प्रचण्ड बयार उठ कर तरंगों को उठाती है। 
Psalms 107:26 वे आकाश तक चढ़ जाते, फिर गहराई में उतर आते हैं; और क्लेश के मारे उनके जी में जी नहीं रहता; 
Psalms 107:27 वे चक्कर खाते, और मतवाले की नाईं लड़खड़ाते हैं, और उनकी सारी बुद्धि मारी जाती है। 
Psalms 107:28 तब वे संकट में यहोवा की दोहाई देते हैं, और वह उन को सकेती से निकालता है। 
Psalms 107:29 वह आंधी को थाम देता है और तरंगें बैठ जाती हैं। 
Psalms 107:30 तब वे उनके बैठने से आनन्दित होते हैं, और वह उन को मन चाहे बन्दर स्थान में पहुंचा देता है। 
Psalms 107:31 लोग यहोवा की करूणा के कारण, और उन आश्चर्यकर्मों के कारण जो वह मनुष्यों के लिये करता है, उसका धन्यवाद करें। 
Psalms 107:32 और सभा में उसको सराहें, और पुरनियों के बैठक में उसकी स्तुति करें।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 1-3
  • यूहन्ना 10:1-23


शनिवार, 17 जनवरी 2015

संकट


   मुझे खुशी थी कि वर्ष के अन्तिम दिन भी समाप्त होने लगे हैं, क्योंकि इस वर्ष में मैंने बहुत दुख, बिमारी और उदासी को देखा था। इसलिए मैं नव-वर्ष का स्वागत पूरे ज़ोर-शोर के साथ करने को तैयार थी। लेकिन नए वर्ष के पहले महीने के साथ ही एक के बाद एक उदासी बढ़ाने वाले समचारों ने भी आना आरंभ कर दिया। मेरे कई मित्रों के माता-पिता में से कोई जाता रहा; मेरे पिता के भाई निद्रा में ही जाते रहे; कुछ मित्रों को पता चला कि उन्हें कैंसर है; एक सहकर्मी का भाई, तथा एक मित्र का पुत्र, अनापक्षित दुर्घटनाओं में जाते रहे। बीते वर्ष के साथ दुख भरे समयों का अन्त तो नहीं हुआ, वरन नया वर्ष और भी दुखों की बाढ़ ले आया।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में यूहन्ना 16:33 में प्रभु यीशु ने अपने चेलों से कहा, "संसार में तुम्हें क्लेष होता है", अर्थात क्लेषों का आना अवश्यंभावी हैं। हम मसीही विश्वासी जो परमेश्वर की सनतान हैं, हम भी क्लेषों से बचे हुए नहीं हैं; परमेश्वर ने हमारे लिए भी आरामदेह जीवन, समृद्धि एवं संपन्नता और अच्छे स्वास्थ्य की प्रतिज्ञा नहीं करी है। लेकिन जो प्रतिज्ञा परमेश्वर ने हम से करी है वह यह है कि हमारे प्रत्येक संकट और क्लेष में वह हमारे साथ होगा। यशायाह 43:2 में परमेश्वर ने कहा कि "जब तू जल में हो कर जाए, मैं तेरे संग संग रहूंगा और जब तू नदियों में हो कर चले, तब वे तुझे न डुबा सकेंगी; जब तू आग में चले तब तुझे आंच न लगेगी, और उसकी लौ तुझे न जला सकेगी"; अर्थात प्रत्येक खतरनाक परिस्थिति में वह हमारी रक्षा करेगा, हमारे साथ बना रहेगा। जिन संकटों और क्लेषों से होकर हम निकलते हैं, उनमें पूरे होने वाले परमेश्वर के उद्देश्यों को चाहे हम ठीक से समझने ना पाएं, लेकिन परमेश्वर सदा हमारे साथ है, और क्योंकि हम उसके प्रेम तथा हृदय को जानते हैं इसलिए उस पर भरोसा रख सकते हैं।

   क्योंकि हमारा परमेश्वर अत्यन्त प्रेमी परमेश्वर है, और "...न मृत्यु, न जीवन, न स्वर्गदूत, न प्रधानताएं, न वर्तमान, न भविष्य, न सामर्थ, न ऊंचाई, न गहिराई और न कोई और सृष्टि, हमें परमेश्वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी" (रोमियों 8:38-39) इसलिए जब संकट और क्लेष आएं तो वह भी उनमें हमारे साथ रहेगा, और उनमें होकर भी हमारे लिए भला ही उत्पन्न करेगा (रोमियों 8:28)। - सिंडी हैस 
कैस्पर


विश्वास का अर्थ है चाहे हमें कुछ सुनाई या दिखाई ना भी दे, तो भी भरोसा बनाए रखना कि परमेश्वर हमारे साथ ही है।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ:  यूहन्ना 16:25-33
John 16:25 मैं ने ये बातें तुम से दृष्‍टान्‍तों में कही हैं, परन्तु वह समय आता है, कि मैं तुम से दृष्‍टान्‍तों में और फिर नहीं कहूंगा परन्तु खोल कर तुम्हें पिता के विषय में बताऊंगा। 
John 16:26 उस दिन तुम मेरे नाम से मांगोगे, और मैं तुम से यह नहीं कहता, कि मैं तुम्हारे लिये पिता से बिनती करूंगा। 
John 16:27 क्योंकि पिता तो आप ही तुम से प्रीति रखता है, इसलिये कि तुम ने मुझ से प्रीति रखी है, और यह भी प्रतीति की है, कि मैं पिता कि ओर से निकल आया। 
John 16:28 मैं पिता से निकलकर जगत में आया हूं, फिर जगत को छोड़कर पिता के पास जाता हूं। 
John 16:29 उसके चेलों ने कहा, देख, अब तो तू खोल कर कहता है, और कोई दृष्‍टान्‍त नहीं कहता। 
John 16:30 अब हम जान गए, कि तू सब कुछ जानता है, और तुझे प्रयोजन नहीं, कि कोई तुझ से पूछे, इस से हम प्रतीति करते हैं, कि तू परमेश्वर से निकला है। 
John 16:31 यह सुन यीशु ने उन से कहा, क्या तुम अब प्रतीति करते हो? 
John 16:32 देखो, वह घड़ी आती है वरन आ पहुंची कि तुम सब तित्तर बित्तर हो कर अपना अपना मार्ग लोगे, और मुझे अकेला छोड़ दोगे, तौभी मैं अकेला नहीं क्योंकि पिता मेरे साथ है। 
John 16:33 मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि तुम्हें मुझ में शान्‍ति मिले; संसार में तुम्हें क्‍लेश होता है, परन्तु ढाढ़स बांधो, मैं ने संसार को जीत लिया है।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 41-42
  • मत्ती 12:1-23



बुधवार, 14 जनवरी 2015

प्रोत्साहक


   कठिन मंदी के दौर में मैंने अपने साथी मसीही विश्वासियों के साथ अन्य बेरोज़गार मसीही विश्वासियों की सहायता और प्रोत्साहन के लिए एक सहायता समूह बनाया। हम उन बेरोज़गार लोगों के नौकरी पाने में सहायता के लिए उनकी अर्ज़ियों, शैक्षिक एवं कार्य अनुभव आदि को अच्छी रीति से लिखने में सहायता करते, लोगों के साथ संपर्क करके उनके रोज़गार के अवसर तलाशते और उनके लिए प्रार्थनाएं किया करते थे। लेकिन एक समस्या बार-बार सामने आने लगी, जब किसी को नौकरी मिल जाती तो विरला ही कोई होगा जो समूह के लोगों को प्रोत्साहित करने लौटा होगा। इससे समूह में शेष रह गए लोगों में एकाकीपन और निराशा बढ़ जाती थी।

   लेकिन इस से भी बदतर थीं वे टिप्पणियाँ जो उन लोगों से सुनने को मिलती थीं जिन्होंने कभी बेरोज़गारी का कष्ट अनुभव नहीं करा था। उन लोगों की बातें अय्युब के मित्रों द्वारा उसके कष्ट के समय में उस पर लगाए जाने वाले लांछनों के समान ही होते थे; जैसा अय्युब के मित्रों ने उससे कहा: "और यदि तू निर्मल और धमीं रहता, तो निश्चय वह तेरे लिये जागता; और तेरी धमिर्कता का निवास फिर ज्यों का त्यों कर देता" (अय्युब 8:6)। जब हम परमेश्वर के वचन बाइबल में अय्युब और उसके मित्रों के बीच हो रहे इस संवाद को पढ़ते हैं तो अय्युब की पुस्तक के बारहवें अध्याय में पहुँचने तक अय्युब उनसे कहना आरंभ कर देता है कि जिन लोगों का जीवन सरल रहा है, वह उन से उपेक्षित अनुभव कर रहा है (पद 5)।

   जब हमारे लिए सब कुछ अच्छा चल रहा हो तब कभी-कभी हम यह सोचना आरंभ कर देते हैं कि या तो हम उन लोगों से जो कष्ट में होकर निकल रहे हैं भले हैं, या फिर परमेश्वर उनसे तो कम और हम से अधिक प्रेम रखता है। हम यह नज़रन्दाज़ कर बैठते हैं कि परमेश्वर तो सभी से समान ही प्रेम रखता है, और सब का ही भला चाहता है, इसीलिए तो उसने सारे संसार के सभी लोगों के उद्धार के लिए अपने एकलौते पुत्र प्रभु यीशु को इस संसार में बलिदान होने के लिए भेजा। साथ ही हम यह भी भूल जाते हैं कि इस पतित संसार के दुषप्रभाव किसी को भी, कभी भी और किसी भी सीमा तक प्रभावित कर सकते हैं; जो स्थिति आज किसी और की है, वही या उससे भी बुरी कल हमारी भी हो सकती है।

   हम चाहे अच्छे समय से होकर निकल रहे हों या फिर बुरे, हमें परमेश्वर की सहायता की आवश्यकता सदा ही रहती है। परमेश्वर हम से यह भी आशा रखता है कि उसके द्वारा हमें प्रदान करी गई सफलता, समृद्धि और सामर्थ को हम दूसरों की भलाई और प्रोत्साहन में उपयोग करें। वह हमें आलोचक नहीं प्रोत्साहक देखना चाहता है। - रैन्डी किलगोर


परमेश्वर के प्रति दीनता हमें दूसरों के प्रति नम्रता प्रदान करती है।

हम पर अनुग्रह कर, हे यहोवा, हम पर अनुग्रह कर, क्योंकि हम अपमान से बहुत ही भर गए हैं। हमारा जीव सुखी लोगों के ठट्ठों से, और अहंकारियों के अपमान से बहुत ही भर गया है। - भजन 123:3-4

बाइबल पाठ: अय्युब 12:1-10
Job 12:1 तब अय्यूब ने कहा; 
Job 12:2 नि:सन्देह मनुष्य तो तुम ही हो और जब तुम मरोगे तब बुद्धि भी जाती रहेगी। 
Job 12:3 परन्तु तुम्हारी नाईं मुझ में भी समझ है, मैं तुम लोगों से कुछ नीचा नहीं हूँ कौन ऐसा है जो ऐसी बातें न जानता हो? 
Job 12:4 मैं ईश्वर से प्रार्थना करता था, और वह मेरी सुन लिया करता था; परन्तु अब मेरे पड़ोसी मुझ पर हंसते हैं; जो धमीं और खरा मनुष्य है, वह हंसी का कारण हो गया है। 
Job 12:5 दु:खी लोग तो सुखियों की समझ में तुच्छ जाने जाते हैं; और जिनके पांव फिसला चाहते हैं उनका अपमान अवश्य ही होता है। 
Job 12:6 डाकुओं के डेरे कुशल क्षेम से रहते हैं, और जो ईश्वर को क्रोध दिलाते हैं, वह बहुत ही निडर रहते हैं; और उनके हाथ में ईश्वर बहुत देता है। 
Job 12:7 पशुओं से तो पूछ और वे तुझे दिखाएंगे; और आकाश के पक्षियों से, और वे तुझे बता देंगे। 
Job 12:8 पृथ्वी पर ध्यान दे, तब उस से तुझे शिक्षा मिलेगी; ओर समुद्र की मछलियां भी तुझ से वर्णन करेंगी। 
Job 12:9 कौन इन बातों को नहीं जानता, कि यहोवा ही ने अपने हाथ से इस संसार को बनाया है। 
Job 12:10 उसके हाथ में एक एक जीवधारी का प्राण, और एक एक देहधारी मनुष्य की आत्मा भी रहती है।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 33-35
  • मत्ती 10:1-20


शुक्रवार, 10 अगस्त 2012

सदा के लिए


   लड़कपन में जब मुझे कोई छोटी चोट लगती या खरोंच आ जाती तो मेरी प्रतिक्रीया ऊंची आवाज़ में रोने-चिल्लने और खूब आंसू बहाने की होती। मेरे पिताजी मुझे सांत्वना देते और कहते, "यह सोचो कि जब दर्द बन्द हो जाएगा तो कितना अच्छा लगेगा।" उस समय तो मेरे पिताजी की यह सलाह मुझे किसी काम की नहीं लगती थी, और मैं अपने दर्द के अलावा और किसी बात के बारे में सोच भी नहीं सकता थी, लेकिन समय बीतने के साथ मेरे पिताजी की इस सलाह ने मुझे बहुत सी मुश्किलों से निकलने में सहायता करी, चाहे वह टूटे हृदय की वेदना हो या किसी लंबी बिमारी का कष्ट। मैं अपने आप को यही समझाती रहती थी, जो अभी है वह सदा नहीं रहेगा।

   हम मसीही विश्वासियों के पास भी अपने भविष्य के लिए यही आशा है - परमेश्वर ने हमारे भविष्य के लिए कुछ अति उत्तम ठहरा रखा है। कष्ट और परेशानियां परमेश्वर की सृष्टि की मूल योजना के भाग नहीं थे, किंतु आज हमें स्मरण दिलाते हैं कि जब परमेश्वर की आज्ञाओं की अवहेलना होती है तो उसका प्रतिफल कैसा होता है। कष्ट और परेशानियां हमें उकसाते भी हैं कि हम इन के निवारण और पाप से उद्धार पाने के सुसमाचार संबंधित परमेश्वर की योजना का सन्देश लोगों तक लेकर जाएं।

   यद्यपि हम दर्द और निराशा से बच नहीं सकते (यूहन्ना १६:३३), किंतु हम यह भी जानते हैं कि ये कुछ समय के ही हैं। कुछ दुखों से तो हम इस जीवन में ही छुटकारा पा लेंगे किंतु मसीही विश्वासी आते जीवन में प्रत्येक दुख-दर्द से छुटकारा पाने की निश्चितता को जानते हैं, जब परमेश्वर अपने राज्य की स्थापना करेगा और एक नई पृथ्वी और आकाश स्थापित किया जाएगा (प्रकाशितवाक्य २१:१)।

   पाप और पाप के प्रभाव से विहीन यह नई सृष्टि सदा के लिए रहेगी; जो अभी है वह सदा के लिए नहीं है। क्या आप उस नई सृष्टि में होंगे? - जूली ऐकैरमैन लिंक


स्वर्ग का नफा पृथ्वी के नुकसानों से कहीं बढ़कर होगा।

और वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं। - प्रकाशितवाक्य २१:४

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य २१:१-५
Rev 21:1  फिर मैं ने नये आकाश और नयी पृथ्वी को देखा, क्‍योंकि पहिला आकाश और पहिली पृथ्वी जाती रही थी, और समुद्र भी न रहा। 
Rev 21:2  फिर मैं ने पवित्र नगर नये यरूशलेम को स्‍वर्ग पर से परमेश्वर के पास से उतरते देखा, और वह उस दुल्हिन के समान थी, जो अपने पति के लिये सिंगार किए हो। 
Rev 21:3  फिर मैं ने सिंहासन में से किसी को ऊंचे शब्‍द से यह कहते सुना, कि देख, परमेश्वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है; वह उन के साथ डेरा करेगा, और वे उसके लोग होंगे, और परमेश्वर आप उन के साथ रहेगा, और उन का परमेश्वर होगा। 
Rev 21:4  और वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं। 
Rev 21:5  और जो सिंहासन पर बैठा था, उस ने कहा, कि देख, मैं सब कुछ नया कर देता हूं: फिर उस ने कहा, कि लिख ले, क्‍योंकि ये वचन विश्वास के योग्य और सत्य हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन ७९-८० 
  • रोमियों ११:१-१८

शनिवार, 23 जून 2012

कंटीली झाड़ियां

   इस वसन्त ऋतु में परमेश्वर ने हमें अच्छी बारिश दी, इस कारण हमारे घर के पिछवाड़े में उगने वाली जंगली कंटीली झाड़ीयां और जंगली फूल भी बहुतायात से हुए। बटरकप फूलों की छटा तो देखे ही बनती थी, वे आकार में बड़े और बहुत सुन्दर थे। इससे पहले कि वे मुर्झा जाएं, मैंने चाहा कि उनकी फोटो उतार कर रख लूँ। लेकिन उनके निकट पहुंचना कठिन था, क्योंकि वे कीचड़ और कंटीली झाड़ियों में उगे हुए थे। एक दोपहर को मैंने फोटो लेने की ठान ही ली, और अपनी तैयारी कर के मैं उन फूलों की ओर चल पड़ी। उन बटरकप फूलों तक पहुँचने से पहले ही मेरे पांव कीचड़ में लथपथ हो गए, मेरे हाथ-पैरों पर झाड़ियों से खरोंचें आ गईं और मुझे कई जगह पर कीड़ों ने भी काट लिया; परन्तु उन फूलों की सुन्दरता को निकट से देख तथा निहार पाने के आनन्द ने मेरे उन सभी कष्टों को भुला दिया; उन सुन्दर फूलों की ली गई फोटो के द्वारा आते समय में दूसरों तक उनकी सुन्दरता को पहुँचा पाने और उनके जीवनों को भी आनन्दित कर पाने के आनन्द के सामने मेरे वे कष्ट कुछ भी नहीं थे।

   हमारे जीवन का अधिकांश भाग उन परेशानियों और परीक्षाओं से निकलने में व्यतीत होता है जिनका होना इस पाप से भरे संसार में अवश्यंभावी है। इन्ही परीक्षाओं में से एक है सताव। प्रभु यीशु के चेलों ने भी इस बात को अपने जीवनों में सत्य पाया। वे चेले उन भली बातों और आशीषों को जानते थे जो परमेश्वर ने उनके लिए रख छोड़ी हैं, परन्तु जब परमेश्वर द्वारा पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार को उन्होंने संसार को बताना चाहा तो चेलों को बहुत प्रतिरोध और सताव का सामना करना पड़ा (प्रेरितों १४:५); और यही तब से लेकर आज तक भी होता आ रहा है।

   जिन मसीही विश्वासियों ने परमेश्वर के कार्य को करना ठान रखा है, और जो जानते हैं कि परमेश्वर का मार्ग ही सबसे उत्तम मार्ग है (१ कुरिन्थियों १२:३१), वे यह भी जानते हैं कि इस मार्ग पर चलने के लिए उन्हें अनेक कष्टों का सामना करना पड़ेगा, बहुत दुख उठाने पड़ेंगे और इस मार्ग में वे ’कंटिली झाड़ियों’ द्वारा घायल भी होंगे। लेकिन इस मार्ग पर चलने से मिलने वाली आशीषों के सामने ये दुख कुछ भी नहीं हैं; दूसरों के जीवनों में परमेश्वर की करुणा, क्षमा और शांति के आनन्द को ला पाने के सुख के सामने संसार से मिलने वाले ये दुख बहुत ही गौण हैं। और फिर जो प्रतिफल स्वर्ग में हमारे लिए हमारे उद्धारकर्ता प्रभु यीशु ने रखा हुआ है, उसके सामने तो इन दुखों की कोई हस्ती ही नहीं है।

   मार्ग की कंटिली झाड़ियों की ओर नहीं, अन्त के सुख पर अपनी नज़रें लगाइये और बिना विचिलित हुए परमेश्वर के कार्य को पूरा करने में लगे रहिए। - जूली ऐकैरमैन लिंक


पृथ्वी - परीक्षाओं का स्थान; स्वर्ग - प्रतिफलों का स्थान।


और चेलों के मन को स्थिर करते रहे और यह उपदेश देते थे, कि हमें बड़े क्‍लेश उठाकर परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना होगा। - प्रेरितों १४:२२

बाइबल पाठ: प्रेरितों १४:१-७, १९-२२
Act 14:1  इकुनियुम में ऐसा हुआ कि वे यहूदियों की आराधनालय में साथ साथ गए, और ऐसी बातें की, कि यहूदियों और यूनानियों दोनों में से बहुतों ने विश्वास किया।
Act 14:2 परन्‍तु न मानने वाले यहूदियों ने अन्यजातियों के मन भाइयों के विरोध में उकसाए, और बिगाड़ कर दिए।
Act 14:3 और वे बहुत दिन तक वहां रहे, और प्रभु के भरोसे पर हियाव से बातें करते थे: और वह उन के हाथों से चिन्‍ह और अद्भुत काम करवाकर अपने अनुग्रह के वचन पर गवाही देता था।
Act 14:4 परन्‍तु नगर के लोगों में फूट पड़ गई थी; इस से कितने तो यहूदियों की ओर, और कितने प्रेरितों की ओर हो गए।
Act 14:5 परन्‍तु जब अन्यजाति और यहूदी उन का अपमान और उन्‍हें पत्थरवाह करने के लिये अपने सरदारों समेत उन पर दौड़े।
Act 14:6 तो वे इस बात को जान गए, और लुकाउनिया के लुस्‍त्रा और दिरबे नगरों में, और आसपास के देश में भाग गए।
Act 14:7  और वहां सुसमाचार सुनाने लगे।
Act 14:19 परन्‍तु कितने यहूदियों ने अन्‍ताकिया और इकुनियम से आकर लोगों को अपनी ओर कर लिया, और पौलुस को पत्थरवाह किया, और मरा समझकर उसे नगर के बाहर घसीट ले गए।
Act 14:20  पर जब चेले उस की चारों ओर आ खड़े हुए, तो वह उठकर नगर में गया और दूसरे दिन बरनबास के साथ दिरबे को चला गया।
Act 14:21 और वे उस नगर के लोगों को सुसमाचार सुनाकर, और बहुत से चेले बनाकर, लुस्‍त्रा और इकुनियम और अन्‍ताकिया को लौट आए।
Act 14:22 और चेलों के मन को स्थिर करते रहे और यह उपदेश देते थे, कि हमें बड़े क्‍लेश उठाकर परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना होगा।


एक साल में बाइबल: 

  • एस्तेर ९-१० 
  • प्रेरितों ७:१-२१

गुरुवार, 30 दिसंबर 2010

सही उद्देश्य

वह खिलाड़ी अपने अभ्यास और व्यायाम को काफी समय से छोड़ चुका था। अब उसने फिर से अभ्यास आरंभ करने की ठानी, इसलिये उसने अपने लिये व्यायाम का क्रम निर्धारित किया। पहले दिन उसने कई डंड बैठकें और हलकी दौड़ लगाई। अगले दिन, कुछ और अधिक डंड बैठकें, कुछ और लम्बी दौड़। तीसरे दिन फिर कुछ अधिक व्यायाम और कुछ और लम्बी दौड़। चौथे दिन जब हमारा यह खिलाड़ी सुबह उठा तो उसका गला बैठा हुआ था और तबियत खराब थी।

अब उसने अपनी स्थिति पर विचार किया और इस निष्कर्श पर पहुंचा कि यदि व्यायाम द्वारा इतना हांफने और तेज़ सांस लेने का यही नतीजा निकला तो वह व्यायाम नहीं करेगा, वह जैसा है वैसा ही भला!

अब एक दूसरा दृश्य देखते हैं, खिलाड़ी की जगह मसीही विश्वासी को रख देते हैं। इस विश्वासी को एहसास होता है कि उसने बहुत समय से परमेश्वर के साथ अपने संबंध को नज़रंदाज़ किया हुआ है, और इसे ठीक करने के लिये वह अपने आत्मिक व्यायाम - बाइबल पढ़ने और प्रार्थना करने का नया क्रम आरंभ करता है। यह आरंभ करने के कुछ दिनों पश्चात ही उसके जीवन में कुछ समस्याएं आ जातीं हैं। अब उसे किस निष्कर्श पर पहुंचना चाहिये? क्या उस खिलाड़ी के समान उसे सोच लेना चाहिये कि उसकी आत्मिक प्रगति का व्यायाम एक व्यर्थ प्रयास है जिससे उसे कुछ लाभ नहीं हुआ? कदापि नहीं!

हमें यह बात स्पष्ट रूप से समझ लेनी चाहिये कि हमारा बाइबल पढ़ना, प्रार्थना करना, परमेश्वर के लोगों की संगति करना आदि का उद्देश्य यह नहीं है कि हमें कष्ट और परेशानी से रहित जीवन मिल जाए। हम यह इसलिये करते हैं ताकि हम उस सिद्ध परमेश्वर के और निकट आ सकें, उसे और भली भांति जान सकें और उसकी इच्छाओं को पूरा कर सकें। प्रभु यीशु ने कभी अपने अनुयायीयों को यह आश्वासन नहीं दिया कि उन्हें संसार में कष्ट रहित जीवन और संसार के सब सुख मिलेंगे। प्रभु ने कहा "ये बातें मैं ने तुम से इसलिये कहीं कि तुम ठोकर न खाओ। वे तुम्हें आराधनालयों में से निकाल देंगे, वरन वह समय आता है, कि जो कोई तुम्हें मार डालेगा यह समझेगा कि मैं परमेश्वर की सेवा करता हूं। और यह वे इसलिये करेंगे कि उन्‍होंने न पिता को जाना है और न मुझे जानते हैं। परन्‍तु ये बातें मैं ने इसलिये तुम से कहीं, कि जब उन का समय आए तो तुम्हें स्मरण आ जाए, कि मैं ने तुम से पहिले ही कह दिया था:" (यूहन्ना १६:१-४) "मैं ने तेरा वचन उन्‍हें पहुंचा दिया है, और संसार ने उन से बैर किया, क्‍योंकि जैसा मैं संसार का नहीं, वैसे ही वे भी संसार के नहीं।" (यूहन्ना १७:१४) पौलुस ने लिखा "पर जितने मसीह यीशु में भक्ति के साथ जीवन बिताना चाहते हैं वे सब सताए जाएंगे" (२ तिमुथियुस ३:१२)।

मसीही विश्वासी के लिये परमेश्वर भक्ति का उद्देश्य सांसारिक उप्लब्धियां नहीं हैं "यदि हम केवल इसी जीवन में मसीह से आशा रखते हैं तो हम सब मनुष्यों से अधिक अभागे हैं" (१ कुरिन्थियों १५:१९)। परमेश्वर इस संसार में भी हमें बहुत कुछ दे सकता है और देता है, परन्तु हमारी आशा और प्रतिफल उस स्वर्ग के अनन्त जीवन के हैं जहां अन्ततः हमने जाना है। इसलिये "तो आओ, हम सच्‍चे मन, और पूरे विश्वास के साथ, और विवेक का दोष दूर करने के लिये हृदय पर छिड़काव लेकर, और देह को शुद्ध जल से धुलवाकर परमेश्वर के समीप जाएं। और अपनी आशा के अंगीकार को दृढ़ता से थामें रहें; क्‍योंकि जिस ने प्रतिज्ञा किया है, वह सच्‍चा है।" (इब्रानियों १०:२२, २३) - डेव ब्रैनन


परमेश्वर के वचन और प्रार्थना में विश्वासी जीवन की जड़ें धंसाने से ही जीवन में स्थिरता और शांति आती है।

तो आओ, हम सच्‍चे मन, और पूरे विश्वास के साथ, और विवेक का दोष दूर करने के लिये हृदय पर छिड़काव लेकर, और देह को शुद्ध जल से धुलवाकर परमेश्वर के समीप जाएं। - इब्रानियों १०:२२


बाइबल पाठ: इब्रानियों १०:२२-३९

तो आओ, हम सच्‍चे मन, और पूरे विश्वास के साथ, और विवेक का दोष दूर करने के लिये हृदय पर छिड़काव लेकर, और देह को शुद्ध जल से धुलवाकर परमेश्वर के समीप जाएं।
और अपनी आशा के अंगीकार को दृढ़ता से थामें रहें; क्‍योंकि जिस ने प्रतिज्ञा किया है, वह सच्‍चा है।
और प्रेम, और भले कामों में उकसाने के लिये एक दूसरे की चिन्‍ता किया करें।
और एक दूसरे के साथ इकट्ठा होना ने छोड़ें, जैसे कि कितनों की रीति है, पर एक दूसरे को समझाते रहें, और ज्यों ज्यों उस दिन को निकट आते देखो, त्यों त्यों और भी अधिक यह किया करो।
क्‍योंकि सच्‍चाई की पहिचान प्राप्‍त करने के बाद यदि हम जान बूझकर पाप करते रहें, तो पापों के लिये फिर कोई बलिदान बाकी नहीं।
हां, दण्‍ड का एक भयानक बाट जोहना और आग का ज्‍वलन बाकी है जो विरोधियों को भस्म कर देगा।
जब कि मूसा की व्यवस्था का न मानने वाला दो या तीन जनों की गवाही पर, बिना दया के मार डाला जाता है।
तो सोच लो कि वह कितने और भी भारी दण्‍ड के योग्य ठहरेगा, जिस ने परमेश्वर के पुत्र को पांवों से रौंदा, और वाचा के लोहू को जिस के द्वारा वह पवित्र ठहराया गया था, अपवित्र जाना है, और अनुग्रह की आत्मा का अपमान किया।
क्‍योंकि हम उसे जानते हैं, जिस ने कहा, कि पलटा लेना मेरा काम है, मैं ही बदला दूंगा: और फिर यह, कि प्रभु अपने लोगों का न्याय करेगा।
जीवते परमेश्वर के हाथों में पड़ना भयानक बात है।
परन्‍तु उन पहिले दिनों को स्मरण करो, जिन में तुम ज्योति पाकर दुखों के बड़े झमेले में स्थिर रहे।
कुछ तो यों, कि तुम निन्‍दा, और क्‍लेश सहते हुए तमाशा बने, और कुछ यों, कि तुम उन के साझी हुए जिन की र्दुदशा की जाती थी।
क्‍योंकि तुम कैदियों के दुख में भी दुखी हुए, और अपनी संपत्ति भी आनन्‍द से लुटने दी; यह जानकर, कि तुम्हारे पास एक और भी उत्तम और सर्वदा ठहरने वाली संपत्ति है।
सो अपना हियाव न छोड़ो क्‍योंकि उसका प्रतिफल बड़ा है।
क्‍योंकि तुम्हें धीरज धरना अवश्य है, ताकि परमेश्वर की इच्‍छा को पूरी करके तुम प्रतिज्ञा का फल पाओ।
क्‍योंकि अब बहुत ही थोड़ा समय रह गया है जब कि आने वाला आएगा, और देर न करेगा।
और मेरा धर्मी जन विश्वास से जीवित रहेगा, और यदि वह पीछे हट जाए तो मेरा मन उस से प्रसन्न न होगा।
पर हम हटने वाले नहीं, कि नाश हो जाएं पर विश्वास करने वाले हैं, कि प्राणों को बचाएं।

एक साल में बाइबल:
  • ज़क्कर्याह १३-१४
  • प्रकाशितवाक्य २१