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Monday, February 2, 2015

नई आँखें



   मैं एक कॉलेज छात्रा से मिला जिसने हाल ही में प्रभु यीशु में विश्वास किया था और उसे अपना उद्धारकर्ता ग्रहण किया था। उस छात्रा ने अपने परिवर्तित जीवन के नए अनुभव को कुछ ऐसे व्यक्त किया: "जब मैंने मसीह यीशु पर विश्वास किया और उद्धार पाया तो मुझे ऐसा लगा कि जैसे स्वर्ग से परमेश्वर ने मेरी ओर हाथ बढ़ाया और मुझे नई आँखें लगा कर दे दीं। अब मैं आत्मिक सत्यों को देख-समझ सकती थी।"

   उस छात्रा का समस्त संसार के उद्धारकर्ता के साथ हुई इस भेंट तथा उसके नए आत्मिक दृष्टिकोण के बारे में सुनना हृदयस्पर्शी था। लेकिन उसका यह अनुभव एकमात्र नहीं है; उन सब को जो मसीह यीशु में विश्वास लाते तथा उद्धार पाते हैं, एक नया आत्मिक दृष्टिकोण प्राप्त होता है। लेकिन कभी कभी एक कोहरा सा हमारे जीवनों में आ जाता है और हमारे इस दृष्टिकोण को धुँधला कर देता है। ऐसा तब होता है जब हम प्रभु यीशु के साथ अपने संबंध के प्रति लापरवाह हो जाते हैं, उसे नज़रन्दाज़ करने लगते हैं।

   प्रेरित पौलुस ने मसीही विश्वासियों की आत्मिक दृष्टि के लिए बड़ी तीव्र लालसा के साथ प्रार्थना करी, जो दिखाता है कि हमारे लिए कितना महत्वपूर्ण है कि जो कुछ परमेश्वर ने हमारे लिए मसीह यीशु में होकर किया है उसके प्रति हम सचेत रहें, उसके महत्व को समझें। पौलुस ने अपनी प्रार्थना में कहा, "और तुम्हारे मन की आंखें ज्योतिर्मय हों कि तुम जान लो कि उसके बुलाने से कैसी आशा होती है, और पवित्र लोगों में उस की मीरास की महिमा का धन कैसा है" (इफिसियों 1:18)।

   प्रत्येक मसीही विश्वासी को नई आँखें दी गईं हैं जिससे वे आत्मिक सत्यों को देख तथा पहचान सकें। जब हम अपने मनों को परमेश्वर के प्रति लगाते हैं, वह हमें हमारी आत्मिक आँखों से वह सब देखने की सामर्थ देता है जो कुछ उसने मसीह यीशु में होकर हमें दिया है। - डेनिस फिशर


कभी मैं अन्धा था, लेकिन अब देखता हूँ!

कि तू उन की आंखे खोले, कि वे अंधकार से ज्योति की ओर, और शैतान के अधिकार से परमेश्वर की ओर फिरें; कि पापों की क्षमा, और उन लोगों के साथ जो मुझ पर विश्वास करने से पवित्र किए गए हैं, मीरास पाएं। - प्रेरितों 26:18

बाइबल पाठ: इफिसियों 1:15-21
Ephesians 1:15 इस कारण, मैं भी उस विश्वास का समाचार सुनकर जो तुम लोगों में प्रभु यीशु पर है और सब पवित्र लोगों पर प्रगट है। 
Ephesians 1:16 तुम्हारे लिये धन्यवाद करना नहीं छोड़ता, और अपनी प्रार्थनाओं में तुम्हें स्मरण किया करता हूं। 
Ephesians 1:17 कि हमारे प्रभु यीशु मसीह का परमेश्वर जो महिमा का पिता है, तुम्हें अपनी पहचान में, ज्ञान और प्रकाश का आत्मा दे। 
Ephesians 1:18 और तुम्हारे मन की आंखें ज्योतिर्मय हों कि तुम जान लो कि उसके बुलाने से कैसी आशा होती है, और पवित्र लोगों में उस की मीरास की महिमा का धन कैसा है। 
Ephesians 1:19 और उस की सामर्थ हमारी ओर जो विश्वास करते हैं, कितनी महान है, उस की शक्ति के प्रभाव के उस कार्य के अनुसार। 
Ephesians 1:20 जो उसने मसीह के विषय में किया, कि उसको मरे हुओं में से जिलाकर स्‍वर्गीय स्थानों में अपनी दाहिनी ओर। 
Ephesians 1:21 सब प्रकार की प्रधानता, और अधिकार, और सामर्थ, और प्रभुता के, और हर एक नाम के ऊपर, जो न केवल इस लोक में, पर आने वाले लोक में भी लिया जाएगा, बैठाया।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 29-30
  • मत्ती 21:23-46