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Friday, July 8, 2016

अनिश्चित समय


   कुछ वर्ष पहले आई आर्थिक मंदी के समय में अनेक लोगों की नौकरियाँ जाती रहीं; दुःख कि बात थी कि मेरे बहनोई भी उन में से एक थे। अपनी परिस्थितियों के बारे में लिखते समय मेरी बहन ने बताया कि उनके सामने अनिश्चितताएँ अवश्य थीं, परन्तु फिर भी उनके अन्दर एक शान्ति थी क्योंकि वे जानते थे कि परमेश्वर उनकी देखभाल कर रहा है।

   प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास करने वाले प्रत्येक जन अनिश्चितता के समय में भी शान्त और आश्वस्त रह सकते हैं क्योंकि हम मसीही विश्वासियों को परमेश्वर पिता की ओर से यह आश्वासन है कि हमारा परमेश्वर पिता हम से प्रेम करता है और हमारी देखभाल करता है (मत्ती 6:24-34)। हम अपनी प्रत्येक चिंता और आवश्यकता निःसंकोच, धन्यवाद के साथ उसके पास ला सकते हैं, इस भरोसे के कारण कि वह हमारी प्रत्येक आवश्यकता को पूरा करेगा और हमें अपनी शान्ति में बनाए रखेगा (फिलिप्पियों 4:6-7), जैसा कि प्रेरित पौलुस ने फिलिप्पी के मसीही विश्वासियों को अपनी पत्री में लिखा है। जब पौलुस यह कहता है कि "परमेश्वर की शान्ति जो सारी समझ से परे है..." तो यह दिखाता है कि इस अद्भुत शान्ति को हम चाहे किसी को समझा नहीं पाएं तो भी उसके परिणामों तथा उससे मिलने वाली मन और मस्तिष्क की सुरक्षा को अनुभव अवश्य कर सकते हैं।

   हमारी यह शान्ति इस भरोसे से आती है कि हमारा प्रभु परमेश्वर हमसे प्रेम करता है, हर बात में केवल हमारा भला ही चाहता है, और वही सभी परिस्थितियों और समयों पर नियंत्रण रखने तथा उनका संचालन करने वाला सर्वशक्तिमान परमेश्वर है। केवल वही है जो हर अनिश्चित समय में भी हमारी बेचैनी को शान्त कर सकता है, हमारे मन को आशा से भर सकता है और हर चुनौती एवं परिवर्तन की स्थिति में हमें आराम से रख सकता है। - पोह फैंग चिया


जिसका मन तुझ में धीरज धरे हुए हैं, उसकी तू पूर्ण शान्ति के साथ रक्षा करता है,
 क्योंकि वह तुझ पर भरोसा रखता है। - यशायाह 26:3

किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं। तब परमेश्वर की शान्‍ति, जो समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरिक्षत रखेगी। - फिलिप्पियों 4:6-7

बाइबल पाठ: मत्ती 6:24-34
Matthew 6:24 कोई मनुष्य दो स्‍वामियों की सेवा नहीं कर सकता, क्योंकि वह एक से बैर ओर दूसरे से प्रेम रखेगा, वा एक से मिला रहेगा और दूसरे को तुच्‍छ जानेगा; “तुम परमेश्वर और धन दोनों की सेवा नहीं कर सकते”। 
Matthew 6:25 इसलिये मैं तुम से कहता हूं, कि अपने प्राण के लिये यह चिन्‍ता न करना कि हम क्या खाएंगे? और क्या पीएंगे? और न अपने शरीर के लिये कि क्या पहिनेंगे? क्या प्राण भोजन से, और शरीर वस्‍त्र से बढ़कर नहीं? 
Matthew 6:26 आकाश के पक्षियों को देखो! वे न बोते हैं, न काटते हैं, और न खत्तों में बटोरते हैं; तौभी तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता उन को खिलाता है; क्या तुम उन से अधिक मूल्य नहीं रखते। 
Matthew 6:27 तुम में कौन है, जो चिन्‍ता कर के अपनी अवस्था में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है 
Matthew 6:28 और वस्‍त्र के लिये क्यों चिन्‍ता करते हो? जंगली सोसनों पर ध्यान करो, कि वै कैसे बढ़ते हैं, वे न तो परिश्रम करते हैं, न कातते हैं। 
Matthew 6:29 तौभी मैं तुम से कहता हूं, कि सुलैमान भी, अपने सारे वैभव में उन में से किसी के समान वस्‍त्र पहिने हुए न था। 
Matthew 6:30 इसलिये जब परमेश्वर मैदान की घास को, जो आज है, और कल भाड़ में झोंकी जाएगी, ऐसा वस्‍त्र पहिनाता है, तो हे अल्पविश्वासियों, तुम को वह क्योंकर न पहिनाएगा? 
Matthew 6:31 इसलिये तुम चिन्‍ता कर के यह न कहना, कि हम क्या खाएंगे, या क्या पीएंगे, या क्या पहिनेंगे? 
Matthew 6:32 क्योंकि अन्यजाति इन सब वस̴्