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Monday, June 18, 2018

विजय


      प्रति वर्ष 18 जून के दिन वॉटरलू, जो अब बेलजियम में है, के महायुद्ध को स्मरण किया जाता है, क्योंकि इस दिन ड्यूक ऑफ वेलिंगटन के नेतृत्व में बहुराष्ट्रीय सेनाओं ने नेपोलियन की फ्रांसीसी सेना को पराजित किया था। तब से किसी प्रबल विरोधी के हाथों पराजय की स्थिति का सामना करने के लिए वाक्याँश “वॉटरलू का सामना करना” प्रयोग किया जाता है।

      हमारे आत्मिक जीवनों के संबंध में कुछ लोगों की धारणा रहती है कि अन्ततः हम विफल हो ही जाएँगे; यह केवल समय की बात है, हमें अपने वॉटरलू का सामना तो करना ही पड़ेगा। परन्तु परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं कि प्रभु यीशु के अनुयायी, प्रेरित यूहन्ना ने इस निराशावादी दृष्टिकोण का खंडन करते हुए लिखा, “क्योंकि जो कुछ परमेश्वर से उत्पन्न हुआ है, वह संसार पर जय प्राप्त करता है, और वह विजय जिस से संसार पर जय प्राप्त होती है हमारा विश्वास है” (1 यूहन्ना 5:4)।

      यूहन्ना अपनी इस पहली पत्री में आत्मिक विजय के सन्देश का ताना-बाना बुनता है, और अपने पाठकों से आग्रह करता है कि वे इस नश्वर सँसार की अस्थायी बातों में मन न लगाएँ, क्योंकि वे सब शीघ्र ही नष्ट हो जाएँगी “तुम न तो संसार से और न संसार में की वस्‍तुओं से प्रेम रखो: यदि कोई संसार से प्रेम रखता है, तो उस में पिता का प्रेम नहीं है। क्योंकि जो कुछ संसार में है, अर्थात शरीर की अभिलाषा, और आंखों की अभिलाषा और जीविका का घमण्‍ड, वह पिता की ओर से नहीं, परन्तु संसार ही की ओर से है। और संसार और उस की अभिलाषाएं दोनों मिटते जाते हैं, पर जो परमेश्वर की इच्छा पर चलता है, वह सर्वदा बना रहेगा” (1 यूहन्ना 2:15-17)। वरन हमें परमेश्वर से प्रेम करना चाहिए और उसे प्रसन्न करना चाहिए क्योंकि परमेश्वर ने अपने अनुयायियों से अनन्त जीवन की प्रतिज्ञा की है: “और जिस की उसने हम से प्रतिज्ञा की वह अनन्त जीवन है” (2:25)।

      हमारे जीवनों में उतराव-चढ़ाव आ सकते हैं, और कुछ संघर्ष ऐसे भी हो सकते हैं जिनमें पराजय निश्चित सी लगे। परन्तु हम मसीही विश्वासियों को सदा इस बात का निश्चय रहना चाहिए कि मसीह यीशु में होकर अनतः विजय हमारी ही है; उसकी सामर्थ्य ने हमारे लिए यह निर्धारित और सुनिश्चित कर दिया है। - डेविड मैक्कैस्लैंड


परमेश्वर पर भरोसा रख कर आगे बढ़ते जाना ही समस्याओं का समाधान है।

कौन हम को मसीह के प्रेम से अलग करेगा? क्या क्लेश, या संकट, या उपद्रव, या अकाल, या नंगाई, या जोखिम, या तलवार? जैसा लिखा है, कि तेरे लिये हम दिन भर घात किए जाते हैं; हम वध होने वाली भेंडों के समान गिने गए हैं। परन्तु इन सब बातों में हम उसके द्वारा जिसने हम से प्रेम किया है, जयवन्त से भी बढ़कर हैं।– रोमियों 8: 35-37

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 5: 1-13
1 John 5:1 जिसका यह विश्वास है कि यीशु ही मसीह है, वह परमेश्वर से उत्पन्न हुआ है और जो कोई उत्पन्न करने वाले से प्रेम रखता है, वह उस से भी प्रेम रखता है, जो उस से उत्पन्न हुआ है।
1 John 5:2 जब हम परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, और उस की आज्ञाओं को मानते हैं, तो इसी से हम जानते हैं, कि परमेश्वर की सन्‍तानों से प्रेम रखते हैं।
1 John 5:3 और परमेश्वर का प्रेम यह है, कि हम उस की आज्ञाओं को मानें; और उस की आज्ञाएं कठिन नहीं।
1 John 5:4 क्योंकि जो कुछ परमेश्वर से उत्पन्न हुआ है, वह संसार पर जय प्राप्त करता है, और वह विजय जिस से संसार पर जय प्राप्त होती है हमारा विश्वास है।
1 John 5:5 संसार पर जय पाने वाला कौन है केवल वह जिस का यह विश्वास है, कि यीशु, परमेश्वर का पुत्र है।
1 John 5:6 यही है वह, जो पानी और लोहू के द्वारा आया था; अर्थात यीशु मसीह: वह न केवल पानी के द्वारा, वरन पानी और लोहू दोनों के द्वारा आया था।
1 John 5:7 और जो गवाही देता है, वह आत्मा है; क्योंकि आत्मा सत्य है।
1 John 5:8 और गवाही देने वाले तीन हैं; आत्मा, और पानी, और लोहू; और तीनों एक ही बात पर सहमत हैं।
1 John 5:9 जब हम मनुष्यों की गवाही मान लेते हैं, तो परमेश्वर की गवाही तो उस से बढ़कर है; और परमेश्वर की गवाही यह है, कि उसने अपने पुत्र के विषय में गवाही दी है।
1 John 5:10 जो परमेश्वर के पुत्र पर विश्वास करता है, वह अपने ही में गवाही रखता है; जिसने परमेश्वर को प्रतीति नहीं की, उसने उसे झूठा ठहराया; क्योंकि उसने उस गवाही पर विश्वास नहीं किया, जो परमेश्वर ने अपने पुत्र के विषय में दी है।
1 John 5:11 और वह गवाही यह है, कि परमेश्वर ने हमें अनन्त जीवन दिया है: और यह जीवन उसके पुत्र में है।
1 John 5:12 जिस के पास पुत्र है, उसके पास जीवन है; और जिस के पास परमेश्वर का पुत्र नहीं, उसके पास जीवन भी नहीं है।
1 John 5:13 मैं ने तुम्हें, जो परमेश्वर के पुत्र के नाम पर विश्वास करते हो, इसलिये लिखा है; कि तुम जानो, कि अनन्त जीवन तुम्हारा है।
                                                 

एक साल में बाइबल: 

  • नहेम्याह 10-11
  • प्रेरितों 4:1-22