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Saturday, January 24, 2015

अनुसरण


   बच्चों के लिए आयोजित एक चर्च सभा में उनकी शिक्षिका ने परमेश्वर के वचन बाइबल में दिए गए परमेश्वर की दस आज्ञाओं में से प्रथम, "तू मुझे छोड़ दूसरों को ईश्वर कर के न मानना" (निर्गमन 20:3) के बारे में उन्हें बताया, और उन्हें कुछ तरीके भी बताए जिससे वे इस नियम का पालन कर सकें। शिक्षिका ने उन बच्चों को समझाया कि उनके जीवनों में परमेश्वर से बढ़कर और कुछ भी नहीं होना चाहिए - ना तो उनका खेल-कूद और विडियो-गेम्स, ना स्कूल का कार्य और ना ही उनके खान-पीन; तथा परमेश्वर को सर्वप्रथम रखने का अर्थ है प्रतिदिन उसके साथ समय बिताना, जो उससे प्रार्थना करने और उसके वचन बाइबल को पढ़ने तथा उसकी आज्ञाओं के पालन के द्वारा होता है, और ऐसा करने की प्राथमिकता में अन्य किसी भी बात से कोई हस्तक्षेप कभी नहीं होना चाहिए।

   बच्चों के उस समूह में से एक बड़ी बालिका ने इस संदर्भ में एक विचार प्रेरक प्रश्न पूछा - क्या मसीही विश्वास का जीवन केवल आज्ञाओं के पालन मात्र तक सीमित है या फिर परमेश्वर को मसीही विश्वासी के जीवन के प्रत्येक भाग में सम्मिलित होना चाहिए?

   कई बार हम परमेश्वर के वचन बाइबल को नियमों के सूची-पत्र के रूप में देखने तथा मानने की गलती कर लेते हैं। इसमें कोई संश्य नहीं है कि परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करना (यूहन्ना 14:21) और उसके साथ समय बिताना अति महत्वपूर्ण हैं, लेकिन ऐसा करना मनोभावना की बात है ना कि वैधानिक आवश्यकता-पूर्ति की - हमारे द्वारा अपने जीवनों में परमेश्वर को दी गई प्राथमिकता तथा उसके प्रति आज्ञाकारिता, परमेश्वर के प्रति हमारे प्रेम के कारण होनी चाहिए। प्रभु यीशु और स्वर्गीय परमेश्वर पिता के बीच एक गहरे प्रेम का संबंध था, और प्रभु यीशु सदा परमेश्वर पिता की इच्छापूर्ति, आज्ञाकारिता तथा उसके साथ प्रार्थना में समय बिताने को सर्वोपरि रखते थे। प्रभु यीशु के अनुयायी होने के कारण हम मसीही विश्वासियों को भी प्रभु यीशु के उदाहरण का अनुसरण करना है, उसके दिखाए-बताए मार्ग पर चलना है, "सो कोई यह कहता है, कि मैं उस में बना रहता हूं, उसे चाहिए कि आप भी वैसा ही चले जैसा वह चलता था" (1 यूहन्ना 2:6)।

   जब भी हमें जीवन की किसी परिस्थिति में मार्गदर्शन की या कुछ समझने की आवश्यकता पड़े तो हम प्रभु यीशु के जीवन को देख कर सीख सकते हैं - चाहे वह नम्र तथा दीन होना हो, विश्वास में दृढ़ तथा समर्पित होना हो, प्रेम दिखाने और निभाने के बारे में जानना हो, अपनी प्राथमिकताओं का निर्धारण करना हो, या अन्य कोई भी बात हो; हम प्रभु यीशु की ओर देखते हुए, उसके उदाहरण का अनुसरण करते हुए अपने मसीही विश्वास के जीवन में आगे बढ़ते रह सकते हैं। - ऐनी सेटास


प्रभु यीशु ने हमें उसका अनुसरण करने के लिए बुलाया है।

जिस के पास मेरी आज्ञा है, और वह उन्हें मानता है, वही मुझ से प्रेम रखता है, और जो मुझ से प्रेम रखता है, उस से मेरा पिता प्रेम रखेगा, और मैं उस से प्रेम रखूंगा, और अपने आप को उस पर प्रगट करूंगा। - यूहन्ना 14:21

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 2:1-11
1 John 2:1 हे मेरे बालकों, मैं ये बातें तुम्हें इसलिये लिखता हूं, कि तुम पाप न करो; और यदि कोई पाप करे, तो पिता के पास हमारा एक सहायक है, अर्थात धार्मिक यीशु मसीह। 
1 John 2:2 और वही हमारे पापों का प्रायश्‍चित्त है: और केवल हमारे ही नहीं, वरन सारे जगत के पापों का भी। 
1 John 2:3 यदि हम उस की आज्ञाओं को मानेंगे, तो इस से हम जान लेंगे कि हम उसे जान गए हैं। 
1 John 2:4 जो कोई यह कहता है, कि मैं उसे जान गया हूं, और उस की आज्ञाओं को नहीं मानता, वह झूठा है; और उस में सत्य नहीं। 
1 John 2:5 पर जो कोई उसके वचन पर चले, उस में सचमुच परमेश्वर का प्रेम सिद्ध हुआ है: हमें इसी से मालूम होता है, कि हम उस में हैं। 
1 John 2:6 सो कोई यह कहता है, कि मैं उस में बना रहता हूं, उसे चाहिए कि आप भी वैसा ही चले जैसा वह चलता था। 
1 John 2:7 हे प्रियों, मैं तुम्हें कोई नई आज्ञा नहीं लिखता, पर वही पुरानी आज्ञा जो आरम्भ से तुम्हें मिली है; यह पुरानी आज्ञा वह वचन है, जिसे तुम ने सुना है। 
1 John 2:8 फिर मैं तुम्हें नई आज्ञा लिखता हूं; और यह तो उस में और तुम में सच्ची ठहरती है; क्योंकि अन्धकार मिटता जाता है और सत्य की ज्योति अभी चमकने लगी है। 
1 John 2:9 जो कोई यह कहता है, कि मैं ज्योति में हूं; और अपने भाई से बैर रखता है, वह अब तक अन्धकार ही में है। 
1 John 2:10 जो कोई अपने भाई से प्रेम रखता है, वह ज्योति में रहता है, और ठोकर नहीं खा सकता। 
1 John 2:11 पर जो कोई अपने भाई से बैर रखता है, वह अन्धकार में है, और अन्धकार में चलता है; और नहीं जानता, कि कहां जाता है, क्योंकि अन्धकार ने उस की आंखे अन्‍धी कर दी हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 9-11
  • मत्ती 15:21-39