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शुक्रवार, 22 जून 2012

भली विरासत

   मार्टिन लूथर ने, परमेश्वर के वचन बाइबल में सभोपदेशक ९:१५ पर अपनी टिप्पणी में एक युनानी सैनिक, थैमिस्टोक्लिस की कहानी बताई, जो एथेन्स में तैनात युनानी सेना का अधिकारी था। अपनी बुद्धिमता और युद्ध कौशल के कारण थैमिस्टोक्लिस ने सालामिस का युद्ध जीता, युनानी धरती से फारसी सेना को भगाया और अपने नगर को बचाया। इसके कुछ समय बाद वह अपने लोगों की नज़रों से गिर गया, और एथेन्स से बहिष्कृत कर दिया गया। मार्टिन लूथर ने कहानी का अन्त करते हुए लिखा, "थैमिस्टोक्लिस ने अपने नगर के लिए बहुत भला किया, किंतु प्रत्युत्तर में उसे उनसे बहुत कृतघ्नता ही मिली।"

   सामान्यतः यह देखा गया है कि ना जाने क्यों, लोग किसी गरीब या दीन जन द्वारा अपनी बुद्धिमता से किया गया भला कार्य शीघ्र ही भुला देते हैं। परवाह नहीं; चाहे दीन जन की बुद्धिमता तुच्छ जानी जाए तो भी वह पराक्रम से अधिक सामर्थी होती है "यद्यपि दरिद्र की बुद्धि तुच्छ समझी जाती है और उसका वचन कोई नहीं सुनता तौभी पराक्रम से बुद्धि उत्तम है" (सभोपदेशक ९:१६)। किसी अभिमानी, डींगमार मूर्ख व्यक्ति की बजाए एक नम्र, शांत और ईमानदार व्यक्ति होना बहुत भला है, जो चाहे लोगों द्वारा भुला भी दिया जाए, किंतु अपने पीछे एक भली विरासात छोड़ जाता है।

   अन्ततः जो बात महत्व रखती है वह लोगों से मिलने वाली प्रसिद्धी और वाहवाही नहीं, वरन वे भलाई और धार्मिकता के बीज हैं जो हम अपने नेक चरित्र द्वारा नम्र आत्माओं में बोकर जाते हैं, और जो आते समय में अपने फल अवश्य लाएंगे; वे समाज के लिए हमारी भली विरासत हैं। इसे दुसरे रूप में कहें तो, "पर ज्ञान अपनी सब सन्‍तानों से सच्‍चा ठहराया गया है" (लूका ७:३५)।

   क्या आपने अपने जीवन में प्रदर्शित परमेश्वर के भय और नेक चरित्र द्वारा किसी के जीवन में कोई भला बीज बोया है; क्या आपने कोई भली विरासत समाज के लिए छोड़ी है? - डेविड रोपर


बुद्धिमान व्यक्ति, अपने पृथ्वी के जीवन से ही, स्वर्गीय आशीषों को अपना लक्ष्य रखता है।


परन्तु उस में एक दरिद्र बुद्धिमान पुरूष पाया गया, और उस ने उस नगर को अपनी बुद्धि के द्वारा बचाया। तौभी किसी ने उस दरिद्र का स्मरण न रखा। - सभोपदेशक ९:१५

बाइबल पाठ: सभोपदेशक ९:१३-१८
Ecc 9:13  मैं ने सूर्य के नीचे इस प्रकार की बुद्धि की बात भी देखी है, जो मुझे बड़ी जान पड़ी।
Ecc 9:14  एक छोटा सा नगर था, जिस में थोड़े ही लोग थे, और किसी बड़े राजा ने उस पर चढ़ाई करके उसे घेर लिया, और उसके विरूद्ध बड़े बड़े धुस बनवाए।
Ecc 9:15  परन्तु उस में एक दरिद्र बुद्धिमान पुरूष पाया गया, और उस ने उस नगर को अपनी बुद्धि के द्वारा बचाया। तौभी किसी ने उस दरिद्र का स्मरण न रखा।
Ecc 9:16  तब मैं ने कहा, यद्यपि दरिद्र की बुद्धि तुच्छ समझी जाती है और उसका वचन कोई नहीं सुनता तौभी पराक्रम से बुद्धि उत्तम है।
Ecc 9:17  बुद्धिमानों के वचन जो धीमे धीमे कहे जाते हैं वे मूर्खों के बीच प्रभुता करने वाले के चिल्ला चिल्लाकर कहने से अधिक सुने जाते हैं।
Ecc 9:18  लड़ाई के हथियारों से बुद्धि उत्तम है, परन्तु एक पापी बहुत भलाई नाश करता है।


एक साल में बाइबल: 

  • एस्तेर ६-८ 
  • प्रेरितों ६

मंगलवार, 16 अगस्त 2011

सदा विश्वासयोग्य

बेरूत शहर में सन १९८३ में अमरीकी सैनिक ठिकानों पर हुए हमले में बहुत से सैनिक मारे गए, उनमें से एक सैनिक बहुत गंभीर रूप से घायल हुआ। इस सैनिक के हौसले और विश्वासयोग्यता के साथ अपने साथियों के साथ बने रहने ने बहुतों का हृदय छू लिया। घायल अवस्था में, पट्टियों से ढका और शरीर में इलाज के लिए लगाई गई कई नालियों के साथ वह अस्पताल में था जब उस क्षेत्र के सेनाध्यक्ष जैनरल पौल कैली अस्पताल में घायलों को देखने आए। जब जैनरल कैली उसके पास पहुँचे तो उसने हाथ से कुछ लिखने का इशारा किया क्योंकि वह बोल पाने में असमर्थ था। उसे लिखने की सामग्री दी गई तो बड़ी कठिनाई से उसने दो शब्द लिखे: semper fi - जो उसके सैनिक दल के आदर्ष वाक्य semper fidelis का छोटा रूप है, और जिसका अर्थ है "सदा विश्वासयोग्य"।

हम परमेश्वर के विश्वासी जो परमेश्वर की कार्य-सेना के अंग हैं, इस नवयुवक के उदाहरण से बहुत कुछ सीख सकते हैं। हम सदा शत्रु शैतान के हमलों में रहते हैं, कई बार वह हमें घायल भी कर देता है और हमारे कुछ साथी मारे भी जाते हैं। लेकिन तौ भी हमें अन्त तक विश्वासी बने रहना है। अपने परमेश्वर के प्रति विश्वास्योग्यता का जज़्बा हमारे हृदयों में भरा रहना चाहिए और हर परिस्थिति में हमें आगे बढते रहने का हौसला बनाए रखना चाहिए। परमेश्वर का वचन विश्वासयोग्यता की सराहना करता है। मत्ती रचित सुसमाचार के २४ तथा २५ अध्याय हमें प्रभु यीशु मसिह के दूसरे आगमन के लिए, जो कभी भी हो सकता है, सदा तैयार बने रहने को कहते हैं क्योंकि जो तैयार रहेगा और परमेश्वर के कार्य में लगा होग वह परमेश्वर से प्रशंसा और पुरुस्कार पाएगा।

हाँ, semper fidelis - "सदा विश्वासयोग्य" मसीही विश्वासी का जीवन उद्देश्य भी है। - डेव एग्नर


हमारे विश्वास का प्रमाण हमारी विश्वासयोग्यता है।

सच्चे मनुष्य पर बहुत आशीर्वाद होते रहते हैं - नीतिवचन २८:२०


बाइबल पाठ: मत्ती २४:४२-५१

Mat 24:42 इसलिये जागते रहो, क्‍योंकि तुम नहीं जानते कि तुम्हारा प्रभु किस दिन आएगा।
Mat 24:43 परन्‍तु यह जान लो कि यदि घर का स्‍वामी जानता होता कि चोर किस पहर आएगा, तो जागता रहता और अपने घर में सेंध लगने न देता।
Mat 24:44 इसलिये तुम भी तैयार रहो, क्‍योंकि जिस घड़ी के विषय में तुम सोचते भी नहीं हो, उसी घड़ी मनुष्य का पुत्र आ जाएगा।
Mat 24:45 सो वह विश्वासयोग्य और बुद्धिमान दास कौन है, जिसे स्‍वामी ने अपने नौकर चाकरों पर सरदार ठहराया, कि समय पर उन्‍हें भोजन दे?
Mat 24:46 धन्य है, वह दास, जिसे उसका स्‍वामी आकर ऐसा की करते पाए।
Mat 24:47 मैं तुम से सच कहता हूं वह उसे अपनी सारी संपत्ति पर सरदार ठहराएगा।
Mat 24:48 परन्‍तु यदि वह दुष्‍ट दास सोचने लगे, कि मेरे स्‍वामी के आने में देर है।
Mat 24:49 और अपने साथी दासों को पीटने लगे, और पियक्कड़ों के साथ खाए पीए।
Mat 24:50 तो उस दास का स्‍वामी ऐसे दिन आएगा, जब वह उस की बाट न जोहता हो।
Mat 24:51 और ऐसी घड़ी कि वह न जानता हो, और उसे भारी ताड़ना देकर, उसका भाग कपटियों के साथ ठहराएगा: वहां रोना और दांत पीसना होगा।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ९४-९६
  • रोमियों १५:१४-३३

सोमवार, 15 अगस्त 2011

अदृश्य सहायक

जोआना एम्ब्रोसियस एक गरीब किसान की पत्नी थी जो १९वीं शताबदी के अन्तिम समयों में जर्मनी में रहते थे। वे दोनो पति-पत्नि बाहर की दुनिया के विष्य में बहुत कम जानते थे और संपर्क रखते थे। जोआना का हृदय कवि का हृदय था। वह अपने जीवन के उतार चढ़ाव और परमेश्वर पर अपने भरोसे और आनन्द को कविताओं मे व्यक्त करती रहती थी। किसी रीति से उसकी लिखी कुछ पंक्तियाँ प्रकाशित हो गईं और जर्मनी की रानी के पास तक पहुँच गईं। उन पंक्तियों के सौन्दर्य से प्रभावित होकर रानी ने कवि को ढूँढ निकलने का आदेश दिया। जब रानी को जोआना और उसकी तंगहाली का पता चला, तो रानी ने जोआना के प्रति अपने प्रेम को दर्शाने के लिए ना केवल उसकी तत्कालीन आवश्यक्ताओं की पूर्ति करी वरन उसे आजीवन पेंशन दिये जाने का आदेश भी ज़ारी किया।

परमेश्वर कभी कभी कुछ लोगों को ऐसे स्थानों में अपनी सेवकाई के लिए भेजता है जो बहुत छोटी और अनजान होती हैं, जहाँ उन सेवकों को कभी कोई मान नहीं देता और ना ही उनके द्वारा करी गई किसी सहायता के लिए अपनी कृतज्ञता दिखाता है। लेकिन परमेश्वर सब कुछ देखता है, दूसरों की सहायतार्थ हम जो भी कार्य करते हैं, उसे उनका पूरा संज्ञान रहता है, और हमारा कोई परिश्रम ऐसा नहीं है जो व्यर्थ जाएगा, जिसके लिए परमेश्वर हमें प्रतिफल नहीं देगा। वह हमारे संघर्षों को भी जानता है, हमारे बोझों से भी अनजान नहीं है और हमारी विश्वासयोग्यता का स्तर भी उससे छिपा नहीं रहता। हमारी जीवन यात्रा में वह हमारी देखभाल करता रहता है और अपने दूसरे आगमन पर सब को उनका योग्य प्रतिफल देगा।

परमेश्वर हमारे काम और प्रेम को कभी भूलता नहीं। न केवल वर्तमान में वह हमारा अदृश्य सहायक है, वरन अनन्त भविष्य के लिए भी उसकी सहायता हमारे लिए बनी हुई है। इस जीवन से सेवा-निवृति के बाद अनन्तकाल की पेंशन उसके प्रत्येक विश्वासी के लिए तय तथा निशचित है। - पौल वैन गोर्डर


परमेश्वर के लिए कार्य कीजिए; वेतन चाहे अभी कम भी लगे, लेकिन सेवा-निवृति राशि आलौकिक है।

क्‍योंकि परमेश्वर अन्यायी नहीं, कि तुम्हारे काम, और उस प्रेम को भूल जाए, जो तुम ने उसके नाम के लिये इस रीति से दिखाया, कि पवित्र लोगों की सेवा की, और कर रहे हो। - इब्रानियों ६:१०


बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों ३:७-१५

1Co 3:7 इसलिये न तो लगाने वाला कुछ है, और न सींचने वाला, परन्‍तु परमेश्वर जो बढ़ाने वाला है।
1Co 3:8 लगाने वाला और सींचने वाला दानों एक हैं; परन्‍तु हर एक व्यक्ति अपने ही परिश्र्म के अनुसार अपनी ही मजदूरी पाएगा।
1Co 3:9 क्‍योंकि हम परमेश्वर के सहकर्मी हैं; तुम परमेश्वर की खेती और परमेश्वर की रचना हो।
1Co 3:10 परमेश्वर के उस अनुग्रह के अनुसार, जो मुझे दिया गया, मैं ने बुद्धिमान राजमिस्त्री की नाईं नेव डाली, और दूसरा उस पर रद्दा रखता है, परन्‍तु हर एक मनुष्य चौकस रहे, कि वह उस पर कैसा रद्दा रखता है।
1Co 3:11 क्‍योंकि उस नेव को छोड़ जो पड़ी है, और वह यीशु मसीह है कोई दूसरी नेव नहीं डाल सकता।
1Co 3:12 और यदि कोई इस नेव पर सोना या चान्‍दी या बहुमोल पत्थर या काठ या घास या फूस का रद्दा रखता है।
1Co 3:13 तो हर एक का काम प्रगट हो जाएगा, क्‍योंकि वह दिन उसे बताएगा; इसलिये कि आग के साथ प्रगट होगा: और वह आग हर एक का काम परखेगी कि कैसा है?
1Co 3:14 जिस का काम उस पर बना हुआ स्थिर रहेगा, वह मजदूरी पाएगा।
1Co 3:15 और यदि किसी का काम जल जाएगा, तो हानि उठाएगा; पर वह आप बच जाएगा परन्‍तु जलते जलते।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ९१-९३
  • रोमियों १५:१-१३

रविवार, 14 अगस्त 2011

परमेश्वर पिता की विश्वासयोग्यता

हडसन टेलर, जो China Inland Mission के संस्थापक थे, ने अपनी डायरी में लिखा: "हमारा स्वर्गीय परमेश्वर पिता बहुत अनुभवी पिता है। वह भली भांति जानता है कि उसके बच्चे जब प्रातः उठते हैं तो वे भूखे होते हैं, वह सदैव उनके लिए प्रातः का नाशता उपलब्ध रखता है, और उन्हें रात को भूखे भी नहीं सोने देता है। वह ४० वर्ष तक बियाबान की यात्रा में ३० लाख इस्त्राएलियों को प्रतिदिन उनका भोजन पानी उपलब्ध कराता रहा। हम यह नहीं कहते कि वह ३० लाख मिशनरियों को चीन में सेवकाई के लिए भेजेगा, लेकिन यदि वह भेजे भी, तो विश्वास रखो कि उन सब के जीवन की आवश्यक्ताओं के लिए उसके पास पर्याप्त व्यवस्था भी होगी। परमेश्वर का कार्य यदि परमेश्वर के तरीके से किया जाए तो उसमें कभी परमेश्वर के संसाधनों की घटी नहीं होगी।"

हडसन टेलर को परमेश्वर की विश्वासयोग्यता में अटूट विश्वास था, और परमेश्वर ने कभी उसके विश्वास को टूटने नहीं दिया, जो कार्य टेलर ने आरंभ किया परमेश्वर ने उसे अद्भुत रीति से संभाला और स्थापित किया। हम कमज़ोर हैं किंतु हमारा स्वर्गीय पिता सर्वसामर्थी है; हमारी भावनाएं बदल सकती हैं परन्तु वह सदा स्थिर रहता है, कभी नहीं बदलता। सारी सृष्टी उसकी स्थिरता और विश्वासयोग्यता का प्रमाण है।

प्रेरित पौलुस ने उसके विष्य में लिखा:"परमेश्वर सच्‍चा है, जिस ने तुम को अपने पुत्र हमारे प्रभु यीशु मसीह की संगति में बुलाया है।" (१ कुरिन्थियों १:९)। मसिही विश्वासी के लिए वर्तमान के लिए उसकी सामर्थ और भविष्य के लिए उसकी आशा उसकी अपनी योग्यता, कौशल और सामर्थ पर निर्भर नहीं, वरन परमेश्वर की विश्वासयोग्यता पर निर्भर है।

जीवन के हर मोड़ पर हर परिस्थिति के लिए प्रत्येक विश्वासी अपने पिता की विश्वासयोग्यता पर बिना झिझके भरोसा रख सकता है। - पौल वैन गोर्डर


जो अपने आप को परमेश्वर के हाथों में छोड़ देता है, परमेश्वर उसे कभी असहाय नहीं छोड़ता।

हम मिट नहीं गए, यह यहोवा की महाकरुणा का फल है, क्योंकि उसकी दया अमर है। प्रति भोर वह नई होती रहती है; तेरी सच्चाई महान है। - विलपगीत ३:२२, २३


बाइबल पाठ: भजन १०७:१-१५

Psa 107:1 यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है और उसकी करूणा सदा की है!
Psa 107:2 यहोवा के छुड़ाए हुए ऐसा ही कहें, जिन्हें उस ने द्रोही के हाथ से दाम देकर छुड़ा लिया है,
Psa 107:3 और उन्हें देश देश से पूरब- पश्चिम, उत्तर और दक्खिन से इकट्ठा किया है।
Psa 107:4 वे जंगल में मरूभूमि के मार्ग पर भटकते फिरे, और कोई बसा हुआ नगर न पाया;
Psa 107:5 भूख और प्यास के मारे, वे विकल हो गए।
Psa 107:6 तब उन्होंने संकट में यहोवा की दोहाई दी, और उस ने उनको सकेती से छुड़ाया;
Psa 107:7 और उनको ठीक मार्ग पर चलाया, ताकि वे बसने के लिये किसी नगर को जा पहुंचें।
Psa 107:8 लोग यहोवा की करूणा के कारण, और उन आश्चर्यकर्मों के कारण, जो वह मनुष्यों के लिये करता है, उसका धन्यवाद करें!
Psa 107:9 क्योंकि वह अभिलाषी जीव को सन्तुष्ट करता है, और भूखे को उत्तम पदार्थों से तृप्त करता है।
Psa 107:10 जो अन्धियारे और मृत्यु की छाया में बैठे, और दु:ख में पड़े और बेड़ियों से जकड़े हुए थे,
Psa 107:11 इसलिये कि वे ईश्वर के वचनों के विरूद्ध चले, और परमप्रधान की सम्मति को तुच्छ जाना।
Psa 107:12 जब उसने उनको कष्ट के द्वारा दबाया; वे ठोकर खाकर गिर पड़े, और उनको कोई सहायक न मिला।
Psa 107:13 तब उन्होंने संकट में यहोवा की दोहाई दी, और उस ने सकेती से उनका उद्धार किया;
Psa 107:14 उस ने उनको अन्धियारे और मृत्यु की छाया में से निकाल लिया और उनके बन्धनों को तोड़ डाला।
Psa 107:15 लोग यहोवा की करूणा के कारण, और उन आश्चर्यकर्मों के कारण जो वह मनुष्यों के लिये करता है, उसका धन्यवाद करें!

एक साल में बाइबल:
  • भजन ८९-९०
  • रोमियों १४

शनिवार, 13 अगस्त 2011

परमेश्वर के उद्देश्य

एक युवती को बहुत दुख हुआ जब उसकी मंगनी टूट गई और जिस से उसकी शादी तय हुई थी उस से सारे संबंध समाप्त हो गए। लेकिन आज वह उस दुख की घड़ी के लिए परमेश्वर की धन्यवादी है, उस को आनन्द से याद करती है। अब जो उसका पति है वह एक अच्छा मसीही जीवन साथी है, जबकि जिससे उसकी मंगनी टूटी थी वह बहुत लापरवाह निकला और अब तक दो बार उसका तलाक हो चुका है।

परमेश्वर के वचन बाइबल में एक पुस्तक है होशे की पुस्तक। होशे उस परमेश्वर के नबी का नाम है जिसके द्वारा परमेश्वर ने वह पुस्तक लिखवाई थी। जब पुस्तक लिखे जाने का समय आया तो परमेश्वर ने होशे के द्वारा उसके जीवन की आप बीती लिखवाई। लिखने के समय होशे ने अपने बीते समय को जिस परिपेक्ष में देखा वह उससे भिन्न था जिसमें उसने उन घटानाओं के घटित होते समय देखा था। होशे से परमेश्वर ने गोमेर नामक एक स्त्री से ब्याह करने को कहा। ब्याह के कुछ समय बाद गोमेर ने होशे को छोड़ दिया, वह पराए पुरषों के साथ रहने लगी और उनसे उसे सन्तान भी हुई और वह वेश्यवृति में भी पड़ गई। एक टूटे हृदय के साथ होशे परमेश्वर के कार्य भी करता रहा और गोमेर के फिर बदले जाने और फिर से मिलन की लालसा रखे हुए उसके प्रति अपने प्रेम को बनाए भी रहा।

अन्ततः होशे गोमेर को मुक्त करवा के वापस उसे घर ले कर आ सका। यह सब कुछ परमेश्वर और उसकी प्रजा बेवफा इस्त्राएल के संबंधों का नाटकीय चित्रण था जो इस्त्राएल के प्रति परमेश्वर के कभी न अन्त होने वाले प्रेम को दिखाता है साथ ही गोमेर के समान इस्त्राएल का परमेश्वर को तुच्छ जानने को भी दिखाता है। यह आने वाले समय में इस्त्राएल के परमेश्वर की ओर पुनः मुड़ कर फिर सदा काल तक उसके साथ बने रहने को भी दर्शाता है। मेरा मानना है कि इसी कारण होशे अपनी पुस्तक के आरंभ में ही कह सका कि परमेश्वर ने अपने अद्भुत उद्देश्यों और भविष्य ज्ञान के अन्तर्गत ही उसे गोमेर से विवाह करने की आज्ञा दी थी।

आज इस पृथ्वी पर हमें कई बातें समझ में नहीं आतीं, उन पर विस्मय होता है और लगता है कि परमेश्वर अन्याय देख कर भी खामोश है, कुछ परवाह नहीं करता। जब हम स्वर्ग पहुँचेंगे तब समझ पाएंगे कि पृथ्वी पर होने वाली घटानाओं के उद्देश्य क्या थे। परमेश्वर का धैर्य और अपने हाथ को रोके रखना अकारण नहीं है। वह नहीं चाहता कि कोई उद्धार के अवसर से वंचित रहे और कोई भी पश्चाताप करने का अवसर न मिलने की बात कहने पाए।

सभी घटनाओं में हम भजनकार के साथ कह सकते हैं: "तू सम्मति देता हुआ, मेरी अगुवाई करेगा, और तब मेरी महिमा कर के मुझ को अपने पास रखेगा।" - हर्ब वैण्डर लुग्ट


सर्वज्ञानी परमेश्वर के हाथ में अपने अनजाने भविष्य को सौंप देने से कभी न घबराएं।

तू सम्मति देता हुआ, मेरी अगुवाई करेगा, और तब मेरी महिमा कर के मुझ को अपने पास रखेगा। - भजन ७३:२४


बाइबल पाठ: २ पतरस ३:१-१८

2Pe 3:1 हे प्रियो, अब मैं तुम्हें यह दूसरी पत्री लिखता हूं, और दोनों में सुधि दिला कर तुम्हारे शुद्ध मन को उभारता हूं।
2Pe 3:2 कि तुम उन बातों को, जो पवित्र भविश्यद्वक्ताओं ने पहिले से कही हैं और प्रभु, और उद्धारकर्ता की उस आज्ञा को स्मरण करो, जो तुम्हारे प्रेरितों के द्वारा दी गई थीं।
2Pe 3:3 और यह पहिले जान लो, कि अन्‍तिम दिनों में हंसी ठट्ठा करने वाले आएंगे, जो अपनी ही अभिलाषाओं के अनुसार चलेंगे।
2Pe 3:4 और कहेंगे, उसके आने की प्रतिज्ञा कहां गई; क्‍योंकि जब से बाप-दादे सो गए हैं, सब कुछ वैसा ही है, जैसा सृष्‍टि के आरम्भ से था?
2Pe 3:5 वे तो जान बूझ कर यह भूल गए, कि परमेश्वर के वचन के द्वारा से आकाश प्राचीन काल से वर्तमान है और पृथ्वी भी जल में से बनी और जल में स्थिर है।
2Pe 3:6 इन्‍हीं के द्वारा उस युग का जगत जल में डूब कर नाश हो गया।
2Pe 3:7 पर वर्तमान काल के आकाश और पृथ्वी उसी वचन के द्वारा इसलिये रखे हैं, कि जलाए जाएं और वह भक्तिहीन मनुष्यों के न्याय और नाश होने के दिन तक ऐसे ही रखे रहेंगे।
2Pe 3:8 हे प्रियों, यह एक बात तुम से छिपी न रहे, कि प्रभु के यहां एक दिन हजार वर्ष के बराबर है, और हजार वर्ष एक दिन के बराबर हैं।
2Pe 3:9 प्रभु अपनी प्रतिज्ञा के विषय में देर नहीं करता, जैसी देर कितने लोग समझते हैं; पर तुम्हारे विषय में धीरज धरता है, और नहीं चाहता, कि कोई नाश हो, वबरन यह कि सब को मन फिराव का अवसर मिले।
2Pe 3:10 परन्‍तु प्रभु का दिन चोर की नाईं आ जाएगा, उस दिन आकाश बड़ी हड़हड़ाहट के शब्‍द से जाता रहेगा, और तत्‍व बहुत ही तप्‍त होकर पिघल जाएंगे, और पृथ्वी और उस पर के काम जल जाऐंगे।
2Pe 3:11 तो जब कि ये सब वस्‍तुएं, इस रीति से पिघलने वाली हैं, तो तुम्हें पवित्र चाल चलन और भक्ति में कैसे मनुष्य होना चाहिए।
2Pe 3:12 और परमेश्वर के उस दिन की बाट किस रीति से जोहना चाहिए और उसके जल्द आने के लिये कैसा यत्‍न करना चाहिए; जिस के कारण आकाश आग से पिघल जाएंगे, और आकाश के गण बहुत ही तप्‍त होकर गल जाएंगे।
2Pe 3:13 पर उस की प्रतिज्ञा के अनुसार हम एक नए आकाश और नई पृथ्वी की आस देखते हैं जिन में धामिर्कता वास करेगी।
2Pe 3:14 इसलिये, हे प्रियो, जब कि तुम इन बातों की आस देखते हो तो यत्‍न करो कि तुम शान्‍ति से उसके साम्हने निष्‍कलंक और निर्दोष ठहरो।
2Pe 3:15 और हमारे प्रभु के धीरज को उद्धार समझो, जैसे हमारे प्रिय भाई पौलुस न भी उस ज्ञान के अनुसार जो उसे मिला, तुम्हें लिखा है।
2Pe 3:16 वैसे ही उस ने अपनी सब पत्रियों में भी इन बातों की चर्चा की है जिन में कितनी बातें ऐसी है, जिनका समझना कठिन है, और अनपढ़ और चंचल लोग उन के अर्थों को भी पवित्र शास्‍त्र की और बातों की नाईं खींच तान कर अपने ही नाश का कारण बनाते हैं।
2Pe 3:17 इसलिये हे प्रियो तुम लोग पहिले ही से इन बातों को जान कर चौकस रहो, ताकि अधमिर्यों के भ्रम में फंस कर अपनी स्थिरता को हाथ से कहीं खो न दो।
2Pe 3:18 पर हमारे प्रभु, और उद्धारकर्ता यीशु मसीह के अनुग्रह और पहचान में बढ़ते जाओ। उसी की महिमा अब भी हो, और युगानुयुग होती रहे। आमीन।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ८७-८८
  • रोमियों १३

शुक्रवार, 12 अगस्त 2011

दर्शक कौन?

गोल्फ के व्यावसायिक खिलाड़ी रे फ्लोयड के खेल जीवन से संबंधित एक घटना ईमानदारी की मिसाल है। गोल्फ के खेल के नियमों के अनुसार यदि मारने से पहले गेंद ज़रा भी हिलती है तो खिलाड़ी को उसे मारने का अधिकार नहीं रहता, उसे दण्ड के रूप में अपनी बारी छोड़कर एक अतिरिक्त बारी लेनी होती है। रे एक प्रतियोगिता में भाग ले रहे थे जिसका ईनाम और एक बहुत बड़ी राशि थी। रे प्रतियोगिता के अग्रिम खिलाड़ियों में से एक थे, ऐसी स्थिति में अतिरिक्त बारी लेना या कोई अंक गंवाना उन के लिए प्रतियोगिता हारने के समान हो सकता था। अपनी बारी उन्हें गेंद को जिस छेद में डालना था, वे उस छेद के बहुत निकट गेंद को पहुँचा चुके थे और अब गेंद को घर पहुँचाना उनके लिए मात्र औपचारिकता ही रह गई थी। जब वे अपनी बारी लेने के लिए गेंद के निकट आए तो उन्हों ने देखा कि गेंद हलकी सी हिल गई है।

एक अन्य गोल्फ खिलाड़ी डेविड होलमैन बताते हैं कि ऐसी दशा में अधिकांश खिलाड़ी क्या करते: "वे अपने सिर को इधर उधर झटकते और अपने हाथ तेज़ी से हवा में इधर उधर हिलाते मानो उन पर किसी मधुमक्खी का हमला हो रहा हो और वे उससे बचने का प्रयास कर रहे हैं; फिर वे गेंद के समीप से हट कर अपनी आंख को पोंछने और साफ करने का उपक्रम करते, मानों उनकी आंख में कोई रेत का कण पड़ गया हो। इस सारी प्रक्रिया में उन की नज़रें वहां उपस्थित अन्य खिलाड़ीयों और लोगों को भांपती रहतीं कि कहीं किसी ने गेंद के हिलने को देख तो नहीं लिया। यदि वे निश्चिंत होते कि किसी ने नहीं देखा तो बे झिझक आगे बढ़कर गेंद को छेद में मार देते और अपने अंक बना लेते।"

किंतु रे फ्लोयड ने ऐसा नहीं किया। उसने गज़ब की ईमानदारी दिखाते हुए अपनी बारी छोड़ दी, अतिरिक्त बारी ली और अपने अंक बनाने से चूक गए।

परमेश्वर के वचन बाइबल में अय्युब ने भी उन बातों के विष्य में जिन में उसे कोई मनुष्य देख नहीं रहा था, अद्भुत ईमानदारी दिखाई। उसने अपने चरित्र की खराई को परमेश्वर का भय मान कर और बुराई से दूरी बनाए रखने के द्वारा कायम रखा। अय्युब जानता था कि परमेश्वर की निगाहें उस हर समय पर बनी हुई हैं, वह मनुष्यों से छुपा सकता है लेकिन परमेश्वर से नहीं। उसके लिए अपनी ईमानदारी और खराई को बनाए रखने के लिए यही पर्याप्त कारण था।

हमारी खराई और ईमानदारी की वास्तविक परख तब होती है जब कोई हमें देख नहीं रहा होता। ऐसे में यदि हम इस बात को ध्यान रखें कि और कोई हमारा दर्शक हो न हो किंतु परमेश्वर प्रतिपल हमारा दर्शक बना रहता है, तो हमारी ईमानदारी और खराई का स्तर स्वतः ही सुधर जाएगा। - मार्ट डी हॉन


सत्य के लिए नुकसान उठाना, झूठ के लिए पुरस्कार पाने से उत्तम है।

क्या वह मेरी गति नहीं देखता और क्या वह मेरे पग पग नहीं गिनता? - अय्युब ३१:४


बाइबल पाठ: अय्युब ३१:१-८

Job 31:1 मैं ने अपनी आंखों के विषय वाचा बान्धी है, फिर मैं किसी कुंवारी पर क्यों कर आंखें लगाऊं?
Job 31:2 क्योंकि ईश्वर स्वर्ग से कौन सा अंश और सर्वशक्तिमान ऊपर से कौन सी सम्पत्ति बांटता है?
Job 31:3 क्या वह कुटिल मनुष्यों के लिये विपत्ति और अनर्थ काम करने वालों के लिये सत्यानाश का कारण नहीं है?
Job 31:4 क्या वह मेरी गति नहीं देखता और क्या वह मेरे पग पग नहीं गिनता?
Job 31:5 यदि मैं व्यर्थ चाल चालता हूं, वा कपट करने के लिये मेरे पैर दौड़े हों;
Job 31:6 (तो मैं धर्म के तराजू में तौला जाऊं, ताकि ईश्वर मेरी खराई को जान ले)।
Job 31:7 यदि मेरे पग मार्ग से बहक गए हों, और मेरा मन मेरी आंखो की देखी चाल चला हो, वा मेरे हाथों को कुछ कलंक लगा हो;
Job 31:8 तो मैं बीज बोऊं, परन्तु दूसरा खाए; वरन मेरे खेत की उपज उखाड़ डाली जाए।

]एक साल में बाइबल:
  • भजन ८४-८६
  • रोमियों १२

गुरुवार, 11 अगस्त 2011

अपनी ईमानदारी के लिए प्रसिद्ध

एक पत्रिका Moody Monthly में जौन सौउटर का लेख छपा जिसमें उन्होंने अपनी आप-बीती को बताया; उन्होंने लिखा, "रात के ११ बज रहे थे, मैं छपाई करने वाली एक बड़ी सी मशीन को नियंत्रण करने वाले उपकरणों के सामने बैठा था, मेरे पीछे पत्रिका में विज्ञापन छपवाने के लिए ज़िम्मेदार एक व्यक्ति खड़ा मेरे कंधों के ऊपर से मेरे काम को देख रहा था; वो एक मसीही विश्वासी था। उस व्यक्ति ने मुझे सोते से जगा कर बुलाया था जिससे कि वह अपने एक ग्राहक के लिए अचानक से आए कार्य को तुरंत पूरा कर के दे सके। मेरा दिमाग़ मुझे कह रहा था कि इस अचानक आए अतिरिक्त कार्य के लिए वह मुझे कोई मेहनताना नहीं देने वाला, लेकिन मैंने ऐसी सभी भावनाओं को एक किनारे कर दिया; क्योंकि मेरा मन मुझे कह रहा था कि आखिर वह व्यक्ति भी तो मसीह में मेरा भाई, नया जन्म पाया हुआ मेरा सह-विश्वासी है, जो अवश्य ही उसके द्वारा मांगी गई मेरी असमय की अतिरिक्त मेहनत का बिल विश्वासयोग्यता से चुकाएगा। लेकिन मेरा मस्तिष्क सही निकला, उसने उस अनायास कार्य के लिए अपने ग्राहक से तो कमा लिया, लेकिन मेरी मेहनत के लिए मुझे कुछ नहीं दिया। दुर्भाग्य यह है कि मेरे लिए यह अनुभव कोई नया नहीं था। मेरे अनुभवों ने मुझे सिखाया है कि मसीही विश्वासियों की कथनी और करनी में बहुत अन्तर होता है।"

मसीही विश्वासियों के चरित्र पर यह कितनी बुरी टिप्पणी थी, मसीह के नाम पर यह कैसा बड़ा धब्बा था। कड़ुवी सच्चाई यही है कि बहुतेरे मसीही विश्वासियों ने आज के समाज की इस बात को अपने जीवनों में ढाल लिया है कि जीवन में ईमानदारी आवश्य्क नहीं है, और आज उनके व्यक्तिगत जीवनों में ईमानदारी कम ही देखने को मिलती है। लेकिन बाइबल की शिक्षा, मसीह के जीवन का उदाहरण और आरंभिक मसीही मण्डली के सद्स्यों के जीवन चरित्र इसके बिलकुल विपरीत हैं। प्रेरित पौलुस ने कहा, "तुम मेरी सी चाल चलो जैसी मैं मसीह की सी चाल चलता हूँ" ( १ कुरिन्थियों ११:१)। मसीह यीशु के विष्य में वचन कहता है, "न तो उस ने पाप किया, और न उसके मुंह से छल की कोई बात निकली" (१ पतरस २:२२); तथा "...वह सब बातों में हमारी नाई परखा तो गया, तौ भी निष्‍पाप निकला" (इब्रानियों ४:५)।

यदि हम ने अपने किए वायदे अधूरे छोड़े हुए हैं तो उन्हें पूरा निभाने के लिए कदम बढ़ाएं; यदि किसी का कोई कर्ज़ या कोई बकाया बाकी है, तो तुरंत उसे चुका दें। जब कभी हमारे सामने पाप और बुराई के साथ समझौता करने का, या सत्य को उलझाने बिगाड़ने का प्रलोभन हो तो हमें तुरंत ऐसे विचारों को अपनी पीठ पीछे फेंक देना चाहिए और दृढ़ता से केवल वही करना चाहिए जो परमेश्वर के निकट सही है, चाहे उसकी कोई भी कीमत क्यों न चुकानी पड़े। प्रत्येक मसीही विश्वासी को वह जन होना चाहिए जो हर परिस्थिति में, हर कीमत पर, ईमानदारी से चलता हो।

संसार में हम वे लोग हों जो अपने प्रभु के समान अपनी अपनी खराई के लिए जाने जाएं, अपनी ईमानदारी के लिए प्रसिद्ध हों। - डेव एग्नर


कोई भी कर्ज़ कभी इतना पुराना नहीं होता कि चुकाया ना जा सके।

अपने आप को स्‍वतंत्र जानो पर अपनी इस स्‍वतंत्रता को बुराई के लिये आड़ न बनाओ, परन्‍तु अपने आप को परमेश्वर के दास समझ कर चलो। - १ पतरस २:१६


बाइबल पाठ: १ पतरस २:९-२५

1Pe 2:9 पर तुम एक चुना हुआ वंश, और राज-पदधारी, याजकों का समाज, और पवित्र लोग, और ( परमेश्वर की ) निज प्रजा हो, इसलिये कि जिस ने तुम्हें अन्‍धकार में से अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाया है, उसके गुण प्रगट करो।
1Pe 2:10 तुम पहिले तो कुछ भी नहीं थे, पर अब परमेश्वर ही प्रजा हो: तुम पर दया नहीं हुई थी पर अब तुम पर दया हुई है।
1Pe 2:11 हे प्रियों मैं तुम से बिनती करता हूं, कि तुम अपने आप को परदेशी और यात्री जान कर उन सांसारिक अभिलाषाओं से जो आत्म से युद्ध करती हैं, बचे रहो।
1Pe 2:12 अन्यजातियों में तुम्हारा चालचलन भला हो; इसलिये कि जिन जिन बातों में वे तुम्हें कुकर्मी जान कर बदनाम करते हैं, वे तुम्हारे भले कामों को देख कर उन्‍हीं के कारण कृपा दृष्‍टि के दिन परमेश्वर की महिमा करें।
1Pe 2:13 प्रभु के लिये मनुष्यों के ठहराए हुए हर एक प्रबन्‍ध के आधीन में रहो, राजा के इसलिये कि वह सब पर प्रधान है।
1Pe 2:14 और हाकिमों के, क्‍योंकि वे कुकिर्मयों को दण्‍ड देने और सुकिर्मयों की प्रशंसा के लिये उसके भेजे हुए हैं।
1Pe 2:15 क्‍योंकि परमेश्वर की इच्‍छा यह है, कि तुम भले काम करने से निर्बुद्धि लोगों की अज्ञानता की बातों को बन्‍द कर दो।
1Pe 2:16 और अपने आप को स्‍वतंत्र जानो पर अपनी इस स्‍वतंत्रता को बुराई के लिये आड़ न बनाओ, परन्‍तु अपने आप को परमेश्वर के दास समझ कर चलो।
1Pe 2:17 सब का आदर करो, भाइयों से प्रेम रखो, परमेश्वर से डरो, राजा का सम्मान करो।
1Pe 2:18 हे सेवकों, हर प्रकार के भय के साथ अपने स्‍वामियों के आधीन रहो, न केवल भलों और नम्रों के, पर कुटिलों के भी।
1Pe 2:19 क्‍योंकि यदि कोई परमेश्वर का विचार कर के अन्याय से दुख उठाता हुआ क्‍लेश सहता है, तो यह सुहावना है।
1Pe 2:20 क्‍योंकि यदि तुम ने अपराध कर के घूसे खाए और धीरज धरा, तो उस में क्‍या बड़ाई की बात है? पर यदि भला काम करके दुख उठाते हो और धीरज धरते हो, तो यह परमेश्वर को भाता है।
1Pe 2:21 और तुम इसी के लिये बुलाए भी गए हो क्‍योंकि मसीह भी तुम्हारे लिये दुख उठा कर, तुम्हें एक आदर्श दे गया है, कि तुम भी उसके चिन्‍ह पर चलो।
1Pe 2:22 न तो उस ने पाप किया, और न उसके मुंह से छल की कोई बात निकली।
1Pe 2:23 वह गाली सुन कर गाली नहीं देता था, और दुख उठा कर किसी को भी धमकी नहीं देता था, पर अपने आप को सच्‍चे न्यायी के हाथ में सौपता था।
1Pe 2:24 वह आप ही हमारे पापों को अपनी देह पर लिए हुए क्रूस पर चढ़ गया जिस से हम पापों के लिये मर कर के धामिर्कता के लिये जीवन बिताएं: उसी के मार खाने से तुम चंगे हुए।
1Pe 2:25 क्‍योंकि तुम पहिले भटकी हुई भेड़ों की नाईं थे, पर अब अपने प्राणों के रखवाले और अध्यक्ष के पास फिर आ गए हो।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ८१-८३
  • रोमियों ११:१९-३६

बुधवार, 10 अगस्त 2011

हे प्रभु, आप मुझे ईमानदार बनाए रखना

औस्ट्रेलिया के प्रथम गवरनर जनरल, लौर्ड होपटाउन को विरासत में एक पुराना बहीखाता मिला जिसे चमड़े की जिल्द से ढक कर, उसपर पीतल के किनारे लगाकर सुरक्षित बनाया गया था। यह बहीखाता उनकी सबसे प्रीय संपत्तियों में से एक थी। इस बहीखाते को ३०० वर्ष पूर्व उनके एक पूर्वज जौन होपटाउन ने, जब उन्होंने इंगलैंड के एडिनबरोह शहर में अपना वयवसाय आरंभ किया, तब लिखना आरंभ किया था। जब यह पोथी लौर्ड होपटाउन के पास पारिवारिक विरासत के रूप में पहुँची तो उन्होंने उसे खोल कर देखा, और बही के प्रथम पृष्ट पर उन्हें अपने पूर्वज जौन होपटाउन की एक प्रार्थना लिखी मिली, "हे प्रभु मुझे और इस पुस्तक को आप ईमानदार बनाए रखना।" जौन होपटाउन जानते थे कि यदि उन्हें ईमानदार रहना है तो यह केवल परमेश्वर की सहायता ही से संभव है।

प्रत्येक मसीही विश्वासी के लिए ईमानदारी अनिवार्य है। सत्य के रूप को बदलने के लिए उसे शब्दों और तातपर्यों के जाल में उलझाकर प्रस्तुत करना, तथ्यों को छुपाना या तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करना, आँकड़ों में फेरबदल करना, किसी बात को गलत रूप से प्रस्तुत करना आदि वे गैर-ईमनदारी के व्यवहार हैं जिनसे परमेश्वर घृणा करता है। यदि हम नौकरी करते हैं तो हमें अपने नियोक्ता को पूरे दिन का काम देना है, हमारे नौकरी के समय के उपयोग पर किसी को ऊंगली उठाने का मौका नहीं मिलना चाहिए। ऐसा न करना हमारी गवाही के विरुद्ध है और हमें बेईमान बनाता है। मसीही विश्वासी को ना केवल कामों में वरन अपने उद्देश्यों में भी ईमानदार होना चाहिए। इस कारण से और उद्धार द्वारा प्राप्त अपने नए जीवन-चरित्र को प्रगट करने के लिए हर एक मसीही विश्वासी को परमेश्वर तथा मनुष्यों, दोनो के समक्ष अपनी ईमानदारी को बनाए रखने के प्रयास में सदा लगे रहना चाहिए।

यह आसान कार्य नहीं है। प्रतिदिन और प्रतिपल शत्रु शैतान हमें समझौते और पाप में फंसा कर हमारी ईमानदारी का मज़ाक बनाने के प्रयत्न में लगा रहता है। संसार के प्रलोभन और साथियों तथा परिवार के लोगों के दबाव, घर की आवश्यक्ताएं, विपरीत परिस्थितियाँ, सताव, लोगों का अकारण बैर और विरोध आदि हर दाँव शैतान हमारी गवाही को बिगाड़ने और हमें ईमानदार कहलाए जाने से हटाने के लिए प्रयोग करता है। इसलिए ईमानदारी के इस उद्देश्य में हमें परमेश्वर की सहायता और सामर्थ अवश्य है।

प्रत्येक मसीही विश्वासी की प्रतिदिन की प्रार्थना होनी चाहिए, "हे प्रभु, आप मुझे ईमानदार बनाए रखना।" - पौल वैन गौर्डर


समझ-बूझ की पुस्तक का प्रथम अध्याय ईमानदारी है।

क्‍योंकि जो बातें केवल प्रभु ही के निकट नहीं, परन्‍तु मनुष्यों के निकट भी भली हैं हम उन की चिन्‍ता करते हैं। - २ कुरिन्थियों ८:२१


बाइबल पाठ: १ पतरस ४:११-१९

1Pe 4:11 यदि कोई बोले, तो ऐसा बोले, मानों परमेश्वर का वचन है; यदि कोई सेवा करे तो उस शक्ति से करे जो परमेश्वर देता है; जिस से सब बातों मे यीशु मसीह के द्वारा, परमेश्वर की महिमा प्रगट हो: महिमा और साम्राज्य युगानुयुग उसी की है। आमीन।
1Pe 4:12 हे प्रियों, जो दुख रूपी अग्‍नि तुम्हारे परखने के लिये तुम में भड़की है, इस से यह समझकर अचम्भा न करो कि कोई अनोखी बात तुम पर बीत रही है।
1Pe 4:13 पर जैसे जैसे मसीह के दुखों में सहभागी होते हो, आनन्‍द करो, जिस से उसकी महिमा के प्रगट होते समय भी तुम आनन्‍दित और मगन हो।
1Pe 4:14 फिर यदि मसीह के नाम के लिये तुम्हारी निन्‍दा की जाती है, तो धन्य हो क्‍योंकि महिमा का आत्मा, जो परमेश्वर का आत्मा है, तुम पर छाया करता है।
1Pe 4:15 तुम में से कोई व्यक्ति हत्यारा या चोर, या कुकर्मी होने, या पराए काम में हाथ डालने के कारण दुख न पाए।
1Pe 4:16 पर यदि मसीही होने के कारण दुख पाए, तो लज्ज़ित न हो, पर इस बात के लिये परमेश्वर की महिमा करे।
1Pe 4:17 क्‍योंकि वह समय आ पहुंचा है, कि पहिले परमेश्वर के लोगों का न्याय किया जाए, और जब कि न्याय का आरम्भ हम ही से होगा तो उन का क्‍या अन्‍त होगा जो परमेश्वर के सुसमाचार को नहीं मानते?
1Pe 4:18 और यदि धर्मी व्यक्ति ही कठिनता से उद्धार पाएगा, तो भक्तिहीन और पापी का क्‍या ठिकाना?
1Pe 4:19 इसलिये जो परमेश्वर की इच्‍छा के अनुसार दुख उठाते हैं, वे भलाई करते हुए, अपने अपने प्राण को विश्वासयोग्य सृजनहार के हाथ में सौंप दें।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ७९-८०
  • रोमियों ११:१-१८

मंगलवार, 9 अगस्त 2011

सफलता के इच्छुक?

संसार में सफलता प्राप्त करने के लिए लोग सिवाय ईमानदारी के बाकी हर तरीका आज़माने को तैयार रहते हैं। झूठ, चापलूसी, रिश्वत, धोखा, चोरी, स्वार्थ, दूसरों का अनुचित उपयोग, आँकड़ों में हेरा-फेरी आदि सब सफलता प्राप्त करने के अनिवार्य साधनों में गिने जाते हैं।

अमेरिका में एक बहुत गरीब युवक था - जौन डब्यु येट्स। उसे अपने जूते के तले के छेद ढांपने के लिए गत्ते के पतावे अपने जूते में लगाने पड़ते थे। लेकिन १५ वर्ष की आयु में उसने एक बैंक में अपनी बहुत ही थोड़ी सी कमाई से "जौन डब्ल्यु येट्स एण्ड कम्पनी" के नाम से एक खाता खोला, और इस कम्पनी के संचालन के लिए उसने परमेश्वर प्रभु को अपना सहयोगी तथा प्रबन्धक माना। उसने प्रभु यीशु में अपने विश्वास और उस विश्वास की ईमानदारी के नियमों के साथ व्यापार किया, और एक बड़ा करोड़पति बना, उसकी कम्पनी अमेरिका की शीर्ष कम्पनियों में से एक बनी।

स्कौटलैण्ड के ओस्वाल्ड चैम्बर्स ने अपनी युवा अवस्था में इतनी कला प्रतिभा दिखाई कि १८ वर्ष की आयु में ही उसे यूरोप के महान और विख्यात कलाकारों के साथ काम करके सीखने के आमंत्रण मिले। लेकिन उसने इन आमंत्रणों को अस्वीकार कर दिया, कला और उसकी ख्याति और संपदा को भुलाकर एक छोटे से बाइबल स्कूल में बाइबल की शिक्षा पाने के लिए दाखिला ले लिया, जहाँ आगे चलकर वह एक अध्यापक भी बन गया। बाद में वह मिस्त्र गया और ब्रिटिश सैनिकों की आत्मिक आवश्यक्ताओं की पूर्ति के लिए उनके बीच काम किया। चैम्बर्स की मृत्यु ४० वर्ष की आयु में हो गई, लेकिन तब तक उसने अपनी विरासत के रूप में, परमेश्वर और भक्ति संबंधित लेखों एक बहुत महान और विशाल भण्डार छोड़ा, जो आज भी बहुत से लोगों के लिए प्रेर्णा और शिक्षा का स्त्रोत है और संसार में उसके आदर को बनाए हुए है।

परमेश्वर के वचन बाइबल का एक पात्र है, दानिएल; जिसे अपने देश इस्त्राएल से विस्थापित कर और बन्दी बना कर बाबुल लाया गया। दानिएल की जीवनी उसके विश्वास तथा बार बार अपने विश्वास के लिए अपने बन्धुआई के स्थान और अपने स्वामियों के समक्ष जान का जोखिम उठा कर भी कभी समझौता न करने की घटानाओं से भरी पड़ी है। इस दास बना कर लाए गए युवक दानिएल को उस के परमेश्वर ने उसके बन्धुवा बनाने वालों पर ही अधिपति तथा राजा का सबसे विश्वास पात्र बना दिया।

तीन अलग अलग समय और स्थान के व्यक्तियों के उदाहरण; तीनों में एक ही समानता - प्रत्येक ने निश्चय कर लिया था कि परमेश्वर की इच्छापूर्ति ही उनके जीवन का ध्येय होगा; तीनों ही सफलता के उन शिखरों पर पहुँचे जहाँ कोई मानव युक्ति उन्हें कभी नहीं पहुँचा सकती थी।

एक बार हम परमेश्वर के मार्ग पर चलने और उसकी इच्छापूर्ति का निर्णय ले लें और उसकी आज्ञाकारिता को अपना लक्षय बना लें, सफलता स्वतः ही किसी न किसी रूप में हमारे कदम चूमेगी। - हर्ब वैण्डर लुग्ट


परमेश्वर की इच्छा के बाहर कोई सफलता नहीं है; उसकी इच्छा के साथ कोई असफलता नहीं है।

जवान सिंहों को तो घटी होती और वे भूखे भी रह जाते हैं; परन्तु यहोवा के खोजियों को किसी भली वस्तु की घटी न होवेगी। - भजन ३४:१०

बाइबल पाठ: भजन ३४
Psa 34:1 मैं हर समय यहोवा को धन्य कहा करूंगा; उसकी स्तुति निरन्तर मेरे मुख से होती रहेगी।
Psa 34:2 मैं यहोवा पर घमण्ड करूंगा; नम्र लोग यह सुन कर आनन्दित होंगे।
Psa 34:3 मेरे साथ यहोवा की बड़ाई करो, और आओ हम मिल कर उसके नाम की स्तुति करें।
Psa 34:4 मैं यहोवा के पास गया, तब उस ने मेरी सुन ली, और मुझे पूरी रीति से निर्भय किया।
Psa 34:5 जिन्होंने उसकी ओर दृष्टि की उन्होंने ज्योति पाई और उनका मुंह कभी काला न होने पाया।
Psa 34:6 इस दीन जन ने पुकारा तब यहोवा ने सुन लिया, और उसको उसके सब कष्टों से छुड़ा लिया।
Psa 34:7 यहोवा के डरवैयों के चारों ओर उसका दूत छावनी किए हुए उनको बचाता है।
Psa 34:8 परख कर देखो कि यहोवा कैसा भला है! क्या ही धन्य है वह पुरूष जो उसकी शरण लेता है।
Psa 34:9 हे यहोवा के पवित्र लोगों, उसका भय मानो, क्योंकि उसके डरवैयों को किसी बात की घटी नहीं होती!
Psa 34:10 जवान सिंहों तो घटी होती और वे भूखे भी रह जाते हैं; परन्तु यहोवा के खोजियों को किसी भली वस्तु की घटी न होवेगी।
Psa 34:11 हे लड़कों, आओ, मेरी सुनो, मैं तुम को यहोवा का भय मानना सिखाऊंगा।
Psa 34:12 वह कौन मनुष्य है जो जीवन की इच्छा रखता, और दीर्घायु चाहता है ताकि भलाई देखे?
Psa 34:13 अपनी जीभ को बुराई से रोक रख, और अपने मुंह की चौकसी कर कि उस से छल की बात न निकले।
Psa 34:14 बुराई को छोड़ और भलाई कर; मेल को ढूंढ और उसी का पीछा कर।
Psa 34:15 यहोवा की आंखे धर्मियों पर लगी रहती हैं, और उसके कान भी उसकी दोहाई की ओर लगे रहते हैं।
Psa 34:16 यहोवा बुराई करने वालों के विमुख रहता है, ताकि उनका स्मरण पृथ्वी पर से मिटा डाले।
Psa 34:17 धर्मी दोहाई देते हैं और यहोवा सुनता है, और उनको सब विपत्तियों से छुड़ाता है।
Psa 34:18 यहोवा टूटे मन वालों के समीप रहता है, और पिसे हुओं का उद्वार करता है।
Psa 34:19 धर्मी पर बहुत सी विपत्तियां पड़ती तो हैं, परन्त यहोवा उस को उन सब से मुक्त करता है।
Psa 34:20 वह उसकी हड्डी हड्डी की रक्षा करता है; और उन में से एक भी टूटने नहीं पाती।
Psa 34:21 दुष्ट अपनी बुराई के द्वारा मारा जाएगा और धर्मी के बैरी दोषी ठहरेंगे।
Psa 34:22 यहोवा अपने दासों का प्राण मोल ले कर बचा लेता है और जितने उसके शरणागत हैं उन में से कोई भी दोषी न ठहरेगा।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ७७-७८
  • रोमियों १०

सोमवार, 8 अगस्त 2011

ईमानदारी की सच्चाई

दफतर के अधीक्षक ने अपनी सेक्रटेरी को निर्देश दिए कि कुछ वित्तीय काग़ज़ातों के आँकड़ों में फेर-बदल करे। सेक्रटेरी मसीही विश्वासी थी; उस ने ऐसा करने से इन्कार कर दिया। अधीक्षक नाराज़ हुआ और पूछा, "क्यों, क्या तुम ने अपने किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए कभी झूठ नहीं बोला?" अधीक्षक को सुनकर विसमय हुआ, क्योंकि सेक्रटरी का उत्तर फिर से "नहीं" था।

साद, मिस्त्र की राजधानी कायरो के ज़ारेयेद इलाके में रहता है, जो वहाँ का कूड़ा डालने का इलाका है। साद मसीही विश्वासी है और अपनी जीविका दिन भर कूड़ा बीन कर और उससे मिलने वाली चीज़ों को बेचकर चलाता है। साधारणतया वह दिन भर की कड़ी मेहनत के बाद लगभग २०-२५ रुपए के बराबर ही कमा पाता है। एक दिन उसे कूड़ा बीनते हुए, सोने की बनी एक कीमती घड़ी मिली। साद उस घड़ी को बेच कर अपने तथा अपने परिवार के लिए बहुत कुछ खरीद सकता था। वह तर्क दे सकता था कि उसे इस घड़ी की आवश्यक्ता इसके असली मालिक से अधिक है; या यह कि परमेश्वर ने उसकी सहायता के लिए इस घड़ी को उस तक पहुँचाया है। लेकिन वह न लालच में पड़ा और न उसने कोई तर्क दिया। उसने घड़ी के मलिक का पता लगा कर घड़ी उसे वापस कर दी। साद का विश्वास उसे सिखाता है जो उसका नहीं है, उसपर उसका कोई हक भी नहीं है, इसलिए ऐसी चीज़ों को अपने पास रखना उसके लिए गलत है।

ईमानदारी केवल झूठ बोलने से इन्कार मात्र नहीं है। ईमानदारी का अर्थ है सच्चाई के लिए अपनी आवाज़ उठाना तब भी जब खामोशी का गलत अभिप्राय निकलना संभव हो; ईमनदारी का अर्थ है सच्च के लिए बोलना चाहे इस कारण व्यक्तिगत हानि ही क्यों ना उठानी पड़े। लेकिन आज के समय में बहुत से लोगों के लिए ईमानदारी एक अप्रचलित पुराना रिवाज़ है, बीते दिनों का निर्थक आचरण है।

मसीही विश्वासी होने के नाते यदि उस सेक्रटेरी और साद के समान ईमानदारी हमारे जीवनों में नहीं है तो हमें परमेश्वर के सामने अपने आप को जाँचने की आवश्यक्ता है। प्रभु यीशु ने कहा, "मार्ग, सच्चाई और जीवन मैं ही हूँ" (यूहन्ना १४:६)। यदि हमारा प्रभु सत्य का प्रतिरूप है, तो हम जो उसके अनुयायी हैं, उनके लिए हर बात और हर कार्य में सत्य का उनके जीवन का अभिन्न अंग होना स्वाभाविक तथा अनिवार्य है। हमारे जीवन की हर बात में यही ईमानदारी संसार के सामने हमारी गवाही है और यही हमें संसार के लोगों से भिन्न करती है। - डेनिस डी हॉन


कुछ लोग इसलिए ईमानदार रहते हैं क्योंकि बेईमान होने का कोई उचित मौका उन्हें नहीं मिला।

निदान, हे भाइयों, जो जो बातें सत्य हैं, और जो जो बातें आदरणीय हैं, और जो जो बातें उचित हैं, और जो जो बातें पवित्र हैं, और जो जो बातें सुहावनी हैं, और जो जो बातें मनभावनी हैं, निदान, जो जो सदगुण और प्रशंसा की बातें हैं, उन्‍हीं पर ध्यान लगया करो। - फिलिप्पियों ४:८

बाइबल पाठ:१ पतरस २:११-१९
1Pe 2:11 हे प्रियों मैं तुम से बिनती करता हूं, कि तुम अपने आप को परदेशी और यात्री जान कर उन सांसारिक अभिलाषाओं से जो आत्मा से युद्ध करती हैं, बचे रहो।
1Pe 2:12 अन्यजातियों में तुम्हारा चालचलन भला हो; इसलिये कि जिन जिन बातों में वे तुम्हें कुकर्मी जान कर बदनाम करते हैं, वे तुम्हारे भले कामों को देख कर उन्‍हीं के कारण कृपा दृष्‍टि के दिन परमेश्वर की महिमा करें।
1Pe 2:13 प्रभु के लिये मनुष्यों के ठहराए हुए हर एक प्रबन्‍ध के आधीन में रहो, राजा के इसलिये कि वह सब पर प्रधान है।
1Pe 2:14 और हाकिमों के, क्‍योंकि वे कुकिर्मयों को दण्‍ड देने और सुकिर्मयों की प्रशंसा के लिये उसके भेजे हुए हैं।
1Pe 2:15 क्‍योंकि परमेश्वर की इच्‍छा यह है, कि तुम भले काम करने से निर्बुद्धि लोगों की अज्ञानता की बातों को बन्‍द कर दो।
1Pe 2:16 और अपने आप को स्‍वतंत्र जानो पर अपनी इस स्‍वतंत्रता को बुराई के लिये आड़ न बनाओ, परन्‍तु अपने आप को परमेश्वर के दास समझ कर चलो।
1Pe 2:17 सब का आदर करो, भाइयों से प्रेम रखो, परमेश्वर से डरो, राजा का सम्मान करो।
1Pe 2:18 हे सेवकों, हर प्रकार के भय के साथ अपने स्‍वामियों के आधीन रहो, न केवल भलों और नम्रों के, पर कुटिलों के भी।
1Pe 2:19 क्‍योंकि यदि कोई परमेश्वर का विचार करके अन्याय से दुख उठाता हुआ क्‍लेश सहता है, तो यह सुहावना है।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ७४-७६
  • रोमियों ९:१६-३३

रविवार, 7 अगस्त 2011

नदीयाँ और मसीही विश्वासी

वायुयान में यात्रा करते हुए नीचे धरती के कई आकर्षक दृश्य दिखाई पड़ते हैं। उन दृश्यों में से एक होता है किसी नदी का मार्ग। कोई दो नदी एक समान नहीं दीखतीं; लेकिन सभी नदियों के मार्गों में एक समानता रहती है - वे सब टेढ़े-मेढ़े मार्ग बनाती हैं। यह इसलिए क्योंकि जल अपने प्रवाह के लिए सदा सबसे कम प्रतिरोध का मार्ग लेता है, इसी कारण नदी भी कभी सीधी नहीं बहती - टेढ़ी ही रहती है!

मसीही विश्वासी भी इसी कारण अपने व्यवहार में टेढ़े-मेढ़े हो जाते हैं। जब हम विश्वासी अपने जीवनों में प्रलोभनों पर विजयी होने, शत्रु शैतान का सामना करने और उसे हराने का प्रयास नहीं करते तो हम भी परमेश्वर द्वारा निर्धारित अपने सीधे मार्ग से भटक कर कम प्रतिरोध के टेढ़े-मेढ़े मार्गों में वैसे ही हो जाते हैं। लेकिन दानिएल ऐसा नहीं था; उसने अपने मन में ठान लिया था कि वह सांसारिक दबावों और परिस्थितियों को अपने ऊपर हावी नहीं होने देगा।

यही दृढ़ निश्चय प्रत्येक विश्वासी को भी अपने जीवन में रखना और दिखाना चाहिए। किसी भी प्रलोभन को हम इतना प्रबल न होने दें कि वह हमें हमारे मार्ग से भटका सके। मसीही विश्वासियों को अपनी पत्री में प्रेरित युहन्ना ने लिखा, "हे बालको, तुम परमेश्वर के हो: और तुम ने उन पर जय पाई है, क्‍योंकि जो तुम में है, वह उस से जो संसार में है, बड़ा है" (१ युहन्ना ४:४)। मसीही विश्वासियों को प्रलोभनों से हारने वाला नहीं उन्हें हराने वाला होना चाहिए। हमारी मसीही यात्रा से हमें भटका पाने की सामर्थ किसी भी बात में नहीं होने चाहिए। किसी प्रलोभन में गिरने या शैतान कि किसी योजना में फंसने का अवसर हमें कभी प्रदान नहीं करना चाहिए।

नदियों के पास अपने मार्ग के चुनाव का कोई विकल्प नहीं होता, लेकिन हमारे पास होता है, इसलिए सबसे कम प्रतिरोध के मार्ग पर चलने के बजाए, हमें परमेश्वर द्वारा निर्धारित सीधे मार्ग पर दृढ़ता से डटे रहना चाहिए। - रिचर्ड डी हॉन


जो संकरे और सीधे मार्ग पर चलता रहेगा वह कभी टेढ़ा नहीं होगा।

परन्तु दानिएल ने अपने मन में ठान लिया कि वह राजा का भोजन खाकर, और उसके पीने का दाखमधु पीकर अपवित्र न होए; इसलिये उस ने खोजों के प्रधान से बिनती की कि उसे अपवित्र न होना पड़े। - दानिएल १:८

बाइबल पाठ: दानिएल १:१-८
Dan 1:1 यहूदा के राजा यहोयाकीम के राज्य के तीसरे वर्ष में बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर ने यरूशेलम पर चढ़ाई करके उसको घेर लिया।
Dan 1:2 तब परमेश्वर ने यहूदा के राजा यहोयाकीम को परमेश्वर के भवन के कई पात्रों सहित उसके हाथ में कर दिया; और उस ने उन पात्रों को शिनार देश में अपने देवता के मन्दिर में ले जाकर, अपने देवता के भण्डार में रख दिया।
Dan 1:3 तब उस राजा ने अपने खोजों के प्रधान अशपनज को आज्ञा दी कि इस्राएली राजपुत्रों और प्रतिष्ठित पुरूषों में से ऐसे कई जवानों को ला,
Dan 1:4 जो निर्दोष, सुन्दर और सब प्रकार की बुद्धि में प्रवीण, और ज्ञान में निपुण और विद्वान्‌ और राजमन्दिर में हाजिर रहने के योग्य हों; और उन्हें कसदियों के शास्त्र और भाषा की शिक्षा दे।
Dan 1:5 और राजा ने आज्ञा दी कि उसके भोजन और पीने के दाखमधु में से उन्हें प्रतिदिन खाने-पीने को दिया जाए। इस प्रकार तीन वर्ष तक उनका पालन पोषण होता रहे; तब उसके बाद वे राजा के साम्हने हाजिर किए जाएं।
Dan 1:6 उन में यहूदा की सन्तान से चुने हुए, दानिएल, हनन्याह, मीशाएल, और अजर्याह नाम यहूदी थे।
Dan 1:7 और खोजों के प्रधान ने उनके दूसरे नाम रखें, अर्थात दानिएल का नाम उस ने बेलतशस्सर, हनन्याह का शद्रक, मीशाएल का मेशक, और अजर्याह का नाम अबेदनगो रखा।
Dan 1:8 परन्तु दानिएल ने अपने मन में ठान लिया कि वह राजा का भोजन खाकर, और उसके पीने का दाखमधु पीकर अपवित्र न होए; इसलिये उस ने खोजों के प्रधान से बिनती की कि उसे अपवित्र न होना पड़े।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ७२-७३
  • रोमियों ९:१-१५

शनिवार, 6 अगस्त 2011

निर्दोष

एक सुसमाचार प्रचारक हर्ब टेलर एक रात अपने प्रचार के बाद पैसे देकर टेलिफोन करने की सुविधा देने वाली एक दुकान पर गए और टेलिफोन मशीन में पैसे डालकर नियत समय तक किसी से टेलिफोन पर बात करी। जब उन्होंने टेलिफोन का रिसीवर वापस मशीन पर रखा तो मशीन से उनके पैसे वापस बाहर आ गए। उन्होंने वे पैसे लिए और दुकान में बैठी लड़की के पास गए और उसे इसके बारे में बताया। उस लड़की ने कहा "मुझे पता है; आज जब आप ईमानदारी पर प्रचार कर रहे थे तो मैं वहाँ उपस्थित थी और सुन रही थी। मैं देखना चाहती थी कि जो आप प्रचार करते हैं, क्या उसे अपने जीवन में लागू भी करते हैं या नहीं। मैंने ही मशीन को उलटा चलाकर आपके पैसे वापस बाहर किये थे।" टेलर ने वे पैसे उस लड़की को पकड़ाए और उससे फिर मिलने का समय लिया। वे उस लड़की से फिर मिले और प्रभु यीशु के बारे में बातचीत करी। शीघ्र ही उस लड़की ने प्रभु यीशु में विश्वास करके उसको अपना व्यक्तिगत उद्धारकर्ता ग्रहण कर लिया।

हमारे जीवनों की छोटी छोटी बातें दिखा देती हैं कि हम में कितनी ईमानदारी है। परमेश्वर के वचन बाइबल का एक पात्र दानिएल इस का सजीव उदाहरण है। दानिएल दारा राजा के १२० अधिपत्तियों और अध्यक्षों में से एक था और अपने यहूदी होने के कारण सभी उस पर कड़ी नज़र रखते थे, लेकिन किसी को कभी उस पर किसी बात में दोष देने का कारण नहीं मिला। उसके अन्दर की "उत्तम आत्मा" उसके सभी कार्यों में विदित थी और राजा ने उसे सबसे अधिक प्रतिष्ठित भी किया (दानिएल ६:३)। अपने प्रतिदिन के जीवन द्वारा दानिएल ने दिखा दिया कि वह परमेश्वर यहोवा का सच्चा अनुयायी है।

अपने विश्वास की वास्तविकता हम दूसरों के सामने अपने प्रतिदिन के जीवन के कार्यों द्वारा रखते हैं। यदि हम अपने कार्यों को ईमानदारी के साथ अपने घर, अपने व्यावसायिक क्षेत्र, अपने समाज में करते रहेंगे तो किसी को हम पर दोष लगाने का कोई कारण नहीं मिलेगा और हमारा यह निर्दोष चरित्र हमारे प्रभु के लिए हमारी सच्ची गवाही और हमारे विश्वास की खराई का प्रमाण होगा। - पौल वैन गोर्डर

जो परमेश्वर के प्रति खरे होंगे, वे मनुष्यों के प्रति भी खरे रहेंगे।

तब अध्यक्ष और अधिपति राजकार्य के विषय में दानिएल के विरूद्ध दोष ढूंढ़ने लगे; परन्तु वह विश्वासयोग्य था, और उसके काम में कोई भूल वा दोष न निकला, और वे ऐसा कोई अपराध वा दोष न पा सके। - दानिएल ६:४

बाइबल पाठ: दानिएल ६:१-४
Dan 6:1 दारा को यह अच्छा लगा कि अपने राज्य के ऊपर एक सौ बीस ऐसे अधिपति ठहराए, जो पूरे राज्य में अधिकार रखें।
Dan 6:2 और उनके ऊपर उस ने तीन अध्यक्ष, जिन में से दानिएल एक था, इसलिये ठहराए, कि वे उन अधिपतियों से लेखा लिया करें, और इस रीति राजा की कुछ हानि न होने पाए।
Dan 6:3 जब यह देखा गया कि दानिएल में उत्तम आत्मा रहती है, तब उसको उन अध्यक्षों और अधिपतियों से अधिक प्रतिष्ठा मिली; वरन राजा यह भी सोचता था कि उसको सारे राज्य के ऊपर ठहराए।
Dan 6:4 तब अध्यक्ष और अधिपति राजकार्य के विषय में दानिएल के विरूद्ध दोष ढूंढ़ने लगे; परन्तु वह विश्वासयोग्य था, और उसके काम में कोई भूल वा दोष न निकला, और वे ऐसा कोई अपराध वा दोष न पा सके।

एक साल में बाइबल: भजन ७०-७१ रोमियों ८:२२-३९

शुक्रवार, 15 जुलाई 2011

किसका भय मानें

एक लड़के ने, जो दूसरे विश्वयुद्ध के समय हौलैण्ड के नाट्ज़ी सेनाओं के कबज़े वाले इलाके में रहता था, अपनी डायरी में लिखा, "पिछले सप्ताह तीन जर्मन सैनिकों ने मेरे पिताजी को घर के गलियारे में घेर लिया। उन्होंने बन्दूक के ज़ोर पर उन्हें मजबूर किया कि घर के तहखाने के रास्ते को खोलें। उनमें से एक ने पिताजी को आज्ञा दी कि कमरों के नीचे की जगह में रेंग कर जाकर दिखाएं कि हथियार कहाँ छिपा कर रखे हैं, अन्यथा वे उन्हें गोली मार देंगे। मेरे पिता कोई बहुत बहादुर व्यकति नहीं हैं, वे तो दन्त-चिकित्सक तक से डरते हैं। उन सैनिकों में से एक ने उनकी कनपट्टी पर अपनी पिस्तौल रखकर उसका घोड़ा दबाते हुए जब उन्हें धमकाया, तो पिता जी ने बाइबल का वह पद बोलना आरंभ कर दिया जो उनके ध्यान में आ रहा था: ’जो शरीर को घात करते हैं, पर आत्मा को घात नहीं कर सकते, उन से मत डरना; पर उसी से डरो, जो आत्मा और शरीर दोनों को नरक में नाश कर सकता है’ (मत्ती १०:२८)। उन जर्मन सैनिकों ने विस्मित होकर एक दूसरे को देखा और फिर अपने कंधे झटक कर उन्हें छोड़ कर चले गए।"

अनेक प्रकार के भय कई दफा मसीही विश्वासियों को सताते हैं। कुछ तो अस्पष्ट और बेबुनियाद घबराहट से ही ग्रस्त रहते हैं। यह सब हमें हमारे भरोसे और आनन्द से वंचित करते हैं और हमारे आत्मिक स्वास्थ्य की हानि तथा हमारे मसीह के लिए प्रभावी होने को बाधित करते हैं। बाइबल में इस समस्या का उत्तर भी दिया गया है - हर भय को परमेश्वर के भय के आधीन ले आना। जब हम परमेश्वर के भय को भली-भाँति सीख जाएंगे तो फिर किसी भय से भयभीत नहीं होंगे।

हौलैण्ड के उस लड़के के पिता के समान, जब हम परमेश्वर के भय को सर्वोपरि रखेंगे तो हमारे लिए अन्य प्रत्येक भय अपने आप ही सही परिपेक्ष में आ जाएगा। - डेव एगनर


हमें इस संसार के किसी अंधकार से डरने की कोई आवश्यक्ता नहीं है क्योंकि संसार की ज्योति, प्रभु यीशु मसीह सदा हमारे साथ बना रहता है।

जो शरीर को घात करते हैं, पर आत्मा को घात नहीं कर सकते, उन से मत डरना; पर उसी से डरो, जो आत्मा और शरीर दोनों को नरक में नाश कर सकता है। - मत्ती १०:२८


बाइबल पाठ: मत्ती १०:२४-३३

Mat 10:24 चेला अपने गुरू से बड़ा नहीं और न दास अपने स्‍वामी से।
Mat 10:25 चेले का गुरू के, और दास का स्‍वामी के बाराबर होना ही बहुत है; जब उन्‍होंने घर के स्‍वामी को शैतान कहा तो उसके घरवालों को क्‍यों न कहेंगे?
Mat 10:26 सो उन से मत डरना, क्‍योंकि कुछ ढंपा नहीं, जो खोला न जाएगा और न कुछ छिपा है, जो जाना न जाएगा।
Mat 10:27 जो मैं तुम से अन्‍धियारे में कहता हूं, उसे उजियाले में कहो; और जो कानों कान सुनते हो, उसे कोठों पर से प्रचार करो।
Mat 10:28 जो शरीर को घात करते हैं, पर आत्मा को घात नहीं कर सकते, उन से मत डरना; पर उसी से डरो, जो आत्मा और शरीर दोनों को नरक में नाश कर सकता है।
Mat 10:29 क्‍या पैसे मे दो गौरैये नहीं बिकती? तौभी तुम्हारे पिता की इच्‍छा के बिना उन में से एक भी भूमि पर नहीं गिर सकती।
Mat 10:30 तुम्हारे सिर के बाल भी सब गिने हुए हैं।
Mat 10:31 इसलिये, डरो नहीं; तुम बहुत गौरैयों से बढ़कर हो।
Mat 10:32 जो कोई मनुष्यों के साम्हने मुझे मान लेगा, उसे मैं भी उसे स्‍वर्गीय पिता के साम्हने मान लूंगा।
Mat 10:33 पर जो कोई मनुष्यों के साम्हने मेरा इन्‍कार करेगा उस से मैं भी अपने स्‍वर्गीय पिता के साम्हने इन्‍कार करूंगा।

एक साल में बाइबल:
  • भजन १३-१५
  • प्रेरितों १९:२१-४१

गुरुवार, 14 जुलाई 2011

प्रेरणा का सर्वोत्तम स्त्रोत

पहली कक्षा के छात्र क्रेग का चेहरा खिला हुआ और बड़ी सी मुस्कान से सजा हुआ था। बड़े गर्व से उसने अपने अंग्रेज़ी शब्दों की वर्तनी का परीक्षाफल, जिस पर उसकी अध्यापिका ने लिखा था - "१०० - बहुत अच्छा" मुझे दिखाया और कहा, "मैंने यह अपनी मम्मी और डैडी को भी दिखाया क्योंकि मैं जानता था कि वे इससे बहुत खुश होंगे।" उस बच्चे के लिए अपने माँ बाप को खुश करना प्रेरणा का एक बड़ा स्त्रोत था।

पौलुस ने तिमुथियुस को एक ऐसे सैनिक के उदाहरण द्वारा सिखाया जो अपने सेनापति की प्रसन्नता के लिए कोई भी जोखिम उठाने को सर्वदा तैयार रहता है, जिससे तिमुथियुस परमेश्वर की सेवा के मर्म को समझ सके, चाहे परिस्थिति कैसी भी हो (२ तिमुथियुस २:३, ४)। हमारी श्रद्धा परमेश्वर को तब ही भाती है जब वह परमेश्वर के नियमों का गंभीरता से पालन और उसकी आज्ञाकारिता के लिए भरपूर मेहनत के साथ उसको एक पूर्णतः समर्पित एवं प्रेम पूर्ण हृदय से अर्पित करी गई हो।

परमेश्वर की सेवा करने के लिए हमारे पास कई उद्देश्य हो सकते हैं, लेकिन परमेश्वर को हम सर्वोत्तम महिमा तब ही देते हैं जब हम आनन्द सहित केवल वही करना चाहते हैं जिससे वह प्रसन्न होता है। हमारे उद्धारकर्ता ने भी, अपने मानवीय जीवन में, क्रूस पर हम सब के पापों के लिए बलिदान होने से पहले, हृदय की बड़ी व्यथा सही; लेकिन उसकी परमेश्वर से उस समय भी यही प्रार्थना थी, "...मेरी नहीं परन्‍तु तेरी ही इच्‍छा पूरी हो" (लूका २२:४२)। हमारा उद्देश्य भी अपने उद्धारकर्ता के समान सदा ही हर बात में परमेश्वर पिता की प्रसन्नता ही होना चाहिए।

परमेश्वर को प्रसन्न करना ही उसकी आज्ञाकारिता के लिए सर्वोत्तम प्रेरणा है और हमारा परमेश्वर का भय मानने का प्रमाण भी। - हर्ब वैण्डर लुग्ट


मनुष्य कार्यों द्वारा परखता है, परन्तु परमेश्वर मन के उद्देश्यों को देखता है।

तुम्हारा चाल-चलन प्रभु के योग्य हो, और वह सब प्रकार से प्रसन्न हो, और तुम में हर प्रकार के भले कामों का फल लगे, और परमेश्वर की पहिचान में बढ़ते जाओ। - कुलुसियों १:१०


बाइबल पाठ: २ तिमुथियुस २:१-१३

2Ti 2:1 इसलिये हे मेरे पुत्र, तू उस अनुग्रह से जो मसीह यीशु में है, बलवन्‍त हो जा।
2Ti 2:2 और जो बातें तू ने बहुत गवाहों के साम्हने मुझ से सुनी है, उन्‍हें विश्वासी मनुष्यों को सौंप दे जो औरों को भी सिखाने के योग्य हों।
2Ti 2:3 मसीह यीशु के अच्‍छे योद्धा की नाईं मेरे साथ दुख उठा।
2Ti 2:4 जब कोई योद्धा लड़ाई पर जाता है, तो इसलिये कि अपने भरती करने वाले को प्रसन्न करे, अपने आप को संसार के कामों में नहीं फंसाता;
2Ti 2:5 फिर अखाड़े में लडने वाला यदि विधि के अनुसार न लड़े तो मुकुट नहीं पाता।
2Ti 2:6 जो गृहस्थ परिश्रम करता है, फल का अंश पहिले उसे मिलना चाहिए।
2Ti 2:7 जो मैं कहता हूं, उस पर ध्यान दे और प्रभु तुझे सब बातों की समझ देगा।
2Ti 2:8 यीशु मसीह को स्मरण रख, जो दाऊद के वंश से हुआ, और मरे हुओं में से जी उठा और यह मेरे सुसमाचार के अनुसार है।
2Ti 2:9 जिस के लिये मैं कुकर्मी की नाईं दुख उठाता हूं, यहां तक कि कैद भी हूं परन्‍तु परमेश्वर का वचन कैद नहीं।
2Ti 2:10 इस कारण मैं चुने हुए लोगों के लिये सब कुछ सहता हूं, कि वे भी उस उद्धार को जो मसीह यीशु में हैं अनन्‍त महिमा के साथ पाएं।
2Ti 2:11 यह बात सच है, कि यदि हम उसके साथ मर गए हैं तो उसके साथ जीएंगे भी।
2Ti 2:12 यदि हम धीरज से सहते रहेंगे, तो उसके साथ राज्य भी करेंगे : यदि हम उसका इन्‍कार करेंगे तो वह भी हमारा इन्‍कार करेगा।
2Ti 2:13 यदि हम अविश्वासी भी हों तौ भी वह विश्वासयोग्य बना रहता है, क्‍योंकि वह आप अपना इन्‍कार नहीं कर सकता।

एक साल में बाइबल:
  • भजन १०-१२ प्
  • रेरितों १९:१-२०

बुधवार, 13 जुलाई 2011

सबसे भयावह भय

कुछ लोगों को भय से रोमांच होता है, लेकिन केवल काल्पनिक बातों में - वे डरावनी फिल्में देखना तथा डरावनी कहानीयाँ और उपन्यास पढ़ना पसन्द करते हैं लेकिन किसी वास्तविक भयावह परिस्थिति का वो कभी सामना करना नहीं चाहते। ऐसे ही संसार के अधिकांश लोग पसन्द नहीं करते कि किसी बात को उन्हें समझाने या बताने के लिए किसी प्रकार के भय का कोई उल्लेख किया जाए। यदि कोई लेखक सामयवादी यानि क्मयुनिस्ट विचार धारा के खतरों के बारे में कुछ लिखता है तो उस पर नाहक ही भय द्वारा बात मनवाने के प्रयास का इल्ज़ाम आता है। इसी प्रकार यदि कोई मसीही अगुवा इस बात का सुझाव मात्र भी दे कि परमेश्वर द्वारा पाप के न्याय के फलस्वरूप भी कुछ बिमारियाँ मनुष्यों में फैल सकती हैं तो उसे तिरस्कार किया जाता है, उसके प्रति घृणा का वातवरण उत्पन्न किया जाता है। लोगों में प्रचलित धारणा यही है कि, "लोगों को उनकी गलती से मुँह मोड़ने और उन्हें सही मार्ग पर लाने के लिए कभी परमेश्वर के न्याय और उसके भय का उल्लेख भी मत करो।"

लेकिन यह धारणा परमेश्वर के वचन और स्वभाव से मेल नहीं खाती। परमेश्वर के नबी यशायाह ने परमेश्वर की प्रजा को सही मार्गदर्शन देने के लिए परमेश्वर के न्याय और भय का उल्लेख करने में कभी कोई हिचकिचाहट नहीं दिखाई। प्रजा के लोगों ने उस पर राजद्रोह का अभियोग लगाया क्योंकि उसने चेतावनी दी कि इस्त्राएल को अशूर के राजा के साथ संधि नहीं करनी चाहिए। यशायाह उन्हें चिता रहा था कि इस्त्राएल को अशूर के राजा से अधिक परमेश्वर से डरना चाहिए, और मनुष्य के भय में आकर यदि वे गलत संधि करेंगे और परमेश्वर के नियमों से समझौता करेंगे तो उन्हें परमेश्वर के न्याय का सामना करना पड़ेगा और वे अपनी स्वतंत्रता गंवा बैठेंगे। लोगों ने उसकी नहीं सुनी, परमेश्वर से अधिक मनुष्य को महत्व दिया, चेतावनी के विरुद्ध समझौते किये और अन्त वही हुआ जिसके लिए यशायाह इन्हें चिता रहा था।

परमेश्वर का वचन बाइबल यह भी बताती है कि जो लोग प्रभु यीशु मसीह का इन्कार कर के उसके द्वारा दिये गए उद्धार के मार्ग और अवसर का तिरिस्कार करते रहते हैं और अपने पापों में बने रहते हैं, वे एक दिन परमेश्वर को अपने विरुद्ध खड़ा पाएंगे। यदि यह बात किसी को भयावह प्रतीत होती है और इस भय के अन्तर्गत कोई व्यक्ति प्रभु यीशु पर विश्वास करने के द्वारा पापों से क्षमा तथा उद्धार पाता है, तो भय ने एक भला कार्य करवाया है। इसी भय के कारण यदि कोई मसीही विश्वासी प्रभु की सेवा में अपने आप को पुनःसमर्पित करके एक नए उत्साह के साथ अपनी सेवा को पूरा करता है तो भी भय एक सकरात्मक कार्य का कारण बना है।

मनुष्यों के लिए सबसे भयावह भय किसी अन्य नशवर मनुष्य या उसकी सामर्थ का भय नहीं वरन अविनाशी और सर्वसामर्थी परमेश्वर का और उसके न्याय का भय होना चाहिए, जिसका सामना प्रत्येक को एक न एक दिन करना ही है। यह सबसे भयावह भय ही सबसे भला भय भी है क्योंकि यही वह भय है जो हमें सही मार्ग पर लाता है और बनाए रखता है। - हर्ब वैन्डर लुग्ट


सच्चे परमेश्वर का सच्चा भय मानिए, आपको अन्य किसी भय को मानने की कभी कोई आवश्यक्ता नहीं होगी।

इसलिये मैं भी उनके लिये दु:ख की बातें निकालूंगा, और जिन बातों से वे डरते हैं उन्हीं को उन पर लाऊंगा; क्योंकि जब मैं ने उन्हें बुलाया, तब कोई न बोला, और जब मैं ने उन से बातें की, तब उन्होंने मेरी न सुनी; परन्तु जो मेरी दृष्टि में बुरा था वही वे करते रहे, और जिस से मैं अप्रसन्न होता था उसी को उन्होंने अपनाया। - यशायाह ६६:४


बाइबल पाठ: यशायाह ८:११-२२

Isa 8:11 क्योंकि यहोवा दृढ़ता के साथ मुझ से बोला और इन लोगों की सी चाल चलने को मुझे मना किया,
Isa 8:12 और कहा, जिस बात को यह लोग राजद्रोह कहें, उसको तुम राजद्रोह न कहना, और जिस बात से वे डरते हैं उस से तुम न डरना और न भय खाना।
Isa 8:13 सेनाओं के यहोवा ही को पवित्र जानना, उसी का डर मानना, और उसी का भय रखना।
Isa 8:14 और वह शरणस्थान होगा, परन्तु इस्राएल के दोनो घरानों के लिये ठोकर का पत्थर और ठेस की चट्टान, और यरूशलेम के निवासियों के लिये फन्दा और जाल होगा।
Isa 8:15 और बहुत से लोग ठोकर खाएंगे, वे गिरेंगे और चकनाचूर होंगे, वे फन्दे में फसेंगे और पकड़े जाएंगे।
Isa 8:16 चितौनी का पत्र बन्द कर दो, मेरे चेलों के बीच शिक्षा पर छाप लगा दो।
Isa 8:17 मैं उस यहोवा की बाट जोहता रहूंगा जो अपने मुख को याकूब के घराने से छिपाये है, और मैं उसी पर आशा लगाए रहूंगा।
Isa 8:18 देख, मैं और जो लड़के यहोवा ने मुझे सौंपे हैं, उसी सेनाओं के यहोवा की ओर से जो सिय्योन पर्वत पर निवास किए रहता है इस्राएलियों के लिये चिन्ह और चमत्कार हैं।
Isa 8:19 जब लोग तुम से कहें कि ओझाओं और टोन्हों के पास जाकर पूछो जो गुनगुनाते और फुसफुसाते हैं, तब तुम यह कहना कि क्या प्रजा को अपने परमेश्वर ही के पास जाकर न पूछना चाहिये? क्या जीवतों के लिये मुर्दों से पूछना चाहिये?
Isa 8:20 व्यवस्था और चितौनी ही की चर्चा किया करो! यदि वे लोग इस वचनों के अनुसार न बोलें तो निश्चय उनके लिये पौ न फटेगी,
Isa 8:21 वे इस देश में क्लेशित और भूखे फिरते रहेंगे, और जब वे भूखे होंगे, तब वे क्रोध में आकर अपने राजा और अपने परमेश्वर को श्राप देंगे, और अपना मुख ऊपर आकाश की ओर उठाएंगे;
Isa 8:22 तब वे पृथ्वी की ओर दृष्टि करेंगे परन्तु उन्हें सकेती और अन्धियारे अर्थात संकट भरा अन्धकार ही देख पड़ेगा, और वे घोर अन्धकार में ढकेल दिए जाएंगे।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ७-९
  • प्रेरितों १८

सोमवार, 11 जुलाई 2011

जयवंत भय

भय कई तरह के होते हैं और लोग उन के अलग अलग प्रकारों से लम्बे समय से परिचित हैं। हाल ही में एक नया भय प्रगट हुआ है - कमप्यूटर का भय (cyberphobia)। कुछ लोग कमप्यूटर को देख कर बहुत भयभीत हो जाते हैं, वे उस कमरे में रहना नहीं चाहते जहाँ कमप्यूटर लगा है। यदि उन्हें कमप्यूटर के पास छोड़ दिया जाए तो वे घबराने लगते हैं, उनके दिल की धड़कन तेज़ और अनियमित हो जाती है, उन्हें साँस लेने में कठिनाई होने लगती है, कोई कोई कंपकंपाने लगता है और कोई मुर्छित भी हो जाता है। वे इतने विचिलित हो जाते हैं कि उन्हें संयम खोने, सनकी होने या बेहोशा हो जाने का आभास होने लगता है। हम में से अधिकांशतः के लिए यह समझ से परे है, जैसे हर प्रकार का भय किसी न किसी की समझ से परे होता है; लेकिन जो उससे ग्रसित हैं उन लोगों के लिए वह भय वास्तविक है।

लेकिन एक और भय है, जो हम में से अधिकांश लोगों को है और उपरोक्त भय के समान वास्तविक भी है और वैसा ही निष्क्रीय करने वाला भी, लेकिन हम इसे स्वीकार कम ही करते हैं - मनुष्यों का भय, दूसरों के कहने और राय का भय। कई बार हम ऐसे व्यवहार करते हैं मानो हमारा भविष्य और भलाई पूर्णतः दूसरे मनुष्यों के हाथों में है।

यशायाह ने वर्णन किया कि मनुष्यों का यह बेबुनियाद भय परमेश्वर को कैसा प्रतीत होता है, जब हम उस पर अपना भरोसा छोड़ मनुष्यों पर निर्भर होने लगते हैं। परमेश्वर ने कहा मनुष्यों के भय में और उनके वशीभूत रहना मूर्खता है क्योंकि मनुष्य नाशमान प्राणी है जिसका अस्तित्व और सामर्थ मैदान की घास से अधिक नहीं है ( याशायाह ५१:१२)। परमेश्वर यह भी जानता है कि लोग किस प्रकार की हानि पहुंचने के भय के कारण दूसरों पर हावी होते हैं ( याशायाह ५१:१३, १४)। लेकिन परमेश्वर ही है जो हर बात और प्रत्येक जन का अन्तिम फैसला अपने हाथ में रखे हुए है।

हमारा भविष्य और अनन्त काल की भलाई परमेश्वर पर निर्भर है, किसी मनुष्य पर नहीं, केवल परमेश्वर पर। इसलिए जैसा इब्रानियों की पत्री के लेखक ने मसीही जीवन के लिए लिखा है, "इस कारण जब कि गवाहों का ऐसा बड़ा बादल हम को घेरे हुए है, तो आओ, हर एक रोकने वाली वस्‍तु, और उलझाने वाले पाप को दूर कर के, वह दौड़ जिस में हमें दौड़ना है, धीरज से दौड़ें। और विश्वास के कर्ता और सिद्ध करने वाले यीशु की ओर ताकते रहें, जिस ने उस आनन्‍द के लिये जो उसके आगे धरा था, लज्ज़ा की कुछ चिन्‍ता न करके, क्रूस का दुख सहा और सिंहासन पर परमेश्वर के दाहिने जा बैठा" (इब्रानियों १२:१, २)।

परमेश्वर का भय ही हर परिस्थिति पर जयवन्त करने वाला भय है जिससे कभी हानि नहीं आती। - मार्ट डी हॉन


परमेश्वर पर विश्वास और परमेश्वर का भय, दमन करने वाले मनुष्यों के भय को जीवन से निकाल फेंकता है।

मैं, मैं ही तेरा शान्तिदाता हूं; तू कौन है जो मरने वाले मनुष्य से, और घास के समान मुर्झाने वाले आदमी से डरता है? - यशायाह ५१:१२


बाइबल पाठ: यशायाह ५१:१-१६

Isa 51:1 हे धर्म पर चलने वालो, हे यहोवा के ढूंढ़ने वालो, कान लगाकर मेरी सुनो; जिस चट्टान में से तुम खोदे गए और जिस खान में से तुम निकाले गए, उस पर ध्यान करो।
Isa 51:2 अपने मूलपुरूष इब्राहीम और अपनी माता सारा पर ध्यान करो, जब वह अकेला था, तब ही से मैं ने उसको बुलाया और आशीष दी और बढ़ा दिया।
Isa 51:3 यहोवा ने सिय्योन को शान्ति दी है, उस ने उसके सब खण्डहरों को शान्ति दी है; वह उसके जंगल को अदन के समान और उसके निर्जल देश को यहोवा की वाटिका के समान बनाएगा, उस में हर्ष और आनन्द और धन्यवाद और भजन गाने का शब्द सुनाई पड़ेगा।
Isa 51:4 हे मेरी प्रजा के लोगों, मेरी ओर ध्यान धरो, हे मेरे लोगों, कान लगा कर मेरी सुनो, क्योंकि मेरी ओर से व्यवस्था दी जाएगी, और मैं अपना नियम देश देश के लोगों की ज्योति होने के लिये स्थिर करूंगा।
Isa 51:5 मेरा छुटकारा निकट है, मेरा उद्धार प्रगट हुआ है, मैं अपने भुजबल से देश देश के लोगों का न्याय करूंगा। द्वीप मेरी बाट जाहेंगे और मेरे भुजबल पर आशा रखेंगे।
Isa 51:6 आकाश की ओर अपनी आंखें उठाओ, और पृथ्वी को निहारो; क्योंकि आकाश धुंए ही नाई लोप हो जाएगा, पृथ्वी कपड़े के समान पुरानी हो जाएगी, और उसके रहने वाले यों ही जाते रहेंगे, परन्तु जो उद्धार मैं करूंगा वह सर्वदा ठहरेगा, और मेरे धर्म का अन्त न होगा।
Isa 51:7 हे धर्म के जानने वालों, जिनके मन में मेरी व्यवस्था है, तुम कान लगाकर मेरी सुनो; मनुष्यों की नामधराई से मत डरो, और उनके निन्दा करने से विस्मित न हो।
Isa 51:8 क्योंकि घुन उन्हें कपड़े की नाईं और कीड़ा उन्हें ऊन की नाईं खाएगा, परन्तु मेरा धर्म अनन्त काल तक, और मेरा उद्धार पीढ़ी से पीढ़ी तक बना रहेगा।
Isa 51:9 हे यहोवा की भुजा, जाग! जाग और बल धारण कर; जैसे प्राचीन काल में और बीते हुए पीढिय़ों में, वैसे ही अब भी जाग। क्या तू वही नहीं है जिस ने रहब को टुकड़े टुकड़े किया और मगरमच्छ को छेदा?
Isa 51:10 क्या तू वही नहीं जिस ने समुद्र को अर्थात गहिरे सागर के जल को सुखा डाला और उसकी गहराई में अपने छुड़ाए हओं के पार जाने के लिये मार्ग निकाला था?
Isa 51:11 सो यहोवा के छुड़ाए हुए लोग लौट कर जयजयकार करते हुए सिय्योन में आएंगे, और उनके सिरों पर अनन्त आनन्द गूंजता रहेगा, वे हर्ष और आनन्द प्राप्त करेंगे, और शोक और सिसकियों का अन्त हो जाएगा।
Isa 51:12 मैं, मैं ही तेरा शान्तिदाता हूं; तू कौन है जो मरने वाले मनुष्य से, और घास के समान मुर्झाने वाले आदमी से डरता है?
Isa 51:13 और आकाश के तानने वाले और पृथ्वी की नेव डालने वाले अपने कर्ता यहोवा को भूल गया है, और जब द्रोही नाश करने को तैयार होता है तब उसकी जलजलाहट से दिन भर लगातार थरथराता है? परन्तु द्रोही की जलजलाहट कहां रही?
Isa 51:14 बंधुआ शीघ्र ही स्वतन्त्र किया जाएगा, वह गड़हे में न मरेगा और न उसे रोटी की कमी होगी।
Isa 51:15 जो समुद्र को उथल-पुथल करता जिस से उसकी लहरों मे गरजन होती है, वह मैं ही तेरा परमेश्वर यहोवा हूं मेरा नाम सेनाओं का यहोवा है। और मैं ने तेरे मुंह में अपने वचन डाले,
Isa 51:16 और तुझे अपने हाथ की आड़ में छिपा रखा है कि मैं आकाश को तानूं और पृथ्वी की नेव डालूं, और सिय्योन से कहूं, तुम मेरी प्रजा हो।

एक साल में बाइबल:
  • भजन १-३
  • प्रेरितों १७:१-१५

रविवार, 10 जुलाई 2011

भय की प्राथमिकताएं

मैंने एक प्रचारक को कहते सुना कि हमें केवल परमेश्वर से भय रखना चाहिए, यद्यपि उसके कहने का तातपर्य सही था, तो भी मैं उससे पूर्णतः सहमत नहीं हूँ। परमेश्वर के वचन बाइबल में ही प्रेरित पतरस द्वारा परमेश्वर के आत्मा ने लिखवाया है कि सेवक अपने स्वामियों के भय में रहें (१ पतरस २:१८) और पौलुस प्रेरित द्वारा लिखवाया कि बुराई करने वालों को सामाजिक अधिकारियों के भय में रहना चाहिए (रोमियों १३:४)। यह हमारी नैतिक ज़िम्मेदारी है कि हम जिन बातों का भय रखते हैं उनकी सही प्राथमिकताएं भी रखें और उन सही प्राथमिकताओं के अनुसार भय को निभाएं।

एक युवक ने मुझे अपने अनुभव के बारे में बताया, उसके मित्र उसे नशीले पदार्थों के सेवन के लिए उकसा रहे थे, उसे भय था कि यदि उसने उनकी ना मानी तो वे उसे कायर समझेंगे; लेकिन इससे भी अधिक भय उसे इस बात से था कि यदि उसने उन पदार्थों को लेना आरंभ कर दिया तो उसका परिणाम क्या होगा। अपने भय की सही प्राथमिकताओं के कारण ही वह बुरी आदत और उसके दुषपरिणामों से बच सका। एक सैनिक ने अपने युद्ध भूमि के अनुभव बताए। उसने अपनी स्वेच्छा से एक बहुत खतरनाक मुहिम पर जाने की रज़ामन्दी अपनी टुकड़ी के नायक को दी। उसने माना कि उस मुहिम पर जाने के लिए उसे भय तो बहुत था लेकिन उस भय से भी अधिक भय इस बात का था कि यदि दुशमन जीत गया तो क्या परिणाम होगा। भय की प्राथमिकताओं ने ही इन दोनो जवानों को सही निर्णय लेने की प्रेरणा दी।

बाइबल हमें सिखाती है कि हमारा सब से बड़ा भय होना चाहिए परमेश्वर को अप्रसन्न करने का भय। यह वह भय है जिसे सदा हमारे प्राणों के भय से भी बढ़कर रहना चाहिए। यदि एक मसीही विश्वासी के सामने बुराई करने अथवा पीड़ा उठाने या प्राण गंवाने की परिस्थिति हो तो निसन्देह, बिन झिझके उसे परमेश्वर की आज्ञाकारिता के लिए पीड़ा उठाने या प्राणों का जोखिम उठाने को चुनना चाहिए, ना कि बुराई के लिए समझौता करने को। प्रभु यीशु ने अपने चेलों से कहा, "जो शरीर को घात करते हैं, पर आत्मा को घात नहीं कर सकते, उन से मत डरना; पर उसी से डरो, जो आत्मा और शरीर दोनों को नरक में नाश कर सकता है" (मत्ती १०:२८)।

भय हमारे जीवन का एक भाग है। यदि हम भय की प्राथमिकताएं बनाना सीख जाएं और परमेश्वर के भय को सदा सर्वोपरी रखें तो भय हमारे लिए लाभ का कारण बन जाएगा। - हर्ब वैन्डर लुग्ट


मनुष्यों के भय से लज्जा किंतु परमेश्वर के भय से विवेक जागृत होता है।

इसलिये हर एक का हक चुकाया करो, जिसे कर चाहिए, उसे कर दो; जिसे महसूल चाहिए, उसे महसूल दो; जिस से डरना चाहिए, उस से डरो; जिस का आदर करना चाहिए उसका आदर करो। - रोमियों १३:७



बाइबल पाठ: रोमियों १३:१-७

Rom 13:1 हर एक व्यक्ति प्रधान अधिकारियों के अधीन रहे, क्‍योंकि कोई अधिकार ऐसा नहीं, जो परमेश्वर की ओर से न हो, और जो अधिकार हैं, वे परमेश्वर के ठहराए हुए हैं।
Rom 13:2 इस से जो कोई अधिकार का विरोध करता है, वह परमेश्वर की विधि का साम्हना करता है, और साम्हना करने वाले दण्‍ड पाएंगे।
Rom 13:3 क्‍योंकि हाकिम अच्‍छे काम के नहीं, परन्‍तु बुरे काम के लिये डर का कारण हैं; सो यदि तू हाकिम से निडर रहना चाहता है, तो अच्‍छा काम कर और उस की ओर से तेरी सराहना होगी;
Rom 13:4 क्‍योंकि वह तेरी भलाई के लिये परमेश्वर का सेवक है। परन्‍तु यदि तू बुराई करे, तो डर; क्‍योकि वह तलवार व्यर्थ लिये हुए नहीं और परमेश्वर का सेवक है कि उसके क्रोध के अनुसार बुरे काम करने वाले को दण्‍ड दे।
Rom 13:5 इसलिये अधीन रहना न केवल उस क्रोध से परन्‍तु डर से अवश्य है, वरन विवेक भी यही गवाही देता है।
Rom 13:6 इसलिये कर भी दो, क्‍योंकि वे परमश्‍ेवर के सेवक हैं, और सदा इसी काम में लगे रहते हैं।
Rom 13:7 इसलिये हर एक का हक चुकाया करो, जिस कर चाहिए, उसे कर दो; जिसे महसूल चाहिए, उसे महसूल दो; जिस से डरना चाहिए, उस से डरो; जिस का आदर करना चाहिए उसका आदर करो।

एक साल में बाइबल:
  • अय्युब ४१-४२
  • प्रेरितों १६:२२-४०

शनिवार, 9 जुलाई 2011

भय से भरोसा

एक कबीले में प्रथा थी कि जब उनके कबीले का बच्चा व्यसक होने लगता था तो कबीले के अगुवे उसे अपने कबीले की प्रथाएं सिखाते थे। इन प्रथाओं के पालन के लिए वे उसके ऊपर दण्ड का भय या "यह करो, वह न करो" की नैतिकता का भार नहीं डालते थे, वरन वे उस से बस इतना ही कहते थे कि "ना मानने से कबीले के लोग तुम्हारे बारे में बातें कर सकते हैं"। अपने साथ के लगों में सही छवि बनाए रखने के लिए वह बच्चा स्वतः ही प्रथाओं का पालन करने में तत्पर रहता था।

साथियों के इस दबाव के संबंध में परमेश्वर के वचन बाइबल में यशायाह की पुस्तक के ५१ अध्याय में भी कुछ कहा गया है - समाज में सही दिखने वाले व्यवहार को लेकर। कबीले के अगुवे बच्चों को सही व्यवहार बनाए रखने के लिए साथियों का दबाव बताते थे, लेकिन यशायाह ५१ में इसका दूसरा पहलू दर्शाया गया है - साथियों के दबाव में आकर पाप में फंसना और गिर जाना (यशायाह ५१:७)। परमेश्वर ने अपने लोगों को चेतावनी दी कि "लोग उन के बारे में क्या कहेंगे" का भय, उन के जीवनों में परमेश्वर की आज्ञाओं के साथ समझौता करने और अनाज्ञाकारी होने का कारण हो सकता है और वे अनैतिक संबंधों में फंस सकते हैं। परमेश्वर ने कहा कि जब ऐसी बात उठे तब वह उस पर भरोसा रखें और केवल उसी की सम्म्ति से कार्य करें।

यह सलाह आज हमारे लिए भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि आज भी "मनुष्यों का भय" बहुत से मसीही लोगों को परमेश्वर के अनाज्ञाकारी होने के लिए बाध्य कर देता है और इसके दुषपरिणाम वे अपने जीवनों मे भोगते रहते हैं। यदि हम अपना व्यवहार केवल लोगों की पसन्द - नापसन्द पर आधारित रखेंगे तो शीघ्र ही हमारे जीवन कुण्ठाओं और दुखदाई अनिश्चितताओं से भर जाएंगे और हम न स्वयं प्रसन्न रह सकेंगे, न किसी दूसरे को सदा प्रसन्न रख सकेंगे और परमेश्वर से भी विमुख हो जाएंगे।

जब हम अपनी तृप्ति सदा ही परमेश्वर को भाने वाली बातों में बनाएंगे तो हमें अपंग करने वाले मनुष्यों के भय से स्वतः ही मुक्ति मिल जाएगी। फिर मनुष्यों के भय के स्थान पर हम परमेश्वर के भय में कार्य करने लगेंगे जो सदा ही उन्नति का कारण होता है। परमेश्वर का भय उसके प्रति श्रद्धा का सकारात्मक भय है, जो हमें उसकी इच्छानुसार चलने को प्रेरित करता है और सदा हमारे भले ही का भरोसा देता है। - मार्ट डी हॉन


परमेश्वर का भय ही हमें मनुष्यों के भय से मुक्त कर सकता है।

मनुष्य का भय खाना फन्दा हो जाता है, परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह ऊंचे स्थान पर चढ़ाया जाता है। - नीतिवचन २९:२५


बाइबल पाठ: यशायाह ५१:७-१६

Isa 51:7 हे धर्म के जानने वालों, जिनके मन में मेरी व्यवस्था है, तुम कान लगाकर मेरी सुनो, मनुष्यों की नामधराई से मत डरो, और उनके निन्दा करने से विस्मित न हो।
Isa 51:8 क्योंकि घुन उन्हें कपड़े की नाईं और कीड़ा उन्हें ऊन की नाईं खाएगा; परन्तु मेरा धर्म अनन्तकाल तक, और मेरा उद्धार पीढ़ी से पीढ़ी तक बना रहेगा।
Isa 51:9 हे यहोवा की भुजा, जाग! जाग और बल धारण कर, जैसे प्राचीन काल में और बीते हुए पीढिय़ों में, वैसे ही अब भी जाग। क्या तू वही नहीं है जिस ने रहब को टुकड़े टुकड़े किया और मगरमच्छ को छेदा?
Isa 51:10 क्या तू वही नहीं जिस ने समुद्र को अर्थात गहिरे सागर के जल को सुखा डाला और उसकी गहराई में अपने छुड़ाए हओं के पार जाने के लिये मार्ग निकाला था?
Isa 51:11 सो यहोवा के छुड़ाए हुए लोग लौट कर जयजयकार करते हुए सिय्योन में आएंगे, और उनके सिरों पर अनन्त आनन्द गूंजता रहेगा; वे हर्ष और आनन्द प्राप्त करेंगे, और शोक और सिसकियों का अन्त हो जाएगा।
Isa 51:12 मैं, मैं ही तेरा शान्तिदाता हूं, तू कौन है जो मरने वाले मनुष्य से, और घास के समान मुर्झाने वाले आदमी से डरता है?
Isa 51:13 और आकाश के तानने वाले और पृथ्वी की नेव डालने वाले अपने कर्ता यहोवा को भूल गया है, और जब द्रोही नाश करने को तैयार होता है तब उसकी जलजलाहट से दिन भर लगातार थरथराता है? परन्तु द्रोही की जलजलाहट कहां रही?
Isa 51:14 बंधुआ शीघ्र ही स्वतन्त्र किया जाएगा; वह गड़हे में न मरेगा और न उसे रोटी की कमी होगी।
Isa 51:15 जो समुद्र को उथल-पुथल करता जिस से उसकी लहरों मे गरजन होती है, वह मैं ही तेरा परमेश्वर यहोवा हूं मेरा नाम सेनाओं का यहोवा है। और मैं ने तेरे मुंह में अपने वचन डाले,
Isa 51:16 और तुझे अपने हाथ की आड़ में छिपा रखा है कि मैं आकाश को तानूं और पृथ्वी की नेव डालूं, और सिय्योन से कहूं, तुम मेरी प्रजा हो।

एक साल में बाइबल:
  • अय्युब ३८-४०
  • प्रेरितों १६:१-२१

शुक्रवार, 1 जुलाई 2011

"ईमानदार एबी"

हमारे समाज की यह दशा हो गई है कि हमें अब ईमानदारी की एक बड़ी खुराक अच्छे से पिलाई जाने की बहुत आवश्यक्ता है, विशेषकर हमारे नेताओं को। चाहे व्यापार हो, राजनीति हो, स्कूल में, घरों में यहाँ तक कि चर्चों में भी ईमानदारी का यह अति आवश्यक गुण घटता ही जा रहा है। कपट, घूस, छिपाई हुई कमाई, जमा-खर्च के दोगले रेकॉर्ड, करों की चोरी, अनचुकाए जुर्माने आदि बढ़ते ही जा रहे हैं। ऐसा लगता है कि समाज का नियम बन गया है कि नियम तोड़ने से मत डरिए, विशेषकर यदि आप बचकर निकल सकते हैं तो।

ऐसे में हमें भूतपूर्व अमरीकी राष्ट्रपति एब्राहम लिंकन के जीवन से उनके नैतिक और आत्मिक गुणों के बारे में सीखना चाहिए। राष्ट्रपति बनने से पहले वे अपने एक साथी के साथ वकील का कार्य करते थे। अधिकाँशतः लिंकन बाहर जाकर न्यायिक मामलों को संभालते और उनका साथी दफतर में बैठकर बाकी के संबंधित काम देखता। लिंकन दफतर वापस लौटने से पहले मुकद्दमे का शुल्क ले लिया करते थे। शुल्क लेकर वे उसे दो भागों में विभाजित करते, एक भाग को सावधानी से एक कागज़ में लपटेते और उस पर अपने साथी और मुकद्दमे का नाम सावधानी से लिख लेते थे, जिससे यदि उनके दफतर वापस पहुँच कर साथी को उसका हिस्सा देने से पहले यदि कुछ अन्होनी हो जाए तो उनके साथी को उसका हिस्सा मिलने में कोई परेशानी न हो। देखने में तो यह एक छोटी सी बात लगती है, लेकिन यह उस व्यक्ति के चरित्र को दिखाती है जिसे संसार ने "Honest Abe" (ईमानदार एबी) के उपनाम से जाना था।

हमें भी ऐसे ही जीवन जीने चाहिएं जिनसे हमारे नाम के आगे यदि कोई "ईमानदार" शब्द लगाए तो वह झूठा प्रतीत न हो। - डेनिस डी हॉन


मलाई की बातें कर के लोगों को सप्रेटा मत परोसिए।

निदान, हे भाइयों, जो जो बातें सत्य हैं, और जो जो बातें आदरणीय हैं, और जो जो बातें उचित हैं, और जो जो बातें पवित्र हैं, और जो जो बातें सुहावनी हैं, और जो जो बातें मनभावनी हैं, निदान, जो जो सदगुण और प्रशंसा की बातें हैं, उन्‍हीं पर ध्यान लगया करो। - फिलिप्पियों ४:८


बाइबल पाठ: फिलिप्पियों ४:५-९

Php 4:5 तुम्हारी कोमलता सब मनुष्यों पर प्रगट हो: प्रभु निकट है।
Php 4:6 किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्‍तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं।
Php 4:7 तब परमेश्वर की शान्‍ति, जो समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरक्षित रखेगी।
Php 4:8 निदान, हे भाइयों, जो जो बातें सत्य हैं, और जो जो बातें आदरणीय हैं, और जो जो बातें उचित हैं, और जो जो बातें पवित्र हैं, और जो जो बातें सुहावनी हैं, और जो जो बातें मनभावनी हैं, निदान, जो जो सदगुण और प्रशंसा की बातें हैं, उन्‍हीं पर ध्यान लगाया करो।
Php 4:9 जो बातें तुम ने मुझ से सीखीं, और ग्रहण की, और सुनी, और मुझ में देखीं, उन्‍हीं का पालन किया करो, तब परमेश्वर जो शान्‍ति का सोता है तुम्हारे साथ रहेगा।

एक साल में बाइबल:
  • अय्युब २०-२१
  • प्रेरितों १०:२४-४८

गुरुवार, 30 जून 2011

कुछ प्रश्न

एक शोधकर्ता ने १५०० व्यवसायिक प्रबन्धकों (Buisness Managers) के बारे में अध्ययन किया, यह जानने के लिए कि उनके नीचे काम करने वाले अपने अधिकारी में किन बातों को मूल्य देते हैं। उसके शोध के नतीजों से पता चल कि लोग ऐसे अगुवों का आद्र करते हैं जो कार्य की योग्यता रखते हैं, दूसरों को कार्य के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं, निर्देष देने में निपुण हैं। परन्तु स्ब से अधिक जिस बात को लोग अपने अधिकारी में देखना चाहते थे वह थी ईमानदारी - ऐसे अगुवे जो विश्वासयोग्य हों और अपने कही बात को निभाने में पक्के हों।

यह बात केवल सांसारिक प्रब्न्धकों और अगुवों पर ही लागु नहीं होती, मसीही विश्वासियों पर भी यह बात उतनी ही लागू होती है। ईमानदारी एक ऐसा गुण है जो प्रत्येक मसीही विश्वासी में विद्यमान होना चाहिए, वाहे उसका ओहदा कोई भी हो। भजन १५ के अनुसार इस गुण को प्रत्येक परमेश्वर के भक्त की हर बात और हर कार्य में प्रदर्शित होना चाहिए। क्योंकि बाइबल का परमेश्वर अपनी हर बात ईमानदारी से पूरी करता है, उस परमेश्वर के लोगों को भी ऐसे लोगों के रूप में जने जाना चाहिए जो अपनी हर बात पूरी करते हैं।

हम में से प्रत्येक मसीही विश्वासी को अपने कहे के प्रति ईमानदार रहना है। यह एक ऐसा सत्य है जो मुझे विचिलित करता है। यद्यपि मुझे झूठ बोलने से बच कर रहने में कोई विशेष परेशानी नहीं होती, लेकिन कभी कभी मेरे लिए अपने कहे को निभाना कठिन अवश्य हो जाता है।

क्या हमारे आसपास के लोग हमारी ईमानदारी के लिए हमारी प्रशंसा करते हैं? क्या इसके लिए परमेश्वर हमारी प्रशंसा करता है? क्या हमारा परमेश्वर हमें वही करते देखता है जो हम ने कहा - चाहे इसके लिए हमें दुख ही क्यों न उठाना पड़े? ये कुछ प्रश्न हैं जिन पर हमें गंभीरता से विचार करना चाहिए। - मार्ट डी हॉन


वे ही ऊपर उठ सकते हैं जो अपनी विश्वासयोग्यता के स्तर को बनाए रखना जानते हैं।

हे परमेश्वर तेरे तम्बू में कौन रहेगा? तेरे पवित्र पर्वत पर कौन बसने पाएगा?...जो शपथ खाकर बदलता नहीं चाहे हानि उठाना पड़े। - भजन १५:१, ४


बाइबल पाठ: भजन १५

Psa 15:1 हे परमेश्वर तेरे तम्बू में कौन रहेगा? तेरे पवित्र पर्वत पर कौन बसने पाएगा?
Psa 15:2 वह जो खराई से चलता और धर्म के काम करता है, और हृदय से सच बोलता है;
Psa 15:3 जो अपनी जीभ से निन्दा नहीं करता, और न अपके मित्र की बुराई करता, और न अपने पड़ोसी की निन्दा सुनता है;
Psa 15:4 वह जिसकी दृष्टि में निकम्मा मनुष्य तुच्छ है, और जो यहोवा के डरवैयों का आदर करता है, जो शपथ खाकर बदलता नहीं चाहे हानि उठाना पड़े;
Psa 15:5 जो अपना रूपया ब्याज पर नहीं देता, और निर्दोष की हानि करने के लिये घूस नहीं लेता है। जो कोई ऐसी चाल चलता है वह कभी न डगमगाएगा।

एक साल में बाइबल:
  • अय्युब १७-१९
  • प्रेरितों १०:१-२३