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Wednesday, May 14, 2014

जीवन का जल


   एक व्यक्ति ने, जो पश्चिमी टेक्सस के एक खेती-किसानी करने वाले परिवार में बड़ा हुआ था, मुझे अपने खलिहान के निकट लगी एक जर्जर पवन-चक्की के बारे में बताया था। उस पवन-चक्की के चलने से ही पानी को उसके घर तक लाने का पंप चलता था, और वही मीलों दूर तक पानी का एकमात्र स्त्रोत थी। जब हवा तेज़ चल रही होती थी तो वह पवन-चक्की भलि-भांति चलती थी और अच्छे से पानी उपलब्ध कराती थी, परन्तु जब हवा धीमी होती थी तो जर्जर अवस्था के कारण पवन-चक्की घूम कर हवा के रुख के अनुकूल अपने आप नहीं हो पाती थी इसलिए नहीं चल पाती थी; तब उसे हाथ से घुमा कर ऐसी स्थिति में लाना पड़ता जहाँ से हवा द्वारा उसके पंखे चल सकें और पानी के पंप को चला सकें जिससे घर को पानी मिल सके। पानी मिलने के लिए पवन-चक्की का हवा के अनुकूल दिशा में होना अनिवार्य था।

   जब मैं दूर-दराज़ के इलाकों में कार्य कर रहे पस्टरों से मिलता हूँ, और उनकी सनस्याएं सुनता हूँ तो मुझे उस पवन-चक्की की याद आती है। बहुत से पास्टर ऐसे होते हैं जिन्हें लगता है कि वे बिलकुल अकेले और बेसहारा रह गए हैं - ऐसे देख-रेख करने वाले जिनकी अपनी देख-रेख करने वाला कोई नहीं है। परिणाम यह होता है कि अपनी निराश के कारण वे अपने चर्च के लोगों को जीवन का जल अर्थात परमेश्वर का वचन ठीक से नहीं देने पाते। उन्हें मैं उस पवन-चक्की के बारे में बताता हूँ, और समझाता हूँ कि उन्हें भी अपने आप को ऐसी स्थिति में लाना है, अर्थात प्रभु यीशु और उसके वचन की ओर उन्मुख होना है जिससे उनमें से होकर परमेश्वर का वचन लोगों तक पहुँच सके। जब वे परमेश्वर की ओर सही रीति से होंगे, तब परमेश्वर उन में होकर अपने जीवनदायक वचन को लोगों तक भी पहुँचा सकेगा।

   जो बात उन पास्टरों के लिए सही है, वही हम सब मसीही विश्वासियों के लिए भी उतनी ही सही है, क्योंकि प्रभु की सेवकाई हमारे अन्दर से निकल कर संसार के लोगों में प्रवाहित होती है। प्रभु यीशु ने कहा, "जो मुझ पर विश्वास करेगा, जैसा पवित्र शास्त्र में आया है उसके हृदय में से जीवन के जल की नदियां बह निकलेंगी" (यूहन्ना 7:38)। जब परमेश्वर हमारे अन्दर की गहराइयों से होकर बोलता है, तब ही हम दूसरों के जीवनों को छूने और प्रभावित करने पाते हैं। दूसरों को तरोताज़ा करते रहने के लिए हमें स्वयं भी उस जीवन के जल के स्त्रोत के साथ सही रीति से जुड़े रहना है। - डेविड रोपर


जब आप जीवन के संघर्षों में थकने लगें तो प्रभु यीशु को अपनी सामर्थ का स्त्रोत बना लीजिए।

यीशु ने उत्तर दिया, यदि तू परमेश्वर के वरदान को जानती, और यह भी जानती कि वह कौन है जो तुझ से कहता है; मुझे पानी पिला तो तू उस से मांगती, और वह तुझे जीवन का जल देता। - यूहन्ना 4:10

बाइबल पाठ: गलतियों 6:6-10
Galatians 6:6 जो वचन की शिक्षा पाता है, वह सब अच्छी वस्‍तुओं में सिखाने वाले को भागी करे। 
Galatians 6:7 धोखा न खाओ, परमेश्वर ठट्ठों में नहीं उड़ाया जाता, क्योंकि मनुष्य जो कुछ बोता है, वही काटेगा। 
Galatians 6:8 क्योंकि जो अपने शरीर के लिये बोता है, वह शरीर के द्वारा विनाश की कटनी काटेगा; और जो आत्मा के लिये बोता है, वह आत्मा के द्वारा अनन्त जीवन की कटनी काटेगा। 
Galatians 6:9 हम भले काम करने में हियाव न छोड़े, क्योंकि यदि हम ढीले न हों, तो ठीक समय पर कटनी काटेंगे। 
Galatians 6:10 इसलिये जहां तक अवसर मिले हम सब के साथ भलाई करें; विशेष कर के विश्वासी भाइयों के साथ।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 1-4