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मंगलवार, 25 जून 2024

Growth through God’s Word / परमेश्वर के वचन से बढ़ोतरी – 111

 

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आरम्भिक बातें – 72

मरे हुओं का जी उठना – 7


प्रभु यीशु का पुनरुत्थान – परमेश्वर की सामर्थ्य

 

हम इब्रानियों 6:1-2 में दी गई छः आरम्भिक बातों में से पाँचवीं, “मरे हुओं में से जी उठने” के बारे में सीख रहे हैं। हम देख चुके हैं कि क्योंकि प्रभु यीशु मृतकों में से जी उठा है, इस लिए उस के पुनरुत्थान ने वास्तविकता में नया-जन्म पाए हुए प्रत्येक मसीही विश्वासी को यह आश्वासन प्रदान किया है कि वह भी मृतकों में से जी उठेगा, और सदा काल के लिए प्रभु परमेश्वर के साथ स्वर्ग में रहेगा। प्रभु के, और मसीही विश्वासी के पुनरुत्थान और अनन्तकालीन आशीषों के बारे में लोगों के मनों में सन्देह उत्पन्न करने के लिए, और उन्हें बहकाने-भरमाने के लिए, शैतान ने पुनरुत्थान के विरुद्ध बहुत सी झूठी कहानियाँ बना कर फैला रखीं है। इस लिए, प्रत्येक मसीही विश्वासी के लिए यह आवश्यक है कि वह न केवल प्रभु के पुनरुत्थान, बल्कि अपने अनन्त भविष्य के बारे में भी सीखे; और साथ ही प्रभु के तथा मसीही विश्वासियों के जिलाए जाने के बारे में शैतान द्वारा फैलाई गई झूठी बातों का भी खण्डन कर सके। हम प्रभु के पुनरुत्थान के बारे में तीन शीर्षकों के अन्तर्गत देख रहे हैं: पवित्र शास्त्र में उस की भविष्यवाणी की गई है; यह एक प्रमाणित घटना है; यह परमेश्वर की सामर्थ्य है। हम इन तीन में से पहले दो शीर्षकों के बारे में देख चुके हैं। आज हम तीसरे शीर्षक, प्रभु यीशु का पुनरुत्थान प्रत्येक मसीही विश्वासी के जीवन में परमेश्वर की सामर्थ्य है, के बारे में देखेंगे।

पौलुस ने फिलिप्पी में स्थित कलीसिया को लिखी अपनी पत्री में लिखा, “और मैं उसको और उसके मृत्युंजय की सामर्थ्य को, और उसके साथ दुखों में सहभागी होने के मर्म को जानूँ, और उस की मृत्यु की समानता को प्राप्त करूं। ताकि मैं किसी भी रीति से मरे हुओं में से जी उठने के पद तक पहुंचूं” (फिलिप्पियों 3:10-11); वह मसीह के पुनरुत्थान की सामर्थ्य को जानना और उस पद तक पहुंचना चाहता था। शैतान, अदन की वाटिका में, आदम और हव्वा को पाप करने के लिए फुसलाने के द्वारा, उन के जीवनों में, तथा उन में होकर समस्त मानवजाति में मृत्यु को ले आया “इसलिये जैसा एक मनुष्य के द्वारा पाप जगत में आया, और पाप के द्वारा मृत्यु आई, और इस रीति से मृत्यु सब मनुष्यों में फैल गई, इसलिये कि सब ने पाप किया” (रोमियों 5:12)। यह मृत्यु, अर्थात बिगाड़ना या सड़ना और फिर नष्ट हो जाना, सम्पूर्ण सृष्टि पर भी आ गई; सृष्टि भी बिगड़ने, सड़ने, और नष्ट हो जाने की प्रक्रिया में आ गई। परन्तु एक बार जब “परमेश्वर के पुत्र” प्रकट हो जाएँगे, अर्थात वे जो प्रभु यीशु में विश्वास लाने के द्वारा परमेश्वर की सन्तान बन गए हैं (यूहन्ना 1:12-13), तब फिर उन के साथ ही, सृष्टि भी उसे भी प्रभावित करने वाली इस मृत्यु से छुड़ा ली जाएगी (रोमियों 8:19-22)। प्रभु यीशु का पुनरुत्थान यह दिखाता है कि मृत्यु की यह परमेश्वर की सृष्टि को सड़ाने, बिगाड़ने, और नष्ट करने वाली सामर्थ्य का अन्त कर दिया गया है। प्रभु यीशु को जिला उठाने वाली परमेश्वर की सामर्थ्य के द्वारा, जैसे ही मसीही विश्वासी मरे हुओं में से जिलाए जाएंगे, और अपनी महिमित देह में आ जाएँगे, उसी पल से मृत्यु और नष्ट करने की सामर्थ्य समाप्त हो जाएगी। प्रभु यीशु मसीह, और उस में किये गए विश्वास के द्वारा, मसीही विश्वासी विजयी होंगे। क्योंकि प्रभु यीशु के पुनरुत्थान के द्वारा मसीही विश्वासियों को यह होने का निश्चय है, इसलिए उन्हें निरन्तर प्रभु के काम में लगे रहना चाहिए (1 कुरिन्थियों 15:52-58)।

दूसरे, अपने पुनरुत्थान के द्वारा प्रभु यीशु मसीह ने अपने अनुयायियों के लिए मृत्यु के भय और पकड़ को तोड़ डाला है, “इसलिये जब कि लड़के मांस और लहू के भागी हैं, तो वह आप भी उन के समान उन का सहभागी हो गया; ताकि मृत्यु के द्वारा उसे जिसे मृत्यु पर शक्ति मिली थी, अर्थात शैतान को निकम्मा कर दे। और जितने मृत्यु के भय के मारे जीवन भर दासत्व में फंसे थे, उन्हें छुड़ा ले” (इब्रानियों 2:14-15)। अब, इस के बाद से मृत्यु डरने की कोई बात नहीं रह गई है, क्योंकि प्रत्येक मसीही विश्वासी, प्रत्येक नया-जन्म पाए हुए विश्वासी के लिए, मृत्यु एक द्वार है जो उसे अनन्तकाल के परम आनन्द और आशीषों के स्थान, परमेश्वर के साथ स्वर्ग में रहने के लिए प्रवेश प्रदान करता है। पौलुस ने कहा, “क्योंकि मेरे लिये जीवित रहना मसीह है, और मर जाना लाभ है। पर यदि शरीर में जीवित रहना ही मेरे काम के लिये लाभदायक है तो मैं नहीं जानता, कि किस को चुनूं। क्योंकि मैं दोनों के बीच अधर में लटका हूं; जी तो चाहता है कि कूच कर के मसीह के पास जा रहूं, क्योंकि यह बहुत ही अच्छा है” (फिलिप्पियों 1:21-23); और जैसा उसने कुरिन्थुस की कलीसिया को लिखा, कि वह अपने शरीर को छोड़ कर प्रभु के पास उपस्थित होने को अधिक उत्तम समझता है “सो हम सदा ढाढ़स बान्धे रहते हैं और यह जानते हैं; कि जब तक हम देह में रहते हैं, तब तक प्रभु से अलग हैं। क्योंकि हम रूप को देखकर नहीं, पर विश्वास से चलते हैं। इसलिये हम ढाढ़स बान्धे रहते हैं, और देह से अलग हो कर प्रभु के साथ रहना और भी उत्तम समझते हैं” (2 कुरिन्थियों 5:6-8)।

प्रभु यीशु की मृत्यु और पुनरुत्थान ने उस के प्रत्येक शिष्य के लिए यह सुनिश्चित कर दिया है कि अब मृत्यु उन के लिए डरने की बात नहीं है, वरन ऐसी बात है जिस की प्रतीक्षा रहती है। अब शैतान मृत्यु का डर दिखा कर उन्हें उन के मसीही जीवनों में घबरा और गिरा नहीं सकता है। सिवाए बाइबल के अनुसार के मसीही विश्वास के, यह आश्वासन, और किसी को कहीं भी उपलब्ध नहीं है, किसी भी अन्य विश्वास पद्धति, या मान्यता, या धर्म में नहीं, ईसाई या मसीही धर्म में भी नहीं। यह एक ऐसी बात है जो केवल मसीह यीशु में विश्वास करने के द्वारा मिलने वाली पापों की क्षमा और प्रभु को समर्पित जीवन जीने, उस के तथा उस के वचन, बाइबल, के आज्ञाकारी होने के द्वारा परमेश्वर के साथ अनन्त जीवन के आश्वासन के साथ ही आती है।

अगले लेख में हम प्रभु यीशु के पुनरुत्थान के व्यावहारिक अभिप्रायों को देखेंगे।

यदि आपने प्रभु की शिष्यता को अभी तक स्वीकार नहीं किया है, तो अपने अनन्त जीवन और स्वर्गीय आशीषों को सुनिश्चित करने के लिए अभी प्रभु यीशु के पक्ष में अपना निर्णय कर लीजिए। जहाँ प्रभु की आज्ञाकारिता है, उसके वचन की बातों का आदर और पालन है, वहाँ प्रभु की आशीष और सुरक्षा भी है। प्रभु यीशु से अपने पापों के लिए क्षमा माँगकर, स्वेच्छा से तथा सच्चे मन से अपने आप को उसकी अधीनता में समर्पित कर दीजिए - उद्धार और स्वर्गीय जीवन का यही एकमात्र मार्ग है। आपको स्वेच्छा और सच्चे मन से प्रभु यीशु मसीह से केवल एक छोटी प्रार्थना करनी है, और साथ ही अपना जीवन उसे पूर्णतः समर्पित करना है। आप यह प्रार्थना और समर्पण कुछ इस प्रकार से भी कर सकते हैं, “प्रभु यीशु, मैं अपने पापों के लिए पश्चातापी हूँ, उनके लिए आप से क्षमा माँगता हूँ। मैं आपका धन्यवाद करता हूँ कि आपने मेरे पापों की क्षमा और समाधान के लिए उन पापों को अपने ऊपर लिया, उनके कारण मेरे स्थान पर क्रूस की मृत्यु सही, गाड़े गए, और मेरे उद्धार के लिए आप तीसरे दिन जी भी उठे, और आज जीवित प्रभु परमेश्वर हैं। कृपया मुझे और मेरे पापों को क्षमा करें, मुझे अपनी शरण में लें, और मुझे अपना शिष्य बना लें। मैं अपना जीवन आप के हाथों में समर्पित करता हूँ।” सच्चे और समर्पित मन से की गई आपकी एक प्रार्थना आपके वर्तमान तथा भविष्य को, इस लोक के और परलोक के जीवन को, अनन्तकाल के लिए स्वर्गीय एवं आशीषित बना देगी।


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English Translation


The Elementary Principles – 72

Resurrection of the Dead – 7


Lord Jesus’s Resurrection – God’s Power

 

We are learning about “Resurrection of the Dead,” the fifth of the six elementary principles given in Hebrews 6:1-2. We have seen that since the Lord Jesus Christ has risen from the dead, therefore, His resurrection has provided every truly Born-Again Christian Believer the assurance that he too will be resurrected from the dead, and will be with the Lord God forever in heaven. To create doubts in the hearts of people about the Lord’s and the Christian Believer’s resurrection and eternal blessings, and to mislead them, Satan has spread many false stories against resurrection. Therefore, it is necessary for every Christian Believer to learn not only about the Lord Jesus’s resurrection, but also about their own eternal future; and also, be prepared to counter the false stories spread by Satan against the Lord’s and the Believer’s resurrection. We are studying about the Lord’s resurrection under three headings: it is prophesied in the Scriptures; it is a proven event; it is the power of God. We have seen the first two of these three headings. Today we will consider the third heading, that the resurrection of the Lord Jesus is the power of God in the life of every truly Born-Again Christian Believer.

Paul says in his letter to the Philippians - “that I may know Him [Lord Jesus] and the power of His resurrection, and the fellowship of His sufferings, being conformed to His death, if, by any means, I may attain to the resurrection from the dead” (Philippians 3:10-11); he wanted to know and attain to the power of Christ's Resurrection. Through enticing Adam and Eve to sin in the Garden of Eden, Satan brought in death into their lives, and through them into all of mankind “Therefore, just as through one man sin entered the world, and death through sin, and thus death spread to all men, because all sinned” (Romans 5:12). This death, i.e., decaying and passing away also affected the whole of creation, the creation also came under the bondage of corruption, i.e., under the process of decaying away and being destroyed. But once the “sons of God” are revealed, i.e. the children of God by faith in the Lord Jesus (John 1:12-13), then along with them, the creation will also be delivered from the corruption affecting it (Romans 8:19-22). The resurrection of the Lord Jesus demonstrates that the power of death, of corrupting and destroying God’s creation, has been brough to an end. The moment the Believers, through the same power of God that raised up the Lord Jesus, will be raised from the dead, and be transformed into their glorious bodies, the reign of death and decay will come to an end. Through the Lord Jesus Christ, and faith in Him, the Believers will come out victorious; since the Christian Believers have this hope and assurance from God, guaranteed by the resurrection of the Lord Jesus, therefore they should continually “abound in the work of the Lord” (1 Corinthians 15:52-58).

Secondly, through His Resurrection Christ Jesus has broken the fear and hold of death for His followers “Inasmuch then as the children have partaken of flesh and blood, He Himself likewise shared in the same, that through death He might destroy him who had the power of death, that is, the devil, and release those who through fear of death were all their lifetime subject to bondage” (Hebrews 2:14-15). No longer is death something to be feared, because for every Believer of Christ, for every Born-Again person, death is a door that ushers them into eternal bliss and blessings, into a place and eternity with God. Paul says “For to me, to live is Christ, and to die is gain. But if I live on in the flesh, this will mean fruit from my labor; yet what I shall choose I cannot tell. For I am hard pressed between the two, having a desire to depart and be with Christ, which is far better” (Philippians 1:21-23); and as he writes to the Corinthian Church that he is always well pleased to leave this body and be present with the Lord “So we are always confident, knowing that while we are at home in the body we are absent from the Lord. For we walk by faith, not by sight. We are confident, yes, well pleased rather to be absent from the body and to be present with the Lord” (2 Corinthians 5:6-8).  

The death and Resurrection of Lord Jesus has ensured that for every one of His disciples, death is no longer something to be feared, but something to be eagerly looked forward to. Satan can no longer use the fear of death to cause them to falter and fall in their Christian life. Except for the Biblical Christian Faith, this assurance is not available to anyone, in any other faith, belief system, or religion; not even in the Christian religion. This is something that only comes because of the assurance of forgiveness of sins and promise of eternal life with God, through faith in the Lord Jesus, submission to Him, and living in obedience to Him and His Word the Bible.

In the next article we will consider the practical implications of the resurrection of the Lord Jesus.

If you have not yet accepted the discipleship of the Lord, make your decision in favor of the Lord Jesus now to ensure your eternal life and heavenly blessings. Where there is obedience to the Lord, where there is respect and obedience to His Word, there is also the blessing and protection of the Lord. Repenting of your sins, and asking the Lord Jesus for forgiveness of your sins, voluntarily and sincerely, surrendering yourself to Him - is the only way to salvation and heavenly life. You only have to say a short but sincere prayer to the Lord Jesus Christ willingly and with a penitent heart, and at the same time completely commit and submit your life to Him. You can also make this prayer and submission in words something like, “Lord Jesus, I am sorry for my sins and repent of them. I thank you for taking my sins upon yourself, paying for them through your life.  Because of them you died on the cross in my place, were buried, and you rose again from the grave on the third day for my salvation, and today you are the living Lord God and have freely provided to me the forgiveness, and redemption from my sins, through faith in you. Please forgive my sins, take me under your care, and make me your disciple. I submit my life into your hands." Your one prayer from a sincere and committed heart will make your present and future life, in this world and in the hereafter, heavenly and blessed for eternity.

 

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शनिवार, 17 जुलाई 2021

विजय

 

          जब 2016 में शिकागो कबस की बेसबॉल टीम ने एक शताब्दी से भी अधिक में पहली बार विश्व सीरीज़ जीती, तो कुछ लोगों का कहना है कि उसके उपलक्ष्य में निकाले जुलूस को देखने और उस चैम्पियनशिप का जश्न मनाने के लिए पचास लाख से भी अधिक लोग जुलूस के मार्ग के किनारे खड़े हुए थे।

          विजय के जुलूस कोई आधुनिक आविष्कार नहीं हैं। एक प्रसिद्ध प्राचीन जुलूस रोमी विजय का जुलूस हुआ करता था, जिसमें विजयी सेनापति अपनी सेना और युद्ध-बंदियों के जुलूस को भीड़ से भरे मार्गों से होकर लिए चलते थे।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में कुछ ऐसे ही जुलूस का ध्यान शायद पौलुस के मन में भी था जब उसने कुरिन्थुस के चर्च को लिखी अपनी पत्री में परमेश्वर का धन्यवाद व्यक्त किया, मसीही विश्वासियों को मसीह के जय के उत्सव में लिए फिरने के लिए (2 कुरिन्थियों 2:14)। मुझे यह बहुत अचंभित तथा आकर्षक लगता है कि इस चित्रण में मसीही विश्वासियों को जुलूस के बन्दियों के समान दिखाया गया है। लेकिन मसीही विश्वासी होने के नाते, हम बंदी नहीं हैं, वरन स्वेच्छा से हमारे जयवंत और पुनर्जीवित हो उठे प्रभु को समर्पण करने वाले उसके अनुयायी हैं, जो उसके पीछे और उसके कहे के अनुसार, उसके बताए मार्ग पर चल रहे हैं। हम मसीही जश्न मनाते हैं कि मसीह की विजय के कारण, हम उसके साथ उसके उस राज्य के वारिस हैं जो वह बना रहा है, और अधोलोक के फाटक भी उस राज्य पर कभी प्रबल नहीं होंगे (मत्ती 16:18)।

          जब हम क्रूस पर मसीह की विजय के बारे में, और उसके कारण मसीही विश्वासियों को मिलने वाली स्वतंत्रता के बारे में बात करते हैं, तो हम उसके ज्ञान के सुगन्ध को हर जगह फैलाते हैं (2 कुरिन्थियों 2:14)। और लोगों को यह गन्‍ध उद्धार की मनोहर सुगन्ध लगे, या अपनी पराजय की गन्‍ध लगे, यह अदृश्य शक्तिशाली गन्‍ध हर स्थान पर विद्यमान है।

          जब हम मसीह का अनुसरण करते हैं, तो हम उसके पुनरुत्थान की विजय को भी घोषित करते हैं। यही विजय संसार को उद्धार उपलब्ध करवाती है। - लिसा सामरा

 

प्रभु यीशु हमारा विजयी सम्राट है।


और मैं[यीशु] भी तुझ से कहता हूं, कि तू पतरस है; और मैं इस पत्थर पर अपनी कलीसिया बनाऊंगा: और अधोलोक के फाटक उस पर प्रबल न होंगे। - मत्ती 16:18

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 2:14-17

2 कुरिन्थियों 2:14 परन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, जो मसीह में सदा हम को जय के उत्सव में लिये फिरता है, और अपने ज्ञान का सुगन्ध हमारे द्वारा हर जगह फैलाता है।

2 कुरिन्थियों 2:15 क्योंकि हम परमेश्वर के निकट उद्धार पाने वालों, और नाश होने वालों, दोनों के लिये मसीह के सुगन्ध हैं।

2 कुरिन्थियों 2:16 कितनों के लिये तो मरने के निमित्त मृत्यु की गन्‍ध, और कितनों के लिये जीवन के निमित्त जीवन की सुगन्ध, और इन बातों के योग्य कौन है?

2 कुरिन्थियों 2:17 क्योंकि हम उन बहुतों के समान नहीं, जो परमेश्वर के वचन में मिलावट करते हैं; परन्तु मन की सच्चाई से, और परमेश्वर की ओर से परमेश्वर को उपस्थित जानकर मसीह में बोलते हैं।

 

एक साल में बाइबल: 

  • भजन 18-19
  • प्रेरितों 20:17-38

बुधवार, 9 सितंबर 2020

सुगन्ध

 

         गर्म और धूल भरे वातावरण में बॉब बस की यात्रा करके अपने घर से दूर एक शहर को गया था। वह दिन भर की लम्बी यात्रा से बहुत थक गया था, और धन्यवादी थी कि वह उस इलाके में रहने वाले कुछ अपने मित्रों के मित्रों के साथ भोजन करने पाएगा। उन लोगों ने बॉब का स्वागत किया, और तुरंत ही उसे उन लोगों से मिलकर एक शान्ति और आराम का अनुभव हुआ। उसे लगा कि मानो वह घर में है, सुरक्षित है, आराम से है, और वे लोग उसकी कद्र करते हैं।

         बाद में इस बात पर विचार करते समय कि उसे उस अजनबी स्थान और लोगों के बीच तुरंत ही इतनी शान्ति कैसे मिल गई, बॉब को परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस द्वारा कोरिन्थ के मसीही विश्वासियों को लिखी गई उसकी दूसरी पत्री में उत्तर मिल गया। उस पत्री में पौलुस ने मसीह के अनुयायियों में “मसीह की सुगन्ध” होने की बात कही, और तुरंत ही बॉब ने अपने आप से कहा, “हाँ! यही बात थी” उस दिन उसे अपने मेजबानों से मसीह की सुगन्ध आई थी, और इससे उसके मन को शान्ति मिली थी।

         पौलुस जब लिखता है कि परमेश्वर अपने लोगों को मसीह में “जय के उत्सव” में लिए फिरता है  और उनमें होकर अपने ज्ञान की सुगन्ध फैलाता है, तो वह उस समय की एक प्रथा को अपनी लिखी बात का आधार बना रहा था। जब सेना विजयी होकर युद्ध से लौटती थी, तो उनके विजय-उत्सव का जलूस जिन मार्गों से होकर जाता था, वहाँ सुगन्धित पदार्थ जलाए जाते थे। उस विजयी सेना के समर्थक उस सुगन्ध से आनन्दित होते थे। पौलुस कहता है कि इसी प्रकार से परमेश्वर के लोग अपने साथ एक सुगन्ध लिए चलते हैं जिसकी अनुभूति अन्य मसीही विश्वासियों को होती है, उन्हें आनन्दित करती है। यह कोई ऐसी बात नहीं है जिसे हम अपने से उत्पन्न करते हैं; परन्तु यह परमेश्वर द्वारा हमें प्रदान की जाती है जब वह हमें उसके ज्ञान को औरों में फैलाने के लिए प्रयोग करता है।

         बॉब मेरे पिता हैं, और वह दूर की यात्रा चालीस से भी अधिक वर्ष पहले की गई थी, परन्तु वे आज तक उसे भूले नहीं हैं। वे आज भी उन लोगों की यह कहानी सुनाते हैं – मसीह की सुगन्ध वाले लोगों की। - एमी पीटरसन

 

आपके लिए, कौन मसीह की सुगन्ध को फैलाने वाला है?


और प्रेम में चलो; जैसे मसीह ने भी तुम से प्रेम किया; और हमारे लिये अपने आप को सुखदायक सुगन्ध के लिये परमेश्वर के आगे भेंट कर के बलिदान कर दिया। - इफिसियों 5:2

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 2:14-17

2 कुरिन्थियों 2:14 परन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, जो मसीह में सदा हम को जय के उत्सव में लिये फिरता है, और अपने ज्ञान का सुगन्ध हमारे द्वारा हर जगह फैलाता है।

2 कुरिन्थियों 2:15 क्योंकि हम परमेश्वर के निकट उद्धार पाने वालों, और नाश होने वालों, दोनों के लिये मसीह के सुगन्ध हैं।

2 कुरिन्थियों 2:16 कितनों के लिये तो मरने के निमित्त मृत्यु की गन्‍ध, और कितनों के लिये जीवन के निमित्त जीवन की सुगन्ध, और इन बातों के योग्य कौन है?

2 कुरिन्थियों 2:17 क्योंकि हम उन बहुतों के समान नहीं, जो परमेश्वर के वचन में मिलावट करते हैं; परन्तु मन की सच्चाई से, और परमेश्वर की ओर से परमेश्वर को उपस्थित जानकर मसीह में बोलते हैं।

 

एक साल में बाइबल: 

  • नीतिवचन 6-7
  • 2 कुरिन्थियों 2

मंगलवार, 16 जून 2020

कहा है


     छुट्टियों के एक समय में, मैंने और मेरे पति ने एक नदी में शांत नौका विहार करने का निर्णय किया। हमने नौका विहार के विज्ञापन देखे, एक नौका विहार को चुना, उसके लिए पैसे भरे, और नौका विहार करवाने वालों के कहे के अनुसार हम यात्रा के आरम्भ स्थान पर पहुँच गए। वहाँ पहुँच कर हमें ज्ञात हुआ कि उनके द्वारा दिए गए विज्ञापन के विपरीत, नौका विहार में कुछ दूरी तेज़ बहते और उछलते हुए पानी की भी थी। उन्होंने मेरे पति को नौका के चप्पू चलाने और नाव को संभालने की कुछ मूल बातें सिखाईं, और हमें आश्वस्त किया कि वे लोग हमें सुरक्षित हमारे विहार के अंतिम छोर तक ले जाएँगे; हम ने धन्यावद किया कि अनुभवी नौका चालक हमारे साथ थे। हमने अपनी जीवन रक्षक जैकेट पहनीं, और हम नदी में चल दिए; तेज़ बहाव के स्थान पर मैं कसकर नाव के प्लास्टिक के हैंडल को पकड़े हुए चिल्लाती रही, जब तक कि हम शांत बहाव में पहुँच कर किनारे नहीं लग गए। नाव से उतर कर हमने अपने कपड़े निचोड़े, पर्स में से पानी निकाला, और यद्यपि वह यात्रा हमारी अपेक्षा के अनुसार तो नहीं रही थी, फिर भी हम एक-दूसरे को देख कर हँस पड़े।

     उस नौका विहार के विज्ञापन के विपरीत, जिसमें उन लोगों ने उस विहार से सम्बंधित एक मुख्य बात नहीं बताई थी, परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु ने अपने शिष्यों को यह स्पष्ट बता दिया था कि भविष्य में उनके लिए कठिन दिन रखे हुए हैं। प्रभु ने उन से कहा दिया कि वह स्वयं भी मारा जाएगा और उसका पुनरुत्थान होगा, और आते समय में वे भी सताए जाएँगे, मारे जाएँगे। साथ ही उसने उन्हें अपने विश्वासयोग्य होने का भी आश्वासन दिया, और इसका भी कि वह उन्हें एक चिरस्थाई विजय और अनानात्कालीन आशा में ले जाएगा (यूहन्ना 16:16-33)।

     यदि प्रभु का अनुसरण करते हुए जीवन सरल होता तो बहुत अच्छा होता, परन्तु प्रभु ने अपने अनुयायियों को यह स्पष्ट बता दिया है कि उन्हें कठिनाइयों और विरोधों का सामना करना पड़ेगा। हमारी ये परीक्षाएँ परमेश्वर द्वारा हमारे लिए बनाई गई योजनाओं को न तो परिभाषित करेंगी, न ही उन्हें सीमित करेंगी, और न ही उन्हें बिगाडेंगी या नष्ट करेंगी। प्रभु यीशु के पुनरुत्थान और मृत्यु पर विजय ने हमारे लिए अनन्त विजय सुनिश्चित कर दी है, और प्रभु ने हम से यही कहा है। - होकिटिल डिक्सन

 

प्रभु यीशु सबसे कठिन समयों में भी हमारे साथ रहता है।


हे मृत्यु तेरी जय कहां रही? हे मृत्यु तेरा डंक कहां रहा? मृत्यु का डंक पाप है; और पाप का बल व्यवस्था है। परन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, जो हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा हमें जयवन्‍त करता है। - 1 कुरिन्थियों 15:55-57

बाइबल पाठ: यूहन्ना 16:25-33

यूहन्ना 16:25 मैं ने ये बातें तुम से दृष्‍टान्‍तों में कही हैं, परन्तु वह समय आता है, कि मैं तुम से दृष्‍टान्‍तों में और फिर नहीं कहूंगा परन्तु खोल कर तुम्हें पिता के विषय में बताऊंगा।

यूहन्ना 16:26 उस दिन तुम मेरे नाम से मांगोगे, और मैं तुम से यह नहीं कहता, कि मैं तुम्हारे लिये पिता से बिनती करूंगा।

यूहन्ना 16:27 क्योंकि पिता तो आप ही तुम से प्रीति रखता है, इसलिये कि तुम ने मुझ से प्रीति रखी है, और यह भी प्रतीति की है, कि मैं पिता कि ओर से निकल आया।

यूहन्ना 16:28 मैं पिता से निकलकर जगत में आया हूं, फिर जगत को छोड़कर पिता के पास जाता हूं।

यूहन्ना 16:29 उसके चेलों ने कहा, देख, अब तो तू खोल कर कहता है, और कोई दृष्‍टान्‍त नहीं कहता।

यूहन्ना 16:30 अब हम जान गए, कि तू सब कुछ जानता है, और तुझे प्रयोजन नहीं, कि कोई तुझ से पूछे, इस से हम प्रतीति करते हैं, कि तू परमेश्वर से निकला है।

यूहन्ना 16:31 यह सुन यीशु ने उन से कहा, क्या तुम अब प्रतीति करते हो?

यूहन्ना 16:32 देखो, वह घड़ी आती है वरन आ पहुंची कि तुम सब तित्तर बित्तर हो कर अपना अपना मार्ग लोगे, और मुझे अकेला छोड़ दोगे, तौभी मैं अकेला नहीं क्योंकि पिता मेरे साथ है।

यूहन्ना 16:33 मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि तुम्हें मुझ में शान्‍ति मिले; संसार में तुम्हें क्‍लेश होता है, परन्तु ढाढ़स बांधो, मैं ने संसार को जीत लिया है।    

 

एक साल में बाइबल: 

  • नहेम्याह 4-6
  • प्रेरितों 2:22-47


शनिवार, 1 फ़रवरी 2020

प्रेम



      जब एक विज्ञापन बनाने वाले ने माइकलएंजलो द्वारा संगमरमर में बनाई गई दाऊद की मूर्ति के चित्र में फेर बदल करके दिखाया तो इटली की सरकार और संग्रहालय के अद्धिकारियों ने आपत्ति की। दाऊद को उसके गोफन के स्थान पर एक सैनिक के समान कंधे पर राइफल लिए हुए दिखाना उस कलाकृति का उल्लंघन करना था – मानो उस पर हथौड़े से प्रहार, या उससे भी बदतर कुछ किया गया।

      प्रथम शताब्दी के यरूशलेम में दाऊद को एक चरवाहे-भजनकार और सैनिक-राजा के रूप में स्मरण किया जाता था, और इस्राएल के लोगों की महानतम आशाएं इस्राएल के उस प्रीय जन के वंशज से गहराई से जुड़ी हुई थीं। परमेश्वर के वचन बाइबल में इस्राएल के भविष्यद्वाकताओं ने भविष्यवाणी की थी कि दाऊद का वंशज इस्राएल के शत्रुओं को सदा के लिए पराजित कर देगा। इसलिए जब सदियों के बाद, जब भीड़ ने प्रभु यीशु मसीह का “दाऊद की संतान” (मत्ती 21:6-9) के रूप में स्वागत किया, तो उनकी आशा थी कि वह रोमी साम्राज्य के विरुद्ध विद्रोह का नेतृत्व करेगा और उनकी सत्ता को पलट देगा। परन्तु प्रभु यीशु ने मंदिर में जाकर वहाँ व्यापार करने वालों की चौकियाँ पलट दीं जिससे परमेश्वर पिता का वह भवन सभी के लिए प्रार्थना का घर बन कर रहे। यह वो मसीहा और “दाऊद की संतान” नहीं था जिसकी उन्हें प्रतीक्षा थी। इसलिए बिना इस बात पर ध्यान किए कि वे क्या कर रहे हैं, उन्होंने प्रभु को पकड़कर रोमी शासकों के हवाले कर दिया जिससे इस्राएल की वास्तविक महिमा, प्रभु यीशु, के हाथों और पांवों पर हथोड़े चला कर उसे कीलों से क्रूस पर ठोक दिया जाए।

      प्रभु ने भी उन्हें रोकने के स्थान पर, अपने आप को क्रूस पर ठोके जाने, अपने आप को अपमानित किया जाने, और अपना स्वरूप बिगाड़े दिया जाने दिया। प्रभु यीशु के मृतकों में से पुनरुत्थान के द्वारा ही लोगों को पता चला कि वास्तव में दाऊद की उस संतान ने शत्रु शैतान की सभी योजनाओं को, सभी मनुष्यों के प्रति अपने प्रेम और बलिदान के द्वारा, पराजित कर दिया, और अपने अनुयायियों को यह बीड़ा दिया कि वे सारे संसार में जाकर उनके इस प्रेम और उद्धार के सुसमाचार को लोगों को बताएं। - मार्ट डी हॉन

प्रभु यीशु दिखाते हैं कि परमेश्वर सदा ही हमारी अपेक्षाओं से कहीं बढ़कर अच्छा रहता है।

और जो भीड़ आगे आगे जाती और पीछे पीछे चली आती थी, पुकार पुकार कर कहती थी, कि दाऊद की सन्तान को होशाना; धन्य है वह जो प्रभु के नाम से आता है, आकाश में होशाना। - मत्ती 21:9

बाइबल पाठ: मत्ती 21:12-16
Matthew 21:12 यीशु ने परमेश्वर के मन्दिर में जा कर, उन सब को, जो मन्दिर में लेन देन कर रहे थे, निकाल दिया; और सर्राफों के पीढ़े और कबूतरों के बेचने वालों की चौकियां उलट दीं।
Matthew 21:13 और उन से कहा, लिखा है, कि मेरा घर प्रार्थना का घर कहलाएगा; परन्तु तुम उसे डाकुओं की खोह बनाते हो।
Matthew 21:14 और अन्धे और लंगड़े, मन्दिर में उसके पास लाए, और उसने उन्हें चंगा किया।
Matthew 21:15 परन्तु जब महायाजकों और शास्‍त्रियों ने इन अद्भुत कामों को, जो उसने किए, और लड़कों को मन्दिर में दाऊद की सन्तान को होशाना पुकारते हुए देखा, तो क्रोधित हो कर उस से कहने लगे, क्या तू सुनता है कि ये क्या कहते हैं?
Matthew 21:16 यीशु ने उन से कहा, हां; क्या तुम ने यह कभी नहीं पढ़ा, कि बालकों और दूध पीते बच्‍चों के मुंह से तु ने स्‍तुति सिद्ध कराई?

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 27-28
  • मत्ती 21:1-22



रविवार, 16 सितंबर 2018

सुगंध



      न्यू यॉर्क में इत्रों तथा सुगन्धित द्रव्यों का कार्य करने वाली एक महिला का दावा है कि वह कुछ सुगंधों के मिश्रण को पहचान सकती है और उस मिश्रण को बनाने वाले के नाम को बता सकती है। एक बार सूंघ कर वह  बता सकती है, “इसे जेनी ने बनाया है।”

      कोरिन्थ में मसीही विश्वासियों को लिखते समय  पौलुस ने एक ऐसे उदाहरण का प्रयोग किया जो उन्हें किसी जीते हुए नगर में विजयी रोमी सेना के प्रवेश के याद दिलाता (2 कुरिन्थियों 2:14)। नगर के मार्ग पर सुगन्धित द्रव्य जलाए जाते, और सबसे पहले रोमी सेना का सेनापति प्रवेश करता, उसके पीछे-पीछे उसकी सेना आती, और सबसे अन्त में पराजित सेना के कैदी लाए जाते। रोमी सैनिकों के लिए उस सुगंध का अर्थ था विजय का उत्सव, जबकि पराजित कैदियों के लिए उसी सुगंध का अर्थ था मृत्यु।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में पौलुस ने कहा कि परमेश्वर के लिए हम वह सुगंध हैं जो पाप पर मसीह की विजय की सूचक है। परमेश्वर ने हम मसीही विश्वासियों को स्वयं मसीह यीशु ही की सुगंध प्रदान की है, जिससे हम उसके बलिदान की सुगंध बन सकें। किन्तु हम कैसे इस सुखद सुगंध को औरों के जीवनों में ला सकते हैं? हम उन्हें मसीह यीशु के समान उदारता और प्रेम प्रदर्शित कर सकते हैं, उनके साथ प्रभु यीशु में उपलब्ध पापों की क्षमा और उद्धार का सुसमाचार बाँट सकते हैं। हम परमेश्वर पवित्र-आत्मा को अपने अन्दर आत्मा के फलों, प्रेम, आनन्द, दयालुता आदि को प्रगट करने दे सकते हैं (गलतियों 5:22-23)।

      जब लोग हमें देखते हैं तो क्या वे कह सकते हैं, “यह यीशु का कार्य है”? क्या हम प्रभु को अनुमति और अवसर दे रहे हैं कि वह हम में होकर अपनी सुगंध सँसार के लोगों के मध्य फैला सके? क्या हम उसके उद्धार के सुसमाचार को बाँट रहे हैं? प्रभु यीशु सर्वोत्तम सुगंध है; ऐसी सुगंध जिसकी सब को आवश्यकता है। - केला ओकोआ


प्रभु यीशु में धार्मिकता का जीवन, 
औरों को भी प्रभु की ओर आकर्षित करता है।

क्योंकि क्रूस की कथा नाश होने वालों के निकट मूर्खता है, परन्तु हम उद्धार पाने वालों के निकट परमेश्वर की सामर्थ है। - 1 कुरिन्थियों 1:18

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 2:12-17
2 Corinthians 2:12 और जब मैं मसीह का सुसमाचार, सुनाने को त्रोआस में आया, और प्रभु ने मेरे लिये एक द्वार खोल दिया।
2 Corinthians 2:13 तो मेरे मन में चैन न मिला, इसलिये कि मैं ने अपने भाई तितुस को नहीं पाया; सो उन से विदा हो कर मैं मकिदुनिया को चला गया।
2 Corinthians 2:14 परन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, जो मसीह में सदा हम को जय के उत्‍सव में लिये फिरता है, और अपने ज्ञान का सुगन्‍ध हमारे द्वारा हर जगह फैलाता है।
2 Corinthians 2:15 क्योंकि हम परमेश्वर के निकट उद्धार पाने वालों, और नाश होने वालों, दोनों के लिये मसीह के सुगन्‍ध हैं।
2 Corinthians 2:16 कितनो के लिये तो मरने के निमित्त मृन्यु की गन्‍ध, और कितनो के लिये जीवन के निमित्त जीवन की सुगन्‍ध, और इन बातों के योग्य कौन है?
2 Corinthians 2:17 क्योंकि हम उन बहुतों के समान नहीं, जो परमेश्वर के वचन में मिलावट करते हैं; परन्तु मन की सच्चाई से, और परमेश्वर की ओर से परमेश्वर को उपस्थित जानकर मसीह में बोलते हैं।


एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 25-26
  • 2 कुरिन्थियों 9



गुरुवार, 9 अगस्त 2018

स्वतंत्रता



      दूसरा विश्व युद्ध समाप्त हो गया था, और शान्ति घोषित हो चुकी थी। परन्तु जापानी शाही सेना के जवान लेफ्टिनेंट हीरू ओनोडा, जिन्हें फिलीपींस के एक द्वीप पर तैनात किया गया था, यह नहीं जानते थे कि युद्ध समाप्त हो चुका है। उनका पता लगाने के लिए प्रयास किए गए। उनके संभावित स्थान पर वायुयान द्वारा इस संबंध में पर्चे डलवाए गए, परन्तु ओनोडा ने, जिनको 1945 में अंतिम आज्ञा मिली थी कि वे अपने स्थान पर डटे रहें और लड़ते रहें, इन सभी प्रयासों को शत्रु की चालाकी और दुष्प्रचार माना, और उन पर्चों के संदेशों की अवहेलना कर दी। अन्ततः युद्ध की समाप्ति के लगभग तीस वर्ष के बाद उन्होंने मार्च 1974 में तब समर्पण किया, जब उनके भूतपूर्व अफसर ने जापान से फिलीपींस आकर उन्हें पहले दिए गई आज्ञा को निरस्त किया और ओनोडा को आधिकारिक तौर पर उस द्वीप पर डटे रहने की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं कर दिया। तब ही ओनोडा ने अन्ततः स्वीकार किया कि युद्ध की समाप्ति हो चुकी थी।

      प्रभु यीशु मसीह के सुसमाचार के विषय भी अभी तक बहुत से लोगों ने या तो सुना नहीं है, या फिर वे उस सुसमाचार पर विश्वास नहीं करते हैं कि प्रभु यीशु में विश्वास और पापों की क्षमा के द्वारा अनन्त जीवन की आशीष सारे सँसार के सभी लोगों के लिए सेंत-मेंत उपलब्ध है (2 तिमुथियुस 1:10)।हम में से कुछ, जिन्होंने सुना और विश्वास किया भी है, वे भी अभी तक एक हारा हुआ जीवन व्यतीत कर रहे हैं, अपने ही बल-बूते पर जीवन के संघर्षों से पार पाने के तरीके ढूँढ़ रहे हैं।

      आज ऐसे लोगों की आवश्यकता है जो जाकर प्रभु यीशु मसीह के द्वारा पाप और मृत्यु पर हासिल की गई विजय के बारे में लोगों को बताएँ, उनके संदेह या संशय का निवारण करने में उनकी सहायता करें। उनकी उस स्वतंत्रता की कल्पना करें जिसे वे तब अनुभव करेंगे जब मसीह यीशु उनके मनों को पाप के विरुद्ध युद्ध को जीत लिए जाने के समाचार से भर देगा। - पो फैंग चिया


क्या आज आप किसी को सुसमाचार बताएंगे?

पर अब हमारे उद्धारकर्ता मसीह यीशु के प्रगट होने के द्वारा प्रकाश हुआ, जिसने मृत्यु का नाश किया, और जीवन और अमरता को उस सुसमाचार के द्वारा प्रकाशमान कर दिया। - 2 तिमुथियुस 1:10

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 4:1-6
2 Corinthians 4:1 इसलिये जब हम पर ऐसी दया हुई, कि हमें यह सेवा मिली, तो हम हियाव नहीं छोड़ते।
2 Corinthians 4:2 परन्तु हम ने लज्ज़ा के गुप्‍त कामों को त्याग दिया, और न चतुराई से चलते, और न परमेश्वर के वचन में मिलावट करते हैं, परन्तु सत्य को प्रगट कर के, परमेश्वर के साम्हने हर एक मनुष्य के विवेक में अपनी भलाई बैठाते हैं।
2 Corinthians 4:3 परन्तु यदि हमारे सुसमाचार पर परदा पड़ा है, तो यह नाश होने वालों ही के लिये पड़ा है।
2 Corinthians 4:4 और उन अविश्वासियों के लिये, जिन की बुद्धि को इस संसार के ईश्वर ने अन्‍धी कर दी है, ताकि मसीह जो परमेश्वर का प्रतिरूप है, उसके तेजोमय सुसमाचार का प्रकाश उन पर न चमके।
2 Corinthians 4:5 क्योंकि हम अपने को नहीं, परन्तु मसीह यीशु को प्रचार करते हैं, कि वह प्रभु है; और अपने विषय में यह कहते हैं, कि हम यीशु के कारण तुम्हारे सेवक हैं।
2 Corinthians 4:6 इसलिये कि परमेश्वर ही है, जिसने कहा, कि अन्धकार में से ज्योति चमके; और वही हमारे हृदयों में चमका, कि परमेश्वर की महिमा की पहिचान की ज्योति यीशु मसीह के चेहरे से प्रकाशमान हो।


एक साल में बाइबल: 
  • भजन 77-78
  • रोमियों 10



सोमवार, 18 जून 2018

विजय


      प्रति वर्ष 18 जून के दिन वॉटरलू, जो अब बेलजियम में है, के महायुद्ध को स्मरण किया जाता है, क्योंकि इस दिन ड्यूक ऑफ वेलिंगटन के नेतृत्व में बहुराष्ट्रीय सेनाओं ने नेपोलियन की फ्रांसीसी सेना को पराजित किया था। तब से किसी प्रबल विरोधी के हाथों पराजय की स्थिति का सामना करने के लिए वाक्याँश “वॉटरलू का सामना करना” प्रयोग किया जाता है।

      हमारे आत्मिक जीवनों के संबंध में कुछ लोगों की धारणा रहती है कि अन्ततः हम विफल हो ही जाएँगे; यह केवल समय की बात है, हमें अपने वॉटरलू का सामना तो करना ही पड़ेगा। परन्तु परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं कि प्रभु यीशु के अनुयायी, प्रेरित यूहन्ना ने इस निराशावादी दृष्टिकोण का खंडन करते हुए लिखा, “क्योंकि जो कुछ परमेश्वर से उत्पन्न हुआ है, वह संसार पर जय प्राप्त करता है, और वह विजय जिस से संसार पर जय प्राप्त होती है हमारा विश्वास है” (1 यूहन्ना 5:4)।

      यूहन्ना अपनी इस पहली पत्री में आत्मिक विजय के सन्देश का ताना-बाना बुनता है, और अपने पाठकों से आग्रह करता है कि वे इस नश्वर सँसार की अस्थायी बातों में मन न लगाएँ, क्योंकि वे सब शीघ्र ही नष्ट हो जाएँगी “तुम न तो संसार से और न संसार में की वस्‍तुओं से प्रेम रखो: यदि कोई संसार से प्रेम रखता है, तो उस में पिता का प्रेम नहीं है। क्योंकि जो कुछ संसार में है, अर्थात शरीर की अभिलाषा, और आंखों की अभिलाषा और जीविका का घमण्‍ड, वह पिता की ओर से नहीं, परन्तु संसार ही की ओर से है। और संसार और उस की अभिलाषाएं दोनों मिटते जाते हैं, पर जो परमेश्वर की इच्छा पर चलता है, वह सर्वदा बना रहेगा” (1 यूहन्ना 2:15-17)। वरन हमें परमेश्वर से प्रेम करना चाहिए और उसे प्रसन्न करना चाहिए क्योंकि परमेश्वर ने अपने अनुयायियों से अनन्त जीवन की प्रतिज्ञा की है: “और जिस की उसने हम से प्रतिज्ञा की वह अनन्त जीवन है” (2:25)।

      हमारे जीवनों में उतराव-चढ़ाव आ सकते हैं, और कुछ संघर्ष ऐसे भी हो सकते हैं जिनमें पराजय निश्चित सी लगे। परन्तु हम मसीही विश्वासियों को सदा इस बात का निश्चय रहना चाहिए कि मसीह यीशु में होकर अनतः विजय हमारी ही है; उसकी सामर्थ्य ने हमारे लिए यह निर्धारित और सुनिश्चित कर दिया है। - डेविड मैक्कैस्लैंड


परमेश्वर पर भरोसा रख कर आगे बढ़ते जाना ही समस्याओं का समाधान है।

कौन हम को मसीह के प्रेम से अलग करेगा? क्या क्लेश, या संकट, या उपद्रव, या अकाल, या नंगाई, या जोखिम, या तलवार? जैसा लिखा है, कि तेरे लिये हम दिन भर घात किए जाते हैं; हम वध होने वाली भेंडों के समान गिने गए हैं। परन्तु इन सब बातों में हम उसके द्वारा जिसने हम से प्रेम किया है, जयवन्त से भी बढ़कर हैं।– रोमियों 8: 35-37

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 5: 1-13
1 John 5:1 जिसका यह विश्वास है कि यीशु ही मसीह है, वह परमेश्वर से उत्पन्न हुआ है और जो कोई उत्पन्न करने वाले से प्रेम रखता है, वह उस से भी प्रेम रखता है, जो उस से उत्पन्न हुआ है।
1 John 5:2 जब हम परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, और उस की आज्ञाओं को मानते हैं, तो इसी से हम जानते हैं, कि परमेश्वर की सन्‍तानों से प्रेम रखते हैं।
1 John 5:3 और परमेश्वर का प्रेम यह है, कि हम उस की आज्ञाओं को मानें; और उस की आज्ञाएं कठिन नहीं।
1 John 5:4 क्योंकि जो कुछ परमेश्वर से उत्पन्न हुआ है, वह संसार पर जय प्राप्त करता है, और वह विजय जिस से संसार पर जय प्राप्त होती है हमारा विश्वास है।
1 John 5:5 संसार पर जय पाने वाला कौन है केवल वह जिस का यह विश्वास है, कि यीशु, परमेश्वर का पुत्र है।
1 John 5:6 यही है वह, जो पानी और लोहू के द्वारा आया था; अर्थात यीशु मसीह: वह न केवल पानी के द्वारा, वरन पानी और लोहू दोनों के द्वारा आया था।
1 John 5:7 और जो गवाही देता है, वह आत्मा है; क्योंकि आत्मा सत्य है।
1 John 5:8 और गवाही देने वाले तीन हैं; आत्मा, और पानी, और लोहू; और तीनों एक ही बात पर सहमत हैं।
1 John 5:9 जब हम मनुष्यों की गवाही मान लेते हैं, तो परमेश्वर की गवाही तो उस से बढ़कर है; और परमेश्वर की गवाही यह है, कि उसने अपने पुत्र के विषय में गवाही दी है।
1 John 5:10 जो परमेश्वर के पुत्र पर विश्वास करता है, वह अपने ही में गवाही रखता है; जिसने परमेश्वर को प्रतीति नहीं की, उसने उसे झूठा ठहराया; क्योंकि उसने उस गवाही पर विश्वास नहीं किया, जो परमेश्वर ने अपने पुत्र के विषय में दी है।
1 John 5:11 और वह गवाही यह है, कि परमेश्वर ने हमें अनन्त जीवन दिया है: और यह जीवन उसके पुत्र में है।
1 John 5:12 जिस के पास पुत्र है, उसके पास जीवन है; और जिस के पास परमेश्वर का पुत्र नहीं, उसके पास जीवन भी नहीं है।
1 John 5:13 मैं ने तुम्हें, जो परमेश्वर के पुत्र के नाम पर विश्वास करते हो, इसलिये लिखा है; कि तुम जानो, कि अनन्त जीवन तुम्हारा है।
                                                 

एक साल में बाइबल: 

  • नहेम्याह 10-11
  • प्रेरितों 4:1-22


रविवार, 29 अप्रैल 2018

सुगंध



   पाँच इन्द्रियों में से कौन सी है जो आपको आपकी बीती बातों को सबसे अधिक प्रभावी रीति से स्मरण करवाती है? मेरे लिए तो निःसंदेह यह सूँघने की शक्ति है। धूप में जाने से पहले लगाए जाने वाले तेलों में से एक की गंध मुझे तुरंत फ्रांस के एक समुद्रतट की यादों में ले जाती है। भोजन की कुछ गंध मुझे अपनी दादी के साथ बिताए गए बचपन के दिनों को स्मरण करवा देती है; दाढ़ी बनाने के बाद लगाए जाने वाले आफ्टर-शेव के एक प्रकार की गंध मुझे अपने पुत्र की किशोरावस्था की याद दिलाती है, और देवदार के पेड़ों की गंध मुझे क्रिसमस की याद दिलाती है। इसी प्रकार से अनेकों गंध हैं जो हमें जीवन के विभिन्न भागों और घटनाओं की याद दिलाती हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में पौलुस ने कुरिन्थियों को स्मरण करवाया कि वे सँसार के समक्ष मसीह यीशु की गंध हैं: “क्योंकि हम परमेश्वर के निकट उद्धार पाने वालों, और नाश होने वालों, दोनों के लिये मसीह के सुगन्‍ध हैं” (2 कुरिन्थियों 2:15)। पौलुस ने जब यह लिखा वह समय इस्राएल पर रोमी साम्राज्य का शासन था, और रोमी जब भी किसी सैनिक अभियान से जयवंत होकर लौटते थे तो विजय जलूस का आयोजन किया जाता था, जिसमें सबको इस बात से अवगत करवाने के लिए कि वे विजयी होकर लौटे हैं, सारे शहर में स्थान-स्थान पर धूप और सुगन्धित द्रव्य जलाए जाते थी। विजयी लोगों के लिए वह सुगंध आनन्द और उत्सव की सूचक थी, परन्तु वही गंध पराजित होकर बंधुआ बनाकर लाए लोगों के लिए आजीवन दासत्व अथवा मृत्युदण्ड की सूचक होती थी। हम मसीही विश्वासी, अपने नायक प्रभु यीशु के द्वारा शैतान और पाप पर अनन्तकाल के लिए विजयी लोग हैं, मृत्यु पर स्वर्ग की विजय के उत्सव में हैं; और जब हमारे द्वारा प्रभु यीशु मसीह का यह सुसमाचार सँसार के लोगों के सामने प्रचार किया जाता है तो यह परमेश्वर को भावती हुई सुगंध होता है।

   मसीह यीशु की गंध होने के नाते, हम सँसार के सामने अपने जीवनों द्वारा क्या सुगंध प्रस्तुत करते हैं? यह वह सुगंध नहीं है जिसे किसी बोतल अथवा या डिब्बे में खरीदा जा सकता है। यह हमारे आचरण और व्यवहार की गंध है। जब हम किसी के साथ अधिक समय बिताने लगते हैं, तब हमारे जीवन उसके गुणों को भी दिखाने लग जाते हैं – हम उसी के समान बर्ताव, बातचीत के भाव और शब्द, हाव-भाव और मुद्राएं अपनाने लग जाते हैं।

   प्रभु यीशु के साथ बिताया गया हमारा समय हमारे जीवनों में परिवर्तन लाता है, हमें उसके स्वरूप में ढालता है, और हम अपने चारों ओर उसकी मनोहर सुगंध को फैलाने पाते हैं। - मेरियन स्ट्राउड


जब हम प्रभु परमेश्वर की संगति में रहेंगे, तो लोग इसे जानने भी पाएँगे।

प्रभु तो आत्मा है: और जहां कहीं प्रभु का आत्मा है वहां स्‍वतंत्रता है। परन्तु जब हम सब के उघाड़े चेहरे से प्रभु का प्रताप इस प्रकार प्रगट होता है, जिस प्रकार दर्पण में, तो प्रभु के द्वारा जो आत्मा है, हम उसी तेजस्‍वी रूप में अंश अंश कर के बदलते जाते हैं। - 2 कुरिन्थियों 3:17-18

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 2:14-17
2 Corinthians 2:14 परन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, जो मसीह में सदा हम को जय के उत्‍सव में लिये फिरता है, और अपने ज्ञान का सुगन्‍ध हमारे द्वारा हर जगह फैलाता है।
2 Corinthians 2:15 क्योंकि हम परमेश्वर के निकट उद्धार पाने वालों, और नाश होने वालों, दोनों के लिये मसीह के सुगन्‍ध हैं।
2 Corinthians 2:16 कितनो के लिये तो मरने के निमित्त मृन्यु की गन्‍ध, और कितनो के लिये जीवन के निमित्त जीवन की सुगन्‍ध, और इन बातों के योग्य कौन है?
2 Corinthians 2:17 क्योंकि हम उन बहुतों के समान नहीं, जो परमेश्वर के वचन में मिलावट करते हैं; परन्तु मन की सच्चाई से, और परमेश्वर की ओर से परमेश्वर को उपस्थित जानकर मसीह में बोलते हैं।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • 1 राजा 6-7
  • लूका 20:27-47