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Sunday, November 11, 2018

बलिदान



      यह इतवार की दोपहर का समय है, मैं अपने घर के बागीचे में बैठी हूँ जो उस चर्च के निकट ही है जिसमें मेरे पति पादरी हैं। मुझे फारसी भाषा में चल रही आराधना और स्तुति गान के शब्द तथा संगीत सुनाई दे रहे हैं। लंडन में स्थित हमारे इस चर्च में ईरानी लोगों की मण्डली भी एकत्रित होती है, और वे सभी अपने मसीही विश्वास के प्रति बहुत जोशीले हैं। वे अपने मसीही विश्वास के लिए उन पर किए गए अत्याचारों और सताव की कहानियों को, उनके कुछ साथियों के मसीही विश्वास के कारण मार डाले जाने को भी बताते हैं, लेकिन ऐसे सताव के बावजूद भी उनके उत्साह को देखते हुए हम अपने आप को विश्वास में कमतर अनुभव करते हैं। ये मसीही विश्वासी, मसीही विश्वास के लिए सबसे पहले शहीद हुए व्यक्ति, स्तिफनुस के पद-चिन्हों पर चल रहे हैं।

      स्तिफनुस प्रारंभिक मसीही मण्डली का एक अगुवा था, और उसके द्वारा होने वाले “बड़े-बड़े अद्भुत काम और चिन्हों” (प्रेरितों 6:8) के कारण यरूशलेम में लोगों का ध्यान उसकी ओर आकर्षित हुआ, और यहूदी धर्म-अधिकारियों ने उसे अपने सामने बुलवाया कि वह अपने मसीही विश्वास के कार्यों के विषय अपना बचाव करे। स्तिफनुस ने न केवल अपने मसीही विश्वास का जोशपूर्ण बचाव किया, वरन उस पर दोष लगाने वालों पर उनके कठोर मन का होने का आरोप भी लगाया। परन्तु स्तिफनुस की बातों को सुनकर बजाए पश्चाताप करने के, उसे पकड़ने और पकड़वाने वाले “उसपर दाँत पीसने लगे” (प्रेरितों 7:54)। वे उसे घसीटते हुए शहर के बाहर ले गए और पत्थरवाह करके मार डाला, जबकि स्तिफनुस उन्हें क्षमा किए जाने की प्रार्थना करता रहा।

      स्तिफनुस और आज भी मसीही विश्वास के लिए सताव सहन कर रहे तथा बलिदान हो रहे मसीहियों की जीवनों का सन्देश हमें स्मरण दिलाता है कि सँसार के प्रत्येक व्यक्ति के प्रति मसीह के प्रेम और करुणा के सन्देश का प्रत्युत्तर सँसार से मिलने वाली क्रूरता और हिंसा भी हो सकता है। यदि हमने आज तक अपने मसीही विश्वास के कारण किसी सताव का सामना नहीं किया है, तो भी हम उन विश्वासियों और कलीसियाओं के लिए प्रार्थना करें जो सताए जा रहे हैं। और यह भी प्रार्थना करें कि जब कभी हम अपने मसीही विश्वास के लिए परखे जाएँ, तो हम अपने प्रभु यीशु के प्रति जिसने हमारे उद्धार के लिए सँसार से इतनी भीषण यातनाएं और मृत्यु सही, वफादार और दृढ़ रह सकें, कभी उसका इन्कार न करें। - एमी बाउचर पाई


हम अपने प्रभु के पदचिन्हों पर चलने के योग्य अनुग्रह पा सकें।

वे इस बात से आनन्‍दित हो कर महासभा के साम्हने से चले गए, कि हम उसके नाम के लिये निरादर होने के योग्य तो ठहरे। और प्रति दिन मन्दिर में और घर घर में उपदेश करने, और इस बात का सुसमाचार सुनाने से, कि यीशु ही मसीह है न रूके। - प्रेरितों 5:41-42

बाइबल पाठ: प्रेरितों 6:8-15; 7:59-60
Acts 6:8 स्‍तिुफनुस अनुग्रह और सामर्थ में परिपूर्ण हो कर लोगों में बड़े बड़े अद्भुत काम और चिन्ह दिखाया करता था।
Acts 6:9 तब उस अराधनालय में से जो लिबरतीनों की कहलाती थी, और कुरेनी और सिकन्‍दिरया और किलिकिया और एशीया के लोगों में से कई एक उठ कर स्‍तिुफनुस से वाद-विवाद करने लगे।
Acts 6:10 परन्तु उस ज्ञान और उस आत्मा का जिस से वह बातें करता था, वे साम्हना न कर सके।
Acts 6:11 इस पर उन्‍होने कई लोगों को उभारा जो कहने लगे, कि हम ने इस को मूसा और परमेश्वर के विरोध में निन्‍दा की बातें कहते सुना है।
Acts 6:12 और लोगों और प्राचीनों और शास्‍त्रियों को भड़काकर चढ़ आए और उसे पकड़कर महासभा में ले आए।
Acts 6:13 और झूठे गवाह खड़े किए, जिन्हों ने कहा कि यह मनुष्य इस पवित्र स्थान और व्यवस्था के विरोध में बोलना नहीं छोड़ता।
Acts 6:14 क्योंकि हम ने उसे यह कहते सुना है, कि यही यीशु नासरी इस जगह को ढ़ा देगा, और उन रीतों को बदल डालेगा जो मूसा ने हमें सौंपी हैं।
Acts 6:15 तब सब लोगों ने जो सभा में बैठे थे, उस की ओर ताक कर उसका मुखड़ा स्वर्गदूत का सा देखा।
Acts 7:59 और वे स्‍तिुफनुस को पत्थरवाह करते रहे, और वह यह कहकर प्रार्थना करता रहा; कि हे प्रभु यीशु, मेरी आत्मा को ग्रहण कर।
Acts 7:60 फिर घुटने टेककर ऊंचे शब्द से पुकारा, हे प्रभु, यह पाप उन पर मत लगा, और यह कहकर सो गया: और शाऊल उसके बध में सहमत था।


एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 50
  • इब्रानियों 8