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Tuesday, August 9, 2011

सफलता के इच्छुक?

संसार में सफलता प्राप्त करने के लिए लोग सिवाय ईमानदारी के बाकी हर तरीका आज़माने को तैयार रहते हैं। झूठ, चापलूसी, रिश्वत, धोखा, चोरी, स्वार्थ, दूसरों का अनुचित उपयोग, आँकड़ों में हेरा-फेरी आदि सब सफलता प्राप्त करने के अनिवार्य साधनों में गिने जाते हैं।

अमेरिका में एक बहुत गरीब युवक था - जौन डब्यु येट्स। उसे अपने जूते के तले के छेद ढांपने के लिए गत्ते के पतावे अपने जूते में लगाने पड़ते थे। लेकिन १५ वर्ष की आयु में उसने एक बैंक में अपनी बहुत ही थोड़ी सी कमाई से "जौन डब्ल्यु येट्स एण्ड कम्पनी" के नाम से एक खाता खोला, और इस कम्पनी के संचालन के लिए उसने परमेश्वर प्रभु को अपना सहयोगी तथा प्रबन्धक माना। उसने प्रभु यीशु में अपने विश्वास और उस विश्वास की ईमानदारी के नियमों के साथ व्यापार किया, और एक बड़ा करोड़पति बना, उसकी कम्पनी अमेरिका की शीर्ष कम्पनियों में से एक बनी।

स्कौटलैण्ड के ओस्वाल्ड चैम्बर्स ने अपनी युवा अवस्था में इतनी कला प्रतिभा दिखाई कि १८ वर्ष की आयु में ही उसे यूरोप के महान और विख्यात कलाकारों के साथ काम करके सीखने के आमंत्रण मिले। लेकिन उसने इन आमंत्रणों को अस्वीकार कर दिया, कला और उसकी ख्याति और संपदा को भुलाकर एक छोटे से बाइबल स्कूल में बाइबल की शिक्षा पाने के लिए दाखिला ले लिया, जहाँ आगे चलकर वह एक अध्यापक भी बन गया। बाद में वह मिस्त्र गया और ब्रिटिश सैनिकों की आत्मिक आवश्यक्ताओं की पूर्ति के लिए उनके बीच काम किया। चैम्बर्स की मृत्यु ४० वर्ष की आयु में हो गई, लेकिन तब तक उसने अपनी विरासत के रूप में, परमेश्वर और भक्ति संबंधित लेखों एक बहुत महान और विशाल भण्डार छोड़ा, जो आज भी बहुत से लोगों के लिए प्रेर्णा और शिक्षा का स्त्रोत है और संसार में उसके आदर को बनाए हुए है।

परमेश्वर के वचन बाइबल का एक पात्र है, दानिएल; जिसे अपने देश इस्त्राएल से विस्थापित कर और बन्दी बना कर बाबुल लाया गया। दानिएल की जीवनी उसके विश्वास तथा बार बार अपने विश्वास के लिए अपने बन्धुआई के स्थान और अपने स्वामियों के समक्ष जान का जोखिम उठा कर भी कभी समझौता न करने की घटानाओं से भरी पड़ी है। इस दास बना कर लाए गए युवक दानिएल को उस के परमेश्वर ने उसके बन्धुवा बनाने वालों पर ही अधिपति तथा राजा का सबसे विश्वास पात्र बना दिया।

तीन अलग अलग समय और स्थान के व्यक्तियों के उदाहरण; तीनों में एक ही समानता - प्रत्येक ने निश्चय कर लिया था कि परमेश्वर की इच्छापूर्ति ही उनके जीवन का ध्येय होगा; तीनों ही सफलता के उन शिखरों पर पहुँचे जहाँ कोई मानव युक्ति उन्हें कभी नहीं पहुँचा सकती थी।

एक बार हम परमेश्वर के मार्ग पर चलने और उसकी इच्छापूर्ति का निर्णय ले लें और उसकी आज्ञाकारिता को अपना लक्षय बना लें, सफलता स्वतः ही किसी न किसी रूप में हमारे कदम चूमेगी। - हर्ब वैण्डर लुग्ट


परमेश्वर की इच्छा के बाहर कोई सफलता नहीं है; उसकी इच्छा के साथ कोई असफलता नहीं है।

जवान सिंहों को तो घटी होती और वे भूखे भी रह जाते हैं; परन्तु यहोवा के खोजियों को किसी भली वस्तु की घटी न होवेगी। - भजन ३४:१०

बाइबल पाठ: भजन ३४
Psa 34:1 मैं हर समय यहोवा को धन्य कहा करूंगा; उसकी स्तुति निरन्तर मेरे मुख से होती रहेगी।
Psa 34:2 मैं यहोवा पर घमण्ड करूंगा; नम्र लोग यह सुन कर आनन्दित होंगे।
Psa 34:3 मेरे साथ यहोवा की बड़ाई करो, और आओ हम मिल कर उसके नाम की स्तुति करें।
Psa 34:4 मैं यहोवा के पास गया, तब उस ने मेरी सुन ली, और मुझे पूरी रीति से निर्भय किया।
Psa 34:5 जिन्होंने उसकी ओर दृष्टि की उन्होंने ज्योति पाई और उनका मुंह कभी काला न होने पाया।
Psa 34:6 इस दीन जन ने पुकारा तब यहोवा ने सुन लिया, और उसको उसके सब कष्टों से छुड़ा लिया।